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Chapter 15

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अंतर्द्वंद्व जावेद अमर जॉन के पिछले उपन्यास ‘मास्टरमाइंड' का सीक्वल है। मास्टरमाइंड की कहानी अपने आप में सम्पूर्ण अवश्य थी पर उसकी विषय-वस्तु जो जटिलता लिये थी उसे न्याय देने के लिये एक वृहद कहानी की आवश्यकता थी और प्रस्तुत उपन्यास उसी आवश्यकता को पूर्ण करने हेतु लिखा गया है। writer: शुभानंद Author : Shubhanand Voiceover Artist : RJ Hemant
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वर्तमान समय हिमाचल प्रदेश होटल से चेकआउट कर के अमर बस स्टॉप पहुंचा । वहाँ पर उसे मंडी के लिए बस मिल गई । बस द्वारा वो चार घंटे के अंदर मंडी पहुंच गया । मंडी पहुंचकर उसे ठंड से कुछ राहत महसूस हुई क्योंकि मंडी शिमला की तरह ज्यादा ऊंचाई पर नहीं था । जहाँ शिमला में इस वक्त कडाके की ठंड पड रही थी । मंडी में मौसम खुशनुमा था । सिर्फ स्वेटर में भी अमर का काम चल रहा था । जैकेट की फिलहाल जरूरत नहीं पड रही थी । बस स्टॉप पर उतरने के बाद पहले तो अमर ने बाथरूम में घुसकर अपना हुलिया बदला । काफी दिनों से उसने शिव नहीं की थी तो उसने अपनी गाडी और मुझे बडी ही रहने दी । उसके अलावा कुछ और मेकप करके उसने अपनी शक्ल में काफी बदलाव कर लिया । फिर एक बजट होटल में चेक इन करने के बाद वो शहर में निकला । मंडी शहर में काफी चहल पहल थी जहाँ शिमला ज्यादातर टूरिस्ट की आवाजाही से भरा पडा था । उसके विपरीत मंडी कारोबारी गतिविधियों से ओतप्रोत था । कारोबार की दृष्टि से ये शहर हिमाचल प्रदेश का मुख्य स्थल था । स्वामी हाँ की इन्वेस्टिगेशन करने के बारे में अमर के दिमाग में एक प्लैन था जैसा कि जय पालीवाल से उसे पता चला था कि उसका केस देवली स्थित पुलिस थाने में दर्ज था । वह देवली पुलिस थाने पहुंचा । उसने ड्यूटी ऑफिसर से मिलने की मांग की । वो एक महिला पुलिस थाना था और वहाँ यू अमर को देखकर कुछ महिला पुलिस कांस्टेबल हैरान थी । क्या गाना एक ने अमर से पूछा मैं सीक्रेट सर्विस हूँ । अमर अपना आयकर तेजी से दिखाते हुए बोला, उसे मालूम था सीक्रेट सर्विस नाम सुनते ही पुलिस वालों को अलर्ट हो जाना था । कोई भी उसका आईडी कार्ड ध्यान से देखने की जरूरत नहीं समझता और नहीं वो ऐसा मौका देने वाला था क्योंकि उसने आइकार्ड पर लगे फोटो के विपरीत काफी मेकप क्या हुआ था और अपना असली नाम बताना तो वैसे ही सीक्रेट सर्विस वाले के लिए जरूरी नहीं था । वो थाना इंचार्ज इंस्पेक्टर सुनीता पुजारी से मिला । ऍम कैसे आना हुआ? वो कुछ नर्वस भाव से बोली । अमर को महसूस हुआ कि उसका किसी सीक्रेट सर्विस वाले से पहली बार पाला पड रहा था । देखिए, मैं सौम्या नाम की एक लडकी की मौत के इन्वेस्टिगेशन के सिलसिले में आया है । सुनीता सोच में पड गई । फिर याद करते हुए बोली कोई जिसने नदी में कूदकर खुदकुशी कर ली थी था वही अच्छा सर पर वो तो सीधा सादा खुदकुशी का केस था । उसके लिए आप यहाँ पर कुछ बेहद गंभीर मुद्दा जुडा हुआ है उस लडकी से फॅमिली नहीं पर किसी और के तो इसलिए मेरे लिए ये सब पता करना बहुत जरूरी है कि उस लडकी ने खुदकुशी क्योंकि साथ ही उस लडकी के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी निकालनी है । ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है । सुनीता के चेहरे पर नर्वस भाव कुछ और बढ गए इस छोटे से थाने में बैठकर आज से पहले उसने शायद ही कभी इतने गंभीर मुद्दे के बारे में सुना था हूँ में आशा करता हूँ की आप मेरी पूरी मदद करेंगे । जी सर बिलकुल करेंगे । जो भी हो सकेगा करेंगे । मैं आपको उसकी फाइल दिखाती हूँ केलकर उसने कांस्टेबल से स्वामी की फाइल मंगाई । मैं कुछ समय के लिए फाइल पढना चाहता हूँ । अमर ने कहा जी जरूर परिसर के लिए चाहिए आपको थैंक्यू इस केस की इन्वेस्टिगेशन आप नहीं की थी बिलकुल सर । ये लडकी कॉलेज के बाद काफी समय से दिल्ली में नौकरी कर रही थी । अभी कुछ दिन पहले ही घर वापस आई थी । परिवार वालों का कहना है कि काफी दुखी थी । नौकरी छोडकर आ गई थी और उसका कारण उसने किसी को नहीं बताया । बस यही कहा कि अब नौकरी अच्छी नहीं लग रही थी । घर वालों ने भी कहा कि ठीक है । लडकी कम नौकरी से भर गया तो अब उस की शादी करा दी जाएगी । हालांकि उन्होंने लडकी पर कोई प्रेशर नहीं डाला था पर फिर इसने खुदकुशी कर ली । यानी खुदकुशी की वजह तो पता ही नहीं चलेगा । जी नहीं पता चलेगा परिवार वालों को तो इससे ज्यादा कुछ नहीं पता था । पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट से भी लडकी के साथ कुछ गलत हुआ हो या फिर वह प्रेग्नेंट रही हो तो वैसे भी कोई जानकारी नहीं पता चली । और अगर लडकी दिल्ली में ही नौकरी कर रही थी वहीं पर रह रही थी तो ये सब जानकारी तो वहीं पर पता चल सकती थी । हूँ जी के है तो आप सही रहे हैं पर इस दिशा में अपने कोई कोशिश क्यों नहीं? वो निरुत्तर हो गई । चलिए कोई बात नहीं वो मैं पता करवा लूँगा । इस रिपोर्ट में क्या लिखा है? ये कहाँ नौकरी करती थी । वो रिपोर्ट में झांकने लगी । कोई बात नहीं मैं देख लूंगा । इस रिपोर्ट की फोटोकॉपी निकलवा दीजिए और उसके पेरेंट्स का एड्रेस मुझे दे दीजिए जी जरूर पुलिस थाने से अमर सौम्या के परिवार वालों से मिलने पहुंचा हूँ । वो एक मध्यम दर्जे का घर था । सौम्या के माता पिता काफी बूढे हो चले थे । कुछ झिझक के साथ उन्होंने अमर का स्वागत किया । आपके परिवार में और कौन कौन है? कुर्सी पर बैठते हुए अमर ने पूछा हम दो है और हमारा बडा बेटा है । वो चेन्नई में काम करता है । अच्छा सौ में से कितना बडा है । चार साल बडा है । अपनी फैमिली के साथ वहीँ सेटल है । अभी तीन दिन पहले ही वापस गया । सौम्या ने जो कुछ किया उस से हम सभी अभी तक शब्द हैं । हमें तो विश्वास नहीं हो रहा है । वो इस तरह हमें छोडकर चली गई । बहुत होनहार लडकी थी । हमारी कम बोल दी थी । पर ऐसा तो हमें कभी नहीं लगा कि उसे कोई बहुत बडी दिक्कत है परिवार में वो आप में से किसके सबसे ज्यादा करी थी । साहब लाडली तो हम सब की थी पर वो बहुत शर्मीली थी । बचपन से ही अपने मन की बातें खुद ताकि सीमित रखती थी । इस बार सौम्या की माँ ने कहा दिल्ली में क्या काम करती थी । उसने कंप्यूटर का कोर्स किया था । उसके बाद से दिल्ली में ये पांच साल से नौकरी कर रही थी । घर आती जाती थी ना आप लोग भी उससे मिलने जाते थे । हम तो बस शुरू में गए थे । बाद में तो वही आती थी । अब इस उम्र में हम दोनों से कहीं ज्यादा आना जाना होता भी नहीं । अमर ने सहमती में सिर हिलाया । उसकी कंपनी का नाम बताइए । उससे संबंधित कोई डॉक्यूमेंट आपके पास हो तो दिखाइए । अपने सारे डॉक्यूमेंट तो वो अपने साथ ही रखती