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भाग - 07

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मधुकर को सभी जीनियस कहते थे और वह था भी। लेकिन जीवन के हर मोर्चे पर वह असफल रहा। एक होनहार इंसान क्‍यों अपने जीवन से हार गया? क्‍या था इसका कारण? टूटा हुआ परिवार, सामाजिक व्‍यवस्‍था, विपरीत परिस्थितियां या खुद? यह उपन्‍यास जीवन के उतार-चढ़ाव और सामाजिक जीवन की सच्‍चाई को बताता है।
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पंद्रह दिन गुजरते गुजरते उसकी हालत पहले जैसी हो गई । पनवाडी नेचर इसकी सिगरेट उधार देना बंद कर दिया । शरीर विस्की के बिना टूटने लगा । वही सरोज का घबराया हुआ बदन अपने में समेटने के लिए धडकने लगी । अब क्या करना चाहिए? रुपयों का प्रबंध कहाँ से और कैसे हो? उसके दिमाग में केवल यही एक सवाल था । इस बार उसने अपने साथ दीवान को मिलाया क्योंकि इस बार उसका निशाना होस्टल के स्टीरियों पर था और स्टीरियो के दो बडे भारी डिब्बे थी जिन्हें वो अकेला नहीं उठा सकता था । इन दो डिब्बों के बिना स्टीरियों का कोई एक रुपया भी देने को तैयार नहीं था । उसने और दीवान ने देखा कि कॉमन रूम पर तो अब ताला रहने लगा था और न ही कॉमन रूम में रात को स्टेडियो रखा जाता था । स्टीरियो वॉर्डन के दफ्तर में अलमारी में रहता था और रात को दफ्तर तथा अलमारी दोनों पर ताला पड जाता था । विवान पहले तो साथ देने से घबराया, पर उसके उकसाने और रुपयों के लोग ने उसे भी साथ देने पर मजबूर कर दिया । रात को वार्डन के दफ्तर के पीछे की खिडकी के शीशे और जाली को बडी ही सावधानी तथा आहिस्ता से काटकर वो दफ्तर में घुस गया । दीवान खिडकी के पास खडा हो गया । कमरे में जाकर उसने तले को छूने की बजाय पेचकस से अलमारी का कुंडा ही उतार दिया । फिर सारा सामान निकालकर बाहर खडे दीवान को पकडा दिया । ये सब काम मिनटों में हो गया । फिर वो रात को ही होस्टल की दीवार से कूदकर सामान बेच आये । इस बार उसने ये सावधानी बरती कि वह उसी वक्त दीवान के साथ होस्टल में लौट आया । वो हॉस्टल से गायब नहीं हुआ जिससे किसी को कोई शक ना हूँ । वो आपस में पैसे बांटकर निश्चिंत होकर हो गए । अगले दिन दोपहर तक सारे होस्टल में शोर मच गया कि स्टीरियो भी उठ गए । वो और दीवान उसके कमरे में बैठे कॉफी पी रहे थे कि तभी कमरे में रतन और विकास प्रविष्ट हुए हैं । मधु सुना है कि स्टीरियो टूट गया । विकास ने कहा हो गया होगा तो फिर मैं अगर उसमें जवाब दिया वार्डन ने पुलिस बुला ली है । रतन ने कहा आ जाने दो । पुलिस को वो आराम से बोला और कमरों की तलाशी होगी । रतन बोला तो मुझे बता रही हूँ । मेरे अकेले के कमरे की तलाशी नहीं होगी । होस्टल में सवा तीन सौ कमरें वो बोला हूँ पर तुम पकडे जा