Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

36-मुट्ठी भर धूप -मीरा

Share Kukufm
36-मुट्ठी भर धूप -मीरा in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
181Listens
वीर की नजर जब पहली बार मीरा पर पड़ी, तो जबरदस्त आकर्षण के जादू ने उसे अपने वश में कर लिया। मीरा को भी कुछ-कुछ महसूस हुआ। देखते-ही-देखते यही उनकी जिंदगी बन गई। दोनों को एक-दूसरे की तरफ खींचनेवाली ताकत ही मानो एकमात्र सच्चाई थी, जिसे बयां नहीं किया जा सकता। हालांकि यही प्‍यार उन्‍हें एक-दूसरे से अलग कर देता है। अचानक एक तबाही उन पर हमला करती है और उनके सपनों को झकझोर देती है। कुछ बाकी रह जाती है तो सिर्फ नफरत, जो उनके प्यार के जितनी ही ताकतवर है। बरसों बाद, किस्मत एक और चाल चलती है और दोनों को आमने-सामने ला खड़ा करती है। एक बार फिर। इस बार फैसला उन्हें करना हैः अपनी नफरत के हाथों बरबाद हो जाएं या प्यार को एक और मौका दें। Voiceover Artist: Ashish Jain Script Writer: Vikram Bhatt
Read More
Transcript
View transcript

कितना मेरा मंगलवार की शाम अपने हाथ से ज्यादा परेशान थी और ऍम तक नहीं दे रहा हूँ । ट्रैफल्गर भर उसे क्या अपना बढाएगी? चौबीस घंटे गुजर चुके थे ॅ क्या फॅमिली पहुंच जानकारी ही मिलेंगे । ये बताया गया था कि स्लो इंस्पायर रहने वाली एक ही लडकी शाॅ खुदकुशी करते हैं । लेकिन कोई दोषी नहीं नहीं । खुदकुशी के लिए उकसाने को लेकर किसी को गिरफ्तार किया गया है । मतलब ये नहीं था कि नहीं कि जानना चाह रही थी, उसकी मौत क्यों हुई? ऍम शरीर के बारे में जानना चाहती हूँ । मेरे दिल उसके लिए बेचैन हो रहा था । ऍम कुछ भी नहीं कर पा रही थी । मध्य स्तर पर करवटें बदल रही हूँ मुझे वीर उसके अंदर पर चेहरा नजर आ रहा था । मैंने देखा कि अभी सुबह भी नहीं हुई है । लेकिन मैंने ऍम पहले देखा ऍम लेकिन जब उसका जवाब नहीं है मेरी चिंता और बढ गई । अलग अलग सिर्फ टीम के साठ दिन भर में रिकॉर्डिंग चल रही है । लेकिन इन सबके बीच में सिर्फ और सिर्फ तीन के बारे में ही रहेगी नहीं । दोपहर में उसे फिर से एक मैसेज भेजा । एक बार फिर कोई जवाब नहीं है । मैंने और फिर देखा जिसमें मैं पढ लिया था । मैंने जाॅब भेजा तो तो बाहर भी ठंड रही थी, फॅमिली जा रही हैं । मुझे डर था कि वो कहीं कुछ गलत कर रहे हो । आप को छोडना पहुँचा आखिरकार जब हद हो गई तो मैं उसे कॉल की ऍम उसके आवास में दर्द था और ऐसा लगा जैसे बहुत दूर चाहता था नहीं तो क्या हो गया ऍम मेरे अंदर इकट्ठा हुआ सारी चिंताएं छोड के सब बाहर आ रही तो दिन भर तो करते है तो जब तक नहीं दिया फिर मैं तुम्हारी चिंता में भरी जा रही हूँ हूँ । अगर मैं कहूँ कि मुझे चोट पहुंची मैं दुखी और अकेला तो क्या कर लोगी । ऍम भी मुझे गुस्सा आ रहा था । जानती हूँ मेरा मेरा क्या होता हैं क्या कर लोगे? मुॅह बहुत अच्छी तरह जानती थी । उन का मतलब क्या है? और दूसरी बात को लेकर सब कुछ सही था । क्या कॅश नहीं था अपने पति के टूट ऍम मेरा टूटा दिन कभी तो मेरे लिए मायने नहीं रखता हूँ । उसकी आवाज में कोई दुर्भावना या झगडा करने जैसा संकेत नहीं था । मैं कुछ सुन सकती थी तो बस उसकी