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29. Pnha Jail Ki Sikhcho Mein

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क्रन्तिकारी सुभाष Author:- शंकर सुल्तानपुरी Author : शंकर सुल्तानपुरी Voiceover Artist : Raj Shrivastava Producer : KUKU FM
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पुनः जेल के सींखचों में सुभाष के चिकित्सक डॉक्टर डॉक्टर ने कहा बैंडी जीवन के प्रभाव बहुत के स्वास्थ्य पर अवश्य पडेगा और उनके स्वास्थ्य में जो कुछ सुधार हुआ है और नष्ट हो जाएगा । सरकार ने उनके इस वक्तव्य की उपेक्षा की और सुभाष को जेल से मुक्त नहीं किया । पहले ऑर्थर रोड जेल में रखे गए फिर उन्हें यरवाडा जेल भेज दिया गया । इस जेल ने उनके स्वास्थ्य पर भीषण आघात किया । यहाँ का वातावरण अत्यधिक हानिकारक और विषाक्त था । खुली वायु और प्राकृतिक वातावरण का सर्वथा अभाव था । सुभाष एक संकुचित कोठारी की तपन झुलसन में जीवन के अत्यंत कष्टकारी दिन व्यतीत कर रहे थे । बॅाय शूल और अपन से पीडित है । सरकार ने औपचारिक सहानुभूति दिखाते हुए उन्हें उनके भाई की कुर्सियांग स्थित मकान में एक कमरे में बंद कर दिया । केंद्र सुभाष की बीमारी बढती गई । इसी बीच फॅमिली में उनके स्वास्थ्य के लिए सरकार की बर्बरतापूर्ण नीति की निंदा की गई । इंग्लैंड की सुप्रसिद्ध पत्र मैनचेस्टर गार्जियन इसमें भी संदर्भ में एक भारत से नात् मक टिप्पणी प्रकाशित की जबकि हम भाषण और विचार की स्वतंत्रता के विषय में अपने उदार नीति का बखान करते करते हैं । तब हमारे साम्राज्य की कुछ भाग सेंसर के भारी बोझ से दबकर करा रहे हैं । मिस्र सुभाष बोस के साथ जो बर्ताव हो रहा है वो ब्रिटिश न्याय के अनुकूल है । अच्छा ये वही चीज है जिसके लिए अंग्रेज लोग विदेशियों की सभ्यता पर उनकी उठाते हैं । बाद में मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर एक्सरे परीक्षा के लिए उन्हें कलकत्ता मेडिकल कॉलेज लाया गया । अखिल भारतीय कांग्रेस के तत्कालीन सभापति पंडित जवाहरलाल नेहरू की आज्ञानुसार संपूर्ण भारत में सुभाष दिवस मनाए जाने की घोषणा हुई । इस अवसर पर देश के विभिन्न भागों में सभाएं आयोजित हुई और उनमें सरकार के दमन था । बिना मुकदमा चलाए सुभाष चंद्र बोस तथा अन्य राजनीतिक बंदियों को कैद में डाले रखने की कुटील तापूर्ण नीति की भर्त्सना की गई । इस अवसर पर आयोजित एक सभा में भाषण करते हुए पंडित नेहरू ने कहा, श्री सुभाष चंद्र बोस की गिरफ्तारी नहीं सिद्धां का रूप धारण कर लिया है और इस संबंध में विशेष काम करने की जरूरत है । उस समय संपूर्ण विश्व सुभाष की रिहाई की मांग रहा था और चारों ओर से उन्हें मुक्त करने के लिए आवाज उठाई जा रही थी । इस विश्वव्यापी आंदोलन ने ब्रिटिश सरकार को झकझोर कर रख दिया । अकारण ही अधिक दिनों तक सुभाष को बंदी बनाए रखना कठिन हो गया । परिणामतः सत्रह माह की कठोर नजरबंदी के बाद सुभाष को बिना शर्त रिहा कर दिया गया ।

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क्रन्तिकारी सुभाष Author:- शंकर सुल्तानपुरी Author : शंकर सुल्तानपुरी Voiceover Artist : Raj Shrivastava Producer : KUKU FM
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