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32. Ram Ne Khaye Shabri Ke Ber

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श्री राम Producer : Saransh Studios Author : गुरुदत्त Voiceover Artist : Ramesh Mudgal
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ऍम जो जो राम लक्ष्मण दक्षिण की ओर चलते हैं उन्हें वन काम और नदी नाले तथा मैदान सुहावने दिखाई देने लगी । भैया वो लक्ष्मण ने किस किन्दा क्षेत्र के शोभा को देखकर कह दिया । यहाँ वन नदियां, घाटियां और संपूर्ण पर्वतीय क्षेत्र अत्यंत सुन्दर है । लक्ष्मण, देश, भूमि, पर्वत, नदी, नाले ये सब जीव पदार्थ ये स्वतः तो सुख देने वाले होते हैं और नहीं दुःख कर देश में रहने वाले लोग ही वहाँ के निर्जीव पदार्थों को सुहावना, सुखकारक और सुगंधी में बना देते हैं । परंतु जब मन अशांत हो तो उस समय कोई अनुभूति नहीं होती और इस समय मेरा मन अशांत जब पर्वत की चोटी पर पहुंचे तो पर्वत पार का मनोरम दृश्य तब उनको दृष्टिकोष हो । उस पर्वत के पर पंपापुर नगर था । यह पंपापुर सरोवर के किनारे बसा हुआ था । सागर के अनुपात में तो ये एक साल ही था परन्तु सामान्य तल के अनुपात नहीं है । सरोवर कहा जा सकता हूँ ऍम अति मनोरम था । दोनों भाई सरोवर की शोभा देख मोहित हो गए । वे कितने ही काल तक सरोवर की शोभा उसमें किले कमल और इस नगर की सौरभ युग वायु में मोहित से खडे रहेंगे । राम के मुख से एक का एक निकल गया । जल पर तैरती इन कमल कांंवडियों को देख मुझे कमाल ओसला सीता की याद आने लगी है । ऍम नहीं इस समय मैं क्या करती हूँ इस कल्पना से मेरी हर देश विदेश हो रहा है । अभी लक्ष्मण की दृष्टि दूर सुरक्षों के जोर मूड में से उठते धुएं पर पडी लहर दुल्हे को देख चौंक पडा और उसने राम का ध्यान उस और कर कहा वहाँ किसी मनुष्य का वास प्रतीत होता है । हमें वहाँ चलना चाहिए । जानने भी दोनों देखा तो अपने मन की व्यथा को दबा दिया । दोनों भाई सुरक्षों के उस झुरमुट में जा पहुंचे जहां से दोहा उठता दिखाई देता था । वहाँ आम, जामून और बेर के घने रक्षा लगेंगे । उन के बीचों बीच एक कुटिया बनी थी और उस कुटिया के बाहर सुरक्षों की छाया में ताप स्थान पर आसन जमाए एक गद्दा बैठी थी तो है उस समय ध्यान अवस्थित थी दोनों भाई को श्रवणीय असम में इस वजह सुनी तपस्वनी को ध्यान में मग्न दें, चकित रहेंगे । पिछले कई दिन के भयानक और नी दस अनुभवों के उपरांत वर्तमान सुरंग दस्य अत्यंत सूखा दौड चिपको फिर करने वाला था तो तपस्विनी के सामने यज्ञ की अग्नि अभी भी चल रही थी । उसमें से तो गन्दी दो वहाँ के पूर्ण वायुमंडल को सुरभित कर रहा था । एक का एक तपस्वनी ने आंखे खोली और दोनों भाइयों को कुछ अंतर पर सामने खडा देखा तो हाथ के संकेत से समीर बुला सामने भूमि पर बैठने के लिए कहा । दोनों भाईयों ने हाथ जोड परिणाम क्या और सामने बैठ गए । तपस्वनी ने आशीर्वाद सूचक हाथ उठाया और पूछ लिया तुम राम और लक्ष्मण होऊं, आम आता