Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

भाग - 16

Share Kukufm
भाग - 16 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
918Listens
"फंस जाओ मेरे लिए" का दूसरा भाग जो रीटा सान्याल की खोल सकता है पोल। क्या हुआ जब वो हवेली पहुंच गई? आखिर मैडिकल साइंस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स और पुलिस इन्वेस्टीगेशन को कैसे चकमा दिया उसने?
Read More
Transcript
View transcript

अध्याय सोलह घटनाओं की दूरी या बडी तेजी के साथ वहाँ पर सुस्ती चक्कर पर घूमने शुरू हो गई थी । जहाँ रीता सान्याल ने कभी आपने चाला दिमाग से कुछ खूनी अध्याय लिखे थे । मुंबई के कल्याण इलाके में बना बेहद फेमस कस्तूरबा गर्ल्स हॉस्टल जहाँ आज भी देश के कोने कोने से लडकियाँ कर रहती हैं और अपने आपको तथा अपने इज्जत को महत्पूर्ण समझते हैं । दोपहर के उस समय एक बच रहे थे जब मथुरादास एलएलबी ने हॉस्टल की वार्डन रेनूका चौहान के ऑफिस में कदम रखा बैठे चालीस वर्षीय बेहद गरिमामयी पर्सनालिटी कि मालिक रेणुका चौहान ने अपना सुनहरी फ्रेम का एक दोस्त क्या तथा फिर उसे बैठने के लिए कहा । मथुरादास एक कुर्सी खींच कर बैठ गया । इस समय मथुरा दास एलएलबी का व्यक्तित्व काफी व्यवस्थित था जैसे उसने अपने बाल सवारे हुए थे । गाडी में भी कंघा फेरा हुआ था और सबसे बडी बात तो ये कि उसके मुझसे राम कि गंदगी नहीं आ रही थी । मैं गोवा से आया हूँ । मेरा ना मथुरादास है मथुरादास एलएलबी शालीन रहते में बोला एक महीने बाद में अपनी बेटी का यहाँ मुंबई शहर के कॉलेज में एडमिशन कराने वाला हूँ । लेकिन मेरी दिल्ली अच्छा है कि वो आपके इस हॉस्टल में ही है क्योंकि मैंने अनुशासन के मामले में आपके हॉस्टल का बहुत नाम सुना है । उसने एक मनगढंत पिस्ता बयान किया क्यों नहीं तीनों का चौहान आपकी बेटी जरूर हमारे हॉस्टल में रहेगी आप कृपया अपने हॉस्टर के नियम और फीस मुझे बताती । नियम बिल्कुल वही है जो किसी भी एक आदर्श परिवार के होनी चाहिए देने का चौहान ने । फिर आपने सुनहरी फ्रेम का एनल दुरुस्त करके बोला नहीं उन सबको अपनी सगी बेटी की तरह समझती । इसीलिए उन के हित में जितने भी प्रतिबन्ध होनी चाहिए वो सब प्रेस हॉस्टल के अंदर है तथा मैं उन्हें कडाई से लागू करती हूँ । और फीस फीस सिर्फ पंद्रह हजार रुपए । महीना ठीक है । मुझे आपकी सारी बाते पसंद है । मथुरादास एलएलबी बोला अगले महीने में अपनी बेटी का । कॉलेज में एडमिशन कराने के बाद उसे सीधा यही लेकर आऊंगा । तभी मथुरादास के लिए चाहे आ गई उससे चाय की चुस्कियां भरते हुए बातें बातों में पूछा हमारे गांव में कुल लेडी आना ऍम थी बहुत बडी फॅमिली बहुत बडी बिजनेस टाइप को ग्रेड सोशल । शायद आपने उनका नाम सुना हूँ । हाँ, ऐसा क्यों नहीं? रेणुका चौहाण? पूरन पोली मैंने खूब अच्छी तरह उनका नाम सुना है ऍम मैंने सुना था । उनकी बेटी जूलिया भी आपके हॉस्टल में रहती थी । मथुरादास फॅमिली अपने आगे से कोर्ट है । बोला हाँ हाँ बिल्कुल । रेणुका चौहाण । फौरन कहा जूलिया इस हॉस्टल में काफी टाइम तक रही । क्या आप उस से मिले? उसकी तबियत अब कैसे कभी याद? मथुरादास के दिमाग में अनार पटाखे छूटते? क्या वहाँ कुछ बीमार हो गई थी? रेणुका चौहाण बताने वाली थी कि वहाँ ड्राॅप बन गई थी, लेकिन जल्दी उसे हॉस्टल की इज्जत का खयाल आ गया और वो इस बात को छुपा गई । नहीं नहीं मैंने ऐसे पूछ लिया उसकी तबियत के बारे में । लेकिन रेणुका चौहान के जुबान से निकला हुआ एकलौता शब्द मथुरादास के दिमाग में शक्ति एक साथ हजारों घंटियां मचाता चला गया और शायद ही तो वो धरती है जहां जासूसी की शुरुआत होती है । ठीक है मथुरादास एलएलबी चाय पीने के बाद कुर्सी है खडा हुआ मैं भी जा सकता हूँ । नमस्ते नमस्ते रेणुका चौहान ये अपने दोनों हाथ जोडकर ऐसे खडी हो गई । एक बार मथुरादास एलएमवी पहली ही मुलाकात में हो । अच्छी तरह समझ गया था कि उस हॉस्टल के अंदर जूलिया के साथ जरूर कोई घटना घटी है । कोई ऐसी सनसनीखेज घटना जैसे बताते हुए रेणुका