सकते हो क्योंकि सीढियों तुमने उठाया है । विकास ने कहा पुलिस को खिडकी और अलमारी पर तुम्हारे फिंगरप्रिंट मिल जाएंगे । पहले दरवाजा अंदर से बंद करो । वो बोला । दरवाजा बंद होने पर उसने कहा पुलिस उंगलियों के निशान नहीं पा सकती क्योंकि मैंने दस्ताने पहन रखे थे । पुलिस के कुत्ते भी आ रहे हैं, उसको मिलेंगे । राॅड अव्वल तो मैंने वहाँ अपनी कोई चीज नहीं छोडी । जो कुत्ते सोंग लेंगे । दूसरे गर्मियों का मौसम है । पुलिस के कुत्ते सुनकर पांच छह घंटे बाद अपराधी नहीं पढ सकते हैं और ये सब हुए बारह घंटे हो चुके हैं । उसने कहा कमरों की तलाशी में पुलिस तुम्हारे कमरे से माल बरामद कर लेगी । विकास बोला माल तो हजम भी हो चुका भाई, लोगों और कोई पॉइंट उसने मुस्कुराकर पूछा मैं पुलिस को बता दूंगा कि चोर कौन है? रतन ने गंभीरता से कहा तो मैं भी जवान रखता हूँ । रतन मैं भी कह सकता हूँ कि रत्न जो रहे और जब तक सबूत के साथ चोर साबित नहीं हो जाता तब तक रतन तो में क्या? तो हॉस्टल में रहने वाला हर कोई यहाँ तक कि वार्डन भी पुलिस की निगाहों में चोर है । मैं अकेला नहीं मैं स्टूडेंट हूँ । पुलिस मेरी तलाशी तभी ले सकती है जबकि वो और उनकी भी तलाशी लेगी और कुछ कहकर उसने मुस्कुराकर सिगरेट सुलगा लिया । दीवान ने जो अब तक चुप बैठा था, जोश से नारा लगाया जीनियस जिन्दाबाद । उसके होठों पर मुस्कान और गहरी हो गई । रतन और विकास चले गए । पुलिस आई, पुलिस के कुत्ते आए, उंगलियों के निशान के विशेषज्ञ आये, कमरों की तलाशी ली गई लेकिन वह पकडा नहीं जा सका । रत्न या विकास ने कुछ नहीं बताया था किसी को पर वो उसकी आखिरी चोरी नहीं । इसके बाद ऐसा करने की वह हिम्मत नहीं कर सका क्योंकि अभी खतरे से खाली नहीं था । कुछ दिनों के बाद सीढियों वाले रुपये भी उड गए । हाँ, इन दो चोरियों से उसकी रुपयों की समस्या तो हाल नहीं हुई लेकिन इसके बाद वो और रतन बहुत करीब आ गई । चाहे उनके रहन सहन, जीवन और सोचने की शक्ति में आकाश पाताल का फर्क था फिर भी वह दोनों गहरे दोस्त हो गए थे । बेतकल्लुफी की हत्या हालांकि वो विकास को दोस्त नहीं बना सकता हूँ । एमेका पहला साल था, वो पास नहीं कर सकता है और उसे अगले साल होस्टल छोडना पडा । रत्न और विकास दोनों की हमें अंग्रेजी में उच्च द्वितीय श्रेणी आई थी । उसने दोबारा एम । ए । में दाखिला नहीं लिया क्योंकि उस पर अभी अच्छी तरह से जाहिर हो चुका था कि वह पढ नहीं सकेगा और वह सडक पर था । उसका कोई भविष्य नहीं था । भविष्य तो दूर उसका कोई वर्तमान भी नहीं था क्योंकि उसने कोशिश ही नहीं की थी अपने भविष्य को बनाने की । उसने पश्चिम की बहुत ही नकल शुरू की । वो हिप्पियों की तरह कर्म त्यागकर उदासीन होकर निकम्मा और निठल्ला बनकर आनंद की खोज में भाग खडा हुआ था । उसने आनंद