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Five is Not Just a Number - Part 13 in Hindi

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AuthorAbhishek Thapliyal
सुनिए मेरी प्यार की कहानी कैसे मैं एक आज घराने का लड़का अपने प्यार को पाने में क्या-क्या मुश्किलों से गुजरता हूँ, सुनिए पूरी कहानी| Author : Abhishek Thapliyal Voiceover Artist : Navneet Atul
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मैंने वहाँ फूल उठाया जो उसने मुझे एक्सीडेंट से पहले दिया था । उसकी खुश को नाक से सांस के साथ अंदर ली । हालांकि वहाँ आर्टिफिशियल था पर उस पर मानव वही महंगा आ रही थी । मुझे देख रहा था किसी तरह रात काटी । दूसरे दिन की सुबह हम नौ बजे अस्पताल चले गए और उन्नति के माता पिता को खुश लग रहे थे । आज मुँह नहीं थे । उन्होंने हमें बताया कि और उन्नति को होश आ गया । अब वहाँ आंखे भी खोल सकती है । तो तभी डॉक्टर हमारे पास आया और कहा और उन्नति आप सभी को पहचान सकती है । बस कुछ बोल नहीं सकते क्योंकि उसके जबडे के ऑपरेशन के कारण गले में कुछ समस्या है तो अभी कह नहीं सकती । मैं नहीं है बात सरस्वती को फोन कर बताएंगे क्योंकि आज हमारे साथ नहीं आई । वो भी ये सुन कर बहुत खुश हुई है । हम सभी लोग और उन्नति से मिलने अंदर गए । जैसे ही मैं दरवाजे पर पहुंचा मुझे उसकी बडी बडी आंखें दिखाई नहीं । उसके बाद भी ठीक थी । आज आज मैं अस्पताल के दरवाजे की दहलीज पर उसे उसी तरह देख रहा था जैसा मैंने उसे हर रोज कोचिंग में देखो । आज भी उसकी वही बडी बडी आंखें । वहीं बिखरे बात जिन पर आज भी कंघा नहीं लगा हुआ था । हम अंदर गए । पूरे कमरे पर केवल तीन लोग थे जो रो रहे थे और अंदर जी की माँ मैं और उन्नति की मामी जी मैंने किसी तरह से खुद को कंट्रोल किया । उसकी हालत मुझसे देखी नहीं गई । वो बेड पर लेटी थी । वेंटिलेटर लगा हुआ था । सिर पर पट्टी बनी थी । बस आंखे खुली थी । जो सुकून का दीदार करा रही थी । वहाँ चेतनाशून्य थी । यहाँ तक कि वो आंखों की पुतली को भी हिला नहीं पा रही थी । बस जैसी थी उसी अवस्था में थी और उन्नति का एक आंसू गिरा जो उसके कानों की तरफ चला गया । वहाँ से कुछ कहना चाह रही थी पर नहीं कह पा रही थी । हम सभी लोग वहाँ से बाहर आ गए । डॉक्टर ने हमें बताया कि ऐसी अवस्था में उभरने में एक दिन भी लग सकता है और एक साल भी क्योंकि वह कोमा में है तो हम सब प्रार्थना कर रहे हैं । पूरी शाम तक काम वहाँ ही रहे हैं । उसके बाद छह बजे घर आ गए । हम ने खाना खाया हूँ । वैसे कुछ इच्छा नहीं हो रही थी पर हल्का खाना खाकर हम हो गए क्योंकि कल सुबह नौ बजे हमें फिर अस्पताल जाना था और फिर कुछ मिनटों में ही हमें नहीं आ गई । कहीं न कहीं अनुपम भी में हालत देखकर रोजर हो रहा था पर अभी हम सो चुके थे । ऍम मुझे कुछ नहीं नहीं आ रही थी । मैं कभी दायां करवट लेता तो कभी ऍम । बस यही