चौहाण जैसे आदर्शवादी और अब के जवान भी कम गए । हम उसे सबसे पहले उसी घटना के बारे में पता लगाना था । वो आखिर क्या घटना थी? उसी शाह मथुरादास ने एक नया नाटक रचा उस हॉस्टल का जो नाइट वॉचमैन था, जोकि एक नेपाली था । मथुरादास एलएलबी शाम होते उसने पहली के बाद जा पहुंचा तथा उसके पास पहुंचते ही वह पछाड सीखाकर नीचे गिरा और तुरंत उसके तहत बताई है । नेपाली जोर से बिदका, जबकि उसके पैर कसकर पकडते । मथुरादास एलएलबी लगा बुक का बाहर का जोर जोर से रोने बहुत नेपाली की छक्के छोटे क्या हुआ अब आपका ॅ मेरे को बात मत बोल । मथुरादास एलएलबी लडकियों से होता हुआ होगा । तू ऍम मेरी माँ है तो मेरा भाई तो मेरा सब कुछ आज ही शाम कॉमेडियन आदमी है । नेपाली ने आदत के मुताबिक छोटे सबको बडा शब्द बोला । निर्माता वहाँ भी कुछ विश्वास हो रहा तू मेरे भी बच्चे पिछले तीन रोज भूखे है । मथुरादास ने कल अप कराओ । जोर जोर से आवाज निकली तो ये बात आश्रालय नेपाली ने उसे खतरनाक नजरों से पूरा दिखा रही है । भीख मांगने का ये जॉॅब निकाला नहीं में अधिकारी नहीं हूँ । फिर मैं स्वाभिमानी आदमी हूँ । मैं थोडा ध्यान से होता हुआ बोला । मेहनत मजदूरी करके अपने बीवी बच्चों का पेट भरना चाहता हूँ । फिर मैं क्या करूँ तो मुझे नौकरी दिलवा दूँ तो मुझे नौकरी दिलवा हो गया तो मैंने बहुत बडा एहसान होगा तुम्हारे बीवी बच्चे सुखी रहेंगे लेकिन मैं तो ये नौकरी कहाँ दिलवा सकता होगा । ये वाली बोला मैं तो खुद नौ करूँ ठीक है तुम तुम भी ना करो लेकिन विश्वासपात्र नौकर मालिकों के या तीन जीते हुए नौकर शेफर पडता पडता है तो मालिकों से कहते मुझे नौकरी दिलवा सकती हूँ तो मुझे अपने इसे हास्य में नौकर रखा सकते । मैं झाडू दे दूंगा, बर्तन मांज लूंगा, चौकीदारी कर लूंगा बात तुम जो कहोगे मैं करूंगा । मेरे बीवी बच्चों के वास्ते दो रोटी का सवाल है हम मेरे पैर तो छूट नहीं पता ऍम हुआ था अब तो मेरे पहले छोड मथुरादास ने उसके पहले छोड दिए तो मेरी नौकरी पक्की तो खुशी से उछल कर खडा हुआ वैधशाला घनचक्कर ऍम वैसे भी तेरी जानकारी के लिए मैं बता दूँ इस हॉस्टल में काम करना कोई आसान बात नहीं क्यूँ क्योंकि आॅफ खुराफाती लडकी रहती है जो दो दिन में अच्छे वाले आदमी को पागल बना दे । नहीं नहीं नहीं मुझे नौकरी जरूर चाहिए । माॅग दे रहा है अगर तुम मुझे नौकरी दिलवा आओगे तो मैं हर महीने अपनी तरफ का एक चौथाई हिस्सा तुम्हे दे दिया करूंगा । एक चौथाई हिस्सा हाँ, हर महीने हाँ नेपाली की आंखों में और लालच की तेज चमक कौन थी? उसने अपने शीर्ष कदमों पर जवान फहराएंगे आप तेरा आइडिया बुरा नहीं नेपाली कौतूहल मुद्रा में बोला मैं तेरे को कम से कम इस आखिरी वाली बात के आवाज में यहाँ नौकरी जरूरत था । लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस हॉस्टल में ऐसी घटना घट गई है कि अगर मैं माता रेणुका चौहान से तेरी सिफारिश करूंगा विवाह तो वो तेरे को इधर नौकर नहीं रखने वाली पहुँच कल बहुत शोर समझकर एक कदम उठाते हैं क्यूँ मथुरादास ऍम तुरंत चौकस हुए । इधर हॉस्टल में ऐसी क्या घटना घट के वो आखिर ऐसा कोई राज जानने के लिए तो ये सारा नाटक कर रहा था । फॅमिली चूलिया नाम की एक लडकी रहती थी नेपाली बेहद साॅल्वर में फस पैसा है इस हॉस्टल में रहते रहते वो लडकी एक गाडी हो गई । हाँ ऍम मथुरादास के दिमाग में जोर से बम बता हाँ ड्राॅ । लडकी का नाम क्या बताया तुम्हें? जूलिया वो हुआ की रहने वाली बात और भी साफ हो गयी । पाॅलिसी बाबा का जिक्र कर रहा था वो लडकी ड्राॅ किस तरह बनी मालूम नहीं बाप और ड्राॅ किस तरह बनी वाश एक दिन वो बेहोशी की हालत में हॉस्टल के लॉन में पडी पाई गई । तभी पता चला कि वह ड्राॅप बन गई है । उसके शाह ही हॉस्टल में दो लडकियाँ रहती थी तो कमरा नंबर दो सौ तीन उसकी रूम मेट थी । उसकी शैली आदि उन लडकियों के नाम क्या है एक का नाम रख दिया था और नेपाली अपने दिमाग पर जोर डालते है, बोला था और दूसरी लडकी का नाम ऍम । मथुरादास एलएलबी की उस घटना क्रम में उत्सुकता बढती जा