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11. Swadesh Wapas

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क्रन्तिकारी सुभाष Author:- शंकर सुल्तानपुरी Author : शंकर सुल्तानपुरी Voiceover Artist : Raj Shrivastava Producer : KUKU FM
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स्वदेश वापस रायबहादुर जानकीनाथ पुत्र के आईसीएस में सफलता प्राप्त करने का गौरव अधिक दिनों तक नासन हो सके । सुभाष की पदत्याग नी की अविश्वसनीय विज्ञप्ति ने उनकी सारी आशाओं पर दशहरा बात कर दिया । उन्होंने तार द्वारा सुभाष से पद रुपया का कारण पूछा । जिसके उत्तर में सुभाष में स्थिति स्पष्ट की, इंग्लैंड सम्राट के प्रति निष्ठावान होने की शपथ ग्रहण करना मेरे लिए असंभव था । वो प्रतिज्ञा ऐसे मत दे ढंग से प्रारंभ हो रही थी जैसे मेरे देने स्वीकार नहीं किया । इसके पश्चात कि सुभाष अपने भाई का पत्र प्राप्त को जिसमें उन्होंने लिखा था भारी आई सी इसके पदत्याग से पिताजी पर बडी बुरी प्रतिक्रिया हुई है । उन की रातों की नींद हराम हो गई हैं और वे हर्षण तुम्हारे संबंध में चिंतित रहते हैं । क्या तुम उनका मेन रखने के लिए एक बार उनसे पूछ भी नहीं सकते थे? हो सकता है तो मैंने अपनी दृष्टि में उचित ही किया किंतु तुम्हारा ऐसा करना हम लोगों के लिए कष्ट है । भाई के इस पत्र ने सुभाष के ओजर दुस्साहस को स्वाभाविक रूप से आंदोलन कर दिया, पर वो अपने आप से कह उठे मनुष्य के जीवन में वो कितनी विडंबनात्मक स्थिति आती होगी, जब उसे सामाजिक मान्यताओं की पूर्ति करते हुए भी अपने संरक्षक की हठवादिता के समक्ष झुकने के लिए विवस होना पडेगा । केंद्र परिवार के प्रति उत्तरदायित्व होने की अपेक्षा देश के प्रति उत्तरदायी होना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है । सच्चे अर्थों में अभी तक परिवार के प्रति में अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह कर रहा हूँ तो देश के प्रति मेरे उत्तरदायित्व और कर्तव्य भी शेष है । इस अनुभूति ने सुभाष के अंतर्द्वंद को शांत कर दिया और अपने मुख्य उद्देश्य के प्रति उनकी दृढता का आभास सभी को हो गया । भाई था तो एक बात का क्या? पिताजी असंतोष की स्थिति में आर्थिक सहायता नहीं भेजेंगे । इस समस्या को लेकर भी अत्यधिक चिंतित थी । उन्हें परेशान देखकर दिलीप राय से नहीं रहा गया और वे पूछ बैठे क्या बात हैं? बहुत परेशान नजर आ रहे हैं । समस्या बहुत साधारण सी है तो इस समय मेरे लिए असाधारण बंदी है । सुभाष ने चिंतित भाव से कहा, अब पिताजी मुझे कोई आर्थिक सहायता नहीं भेजेंगे । मुझे चिंता इस बात की है कि मैं स्वदेश वापस कैसे जाऊंगा । बस मैं अभी जीवित हूँ । रायनी सहजभाव से हसते हुए कहा, भारत के इतिहास में एक अभूतपूर्व अध्याय जोडने वाला व्यक्ति ऐसी साधारण समस्या के लिए चिंतित हो बडी हास्यास्पद बात है । आपको कितने की आवश्यकता है? मैं तुम्हारा ऍम, तुमने सादा, मेरी भावनाओं को महत्व दिया है । आभार आतिर एक के कारण सुभाष अभी कुछ कहना चाहिए किंतु राय ने इसे अपना अहोभाग्य समझा कि वे भविष्य के एक महापुरुष की कुछ सहायता कर सके । राय के आर्थिक सहायता से सुभाष स्वदेश को वापस हैं, महान या पास नहीं । ऐसे बेटे को हृदय से लगा लिया, किंतु बितानी, हर्ष अथवा विश्वास का कोई भी दृश्य उपस्थित नहीं किया । सुभाष को इस अनुभूति से मार्मिक पीडा हुई कि उनका पदत्याग पिता की मान प्रतिष्ठा का एकमात्र प्रश्न बनकर रहे गया है ।

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क्रन्तिकारी सुभाष Author:- शंकर सुल्तानपुरी Author : शंकर सुल्तानपुरी Voiceover Artist : Raj Shrivastava Producer : KUKU FM
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