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Chapter 21

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भुवन विला - Horror Story Author : Ashish Kumar Trivedi Producer : Kuku FM Voiceover Artist : Shivank Singh
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नमस्कार मैं वो शिवांक और आप सुन रहे हैं । कोई ऍम सुने जो मंचा है और ये है इस कहानी का किस वहाँ एपिसोड तो चलिए शुरुआत करते हैं । दो । वहाँ से अधिक का समय बीत चुका था लेकिन इंडिया को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें । उसे ऐसा कोई भी समझ नहीं आ रहा था जिसके पास वो मोहन को छोडकर निश्चिंत होकर प्रेत लोग जा सके । उसकी माँ की हालत दिन पर दिन खराब हो रही थी । गांव में सभी तरह ये चर्चा थे । अब इंडिया शहर जाकर अपने बच्चे और माँ को भूल गयी । अब तो पैसे भी नहीं भेजती है । मोहन पडोस के घर से मिली बासी रोटी खा रहा था । बिंदिया का कलेजा फटा जा रहा था । वह मोहन के सिर पर हाथ फेर रहे थे । वहाँ अक्सर ऐसा करती थी । मोहन को उसका यह स्पष्ट बहुत सुख देता था । उसे लगता था कि मम्मी उसके पास ही हैं । रोटी खाकर मोहन बाहर खेलने लगा । बिन्दिया उसे खेलते हुए देख रही थी । मोहन को खेलते हुए देर हो गई थी । बिन्दिया सोच रहे थे की भले ही माँ बीमार हो पर जैसे तैसे उठकर मोहन के खाने के लिए कुछ ना कुछ बना देती थी । लेकिन आज तो वह बिस्तर से उठे ही नहीं । बिन्दिया परेशान हो गई कि कहीं माँ की तबियत बहुत अधिक विकेट तो नहीं गई । माँ का ख्याल रखने वाला कोई नहीं था । उसे अपनी माँ के बारे में सोचकर दुख हुआ । वहाँ भी तराई तो माँ खटिया पर उसी करवट पडी थी जैसे पहले बिंदिया का माथा ठनका । तभी मोहन भीतर आकर अपनी नानी को जगाने लगा । किन्तु उसके बहुत दुकाने पर भी वाटर से मस्त नहीं हुई । बिंदिया को अपनी आशंका सही जान पडी । नानी के न जाने से मोहन रोने लगा । मोहन के साथ खेल रहा लडका जो उम्र में उससे बडा था या देखकर अपनी माँ को बुला लाया । इंडिया की माँ दुनिया छोड कर चली गई थी । गांव वालों ने मैं झुलकर उसका अंतिम संस्कार किया । अब समस्या थी कि मोहन का क्या किया जाए । गांव के लोग एकत्र होकर किसी बारे में सोच रहे थे । गांव की एक और बोली कैसी जालिम औरत है । मोहन की माँ शहर जाकर ऐसे भूली गई है । आखिरी दिनों में तो बढिया फोन कर कर के हार गई पर फोन भी नहीं मिलता था । उसका बच्चे को बडी माँ के मध्य बढकर किसी के साथ ऐश कर रही होगी । यह सुनकर बिंदिया तडप उठी । वह सब को बताना चाहती थी कि वह किस मजबूरी में है । रात दिन अपने बच्चे के साथ रहकर भी कुछ नहीं कर सकती थी । वह अपनी माँ और बेटे के सुख के लिए शहर कमाने गई थी न कि अपने लिए । पर वहाँ किसी से भी अपनी बात नहीं कह सकती थी । गांव वालों ने आपस में तय करके मोहन को पास के कस्बे में अनाथालय में पहुंचा दिया । बिन्दिया भी उसके साथ वहीं चली गई । अनाथालय में मोहन को सर पर छत और दो वक्त का खाना तो मिल रहा था, लेकिन इंडिया जानती थी कि इससे मोहन का भविष्य नहीं सब रहेगा । इंडिया बहुत परेशान थे । समय तेजी से बीत रहा था । उसे जल्द से जल्द मोहन के लिए कोई ऐसा परिवार ढूँढना था जो उसे सुरक्षित भविष्य दे सके । वैसे उस दिन जब यमदूत उसे नौ वहाँ की मोहलत देकर चला गया तब इंडिया सोच में पड गई क्या वह क्या कर सकती है तो उसे ऐसा कोई समझ नहीं आ रहा था कि जिसे वह मोहन को सौंप सके । तब उसे विचार आया की जो उस की असमय मौत का कारण है उसे ही