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Five is Not Just a Number - Part 14

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सुनिए मेरी प्यार की कहानी कैसे मैं एक आज घराने का लड़का अपने प्यार को पाने में क्या-क्या मुश्किलों से गुजरता हूँ, सुनिए पूरी कहानी| Author : Abhishek Thapliyal Voiceover Artist : Navneet Atul
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तो मैंने इधर उधर देखा हूँ । बहुत नजर नहीं आई । हो जा चुकी थी । पता नहीं कहा हूँ । मैंने सोचा कि फोन करने के लिहाज से तो कुछ गलत समय मैंने फोन उठाया तो एक अननोन नंबर से था । मैंने कलाई में समय देखा तो सुबह पांच बज रहे थे । फोन करने के लिहाज से कुछ गलत समय तो था । मैंने फोन उठाया और दूसरी तरफ से कुछ आवाज नहीं आई । बस खामोशी थी । बस किसी की साथ ही चल रही थी । फोन पर उसके पापा । उन्होंने कहा बेटा और उस गति है हमारे बीच नहीं । कुछ ही मिनटों पहले वो हम सब को छोड कर चली गई । मैंने कहा नहीं अंकल, वो तो वो तो कुछ मिनट पहले मेरे साथ थी । मेरे अंदर कोई चीख रहा था पर खामोशी से कोई आवाज नहीं आ रही थी । मेरे दिल पर कुछ भारी सहाकर लगा । भयानक झटका मेरी आखिर फैल गई । मेरे अंदर की मांसपेशियां हिल नहीं पा रही थी । मेरे दिल की धडकने बंद हो गयी । मेरा अपने ऊपर से कंट्रोल खत्म हो गया । अनुपम मेरे सामने बैठा था । मुझे सांत्वना दे रहा था और मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था । बस कानों में सोनू, सोनू की आवाज चल रही है । बार बार मेरे कानों से टकरा रही थी । ठीक वैसे जब किसी खाई के ऊपर से हम चलाते हैं ना और वहाँ पर सवाल चकराकर हमारे पास आती है । कानों में आवाज टकरा रही थी । अभिषेक अभिषेक अनुपम ने मुझे गले से लगाया और मुझे संभालने की कोशिश की । हमें अब अस्पताल भी जाना हो पहुंचकर हमने देखा कि उसकी माँ फूट फूटकर हो रही थी । उसके पापा भी सदमे में थे । उसके सभी रिश्तेदार रो रहे थे । मैं भी अंदर से बहुत हो रहा ना ऍम मैंने और उन्नति की । माँ को जाकर गले से लगाया । एक लंबी सांस भरी और जिस कमरे में और उन्नति थी वहाँ गया हूँ । मैंने उसे देखा तो उसके मूड को अब वेंटिलेटर से हटा दिया गया था । उसकी आंखे बंद हूँ । मैं उन आंखों कि खुलने का इंतजार कर रहा था । पर शायद वो अब कभी ना मैं उसकी सुर्खियों में खेलना चाहता था । पर शायद कभी नहीं खेल सकूंगा । उसके आस पास डॉक्टर नर्सों की भीड नहीं । मुझे डॉक्टर ने कहा कि सॉरी ऍम मैंने सोचा इस वाली भी कितना अजीब शब्द है । हम बोले तो रिश्ते बन जाते हैं । अपनी हमारे पास आ जाते हैं और डॉक्टर बोले तो आपने हमसे दूर चले जाते हैं ऍम डॉक्टर ने मेरे पास आकर कहा और मुझे अकेले मिले गए और मुझे समझाया कि बेटा और उन्नति को बचाना बहुत मुश्किल रहा हूँ । हूँ मैं तो क्या दुनिया का कोई भी डॉक्टर उसे नहीं बचा हुआ था हूँ । और अगर हाँ और उन्नति के एक्सीडेंट से केवल पांच मिनट