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25. Tufani Karjakram

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क्रन्तिकारी सुभाष Author:- शंकर सुल्तानपुरी Author : शंकर सुल्तानपुरी Voiceover Artist : Raj Shrivastava Producer : KUKU FM
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तूफानी कार्यक्रम राजनीतिक बंदी सम्मेलन के अवसर पर राजनैतिक बंदियों के प्रति सरकार के दुर्व्यवहार की तीव्र आलोचना करते हुए सुभाष ने अध्यक्ष पद से ज्वलंत भाषण दिया । मैं अपने देश भक्त, भाई बहनों के साहस की प्रशंसा किए बगैर नहीं रह सकता जिन्होंने अनेक संकट झेलते हुए झील यात्रा आएंगे है । मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि हमें जेल में किस तरह रखा जाता है । आज भी हमारे सैकडों बंदी भाई हवालातों में कीडे मकोडों की तरह रहे हैं । समय ही बिलबिलाकर मरने से उन को बचाना है । हमें इस व्यवस्था का सामना करने के लिए एक मजबूत संगठन बनाना होगा और उस संगठन के लिए हमें अपने सक्रिय सहयोगियों की जरूरत है । नेताजी के आह्वान पर सभास्थल पर सहस्त्रों लोगों ने सहयोग का वचन दिया । हिजली और चटगांव में नौकरशाही का नंगा नाच हो रहा था । बिजली कांड के विरोध में कलकत्ता आयोजित एक विशाल सभा में सुभाष ने कहा, जो साम्राज् एक दिन में बना है वो एक रात में नष्ट भी होगा । संयुक्त प्रांतीय भारतीय नौजवान सभा का अधिवेशन जब मथुरा में हुआ तो सुभाष अधिवेशन के सभापति बनाये गए । अध्यक्ष पद से भाषण करते हुए सुभाष कहते हैं, देश की वर्तमान अवस्था ने युवकों के हृदय को आंदोलित कर दिया है । विदेश और समाज की बुराई दूर करना चाहते हैं । मैं उनके इन विचारों का हृदय से स्वागत करता हूँ । युवकों की हृदय में कांग्रेस से मिलकर कार्य करने की भावना होनी चाहिए और कांग्रेस को भी युवकों के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए । प्रत्येक युवक को इस बात का अनुभव करना चाहिए कि कांग्रेस राष्ट्र के लिए हैं इसलिए उसे ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे कांग्रेस की प्रतिष्ठा को बता लगे । अनेक महापुरुषों के बलिदान से आज कांग्रेस की नींव पक्की हुई है और मैं आपसे पूछता हूँ की इस धरातल पर आप महात्मा गांधी के समान नेता कहाँ आ सकते हैं । लेकिन कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि नौजवान ही भारत के भावी कर्णधार है । वह दिन दूर नहीं जब उन के हाथ में सत्ता होगी । न्याय, समानता, स्वाधीनता और विनयशीलता का प्रेम से घना संबंध है । यदि मानव जाति के प्रति हमारे हृदय में प्रेम नहीं है तो हम किसी के साथ न्याय और समानता का व्यवहार नहीं कर सकते । ऐसी दशा में हम नाथ स्वतंत्रता के लिए लडकी सकते हैं और ना ही आत्मबलिदान कर सकते हैं । मैं कह सकता हूँ कि यही सिद्धांत साम्यवाद के साथ है और इसी साम्यवाद को मैं भारत में देखना चाहता हूँ । हमें बिना सोचे समझे दूसरों का अनुकरण नहीं करना चाहिए । एक कहावत सकती है कि जो वस्तु के लिए खाद्य पदार्थ हो सकती है, दूसरों के लिए विश हो सकती है । इसके कुछ दिन पश्चात ही कलकता के अल्बर्ट हॉल में सुभाष के सभापतित्व में एक प्रस्ताव पास हुआ कि आतंकवादियों