खोजा, पांच पांच इंच लंबे बाल बढाने में, नाखून बढाने में, चार चार दिन तक स्नान न करने में, चोरी करने में, दूसरों का हक मारकर, खुद का पेट भरने में, केवल अपने ही शरीर में झांकने में, दूसरों की दया पर जीवन व्यतीत करने में और उसने सुख खोजा । चरस की सिगरेटों में, विस्की के पैमानों में, सरोज के शरीर में और कामचोरी, झूठे दिखावे और उदासीनता में उसने परिचय की भौडी और जिन्होंने नकल की थी और उसे कुछ नहीं मिला था । यदि उसे पश्चिम की नकल ही करनी थी तो काश वो उनके प्रेम, साहस, दृढता, एकता की नकल करता हूँ । उन की सनक की नकल करता हूँ । उसने रोमियो जूलियट का ड्रामा पढा इसकी फिल्म देखी और वह खुद को रोमियो मानकर जूलियट के पीछे दौड पडा । कहाँ है वो जूलियट संसार के नश्वर भोगविलास इच्छाएं काम वासनाओं के पीछे रोमियो बनकर नहीं दौडता । यदि उसे रोमियो मजनू और प्रेमी ही बनना था तो अपने देश की अपने घर की ब्रह्मविद्या का बनना चाहिए था अपने देश की ब्रह्मविद्या तीन दफा यानी कि दान, दया और दमन तीन अक्षर देना सहानुभूति और संयम अपने घर की ब्रह्मविद्या कई दिनों तक वो योगी घूमता रहा था और एक दिन जब रत्न से मिलने होस्टल गया तो उसके होठों पर मुस्कान थी क्या बात कोई शुभ सूचना लाए हो रतन ने मुस्कुराकर हाथ की वजह जानी चाहिए कोई खास नहीं । आजकल क्या कर रही हो? समय की प्रतीक्षा और जिंदा कैसे हो? जैसे पहले था तो आज कैसे भूल पडेगा? मुझे काम है रुपया चाहिए तो मेरा उत्तर तुम जानते ही हो । ऍम रतन ने ठंडा जवाब दिया लेकिन उसे बुरा नहीं लगा था । या तो इसलिए कि रतन एक बार नहीं दसियों बार उसे रूपया उधार दे चुका था और उसने कभी लौट आया नहीं था । अब रतन का अधिकार बनता था कि वो इतने साफ शब्दों में इंकार करते हैं, रुपया नहीं चाहिए । उस ने कहा रुपया नहीं चाहिए, रत्न चौक पडा ये आज में क्या सुन रहा हूँ । फिर रूककर पूछा था उसमें हूँ तो मुझे ड्रॉफ्टिंग करना, स्टेट्मेंट बनाना और कृषि करना सिखा सकते हो, पर ये सब क्यों सीखना चाहते हो? ऍफ इसर भर्ती हो गया तो क्या रत्न का मुंह आश्चर्य से खुला रह गया था । उसने सिर हिलाकर पुष्टि की तो चलो सिखाओ वो सब जो मैंने कहा था । रत्न खामोश होकर उसे सिखाने लगा और वह दो घंटों में सब समझ भी गए । उसने आने से पहले बुधवार को रतन को अपने फ्लैट पर आने को कहा और अपना पता उसे नोट करा दिया । रतन ने पूछा तरफ आ गया है आठ सौ रुपये स्टार्ट किया है, बुरा नहीं । ज्यादा जमकर काम करना । नौकरी करते हुए उसे कुछ ही महीने बीते थे कि उसका दिमाग फिर हवा में उडान भरने लगा । फिर से हवाई के लिए बनने लगे क्योंकि उसकी अंगुलियों में पांच सौ पचपन सिगरेट लगने लगी थी । वो सोचने लगा था तुम्हारे अंदर तो दुख उठाने की तूफान से लडने की हिम्मत है तो तुम