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Love Marriage - एक प्रेम व्यथा: Part 7

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"लव  और  मैरिज"" ये दो शब्द हर किसी ने ज़िंदगी में देखे , सुने और उपयोग भी किए होते है। अक्सर जवानी में सबका अफेयर होता है, चोरी छुपे डींगे भी हांकते है। लव अफेयर चोरी चुपके सब कर लेते है। लेकिन जब कोई लव मैरेज की बात  करता है तो तूफान टूट पड़ता है, लगता है दैत्य रूपी समाज  के रस्मो रिवाज़ और रूढ़िवादिता की ईटो से बना महल टूट जाएगा। और समाज का हर आदमी उसको बचाने के लिए आगे आ जाता है। हमारे दिल और मंजीत ने  भी समाज के इस दैत्य रूपी महल से टकराने की नाकाम कोशिश की, लव अफेयर तो हर कोई करता है बहुत कम ही लव मैरिज करने की हिम्मत करते है। वहीं हिम्मत दिखाई हमारे लव बर्डस ने... उधार के पैसे से समाज को टकराने निकल पड़े। ये  प्रेम का रास्ता  जितना सरल दिखता है उतना होता नहीं। घर से निकलने के बाद कैसे उनको भूखे रहने तक की नौबत आ गई। कैसे पग पग पर उनको ठगा गया, समाज की निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए बनाई गई संस्थाओं ने कैसे उनको पैसे के तराज़ू में तौला। धार्मिक संस्थाओं, कोर्ट , वकील , पुलिस ने हर पग पर पैसे के लिए उनको ठगा। पर क्यों ? कैसे बालिग होते हुए भी हमारे कानून ने उनको ना बालिग बना प्रताड़ना का भोगी बना दिया। चंद पैसों के लिए बिकने वाले पुलिस वाले क्या अपनी गलती सुधार सकते है? कैसे कदम कदम पर कानून ने उनके रास्ते में कांटे बिछाए। जबकि कानून को तो उनकी मदद करनी थी। क्या हमारे कानून में  इतने छिद्र है कि कानून का नाजायज फायदा उठा लिया जाता है? आखिर लव मैरिज जैसे मुद्दे को दिलाबर सिंह मंजीत के पापा, और बिट्टू दिल के मामा जैसे पढ़े लिखे लोग क्यों अपनी इज्जत का सवाल बना लेते है? और बिट्टू कैसे एक अधेड़ उम्र के  गंवार गुंडे। "" पाली "" को अपना दमाद बनाने को तैयार है पर एक शिक्षित युवा  और प्रेमी को नहीं , पर क्यों? मंजीत के पापा एक हेड मास्टर थे, बिट्टू एक पटवारी , आखिर शिक्षित वर्ग ऐसे कट्टर रूढ़िवादी विचारो से आज तक आज़ाद क्यों नहीं हो पाया ? क्या आज की शिक्षा भी रूढ़िवादी विचारो के आगे नतमस्तक है? गांव की पंचायत जैसी संस्थाओं को किसी का मौलिक अधिकार छीनने का हक किसने दिया? क्या ये संस्थाएं कानून से ऊपर है? यां हमारा कानून इतना कमजोर है कि इन संस्थाओं की मूछों  के आगे नतमस्तक है। जीते या हारे .... देखने के किए बने रहे हमारे साथ...." Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Surya Goldi
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"लव  और  मैरिज"" ये दो शब्द हर किसी ने ज़िंदगी में देखे , सुने और उपयोग भी किए होते है। अक्सर जवानी में सबका अफेयर होता है, चोरी छुपे डींगे भी हांकते है। लव अफेयर चोरी चुपके सब कर लेते है। लेकिन जब कोई लव मैरेज की बात  करता है तो तूफान टूट पड़ता है, लगता है दैत्य रूपी समाज  के रस्मो रिवाज़ और रूढ़िवादिता की ईटो से बना महल टूट जाएगा। और समाज का हर आदमी उसको बचाने के लिए आगे आ जाता है। हमारे दिल और मंजीत ने  भी समाज के इस दैत्य रूपी महल से टकराने की नाकाम कोशिश की, लव अफेयर तो हर कोई करता है बहुत कम ही लव मैरिज करने की हिम्मत करते है। वहीं हिम्मत दिखाई हमारे लव बर्डस ने... उधार के पैसे से समाज को टकराने निकल पड़े। ये  प्रेम का रास्ता  जितना सरल दिखता है उतना होता नहीं। घर से निकलने के बाद कैसे उनको भूखे रहने तक की नौबत आ गई। कैसे पग पग पर उनको ठगा गया, समाज की निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए बनाई गई संस्थाओं ने कैसे उनको पैसे के तराज़ू में तौला। धार्मिक संस्थाओं, कोर्ट , वकील , पुलिस ने हर पग पर पैसे के लिए उनको ठगा। पर क्यों ? कैसे बालिग होते हुए भी हमारे कानून ने उनको ना बालिग बना प्रताड़ना का भोगी बना दिया। चंद पैसों के लिए बिकने वाले पुलिस वाले क्या अपनी गलती सुधार सकते है? कैसे कदम कदम पर कानून ने उनके रास्ते में कांटे बिछाए। जबकि कानून को तो उनकी मदद करनी थी। क्या हमारे कानून में  इतने छिद्र है कि कानून का नाजायज फायदा उठा लिया जाता है? आखिर लव मैरिज जैसे मुद्दे को दिलाबर सिंह मंजीत के पापा, और बिट्टू दिल के मामा जैसे पढ़े लिखे लोग क्यों अपनी इज्जत का सवाल बना लेते है? और बिट्टू कैसे एक अधेड़ उम्र के  गंवार गुंडे। "" पाली "" को अपना दमाद बनाने को तैयार है पर एक शिक्षित युवा  और प्रेमी को नहीं , पर क्यों? मंजीत के पापा एक हेड मास्टर थे, बिट्टू एक पटवारी , आखिर शिक्षित वर्ग ऐसे कट्टर रूढ़िवादी विचारो से आज तक आज़ाद क्यों नहीं हो पाया ? क्या आज की शिक्षा भी रूढ़िवादी विचारो के आगे नतमस्तक है? गांव की पंचायत जैसी संस्थाओं को किसी का मौलिक अधिकार छीनने का हक किसने दिया? क्या ये संस्थाएं कानून से ऊपर है? यां हमारा कानून इतना कमजोर है कि इन संस्थाओं की मूछों  के आगे नतमस्तक है। जीते या हारे .... देखने के किए बने रहे हमारे साथ...." Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Surya Goldi
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