रही थी । कुछ दिन वहाँ आप तीनों बहुत पक्के शायरियां भी जूलिया के ड्राॅप बनने का भी उन सभी को वो दुख का । उसके बाद उन तीनों ने यह हॉस्टल छोड दिया । उनका कहना था, वहाँ हॉस्टल में नहीं रहेंगे । जहाँ उनकी इतनी प्यारी शहरी ट्राॅफी बन गई वो तीनों यहाँ से कहाँ गई? मुंबई में एक फॅमिली है जो ऍम क्लब के बराबर है बना हुआ है । फिर उन तीनों ने वही अपना पडा उठाना शोर और आज का दिन । आप तब से हमारी मैडम दो अलर्ट हुई है अब हॉस्टल, शीशम, बंधते के कदम बहुत सोच समझ कर उठाते हैं । वो किसी भी नया आदमी को आसानी होस्टल में नौकरी की परमिशन नहीं रहती । वो मथुरादास एलएलबी ने अपने चेहरे पर गहन तुर्की भाव पैदा किया । अगर ये बात हैं तो फिर मैं भी तुम्हारे ऊपर नौकरी के लिए ज्यादा दबाव नहीं डालूंगा । मैं कहीं और नौकरी तलाश दूंगा । ठीक है मैं चलता हूँ । नेपाली वाच मैंने भी बडी संजीव जी के साथ अपनी करता नहीं आई । जबकि मथुरादास एलएलबी लडखडाते कदमों से अब आगे की तरफ बढ गया । गली के मोड पर पहुंच गई । उसने रानी की जो है उसका दिमाग इस समय काफी स्पीड से चल रहा था । जिस जूलिया सेवा ऍम मिलकर आया था वो कम से कम उस लडकी के बारे में एक बात बिल्कुल साफ कह सकता था कि वो लडकी हाल फिलहाल में कभी ऍफ नहीं रहे । क्योंकि एक ड्राॅप के चेहरे पर जो लक्षण होनी चाहिए ऐसा कोई लक्षण उसके चेहरे पर नहीं था । वो पूरी तरह टाॅप लडकी थी । तो क्या मुझे सचमुच जूलिया नहीं थी? मथुरादास एलएलबी फिर उस होटल में पहुंचा जो रागम क्लब के बराबर में बना हुआ था और जहाँ कभी वो तीनों सहेलियां एक साथ रहती थी । हाँ, ज्यादा वजन का अकाउंट क्लब बोला वो तीनों लडकियां हमारे इस होटल में रही थी कितने पदमदास? एलएलबी ने पूछा आज ज्यादा दिन तो नहीं रहें? ऍम मुश्किल से दो तीन दिन उन्होंने आपको सारे क्या? इस बीच कोई खास घटना घटी? नहीं । कोई खास घटना नहीं घटी तरह उनमें से एक लडकी बहुत बीमार थी । वो ज्यादातर कमरे में रहती थी । लेकिन एक रात उसकी तबियत बहुत ज्यादा खराब हो गई । मुझे ऐसा लगा कि वो भी वो भी हो गई थी । उसी रात उसकी वो दोनों सहेलियों से हॉस्पिटल ले जाने के लिए यहाँ से नहीं तो फिर कभी वापस नहीं लौटी । बल्कि हमारे होटल का तो रूम जांच भी उनके ऊपर बाकी है । क्या ये मालूम हो सकता है कि जिस लडकी की तबियत खराब हुई थी उसे क्या बीमारी थी? नहीं काउंट एक लाख में इंकार में करता है । ये तो नहीं हो सकता । ऍम बीमार होने वाली लडकी का नाम क्या था? जूलिया काउंट एक लाख का थोडा सशंकित सर हाँ, उसका नाम जो लिया था ऍम पक्का उस लडकी की बीमारी के टाइम की कुछ हालत बयान कर सकते मथुरा ऍम भी पूरा मेरा मतलब है । उस वक्त उसकी कंडीशन कैसी थी । ये बिल्कुल बयान कर सकता हूँ । काउंटर पूरा उस लडकी की तो उस वक्त बहुत बुरी हालत थी । आंखों के नीचे काले काले इकट्ठी बडे हुए थे । चेहरे कर्म बिल्कुल पीला पड चुका था । जैसे किसी में है उसके शरीर का सारा खून छोड लिया । इसके अलावा बीमारी के कारण वह सूखकर ऐसे काटा बन चुकी थी कि उसे देखकर ऐसा महसूस होता था वो इस दुनिया में मुश्किल से चंदेक रोज की मेहमान है । धन्यवाद मुझे तुमसे बस यही सब कुछ कुछ था । फॅस कर हाथ मिलाया तथा फिर वो हो गया उसे भी बिता हुआ काउंट । एक लाख ने जूलिया की जो हालत बयान की थी उसके बाद तो ये बात और भी ज्यादा पुख्ता तौर पर साबित हो जाती थी कि जो लडकी समय आना पान इसमें थी तो किसी भी हालत में झुरिया नहीं । मथुरादास के दिमाग में शक्ति और सफर दस घंटे हाँ मछली लगी । उसे बूटा राम का शक सही महसूस होने लगा । मथुरादास एलएलबी फिर अंधेरी पुलिस स्टेशन पहुंचा । अंधेरी पुलिस स्टेशन का इंचार्ज आत्माराम मोटलानी नाम का एक बडा क्रूर सा मराठा था परन्तु क्रूर वो सिर्फ अपराधियों के लिए था । वैसे यारों का यहाँ था यारी में अपनी जान लुटाने वाला था और मथुरादास पर तो वो खास तौर पर मेहरबान था । किसी जमाने में मथुरा दास और आत्माराम क्लास सालो रहे थे । आप मारा मोटलानी की उम्र भी पचास के ऊपर । क्या