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13. Jail Ek Pathshala

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क्रन्तिकारी सुभाष Author:- शंकर सुल्तानपुरी Author : शंकर सुल्तानपुरी Voiceover Artist : Raj Shrivastava Producer : KUKU FM
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जेल, एक पाठशाला वो प्रथम जेलयात्रा सुभाष के लिए एक प्रकार से वरदान सिद्ध हुई । छह माह के उस बंदी जीवन में सुभाष ने सेवा और त्याग के अनेक नए सबका सीखें । उस समय उनके हालात का अंत ना रहा जब उनके महान पथप्रदर्शक देशबंधु को भी बंदी बनाकर उसी कक्ष में रखा गया जिसमें सुभाष बंदी थे । अहमदाबाद कांग्रेस अधिवेशन के सभापति चुने जाने की कुछ ही दिनों बाद कॅश के अनुसार देशबंधु को गिरफ्तार कर लिया गया था । इसे मैं अपना अहोभाग्य ही समझता हूँ कि जेल में भी आपको अपने साथ पा रहा हूँ । सुभाष नहीं । स्वतंत्रता की अमर सेनानी देशबंधु का स्वागत करते हुए कहा ये मेरा सौभाग्य, देशबन्धु, गंभीर मुस्कान के साथ अगर सफर में वो वास्तव में स्वतंत्रता की इस महायज्ञ को जारी रखने का उत्तरदायित्व हम सभी पर एक समान है । सेवा और त्याग के लिए छोटे बडे में कोई अंतर नहीं । उस कसौटी पर हम सबको एक साथ खरा उतरना है । सुभाष ये जेलयात्रा तो कठोर जीवन रख का पडा मात्र है, जिस पडाव में हमें आगे की योजना के लिए और मजबूती तथा स्पूर्ति के साथ तैयार हो लेना है । यातनाएं उद्देश्य को स्थिर आई और मजबूत बनाती है । क्रांति देवता कि अभिव्यक्तियों में जो प्रेरणा और गाय था, उसने सुभाष को उत्साह से सराबोर कर दिया । सरकारी तौर पर भले ही देशबंधु बंदी थी, केंद्र प्रथम श्रेणी के जेलयात्री की सभी सुविधाएं प्राप्त थी । अपने मित्रों और सार्वजनिक कार्यकर्ताओं को वो जेल में बुलाकर उनसे राष्ट्रीय प्रश्न पर विचार विमर्श करते । जेल का वातावरण एक प्रकार से राजनीतिक कार्यालय बन गया था । सुभाष मुझे विश्वास है कि तुम मेरी छह संचित अभिलाषा पूर्ण करोगे । देशबंधु ने एक दिन बडे भावविभोर सफर में कहा, मैं जानता हूँ कि तुमने वेदांत और नीति शास्त्र का अध्ययन किया था । मैं उन की शिक्षा लेना चाहता हूँ । बाद कुछ वैसे ही थी, जैसे एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों के ज्ञान को भी सम्मान दे और उनके अनुभवों को स्वयं जाने की अभिलाषा प्रकट करेंगे । कुछ विचित्र सी विस्मय में मुग्धता के साथ सुभाष देशबंधु के उस पूर्ण मुखमण्डल पर देख रहे हैं । फिर सेहत संकोच से बोले पथ प्रदर्शक को पति क्या बता सकते हैं? भले ही आप ईरान और नीति के सैद्धांतिक दृष्टिकोणों से अनभिज्ञ हो, परन्तु क्रियात्मक रूप से तो सर्वथा भी यही है । किसी विषय का सैद्धांतिक अध्ययन ही क्रियात्मकता को सफलता प्रदान करता है । गंभीर मुस्कान के साथ देशबंधु ने अपने आशय को दोहराएं पास तब मैं तुम्हारे गहन अध्ययन का लाभ उठाना चाहता हूँ, संकोच की बात नहीं । सुभाष तो इस दिशा में मेरा मार्गदर्शन करेंगे । सुभाष ने विनी भाव से देशबंधु का ये आग्रह स्वीकार कर लिया और विराट और नीतिशास्त्र का जो कुछ भी ज्ञान उन्होंने अध्ययन से अर्जित किया था, उसका सारतत्व समझा दिया । कर्वे मीठे अनुभवों के अद्भुत दिन थे । देशबंधु अपने अनुयायियों की जितने महान पथप्रदर्शक थे, उतने ही बडे मित्र भी । बडे खुले । जैसे वे नवयुवकों से बात करते और मित्रवत विचारों का आदान प्रदान होता । घर और शुभचिंतकों के यहाँ से उनके सेवन के लिए फलों के तो करो का अंबार लग जाता । वे स्वयं स्वाद मात्र लेते, किन्तु आपने बंदी साथियों को भरपेट खिलाते जेलयात्रा । देशबंधु के लिए एक मनोरंजक अर्द्धविराम थी, तो सुभाष के लिए ज्ञान लेने और देने वाली पाठशाला थी ।

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क्रन्तिकारी सुभाष Author:- शंकर सुल्तानपुरी Author : शंकर सुल्तानपुरी Voiceover Artist : Raj Shrivastava Producer : KUKU FM
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