निराशा को उसके शब्द मेरे दिल में छुप गए । मैंने आंख बंद की और सोचने लगी थी । मेरा कुछ खा जा चुका था और उसकी जगह तहरीक लानी ने ले रखी थी । मेरे को हमेशा ही हल्के में लिया । उस सही था मुझे अभी भी न फिर मेरा मुझे निकल गया मेरा भी इस भी मुझे तुमसे मिलना है । इससे पहले की वह कुछ कहता बीच में ही बोल पडे लंबी खामोशी थी कहाँ? गहरी सांस छोडते हुए उसने कहा मैंने ताज में क्या हम की हमने कंपनी टुक कराया है । वहाँ के स्टार्स के पास तो मेरे लिए अच्छा भी छोड जाऊंगी । एक घंटे में मिले ठीक है । उसने कहा मुझे लग रहा था जिससे उसकी कलेरू लाइट की थी जो बाहर रहने का नाम नहीं ले रही थी हूँ पता है उसके तब वहाँ से मुझे क्यूँ पार पार बुला रहे थे । वीर से पहले ही होटल पहुंच गई थी इंडियन फूट कंपनी का होटल के सबसे ऊपरी फ्लोर पर एक स्वीट था जहाँ से बकिंघम पैलेस दिखता था । हालांकि मुझे फिर से बाहर सिर्फ क्वीन विक्टोरिया मेमोरियल कब धोना दिखाई देता हूँ । अभी शाम चार ही बजे थे लेकिन सूरज अस्त होने चल पडा था । और भी देख रही थी कि मैमोरियल के पिच्छिका आसमान सर्दियों के गोधुली चेहरे लाल रंग की हो चुकी थी । उस वक्त तक मैंने पत्तिया नहीं जलाई थी लेकिन अंधेरे में बैठकर भी मुझे अच्छा नहीं लग रहा था । ऍम गई और से चला दिया । दूर की दीवार पर ट्यूलिप की खेतों के बीच से एक अकेली लडकी के जाने की फॅमिली हूँ । मुझे बहुत उदास दिख रही थी और फिर मुझे एहसास हुआ कि हमारी भावनाएं हमारे पास पहुँच चीजों पर असर डालती है । मुझे ज्यादा संतुष्ट व्यक्ति को वो लडकी एक काम में समय बिताती नजर आते हैं । लेकिन मुझे मुझे एक दम अकेली दिख रही थी । मेरी भावनाओं ने जाहिर कर दिया की मैं जीवन से कितना और संतुष्ट है । तभी दरवाजे की घंटी बजी । दरवाजा खोला तो सामने भी को खापा वो ऍम हुआ था मैंने तुरंत उसे भीतर कॅश कुछ इतना इतना ऍम बिल्कुल अच्छा नहीं लगता । मैं ऍम उसको मना कर दिया । हमारे प्यार में शाजिया को मार डाला उसने ऍम क्यों दूर हो गई और समझने की कोशिश करने लगे कि क्या कह रहा है । मुझे आंखों से बहते हम को देख रही थी । मैं ऍम मिलने जा रहा हूँ तो शांति और मेरे फॅमिली उसकी तुम्हारे साथ रिलेशन को लेकर मुझे सावधान किया था । मैंने ऍसे सच्चे प्याज के बारे में बताया था । कुछ लगता है तो उसके साथ बहुत कठोर हो गया था । सच में मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि वो इतने दिनों से मुॅह । उसमें लोगों से किसी ग्रीट करोडपति ऍम थी क्योंकि असल में ऐसा कुछ भी नहीं था । मुझे कैसे पता चलता कि वो प्यार की भूख है जिससे वो कभी हासिल नहीं कर सके और जब उसे हमारे प्यार की कह रही हो तो तो उसमें से किसी हूँ की तरफ के ऊपर ले लिया तो सोचने लगे कि ऐसा प्यार पाने के लिए बहुत तीर हो चुकी है । उनको खेले जीवन नहीं दिखाना चाहती थी और उसमें उसके उसे खत्म करने को फाॅर्स मुझे कानुपर चुकी नहीं हुआ । मैं वीर की तरफ देखते हुए इस जिंदगी जी क्या हमारा प्यार सच में इतना बडा है? मैं सोचता हूँ तो लगता है कि वो मजबूत नहीं । नीरव वो ठीक कह रहे थे कि ऐसा प्यार पाने के लिए बहुत तेज हो चुकी है । पी भी कर चुका