वो बहुत जल्दी पुलिस की इस नौकरी से रिटायर होने वाला था । मथुरादास एलएलबी को देखते ही मोटलानी की बात है कि मेरे गरजते शेयर मोटलानी तुरंत कुर्सी छोडकर खडा हो गया । रुपये ईद का चार हो गया मथुरादास बल्कि ईद का चांद भी साल में एक जगह दिखाई दे जाता है । तेरह और परेशानी नहीं होते । वाही दो तरह के आदमियों से कभी आई नहीं करनी चाहिए । मथुरादास एलएलबी उसके नजदीक पहुंचकर पहला शराबी और दूसरा जिसका ठोर ठिकाना और इत्तेफाक से ये दोनों गुड मेरे अंदर है । आत्माराम मोटलानी के चेहरे की सारी खुशी का फूल हो गए तो ऐसी दिल तोडने वाली बात करता । मथुरादास तो मालूम मेरे जगह में कैसा साल मुख्याल पैदा होता है । मुगलानी कुपित होकर मेरा जगह चाहता है कि मैं अभी किसी फर्जी जुर्म में तेरे को हवाला के अंदर ठूस दूर था । फिर तरीख, ऊब पकडे डंडे से लडाई कर मथुरादास दिल खोल कर रहा हूँ । अपनी तमन्ना पूरी क्यों नहीं करता मोट लाने । मथुरादास एलएलबी बोला मैं नहीं करता आप मारा मोटलानी का कलब पासवर्ड पूछा कम महाद नंबर डंडे से तेरी रघुराई करूंगा तो चोट तो मेरे दिल को भी लगेगी । आखिर तो यार मेरा यार आप मारा मोटलानी ने एक का एक मथुरादास का अपने गले से लगा लिया । मथुरादास एलएलबी उस क्षण चल पाती हुए बिना नहीं रह सकता था । घर छोडने सारी बातें मोटलानी ने उसे अपने से अलग क्या बैठ मथुरादास एलबीए कुर्सी खींचते हैं । मतलानी भी अपनी कुर्सी पर विराजमान था । अब ये बताओ कैसे आना हुआ? तेरा मोटलानी बोला क्योंकि बिना मतलब के तो तू दर्शन देने वाला नहीं जरूर कोई ना कोई पंगे वाली बात होगी । ठीक है देखो तो साले को कैसे? रॉब से कह रहा ठीक का मैंने मोटलानी भूल गया । मथुरादास एलएलबी ने बत्तीस चमकाई फिर अपनी चेस्टर की जेब से राम का क्या निकाला तथा उसका ढक्कन खुला क्या होगा उसने? क्या अन मोटलानी की तरह पढाते हैं ये घोडे का पैसा तुझे मुबारक तो पीस । मथुरादास एलएलबी ने मुस्कुराते हुए हम के कई सारे घूम रही है । किस्सा क्या है? मोटलानी थोडे बेसब्री के साथ बोला आज रात पुणे पुलिस का पूरा लाव लश्कर साथ लेकर एक जगह धार मार नहीं कहाँ कस्तूरबा काॅस्ट कस्तूरबा ऍम मोटलानी चौका वही जो कल्याण के इलाके में बना । जिस हॉस्टल की वॉर्डन रेणुका चौहाण वाई हिस्सा क्या मेरे भाई मथुरादास एलएलबी ने पूरा किस्सा उसके सामने बयान क्या आत्माराम मोटलानी गंभीर हो कोई गडबड तो नहीं होगी ना? मोटलानी बोला बेसिक रहे हैं मथुरादास एलएलबी ने राम का यहाँ और भरा कोई गडबड नहीं होगी थी है तो कहता है कि कोई गडबड नहीं होगी तो नहीं होगी तो वकील आदमी आया जासूस आदमी है ये बात तो मेरे से कहीं ज्यादा बेहतर समझ सकता है । उसी रात ठीक ग्याहरा बजेंगे जब कस्तूरबा गर्ल्स हॉस्टल की तमाम लडकियाँ अपने अपने कमरों में सोने की तैयारियाँ कर रही थी । वहाँ चारों तरफ सन्नाटा फैल चुका था । तभी का एक मुंबई ऍम में से कोई दर्जनभर पुलिस कर्मी नीचे कूद तथा तुरंत हॉस्टल के चारों तरफ फैल गए । अपने अपने बिस्तरों में सोने जा रही हॉस्टल की लडकियों को भी जब ये पता चला की वहाँ पुलिस की रेट बढ गई है तो वह सब डर गई । फौरन दौडी दौडी नहीं चाहिए । उस घटना ने रेणुका चौहान के भी छक्के छुडा दिये थे । मथुरादास एलएलबी क्योंकि उस समय पुलिस के साथ था इसलिए मथुरा राज को देखते ही न सिर्फ ट्रेनों का चौहान पहचान गए बल्कि नेपाली भाजपा भी पहचान गया । हमें इतना मिली है कि आपके हॉस्टल में जुडिया नाम की एक लडकी रहती थी जो यहाँ रहते हुए ड्राॅप बन गई । आत्मा ना मोटलानी बडे कठोर स्वर मेरे होगा जहाँ से संबोधित हुआ और फिर बाद में उसे मजबूरन अपनी दो सहेलियों के साथ ही हॉस्टल छोड कर जाना पडा । ये ये सब झूठ है । रेणुका चौहान ने उस बात का जबरदस्त विरोध किया । जरूर किसी ने आपको झूठी इन्फॉर्मेशन दिया है । मथुरादास एलएलबी ने वहीं अपने बराबर में खडी नेपाली वाचमैन का कसकर गिरेवान पकड लिया तथा फिर गिरेबान पकडे पकडे उसे झटके से आगे क्या जो बाजु लिया के बारे में तुमने मुझे आज बताई थी । वह