Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

10. Divya Kheer

Share Kukufm
10. Divya Kheer in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
17 KListens
श्री राम Producer : Saransh Studios Author : गुरुदत्त Voiceover Artist : Ramesh Mudgal
Transcript
View transcript

श्री राम है । भाग दस ऍम राम इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न हुए थे । एक सुबह को व्यवस्था मनो के पुत्र थे । वे जब संज्ञान हुए तो अवन में अयोध्या बुरी बसाकर रहने लगेगा । इनके वंश में पूरी वंशीय राजगुरु स्थापित हो गया । दशरथ के जरूर के समय यह परिवार ऍम वर्षों से अयोध्या में राज कर रहा था । दशरथ के पिता का नाम महाराज दर्शन धर्म में अगाध श्रद्धा रखने वाले शूरवीर ऍम बलवान राजा थे । लेकिन ट्यूशन राजा और वैदिक धर्म एवं संस्कृति में अगाध निष्ठा रखने वाले नरेश । इनके राज्य में न्याय और धर्म का आचरण होता था और सुयोग्य मंत्रियों द्वारा राज्य सुनाया जाता था । महाराज दस रात के आठ गुणवान मंत्री थे । ये मंत्री छात्र के तत्व को जानने वाले एवं बाहरी चेष्टा को देख कर ही मन के भाव को समझने वाले थे । ये सादा ही राजा और राज्य के हित में तथा लोक कल्याण में लगे रहते थे । वे सब आचार विचार से शुद्ध रहते हुए राजकीय कार्यों में संलग्न रहते हैं । इसी प्रकार उनके दो राजपुरोहित थी ऋषि वशिष्ठ और मुनि वामदेव । वास्तव में ये उपाधियां थी जो उनके गुणों के कारण मिली हुई थी । ये विद्याओं के जानने वालों के नाम है वशिष्ठ तो भ्रम के ज्ञाता को कहा जाता है और वामदेव सांसारिक विद्या के विद्वान की उपाधि । अभिप्राय यह है कि महाराज दशरथ ने अपने राज्यकार्य को दो विभागों में बता हुआ था । एक विभाग धर्म काम से संबंध रखता था । दूसरे विभाग में राज्यकार्य चलता था । इसके लिए आठ उपविभाग भी बनाए गए थे । प्रत्येक पर एक एक मंत्री नियुक्त महाराज दशरथ के कुछ मंत्री ऐसे भी थे जो समय समय पर बुलाए जाते हैं और कभी किसी जटिल समस्या के उपस्थित होने पर उनसे परामर्श किया जाता था । ये धर्म कर उनके जानने वाले ऋषिगण राजा के सभी मंत्री गवार टूशन और भली प्रकार परीक्षित । ये पोस्ट के संचय, उसके उपयोग तथा चतुरंगिनी सेना के सुधर में सर लागू रहते थे । ये राज्य के सत्पुरुषों का सम्मान नागरिकों की सादा रक्षा एवं उनकी समस्याओं का निवारण करते थे । विद्वानों और वीरों को आदर व सम्मान मिलता था । मंत्रियों का एक कार्य यह भी था कि प्रत्येक नागरिक की शिक्षा का प्रबंध करें और उनकी कार्यकुशलता के अनुसार उनके वरुण का निर्धारण करें । यदि कोई नागरिक सक्षम नहीं हो तो उसकी क्षमता अनुसार उसके लिए कार्य ढूंढा जाएगा । राजा सब मंत्रियों को गुरुतुल्य आदर प्रदान करता था और वे अपने सद्गुणों के कारण सर्वत्र विख्यात थे परंतु महाराजा दशरथ नि संतान थे । वे एक के बाद दूसरा और तीसरा विवाह कर चुके थे । इस पर भी उनको पुत्र सुख प्राप्त नहीं था । आपने अनेक सद्गुणों के कारण ही देवताओं ने महाराजा दशरथ के वंशज को धर्म परायण राक्षसराज रावण के विरोध के लिए तैयार करने का विचार किया था । अतः महाराज को पुत्रेष्टि यह करने की प्रेरणा दी गई और महाराज ने स्वीकार करनी ऍम अपने मंत्रियों विधि जो और अन्य महर्षियों की सम्मति से अश्वमेघ यज्ञ एवं पुत्रेष्टि यज्ञ किया । इस यज्ञ में देवताओं का भी एक दूध आया । उसने राजा दशरथ को संबोधित करके का नरेश्वर मुझे प्रजापति लोग का पुरुष डालो न बमबाजी की आज्ञा से यहाँ आया हूँ आप ईश्वर बाल तो देवताओं की आराधना करते हो । इस कारण यह देवताओं द्वारा बनाई हुई खीर आपको भेजी गई है । यह उत्तम संतान की प्राप्ति कराने वाली है । राजा ने दिव्य औषधि अपनी रानियों को खिलाई और समय पर तीनों रानियों संतान बडी । रानी कौशल्या के पुत्र का लाभ राम रखा गया । मंजिल ईरानी सुमित्रा के दो लडते हुए । नाम रखे गए लक्ष्मण और शत्रुवत । सबसे छोटी रानी के कई के भी पुत्र का जन्म हुआ । उसका नाम रखा गया । भारत अच्छा राजा के चारों मित्रो होगा । विधिवत लालन पालन होने लगा । वे ऋषि वासी स्थित है । मुनि, वामदेव इत्यादि गुरूजनों की देख रेख में बडे होने लगे तथा शिक्षित होने लगे । चारों राजकुमार समय पाकर ज्ञानवान और सद्गुणों से संपन्न हुए । उनमें भी राम संघ सबसे अधिक राहतकर्मी, तेजस्वी और जान जान के विशेष दिए थे । वे निष्कलंक चंद्रमा की बाटी अयोध्यापुरी में सोभा बातें चारों भाई होगा । आपस में बहुत नहीं था वे । वे अपनी तीनों माता हूँ । वो पिता का बहुत सम्मान करते थे । मैं उनसे दुलार पाते

Details
श्री राम Producer : Saransh Studios Author : गुरुदत्त Voiceover Artist : Ramesh Mudgal
share-icon

00:00
00:00