Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM
अध्याय 9 - C in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts

अध्याय 9 - C in Hindi

Share Kukufm
573 Listens
AuthorNitin Sharma
पुलिस और राजनीति के गठजोड़ कैसे देश को प्रभावित करता है सुनिए इस किताब में writer: मोहन मौर्य Voiceover Artist : RJ Nitin Author : Mohan Mourya
Read More
Transcript
View transcript

सर, हम लोग आपके साथ ही चलेंगे । अनिल ने पूछा नहीं हम नहीं जानते अंदर उस लडकी के अलावा और कितने लोग हैं । वहाँ पर कार्लोस का कोई और साथ ही भी हो सकता है और वो लोग हथियारबंद भी हो सकते हैं । मैं तुम लोगों की जान खतरे में नहीं डाल सकता है और ये भी हो सकता है हमारा शक बिल्कुल गलत हो । धीरज ने जवाब दिया, सर हम लोग किसी भी खतरे से नहीं डरते । वैसे भी आप यहाँ पर सिर्फ हमारी वजह से ही आए हूँ और आप खुद अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं । भाई मैं तो पुलिस में ही हो ये तो मेरी ड्यूटी है । मुझे तो हर वक्त अपनी जान का खतरा उठाना ही पडता है । अगर हम लोग ही खतरों से डर गए तो फिर आम लोगों का क्या होगा? सरकार शहर पुलिस वाला, आपकी तरह की सोच रखें तो कोई भी मुस्लिम जुलू करने से पहले सौ बार सोचेगा । पर सर हम भी आप के साथ चलेंगे नहीं तुम लोग यहीं पर मेरा इंतजार करो । अगर कुछ भी गडबड हुई तो उसे पीछे से संभालने वाला भी कोई तो होना चाहिए । ठीक है सर जैसे आपकी मर्जी अनिल ने धीरे से कहा । उन को वहीं पर छोडकर धीरज लिफ्ट की तरफ बढ गया । कमरा नंबर पांच सौ तीन के सामने पहुंचकर धीरज ने दरवाजे के बाहर लगी हुई बैल बजाई । अंदर से कहीं बैल बजने की मध्यम से आवाज आई । धीरज ने अपने काम दरवाजे के पास लगा दिए । अंदर से कदमों के चलने की आहट आ रही थी । दरवाजे के पास आकर कदमों की वह अट खत्म हो गई । कौन आया है इतनी रात को? सिक्योरिटी ने रोका नहीं क्या अंदर से एक महिला का स्वर आया मैडम पुलिस दरवाजा खोला है । धीरज ने का कैसा बहुत है तो पुलिस वाले हो । अंदर से दरवाजे में लगी हुई आई । मैजिक से जाते हुए महिला ने पूछा ये देखिये मैडम मेरा इकार्ड? धीरज ने अपना आईकार्ड निकालकर मैजिक आई की तरफ लहराया । पुलिस पर इतनी रात को किस लिए महिला ने दरवाजा खोले बिना ही फिर पूजा शबनम जी आपके खिलाफ पैराडाइज में कुछ वारदात हो गई है । उसी के सिलसिले में आपसे पूछताछ करनी है । आप दरवाजा तो खोलिए । आप दरवाजा तो खोलिए क्या सारी बातें बंद दरवाजे से ही करेंगे । एक मिनट रुकी खोलती हूँ कहते हुए महिला ने दरवाजा खोल दिया । दरवाजा खोलते ही उसके मुँह से निकला । मगर क्लब में तो मैं नहीं एड्रेस किसी को दिया ही नहीं है । फिर तो में यहाँ का पता किसने दिया? कार्लोस का दरवाजे से कदम रखते धीरज ने पूछा जैसे उसने शबनम की बात सुनी नहीं थी । उधर कार्लोस का नाम सुनते ही शबनम में दरवाजा बंद करना चाहा पर उससे पहले ही दे रहे दरवाजे के अन्दर