पहले भी उसे यहां लाया जाता तो आज शायद वो हमारे बीच होती । मैं फूट फूटकर रोने लगा । मैंने जोरो कर और उन्नति को कहा । धोखेबाज है और उन्नति तो उन्हें मुझे अकेले छोड दिया । जिंदगी भर साथ जीने की कसमें वादे किये थे तो उन्हें और आज तो अकेले मुझे छोड कर चली गई । लोग आपस बात कर रहे थे कि बॉडी का क्या करना है, बॉडी को कैसे ले जाना है मैं ऐसा मन ही मन मैंने कहा । कितने जाने में लोग बिचारी और उन्नति को उसके नाम से नहीं बल्कि बॉडी बॉडी करके पुकार रहे थे । मैंने कहा नहीं वो ही नहीं है । मैं उन्हें पागलो की तरह समझा रहा था कि वो अरुंधति है समझते नहीं तो पर अब कोई फायदा नहीं था । कोई फायदा नहीं था । चला मेरा भाई अनुपम मुझे बाहर लेंगे । बाहर मैंने देखा कि उसकी माँ के भी बुरे हाल है । मुझे सब देखा नहीं गया । अब सरस्वती भी वहाँ छोडेंगे । मैंने अनुपम से कहा कि चल यहाँ से बहुत दूर चलते हैं जहाँ से वापस कभी इस शहर में आया ना जाए । मुझे समझा रहा था कि मुझ पर क्या बीत रही है । मैं अपने कमरे पर चला गया हमने हम भी अपने कमरे पर चला गया । उसने कहा कि मैं बाइक छोड कर जा रहा हूँ तो मुझे इस हालत में छोड कर जाना नहीं चाहता था और उसे आज भी शहर के बाहर देहरादून जाना था तो उसे जाना पडा । अब मैं अपने कमरे पर अकेला बैठा हुआ था । पापा को फोन करके बताना चाहता था कि पापा और उन्नति अब नहीं रही । मेरे अंदर हिम्मत नहीं थी । अचानक मेरी नजर उस कॉल पर पडी तो मेरे कमरे में था । आपको याद होगा ना वो और उन्होंने मुझे उस रात दिया था जब उसने मुझे घडी किस करी थी । मैंने वो हो ठीक उसी तरह पहना जैसा उसने मुझे उस दिन पहनाया था हूँ हूँ । इसके बाद मैं सो गया । आज बडी अच्छी नहीं नहीं मुझे सुंदर जी केश में खास हो चुका था । परेश का अगर खाक ना कर दे तो क्या इसका पूरे पांच घंटे बाद अनुपम ने मुझे फोन करके चलाया । उस ने कहा कि ये कहने को फोन किया था कि वह देहरादून पहुंच चुका है । अभी दिन के एक बज रहे थे । उसने मुझसे कहा कि हॉस्पिटल चला जाता हूँ । मैंने कहा नहीं कौन है हॉस्पिटल में क्या है अच्छा । अनुपम ने मुझे समझाने की कोशिश की और मैं समझने को तैयार नहीं था । उसने बोला कि अभी सरस्वती का फोन आया था । थोडी देर बाद और उन्नति को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने वाले हैं । तू नहीं जाएगा क्या? अरे पगले, अगर तू नहीं जाएगा तो और उन्नति को बुरा लगेगा । वो कहेगी कहाँ चला गया तो तुझे वहाँ होना चाहिए । चल वहाँ चला जाएगा तो मैंने फोन काट कर रख दिया । मैं सोच रहा था कि क्या मुझे जाना चाहिए । पर मेरे मन में बस उसके साथ बिताए । वो पल याद आ रहे हैं । मैंने तय किया कि मैं जाऊंगा तो भाई पर बैठा और मैं हॉस्पिटल के लिए जाने लगा । मेरे दिमाग में बस उसका एक हस्ता चेहरा था । मैं शाम को पांच बजे कोचिंग के पेड के पास उसको मिलने आता था । उसका चेहरा मेरे सामने था । अनंदा मैं हॉस्पिटल पहुंचाया । लिफ्ट लेकर में सीधा