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14. Bar aur Seba Abhijan

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क्रन्तिकारी सुभाष Author:- शंकर सुल्तानपुरी Author : शंकर सुल्तानपुरी Voiceover Artist : Raj Shrivastava Producer : KUKU FM
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बाढ और सेवा अभियान अपनी प्रथम झील याग्रस् मापकर जैसे ही सुभाष घर पहुंचे सर्वप्रथम स्नेहभरे भाला माने दौड करन है गले से लगा लिया और इसमें हवाई की आंखों में हर्ष मिश्रित अश्रु अच्छे लगने लगे । स्वस्थ है तो माँ माँ के चरणों में अभिवादन करते हुए सुभाष ने अपनी सुपरिचित गंभीर मुस्कान के साथ पूछा और पिताजी कैसे हैं? जिस माँ बाप का बेटा सारी देश की स्वास्थ्य रक्षा के लिए कटिबद्ध हो, भला उसके माँ बाप भी अस्वस्थ रह सकते हैं । उसमें हवस चला के मुख्य मंडल पर्यूषण ओजपूर्ण मुस्कान की रेखा की चाहिए और वह बीटी के मुखमण्डल को अपनी हथेलियों में भर्ती हुई या था हा गौरव से मंडित हो । अरे सुभाष अब हमें अपने स्वास्थ्य से अधिक तेरी स्वास्थ्य की चिंता बनी रहती है क्योंकि अब तो हमारा ही सुभाष थोडी ही है । शरद, सुनील और बहनें यहाँ तक कि तेरे पिता जी सबके सबके स्वास्थ्य के प्रति चिंतित रहते हैं । ठहर जा मैं उन्हें सूचना दे दूँ । कैदी हुई मठापति की कक्ष की ओर चली गयी माँ मेरा मेरे लिए आज का समाचार पत्र भिजवा देना और मृदुला को भी मेरे आने का समाचार कहना देना । सुभाष ने उच्च स्वर में कहा और मेसी कुर्सी सता आवश्यक पत्रों को देखने लगे । माने पिता को सुभाष के आने का संदेश दिया, बोली सुभाषा गया देखिए बात कर लीजिए क्या देख क्या बात करूँ । जब कोई वस्तु अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर हो जाए तो उसके प्रति अनाधिकार चेष्टा कोई प्रश्न ही नहीं उठा । मैं जब सुभाष के विगत पर विचार करता हूँ तो लगता है कि मैंने उसकी जन्मजात प्रवृत्तियों के प्रति अन्याय किए हैं । जब मैं उसकी वर्तमान गतिविधियों प्रदेश की डालता हूँ तो मेरे सामने ब्रिटिश सरकार के प्रति अपने उत्तरदायित्व और कर्तव्य की सीमा रेखा खींच जाती है और मुझे उनके उपकार लंघन का कोई कारण समझ में नहीं आता । मैं स्वराज्य आंदोलन को आज के नवयुवकों की स्वाभाविक मांग मानता हूँ । लेकिन साथ ही यह भी जानता हूँ की ये मांग एक बडे किले में कैद कुछ ऐसे विद्रोहियों की आवाज है जिसे तो आपका एक ही निशाना कुछ ही क्षणों में शांत कर सकता है । और इस विचार से मुझे सुभाष का भविष्य घने अंधकार में डूबा हुआ दृष्टिगत होता है । प्रभात तुम जानती होगी अपने जीवन में मैं राजनीति और अन्य सामुदायिक संस्थाओं से सादा लग रहा है । मैंने कभी इनमें कोई रूचि नहीं ली और ना मेरे पास इन सबके लिए वक्त ही रहा है । लेकिन जहाँ तक मैंने नहीं किया है प्रभाव आजादी की इस लडाई में अंतर होगा तो हम हिन्दुस्तानियों का अपना सब कुछ होने के बाद शोषण और दासत्व की चरम उपलब्धि ही होगी । व्यक्ति से व्यक्ति का संघर्ष संभव है किंतु सत्ता से व्यक्ति का संघर्ष असंभव । मैं अपने को सुभाष की आलोचना करने की स्थिति में नहीं समझता हूँ । वो जो कुछ कर रहा है उसके लिए उस वक्त मतलब आई है रायबहादुर । जानकीनाथ ने इस धाराप्रवाह और गंभीर वक्तव्य के बाद सुभाष के आगमन के संबंध में कोई विशेष रूचि नहीं । निरंतर सी प्रभावती अंतर कक्ष में जाकर पुत्र कि खानपान की व्यवस्था करने लगी । नौकर अमेजॅन एक पत्र पत्रिकाएं और पत्रों का ढेर रख दिया था । सुभाष ने सर्वप्रथम समाचार पत्र का मुखपृष्ठ देखा । मुख पृष्ठ पर ही मोटे मोटे अक्षरों में अंकित था । उत्तर बंगाल में भीषण बाढ । हजारों लोग बेघर और लहलहाती फसल जलमग्न । ये कैसे? हृदयविदारक घटना थी जिसमें सुभाष को चिंतित और अशांत कर दिया । बडी चिंतित मुद्रा में समाचार पंथियों परदर्शी टिकाएंगे । इस आकस्मिक विपत्ति से मानव जीवन की रक्षा का उपाय सोचने लगे । ये बाढ कैसी भयानक बार थी जो धन और कृषि की छठी ही नहीं वरन हजारों मनुष्य की अकाल मृत्यु का कारण बन रही थी । चिंतित और व्यस्त घर घडी, चिंता और व्यस्तता इंटरनल बाकियों के साथ मुझे लाने, कक्ष में प्रवेश यार सुभाष की गंभीर दृष्टि उस पर जाती की कोटिश बधाई सुभाषा मृदुला निकट आकर मेज पर हाथ टिकाकर उनके चेहरे के निकट झुकती शक्ति बोली आपने त्याग सेवार कर्तव्य का जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, उसे कभी ना बुलाया जा सकेगा । जिस झंड मुझे आपकी आईसीयू त्याग का समाचार मिला था, उस समय में प्रसन्नता से पागल होती थी । यदि आप यहाँ होते तो निश्चय ही मैंने आप की आरती उतारी होती है । जब आप बंदी बनाए गए उससे मैं मैंने पिताजी से कहा था कि जेलयात्रा सुभाष ता के उद्देश्य में व्यवधान नहीं, प्रेरक है । सच मुझे तो आपसे ईर्ष्या होती है, मृदुला नहीं । अपने ह्रदय के उद्गार एक ही साथ में व्यक्त करना किंतु शहरों चकित सी रह गई, जब उसने सुभाष के भावों में कोई परिवर्तन नहीं देखा । क्या बात है? भाजपा अभी ही तो जेल से छूटकर आए हो और अभी ये बोलना चिंताग्रस्त हो गए । चिंता का विषय व्यक्तिगत नहीं सामुदायिक है । सुभाष गंभीर स्वर में कहने लगे तो सादा ही मेरे उद्देश्य की सफलता में प्रेरणा का कार्य करती है । मतलब समझता हूँ कि तो कभी मुझे अपनी प्रेरणा से वंचित नहीं करेगी । बोले से भाजपा बोलो मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकती हूँ? भावविभोर मृदला नहीं बडी अधीरता से कहा यदि मेरा श्रम और मेरे खून की एक बूंद भी देश सेवा के लिए काम आ सके तो मुझ से बडी सौभाग्यशालिनी कौन? युवती होगी? संभावना है तो मैं एक यात्रा होगा सब भाजपा की तुम्हारी ही प्रेरणा से मैंने भी आजीवन त्याग और सेवा का व्रत अपना लिया है । सच वह मृदला । इस समय तो मुझे महारानी लक्ष्मीबाई नजर आ रही है । हर्षातिरेक में सुभाष कहीं पडे मैं तेरा आह्वान करता हूँ । देश की आजादी के लिए नवयुवतियों की भी उतनी ही आवश्यकता है जितनी कि नवयुवकों । तूने आज का समाचार पत्र देखा होगा । उत्तरी बंगाल में भीषण बाढ आई हैं और इस क्रूर प्राकृतिक प्रकोप से जनधन की अपार छती हो रही है । हमें आज ही बाढग्रस्त क्षेत्रों की ओर प्रस्थान करना है और बेघर बार लोगों को इस भीषण प्रकोप से बचाना हैं मैं आपके साथ सुभाषा सेवा की इस अवसर को मैं किसी भी कीमत पर गवा नहीं सकती । कहती हुई मृदुला कक्ष से बाहर की ओर भागती चली गई । बाढपीडित क्षेत्र को संरक्षण और सहायता पहुंचाने के लिए तुरंत ही बाढ कमेटी का गठन हुआ । सुभाष इस कमेटी के मंत्री बनाए गए । अनेक स्वयंसेवको, सहायको, परिचारिकाओं और प्राथमिक चिकित्सकों की टोलिया बाढग्रस्त लोगों की रक्षा सहायता करने के लिए निकल पडे । जैसे ही माँ का आशीष लेकर सुभाष बाढ क्षेत्र में जाने के लिए घर के बाहरी द्वार पर आए । सामने से मृदुल को आते देख वो हाथ में एक सौ के इसलिए द्रुतगति से सुभाष की ओर आती हुई उच्च स्वर में कह रही थी मैं इस भाषा चलो । सुभाष स्वागत भाव से मुश्किल है । मृदुला सहित उनकी टोली बाढग्रस्त क्षेत्र की ओर प्रस्थान करेगी । कितना अव्यवस्थित दृश्य था चारों ओर जल्द ही जल्द दृष्टिगत होता था । झोंपडे जलराशि में विलीन हो गए थे । ऊंचे मकानों की सिर्फ कंगूरे दिखाई पड रहे थे । कितने ही पशु पानी की सतह पर आश्रय की तलाश में डूब उतरा रहे और कितनों की राशि पाने पर बह रही थी । बडे बडे पेड अपनी फुनगी तक चल में समय हुए थे । असहाय, निराश्रित भूख और शुद्ध आ पीडित जनसमाज की दयनीयता देखकर बडे बडे साहसी ओके शहीद बंगाल में से पूर्व इतनी भयानक बाढ कभी नहीं थी । संपूर्ण उत्तर बंगाल जलमग्न था । सहायता जूलियान नावों द्वारा मनुष्य और पशुओं की प्राण रक्षा का भागीरथ प्रयत्न कर रही थी । बाढ पीडितों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, उनके रहने और भोजन की व्यवस्था करने तथा उन्हें प्राथमिक चिकित्सा देने का अभियान द्रुतगति से चल रहा था । उस समय सुभाष की अदभुत कार्य क्षमता और संगठन शक्ति देखते ही बनती थी । एक विशाल का नाम और अपनी टोली के साथ बाढग्रस्त क्षेत्रों का तूफानी दौरा कर रहे थे । स्वयं अपने हाथों से बाढ पीडितों की जीवन रक्षा और भरण पोषण का दायित्व निभा रहे थे । संचालक थे और कार्यकर्ता भी । मृदला बडी लगन और तत्पर्ता के साथ बाढ पीडितों की सेवा सुश्रुषा में लगी थी । इस समय कोई उसे देखकर यह अनुमान भी नहीं कर सकता था कि वह एक उच्च पुलिस अधिकारी की लाडली बेटी है जिसने स्वयं उठाकर एक गिलास पानी भी नहीं दिया होगा । लगातार कई दिनों तक रात दिन सुखचैन त्यागकर सुभाष और उनका बाढ सहायक दल बाढ पीडितों को जीवन दान देता रहा । उसमें शिथिलता, थकान और उदासीनता का नामोनिशान दिया था ।

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क्रन्तिकारी सुभाष Author:- शंकर सुल्तानपुरी Author : शंकर सुल्तानपुरी Voiceover Artist : Raj Shrivastava Producer : KUKU FM
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