की तरफ कदम रख चुका था । कौन? काॅलम ने हफ्ते हुए पूछा अब ये सवाल पूछना बेवकूफी है में शबनम तुम्हारी हरकत नहीं है । पहले ही साबित कर दिया कि तुम कार्ड उसको अच्छी तरह से जानती हो और वह यही फ्लैट में मौजूद हैं रहेगा वो कहीं पर नजर नहीं आ रहा है । मैं रूम में गया सो रहा है नहीं तो जाग रही हो तो वहाँ हो रहा होगा । कहते हुए धीरज उस कमरे की तरफ जाने लगा जो उसके हिसाब से बैडरूम होना चाहिए था । इंस्पेक्टर साहब इस तरह से आधी रात को किसी के घर में घुसकर उसके बैड रूम के अंदर तक जहाँ चला कहाँ तक सही है या फिर मुझे तो लगता है कि तुम पुलिस नहीं हो बल्कि पुलिस के देश में कोई चोर जहाँ यहाँ से निकल जाओ वरना में शोर मचाकर सबको बुला लूँ जरूर शोर मचा और सबको बुलाओ । फिलहाल मैंने रास्ते से हट जाओ कहते हुए वह आगे बढ गया है वो बिना किसी वारंट के तुम यू मेरे घर की तलाशी नहीं ले सकते । कहते हुए वो कमरे के दरवाजे के सामने आ गई और अपने दोनों हाथ फैला ले चलूँ तुम ने यह तो माना कि मैं पुलिस वाला हूँ चुपचाप से सामने से । और मुझे अंदर जाने दो कहते हुए धीरज ने अपने यहाँ से अपनी पिस्टल पकड ली और दूसरे आज से शबनम को दरवाजे से दूर किया । उसने हाथ बढाकर दरवाजा अभी आधा ही खोला था भी उसकी छठी इंद्री ने कुछ खतरा महसूस किया । वो दरवाजा खोलते खोलते एकदम से उसने साइड में छलांग लगाई और शबनम को साथ लेकर नीचे गिर पडा । छलांग लगाना जैसे उसके लिए वरदान साबित हुआ । सामने की तरफ से बिना आवाज किए गोली जो उस को निशाना बनाने वाली थी आई और सीधा जाकर सामने की दीवार पर जा लगे । उसे पालने धीरज की जान बचा ली थी । साला आजकल किस्मत ही खराब चल रही है । एक साया बैडरूम का गेट खोलकर जल्दी से बाहर की ओर लगकर कारणवस तुम भागो यहां से जल्दी उसको देखते ही धीरज के साथ नीचे पडे पडे ही शबनम चिल्लाकर बोलेंगे बहुत तो मैं ऍम महत्व में है । इसके साथ जिंदा छोडकर जाने का रिस्क नहीं ले सकता । कहते हुए उसने अपनी साइलेंसर लगी पिस्टल से दोबारा गोली चलाई जो इस बार सीधा शबनम के सीने में जा लगी । नहीं गोली लगते ही शबनम के मुंह से चीख निकल गए । उसके यहाँ के आश्चर्य से फैल गई । आखिर कार्लोस उसे गोली कैसे मार सकता था । तभी कार्लोस ने धीरज का निशाना लगाकर दूसरी गोली चलाई पर तब तक धीरे छलांग मार कर अपनी जगह छोड चुका था और इस बार उसकी गोली ने वर्ष को अपना निशाना बनाया । छलांग मारते धीरज सीधा हुआ और उसने भी कार्लोस को अपनी रिवाल्वर का निशाना बनाना चाहा । पर जब तक वो गोली चला पाता तब तक कार्लोस दरवाजे से बाहर निकल चुका था । सावधानी के तौर पर धीरज कुछ पलों तक वहीं छिपा बैठा रहा हूँ । फिर उठकर दरवाजे की तरफ भागा और बाहर निकल कर इधर उधर देखकर । तब तक वहाँ से कार्ड ना उसकी परछाई भी गायब हो चुकी थी । वो शायद लिफ्ट में सवार हो चुका था । धीरज ने तुरंत अपना मोबाइल निकाला और अनुल धीरज ने तुरंत अपना मोबाइल निकाला । और अनिल को फोन मिलने