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chapter 27 in Hindi

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AuthorNitin Sharma
उल्लास से भरे सुहाने मौसम में कांटे की चुभन ने नमिता को उसका बीता हुआ कल याद दिला दिया , और नमिता अपने जीवन के बीते हुए पल में गोता लगाने लगी writer: ओमेश्वरी 'नूतन' Voiceover Artist : RJ Saloni Author : Omeshwari 'Nootan'
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चॅू आज पूजा के कमरे में धूप गूगल इतना जितना अधिक मात्रा में उपयोग किया गया है कि पूरा घर सुगन से महक उठा । माँ के खुश होने से घर की दीवार भी चाहने लगी थी । पूजा के बाद जैसे ही हॉल में प्रवेश किया तो माने देखा की हमेशा की तरह नींबू शहद के साथ गरम पानी लेकर पूनम खडे थे । अरे ये तो क्या करें पूनम रोज की तरह के लिए ये क्लास तो मुझे तो और यहाँ बैठो सोफे पर माने पुलम का हाथ पकडकर बिठाते हुए कहा मैं ये सब नहीं एक शब्द भी नहीं हमेशा मेरी बात सुनी जाती है तो आज भी नही का होंगी और तुम सुनाओ की समझी तू? जी हां पूनम बेहतर से एकदम घबराई हुई थी कि होना हो सासु माँ ने हमारा झूठ पकड लिया है । तुम तो घबरा रही हूँ । तुम तो मेरे घर की लक्ष्मी हो । पूनम ऊपर से घर को रोशन करने वाली हूँ तो आज से तो कोई काम नहीं करोगे । सब कामों के लिए घर में नौकर हैं फिर तुम्हें काम करने की जरूरत क्या है? लेकिन हाँ ये सब तो मेरे दिनचर्या है । अब ये सब भूल जाओ और मुझे जमा कर तो बेटा मुझसे गलती हो गई । मुझे लगा कि तुम्हें माँ बनने की क्षमता नहीं है । इसलिए तो मैं परेशान करती रही कि मुझे तंग आकर तो घर से चले जाओ या आत्महत्या कर लो ताकि मैं किशोर की दूसरी शादी कर सकूँ और मुझे दादी बनने का सुख मिल सके । पर तुमने मुझे गलत साबित कर दिया । कल रात किशोर ने बताया की तो माँ बनने वाली हूँ । तब से मैं ये सोचती हूँ कि मुझे तुम्हें परेशान करने का इतना बडा जो पाप हुआ है उसका प्रायश्चित कैसे करूँ? हो सके तो मुझे क्षमा कर दो । बेटी पूनम के साथ ने हाथ जोडकर कहा या क्या कह रही है? हाँ मेरे सामने हाथ जोडकर मुझे अपराधी मत बनाइए । अपनी जो भी किया अपने बेटे और मेरे पति की भलाई के लिए क्या जो उचित लगा वह क्या तुम सचमुच बहुत अच्छी ओप्पो नाम । इसलिए किशोर तुम से इतना प्यार करता है ये तो आपका बडप्पन । एमा कहते हुए पूनम ने हाथ जोड लिए तो यही बैठो पूनम मैं तुम्हारे लिए ताजा जूस लेकर आती हूँ । तुम खाने पीने में वैसे भी लापरवाह हो जबकि इस समय खान पान का विशेष ध्यान रखना होता है । पूनम को साथ सुमा किस बदले हुए व्यवहार से ज्यादा वो दिल जो पहले पहले इस घर में बहुत बन कराई थी । उन्होंने कहा था कि अब तक मेरे सिर्फ दो बेटे ही थे पर अब तुम्हारे आने से बेटी की कमी पूरी हो गई है । पूनम बेटियों को तो आखिर विदा होकर मासिक दूर जाना ही पडता है । उनको मैंने बेटी तो मान लिया पर विदा नहीं कर होंगे आपको नाम मेरे सीने से लिपट जा । बेटी और हम हमेशा इसी तरह एक दूसरे के होकर रहते हुए दुनिया के सामने उदाहरण प्रस्तुत करेंगे की सास बहु को ऐसे रहना चाहिए जिस से घर में सुख और समृद्धि बनी रहे और फिर विवाह के दो साल से बेटी का स्थान बहुत ने ले लिया । प्रेम और