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3 हमारे पड़ोसी

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Charles Dickens Story book writer: चार्ल्स डिकेंस Author : Charles Dickens Script Writer : John Smith
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हमारे पडोसी हम सब लोग जब साथ पर चल रहे होते हैं तो हमें ये जानने का मुंड कोतुहल रहता हूँ कि हमारे आस पास रहने वाले लोग कैसे हैं और वो क्या करते हैं और इस सब में हमें सबसे ज्यादा मदद उन के मुख्यद्वार को देखने से मिलती है जो साथ पर खुलता हूँ । आदमी के चेहरे पर आने जाने वाले हावभाव का अध्ययन बहुत ही खूबसूरत और दिलचस्प होता है । पर मुख्य दरवाजे पर लगें दूर नौकर यह खटखट करने वाले लोहे के छल्ले खुलने की बनावट से भी हम उसमें रहने वालों के बारे में काफी कुछ सही सही अंदाजा लगा सकते हैं । जब हम किसी आदमी से पहली बार मिलने जाते हैं तो हम उसके दरवाजे पर लगे डोर जान नौकर की बनावट से बहुत कुछ उस आदमी के बारे में जान सकते हैं क्योंकि हमें ये अच्छी तरह पता है । इस सामने लगे डोड नौकर और अंदर रहने वाले आदमी में काफी कुछ समान्यता हो सकती है । उदाहरण के तौर पर एक नौकर जो अक्सर लोगों के घरों के बाहर लगा रहता है, उसके चलने के अंदर हसते मुस्कुराते हुए शेर का चेहरा बना रहता है जिससे आप ही अंदाजा लगा सकते हैं कि भीतर रहने वाला आदमी कदापि गवार नहीं हो सकता । वहाँ जाने पर आपका गर्मजोशी से स्वागत होगा और हो सकता है कि आपको एक प्याला गर्म चाहे कुछ मदिरापान करने के लिए मिल जाए । इस तरह डोर लॉक कर किसी छोटे मोटे वकील या ब्रोकर के दरवाजों पर नहीं मिलेंगे । उसके नौकर पर एक अलग किस्म का शेर बना पाया जाएगा । एक बार और भयानक देखने वाले शेर का चेहरा जो किसी प्रकार की जंगली मूर्खता को बयान करता है । दो नौकर इसमें एक तरह का ग्रैंड मास्टर और स्वास्थ्य निर्दयी और कठोर व्यक्ति को दर्शाता है । फिर एक प्रकार का खूबसूरत समस्या या अध्यक्ष नौकर जिसमें एक लंबा चेहरा थोडी उठे हुई ना और तराशी हुई हड्डी होती है । इस प्रकार का नौकर ज्यादातर सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले लोगों के घरों के बाहर दरवाजों पर लगे होते हैं । बोलो हल्के मध्यम यह पी के रंग की कपडे पहनता होगा और गले में कल लगी हूँ । ऍम टाइम लगता होगा छोटे ऍम अपने आप को बहुत ही ठीक ठाक और महत्वपूर्ण समझने वाला आदमी होगा तथा जो अपनी राय को बिलकुल सही समझता होगा । कुछ साल पहले हम एक नए प्रकार के नौकर जिसमें कोई चेहरा नहीं था, देखकर चकरा गए जिसमें एक छोटे से हाथ या छडी के खोलों की एक गोलमाल आ लटक रही थी । फिर कुछ अनुसंधान और खोज भील से हमें ये पता चला कि इस प्रकार के नौकर या द्वार खटखटाने वाले ऐसे लोगों के घरों में लगे होते हैं जो बहुत औपचारिक और ठंड किसी के लोग होते हैं जो आपसे हमेशा यही कहेंगे कि आप आते क्यों नहीं? पर कभी भी आप से अंदर आने को नहीं कहेंगे । सब लोग जानते हैं कि