लगा । अभी अभी कारणों शबनम को गोली मारकर बाहर की तरफ भागा । जल्दी से उसका पीछा करो । आज वह बचना नहीं चाहिए । पर ध्यान रखना उसके पास । अभी भी पिस्टल कहते हुए उसने फोन बंद कर दिया और वापस अंदर कमरे में आ गया । जहाँ शबनम गोली लगी थी वो तुरंत उसके पास पहुंचा हूँ । उसके यहाँ के ऊपर नीचे हो रही थी शबनम शब्द मुझे बताओ, कार्लोस कहाँ मिलेगा? देखों से बचाने से कोई फायदा नहीं है । जिसने तो मैं मौत के पास पहुंचाने का सामान क्या बोलू शब्द बोलो वो शबनम ने कुछ कहा और फिर उसकी गर्दन एक तरफ लग गई । इतिहास इतनी देर हो गयी वो इंस्पेक्टर का बच्चा अभी तक वापस नहीं आया । नहीं वो किसी मोदी कहीं वो किसी मुसीबत में तो नहीं फंस गया खर्च करने का अब कितनी बार कहना पडेगा । अभी तक उसकी शादी नहीं हुई है । आप खुद इंस्पेक्टर है । किसी इंस्पेक्टर का बच्चा नहीं जीतने । जवाब दिया तुम दोनों चुप रहा हूँ कोई वक्ता इन सब बातों का वैसे आज घर का कहना सही है । हो सकता है वो किसी मुसीबत में फंस गया हूँ । चलो ऊपर चलकर देखते कहते हुए अनिल लिफ्ट की तरफ जाने लगा । पर उसने तो कहा था अगर ऐसी कोई परिस्थिति पेश आए तो उसके पुलिस स्टेशन में फोन करना पीछे से करने का हाँ कहा तो था पर वहाँ से मदद ना जाने कितनी देर में आएगा तब तक उसे कुछ होना चाहिए । हम इसका रिस्क नहीं ले सकते हैं । ऐसे भी पुलिस डिपार्टमेंट में अच्छे आदमी बच्चे कितने हैं, हमें ही उसकी हेल्प के लिए कुछ करना होगा । अनिल ने कहा अभी अनिल ये सब कह रहा था । तभी लिफ्ट का दरवाजा खुला और उसमें सहित साया भागता हुआ बाहर निकला और लेफ्ट के बाहर खडे अनिल से टकरा गया । अवैध समझकर साले मरने का इरादा है क्या? टक्कर लगते ही मिलके मुझ से निकला है? उधर वो साइड नहीं जैसे उसकी बात सुनी हूँ । वो तो टक्कर लगते ही है । तुरंत एक तरफ भाग गया था । कौन है जो इतनी जल्दी में था? ऍम कहीं कार्लोस तो नहीं अगर ने जवाब दिया क्या? दोनों ने चौक कर एक साथ का । तभी अनिल के मोबाइल की घंटी बज उठी । उसने स्क्रीन की तरफ नजर दौडाई धीरज का फोन था ॅ अभी अभी कारणों शबनम को गोली मारकर बाहर की तरफ भागा है । जल्दी से उसका पीछा करो आज वो बचना नहीं चाहिए पर ध्यान रखना उसके पास अभी भी पिस्टल है । उधर से धीरज की आवाज आई और फोन काॅल, फटाफट गाडी बाहर निकालो ये कारण होती है । फोन बंद होते ही अनिल ने कहा और बाहर की तरफ दौड पडा । जिधर कार्लोज गया था तब तक कार्लोस अपनी बाइक स्टार्ट कर चुका था और वह सोसायटी के मेन गेट की तरफ जा रहा था । अनिल पैदल ही उसके पीछे दौडने लगे । उधर धान दिल की बात सुनते ही अजीत तुरंत पार्किंग की तरफ गया जहां उसने अपनी कार खडी की थी । अजित ने कहा स्टार्ट कर के आगे बढाई अगर उसके साथ क्या बैठा था । अजित ने अपनी कार गेट की तरफ दौडा नहीं गेट के नजदीकी उन्हें अनिल मिला । अनिल तुरंत आगे की सीट पर बैठा और बोला गाडी को राइट में लेना करना । उसकी बाइक उस तरह की गई है । जल्दी