उसी कमरे में गया जहाँ उसको शिफ्ट किया गया था । अपने दरवाजे की दहलीज पर पहुंचा तो मेरी नजर सीधा उसके बैठ कर गई । जहाँ पर हुई थी । मैंने दरवाजे की दहलीज से देखा रोज की तरह उसके बाद आज भी उड रहे थे । मान लो आज भी उन पर ढंग से करेंगे ना लगी हूँ उसका संदर्भ चेहरा मेरे सामने था की तभी मेरा फोन बजा तो फोन पर सरस्वती थी । उसने कहा कहाँ है तो उसने कहा नीचे पार्क के पास आजा पर मैं तो किसी खूबसूरत लडकी का दीदार कर रहा था तो वहीं ऊपर आ गई । सरस्वती ने मुझे देखा वो झट से उस को पहचान चुकी नहीं जो अरुंधति ने मुझे उस रात को दिया था । किसी मदहोश रात ही हूँ । सरस्वती ने मुझे कहा अच्छा लग रहा है । अभी अंदर से स्ट्रेचर पर और उन्नति को लाया गया । उसकी बॉडी को नीचे एम्बुलेंस में डाला गया । उसकी माँ का रो रोकर बुरा हाल था और उसे ले जाया जा रहा था । नीचे लगभग पूरे सौ लोग थे जो अरुंधति के रिश्तेदार थे । सभी औरतें वहीं पर साइड हो गई और सभी जेन्स लोग सभी अपनी अपनी गाडी पर बैठ गए । लगभग पंद्रह बीस गाडियां फॅस के बीच और उन्नति की माँ भी चला रही थी । आशु बेटा और उन्नति ने मुझे बताया था कि अकसर उसकी माँ उसे उस नाम से पुकारती हैं तो लगभग सभी कार्टर जाने वाले हैं और मेरा जाने का बिल्कुल भी मन नहीं था क्योंकि मैं अभी भी सदमे में था । सब कुछ इतनी जल्दी हो रहा था की सब समझ से बाहर था । मुझे अचानक से झटका लगा मानो एक हवा का झोंका आकर सीधे मेरे ऊपर आकर लगा । उसने मान हूँ मेरे आंख और कान दोनों खोल दिए । अभी तक तो मैं मना नहीं में था । मैंने सोचा मुझे भी और उन्नति के पीछे जाना चाहिए तो मैं बाइक पर बैठा बाइक स्टार्ट कि मैंने कॉल को अपने चारों ओर लपेटा । मैंने सिर्फ दबाया । मेरी बाइक में स्पीड पकडी । मुझे ठीक नहीं याद आई । जब और उन्नति मेरे पीछे बाइक पर बैठे थे मैंने ठीक उसी दिन की तरह बाइक की रफ्तार बढाई । बस पांच मिनट में सारी गाडियों कोवर्ट करके ठीक एम्बुलेंस के पीछे पहुंचा तो सबसे आगे चल रही थी । फॅस को पीछे छोडकर सबसे आगे चला गया । पूरी रोड पर सबसे आगे महीना और सारी गाडियाँ मेरे पीछे मानव । ठीक वैसे जैसे शादी में दूल्हे की गाडी सबसे आगे चलती है और बारातियों की उसके पीछे मेरे बाल तोड रहे थे । मैंने दायें देखा तो सचमुच शमशान था । मैंने गाडी किनारे लगाई, सारी गाडियाँ रुकी और जब एंबुलेंस से उसे निकाल रहे थे तो हवा से उसके मुंह पर रखा सफेद कपडा मुझे उसकी आंखें देखी । उसके बाद ऍम क्या मैं उसका चेहरा लास्कर देख रहा था था? शायद लास्ट हो । उसको चिता पर लिटाया गया । चारों और भीड लगी थी लोगों कि पंडित कुछ मंत्र पड रहा था उन्होंने । उस समय का विवरण करना बहुत मुश्किल है । एक सच्चा प्रेमी उस चित्र को कभी अपने सामने नहीं लाना चाहेगा । चारों और लोग थे । मैं भी कहीं पीछे से और उन्नति को अंतिम बार देखने की कोशिश कर रहा था और वो नहीं दिख रही थी । उसे मुखाग्नि दी गई । परवाह मेरे सामने धू धू कर जलने लगी । सभी लोग वहाँ से जाने लगे । उनके पिता भी थोडी देर बाद यानी दस मिनट बाद पूरा शमशान खाली था । बस मैं वहाँ था अकेला हूँ जो उसकी चिता को जलते देख रहा था और दूसरा भी था जो चल रहा था हूँ । मैं पूरे सात घंटे तक वहां बैठा रहा । अपने समय के साथ आंखों से जो आंसू टपक रहे थे, मानव कुछ कहना चाह रहे थे, वो बस खामोश हूँ । मैंने उसे याद किया, पूरा याद किया जब मुझे वहाँ पहले दिन देखी थी उसकी आंखें । उसके बाद उसका माथा । बस मेरा प्यार मेरे सामने खास हो चुका था । मैं वहाँ से चल दिया । दो दिन तक मैं सदमे । मेरा पूरा सदमे में । उसके बाद हमारा नीट का रिजल्ट आया । मैंने नेट पर सर्च किया तो रोज की तरह इंडिया लिस्ट में पहले नंबर पहली राय पर था । एक ही ना और उन्नति मेरे आंसू फोन पटक के । मुझे गर्व हुआ कि रोज की तरह पहले नंबर पर वही थी पर जो किस बात का था कि वो मेरे बीच नहीं, अगर होती तो कितना खुश होती । आज मैं शहर छोडकर जाने वाला था हूँ । मैं पूरे सम्मान तय किया । मुझे पता था कि मैं जा रहा हूँ । मैं बस जा रहा था । केवल उसी शहर से दूर नहीं बल्कि अपनी प्रेमिका की हर एक यादव से मैं उस शहर को छोडकर जाने वाला था । मैंने पूरा सामान किया । हर चीज और नदी का दिया हुआ वो सॉल्व घडी । उसका रेट रोज में हमेशा के लिए शहर को छोडकर जाने वाला था । बहुत बारिश हो रही थी । शायद आसमान भी रो रहा था । मुझ पर अभी बस निकलने में पूरा एक घंटा था । फॅमिली और तकरीबन बीस मिनट की दूरी चलकर उसे पैसे दिए । बारिश हो रही थी । बारिश में भाग भागा जा रहा था । एक जगह पर वो जगह थी और अंदर जी का घर । मैं उसके मेन गेट से अंदर घुसा हूँ और उसके दरवाजे पर ताला लगा था हूँ । मैंने ताला तोडा और उसके कमरे में गया । आज भी उसके कमरे से एक महंगा रही थी । मैंने एक साथ भरी कमरे की एक एक चीज कुछ हुआ । मैंने एक बक्सा खोला । उसमें से एक फॅार मिला और एक आधा गुलाब का फोन था । शायरी वही रहता था जो मैंने और उन्नति को चॉकलेट किस्ती और वो गुलाबी मैं पहचान गया । इसके अलावा उस बक्से में कुछ खालीपन नहीं थे । शायद वही बनने थे जब हम प्रतीक कोचिंग के दिनों पर कुछ लिखा करती थी । मैं अक्सर उसे कोचिंग में खाली पन्नों पर कुछ लिखता हुआ देखता हूँ । मैंने पन्ने पढेंगे तो उसमें लिखा था तीस दस दो हजार सोलह । अभी राहुल मुझे दरवाजे की चौखट से देख रहा है । पांच की आ रहा दो हजार सोलह अभी राहुल मुझे लेक्चर के बीच बीच में मुझे देख रहा है । बट इसमें और भी बातें थीं और कमरे से एक सडी जैसी बदबू आ रही थी और बहुत ही पिंजरे में कैद तोते गी । वो मर चुका था । मेरी आंखों में आंसू थे । मैं वापस वहाँ से चला गया और ऑटो लेकर बस अड्डे गया । मेरी बस चलने लगी । मैं उसमें पीछे की सीट पर बैठा था । बारिश हो रही थी । बात मेरा प्यार अब मर चुका था । मैं बहुत दुखी था इसलिए नहीं कि और उन्नति अब नहीं नहीं बल्कि इसलिए की जरूरत और कहाँ से बाहर थी । चादर भी छोटी थी और मेरे पास भी उसमें