एकता का उदाहरण बनने की बात कहने वाली माँ बात बात पर गलती निकालने वाली सासु माँ काम बन गई । पता ही नहीं चला बांझपन किसानों के साथ स्वर्गवासी मा और बीमार पिता को कोसते हुए जब ये कहा जाता कि ये सब तेरे पूर्व जन्म के पास एवं हमारे माता पिता के कुकर्मों का प्रतिफल है जिसके कारण मेरे वंश की बढोतरी नहीं हो रही है और हमारे पापों का बोझ मेरा बेटा धो रहा है । ये सब बातें आ जाते ही पूनम के रोंगटे खडे हो गए । क्या हुआ उन तुम बेचैन लग रही हो जूझ देती हुई माने आगे कहा लो बेटा जूस पी लो, अच्छा लगेगा फिर डॉक्टर के पास चलते हैं । नहीं, अब परेशान मत हुई है । मैं ठीक हूँ । बस थोडी सी थकावट महसूस हो रही है । उन्होंने खुद को संभालते हुए कहा इस समय में ऐसा होता ही है । ऐसा करो । तुम जूस पीकर थोडी देर आराम करलो भी के माजे । मैं दूसरी ऊपर जाकर ही पी लेती हूँ । कहते हुए फोन अम् अपने कमरे की ओर पड गई । फॅालो इस की क्या जरूरत है दीदी आप बेकार में तकलीफ कर रही है । जरूरत है ना मेरा । देखो तुम कितनी कमजोर हो गई हूँ । नहीं दीदी, अभी कुछ खाने पीने का मन नहीं हो रहा है । ऐसे कैसे चलेगा नमिता जीने के लिए खाना तो जरूरी होता है । अशोक ने प्रवेश करते हुए कहा तो ठीक समय पर आए हो शोक अभी जूस तुम पिलाओगे नमिता को उन्होंने कहा बीजेपी थी मैं भी लेती हूँ क्या कर नमिता ने जो उसका क्लास उनसे ले लिया । अरे वाह नमिता तुमसे सिर्फ प्यार ही नहीं करती बल्कि डरती भी है । पूनम ने कहा नमिता का तो पता नहीं भाभी लेकिन मुझे तो डर लगता है । मेरे हिसाब से जितना ज्यादा प्यार उतना ही ज्यादा दर । अशोक ने कहा प्यार में डर मैं समझी नहीं । नमिता ने कहा अपने प्यार के रुकने का डर खोने का डर कहीं किसी बात पर उसका दिल ना दुखे । इस बात का डर और दुनिया दारी की बातों से उसके मन को कोई ठेस न पहुंचे । फिर तो प्रेम देखने का मेरा नजरिया तुमसे अलग है । अशोक नमिता ने कहा कैसे? अशोक ने पूछा मुझे लगता है कि प्रेम भयमुक्त होता है । हाँ, प्रेम में पानी की खुशी जरूर हो सकती है, परंतु सच्चा प्रेम तो पानी होने की बात पर विचार ही नहीं करता है । क्योंकि प्रेम तो सिर्फ प्रेम होता है जो कभी भी किसी भी परिस्थिति में कमियाँ ज्यादा नहीं होता है । प्रेम तो जीत हार जैसे तुलनात्मक शब्दों से कोसों दूर वो खूबसूरत अहसास है जिसे जी कर ही समझा जा सकता है । एकदम सही बात कही है नमिता ने । मैं उसकी बातों से पूरी तरह से सहमत हूँ । उन्होंने कहा भावी आप भी इस दर्शनशास्त्र की छात्रा का साथ दे रही है । अशोक नमिता पर कृषि निगाहें डालते हुए कहा, मैंने तो सिर्फ दर्शनशास्त्र को पढाई अशोक दीदी तो उसकी साक्षात मूरत है । नमिता ने कहा नमिता पूनम जैसे उसे आगे और कुछ कहने के लिए कह रही हो क्या बात है भावी? मुझे ऐसा लग रहा कि आप नमिता को कुछ कहने से रोकना जा रही है । नहीं तो तुम्हारे रहते भला किसकी हिम्मत होगी कि नमिता को कोई कुछ भी कहने से रोक सकें । पुलम में बात की दिशा मोडने की कोशिश की । आप दोनों बहनों ने बडी चालाकी से दूसरे को अपनी बात कह दी थी और मेरी समझ में कुछ आया भी नहीं । पर मैं बहुत खुश है भाभी की आपको बरसो बाद इस तरह हस्ते मुस्कुराते देख रहा हूँ और इसका श्रेय तो नहीं हो जाता