उपनगर ये बडे बडे पीला टाइप के घरों में और विस्तृत विशाल स्कूलों में जिसमें छात्रवास नहीं होते हैं उनमें पीतल के नौकरी लगे रहते हैं और इस प्रकार के नौकर को देखने के बाद हमने अन्य प्रकार के नौकर इसका विवरण ऊपर देने का प्रयास किया है । कुछ कपाल विज्ञानिक इस बात का दावा करते हैं कि आदमी के अंदर भिन्न प्रकार की भावनाएँ और आवे उसी खोपडी की बनावट के विकास को प्रभावित करते हैं । इसके कहने का तात्पर्य ये नहीं है कि आदमी के स्वभाव के परिवर्तन उसके दरवाजे पर लगे नौकर में प्रतिनिधित् होंगे । हम केवल ये कह सकते हैं कि हो सकता है जो चुंबक त्वत् या आकर्षण एक व्यक्ति और नौकर में होता है, उसके मद्देनजर रखते हैं । वो अपने नौकर को अपने व्यक्तित्व के अनुसार बदलती है । यदि आप बिना किसी कारण के ही अपना घर बदलते हुए पाएं तो आप ये मान कर चलिए उसके व्यक्तित्व में और नौकर में समंजस्य होने के कारण उसने ऐसा किया । पर्व स्वयं इस तरह से अवगत नहीं होता है । ये एक नई फेरी या सिद्धांत है पर मैं इसे प्रतिपादित करने का जोखिम उठा रहा है । नौकरी के बारे में इतनी कुछ व्याख्या करने के बाद हमें ये बडी चिंता करने चाहे लगा कि हमारे बगल वाले पडोसी ने अपना नौकर बिलकुल ही हटवा दिया और उसकी जगह एक घंटी लगभग जी एक ऐसी आपदा या परिस्थिति थी जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी । कोई आदमी बिना नौकर के रह सकता है । ये विचार ही बडा, विचित्र और भयानक लगता है जो हमारे दिमाग में एक छाड के लिए भी घोस नहीं सकता और हमारी कल्पना के परे हैं । किसी तरह से घूमते फिरते थे । हम ऍम स्वच्छत पहुंच गए जो उस वक्त सिर्फ एक मिलती थी । पर हम किसी चीज को नोट करके बहुत अचंभित हुए और चौके भी की । घंटियों ऍप्स का चलन बहुत तेजी से बढता जा रहा है और दो नौकरी तो बिल्कुल नियुक्त होते जा रहे हैं । इससे नौकरी के बारे में हमारी धीरे बिल्कुल गलत साबित हो सकती थी या उसका आधार ही खत्म होता जा रहा था । हम जल्दी चलती घर आए और ये देखते हुए की नौकरी उस की प्रथा बिल्कुल खत्म होती जा रही है । हमने विचार किया कि अब हम किसी व्यक्ति के बारे में उसको देखकर के ही कोई धारणा बनाएंगे । हमारे घर की बाई और एक घर था तो आजकल बिलकुल खाली था था । हमारी ढाई और जो घर था उसके निवासियों के बारे में देखने सुनने का पर्याप्त समय था । हाँ, हाँ वाला घर जिस नौकर नहीं था वो एक सिटी क्लर के काम से में था और उस की बैठक की खिडकी पर एक नोटिस चस्पा था की एक अकेले आदमी के रहने के लिए यहाँ कमरा उपलब्ध है । भूख घर सडक के छाया डर हिस्से में एक छोटा सा साफ सुथरा मकान था । उसके पैसे में एक नया पतला फर्स्ट कपल छावं था और पहली मंजिल तक जोर से जा रही थी । उस पर भी नई पतली कालीन बिछाई हुई थी, वॉलपेपर भी नया था, रंग रोगन भी नया किया गया था तथा फर्नीचर भी नया था । इन तीनों चीजों को देख कर ऐसा लगता था कि किरायेदार एक सीमित साधनों का आदमी था । फॅमिली भी एक छोटी लाल काले रंग की कारपेट थी और उसके