थी । यहाँ उसका कमरा है । पुलिस ने वो चेक किया था, कुछ खास तो नहीं मिला । आप चाहें तो देख सकते हैं । अमर ने सौम्या का कमरा देखा । हमने उसके सामान के साथ ज्यादा छेडखानी नहीं किया । वैसे भी उसका यहाँ पर कोई खास सामान नहीं और वो सामान जो दिल्ली में हाँ उसकी दोस्त जब घर आएगी तो साथ लेकर आएगी । वो मंडी की ही रहने वाली है । उसका नंबर, उसका नाम और नंबर आपके पास हो तो मुझे दे दीजिए । पल्लवी नाम है । उसका हेलो नंबर लिख लो कहकर उन्होंने अपने मोबाइल में नंबर ढूंडा और फिर अमर को बताया । कुछ देर और बात करने के बाद अमर ने उनसे विदा ली और फिर वहाँ से सीधे अपने होटल आ गया । होटल आते आते आठ बज गए थे । रात हो गई थी पर अब वहाँ भी ठंड बढ गई थी । उसने खाने का ऑर्डर दिया और खाना कमरे में ही भेजने का निर्देश दे दिया । कमरे में पहुंचने ही उसने सौम्या की फाइल का अध्ययन शुरू कर दिया । पुलिस के मुताबिक एक सीधा साधा किस था । उस दिन सौम्या सुबह सुबह ही गायब हो गई थी । बिना बताए घर से कहीं निकलना उसकी आदत नहीं थी । फिर चार घंटे बीतने के बाद घर वालों ने पडोसियों से पूछा और फिर किसी ने पुलिस को बताने की सलाह दी । पुलिस ने जब पूछताछ शुरू की तो पता चला वो सुबह अकेले ही ब्यास नदी के किनारे गई थी । नदी के पास किसी ने इस बात की पुष्टि की कि वो लडकी नदी के पास चलती हुई दिखाई दी थी । पुलिस को शक हुआ कि शायद वो नदी में गिर गई है इसलिए नदी में खोजबीन चालू की गई और फिर दो दिन बाद उसकी लाश नदी प्रवाह में काफी दूर एक जगह पत्थरों में अटकी हुई पाई गई । पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के मुताबिक उसके शरीर पर किसी ऐसी चोट का निशान नहीं था जिससे उसके कत्ल होने का शक बनता कुछ छोटे थी जो कि शर्तिया नदी के पत्थरों से लगी थी । उसके अलावा सब कुछ ठीक था । फेफडों में पानी भरने की वजह से मौत हुई थी । यही पोस्टमॉर्टम का निष्कर्ष था । बॉल्कनी में आकर अमर ने सिगरेट सुलगा ली और फिर सोच में डूब गया । इतनी दूर जिसको ढूंढते हुए आया, जिससे उसे नेगी की जानकारी मिलने की उम्मीद थी । वही अभी इस दुनिया में नहीं थी । अब आगे कैसे बढा जाए? फिलहाल उसके पास एक जरिया था, वो भी उस की दोस्त पल्लवी, जिसका नंबर उसे हासिल था । अगर वो उसकी करीबी दोस्त थी तो जाहिर है उसकी पर्सनल लाइफ की जानकारी भी रखती होगी । ये सोच कर अमर नीचे लैंड लाइन फोन इस्तेमाल करने के लिए पहुंचा । पहली बार रिंग जाती रही । किसी ने फोन नहीं उठाया । अनजान नंबर के साथ आजकल ऐसा ही होता है । दूसरी बार जब उसने फोन मिलाया, तब दूसरी तरफ से एक लडकी की आवाज आई हेलो! आप पल्लवी बोल रही है । हाँ जी, आप कौन? मैं एक सीक्रेट सर्विस ऑफिसर बोल रहा हूँ । आपकी दोस्त सौम्या की मौत की इन्वेस्टिगेशन चल रही है । उसी सिलसिले में आपसे बात करनी थी । फोटो बोलिए, मैं क्या मदद कर सकती हूँ । उसके स्वर में कुछ घबराहट उभरी । आप मंडी कब आने वाली है? मैं सोच रहा था । अगर आप इधर आ रही हैं तो बैठकर आराम से बातचीत हो जाएगी । जी, अभी तो कुछ दिन पहले या कर गई हूँ । अब दोबारा तो अगले महीने ही आना होगा । अच्छा कोई बात नहीं । फिलहाल मैं आपसे फोन पर ही बात करके काम चला लूंगा । आप उसकी कंपनी में काम करती हैं । नहीं जी, मैं दूसरी जगह काम करती हूँ । फिर सौ में से दोस्ती कैसे हुई? दोस्ती तो मंडी