सोच रहा था कि ये मेरे साथ मेरी हस्ती खेलती जिंदगी नरक बन चुकी थी । जिंदगी पिछले आठ नौ दिन से बस घर से हॉस्पिटल और हॉस्पिटल से दोबारा घर तक इसी बीच में सिमट के रह गई थी । अब बस पांच दिन बाद ही हमारा नीट का रिजल्ट आने वाला था और उन्नति बहुत इंतजार कर रही थी कि कब हमारा रिजल्ट आएगा और कब हम एम । बी । बी । एस । का कोई कॉलेज लेकर डॉक्टर बन जाए । फिलहाल वो हॉस्पिटल में अपनी जिंदगी की बहुत बडी जंग लड रही थी और मैं और उन्नति की इस घटना का जिम्मेदार था । होनी को शायद कोई नहीं टाल सकता हूँ, पर हालात डालने की कोशिश जरूर कर सकता है । तो उस दिन पहली बार ऐसा हुआ था कि जब मैं और उन्नति को छोडने उसके घर तक नहीं । अगर उस दिन मैं भी उसके साथ होता है तो या तो शायद उसे में बचा लेता और या तो हम दोनों आज साथ में होते हैं और ऐसे मैं अपनी खुशकिस्मती करूँ या बदकिस्मती? ऐसा कुछ सोचते सोचते मुझे नींद आ गए । दूसरे दिन की सुबह जब हम उठे तो उस दिन की याद मैं कभी नहीं भूल सकता । उस दिन बारह बजे के करीब हम हॉस्पिटल गए और उस दिन शुक्रवार का दिन था और उन को होश तो आ रखा था पर मैं उसे नहीं देख सकता हूँ क्योंकि उसकी हालत मुझसे नहीं देखी जाती । मैं उससे बात करना चाहता था, पर कर नहीं सकता । मैं जान बूझ कर कुछ ऐसी गलती करना चाहता था जिससे वह मुझे डांटे । पूरे दस दिन हो चुके थे । उसके वही शब्द सुनना चाहता था कि राहुल तुम क्यों ऐसा करते हो? क्यों मुझे परेशान करते हो? तुम कभी नहीं सुधरोगे हाथ बुद्धू । ऐसे शब्द बार बार मेरे कानों में बज रहे थे । ये सोचते सोचते हैं मैं अखिल नाम हो गई और उन्नति की । माँ ने बस एक बार मुझे देख लिया और हर बार की तरह मुझे अनदेखा नहीं किया बल्कि मेरे पास आकर कहा कि राहुल चलो नीचे पार्क में बैठते हैं । शायद अरुणधति से मेरा ध्यान बंटाने की कोशिश कर रही थी तो मैंने भी कहाँ? टीचर हमने लेफ्टी और सभी लोगों पर ही खडे थे । अनुपम सरस्वती आपस में कुछ बातें कर रहे थे और नदी के पापा आपने कुछ रिश्तेदार से बात कर रहे हैं, पार्क में पहुंचे हैं और एक बेंच पर बैठे आंटी ने मुझे मेरा नाम पूछा कहाँ रहते हो वगैरह हो गया और फिर अंत में मुझसे एक सवाल किया की और उन्नति दोस्ती क्या तुम्हारी? मैंने हस्कर कहा हाँ जी दोस्त थी । आंटी ने पूछा सबसे बताऊँ क्या? तो मौसम गति से प्यार करते हो । मैं वही करेंगे । और थोडा देर बाद मैंने कहा आंटी मैं उसे अपने दिल से मोहम्मद करता हूँ । शायद आंटी ने मेरे आंखों में पढ लिया था । मैं थोडा डर रहा था पर कुछ खास नहीं । आंटी ने मुझसे पूछा कि तुम और उन्नति को कल के दिन ऐसी हालत में स्वीकार करोगे । मैंने कहा आंटी एक बार वो हम सब से बात करने लग जाएं तो मैं उसे किसी भी हालत में स्वीकार करूंगा । आंटी ने में सिर पर अपना एक हाथ गया और कहा मेरी और अंगद थी की पसंद कभी खराब नहीं । उस वक्त मुझे लगा कि मानव मेरी माँ नहीं मुझ पर