है । अशोक पूनम ने आगे कहा, आज ऐसा लग रहा कि दुनिया की सारी खुशियों को मेरे घर का रास्ता मिल गया है । आप सच करे भी । आज सुबह से ही हमारे घर का माहौल ही बदला हुआ है । पर इसका श्री मुझे नहीं बल्कि आपकी बहन की दिलेरी और हिम्मत हो जाता है । विषम परिस्थितियों में नमिता ने खुद का बलिदान देकर भी इस घर के चिराग को बुझने नहीं देने का काम किया है । तुम सही कह रहे हो । आज देवी को उनका खोया हुआ सम्मान वापस मिला है । इस खुशी के मौके पर क्यों ना हम पिछली सब बातों को भूलते । नमिता ने कहा नमिता ठीक एरिया शोक मैं नीचे जाकर खाने की तैयारी को देखती हूँ । और हाँ तो ममता को ज्यादातर मत करना कहकर मुस्कुराते हुए चली गई । मुझे तो उसे एक बात पूछनी है, नाम था पूनम के जाते ही अशोक ने कहा सुना नहीं दीदी ने तो मैं क्या चेतावनी दी है? नमिता ने कहा मैं और तुम्हें तंग करूंगा । नाम था उन को गंभीर हो गए । मैं तो मजाक कर रहे थे । खडे हुए अशोक का हाथ पकडकर बिठाते हुए नमिता ने आगे कहा, कहूं की सुविधा में हो । मैंने कुछ समय पहले भी नोटिस किया था कि तुम कुछ कहना चाहती थी और भावी ने इशारों से तो मैं कहने नहीं दिया था और आज भी ऐसी तो कोई बात नहीं है । तो फिर मुझे निगाहें मिलाकर बात करो ना । में था नजर चुरा क्यों रही हो? अशोक ने कहा दीदी ने इतने दिनों तक दुख सहकर भी अब तक उजागर नहीं किया । उस बात को आज सब कुछ ठीक हो जाने के बाद कहना क्या उचित रहेगा । शोक नहीं जमेगा हूँ । मुझ पर कोई प्रश्न थोडे लो और अच्छा ठीक है । अशोक मैं बता दूंगी पर तुम परेशान मत हो पर मैं कैसे कहूं? समझ नहीं पा रही हूँ दीदी को अपने प्यार की मर्यादा के लिए आजीवन अपमानित होते रहना मंजूर था उस बात को मैं तुम्हें अभी अभी तो तुमने प्रेम को किसी भी सीमा में ना बांते हुए सक्षम बताया है ना मेरा फिर अपने ही प्यार से कुछ भी कहने में इतनी बेचैनी हो । क्योंकि जो बात तुम पूछ रहे हो उसका संबंध हमारे प्रेम से नहीं बल्कि दीदी के प्यार से हैं । नमिता ने कहा हाँ जी का क्या मतलब? किशोर भैया हाँ अशोक क्या किया है किशोर भैया ने? अशोक ने आश्चर्य से पूछा । नहीं जीजाजी ने कुछ नहीं किया । वो बिचारे तो कुदरत के उस शहर से खुद परेशान है । देखो नमिता अब मेरे धीरज का बांध टूट रहा है । मुझे साथ साथ बताओ की क्या बात है? दीदी के निःसंतान होने का कारण देरी नहीं बल्कि जीजा जी है । नमिता ने आखिर के ही दिया ये तो मुझे मालूम भी । नमिता कहते हुए अशोक ने सिर झुका लिया । अरे ये क्या शोक तुम्हें कैसे? इसलिए नमिता की भावी को बिना किसी अपराध के और बगैर कोई शारीरिक कमी के माँ के सहित सबके ताने सुनने पडे और मैं सब कुछ जानकर सच नहीं कर पाया । लेकिन तो भी कब और कैसे मालूम हुआ शोक उसी दिन से जानता हूँ जिस दिन भावी ने माँ से झूट कहते हुए भैया की कमी को खुद की कमी बताया था । पर कैसे अशोक हुआ ये नमिता की जब भाभी ने माँ से कहा कि माँ बनने के लिए वह शारीरिक रूप से अक्षम है तो माँ अपने किस्मत पर होते हुए भाभी को बहुत बुरा भला कह रहे थे । मुझे भाभी के लिए बहुत दुःख हुआ और मैं सीधा डॉक्टर के पास किया और देश विदेश जहाँ भी हो भावी का इलाज कराने का प्रस्ताव रखा तो वह टालमटोल करने लगे । मैंने उनके इस रवैये