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15. Swarajya Party ka Janma in Hindi

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AuthorNitin
क्रन्तिकारी सुभाष Author:- शंकर सुल्तानपुरी Author : शंकर सुल्तानपुरी Voiceover Artist : Raj Shrivastava Producer : KUKU FM
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स्वराज्य पार्टी का जन्म अपने आगामी कार्यक्रमों पर प्रकाश डालते हुए देशबंधु चितरंजनदास ने कहा, मेरे विचार से ब्रिटिश सरकार पर आक्रमण करने का एक सशक्त तरीका ये होगा कि हम उनके गढ में घुसकर सहयोग करें । मैं इस निर्णय पर पहुंचा हूँ कि हमें कौंसिलों में प्रवेश करके ब्रिटिश शाही को उसी के इस तरह से समाप्त करना चाहिए । मैं आपके इन विचारों का पूरी तरह समर्थन करता हूँ । सुभाष ने दृढता के साथ कहा, शत्रु से सफलतापूर्वक मोर्चा लेने के लिए यह आवश्यक है कि हम नियोजित कार्यक्रम को जल्द से जल्द कार्यरूप में परिणित करें । देशबन्धु और सुभाष तथा उनके अनुयायियों की इस कौंसिल वादी विचारधारा नहीं, कांग्रेस में दो डर पैदा कर दी है । कांग्रेस पार्टी परिवर्तनवादी क्यों? और अब परिवर्तन वादियों में विभक्त हो गई । यद्यपि बहुमत परिवर्तन वादियों का ही रहा । केंद्र देशबंधु हताश ना हुए । गया में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ, जिसका सभापतित्व देशबंधु ने किया । इस सभा में सुभाष भी सम्मिलित हुए और उन्होंने स्वराज्य पार्टी का जोरदार समर्थन किया । उनके वक्तव्य नहीं परिवर्तन वादियों से मतभेद को और गहरा कर दिया । केंद्र सुभाष के विचारों में कोई लचक नहीं आई । उन्हीं दिनों स्वराज पार्टी की ओर से फॉरवर्ड नाम का एक अंग्रेजी दैनिक पत्र देशबन्धु के संचालन में प्रारंभ हुआ । इस पत्र में तत्कालीन राजनीतिक स्थितियों, समस्याओं और कार्यक्रमों पर लिख संभावनाएं और सूचनाएं प्रकाशित होती थी । देशबंधु ने सुभाष को उस पत्र का संपादन कार्य सौंपा । सुभाष ने बडी निर्भिकता और कुशलता के साथ इस ज्वलंत दैनिक पत्र का संपादन कार्य संभाला । यह वह समय था जब कांग्रेस में आपसी फूट पैदा हो चुकी थी और विचार भिन्नता के कारण वायुमंडल दूसरी हो रहा था । कौन चल प्रवेश के विरुद्ध प्रचार को रोकने के लिए बम्बई में अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन हुआ जिसमें सुभाष ने पुनः स्वराज पार्टी के कार्यक्रमों का दृढता के साथ समर्थन किया । अपने ओजपूर्ण वक्तव्य में गांधी जी के यहाँ इंडिया का उदाहरण देते हुए सुभाष ने कहना आरंभ किया, गांधी जी ने स्पष्ट कहा लिख दिया है कि अल्पसंख्यक दल को जिसका मन कांग्रेस में नहीं मिला है, सच्चाई ईमानदारी से उसे किसी कार्यक्रम को अपने हाथ में लेने का पूरा अधिकार है । बंगाल की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को देखते हुए टाॅल तथा एजुकेशन बिल के खिलाफ आवाज उठाने की सख्त जरूरत है । टेनिस टेबल काश्तकारों के अधिकार पर वज्र प्रहार करता है और एजुकेशन बिल से शिक्षा के क्षेत्र में घोर निराशा का जन्म हो रहा है हो । बंगाल प्रांत की काश्तकार तथा मध्य श्रेणी के लोग ये चाहते हैं कि कांग्रेस वाले आपसी मान मान लेने को भूलकर काउंसिल में जाकर उनके अधिकारों की रक्षा करें । मैं इस बात को फिर से दोहरा देना चाहता हूँ कि कांग्रेस काउंसिल में केवल इसीलिए प्रवेश करना चाहती है कि नौकरशाही के मार्ग में रोडे अटका केंद्र सुभाष की इस न्यायसंगत वक्तव्य से भी कांग्रेस की आपसी मनोमालिन्य की खाई नहीं पड सकी । सुभाष ने अनुभव किया कि उन की सदभावना को हंसी में उडा दिया गया है और कांग्रेस में मतभेद के अंकुर तेजी के साथ पढते जा रहे हैं जिससे समस्त राजनैतिक वातावरण विषाक्त हो रहा है । कांग्रेस का ये मनोमालिन्य अभी बना भी रहा था की कलकत्ता महानगरी कॉर्पोरेशन का चुनाव आ पहुंचा । देशबन्धु ने सोचा कि कॉरपोरेशन को हत्या लेना चाहिए । इसमें एक पंथ दो काज हो सकेंगे । प्रथम तो स्वराज पार्टी को सहायता मिलेगी और दूसरे महानगरी की सेवा भी हो सकेगी और इसी आशय से उन्होंने कॉर्पोरेशन चुनाव में स्वराज पार्टी के उम्मीदवार खडे किए । यद्यपि या परिवर्तनवादी कांग्रेसियों ने इसका विरोध किया । घोरा परिवर्तनवादी उस समय ये देख कर दंग रह गए कि उनकी भीषण विरोध और सहयोग के उपरांत भी कॉर्पोरेशन के निर्वाचित सदस्यों में पचपन सदस्य स्वराज पार्टी के थे । ये स्वाभाविक ही था कि बहुमत प्राप्त सुराज दल देशबंधु चितरंजनदास को अपना मेयर निर्वाचित करें । मेयर निर्वाचित होते ही देशबंधु ने सबसे पहला काम जो क्या वो था सुभाष चंद्र बोस को कॉर्पोरेशन का एक्जिक्यूटिव ऑफिसर शासनकर्ता नहीं करना । आपने अल्पकालीन सेवाकाल में कलकत्ता को एक आदर्श महानगरी बनाने के लिए सुभाष में जो क्रांतिकारी कदम उठाएगी, वे अविस्मरणीय और अभूतपूर्व थे ।

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क्रन्तिकारी सुभाष Author:- शंकर सुल्तानपुरी Author : शंकर सुल्तानपुरी Voiceover Artist : Raj Shrivastava Producer : KUKU FM
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