जी । लक्ष्मण ने उत्तर में कहा हूँ रह कहने ही वाला था कि वे अयोध्या नरेश महाराज दस के पुत्र है कि उस श्रद्धा ने कहा तुम्हारा पूरन इतिहास है, विख्यात है । यहाँ के लोग यह भी जानते हैं कि बडे भाई की पत्नी सीता का अपहरण हो गया । यहाँ अनुमान लगाया जा रहा है कि अपहरण करने वाला लंकाधिपति रावण है । देखो राम मैं एक माँ से तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही हूँ परन्तु तुम भटकते हुए अपना समय व्यर्थ गंवा रहे थे । भगवान की कृपा से अब तो मैं इस और आने की प्रेरणा मिली । मैं समझती हूँ यहाँ तुम्हारे कल्याण के साधन स्थित है । मेरा नाम सब रही है । मैं आदिवासी दिलों में उत्पन्न एक महसी की शिष्या हूँ और उनसे ही मैंने योग सामना का मार्ग पाया । अभी इस सरोवर में स्नान करो । इस समय रक्षियों से उतरे इंताज, एबे, रोका, अल्पाहार स्वीकार करो और तब जैसा मैं कहती हूँ वैसा करूँ । मैं समझती हूँ कि तुम्हारा कल्याण होगा । तंत्र राम तथा लक्ष्मण ने पंपापुर के निर्मल जल में स्नान किया है । मान के उपरांत सबली ने उन्हें सलाहार कर रहा हूँ । जब दोनों भाई फलाहार कर रहे थे तो सबरी उनके सम्मुख बैठ बताने लगी । यहाँ के निवासी अत्यंत सीधे हैं । वे पर्वतों की कंदराओं या पेडों पर मचान बनाकर वानरो के समान रहते हैं । अतः दूसरे प्रदेशों के लोग इन्हें वानर ही रहते हैं । इनका राजा एक बलशाली व्यक्ति है जिसका नाम वाली है रह राज्यकार्य में कुशल है और वैसे ईश्वर, भक्त और रन तो उसकी बुद्धि पर उसका मित्र रावण छाया हुआ है । उस ने अपने राज्य में से राक्षसों को उत्तर की ओर बढने का मार्ग दे रखा है । इस सुविधा के प्रति का में रावण ने इस राज्य में कभी कोई उत्पात नहीं मचाया । इस प्रकार शांति प्राप्त कर मैं राज्य का सूप प्रबंध करता है, परंतु इस प्रकार ऍम ही विकृत राक्षसों की क्रूरता मैं धर्म का प्रचारक बना हुआ है । मैं समझता है धर्म बलशालियों द्वारा निर्मित विधि विधान का नाम है । हालांकि उसके राज्य में स्वीट प्रबंध है । यह विचारधारा से वह रावण की अधर्म व्यवस्था का पोशाक बंद कर कुछ कुछ अनु कारण भी कर रहा है । परन्तु दोनों में अंतर यह है कि रावण की महत्वाकांक्षा बहुत ऊंची है और वह देव लोग में शिक्षा प्राप्त होने के कारण महा अभिमानी भी है । इसके विपरीत बाली रावण से चतुराई और बाल में काम न होने पर भी अभिमानी नहीं और बहुत मिस्रवासी है । इस पर भी दोनों का जीवन पर एक ही है देखो राम रावण से सीता को छोडा सकना तुम्हारे अकेले के मन की बात नहीं, तुम्हारे बात विष्णु भगवान का सुदर्शन तक नहीं । इस कारण जो कुछ भगवान विष्णु ने आज से कई वर्ष पूर्व अकेले किया था, तुम कर नहीं सकते । सुबह सेंसेक्स केन्द्र के पास है परन्तु उसे विश्वास नहीं कि तुम उस चक्र का प्रयोग भी कर सकते हो जो उसका प्रयोग नहीं जानता, अपने को भी उसमें भर शुरू कर सकता है । यदि तुम सीता को छुडाना चाहते हो तो रावण और उसकी सेना को परास्कर समाप्त करना होगा । इन राक्षसों ने कई कई विवाह किए हैं और कितने ही अप राहत नारिया इनके पास रहने को मजबूर हैं । इनके पुत्र पुत्रियों की संख्या अनगिनत होती है और सभी नरभक्षी हो रहे हैं । जब तक तुम एक पीडी समाप्त करोगे तब तक ये कई गुना अधिक पैदा हो जाएंगे । अतः चीता को छुडाने के लिए रावण को समाप्त करने की आवश्यकता है और रावण की रक्षा के लिए कोटि कोटि राक्षस, अस्त्र शस्त्रों से तो सज्जित कटिबद्ध उपस् थित है तो मैं किसी भी राज्य की सहायता लेनी पडेगी । यदि तुम भारत को संदेश भेजते हो कि वह तुम्हारी सहायता के लिए चतुरंगिनी सेना लेकर आए तो उसमें कई महान तो लगेंगे ही साथ ही बाली संधि के अनुसार रावण की सहायता के लिए तैयार हो जाएगा । तब सीता को सुनने के लिए दो राज्यों के विरुद्ध युद्ध कर विजय प्राप्त करनी असंभव नहीं तो कठिन अवश्य होंगे । विशेष रूप से अपनी राजधानी से इतने दूर युद्ध करना अति कठिन है । यहाँ बाली का भाई सुग्रीव देश से निर्वासित वन में सपा हुआ रहता है । उसके पास दस साथी उसके साथ हैं । धर्मात्मा व्यक्ति है, था है और उसके सभी साथी विन्ध्याचल में देशी आश्रमों में शिक्षा प्राप्त हैं । उनके पास सुबह जाना चाहिए । तुम सुग्रीम की सहायता करो और मैं तुम्हारी सहायता करेगा । जब राम तथा लक्ष्मण का तीसरी सत्कार हो चुका दो । शबरी ने कहा मैं अब पती हो गई हूँ और यह शरीर अब वो प्रतीत होता है । मैं तो एक महत्वपूर्ण ही यह शरीर त्यागा देने वाली थी परंतु मेरे गुरुवर महर्षि ने अपने प्राण त्यागने से पहले मुझे बताया था कि मैं मरने से पूर्व किसी महान आत्मा के दर्शन करूंगी और जब मुझे क्या हुआ की आप इस फोन आ रहे हो तो मैं इसी पुण्य बेला की प्रतीक्षा में बैठी थी । मैंने आपको यहाँ की परिस्थिति से अवगत करा दिया है और उससे लाभ उठाने का मार्ग भी बता दिया है । परमात्मा आपकी सहायता करेगा । अब मेरा इस लोग का कार्य समाप्त हुआ और मैं अनंत यात्रा को जा रही हूँ । इतना है उसने दोनों भाइयों को पुणा शुरुआत दिया और अपने अंतिम संस्कार के लिए दोनों भाइयों को अपनी जीता जो उस ने बहुत पहले ही तैयार कर रखी थी, दिखा दी । तदुपरान्त तपस्विनी ने प्रणायाम द्वारा स्वास्थ्य खींचा और प्राण त्याग दिए । शबरी की मृत्यु के बाद श्री राम ने चिता की अग्नि को प्रज्वलित किया और उसमें उनकी पार्थिव देगा अंतिम संस्कार करती है । रामलक्ष्मण समझ गए थे । यह महान आत्मा मोक्ष अवस्था को प्राप्त कर गई है । शबरी के दाहसंस्कार के उपरांत वे दोनों सुग्रीव के छूटने के स्थान की ओर चल दिए । जहाँ सब्जी ने जीता विमोचन कार्य की कठिनाई बताई थी । वहाँ उसने कार्य को सम्पन्न करने का उपाय भी बताया था । अब राम विलम तो ग्रीव से मिलकर इस कार्य को संपन्न करना चाहते थे ।

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श्री राम Producer : Saransh Studios Author : गुरुदत्त Voiceover Artist : Ramesh Mudgal
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