चारों बॉर्डर की फर्स्ट हैं । छोटी सी मेज और कुछ धब्बे वाली कुर्सियां भी थी । एक छोटे से साइज बोर्ड के दोनों पुर गुलाबी रंग के शेल्स रखे थे और एक आते स्नान पर कुछ और ऍम रखे थे और उन सब के ऊपर तीन मोरपंख सुरूचिपूर्ण ढंग से सजाए गए थे । यही सब उसके कमरे की सजावट को पूरा करते थे । इस कमरे में दिन के समय एक भद्र लोग को बैठाया जा सकता था । इस कमरे के पीछे एक और कमरा था जो रात में उसका बैठे था । खिडकी में लगे नोटिस ज्यादा दिन तक चिपकी नहीं रह पाई क्योंकि जल्दी ही एक आदमी जो गठीले बदन का था और जिसकी उम्र लगभग पैंतीस साल रही होगी वो किराये पर रहने के लिए आ गया और सम्भवता जल्द ही किराया आदि और अन्य चीजें तय हो गए होंगे क्योंकि शीघ्र वो नोटिस हटा लिया गया था । एक दो दिन बाद ही वह अकेला आदमी रहने के लिए आ गया और अब उसका असली चरित्र निकल कर आया । सबसे पहले तो उसे राहत में तीन चार बजे तक जगह रहने की आदत थी और उस वक्त वो इसके में पानी मिलाकर पीता रहता और तमाम सिगार भी फूंकता रहता था । फिर वो अपने दोस्तों को बुलाने लगा तो रात में दस बजे और कल सुबह तक गुल कपडा मचाते रहते थे । वो मिलजुलकर जोर जोर से आधा दर्जन दो गानों की लाइन में गाते थे और फिर कोर्स में जोर जोर से कोई अन्य गाना गाने लग जाते थे जिससे उनके पास सिया को बहुत परेशानी होती थी और उस की आदमी की तकलीफ का आपको अंदाजा लगा ही सकते थे । ये तो बडी गडबड बात थी और ऐसा हफ्ते में तीन बार होता था और यही सब कुछ नहीं था क्योंकि जब बोल सुबह बाहर निकल कर जाते थे तब भी रास्ते में वो तरह तरह की आवाजें जोर जोर से निकालते हैं और कभी कभी तो ऐसी आवाजों में चिल्लाते थे जैसे कोई और बहुत परेशानी में हूँ । और एक दिन रात को तो ऐसा होगा कि लाल चेहरे वाले एक आदमी ने जिससे सफेद रंग का हाथ लगाया हुआ था, घर नंबर तीन में जाकर दरवाजा खटखटाया जिसमें सफेद बालों वाला एक आदमी रहता था । उस आदमी ने सोचा कि शायद उसकी किसी विवाहित लडकी की समय से पूर्व तबियत खराब हो गई हूँ । वो अंधेरी में टटोलते हुए सीढियों से नीचे उतारा और कई सिट के लिया और काले खोलने के बाद दरवाजा खोला । दरवाजा खोलने पर उसने देखा के सामने लालमोहन वाला एक आदमी जो सफेद रंग का हाथ पहने हुए था, खडा था और जिसमें आधी रात में दरवाजा खटखटाने के लिए माफी मांगी और कहा कि क्या उसे एक गिलास ठंडा झडने वाला पानी मिल सकता था और साथ में एक शिलोंग का उधर भी जिससे क्या अब लेकर घर पहुंच सकें । इतना सुनकर वृद्ध आदमी ने अपना दरवाजा जोर से बंद कर लिया और ऊपर जाकर खिडकी खोलकर जब का सारा पानी नीचे उसके ऊपर फेंक दिया तो गलती से वो पानी किसी दूसरे आदमी के ऊपर पड गया और उसके बाद सारे गली में शोर शराबा मच गया । एक मजाक एक मजाक ही होता है और यदि दूसरा आदमी उस मजाक को समझ सके तो बहुत अच्छी बात है वरना बात बिगड सकती है । पर हमारी गली में जो लोग रहते थे वो बडे, सुस्त, दसवीं के लोग थे और इस तरह के माहौल आदि को समझने में असमर्थ थे । इस सबका