में ही हुई थी । हम एक ही कॉलेज में थे । दिल्ली में शुरू में हम साथ में रहते थे । फिर मेरी शादी हो गई और मैं उसी सोसाइटी की दूसरी बिल्डिंग में क्लैट में अपने हस्बैंड के साथ शिफ्ट हो गई । अच्छा यानी आपके फैट आस पास ही है । हाँ, फिर तो रोजाना मुलाकात हो जाती होगी । रोज तो नहीं, पर अक्सर तो सौम्या फिलहाल अकेली रहती थी । हाँ, क्योंकि मुझे सौम्या की पर्सनल लाइफ के बारे में जानना है क्योंकि यहाँ पुलिस से जो जानकारी मुझे मिली है उसे उसकी सोसाइटी कोई स्पष्ट वजह समझ में नहीं आई है । जी, ये तो मुझे भी नहीं पता । जहाँ तक मुझे पता है उसकी यहाँ नौकरी ठीक कर चल रही थी । रचाना की उसने नौकरी छोड दी और कहा कि अब घर जा रही है तो मैंने उससे पूछा क्या हुआ तो उसने बस यही कहा कि बस अब मन नहीं लग रहा है । हाँ अगर जाऊंगी अच्छा क्या उसका कोई बॉयफ्रेंड था हो? चुप हो गई । देखिए मुझे कोई बात नहीं हो पाई है । जवान लडकी ने खुदकुशी की है । इसलिए ये सब चीजें मेरे लिए जाना बहुत जरूरी है । लडकियाँ तो अक्सर अपनी दोस्त है । ये सब बातें शेयर करती हैं । आपको जो पता है मुझे बता दीजिए आपको कोई दिक्कत नहीं होगी । देखिए सौम्या बहुत ही कम बोलती थी । मैं उसकी बचपन से दोस्त जरूर थी पर वो हर चीज मेरे साथ शेयर नहीं करती थी । मेरे ख्याल से उसका बॉयफ्रेंड जरूर था क्योंकि दिल्ली में जब उससे मिलती थी तो उसे अक्सर किसी के फोन या मैसेज आते थे और उसके हावभाव से ये अंदाजा तो मैंने लगा लिया था कि उसका किसी के साथ अफेयर चल रहा है । एक बार वो जरूर बोली थी कि उसका कोई फॅार्म में मैं हमेशा बोलती थी कि वह जरूर तेरा बॉयफ्रेंड है, वहाँ उसका डाल देती थी और साफ मना कर देती थी । आपने फोटो देखा होगा उसका हाँ एक बार दूर से दिख गया था । उसने दिखाया नहीं था उसका तो यही कहना था की उसके ऐसे बहुत से फ्रेंड शायद वो जिस कंपनी में काम करती थी वो उनका क्लाइंट था । इसलिए उसका यही कहना था की प्रोफेशनल टाइप की दोस्ती है तो मैंने भी फिर कभी ज्यादा जोर नहीं डाला क्योंकि सौम्या का ईमेल आईडी तो आपके पास होगा वो मुझे बता दीजिए । पल्लवी ने बताया अमर नौ से नोट कर लिया और फिर बोला जरूरत पडने पर मैं आपको दोबारा फोन करूँगा जी जरूर । अमर ने फोन काटा और वापस अपने कमरे में आ गया । खाना आ गया था । खाना खाते हुए वह यही सोचने लगा कि सौम्या के ईमेल आईडी और फोन नंबर से जानकारी किस तरह निकलवाई जाएगी । सीक्रेट सर्विस के ऑफिस में बैठ कर ये सब काम करवाना, चुटकियों का खेलता पर एक भगोडे जासूस को ये सारी सुविधाएं कहाँ हासिल होती हैं । खाना खाने के बाद वो कमरे में ही टहलने लगा तभी दरवाजे पर दस्तक हुई । अमर को लगा बेहरा बर्तन लेने और बिल पर साइन लेने के लिए आया होगा । उसने तुरंत दरवाजा खोल दिया । दरवाजा खुलते ही उसने अपने सामने एक नकाबपोश को खडा पाया जिसके हाथों में छोटा सा पिस्टल मौजूद था । नकाबपोश अंदर आ गया । उसका पूरा चेहरा काली नकाब से ढका हुआ था । सिर्फ आंखें चमक रही थीं जिनमें खतरनाक भाव थे । अमर के हाथ सोता ही ऊपर उठ गए और वह पीछे हटता चला गया । अमर नैना का पोष के पीछे झांकर चौंकने का अभिनय किया पर नकाबपोश पर इसका कोई असर नहीं हुआ । उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और फिर अचानक ही पिस्टल चेन में रखा और हाथ फैलाकर कराते की मुद्रा में आगे अमर