हाथ फेरा हूँ । आंटी ने मुझसे पूछा बेटा, घर की याद तो आती होगी ना? कब से नहीं मिले हैं अपने माँ बाप से मैंने आंसू साफ करते हुए कहा बहुत याद आती है माँ की तो बहुत ज्यादा पूरे एक साल हो गए । अपनी माँ को देखे हुए हैं । आंटी ने कहा बेटा कब जाओगे घर? मैंने कहा आंटी पहले तो नीति रिजल्ट के बाद अगले ही दिन जाना था । मतलब परसों लेकिन अब देखो क्या होता है? आंटी ने पूछा कि बेटा क्या तुमने कुछ खाया? मैंने साथ सबका आंटी भाई ने खाना बनाया था, पर कुछ खास इच्छा नहीं थी इसलिए नहीं खाया । फॅमिली में हिंदी में भी बंगाली करना चाह रहा था । जैसे कि अकसर और उन्नति को भी आता था । हम दोनों के बीच कुछ और बात हुई । उसके बाद हम ऊपर चले गए । पूरे दिन खडा रहने के बाद मैंने अपनी घडी में टाइम देखा तो मेरी घडी अभी आजाद के आठ बजा रहे हैं । मैंने अरुंधति के डॉक्टर के पास जाकर उनसे चर्चा बाकी । अकेले में मैंने डॉक्टर को समझाया कि सर प्लीज मुझे और उन्नति से मिलने नहीं है । डॉक्टर ने साफ मना कर दिया मैंने कहा डॉक्टर प्लीज दिल का सवाल है और उन्नति और मैं रिलेशनशिप में थे और और अंदर टीके एक्सिडेंट से पांच मिनट पहले मैं उसके साथ ही था । डॉक्टर है । मुझे कहा बेटा, आप कैसी बात कर रहे हैं? मैं आपको इजाजत नहीं दे सकता क्योंकि और उन गांधी का बी पी लो है । उसे कुछ भी हो सकता है और आप प्लीज मेरे रास्ते से हट जाएगा । मैंने उनके दोनों हाथों को पकडकर उन्हें रोका कि सर प्लीज ऐसे समय में मेरे मुंह से ज्यादा मेरे आंसू कह रहे थे । ऍम डॉक्टर ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और मुझे अपने साथ अंदर । लेकिन उन्होंने मुझसे कहा केवल पांच मिनट का समय है । किसी को पता नहीं लगना चाहिए इस बारे में और डॉक्टर पाँव चले गए । उस कमरे में केवल मैं और उन्नति थे । मेरा समय शुरू हुआ । पांच मिनट ही मेरी जिंदगी के अनमोल पांच मिनट है । ये वही पांच मिनट है जो मैं और उन्नति से मिलते वक्त रोज जानबूझ कर लेट करता था । ये पांच मिनट आज मुझे बडे देश कीमती लग रहे थे । हाँ, ये पांच मिनट वही पांच मिनट थे जब मैं उदयपुर से हरिद्वार आने वाले ट्रेन में अपनी घडी देखकर सोच रहा था कि क्या मेरी घडी के विशेष बच्चे पांच मिनट और मेरा वह अलविदा कहना क्या मेरी जिंदगी बदलने वाले थे? क्या मुझे उन पांच मिनट की कीमत का सही अंदाजा पता लगने वाला था? हाँ, वास्तव में तो मैं उनकी कीमत समझ चुका था क्योंकि अभी तो एक एक मिनट भी कीमती था । तो सबसे पहले मैंने उसके चेहरे का जी भरकर दीदार किया । उसकी उन बडी बडी आंखों का भी और फिर उसके बेरंग बालों का । जो आज भी ठीक उसी तरह उड रहे थे जैसे की कोचिंग के दिनों में उडा करते थे । और मैं उसे लेक्चर के बीच बीच से छुप छुप के देखता था । मैंने और उन्नति के चेहरे को देखा था जिसकी पूरी तरह हालत बिगड चुकी थी । उसकी बंदा के अचानक खुली है । उसने मुझे देखा और मैंने