एक बार फिर से दौराव तो नेपाली वाष्पन की गिनती बन गयी । वो सूखे पत्ते की तरह कांपने लगा, जल्दी वॅाक रहा वरना पुलिस से साक्ष्य छुपाने के काम में तुम्हें सजा भी हो सकती है । तुम जेल भी जा सकते हैं सीधा साधा नेपाली जेल जाने के नाम पर और भी ज्यादा भाई भी ठीक ठाक थर थर कांपते हुए उसने ये बात स्वीकार कर ली की उस हॉस्टल में रहते हुए सचमुच जूलिया नाम की एक लडकी ड्राॅ गई थी आपका ये है मैडम । नेपाली वॉचमैन की ये बात स्वीकार करते ही मथुरादास एलएलबी मानो शेर बंद था । वो गरज ते हुए ही रेणुका चौहान की तरफ घूमा । क्या भी आप यही कहेंगे कि ये सब झूठ है? मुझे झूठी इन्फॉर्मेशन हुई है । वैसे आप की जानकारी के लिए बता दूँ कि ये राज मुझे पहले से ही पता था । मैं तो सिर्फ इस बात की जांच करने के लिए ही यहाँ आया था । मैं आज सुबह खुद अपने भी जूलिया की तबियत के बारे में पूछ कर ये बात कुछ कमोवेश स्वीकार करी ली थी कि यहाँ वह ड्राॅप बन गई थी । रेणुका चौहाण के अब सारे कॅश उसकी गर्दन लटक हाँ ये सच है । रेणुका चौहान ने बहुत भारी मन से यह कुबूल किया । जूलिया यहाँ रहते हुए ॅ बन गई । लेकिन इसमें हम लोगों का कोई खुश नहीं । हमें तो यही नहीं मालूम कि उसे ड्रग्स की लत लगी कहाँ से ब्लॅक बन गई है । हमें तो ये राज भी एक दिन तब पता चला जब हॉस्टल के कंपाउंड में बेहोश पडी पाई गई । एक बात का मेरा आज भी दावा है किस बात का उसे ड्रग की ये लत कम से कम हॉस्टल के अंदर से नहीं तो आखिर एक वाकिंग थी । वो सारा दिन हॉस्टल से बाहर रहती थी । ऐसी हालत में वो कहाँ जाते हैं क्या करती है हमें क्या मालूम जूरिया के साथ साथ रजिया और रीता शर्मा ने भी हॉस्टल क्यों छोड दिया था । हाथ मारा मोटलानी हम दरअसल वो दोनों लडकियाँ दुनियाँ से बहुत प्यार करते थे । रेणुका चौहान ने बताया सच बात है कि हॉस्टर जूलिया ने नहीं छोडा था बल्कि रजिया और रीता शर्मा ने छोडा था वो दोनों लडकियाँ किसी ऐसी जगह नहीं रहना चाहती थी जहाँ रहते उनकी इतनी प्यारी सहेली ड्रग जैसी लग का शिकार बने । इसीलिए वो जूलिया को लेकर इस हॉस्टल से चली थी । बाकी मैंने उन दोनों से कहा भी मुझे लिया को उसकी माली आना गुलजार जिसके पास छोडा रईस औरत है वो जूलिया का किसी ड्रॉ रिहैबिलिटेशन सेंटर में ज्यादा अच्छा इलाज करा सकते हैं । भरवा दोनों सहेलियां क्या बोली मथुरादास एलएलबी ने पूछा वो दरअसल अपनी सहेली के प्रति को ज्यादा इमोशनल थी रेणुका चाहती थी । उन्होंने मेरी बात के जवाब में कहा कि नहीं वो पहले अपनी सहेली का मुंबई में ही इलाज करवाएंगे तथा फिर उसे लेडी आना गुंजाल जिसके पास छोड कराएंगे जाता है । आपको कितना समय गुजर गया? अब मुश्किल से बीस बाइस तक मथुरादास एलएलबी के चेहरे पर अब ढेर सारी लकीरे खींचकर इंस्पेक्टर आत्माराम उठ लाने की निगाह भी उसी के ऊपर थी । अगर आपको कोई हो तो मैं उस कमरा नंबर दो सौ तीन को एक नजर देखना चाहता हूँ । मथुरादास ऍम बोला जिसमें कभी वो तीनों सहेलियां एक साथ रह कर दी थी हो तो हमें क्या ऐतराज हो सकता है । रेणुका चौहाण तुरंत हुई मैं अभी आप लोगों को वो कमरा दिखा देती ये कोई काम बडा इत्तेफाक ना था कि जिस कमरा नंबर दो सौ तीन में कभी रीता सान्याल ने अपने उस खतरनाक खेल की आधारशिला रखी थी वो कमरा नंबर दो सौ तीन अभी तक खाली पडा होगा । फॅसे वो तीनों सहेलियां उस कमरे को छोडकर गई हैं । सबसे कमरा बिल्कुल उसी तरह खाली पडा है । रेणुका चौहाण कमरे का ताला खोलकर इसके अंदर दाखिल होते हैं । रेणुका चौहाण ने अंदर पहुंचकर लाइट चलाई । तुरंत ट्यूब का प्रकाश वाहन चारों पर अपने घर गया । देर उनका चौहान के पीछे पीछे मथुरादास ऍर आत्माराम मोटलानी ने भी कमरा नंबर दो सौ तीन सौ कदम है । उनके पीछे पीछे कुछ पुलिस करने तथा कुछ लडकियाँ भी वहाँ घुसा । यानि उन तीनों के बाद इस कमरे के अंदर कोई नहीं रहा । नहीं, बिलकुल नहीं । जहाँ तक मैं समझती हूँ तब से कमरा खुला भी । आज ही मथुरादास एलएलबी ने एक बार चारों तरफ खून कर उस कमरे का अच्छी तरह हुआ है ना । फिर