हूँ । मुझे नजर मिलाते हैं । बोला क्या मतलब तुम्हारा अरे ग्रुप के साथ पूछा नहीं तो हम ने अपनी जिंदगी के साथ क्या क्या है? क्या? तो मैं फिर सभी मिला तो मैं अखिल मिल गया । लेकिन वीर मिला क्या? मुझे कविता में नहीं लेकिन मुझे मीरा दिल्ली क्या हम इस दुनिया की सबसे तीन तीन चीज? और हमने उसे ऍम नहीं क्या ऍम चेक करते देखा तो मुझे पहुंॅच । मैं प्यार के बिना पैसे बहुत नहीं पढना चाहता हूँ तो वहीं पर जीते और पार्टी मारते हैं । फॅस मौजूद रहते हैं तो टाॅप करते हैं, किसकी करती थी ना तो हम जीते हैं और नहीं तो क्या करते हैं? भाॅति पर मुझे लग रहा था कि शाजिया के जाने के बाद वो पहली बार हो गया था । ऍम सब अपनी परिस्थितियों की शिकायत है । ये दलील मुझे भी काम हो अपनी कर सकते हो तो बनाते हैं मेरा और हमने अपने लिए कुछ बुरी परिस्थितियां बनाई लेकिन अब और नहीं बहुत हो गया ऍम ऍम हमें या तो सबको चाहिए जब कुछ भी नहीं । मुझे सच में सब कुछ चाहिए । सब कुछ नहीं । मैं तो बोल रही हूँ कि मैं हूँ । मैंने लगभग सब ने की सभी में मुझे मैं कुछ नहीं जानता हूँ लेकिन हमें ही देना होगा तो मैं कल को और मुझे कविता को चाहे देना होगा अगर हमें ये चाहिए ये ऍम तो हमें उन्हें जब नहीं देना होगा और एक दूसरे के साथ रहना होगा । मेरा हम इस्लामी में नहीं जी सकते हैं । अब चक्कर शर्मिंदा होते नहीं रह सकते हैं नहीं तो दिमाग खराब हो गया मुॅह हूँ कविता को छोड दो मोदी के गलत किया है तो ऍम किया था चाॅस चली गई थी मुझे बताओगे कुछ फॅार क्यों हमारा प्यार और मैं तुम्हारी आॅफर होते हैं । मेरा ऍम तो से करते नहीं देखा हूँ । फॅमिली गलती की इसका मतलब ये नहीं कि हम उसे फिर से करेंगे । पब्किल अच्छा ही है तो बहुत अच्छी आती है । उसने मुझे कोई लगने के लिए कुछ किया । दस दस हजार नहीं दे सकती है । इसमें स्वार्थी होकर जैसे नहीं छोड सकती तो तुम उसके साथ रहकर स्वार्थी पंद्रह ऍम देख रही थी । कॅश नहीं था ऍम उस समय तक पहुँच ही देना चाहती । ॅ खेतों में खडी लडकी को देखा हूँ सब जानते हैं उसको मुझे बता दिया था । बताओ तुम अखिल से मेरे जितना क्या करती हूँ, क्या कभी कर सक होगी? मैंने इंकार कर दिया । नहीं तुम्हारी तरह किसी से भी प्यार नहीं कर सकती हैं तो फिर तो फिर तो उसके जीवन में बने रहकर और उससे अपने लिए प्यार की तलाश करने का मौका छीनकर स्वार्थी नहीं बन रही हूँ तो उसे वैसे मेरा नहीं मिलनी चाहिए । जो भी रखी है क्या उसे हक नहीं कि उसे कैसी प्रेमिका मिले? जोशी वैसे ही प्यार करें किसी कि तुम मुझसे करती हूँ तो मुझे छोडकर चोट नहीं पहुंचाना चाहती होगी, लेकिन यह जान लो कि तुम साथ रहकर भी उसे कम चोट नहीं पहुंचा रहे हो और उसी तरह मैं कविता को चोट पहुंचा रहा हूँ । हम ना केवल अपने साथ ज्यादती कर रहे हैं बल्कि उनके साथ भी कर रहे हैं । कभी इस तरह नहीं आता था । सच में मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था । ॅ क्या मैं कुछ सोच भी नहीं पा रही थी । फिर वीर धीरे से मेरा हाॅरर उठाया ताकि मैं उसकी तरफ होगा । चलते मिला मैंने कल चलना चाहिए । हम किसी चीज क्या इनवरनेस तक भी जा सकते हैं और वहाँ से तुम अखिल