फिट आ गए थे । मैंने शहर को अलविदा का कुछ याद आया जैसे कि शहर बदले में मुझे अलविदा नहीं फिर मिलेंगे कह रहा हूँ । पूरे पांच घंटे के सफर के बाद मैंने रुडकी से एक ट्रेन और अपने गांव उदयपुर वापस पहुंचा । मैंने देखा कि माँ, पापा और दादी मुझे लेने स्टेशन है । मैं ट्रेन से उतरा और अपनी माँ के गले से लग गया नहीं उसका माता चुना है । मेरी माँ ने भी ठीक वैसा ही क्या । आज मेरी माँ ने ठीक वैसा श्रृंगार किया था जैसा की माँ अक्सर बडे त्योहारों पर करती है । मथे में बडा बडा सिंधु पूरा शरीर गहनों से लगा था । मैंने कहा और कहा है हम तो उसका स्वागत करने आए हैं और मैं खामोश था । आखिरकार मैंने अपनी चुप्पी तोडी और कहा हाँ वो नहीं । मेरी बहन मेरे पास आई और कहती है छोटे घडी कहाँ से लिए अच्छी है । मुझे एक बार फिर उसकी ही याद आई । इस बार मैं आंखों से नहीं दिल से हो रहा था । दिन बीतते गए । उसके बिना आज दस साल हो चुके हैं । इस्काॅन उस शहर से दूर होंगे । आज यहाँ तक कि उस देश में भी नहीं । मैं अमरीका के छोटे से शहर में हूँ । दस साल बाद भी मेरी जिंदगी में कुछ नहीं बदला । उसकी वह घडी मेरी कलाई पर अभी भी है । जब उस की याद आती है तो अपनी आंखे बंद कर लेता हूँ, उसे अपने पास पाता हूँ । कई बार ठंड में उस को लपेट लेता हूँ तो आपने चारों और उसे पाता हूँ । और अब तो मैं समय कभी बहुत पाबंद हूँ । कभी पांच मिनट भी लेट नहीं होता हूँ और अब मैं जान चुका हूँ कि हेड दे में कितनी भी भावनाएं हूँ । किन्तु फॅस अपनी ही जगह पर होते हैं । और हाँ आज भी तीन शब्दों का हक मैंने आज तक किसी को नहीं दिया । जब मुझे कोई बात नि शक्त कहता है तो थोडा छेड जाता हूँ पर अंदर से मुस्कुराता हूँ । जब कोई कहता है युवा हुई अक्सर जब आसमान में तोते उडते देखता हूँ तो जरा सा उसकी याद आ जाती है और अब तो बारिश और मेरी कहीं दूर दूर तक नहीं मंदिर क्योंकि अब मैं बारिश में छाता ले जाना नहीं भूलता । जब कभी बारिश की बूंदे गलती से मुझ पर पडती हैं तो न जाने क्यों आंखें आज भी नाम हो जाती है और उसी समय की याद दिलाती है जब सूखे पत्ते सरसराहट कर रहे थे । चंद सिर पर था ऍम आ रहे थे और ठंड के कारण ट्राॅले थोडा खफा हूँ आज से क्योंकि आधी जिंदगी तो कम्बख्त में इसी कशमकश में निकाल दिया कि क्या फिर कभी मैं उन बडी बडी आंखों से उन पे रंग वालों से मुखातिब हो पाऊंगा क्योंकि मैं आज भी किसी का इंतजार कर रहा हूँ । जब मुझसे कहे कि तुम पाइप पर ही आना और जब मैं मना करूँ तो वहीं हट बुद्धू आज में भारत जा रहा हूँ । पूरे दस साल बाद बहुत एक्साइटेड हूँ । मेरी फ्लाइट सीधा उसी शहर में लायन होगी जो शहर मेरी मोहब्बत का शहर शिमला हूँ । वो शहर जिससे मुझे अपना सच्चा प्यार मिला था हूँ मेरी फ्लाइट ऍम हुई अब मुझे बस पकडनी थी अपने गांव के लिए थोडा बूढा हो गया । थोडा क्या काफी हो चुका हूँ । वो पहले वाली पूर्ति नहीं रही और आंखों में भी चश्में हैं । बस पूरे चार घंटे बात की है मेरे