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Chapter 37

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अंतर्द्वंद्व जावेद अमर जॉन के पिछले उपन्यास ‘मास्टरमाइंड' का सीक्वल है। मास्टरमाइंड की कहानी अपने आप में सम्पूर्ण अवश्य थी पर उसकी विषय-वस्तु जो जटिलता लिये थी उसे न्याय देने के लिये एक वृहद कहानी की आवश्यकता थी और प्रस्तुत उपन्यास उसी आवश्यकता को पूर्ण करने हेतु लिखा गया है। writer: शुभानंद Author : Shubhanand Voiceover Artist : RJ Hemant
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वर्तमान समय हिमाचल प्रदेश जावेद कार ड्राइव कर रहा था । जॉन पीछे बैठक हो रहा था । अचानक जावेद का फोन बजा । उसने ब्लूटूथ पर कॉल रिसीव किया । बोलो मार कहाँ तक पहुँचे तुम लोग? अभी तो मिल रहे हैं वो सब ठीक हम पर स्नाइपर्स अटैक हुआ था । वोट जावेद चौका । अमर ने उसे पूरी बात बताई । जॉन की नींद भी खुल गई और वो उनका वार्तालाप सुनने लगा । स्नाइपर मारा कैसे? जावेद ने पूछा, कोई बाहरी चोट का निशान तो नहीं दिख रहा था? खून कहीं भी नहीं था । बहस आंखें मैच में चाहते हुए जॉन बोला खून बहाए बिना हत्या करने का आसान तरीका पर ऐसा कौन? कोई भी हो सकता है, ऐसा कहा । उसके शिष्य जावेद बोला जहर औरतों का हथियार हैं । जॉन बोला कम ऑन सौ में ऐसा नहीं कर सकती । अमर बोला मैं तो बस एक बात बोल रहा था । लोग अमर व्यग्र भाव के साथ बोला सौम्या का ही फोन आ रहा है । चलो मैं कॉल करता हूँ । ठीक है सावधान रहना । जावेद बोला, कॉल डिस्कनेक्ट होते ही जॉन बोला ओसाका पर हमला कौन करा सकता है । शायद सुजुकी या निक हमारी उनसे बात हुई थी । सुजुकी से तो ऐसी उम्मीद नहीं है । नहीं हो सकता था, पर तब तक जब तक उसे ओसाका से था । फिलहाल तो ओसाका देश से भागने की फिराक में हैं । तो इस से निक को क्या नुकसान हो सकता है? जावेद सोचते हुए बोला मिशन अंतर्द्वंद वाले हो सकते हैं, हो सकता है वो अभी भी नहीं को प्रोटेक्ट करेंगे । फिर वही बात अब तो ट्रेन में नहीं है, पर बदले की भावना तो खत्म नहीं हुई होगी ना । तो याने अमर ने उस हमलावर की फोटो भेजी थी, जिसमें उस पर लवेश के उसमें हमला किया था । हाँ वो नहीं था क्या बात कर रहे हो । यकीनन एक बार फिर फोटो देखो । जॉन ने अपने मोबाइल की स्क्रीन सजीव की और उससे अमर द्वारा भेजा निकल फोटो देखा । शायद तुम थी की कह रहे हो । इसकी शकील मेकप से थोडी बदली लग रही है । अगर यही निक है तो सोचने वाली बात है कि इसमें सौम्या पर हमला क्यों किया? जावेद ने उसकी तरफ एक नजर डालकर पूछा जावेद ये तो सागर से नफरत करता है इसलिए उसकी शिष्य से भी इसका मतलब सौम्या भी ओसाका की तरह खतरनाक हो सकती है और कहते हुए जावेद के चेहरे पर अचरज भरे भाव आ गए नहीं वहाँ छिपा था और सौम्या अपनी मर्जी से उस तरफ गई थी । अमर का कहना था की उसे वहाँ बहला फुसलाकर बुलाया गया था । हो सकता है वह सच ना हो । सौम्या सोचे समझे प्लान के हिसाब से ओसाका के कहने पर निक्को मारने गए हो । जॉन ने आंखे फैलाकर जावेद की तरफ देखा कहाँ हो तुम लोग? अमर ने पूछा मैं गोश्त अमर तुम यकीन नहीं करोगे । वॅार तो बस में ही किसी नॉर्मल पैसेंजर की तरह चढ गया था । तो फिर वो चला कि भरी मुस्कान के साथ हमारी बगल की सीट पर यहाँ बैठा अच्छा हाँ वो हमें ऐसे देख रहा था जैसे कसाई मारने से पहले बकरी को देखता है । फिर मैंने उस चीज का इस्तेमाल किया जो कभी मैंने धीरे से सीखी थी । हो गया सेल्फडिफेंस कान के नीचे और कमाल है । बहुत सही किया पर अभी तुम लोग को कहाँ? गुरु जी और उनके शिष्य ने तो सिंगापुर की फ्लाइट पकडी हूँ कि अच्छा हुआ । अमर ने बोला पर मन में कुछ और सोचा हूँ लाइट तो क्या एयरपोर्ट में घुसते ही उन्हें अरेस्ट कर लिया होगा? हाँ मुझे तो लग रहा था आज गए हम लोग पर तुम्हारी ब्रिलियंट थिंकिंग में हमें यहाँ भी बचा लिया । कमाल तो तुमने क्या है? बताओ तुम कहाँ हूँ? कुछ पुरानी यादें ताजा कर रही थी । दिल्ली आई तो सोचा ऍम तुम्हारे लिए बडी खुशखबरी है । तुम्हें क्लाॅज देने वाली हूँ । सच में मुझे क्या खुशखबरी मिलेगी एक बार तुम्हारी सेफ्टी का इंतजाम कर दूँ । फिर मुझे अपना वादा निभाने अपने साथियों के पास जाना है । उस की कोई जरूरत नहीं पडेगी । मैं खुद हैरान हूँ पर मेरे पास जो चीज है उससे इंटरपोल यकीन कर लेगी की धीरज ने की एक आतंकवादी था । जैसा क्या मुझे हो गया है मेरे मन में अब उससे बिछडने का कोई काम नहीं है । शायद सब अच्छे के लिए ही होता है । अच्छा हुआ जो तुम मेरी जिंदगी में आए अब चल दिया हूँ । कुछ और बात भी है जो मैं फोन पर नहीं करना चाहती । अमन हैरान था । लगता है वाकई बहुत बडा सुराग हाथ में आ गया है वसंत विहार में मकान नंबर जे नौ सौ उनतालीस चल दिया हूँ मैं । यहाँ चोरी छिपे अंदर तो आ गई बॉर्डर है कोई आना जाए दस मिनट में पहुंचा हूँ किस कर अमर ने फोन काट दिया

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अंतर्द्वंद्व जावेद अमर जॉन के पिछले उपन्यास ‘मास्टरमाइंड' का सीक्वल है। मास्टरमाइंड की कहानी अपने आप में सम्पूर्ण अवश्य थी पर उसकी विषय-वस्तु जो जटिलता लिये थी उसे न्याय देने के लिये एक वृहद कहानी की आवश्यकता थी और प्रस्तुत उपन्यास उसी आवश्यकता को पूर्ण करने हेतु लिखा गया है। writer: शुभानंद Author : Shubhanand Voiceover Artist : RJ Hemant
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