उसे उसकी बडी बडी आंखें उसका । वो वेंटीलेटर से ढका था । मुझे उसकी हालत देखी नहीं जा रही थी । आप कल्पना भी नहीं कर सकते हैं कि उस समय मैं किस परिस्थिति से कुछ कर रहा था । ऍम होना चाहता था । दिल में बहुत दर्द था मानो लग ऊपर कुछ ठहर सा गया हूँ । मैं उससे बात करना चाहता था । मैंने उससे कहा की और उन्नति मंगलवार आने वाला है । हम जल्दी ठीक हो जाओ, फिर कोचिंग के पीछे वाले मंदिर में भी चलेंगे । वहाँ से छोले पूरी लेंगे और सिर्फ पार्क में चलेंगे । और हाँ, इस बार में अपनी प्लेट डस्टबिन में ही डालूंगा । वो खामोश बनी नहीं । फिर मैंने उसे डांटा । मैंने कहा अगर तुझे रोड पर करने भी नहीं आती क्या? पर मैं इंतजार कर रहा था कि काश मुझसे कहे हट बुद्धू पर उसने इस बार भी कुछ नहीं कहा । मैंने उससे ये कहा कि चल आज भी तेरी ही रखी चल । मैं शादी के दिन भाई पर ही जाऊंगा । और हाँ बाइक भी तू ही चलाना । पर बस सब औपचारिकता थी । मैंने इधर उधर देखा । पीछे देखा और फटाफट और उन्नति का वेंटिलेटर उसके मुझे हटाया और उसके होठों को अपनी फोटो से झट से चोमा । मेरा एक आंसू उसके माथे पर गिरा । मैंने फॅमिली आया और उसके माथे से आंसू साफ किया और फिर मैंने उसको कहा और उन्नति मैं राहुल नहीं हूँ । मैं अभिषेक होगा और मैं एक रजवाडा हूँ । पूरी दुनिया में राजस्थानी छोरे का और एक बंगाली लडकी का रिश्ता कितना सुंदर है? मैंने कहा पापा को हमारे बारे में सब पता है और वह तो जल्दी ठीक होते हुए देखना चाहते हैं पर ठीक है आज भी तेज ही रखी । मेरे घर से पहले हम तेरे घर चलेंगे । मैं बस उसे खामोशी से देखे जा रहा था । जम्मू से उसका ये हाल देखा नहीं गया तो मैंने कुर्सी से उठकर पांच मिनट से पहले ही पीछे मुडकर जाने लगा । पहले मैंने उसके बारे हाथ की उंगलियों के बीच आपने उंगलियाँ फंसाई और वापस जाने लगा जहाँ ही रहा था कि मानो पीछे से किसी ने मेरा हाथ पकडा । खुश हुआ की और जीने मेरा हाथ पकडा है । मुझे विश्वास हुआ कि वो अब ठीक होने वाली है । मानव मानो मेरी फोटो ने उसके होटल के भीतर जान भर दी हो । मैंने झट से पीछे देखा तो पाया कि उसने मेरा हाथ छोड दिया । पर मुझे उसकी रैंक सिंगर में वही रिंग देखी जो मैं नहीं, उसे उसके जन्मदिन पर अपने हाथों से पहना ही नहीं हूँ । थोडी देर बाद डॉक्टर अंदर आए । वो मुझे बता नहीं वाले थे कि आपके पांच मिनट पूरे हो गए हैं । आप बाहर चले जाए तो उससे पहले मैंने डॉक्टर को बडे जो उसमें बताया की और उन्नति ने अभी मेरी उंगली पकडी । मैं बहुत खुश था । मैं जोश में भी था क्योंकि पिछले लगभग दो सप्ताह से मैं पहली बार इतना खुश था । डॉक्टर ने मुझसे कहा कि ठीक है आप बाहर जाइए । हम देख रहे हैं तो मैं बाहर चला गया । मैंने बाहर किसी को नहीं बताया कि मैं अभी और उन्नति के साथ था । मैंने सरस्वती और अनुपम ने अंकल आंटी से विदा ली कि अब हम चलते हैं । आज में बहुत खुश था हूँ । वहाँ से चले