उसने बडे सूक्ष्मा अंदाज में उस पूरे कमरे की तलाशी लेनी शुरू की । मथुरादास की तलाशी लेने का अंदाज कुछ ऐसा था मानो खुर्दबीन से किसी चीज को तलाश रहा । वो छोटे से कमरे की लगभग आधे घंटे तक तलाशी लेता रहा । लेकिन उसे वहाँ कोई भी काम की वस्तु नहीं । अंत में वो थक हारकर कमरा नंबर दो सौ से बाहर नहीं कराया । उसके पीछे पीछे सब बाहर आ गए । कमरे का वापस टाला लगा दिया गया । आपके हॉस्टल के रजिस्टर में उन तीनों लडकियों का फूल रिकॉर्ड भी तो होगा । मथुरादास एलएलबी काफी सोच विचारकर पूरा मैं वो रिकॉर्ड चेक करना चाहता हूँ । सौरी ऋण का चौहान बोले हमारे पास अब उन तीनों लडकियों का कोई रिकॉर्ड नहीं है की क्या मतलब? मथुरादास बुरी तरह चौंका रिकॉर्ड कहाँ गया? दरअसल उन तीनों लडकियों के जाने के बाद जब हमने एक दिन यूँ ही वो रजिस्टर चेक किया जिसमें उन तीनों लडकियों का फुल बायोडेटा मौजूद था तो रजिस्टर में से उनकी डिटेल वाली तीनों पन्ने ही हमें नहीं मिले । बनने की इसमें भारतीय मथुरादास एलबीके हैरानी और बढेगा । हम ये रहस् पता नहीं चला कि वह पन्ने किसने भारतीय लेकिन जहाँ तक मेरा अनुमान है रोनी तीनों में से किसी लडकी की हरकत थी । उसने जाने से पहले सारा रिकॉर्ड नष्ट कर दिया था । अब मथुरादास एलएलबी के दिमाग में शक का पेज और ज्यादा गहराने लगा । लडकियों ने जाने से पहले वो रिकॉर्ड नष्ट क्यों? क्या क्या चक्कर था इसका मतलब शुरू से ही कोई मना चाह रही थी । क्या उनके हॉस्टल छोडकर जाने के पीछे भी कोई षड्यंत्र था? मथुरादास एलएलबी ने उस संदर्भ में जितना सोचा उतनी ही उसके दिमाग में उलझन पडी । जूलिया को छोडकर वो जो बाकी दो लडकियाँ थी । मैं उन दोनों लडकियों के बारे में वो तमाम बातें जानना चाहता हूँ जो आपको मालूम है । मथुरादास के तीनों का चौहान से संबोधित जैसे वो लडकियाँ क्या करती थी? कॅश था और उनकी आदतें कैसी थी । ऍम तो काफी लंबे पीरेट्स तीस हॉस्टल में रहती थी । तीनों का चौहान ने उन दोनों लडकियों के बारे में विस्तारपूर्वक बताना शुरू किया । वो कहीं नाईट शिफ्ट में जब कहती थी रोजाना रात को वो हॉस्टल से नौ बजे तक चली जाती और फिर दिन निकाले लौट वो कहाँ जॉब करती थी ये मुझे नहीं मालूम । इसके अलावा रजिया जूडो कराटे की भी जबरदस्त चैंपियन थी और राम उसने रोजमरा प्रैक्टिस करने के लिए बाकायदा एक जूडो कराटे क्लब भी जॉइन किया था । आपका नाम क्या था? जहाँ इनका ये क्लब तो शायद उसी होटल के पास है । मथुरादास एलएलबी ने नेपाली वॉचमैन की तरफ देखा जिसमें वो तीनों लडकियां यहाँ से जाने के बाद रही थी । वहाँ और रीटर शर्मा क्या करती थी? मथुरादास थे रेणुका चौहान से हूँ । रीता शर्मा डाॅक्टर थी और फिल्मों तथा टीवी सीरियल में स्ट्रगल कर रही थी । इसके अलावा जैसा की वो बताती थी उसे कुछ फिल्मों में तथा टीवी सीरियलों में कुछ छोटे मोटे रोल भी मिली थी । रीडर शर्मा के बारे में कुछ ज्यादा जानकारी मुझे इसलिए भी नहीं है क्योंकि वो अभी कुछ दिन पहले हॉस्टल में आकर नहीं थी । रीता शर्मा तथा जूलिया के बारे में एक बात मैं भी जानती हूँ । तभी भीड में खडी हॉस्टल की एक लडकी है । उस लडकी ने गुलाबी कलर की शॉर्ट ड्रेस पहनी हुई थी और उसके बाद बडे खांसी बाप का स्टाइलिश थे तो मैं क्या बात जानते हैं उन दोनों के बारे में । मथुरादास एलएलबी ने उस लडकी की तरफ देखा । अब दरअसल वो सहेलिया एकबार कैंटीन में बैठी पडी धीमी धीमी आवाज में कुछ बातें कर रही थी । उसी वार्तालाप में मुझे मालूम हुआ कि आजकल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बडे शोमैन सुभाष चोपडा ड्रग्स के ऊपर कोई फिल्म बना रहे हैं । उसमें ड्राॅप लडकी का कोई ऐसा बहुत ही पाॅवर रो था कि जो लडके भी उस रोल को करती उसी के नाम के पूरी फिल्म इंडस्ट्री में झंडे कर जाते हैं । फिर सबसे बडी बात ये थी कि सुभाष चोपडा को उस रोल के लिए किसी बिल्कुल नहीं लडकी की तलाश थी । उस दिन लीटर शर्मा कैंटीन में बैठो । जूलिया से कह रही थी कि अगर जरूर तुम करना चाहो तो तुम