करो वो अभी दूर नहीं जा पाया होगा । अजित ने कहा उसी तरफ मोड दी और उसे कार्लोस की भाई कहीं पर भी नजर नहीं आई । अजीत थोडी दूर आगे तक अपनी कार नहीं कर गया और आगे चौराहे पर जाकर लोगे । अब अजित ने पूछा कोई फायदा नहीं है पीछा करने का हमें नहीं पता वो यहाँ से किस तरफ गया । वैसे भी दूर दूर तक उसकी परछाई भी नजर नहीं आ रही । अनिल ने कहा, तभी उसका मोबाइल बज उठा । उसने फोन उठाया क्या रहा? इधर से धीरज ने पूछा सॉरी सर, वो हम से बचकर निकल गया । अनिल ने अफसोस जताते हुए चौरी की कोई बात नहीं । इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है तो उनसे ज्यादा इसमें मेरी गलती है जो मैं बिल्कुल लापरवाह हो गया था । मेरी लापरवाही की वजह से बेचारी शबनम को गोली लग गई और उसे अपनी जान से हाथ धोना पडा । ऍम को गोली लग गयी । अनिल के मुझसे नहीं हाँ तो अभी निकलो । यहाँ से मैं पुलिस को इन्फॉर्म करने जा रहा हूँ तो मैं उनके सामने नहीं आना है । मैं तुमसे आज शाम को सात बजे उसी कॉफी शॉप पर में लूंगा । कहते हुए धीरज ने फोन काट दिया । क्या शबनम को गोली लग गयी? वो जिंदा तो है ना? फोन कट रही है । अगर ने व्यंग्य स्वर में अनिल से पूछा नहीं शीर्ष डेड अनिल ने कहा तो उम्मीद की आखिरी किरण भी चली गई । अजीत के मुँह से निकला मरने से पहले शबनम ने इंस्पेक्टर धीरज को कुछ बताया था । अगर ने पूछा क्या पता यार इतना पूछने का टाइम भी कहा दिया धीरज नहीं पैसे उसने बोला है । वह शामको कॉफी अपने मिलेगा । उसने हमें यहाँ से निकलने के लिए बुलाया भी । अनिल ने कहा यार एक बात करूँ । अजित ने अपनी कार को आगे बढाते हुए का आप बोल क्या कहना चाहता है? कहीं इंस्पेक्टर धीरज भी बिकाऊ तो नहीं है? मतलब मतलब ये कि कहीं वो भी जुबैर अंसारी कमिश्नर से मिला हुआ तो नहीं है । तो मैं ऐसा क्यों बोल रहे हो? वो तो हरपाल हमारी मदद भी कर रहे हैं । अरे आरोपर सोच कर दें उसने हमारी मदद की । वहाँ पर तो पहले तो उसने कहा था कि उसके पास देवराज ठाकुर के घर पर हमला करने वालों की सीसीटीवी फुटेज नहीं है । हाँ, तो कमिश्नर ने आगे डिस्ट्रीब्यूटरी नहीं किए होंगे तो उसके पास कहाँ से आएंगे? चलो मान लिया कि उसके पास फुटेज नहीं थे पर वाॅटर से भी तो मंगा सकता था । पर उसके लिए उसने बाना बनाया कि अगर वो ऐसा करने की कोशिश करेगा तो कमिश्नर को पता चल सकता है । उसके बाद जब हमने अपनी कोशिशों से वह फुटेज निकलवाए और उसको चेक करने के लिए दिए तो उसने जवाब दिया कि हेड क्वार्टर में उनका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है । हो सकता है कि वास्तव में उनका कोई रिकॉर्ड नहीं हूँ । अरे मेरी बात आगे तो सुनो । उसके बाद जब हमने अपनी मेहनत से शबनम का पता लगाया और उसका पीछा करते करते कार्लोस तक पहुंचे तो उस ने बडी चालाकी से कार्लो उसको निकाल भागने का मौका दिया और हमारे आखिरी गवाह शबनम को भी रास्ते से हटवा दिया । तुम इस बात पर भी ध्यान दो कि वो हमारे