को चिट्ठी हो और मैं कविता को लिखूंगा, उन्हें चोट पहुंचेगी लेकिन लेकिन वक्त के साथ वो समझ जाएंगे । हम अगर एक ही शहर में रहेंगे तो हमें ऐसा करने का हौसला कभी नहीं मिलेगा । हमें ऐसा करने के लिए जहाँ से टूर होगा अगर अपने साथ रहना है तो हमें इसकी शुरूआत अभी के अभी करनी होगी । निर्दल के छोड फोर सुधारक रहता कि मुझे लगा मैं पीती हूँ । सब बहुत तेजी से हो रहा था । मैंने अखिल को छोडने के बारे में कभी भी नहीं सोचा तो जानती थी कि जी उसे ऍम उसके साथ ऐसा नहीं कर सकती थी । बिल्कुल नहीं है । पर फिर भी पीर की बातों का मतलब था अगर कैसे मैं किसी और से चक्कर प्यार करती रहती हूँ, उसके साथ रह सकती थी जब वो भी धोखाधडी नहीं ऍसे तेज होने लगी और सब कुछ धुंधला सा होने लगा । नहीं मुझे कुछ वक्त चाहिए । हम ये सब अचानक इस तरह नहीं कर सकते हैं कि खेल नहीं अभी पीस नौ साल काॅन् नौ सालों तक हम इससे अपने मुताबिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं और उन बहुत सालों तक हमने एक दूसरे को दर्द देने के सिवा और कुछ भी नहीं किया है । हाँ, फिर तुम्हें और कितना वक्त चाहिए अगर एक दूसरे के साथ आने से पहले हमें कितना कुछ सहना होगा? बताओ मुझे प्लीज उसने मेरी आंखों में गहरी नजर से देखा था और मेरे अंदर प्रतिष्ठाता अपने दिल की तेज ऍम मेरे अंदर उसे किस करने की इच्छा हैरान करने वाले ढंग से तेज हो रही थी और लग रहा तो उसे कभी वो मुझे ले जाए । मैं फैसला नहीं करना चाहती थी अगर वो ऐसा क्यों नहीं करता कि फिर कल ये बिना ही मुझे जहाँ से सबर बस्ती ले जायेंगे ऍफ पढ लिया था । हमसे सच्ची वन चाहते हैं वो तब तक नहीं मिल सकता है जब तक हम से चुनते नहीं मेरा मेरा नाम पूछता हूँ हमें चुनौती प्लीज हम ब्लॅड के बाद वापस उसके कार में आ गए । हम स्विट्जरलैंड में थे और हम ऍम मेरी सबसे खत्म हो रही थी लेकिन रुक नहीं पा रही थी । नहीं किसी और की तरह महसूस कर रही थी । जो जितना पानी पी थी उसके पास नहीं पडती जा रही थी । फिर मेरे अंदर के आवास हमसे पूछा आज के बाद भी तो मैं नहीं गया तो क्या तुम खुश हूँ? मैं किस करता हूँ तो ऍम इस बच्चे देखते है । उस समय नहीं है कि मैंने नहीं चूका हूँ । अच्छा हूँ हम सुबह दस बजे ऍम तो मुझे चाहिए होने जा रहा हूँ और उन्हें जगह हैं हूँ । मैं भी

Details
वीर की नजर जब पहली बार मीरा पर पड़ी, तो जबरदस्त आकर्षण के जादू ने उसे अपने वश में कर लिया। मीरा को भी कुछ-कुछ महसूस हुआ। देखते-ही-देखते यही उनकी जिंदगी बन गई। दोनों को एक-दूसरे की तरफ खींचनेवाली ताकत ही मानो एकमात्र सच्चाई थी, जिसे बयां नहीं किया जा सकता। हालांकि यही प्‍यार उन्‍हें एक-दूसरे से अलग कर देता है। अचानक एक तबाही उन पर हमला करती है और उनके सपनों को झकझोर देती है। कुछ बाकी रह जाती है तो सिर्फ नफरत, जो उनके प्यार के जितनी ही ताकतवर है। बरसों बाद, किस्मत एक और चाल चलती है और दोनों को आमने-सामने ला खड़ा करती है। एक बार फिर। इस बार फैसला उन्हें करना हैः अपनी नफरत के हाथों बरबाद हो जाएं या प्यार को एक और मौका दें। Voiceover Artist: Ashish Jain Script Writer: Vikram Bhatt
share-icon

00:00
00:00