गए । हमने सरस्वती को उसके घर तक छोडा हूँ । उसके बाद हम भी घर आ गए । आज हॉस्पिटल से पहली बार आते वक्त मुझे ऐसा लगा कि मेरी और उन्नति ठीक होने वाली है । आज मैंने जमकर खाना है । मुझे मालूम था कि कल हॉस्पिटल पहुंचने ही मुझे एक अच्छी खबर मिलने वाली थी । मैंने पापा को फोन करके कहा कि पापा और उन्नति ठीक होने वाली है । आज मैं बहुत खुश हूँ । आपने मुझसे कहा यार अभिषेक तुझे पता है तेरे दादा जी की बडी इच्छा थी कि वह मेरी शादी धूमधाम से गए । मेरी ऐसी शादी कराना चाहते थे जैसे कि आज तक पूरे राजस्थान में नहीं हुई और तेरी माँ भी यही जाती थी कि हमारी शादी भी धूमधाम से हो तो अपने कॉलेज के दिनों से ही हम दोनों ने न जाने कितने सपने देखे थे पर किसी कारण वश वह पूरे नहीं हो पाएगा । पर अब वह सारे सपने तो पूरे करेगा । तो ऐसे ही कुछ और बातों के बाद मैंने फोन काट दिया । आज मैंने चयन की नींद नहीं । मैं सोने की कोशिश कर रहा था । मुझे नहीं ना नहीं वाली थी । मैंने करवट ली और मुझे नींद आ गई और मैं नींद नहीं था कि इतने में अगले पल में आवाज सर है क्या और उन्नति ठीक मेरे बगल में बैठी थी । मेरी किस्मत आगे उसे एक तक देखती नहीं है । मैंने बोलने की कोशिश की पर बोल नहीं पाया । उस समय मेरे मन में कई सवाल सैकडों सवाल चल रहे थे लेकिन मैं नहीं कर पाया कि कौन सा पहले पहुँच हूँ । मैं इधर उधर देखने लगा तो मुस्कुराई ऍफ का न तो उसके चेहरे पर कोई निशान था और ना ही शरीर पर वो इतनी सुन्दर लग रही थी जैसे कि वह हमेशा लगती थी । मैं भी समझने की कोशिश कर रहा था कि क्या यह सच है । उस ने बडी मासूमियत से हाथ रख दिया । फिर उसने मुझसे पूछा कैसे हो अभिषेक मैं बोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन मेरा मूड सूख गया था । मैंने बोलना शुरू किया । मैं इस पर या कि नहीं कर सकता था, तुम कैसे हो? मेरे सवाल आधे अधूरे ही रह गए । उसने मुझसे कहा कि मैं जानती हूँ की तुम क्या सोच रहे हो पर मैं तुम्हारे लिए यहाँ हूँ सिर्फ तुम्हारे ही लेकिन वो तो मुझे दूर हॉस्पिटल में मौत की जंग लड रही थी और मैं उसे हाँ स्वीकारने की कोशिश कर रहा था । जो कुछ में देख रहा था । वह बडे ही आराम से मेरे सवालों का जवाब दे रहा था । मैं उसकी आंखों में अपने लिए प्यार देख सकता था । मेरे अंदर कुछ था जो उसमें विश्वास करने लगा । जो दिखाई दे रहा था उसमें विश्वास करने लगा । मैं खुश था और सहज महसूस कर रहा था । कुछ घंटों की खामोशी के बाद मैं बोला दो हफ्ते तक मैंने तो मैं बहुत मिस किया यार पर तुम तो उसने अपनी उम्मीद मेरे होठों पर रहती है और मुझे आगे नहीं बोलने दिया । उसने कहा कि तुम सवाल बहुत करते हो अभिषेक ऍम जब उसने मुझे अभिषेक कहाँ तो मैं दंग रह गया क्योंकि उसने मुझे आज रोज की तरह राहुल नहीं कहा तो मैंने उसे कहा मेरा नाम अभिषेक नहीं है । मैं अभिषेक तो उसने झट से कहाँ हो । उसने बडे प्यार से मेरी