साथ शबनम के पीछे आने के बजाय कहीं और गया था । और फिर ये जानते हुए यहाँ कार्लोस हो सकता है वह पुलिस वोट लाने के बजाय अकेला ये आया था तुम्हारी बात में दम तो है जी । वैसे तुम क्या कहते हैं? अगर इस बारे में अनिल ने अगर से पूछा था क्या खाता में इस की बातों में तुम भी बिना सोचे समझे बोल रहे हो? अगर नहीं जवाब क्या मतलब? मतलब ये कि जुबैर अंसारी के प्लान के बीच अगर कोई सबसे बडा खतरा है तो वो शबनम नहीं बल्कि हम थे । अब अगर धीरज उसके साथ मिला हुआ होता है । ये बात अभी तक जुबैर अंसारी तक भी पहुंच चुकी होती है और फिर हम अभी तक क्या जिंदा होते जो वैद अंसारी कभी कहा मैं ऊपर पहुंचा चुका होता है और ज्यादा भी नहीं तो हम इतने समय तक धीरज के साथ रहे । धीरे जी हमें इनकाउंटर के बहाने मार सकता था । इस पर कोई शक भी नहीं करता क्योंकि हमारी हकीकत जानने के बाद तो वो बडी आसानी से हमारे अपराधी होने का सबूत ला सकता था । युवा राइडस घर चला इतनी परेशानियों से गिरे होने के कारण मैं ये बात तो सोच ही नहीं पाया था । अजीत लेगा साले खाने के अलावा कभी कहीं और अपना दिमाग इस्तेमाल भी करता है तो ब्रेक अब तो मैंने खाने के लिए कुछ और मत कही हूँ । खाने के लिए नहीं बोल रहा तेरे दिमाग के लिए बोल रहा हूँ थोडा सा और जगह भी इस्तेमाल किया कर घर पहुंचने दे । फिर बताता हूँ तो ये तो वहाँ क्या बताएगा जो बताना है अभी बता दें कहीं फिर भूल जाए । वैसे भी दिमाग तो इतना ही है, देगा हमें साले मेरी कोई बहन नहीं है । मैं जो मुझे साला बोल रहा है, लाभ लाभ ला । उनकी बातें सुनकर अनिल सिर्फ मुस्कुरा दिया उसके दिमाग में अजीत और अगर दोनों की बातें पूछ रही थी और वो सोच रहा था कि धीरज के बारे में अजित सही है या फिर अगर है तो शाम को पता चली जाएगा । उसने अपने दिमाग को झटका दिया और अजीत अनिल की नोक झोंक का मजा लेने लगा । शाम को सात बजे उसी कॉफी शॉप पर इंस्पेक्टर धीरज उन तीनों मित्रों के साथ अपनी मीटिंग कर रहा था जहाँ पर वह पहली बार साथ में बैठे थे । सर बुरा ना माने तो आपसे बात पूछूं । अनिल ने कहा आप बोलो क्या कहना चाहते हो सर, कल रात को आपसे शबनम ने मरने से पहले कुछ बताया था । इसमें बुरा मानने वाले क्या बात है आप? मैंने इसलिए तो ये मीटिंग बुलाई है । कहीं ऐसा तो नहीं की तो मुझ पर शक कर रहे हो? धीरज ने मुस्कुराते हुए कहा शक नहीं तो अनिल उसकी बात सुनकर हडबडाया मुझे तुम्हारी मनोस्थिति बता है । डीएस और तुम गलत भी नहीं तो मैं यही लग रहा है ना कि मैं तुम्हारी कोई हेल्प नहीं कर पाता । सीसीटीवी फुटेज जुटाने में तुम्हारे साथ नहीं गया । शबनम का पीछा भी मैंने तुम लोगों को अकेले को करने के लिए कहा और दोस्त तुमने बताया कि कमिश्नर खोद इसमें इन बहुत है । मैं अगर फुटेज लेने जाता है तो उसकी सूचना कमिश्नर तक जा सकती थी । फिर शायद तुम शबनम का भी पता नहीं लगा पाते और शबनम का पीछा महीने तुम्हारे साथ इसलिए नहीं किया क्योंकि मैं खुद ऐसे