कर सकती हूँ क्योंकि सुभाष चोपडा जी को जिस तरह की लडकी चाहिए वह सारी बातें तुम्हारे अंदर है । रिटर शर्मा ने जूलिया से ये भी कहा कि सुभाष चोपडा से उसके काफी अच्छे जान पहचान ने तथा वो रोल दिलवाने में मैं तुम्हारी भरपूर मदद करेंगे । इतना ही नहीं मैं तुम्हें ड्राॅ की बडी शानदार एक्टिंग करना भी सिखा दूंगी । ऐसा बोली हो से अधिक लडकी क्या एक्टिंग करना सिखाते की मथुरादास के दिमाग में एक का एक सौ जोर से सीटियाँ मछली लगी नहीं जूलिया को ट्राॅफी बनानी । एक शर्मा का तो आप नहीं था । कहीं उसी ने तो सारे षड्यंत्र की आधारशिला नहीं रखी थी । अब इसके अलावा तो उन दोनों के बारे में कुछ और जानती नहीं । गुलाबी कलर की शादी इस पहने खडी उस लडकी की गर्दन इंकार में ही था । इसके अलावा में हम दोनों के बारे में बाकी कुछ नहीं जानती । मथुरादास एलएलबी कुछ क्षण गंभीरता की प्रतिमूर्ति बना खडा रहा । ठीक है फिलहाल हम लोग चलते हैं । आपने हमारी जमानत की, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद । फिर मथुरादास एलएलबी जिस तरह पुलिस के माॅल उसी तरह हूँ । अगले दिन सुबह सुबह मथुरादास एलएलबी सुभाष चोपडा के ऑफिस में पहुंचकर उससे भी मिला । उस समय सुभाष चोपडा के ऑफिस में काफी गहमागहमी का था । वो अपनी फिल्म क्या और दो शूटिंग के सिलसिले में पंद्रह जाने वाला था । बाहर खडे टैम्पो मेरे फॅमिली नागरा, बॉक्सर काफी सारी कुर्सियां मगर अलादी जा रही थी । आधी से ज्यादा यूनिट उस समय ऑफिस के अंदर मौजूद थी । जबकि सुभाष शुक्ला आपने के हमें मन को जल्दी जल्दी ये बता रहा था कि आज आउटडोर शूटिंग पर जो शौच ले जाने थे उनमें कैमरा हैंडल करते समय किसके सामान की जरूरत पडने वाली थी । उसी गहमागहमी भरे माहौल में मथुरादास एलएलबी की सुभाष चोपडा से मुलाकात हूँ । मथुरादास ने उसे सबसे पहले अपना परिचय दिया तथा फिर वहाँ आने का नाम अक्सर पता है । अच्छा लगता है तो आपको किसी ने बिल्कुल गलत जानकारी दी है । मतदाता अच्छी । सुभाष चोपडा बडे मनमोहक भाव से मुस्कुराकर पूरा मैं ड्राॅप पर कोई फिल्म नहीं बना रहा । मैं तो इस बार बडी प्यारी सी लव स्टोरी बनाया । इतना ही नहीं मेरी फिल्में हीरोइन में कोई नहीं नहीं । दीपिका पादुकोण आजकल नए चेहरे बॉक्स ऑफिस पर चलते है तो उन्हें चांदी कर दिया जाए । यानी आपको ऐसी किसी नई लडकी की बिल्कुल जरूरत नहीं थी । मथुरादास एलएलबी के आवाज में खोलता हूँ जो ड्राॅप लडकी की जबरदस्त एक्टिंग कर सके ही । मुझे बिलकुल भी जरूरत नहीं थी । और क्या आप नेता शर्मा नाम की किसी लडकी को जानते थे जो फिल्मों में स्टार्ट कर रही थी? नहीं, मैं इस नाम की किसी लडकी को भी नहीं जानता है । मथुरादास एलएलबी के दिमाग में अब और सफलता सस्पेंस का तूफान उठते हैं । इसका मतलब वो लडकी सिरे से ही झूठ बोल रही थी । सिरे से ही सहारा ड्रामा रचकर चला जा रहा था । मथुरादास एलएलबी ने रीता शर्मा के बारे में जितना सोचा उतना ही ज्यादा वो लडकियों से डाउटफुल जरूर ये सब किया धरा उसीका था जरूर । वहीं पूरे ग्रामीण की राइट करते मथुरादास ने तुरंत अपने चेस्टर की जेब से राम का ज्ञान निकाला तथा उसके तीन चार लम्बे लम्बे घुट भरे । इससे उसके दिमाग में पैदा होती उलझनों की गुत्थी पर कुछ हम कुछ था क्या? आपको कोई और सवाल पूछना? सुभाष चोपडा बोला नहीं, मथुरादास एलएलबी ने बनाया गया मुझे और कोई सवाल नहीं पूछा । तभी उनकी यूनिट का प्रोडक्शन कंट्रोलर भी सुभाष को बुलाने वहाँ सुभाष चोपडा ने मथुरादास एलएलबी से हाथ मिलाया था । फिर वहाँ से विधा हुआ जीता । सानिया और का दिमाग भी कुछ कम परेशानियों में घिरा हुआ था । हालांकि उसकी प्लानिंग पूरी तरह सफल हो चुकी थी । पूरे आना, पालिस तथा लेरी आना गोंजाल्विस की तमाम धन संपदा पर उसका अच्छा था । गोवा की सोसाइटी में आज उसे वही रुतबा हासिल था जो कभी मेरी आना गोंजाल्वेस कहाँ था? सबसे बडी बात तो ये थी कि किरपाराम, मूलचंदानी तथा ऊषा जैसे हिल हफ्ते हथकंडे बाहर से भी उसका पूरी तरह पीछा छोड चुका था और बिना