ना खींचते हुए कहा कि मेरे पास ज्यादा समय नहीं तो मुझे वादा करूँ । उसने कहा तो मुझसे वादा करो कि तुम हमेशा अपना ख्याल रखेंगे । मैंने अपनी फोटो से उसकी बोली हटाते हुए कहा कि तुम हो ना मेरे पास ख्याल रखने के लिए । उसने फिर हाथ मेरे होठों पर लगाया और कहा शायद मैं तुम्हारे पास ना रहता हूँ तो बहुत प्यारी लग रही थी । उसने मेरे माथे को चूमा । मैंने उसकी आंखों में देखा हूँ क्योंकि मैं उसे महसूस कर पा रहा था । उसने मुझे पूछा कि क्या मैं तुम्हारे कंधे पर अपना सिर रख सकती हूँ । वह थोडी देर के लिए मैंने कहा हाँ मेरे पूरे शरीर पर तुम्हारा हक है । उसने मेरे दायें कंधे पर अपना सिर रखा । हम अभी भी एक दूसरे का हाथ थामे हुए थे । कुछ मिनट खामोशी में गुजर गया । बस खामोश था । सब कुछ नहीं । घडी की टिक टोक नहीं । बाहर के सूखे पत्तों की सरसराहट वक्त मानो थम सा गया था । मैंने अपने हाथ को उसके हाथ से छुडाने की कोशिश की तो मुझे लगा कि वो कहीं सोई तो नहीं परवाह नहीं हुई थी । उसने मुझे अपना हाथ नहीं छुडाने दिया । वो चाहती थी कि मैं उसे कसकर पकडे रखूँ । मैंने उसे बाहों में भर लिया । जब उस नहीं है कहाँ की अभिषेक मुझे प्यार करने के लिए शुक्रिया । ऍम दुनिया की सबसे खूबसूरत लडकी हो, जो एक राजस्थानी रजवाडी की दोस्त हूँ तो अपना ख्याल रखना । और हाँ, शिमला के लव लॉक ब्रिज हर साल जाना मुझे भूलना मत । और हाँ, उस दिन मंदिर में छोले में बहुत नाम था । नमक ज्यादा खाते हो और उसने मुझे कहा कि तुम ना बहुत डरपोक हो । मैंने झट से पूछा कि क्यों मेटर को क्यों उसने कहा हो? अगर तुम डरपोक नहीं थे तो तुमने मुझसे कोचिंग से पहले ही अपने प्यार का इजहार क्यों नहीं किया? मैं हर रोज सोचती थी कि आज तो मुझसे का होंगे और हर रोज तो मुझे बिना बताए ही चले जाते थे । मैं तो मैं तब से प्यार करती हूँ जब सर ने कोचिंग के तीसरे दिन एनसीआरटी ऑन फिंगर टिप्स वाले किताब मंगाई थी और तुमने मुझे लेती थी । उस दिन तो सब एक सपने जैसा लग रहा था । उस दिन भी अपने दिल की बात तो मुझे नहीं बता पाए । मैं पूरी तरह चला था और खुश भी था क्योंकि वो मुझे ना जाने कब से प्यार कर रही थी । तो इतना कहते हुए मैंने उसको बाहों में भरा । मैंने कुछ कहा नहीं । बस उसके बालों को झूमा । मैंने ज्यादा बात नहीं किया । मैं चाहता था कि वह आराम करें । कितने समय बाहर । हमें ये मौका मिला था और हो रही थी । मैंने उसका एक आंसू अपने एक उंगली पर उठाकर पीलिया क्योंकि मैं हमेशा से ही उसके हारे कांस्य को भी जाना चाहता था । मैं उसे घंटों तक अपनी बाहों में ही रखना चाहता था । मेरा फोन बजा बाहर अब भी अंधेरा था । हवा के एक झोंके ने मुझे नींद से जगा दिया । बाहर आकाश शांत था । चंद अपनी चमक हो रहा था । तारे गोल हो रहे थे, हो चुकी थी । मैंने अपने बगल में देखा तो और उन्नति गायब थी ।

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