वह मोहन की जिम्मेदारी दे । डर करी सही । शायद वहाँ मोहन के लिए कोई व्यवस्था कर दें । वहाँ उसी समय धोवन मिला चले गए । जब इंडिया धवन मिला पहुंची तो उसने देखा कि घोषाल बाबू उसकी लाश को बैकयार्ड में हरसिंगार के पेड के पास गाड रहे हैं । सारे सबूत मिटाने के बाद घोषाल बाबू सोने चले गए । इंडिया ने उन्हें सपने के जरिए अपनी उपस्थिति का एहसास कराया । सपना देखकर घोषाल बाबू डर गए । उन्होंने निश्चय किया कि अब भुवन जिला में नहीं रहेंगे । अगले दिन सुबह ही वहाँ दिल्ली जाकर एक होटल में ठहर गए । वहाँ से झारखंड चले गए । बिंदिया ने झारखंड जाकर भी अपने होने का अहसास कराया । लेकिन घोषाल बाबू को लगता था कि जा उनके मन का पाप है, जो इस तरह सामने आ रहा है । उन्होंने भुवन मिला बेचकर ऑस्ट्रेलिया अपने भाई के पास जाने का निश्चय कर लिया । इंडिया को भी समझ आ गया था कि घोषाल बाबू यदि डरकर मोहन को अपना भी ले तो भी उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है । वह मोहन के पास चली गई । उसने तय कर लिया कि भवन मिला में जो भी नए लोग आएंगे, वहाँ उनसे संपर्क करने की कोशिश करेगी । अपनी माँ की मृत्यु के बाद जब मोहन अनाथालय पहुंचा दिया गया तो वहाँ फिर से भवन मिला गई । उसने वहाँ चेतन और सारिका को रहते हुए देखा । उनकी बातचीत से उसे पता चला कि सारिका ने कोर्ट में ही अपनी संतान को खो दिया है । इंडिया के मन में एक उम्मीद जगी की अपनी संतान को खोने का दुख झेलने वाली सारे का उसका दर्द अवश्य समझ सकेगी । सही मौका देखकर उसने सपने के माध्यम से तरीका से संपर्क किया । सारिका ने जब सारी बात चेतन को बताई तो उसे लगा कि सारिका के मन का दर्द ही इस तरह उसके सामने आ रहा है । वहाँ उसे डॉक्टर मोटवानी के पास ले गया । उन्होंने भी वही बात कही । उन्होंने उसका इलाज शुरू किया । चेतन ने मारिया को सारिका की सही देखभाल के लिए रख लिया । डॉक्टर मोटवानी के इलाज वह मारिया की सेवा से सारे का ठीक हो गई । उसने दोबारा ऑफिस जाने की तैयारी शुरू कर दी । बिंदिया ने दोबारा झूले को हिलाकर अपनी उपस्थिति का अहसास कराया । इस बार सारिका बुरी तरह से डर गए, लेकिन चेतन को अभी भी उसकी बात पर यकीन नहीं था । इसलिए जब चेतन हॉल में मारिया से बात कर रहा था तब उसने मरिया का शॉल खींचकर दोनों को भुवन विला में खुद के होने का अनुभव कराया । लेकिन मारिया नौकरी छोड कर चली गई । चेतन सारिका को लेकर फिर से किराये के फ्लैट में चला गया । उन लोगों के भवन मिला को छोड कर चले जाने से इंडिया की उम्मीद को झटका लगा । बहुत परेशान हो गई सारे का और चेतन उसकी अंतिम उम्मीद थे । इसलिए अब इंडिया ने तय किया कि वह जैसा भी हो सारे का और चेतन को यह एहसास कराएगी कि वहाँ उनसे कुछ कहना चाहती है तो उसने सारे का और चेतन को सपने में यकीन दिलाया कि वहाँ उन्हें नुकसान पहुंचाना नहीं चाहती है बल्कि उनसे कुछ कहना चाहती है । दोनों को यह बात समझ आ गई । चेतन ने एक ऐसे व्यक्ति को तलाशा शुरू कर दिया जो उनकी इस काम में सहायता कर सके । वहाँ तलाश उसे डॉक्टर ब्रह्मानंद स्वरूप के पास ले गए तो दोस्त हूँ अभी के लिए इतना ही बाकी की बातें करेंगे । अगले एपिसोड में आप सुनते रहे तो फॅस सुने जो मंचा है मैं वो शिवांग लेता हूँ । मेदा

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भुवन विला - Horror Story Author : Ashish Kumar Trivedi Producer : Kuku FM Voiceover Artist : Shivank Singh
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