जीनियस हो । तुम जो चाहे वह प्राप्त कर सकते हो । तुम्हारे लिए कुछ भी असंभव नहीं । फिर क्यों एक जगह आकर ठहर गए हो अपने जीवन को तुमने क्यों एक लक्ष्य पर आकर रोक दिया । अपनी उडान की हद को सीमित ना करूँ तो मैं बहुत आगे जाना है । बहुत आ गया तो मैं तो बहुत बडा आदमी बनना है । जीनियस जिसे दुनिया जानेगी, लोग जिसकी पूजा करेंगे जो लाखों में नहीं करोडों में एक होगा या फिर वो ये सब इसलिए सोच रहा था कि वह कोई काम नहीं करना चाहता हूँ । निठल्ला और उदासीन रहना चाहता था । दूसरों के आगे हाथ पसारकर और उनकी दया पर जीवित रहना, उसका भेद और सही मायनों में उसे पता ही नहीं था कि उसकी जिंदगी का दिए किया था । नौकरी में वेतन काम करने से मिलता था और वो निठल्ला दिन बिताना चाहता था और अब नौकरी से काम से बचने के दिल में बहाने सोच रहा था । एक दिन रतन के पास आकर उसने ऐलान कर दिया उसमें नौकरी छोड रहा क्यों रतन ने चौकर सिर उठाया । मैं आईएएस अफसर बनना चाहता हूँ पर आईएएस अफसर बनने से पहले परीक्षा और इंटरव्यू देना पडता है, जानता हूँ और इसीलिए नौकरी छोड रहा हूँ जिससे की जमकर पढाई करके तैयारी कर सकते हैं । आईएएस की तैयारी और नौकरी साथ साथ होगी नहीं पर करने वाला दोनों चीजें साथ साथ कर सकता है । मैं ये नहीं कहता कि कर नहीं सकता । दोनों चीजें साथ साथ पर मैं आईएएस में टॉप करना चाहता हूँ । एकदम से पहला नंबर और पहली पोजीशन नौकरी साथ साथ करते हुए नहीं आ सकती है । ये तो ठीक है पर तुम खाओगे कहाँ से? बाबू जी तीन कमरों का एक मकान छोडकर मारे हैं । मैं उसे किराए पर उठाकर किराये से अपना काम चला लूंगा । फिर एक ही साल की बात है । इसके बाद तो आई एस बनी जाऊंगा । खैर जब तुम फैसला ही कर चुके हो तो मैं क्या कह सकता हूँ । लेकिन एक बात मानोगे रतन ने गहरी सांस छोडते हुए कहा बोलो उम्मीदवार तक नौकरी नहीं छोडना । मैं द्वार को सुबह ही तुमसे मिलने तुम्हारे फ्लैट पर आऊंगा । तब तक तुम सोचो । यदि तुम्हारा यही निश्चय रहे तो नौकरी छोड देना आज बहुत है । तीन दिन में कोई फर्क नहीं पडता । रतन बोला ठीक है कहकर वो चला गया । इतवार को रतन सुबह ही आ गया । आते ही उसने कहा चलो मैं था । यहाँ से कुछ मिल पर एक मेला लगा हुआ है । कई दिन हो गए कहीं घूमने नहीं गए । मिला भी देखेंगे और घूम भी आएंगे । मधु मान गया वो मेला देखने निकल पडेंगे । जगह नजदीक ही थी इसलिए वह पैदल ही जा रही थी । चलते चलते रतन ने पूछा मधु तो उन्हें किसी से प्यार है क्या? मतलब तो मैं आज तक किसी से प्यार किया है नहीं । फिर भी तुम से कोई पूछे कि तुम किसे चाहते हो तो किसका नाम लोगे? उसने थोडा सोचकर जवाब दिया तुम्हारा मैं रतन ने इतना ही कहा और चुप हो गया । फिर वो खामोशी से चलते रहे । वो मेले में पहुंच गए । थोडी देर