पुलिस के नोटिस में आए पीछा छोड चुका था । अगर सबसे ज्यादा तो उसी सचिनदेव रहा की मांग का था सचिन देख रहा हूँ । आखिर उसको लेकर उसने अपनी जिंदगी के ढेर और सपने जो देखे थे कैसे कैसे सुनहरे सपने सजाकर रखी थी उसने की आना । गोंजाल्विस की दौलत हासिल होने के बाहर वो उसके चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी करवा है कि इन से शादी करेंगे ऐसी शानशौकत हूँ । लेकिन सब सब शायद जब दौलत का कूद भंडार उसके कदमों में पढा था तो ऐसा कोई अपना उसके पास नहीं था जिसके साथ मिलकर वो अपनी खुशियों उस कामयाबी को सेलिब्रेट कर सके । एक माथी उमर कहीं एक सचिन देवडा था वो भी खत्म । अपनी उस कामयाबी पर वह हस्ती नहीं सकती थी । वो हसना चाहती तो उसे रोना उसका दिल चाहता । वो किसी कमरे में बंद हो जाए और खूब फूट फूटकर हुए । वो एक अजीब से दोराहे पर घडी थे । इसके अलावा वो बीमा एजेंट के बारे में भी सोच सोच कर परेशान थी जो कुछ दिन पहले उससे मिलने पाॅलिस में आया था । पर जिसका नाम था मथुरादास वो बीमा एजेंट उसे क्लीन की बातचीत करने दोबारा क्यों नहीं है? क्या एक ही बार में सारे कागज पूरे हो गए थे? क्या सच कुछ नहीं रहना कुंजालडी इसमें एक करोड की पॉलिसी करवाए थे या या फिर वो बीमा आयोजन भी कोई धोखेबाज आदमी था? बॅाल को मथुरा दास नाम का वो आदमी किसी भी आंगल से बीमा एजेंट नहीं लगा था । वो तो किसी दूसरी दुनिया का ये आदमी लगता था कुछ जानती ऍम हकीकत की तह तक पहुंचने के लिए रीता सान्याल के दिमाग में एक आइडिया कौंधा और उसने अगले ही थे स्वाॅट मारे को फाॅर्स में बुलवा भेजा हाॅलीडे भी हमारे बहुत खुशी खुशी काल इसके अंदर दाखिल हुआ । कैसे हाल है तुम्हारे फाॅर्स कराएं बैठे ना हमारे वही ड्रॉइंग हॉल में एक सौ ऍम और ये बताओ भी कैसे याद किया हम मैं दरअसल आना के बारे में आपसे एक सवाल पूछना चाहती थियांग वीटा साल के आवास काफी धीमी हो गई । कैसा सवाल क्या आना अपने पर्सनल इस्तेमाल में जो पैसा खर्च करती थी उसका रिकॉर्ड भी आपके पास रहता था । रेट आसानी और के सवाल पर पहले तो बहुत मारे के आंखों में आश्चर्य के भाव उम्र हैं । फिर उसने बताया आना खाने पीने या पाॅवर जो पैसा खर्च करती थी उसका तो कोई रख और मेरे पास नहीं रहता था । लेकिन इसके अलावा वो जो भी पैसा खर्च करती थी उसका फल रिकॉर्ड मेरे पास रहता था । घुटने तो फिर आना की बीमा पॉलिसी की फायर भी जरूर आपके पास होंगे । फॅमिली थोडा उत्सुकतापूर्वक कहा ऍम ये ऍम कहना नहीं तो कभी कोई बीमार नहीं कर रहा । सच बात तो ये है उन्हें इन्शोरेंस के नाम से चल थी । वो कहती थी मेरे पास पहले ही कौन सा काम दौलत है जब मैं अपनी लाइफ को भी इन शोर करवा लो, जीटॅाक रहेंगे । उसे अपने हाथों तोते उडते महसूस हुए । अगर लेडी आना गोंजालवेज ने कभी कोई बीमा ही नहीं करा था तो मथुरा डाॅमेस्टिक आदमी क्या आपको पाँच बज रहा था वो वहाँ बीमा एजेंट बनकर । इसलिए आज क्या बोलूँ? कोई जासूस था क्या बात है बीवी को हमारे ध्यान से उसके चेहरे का भाव पडता हुआ बोला तो मेरे का एक परेशान की हो गई ही नहीं । नहीं परेशानी वाली कोई बात नहीं । और ये तो आना कि बीमा पॉलिसी का जिक्र क्यों कर रही थी । ऐसे कह रही थी मुझे दुखी मैंने आपका तीन की समय बर्बाद किया । मैंने बस यही मालूम करने के लिए आपको यहाँ मिल रहा था हमारे बडी असमंजसपूर्ण मुद्रा में कोई सी छोडकर खडा हो गया अगर कोई बात है मैं भी तो मुझे बताऊँ नहीं कोई खास बात नहीं हमारे असमंजसपूर्ण मुद्रा में ही दरवाजे की तरफ बढ गया रंथू रीता सानिया नहीं देख सके कि बूटा राम में उसकी एक एक बात सही है । ये बात सुनते ही बूटा राम घबराओ था और काफी लंबे लंबे डग भरता हुआ आपने सर्वेंट क्वार्टर की तरफ बढते

Details
"फंस जाओ मेरे लिए" का दूसरा भाग जो रीटा सान्याल की खोल सकता है पोल। क्या हुआ जब वो हवेली पहुंच गई? आखिर मैडिकल साइंस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स और पुलिस इन्वेस्टीगेशन को कैसे चकमा दिया उसने?
share-icon

00:00
00:00