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59 - ग्रामीण समाज और संचार में हिंदी भाषा

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“कस्तूरबाग्राम रूरल इंस्टीट्यूट, कस्तूरबाग्राम, इंदौर” में 15-16 जनवरी, 2016 को “ग्रामीण समाज और संचार: बदलते आयाम” विषय पर संपन्न “राष्ट्रीय संगोष्ठी( national seminar)” के तहत प्रस्तुत विद्वता-पूर्ण शोध लेखों का संग्रहणीय संकलन है यह पुस्तक। जो निश्चित रूप से एक पुस्तक के रूप में मीडिया-जगत के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के साथ साथ विभिन्न विषयी अध्येताओं के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा। Voiceover Artist : RJ Manish Author : Dr. Nirmala Singh Author : Rishi Gautam Producer : Saransh Studios Voiceover Artist : Manish Singhal Author : Dr. Nirmala Singh & Rishi Gautam
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ग्रामीण समाज और संचार में हिंदी भाषा भारत गांवों का देश है । देश की लगभग बेहतर दशमलव दो प्रतिशत जनसंख्या गांवों में निवास करती है । गांव में निवास करने वाला सामाजिक ग्रामीण समाज से अभिहित किया जाता है । कृषि प्रदान भारतीय समाज में भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ मूल्य जीवंत रूप में मिलते हैं । गांवों की हरी भरी प्रकृति, आपसी सौहार्द, कोलाहल और भीड से दो शांति और सुकून, सामाजिक वैचारिक एकरूपता आदि विशेषताएं सहज ही आकर्षित करते हैं, जिनके कारण विश्व फलक पर देश की विशिष्ट छवि बनी हुई है । ग्रामीण समुदाय के अंतर्गत संस्थाओं और ऐसे व्यक्तियों का संकलन होता है जो छोटे से केन्द्र के चारों ओर संगठित होते हैं तथा सामान्य प्राकृतिक खेतों में भाग लेते हैं । मॉरिस और ऍम संचार प्रक्रिया मनुष्य के जन्म के साथ ही आरंभ हो जाती है जो मृत्यु तक अद्यतन चलती है । संचरित संदेशों, सूचनाओं की विभिन्न विधाओं अथवा तकनीकी उपकरणों को संचार संसाधन कहते हैं । संचार क्रांति के इस युग में अनेक संचार माध्यमों ने ग्रामीण जीवन को प्रभावित किया है । गांवों की वर्तमान सामाजिक संरचना तथा ग्रामीणों के पारस्परिक सम्बन्धों को ग्रामीण संचार के वर्तमान रूप के आधार पर ही समझा जा सकता है । इसके लिए ग्रामीण समाज में उन व्यक्तियों संगठनों के अध्यन को महत्व दिया जाता है जो गांव में कुछ नई विशेषताओं या नए विचारों का संचार करते हैं । दूसरा अध्यन विषय संचार के नए माध्यम से उत्पन्न होने वाले प्रभाव है । टेलीविजन, रेडियो, अखबार, ग्रामसेवक, विकास योजना से संबंधित अधिकारी तथा गांव के मंत्रणा नेता आदि गांवों में संचार के प्रमुख साधन है । इसके प्रभाव को समझे बिना ग्रामीण परिवर्तन का सही मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है । ग्रामीण समाज में उन व्यक्तियों और समूहों का भी अध्ययन किया जाता है जो ग्रामीण संचार के विभिन्न साधनों से प्रभावित होते हैं । वास्तव में ग्रामीण संचार पहन महत्वपूर्ण आधार है जिसने ग्रामीण जीवन को एक नई दिशा दी है । जी । के अग्रवाल संचार माध्यम समाज में जागरूकता लाते हैं । रेडियो दूरदर्शन के अनेक कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं । क्षेत्रीय भाषाओं से जुडे अनेक कार्यक्रम लोग की तो आदि का भी प्रसारण किया जाता है । समाचार पत्र भी ग्रामीण क्षेत्र विशेष की खबरों के साथ क्षेत्रीय भाषाओं की रचनाओं को स्थान देते हैं पर यह पर्याप्त नहीं है । संचार माध्यमों द्वारा ग्रामीण समाज को ध्यान में रखकर विभिन्न विषयों से जुडी डॉक्यूमेंट्री फिल्में शॉर्ट फिल्म में और अधिक बनाई जानी चाहिए । ग्राम में जनजीवन में समझता लाने वाले कार्यक्रमों में और वृद्धि होनी चाहिए । लोक संस्कृति को सहेजे जाने की दिशा में भी यह कदम प्रभावी सिद्ध होगा । दूरदर्शन के अधिक प्रचार प्रसार के बावजूद आज भी नंदाजी मेरा जी द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम को श्रोता भूले नहीं है । इसी तरह महिलाओं के लिए प्रसारित कार्यक्रम में बचने वाले लोग की ठंडा जिम्मेदारी छाया जैसी माता पिता री माया माया छोडनी पड से कितना असर चारों पर से जैसे गीतों की मधुर झनकार आज भी श्रोताओं के जहन में रची बसी है । प्रिंट मीडिया या समाचार पत्र के संदर्भ में भी छोटे स्तर या स्थानीय स्तर पर छपनेवाले समाचार पत्रों की संख्या में वृद्धि होनी चाहिए क्योंकि ग्रामीण अंचलों की उभरती हुई प्रतिभाओं और वहाँ की समस्याओं को स्थानीय समाचारपत्र अधिक स्थान दे सकते हैं । इस प्रकार संचार माध्यमो द्वारा ग्रामीण संस्कृति को सहेजने और उनमें जागरूकता सजगता लाने की दिशा में बताए गए कार्यक्रम निश्चित ही ग्रामोत्थान में सहायक होंगे । ग्रामीण जीवन की सफलता परंपरा, प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण गांव आज भी शहरी लोगों के लिए शांति और सुकून का केंद्र बने हुए हैं । यांत्रिक जीवन की आपाधापी से दूर ग्राम में संस्कृति के पोषण की और भी बुद्धिजीवियों का ध्यान गया है और संचार माध्यम के अच्छे कार्यक्रम इस उद्देश्य में सहायक हो सकते हैं । सूचना प्रौद्योगिकी में हो रहे नित नई प्रयोगों को जन जन तक पहुंचाने में हिंदी भाषा का माध्यम ही अधिक सफल और सार्थक परिणाम दे सकता है हूँ ।

Details
“कस्तूरबाग्राम रूरल इंस्टीट्यूट, कस्तूरबाग्राम, इंदौर” में 15-16 जनवरी, 2016 को “ग्रामीण समाज और संचार: बदलते आयाम” विषय पर संपन्न “राष्ट्रीय संगोष्ठी( national seminar)” के तहत प्रस्तुत विद्वता-पूर्ण शोध लेखों का संग्रहणीय संकलन है यह पुस्तक। जो निश्चित रूप से एक पुस्तक के रूप में मीडिया-जगत के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के साथ साथ विभिन्न विषयी अध्येताओं के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा। Voiceover Artist : RJ Manish Author : Dr. Nirmala Singh Author : Rishi Gautam Producer : Saransh Studios Voiceover Artist : Manish Singhal Author : Dr. Nirmala Singh & Rishi Gautam
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