मेले में घूम कर वो चाय पीने लगे । चाय पीते हुए रतन बोला मुझे भी मत हूँ मैं जाने तुमसे क्यों क्या है? ये खुशी की बात है कि हम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं । यह कहीं तो एक काम करें ही नहीं । बोलूँ हम गोदना गोदने वाले से अपनी अपनी बाहों पर एक दूसरे का नाम लिख वाले कहते हैं । जिंदगी का कोई पता नहीं । एक बार भी छोडे तो शायद उम्र भरना मिलेंगे । वहाँ पर अपने प्यारे दोस्त का नाम होगा तो हमेशा याद आती रहेगी । बिलकुल ठीक कहते हो चलो अभी चल कर बाहों पर नाम लिखवाते हैं । उसने भी कल वो नाम लिखवाने के लिए मेले में ही खडे गोदना गोदने वाले के पास चले गए । पहले रतन ने अपनी वहाँ पर उसका नाम लिखवाया । केवल मधु ही नहीं अभी तो पुराना मधुकर और नाम जब लिखा जा रहा था, रतन उससे हंस हंस कर बात कर रहा था । फिर नाम लिखवाने का उसका नंबर है । गोदने वाले में सोई लेकर रतन का रा गोदना आरंभ कर दिया । तनिक हुई चुपके ही वह पीडा से तिलमिला उठा और उसने झटके से अपना हाथ खींच लिया । क्यों? क्या हुआ? रतन ने पूछा यार, बहुत दर्द होता है । उसका जवाब था तो मैं प्यार है । हम हम उससे हाँ और मेरा नाम लिखवाना चाहती हूँ । तो हाँ जबकि मैं तुम्हारा नाम तुमसे पहले हसन कर लिखा चुका हूँ । हाँ तो मधु दी ग्रेट यदि प्यार निभाना चाहते हो वहाँ पर मेरा नाम लिखवाना चाहते हो तो तुम्हें नाम लिखवाने का दर्द भी सहन करना पडेगा । उसने फिर से नाम लिखवाने के लिए अपनी बाहर आगे कर दी । लेकिन अगले ही क्षण तेजी से पीछे भी खींचते क्योंकि वह सुनी से होने वाली चुभन सहन नहीं कर सका । उसके कंधे पर हाथ रखते हुए रतन बोला रहने दो रहने दो मधु तुम लिखवा नहीं होगी । फिर नाम गोदने वाले की पैसे देकर वो लौट आए । वापसी पर रतन बोला मधु किसी भी चीज को पानी से पहले उसकी कीमत चुकानी पडती है । ये मत भूलो की हर चीज की कीमत भी चुकानी जरूरी है । और और क्या उसने पहुंचा ये नौकरी तो मैं सौभाग्य से मिली है । इसे छोड मत बैठना क्यूँ? क्योंकि तुम कभी भी आईएस नहीं बन सकते हैं पर क्यों? क्योंकि तुम इसकी कीमत नहीं चुका सकते । सुनकर उसके माथे पर बल पड गए । उसने रतन की बात मानी नहीं थी और नौकरी छोड दी थी । या तो इसलिए कि वह रतन की बात समझ नहीं पाया था या फिर इसलिए कि वह काम चोर था । कोई काम करना नहीं चाहता था । आईएस तो बहाना था कम से बचने का । पर किया था मतलब रतन की बात का । तब शायद यही कि अधिकतर लोग उस जैसे होते हैं जो कष्ट सहने से तो डरते हैं लेकिन पाना बहुत कुछ चाहते । रहता ने ठीक कहा था की जिंदगी में कुछ ठोस निश्चित लक्ष्य पाना है तो दर्ज रहना ही पडेगा । पहले सबसे पहले अपनी प्यारी इच्छाओं को कुर्बान करना होगा । प्यारी से प्यारी वासना को काटना होगा वो अपनी आ सकती