परिणाम ये हुआ कि हमारे पडोस में जब सचिन अकेले रहते थे, उनको अपने किराएदार से कहना पडा कि यहाँ तो वह अपने दोस्त हो, घर पर बुलाना छोड दें या मकान खाली करते । उस आदमी ने इस लाश फटकार को गंभीरता से लिया और उसने वादा किया कि वह भविष्य में अपने दोस्तों को घर नहीं बुलाएगा और अपनी शाह में किसी कौनसी हाउस में गुजारेगा । उसकी इस बात से और मोहल्ले में रहने वाले लोगों ने सुकून की सांस ली । परेशान कि ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाई । अगली रात तो ठीक ठाक थी उसकी अगली रात फिर से उतना ही शोर शराबा होने लगा । दरअसल पहले से भी ज्यादा उस एकांकी पुरुष के दोस्तों ने तो उसको पहले एक एक दिन छोडकर मिलने आया करते थे । उन्होंने तय किया कि वो उसे रोज रात मैं घर तक छोडने आया करेंगे और तब उसे छोडने के बहाने और ज्यादा शोर मचाते हुए उससे बाय बाय और गुड लाइक कहते तथा वह देखा कि आदमी भी घर में शोर मचाते हुए घुसते सीढियों पर धकधक करके चलता तथा ऊपर जाकर धक धक कर जो थे निकालकर इधर उधर फेंक देता था । हमारे बगल वाले पडोसी ने उस एकाकी पुरुष को घर छोडने का नोटिस दे दिया तथा कुछ दिन बाद किरायेदार ऊपर का घर खाली करके अन्यत्र चला गया । अपने नए मकान मालिक और पडोसियों का मनोरंजन करने किसी और जगह फर्स्ट फ्लोर पर खाली अपार्टमेंट के लिए जो अगला अभ्यार्थी था वो परेशान करने वाले जाॅब बिल्कुल अलग प्रकृति का था । वो लम्बा पतला और युवा आदमी था और उसके सिर पर घने और पूरे बाल थे तथा लाल रंग कि कल मुझे थे और थोडी हल्की सी मुझे भी थी । उसकी ऍम थी जिसके पीछे मेंढक बने थे और वह सिलेटी रंग की पैंट पहने हुए था । चमडे के अलग थे और कुल मिलाकर वो कोई मिलिट्री वाला दिखाई देता था । दो । उस वो स्वभाव और भूल गुलाब मचाने वाले आदमी के बिल्कुल विपरीत था तो बहुत ऐसी वाना और नम्रता से बातचीत करने वाला था । वो जब पहली बार घर देखने आया तो उसने पूछा कि क्या उसे पेरिस चर्च में एक सीट मिल जाएगी और जब वो इस बात के लिए राजी हो गए कि वो उसे ले जाएंगे तब वो लोकल चैरिटी यानी यहाँ के खैरात खाने के बारे में जानना चाहता था । वो इसलिए कि वह अपने सामर्थ में जो कुछ भी अंशदान हूँ उन्हें दे सकें । जो सबसे ज्यादा उसके योग जो सबसे ज्यादा उसके योग्य हूँ । हमारा निकट पडोसी अपूर्णता संतुष्ट था । उस खोते ऐसा किरायेदार मिल गया था जो बिल्कुल उसी की सोच का था । एक गंभीर और अच्छे स्वभाव वाला आज सोच उसी की तरह थी जिसको किसी भी तरह कार्य होर शराबा पसंद नहीं था । और जिसको अपना रिटायरमेंट ज्यादा पसंद था उसने आपने नोटिस ऍम मन से उतार दिया और उन तमाम शांतिपूर्ण रविवार के बारे में सोचने लगा जो आपने किरायदार के साथ बताएगा, बातचीत करेगा और अखबारों की अदला बदली करेगा । वो गंभीर आदमी आ गया और उसका सामान गांव से अगले दिन आने वाला था । उसने अपने मकान मालिक से एक साफ कमीज और प्रार्थना की किताब मांगे और जल्दी ही सोने चला गया तथा साथ ही हमारे पडोसी को िदाई थी कि उसे