गैस पर काम कर रहा हूँ जिसके तार तो महाने वाले के से भी जुडे हुए हो सकते हैं । कहते हुए धीरज ने जिन अपराधियों को दंगा फैलाने की कोशिश में और उनकी सूचना पर दूसरे अपराधियों को गिरफ्तार किया था, उन के बारे में बताइए । नहीं सर, ऐसी कोई बात नहीं, हम आप पर कोई शक नहीं कर रहे हैं । अनिल शर्मिंदा होते हैं । ऐसे आपसे शबनम ने मरने से पहले क्या कहा था इसके बारे में कुछ बताने वाले थे । क्या बताया उसमें ज्यादा तो नहीं पर जितना भी बताया उस से ये पता चला था कि बहुत बडी साजिश हो रही है और किसी को भी इसकी कानोकान खबर नहीं । धीरज नहीं था क्या सर में बताया देवराज चौहान और जुबैर अंसारी दोनों आपस में मिलकर कब जनसभा को संबोधित करने वाले साथ में चुनाव लडने की घोषणा करने वाले हैं । सर वो आने वाले शुक्रवार को करना है । अनिल ने कहा था उनकी जनसभा राजनगर रामलीला ग्राउंड में शुक्रवार को शाम चार बजे और वहाँ पर राजनीति के दो विपरीत ध्रुव आपस में मिलने का दावा कर रहे हैं । राइट और वहीं पर कार्लोस अपना शिकार करने जा रहा है । भरी सभा में सोचो ऐसा हो गया तो क्या होगा वो रिकॉर्ड फिर तो भीड में भगदड मचने के पूरे जाउं । लोकसभा में लगभग ये आप लोगों के जुटने की उम्मीद है । इनमें दोनों ही समुदाय के लोग मौजूद रहेंगे और अगर उनमें भगदड मच गई, कई लोग मारे जाएंगे और उसके बाद तो शहर में दंगा भडकने से कोई नहीं रोक सकता । अनिल के मुँह से निकला हमें किसी भी तरह से कार्लोस को अपना काम करने से रोकना होगा । अगर नहीं हैं सर हम पुलिस कमिश्नर को इन्फॉर्म अजित ने कहना चाहा पर तक काली अपनी बात कर शिट, हम लोग उस कमिश्नर से क्या उम्मीद कर सकते हो तो खुद उस जो बाहर का पालतू कुत्ता अरे तुम ज्यादा मत सोचो । माना वापर कार्लोस अपना शिकार करने वाला है पर कम से कम मैदान में दंगा नहीं बढ के थोडी बहुत भगदड जरूर मचेगी । ज्यादा नुकसान नहीं होगा । ये आप कैसे कह सकते हैं? कीसाजिश कुछ और है । मेरी पूरी बात से कहते हुए धीरज नहीं उनसे कुछ का वो ॅ, इतनी बडी साजिश और हम लोग और हम लोग कुछ और ही सोचे बैठे थे तो चकरियों में बुरी तरह से फस गए और ऍम को तोडना होगा । हमें कार्लोस के हमले को नाकाम करना होगा धीरज नहीं । पर सरे सामने को रोकने के लिए हम लोग क्या कर सकते हैं? हमें ये तो बताया है कि ये हमला कौन करें तो कब और कैसे करेगा? बिना ये जाने इस हमले को कैसे रोकेंगे । वैसे भी वहाँ लाखों की भीड में किसी एक इंसान को पहचानना कैसे संभव होगा? पहली बात तो ये है कि वह लाखों की भीड में होगा भी नहीं । मैदान में एंट्री लेने के लिए तीन गेट और एंट्री लेने वाले हर शख्स की पहले अच्छे से तलाशी होगी उसके बाद ही उसे प्रवेश दिया जाएगा । इस हालत में कार्लोस के लिए अपने साथ हथियार लेकर प्रवेश का नाम उनके नहीं होगा । पर सर जब वो कमिश्नर खुद जुबैर से मिला हुआ है तो कार्लोस को अंदर हथियार लाने में क्या प्रॉब्लम हो सकती है? और अगर वो अंदर