को मिटा डालना होगा । रत्न आईपीएस अफसर बन गया था जबकि उस से मिली मिलाई नौकरी नहीं हो सकी । रतन ने अपना जीवन शुभ निर्मल उद्यान तथा अनुकरणीय बनाकर कीमत चुका दे दिए । उसने मंजिल पा ली थी और अब मंजिल पर पहुंचकर वह हर प्रकार का वैभव भोगने का अधिकारी था क्योंकि उसने मंजिल पाने के लिए पसीना बहाया था । मुस्कुराते हुए कीमत अदा किए और वह स्वयं वो खुद कीमत चुकाना नहीं जानता था । वो बस भीख लेना जानता था, देना नहीं । सुई की नोक के लगते ही वह दर्द से बिलबिला उठा था । उसने तीन बार नब्बे नब्बे रुपए खर्च करके आईएएस की परीक्षा में बैठने के फॉर्म भरे, लेकिन परीक्षा में वो कभी नहीं बैठा हूँ । तभी उसकी निगाहें सामने से आते रतन पर पडेगी । उसके साथ एक और आदमी था शायद कॉलेज का प्रिंसिपल । उसने रतन को गौर से देखा । रत्न दीपक की तरह खूबसूरती से जगमगा रहा था । छह फुट का कद होठों और गालों पर गुलाब जैसे गुलाबीपन चेहरे पर जीने का उत्साह, कदमों में दृढता, होठों पर मुस्कान है । वो डाली पर लगे पुष्ट की तरह हवा में हिलौरे ले रहा है । दीपक की तरह जगमगा कर जल रहा था । क्योंकि जैसे तेल बत्ती के ऊपर चढता हुआ प्रकाश में बदल जाता है, वैसे ही शरीर की समूची गति जिसकी गति अधोमुखी है, जो हमेशा नीचे जाने वाली है उस विषय वासना रुपये बाल शक्ति पोच को रतन ने ऊपर की तरफ बहाया था । क्योंकि जैसे तेल बत्ती के ऊपर चढता हुआ प्रकाश में बदल जाता है, वैसे ही शरीर की समूची शक्ति जिसकी गति अधोमुखी है, जो हमेशा नीचे जाने वाली है । उस विषय वासना रूपी बाल शक्ति कोच को रतन ने ऊपर की तरफ बहाया था । वो खुद अट्ठाईस साल की उम्र में ही बूढा लग रहा था । जिंदगी से थक गया था । उसे सहारे की आवश्यकता थी । उसने सहारा ले लिया गया । वहाँ क्यों को बाहों में बढाकर थाम लिया था उसने । रतन की दी हुई सिगरेट जलाली फिर मधुकर खडा हुआ था । अपने आप से दूर जिंदगी और जिंदगी की वास्तविकताओं से दो उसने बम्बई में आकर शरण ली थी । बम्बई जहाँ आकर उसने बडी बडी इमारतें देखीं । डबल डेकर बसें देखी । लोकल ट्रेने और ईरानी रेस्ट्रॉन्ट भी है । वो बम्बई इसलिए आया था कि वह रातोंरात लखपति बनना चाहता था । वो फिल्म में हीरो बनकर करोडों लोगों की धडकन बनना चाहता था । उसका विश्वास था कि बम्बई में दौलत, शोहरत और भविष्य सडक पर पडा है । बस जाने भर की देर है जाऊ और लूट फिल्म में हीरो बनकर । रात ही रात में लाखों रुपया समेटकर लोगों के दिमाग पर छा जाना कितना आसान है । और ये सब एक आईएएस अफसर नहीं कर सकता है । एक डॉक्टर या इंजीनियर नहीं कर सकता । वो करोडों में एक होगा । उसने बम्बई की चमक दमक देखी । इसका ग्लैमर और सैकडों इमारतें देखी । हजारों कार्य देखिए और वो इस शहर में अपना भविष्य उज्ज्वल देखकर वहाँ रहकर