सुबह दस बजे से पहले ना उठाया जाए क्योंकि वह सुबह का ढाका हुआ है और आराम करना चाहता था । अगली सुबह उसे दस बजे के बाद आवास दी गई । थोडी देर बाद उसे फिर आवाज दी गई लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया । अब हमारे पडोसी का माथा ठनका तो उसने दरवाजे को धक्का दिया । दरवाजा एक जोरदार धक्के से अचानक खुल गया । पर ये क्या, अंदर तो कोई नजर ही नहीं आ रहा था । गंभीर देखने वाला आदमी वहाँ से रहस्यमय तरीके से गायब हो गया था और अपने साथ शर्ट और प्रार्थना की पोथी के अलावा एक चम्मच और बिक्री चादर भी ले गया था । इस वास्ते के बाद पता नहीं क्या हुआ हमारे पडोसी ने जो अगला नोटिस अपनी खिडकी पर लगाया उसमें केवल ये दिखा था की पहली मंजिल पर अपार्टमेंट खानी है । ऐसा लगता था की अब उसे अकेले आधी को किराये पर कमरा देने में डर लग रहा था । जल्दी ही वो नोटिस भी हट गया जो नए किरायेदार आए । उन्होंने पहले तो हमारे जिज्ञासा जाग्रत की और फिर उसमें हमारी दिलचस्पी भी बढते हैं । तो लगभग अठारह से उन्नीस साल का एक युवा लडका और उसकी माता थी जो लगभग पचास वर्ष की रही हूँ । या तो उस से भी कुछ काम ही रही है । हाँ एक विधवा थी और उस लडकी ने अभी शोक के कपडे पहने हुए थे । वो लोग गरीब थे, काफी खरीद थे क्योंकि उनकी आय का एकमात्र साधन का स्तोत्र उस लडके द्वारा कुछ किताबों के नजर करने या इनके अनुवाद करने से जो पैसा उसको मुॅह प्रकाशकों से जो मिलता था वो बहुत कम था । दो लोग किसी गांव से आकर लंदन में बसे थे । इसी वजह से लंदन में उस लडके को नौकरी ढूंढने की संभावनाएं ज्यादा थी और दूसरी एक मुझे ये भी हो सकती थी कि शायद अब उस रखा और ज्यादा दिन नहीं रहना चाहते थे जहाँ उन्होंने पिछले दिन गुजारे थे । और जहाँ आप लोगों को उनकी गरीबी के बारे में पता था वो आपने बुरे दिन में भी कर से सिर उठाकर जीना चाहते थे और अपनी कमजोरियों और विपिन थे, अजनबियों को बताना नहीं चाहते थे । उनके दुर्दिन कितने कठिन थे और वो लडका उन्हें दूर करने के लिए कितना कठिन प्रयास कर रहा था इसका किसी को कुछ पता नहीं था । हर रात तीन चार बजे तक काम करता रहता था और रात में उसके खास है । पाकिस्तान में आपको रेतने तथा लकडी खडखडाने की आवाज हमें सुनाई पडती थी और दिन में हम पडोसियों को ये पता चल रहा था कि उसके चेहरे पर जो हल्की सी गैर जमीनी रोशनी यह चमक से देख रही थी वो किसी भयानक बीमारी छह रोग की और इशारा कर रही थी । जिज्ञासा से कुछ अधिक पडोसी भावना से प्रेरित होकर हमने अपना परिचय बढाना चाहते और उसने कुछ घनिष्ठता पैदा करने का प्रयास किया । हमें जिस चीज का डर था वही सच निकला । बहुत तेजी से उस लडके की तरह बचाओ गिरती जा रही थी । अगले साल के जाने फिर पसंद रहता हूँ और फिर गर्मियों में भी उसी खांसी और छाती का दर्द बढता ही गया । उस की तकलीफ बढती ही जा रही थी तथा उसकी माँ घर का खर्च चलाने के लिए सिलाई कढाई का जो भी काम मिलता था धूप कर लेती थी । पर इस सब के बावजूद भी वो कुछ फिलिंग