हथियार नहीं लाया तो कमिश्नर उसे अंदर भी हथियार उपलब्ध करवा सकता है । अगर ने सवाल किया नहीं, तुम जितना सोचते हो उतना आसान नहीं है इसमें दो पंगे है ना जहाँ तक मैं समझता हूँ कमिश्नर कार्लोस को नहीं पहचानता हूँ । दूसरा मना कमिश्नर जो बाहर से मिला हुआ है और मैदान की पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी और वो खुद किसी अंदर आने वाले की तलाशी नहीं लेगा । और आपने प्लैन में वो किसी और पुलिस वाले को शामिल नहीं करने से ना क्योंकि इसके लिए उसे एक दो नहीं बल्कि लगभग हर सुरक्षा करने को शामिल करना होगा । खुद उसके लिए भी बहुत बडा खतरा हूँ । इसलिए कार्लोस अपना निशाना पहले की तरह ही दूर किसी बिल्डिंग से लेगा तो यहाँ में मैदान के चारों ओर की हर बिल्डिंग की तलाशी लेनी होगी । वो हमारे लिए बहुत ही बाल नहीं, आस पास की बिल्डिंग की तलाशी, बाकी पुलिस मिलेगी और हम उनके सामने आ सकते हैं । वैसे भी हम क्या कहकर हर फ्लाइट की तलाशी ले सकते हो । आप सही कह रहे हैं इंडिया में कोशिश तो करेंगे सर । हम गुमनाम फोन करके देवराज ठाकुर को सभा में आने से मना नहीं कर सकते हैं । अजीत ने कहा अखबारों से कैसे मना कर सकते हैं जबकि तुम सब जानते हो ये देवराज ठाकुर के लिए सत्ता प्राप्ति का एक रास्ता है । सर ये तो पागल है । आप इसकी बात पर ध्यान मत दीजिए । इसका दिमाग से खाने में चलता है । अगर ने बीच में का ये सुन का राज इतने उसे घुट कर देंगे, इंस्पेक्टर नहीं है जो उनकी नोक झोंक पर मुस्कुरा दिया । इतने टाइम में वो उनके आपस की खींचतान को अच्छी तरह से पहचान चुका था । ठीक है, पर हमें कुछ दिन बहुत सावधान रहना होगा । मैदान के चारों तरफ अपनी नजर रखनी होगी । मेरी ड्यूटी तो मेरे थाने में ही है । अगर मुझे मैदान की सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी दी गई । अगर मुझे मैदान की सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी दी गई होती तो शायद में वहाँ पर कुछ छानबीन कर सकता था और उस दिन मैं ऑफिस चली वहाँ पर नहीं दे पाऊंगा । इसलिए मैं वहाँ पर सिविल ड्रेस नहीं जाऊंगा । ठीक है सर, हमारे पास अभी चार दिन है । तब तक तुम लोग रामलीला मैदान के आसपास की छानबीन कर कोई भी संदिग्ध व्यक्ति नजर आए । मुझे खबर करना मैं भी समय निकालकर तुम लोगों की जान बेन में मदद करूंगा । भगवान ने जहाँ हम उस नेता और कार्ल उसके मकसद को कभी पूरा नहीं होने चाहिए । धीरज ने कहा, ठीक है सर, हम लोग अपनी पूरी कोशिश करेंगे मिलेगा । उसके बाद वो मीटिंग बर्खास्त हो गई । उन लोगों ने तीन दिनों तक अपनी खोजबीन जारी रखी पर जैसे कार्लोस की तो छाया ही गायब हो गई थी और आखिरकार वह दिन भी आ गया । राजनगर पर कायामत लाने वाला था ।

Details

Sound Engineer

पुलिस और राजनीति के गठजोड़ कैसे देश को प्रभावित करता है सुनिए इस किताब में writer: मोहन मौर्य Voiceover Artist : RJ Nitin Author : Mohan Mourya
share-icon

00:00
00:00