समय का इंतजार करने लगा । उसने दो चार अमेरिकी फिल्में देखी और वह हॉलीवुड के एक्टरों की तरह बातें करने लगा । उनकी तरह चलता उन की तरह बोलता और रहन सहन में भी उनकी नकल करने लगा । कुर्ता पाजामा फट गया था । अपने आप को पूरा आर्टिस्ट जाहिर करने के लिए उसने फ्रेंच कट दाढी रखे । बाल तीन तीन इंच तक बढा लिया । आसमानी रंग का जीन का सूट पहने लगा और अपनी तस्वीर को और रंग देने के लिए वो मूह में पाइप लगा लेता था । वो फ्रांसीसी कलाकार नजर आता था । जब किसी से वो बातें करता था तो पाइप के कष्ट नहीं लगता था बल्कि बाइक को उंगलियों में घूमाता रहता था और ये फिल्म ज्यादा उसने किसी अंग्रेजी फिल्म में देखी थी । वह पूरा फिल्मी हीरो हो गया और वक्त का इंतजार करने लगता है । जबकि उसके पास प्रोड्यूसर हाथ जोडकर आएंगे और कहेंगे कि चलो हमारी फिल्म के हीरो बना । आपके बिना फिल्म अधूरी पडी है । अब वक्त काटने के लिए भी कोई जगह तो चाहिए और उसने कॉफीहाउस सुन लिया । कॉफीहाउस जहाँ वो फिल्म में हीरो जो ये भी नहीं जानते की एक्टिंग क्या होती है वो लेकर जिन्होंने एक शब्द भी नहीं लिखा । वो शायद जिन्होंने एक शेर नहीं कहा वहाँ घंटों बैठे रहते हैं । वो कोई काम नहीं करती हैं, केवल बेतुकी बेसिरपैर की इन कला भी बातें करते हैं जो केवल बातें कर सकते हैं और इसके अतिरिक्त कुछ नहीं कर सकते हैं । उसने भी कॉफीहाउस ढूंढ लिया था क्योंकि वो भी केवल बातें बना सकता था । समय की प्रतीक्षा कर सकता था और कुछ नहीं । यहाँ भी उसने चार दोस्त ढूंढ लिए थे । नितिन जो मुंबई में डायरेक्टर बनना है । दीप प्रोड्यूसर रंजन फिल्में शायर और पवन कैमरामेन पांचवां वो खुद था जो हीरो बनने आया था और आया तो बन ही चुका था । बस चान्स मिलने की बात थी और वो पांचों कॉफी हाउस में जमे हुए थे । गिरो नितिन बोला ऐसा ले प्रोड्यूसर बन दिमाग है । वो नए चेहरे को अवसर नहीं देना चाहते हैं । नितिन ने शिकायत की लेकिन तुम तो एक फिल्म में काम कर चुके हो भी बोला और वह फिल्म पूरी नहीं हो सकी । नितिन गहरी सांस फिल्म भी पूरी नहीं हुई और कंपनी भी बंद हो गई । रंजन ने बात पूरी की । पता नहीं ये न्यू कवाई बीस बीस साल के जमे हुए बूढे हो सकता हीरो बनकर सोलह सोलह साल की हीरोइनों के पीछे भागते हुए ऐसे लगते हैं जैसे कि बात बेटी का पीछा कर रहा हूँ । दीप में वो बार निकाला पर इन प्रोड्यूसरों को कौन समझाए जो कास्ट पर मारते हैं । रंजन बोला और लडकियों जैसे छोकरे हीरो बने हुए हैं जिनकी शक्ल ना सूरत करना घाटी और हमारे हीरो को कोई पूछता नहीं जिसका चेहरा गोल है । आवाज में मतदान की पवन ने मस्का मारा क्योंकि उसने उसकी जेब में चमकती चार मिनार का पैकेट देख लिया था । इनकलाब की जरूरत है, एकदम जरूरत है । दीप ने कहा तुम्हारी क्या