को आश्चर्य हुआ । इस तरह का अक्सर फिल्मों में ही देखा जाता था । पिस्टल होते हुए भी वो उसे मारने की जगह लडने का मौका दे रहा था । इसका मतलब ये कोई ऐसा व्यक्ति था जो उससे नफरत करता था और मारने से पहले उसकी पिटाई करना चाहता था । या फिर कोई ऐसा था जो उसकी जान लेने का जोखिम नहीं लेना चाहता था । वो जो भी था उसे पहचानता था । ऐसा कौन है जो यहाँ मंडी में मेकप के बावजूद मुझे पहचान गया? अभी अमर सोची रहा था कि नकाबपोश ने तेजी से अमर के ऊपर हाथ घुमाया । अमर ने उसे अपने हाथों से रोक लिया और जवाब में मार्शल आर्ट का रंग दिखाते हुए पैर घुमाया जो नकाबपोश के मुंह पर जाकर लगा और वह पीछे जा गिरा । वो आश्चर्य से उसे देखते हुए उठा । शायद उसे उम्मीद नहीं थी कि अमर इस तरह से लडने का हुनर भी जानता होगा । क्या बात है भाई मार्शल आर्ट सीखने आए हो गया । देखो ट्रेनिंग देने की फीस लगती है । फ्री में तो ये काम ना इस बार नकाबपोश अमर पर हाथ पैरों से कराते के अंधाधुंध वार करने लगा । अमर कुछ को डिफेंड कर पाया और कुछ उसे झेलने पडे । वाकई नकाबपोश प्रोफेशनल था पर अमर भी । आपने मार्शल आर्ट का कौशल दिखाते हुए उसके साथ जूझ रहा था । जब नकाबपोश को ये अहसास हो गया कि अमर पर काबू पाना मुश्किल है तो उसने फिर से अपनी जेब से पिस्टल निकाली और अमर पर तांती तभी दरवाजे पर जोर जोर से दस तक होने लगी । इसमें कोई आश्चर्य नहीं था कि जिस तरह उन दोनों ने कमरे में उठा पटक मचा रखी थी, उसकी आवाज होटल में बाकी लोगों तक पहुंची न हो । पल भर के लिए नकाबपोश का ध्यान हटा । अमर ने उसका पूरा फायदा उठाते हुए उसके पैरों की तरफ डाइव लगा दी । वो पिस्टल नहीं चला पाया और उन्हें मूड सामने की तरफ किराए पर गिरते ही इस बार वह फुर्ती से उठा और तेजी से बेल करने की तरफ दौड पडा । देखते ही देखते वह बॉलकनी से नीचे कूद गया । अमर ने आश्चर्य से उस तरफ देखा और उठ कर बालकनी में पहुंचा । वो कमरा तीसरी मंजिल पर था । नकाबपोश बालकनी से लटक कर नीचे ग्राउंड फ्लोर पर बने टॉयलेट की छत पर कूद कर और फिर वहाँ से नीचे उतरकर होटल के बाहर पहुंच चुका था । बाहर निकलते ही वह तेजी से भागने लगा । अमर ने नीचे की तरफ देखा पर उसे लगा ऐसा कोई स्टैंड भारी पड सकता है । मैं जाने किस मिट्टी का बना अमर वापस कमरे में आया और उसने दरवाजा खोला । कमरे के बाहर होटल का मैनेजर, एक वेटर, वह दो तीन लोग और थी । सब उससे कुशल मंगल पूछने लगे । अमर ने बताया कि नजाने कौन था जिसमें हमला किया । मैनेजर ने उसे पुलिस को रिपोर्ट करने की सलाह दी पर अमर ने इंकार कर दिया । अमर ने कहा, वह शायद उसका लैपटाप आदि चोरी करने के इरादे से आया था । उसने ये बात नहीं बताया कि उसके पास हथियार भी मौजूद था । उसके बाद सब अपने अपने काम पर चले गए और अमर ने कमरा अंदर से बंद कर दिया । उसने बॉलकनी अंदर से बंद कर ली और फिर सोचने लगा उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई । हमले से इस बात की पुष्टि हो गई है कि मैं सही ट्रैक पर हूँ । मंडी आते ही मुझ पर हमला हुआ । सौम्या के घर जाने और उसके केस के बारे में जानकारी निकालते ही हमला हुआ । मतलब उसकी मौत में जरूर कोई ऐसा रहस्य छिपा है तो ये लोग उजागर नहीं होना देना चाहते हैं । जो भी हो सौम्या की मौत खुदकुशी नहीं थी ।

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