गांव के लिए सोच रहा हूँ क्यों ना पुरानी यादों को ताजा कर लिया जाएगा । मैंने ऑटो लिया और अपनी पुरानी दस साल पुरानी कोचिंग की तरफ गया । बाहर पहुंचकर मैंने वो पेड देखा । जहाँ पर हम मिला करते थे । वो वहाँ पर नहीं था । अच्छा है वो भी बूढा हो चुका था । बहुत तूफान झेले थे, उसने भी चल बसा बेचारा मैं अपनी खोजी के अंदर गया जो अभी वैसे का वैसा ही था । गेट पर एक अंकल थे मैं उन्हें झट से पहचान गया । चंद्रमोहन अंकल जो अधेड उम्र के हो चुके थे शायद मुझे नहीं पहचान पाए । मैं आगे बढ गया हूँ । मैं अपनी क्लास की चौखट पर पहुंचा । पहले की तरह मेरी सबसे तेज होने लगी । डर मेरे अंदर बैठने लगा क्योंकि मैं उसी दरवाजे की दहलीज पर था जहाँ से मैं उसे रोज देखा करता था । मैंने आज भी ठीक उसी तरफ देखा । वो आंखें, वो बाल, वो लडकी जो नीचे देख कर अपनी किताब पढ रही हूँ । अब वहाँ कोई नहीं था । पूरी क्लास खाली नहीं । उन्हें छुट्टी थी । हनुमान जयंती की मंगलवार था । उसने मंगलवार मंगलवार मुझे याद आया, मैंने घडी में टाइम देखा । शाम के पांच बज रहे थे । मैं धीरे धीरे कदम बढाकर उस मंदिर में गया । लाइन में खडा हुआ । वहाँ छोले पूरी मिलना बंद हो गया था क्योंकि मेरी प्लेट में दो बूंदी के लड्डू हैं । मैं ऐसा और पीछे पार्क में गया । अब वहाँ और कपल्स देख नहीं रहे थे । पूरे पार्क में कचरा ही कचरा था । झाडी बहुत बढ गई थी । मैंने अपनी बेहन साफ की और बैठा अकेले अकेले लड्डू का आनंद । मैंने सोचा क्यों ना लव लॉक ब्रिज जाया जाएगा तो मैंने एक फोटो को साथ दिया । मैं थोडी देर चलने के बाद उस पुल पर खडा था । मैंने एक ताला लिया जिस पर दो नाम गुदवाने वो नाम थे अभिषेक लाॅ हाँ, इस बार राहुल नहीं और मैंने पुल पर जॉॅब अच्छा भी इतने दूर फेक दी की किसी को कभी ना मिल पाए । मैंने चिल्लाया और अंगद ही आई लव यू बाकी कपल्स मेरी इस हरकत को देख रहे थे । शायद यह जान गए होंगे कि मैं वहाँ एकमात्र ऐसा लडका था जो अकेला आया था । वो मेरे लिए ताली बजा रहे नहीं । मैं वहाँ से चल दिया और मेरा ऑटो रुका । ठीक कोचिंग के सामने । अभी शाम में कोचिंग के सामने वही हवा चल रही थी । कुछ ठंडा लगा तो सोचा कौन सी पी ली जाए तो मैं पीछे ऍम । दस साल बाद आज तक वहाँ कुछ नहीं बदला था । उसका नाम ही नहीं आशियाना मैं उसी बेंच पर बैठा जहाँ अक्सर बैठा करता हूँ और मैं पूरे आधे घंटे कौनसी का आनंद लिया हूँ । मैंने टेबल पर रखे कपडे को उठाए । वहाँ पर भी अभी भी कुछ नहीं बदला था । वहाँ भी लिखा था अभिषेक लाख और अंदर ही है । कौन कहता है कि मोहम्मद की कहानी अधूरी रह जाती है तो तो था

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सुनिए मेरी प्यार की कहानी कैसे मैं एक आज घराने का लड़का अपने प्यार को पाने में क्या-क्या मुश्किलों से गुजरता हूँ, सुनिए पूरी कहानी| Author : Abhishek Thapliyal Voiceover Artist : Navneet Atul
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