खबर है? उसने दीप से पूछा कोई खबर नहीं घर से तीस हजार उडा कर लाया था और इससे केवल दो रील बन सके । कोई डिस्ट्रीब्यूटर एडवांस देने को तैयार नहीं और ना ही कोई बयाज पर पैसा दे रहा है । बस फिल्म की दो रीले डब्बे में बंद हैं और मैं इंतजार की जिंदगी में बंद और तुम उसने कैमरामैन पवन से पूछा । फिल्म इंडस्ट्री में यदि कोई सबसे कठिन बात है तो वह है किसी सिस्टम का स्वतंत्रतापूर्वक काम करना और इंडस्ट्री में असिस्टेंट कैमरामैन से कैमरा मैन बनने के लिए बीस वर्ष चाहिए । तो क्या तुम असिस्टेंट बनने में कामयाब हो गए? रंजन ने टोली जो कि पिछले सवा साल से कई स्टूडियो के इर्द गिर्द जूतियाँ रगड रहा था, पर स्टूडियो में नहीं घुस सकता था । नहीं पवन बोला, असिस्टेंट में बनना नहीं चाहता और कैमरा मैन कोई बनाता नहीं । फिर ऍम भी रखे हैं तो आदमी रह सकता है । कोई बडी सिफारिश लाओ तब कहीं जाकर वह कैमरा मैन आॅफ नहीं । कैमरा कोहली रखेंगे और कोई पारिश्रमिक नहीं मिलेगा । पवन ने सच बता दिया था । शायर तुम्हारा क्या हाल है? उसने रंजन से पूछता हूँ रंजन फिल्मी शायर बनने बम्बई आया था जिसने शायद एक दिन भी कम नहीं किया था । पिता काफी पैसे छोडकर मारा था और एकलौता बेटा वही पैसा दोनों हाथों से बंबई में लुटा रहा था और काफी कुछ तो लूटा भी चुका था । रंजन अपने कपडे सादा हॉलीवुड की फिल्मी पत्रिकाएं देखकर सिलवा आता था और सिगरेट कभी भूलने नहीं देता था । शायर होने के बावजूद अच्छा लिवास रखने की हिफाजत उसने इसलिए की थी कि यदि गीत कर नहीं बन पाया और किस्मत ने जोर मारा तो हीरो ही बन जाये । शायद इसलिए इस ग्रुप में उसके अतिरिक्त हीरो बनने का दावा करने वाला रंजन दूसरा व्यक्ति था । वैसे उसका पहला लक्ष्य फिल्में शायर बनने का था । कॉफीहाउस के बाद जो वक्त बचता था उसमें रंजन पॉकेट बुक्स करीब था और अंग्रेजी उपन्यास पडता था । उसी उपन्यास से लाइने चुराकर उन्हें अपनी बतलाकर अगले दिन वो उन्हें सुनाता था । उन्हें ये सब सुनना पडता था क्योंकि अक्सर रंजन ही उन सबको कॉफी पिलाता था । उसके सवाल का रंजन ने एका एक जवाब नहीं दिया क्योंकि गहराई से कुछ सोचते हुए किसी बात का जवाब देना उसका अंदाज था । चाहे वह सोच कुछ नहीं रहा हूँ पर दिखाता यही था कि किसी बहुत गंभीर समस्या पर विचार कर रहा है ।

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मधुकर को सभी जीनियस कहते थे और वह था भी। लेकिन जीवन के हर मोर्चे पर वह असफल रहा। एक होनहार इंसान क्‍यों अपने जीवन से हार गया? क्‍या था इसका कारण? टूटा हुआ परिवार, सामाजिक व्‍यवस्‍था, विपरीत परिस्थितियां या खुद? यह उपन्‍यास जीवन के उतार-चढ़ाव और सामाजिक जीवन की सच्‍चाई को बताता है।
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