ही यदा कदा कमा पाती थी । लडका भी लगभग बराबर ही अपने काम में लगा रहता था । वो छान छड करके मार रहा था पर फिर भी कभी कोई गिला शिकवा नहीं करता था और न ही उसकी आवाज कभी सुनाई पडती थी । शिशिर ऋतु की एक सुहानी शाम को हम अपने कृषि का मरीज को देखने गए । पिछले दो तीन दिनों में उसके रही सही शक्ति भी कमतर होती जा रही थी । वो खिडकी के पास रखे सोफे पर बैठकर शहर में डूबते हुए सूरज को देख रहा था । उसकी माँ बाइबिल पड रही थी जैसे बंद करके वो हम लोगों से मिलने के लिए आगे बढेंगे । मैं विलियम से कह रही थी उसने बताया कि हम फिर से गांव में खोली जगह चले जाएँ जहाँ उसे तासा हवा मिल सके और सेहत भी सुधर जाये तो बीमार नहीं है । बस इधर ज्यादा काम करने की वजह से वो कमजोर हो गया है । बेचारा उसने अपने आंसू छिपाने के लिए दूसरी और मुझे भेज लिया । उसने अभी भी विधवाओं वाली टोपी पहन रखी थी जिसको उसने ठीक ठाक किया और अपने आस को छिपाने की उसी कोशिश नाकाम रहे । हम सोफे के सराहने बैठ गए पर कुछ बोली नहीं क्योंकि उसकी तारवानी धीरे धीरे छानी होती जा रही थी और हमारे सामने नहीं उसकी सास तीस चलने लग गई थी । हर पांच सांस लेने पर उसके दिल की धडकन हल्की पडती जा रही थी और उसे ज्यादा प्रयास करना पड रहा था हूँ । लडकी ने अपना रेखा हमारे हाथ में रख दिया और दूसरे हाथ से अपनी माँ की बाहों को पकड लिया और छोडती से उसे अपनी और खींचा तथा जलती से उसके दलों को छू वो थोडा सा रुका । वो अपने तकिए पर फिर से लडाकर दस गया और अपनी माँ के चेहरे की ओर चाहत से बडी देर तक देखता रहा । फॅमिली हम उसकी काफी देर बाहर साकर बोली मेरी और इस तरह से मत देखो बेटा मुझसे बात करो । मेरे बेटे बात करुँ । धडका बहुत शांति से मुस्कुराया पर एक बात है उसका चेहरा ठंडा और गंभीर मुद्रा में पता लग गया ऍम मेरे प्यारे बेटे अपने आप को उठाऊं मेरी होर इस तरह मत देखो मेरे बेटे मैं तुमसे विनती करती हूँ ऐसे मत देखो । बटन भगवान में क्या करूँ वो विद्वान स्तरीय चिन्नई अपने दोनों हाथ तमाम दस दुख से जोडते हुए बोली फिर अब ग्यारह बेटा तो मैं कहाँ है? लडकी ने तमाम जोर लगाकर अपने आप को ऊपर उठाया और दोनों हाथ छोडकर बोला माँ, मेरी प्यारी, कुछ खुले मैदान में दस लाख करना । कहीं भी इस मैं गलियों को छोडकर वहाँ पर रहना चाहूंगा जहाँ पर तुम मेरी कब्र को देख सकें । पर इन बंद अंधेरी गलियों में कभी नहीं । इन्होंने मुझे बाहर डाला है मुझे फिर से जो मुझे प्यार करते हैं । तुम अपनी बातें मेरी गली में डाल दो । वो वापस बेदम होकर लुढक गया और उसके चेहरे पर एक अजीब सद्भाव आ गया जो कि न दर्द का था, न पीडा सहने का था । पर अवर्णीय मासपेशियों और चेहरे की हर रेखाओं के घर जाने का था ना आपका दूसरी दुनिया में जहाँ पर

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Charles Dickens Story book writer: चार्ल्स डिकेंस Author : Charles Dickens Script Writer : John Smith
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