पर नाराजगी जाहिर की तो अंतर था । उन्होंने कही दिया की समस्या किशोर भैया की ओर से हैं । यही कारण है कि जब तुमने भाभी को दुनिया के सामने इस बच्चे की प्राकृतिक माँ बनाने का प्रस्ताव रखा तो मैंने तुरंत ही हाँ थी । तो क्या साधन इक्यू में भी जीजाजी का इलाज संभव नहीं । डॉक्टर के अनुसार मुश्किल जरूर है पर असंभव नहीं लेकिन इसके लिए भैया के सहयोग और इक्षाशक्ति की जरूरत है । जब की भैया ने अपनी तरफ से कोई पहल की ही नहीं है इसलिए मुझे जितना बन पड सकता है । मैं किसानों से भाभी को बचाने के लिए कोशिश बस करता रहा क्योंकि भैया के प्यार और सम्मान के लिए जब भाभी ने खुद को कुर्बान कर दिया है तो मैं बना भैया भाभी के प्रेम के बीच क्या बोल सकता था तो में सही की आशो की सब कुछ जानकर अनजान बने रहे क्योंकि मैंने देखा है कि दीदी जीजाजी को किसी तरह की भी गिल्टी फील नहीं होने देना चाहती हैं और जीजू के सम्मान के लिए रक्षा कवच बनने को ही अपने प्यार की गहराई समझती हैं । तो तुम्हारा ख्याल भाभी के बारे में एकदम सही नमिता और यही कारण है कि मैंने तो हमारे बच्चे को पूरी तरह भाभी की कोख से पैदा हुआ ही प्रदर्शित करने को कहा ताकि भावी नहीं । हाँ मैया के सम्मान की रक्षा के लिए जो कदम उठाए हैं उसमें हम उनका खामोशी से साथ दे सकें । इस बात के लिए मुझे तुम पर गर्व अशोक नमिता ने अशोक का हाथ थामकर आगे कहा भावनाओं में बहकर तुम्हारे प्यार में सबकुछ समर्पित तो कर दिया पर हमेशा मेरे दिलो दिमाग पर एक बोझ रहता था की जो कुछ भी हुआ वो ठीक नहीं था । हमारे संस्कारों के अनुकूल नहीं है और इससे जब तुम्हारी माँ के कहने पर मेरे बाबूजी ने भी जबरदस्ती का रिश्ता नहीं करने की सलाह मुझे भी तो लोकलाज का भय हम अपने बच्चे की रक्षा के लिए दी थी या बाबूजी को अपने बच्चे के बारे में बताने की जगह मैंने अपने बचपन के उसको उस का सहारा लिया जो मरने के पहले मिली । कुछ भी करना अपने सौभाग्य समझ रहा था पर सब के बारे में सोचते सोचते उस प्यार के साथ ही अन्याय कर बैठे जिसके बिना में अस्तित्वहीन हूँ मुझे समझ कर तो अशोक मैंने तो बहुत कष्ट दिया है तुम फिर आज सुबह ही उन्होंने था तुम्हारे लिए मैं खुद को दुखों के सागर में भी हो सकता हूँ । अभी अभी तो प्रेम का गुणगान करते हुए तो नहीं तो कहा है कि प्रेम को न तो अपनी चला सकती है, ना हवा उडा सकती है, ना पानी दिखा सकता है और ना ही कोई हथियार इसी काट सकता है । और तो नहीं कहती हूँ कि जो भी होता है अच्छे के लिए होता है तो फिर पुरानी बातों को लेकर हम क्यों दुखी हूँ । अंत भला तो सब भला मुझे आजकल बहुत उल्टियाँ होने लगी है । यहाँ रहने से माँ के सामने सच आने का डर रहेगा । ये जल्दी से कहूँ कि जितना जल्दी हो सके हमें यहाँ से चले जाना चाहिए । ठीक है नमिता मैं आज ही भैया से बात करके जाने की व्यवस्था करवाता हूँ ।

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उल्लास से भरे सुहाने मौसम में कांटे की चुभन ने नमिता को उसका बीता हुआ कल याद दिला दिया , और नमिता अपने जीवन के बीते हुए पल में गोता लगाने लगी writer: ओमेश्वरी 'नूतन' Voiceover Artist : RJ Saloni Author : Omeshwari 'Nootan'
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