को अपनी हिंसात्मक कार्य छोड देने चाहिए और क्रांतिकारी नवयुवकों को कांग्रेस के झंडे के नीचे आकर कांग्रेस का कार्यक्रम अपने हाथों में ले लेना चाहिए । जिस समय सुभाष नौकरशाही के विवाद से रूप का निरीक्षण करने चटगांव की ओर जा रहे थे, उन्हें बीच में ही गिरफ्तार कर लिया गया । जेल जाते जाते उन्होंने बंगाल की राजनीतिक कार्यकर्ताओं को संबोधित किया । चटगांव हिजली की याद रखो, इन घटनाओं की छतिपूर्ति किए बिना हम शांत नहीं बैठ सकते हैं । मैं अपने देशवासियों से अपील करता हूँ कि इस अत्याचार के विरुद्ध देश में आप भी आंदोलन करें । अगर सरकार नाम आने तो प्रत्येक ब्रिटिश वस्तु का बायकॉट हो जाना चाहिए । इस घटना के सप्ताह भर बाद ही देशबंधु पार्क में सुभाष ने चटगांव हिजली घटना के संदर्भ में सार्वजनिक सभा को संबोधित किया । चटगांव घटना के संबंध में जिन अपराधियों पर सरकारी आरोप लगाए गए हैं । उनके बारे में सरकार ने कोई प्रमाण नहीं दिया । अब सरकार का करते हुए है कि छती पूर्ति करेंगे और कानून के महत्व की रक्षा करके लोगों के हृदय में ये विश्वास पैदा करें कि कोई भी नागरिकों के प्राथमिक अधिकारों के साथ मनमाना बर्ताव नहीं कर सकता । सुभाष ने सादा कांग्रेस के हिंसात्मक नीति का प्रचार किया । कभी उसके अनुशासन सीमा का अतिक्रमण नहीं किया, फिर भी सरकार की दृष्टि में वे भयंकर आतंकवादी रहे । कलकत्ता की श्रद्धानंद पार्क में हिजली और चडगांव दिवस मनाने के लिए एक विराट सभा हुई जिसे सुभाष ने बडी निर्मिता के साथ संबोधित किया । हम लोग ऑर्डिनेंस के युग में वास कर रहे हैं । फिर भी मैं इतना कह सकता हूँ कि नवयुवक अपने हिंसात्मक कार्यों से देश की बडी हानि कर रहे हैं । हिजली गोली कांड के संबंध में सरकार द्वारा नियत कमेटी का निर्णय बिल्कुल स्पष्ट था की गोली सिराणा अंधाधुंध तथा अनुचित था । केंद्र सरकार ने इस संबंध में क्या कार्यवाही की था? उसने जनता के आक्रोश को शांत करने के लिए कोई भी ऐसा नहीं कि सरकार ने खुद ही अपने कार्यों तथा अदूरदर्शिता की नीति से अहिंसा वादियों को ऐसा बना दिया है कि वे बिल्कुल अकर्मण्य जान पडते हैं । महाराष्ट्र नौजवान सभा के शानदार अधिवेशन का सभापतित्व सुभाष ने किया । इस अधिवेशन में सुभाष ने सरकार की दमन नीति की आलोचना करते हुए नौजवानों के कर्तव्य और जागृति पर बडा महत्वपूर्ण भाषण दिया । उन्होंने कहा, यद्यपि सरकार की दृष्टि से मैं खतरनाक व्यक्ति हूँ लेकिन वास्तव में मुझे शांति प्रिय है । इसमें कोई संदेह नहीं कि हम स्वतंत्रता की भूख से छटपटा रहे है । जहाँ एक बार हम इस भूख से तडप उठे तब बिना पूरी खुराक लिए हमें छह नहीं मिल सकता है । दिल्ली के समझौते में नौजवानों की नहीं सुनी गई । सरकार दमन ही करती चली गई और इस मनमाने धवन ने युवकों की दिल में आग लगाई और तभी उन्होंने आतंकवाद का सहारा लिया । जबकि सरकार ने समझौते को भंग कर दिया तो मैं नहीं समझता कि कांग्रेस संधि की छाया से क्या छुट्टी पडी है । जब सरकार ऑर्डिनेंस शासन करने लगी है तो इससे स्पष्ट हो गया है कि उनके साथ जनता की सहानुभूति नहीं । ट्रेड यूनियन कांग्रेस कलकत्ता के अधिवेशन में इस वर्ष भी सुभाष को सभापति निर्वाचित किया गया । इस अधिवेशन के प्रति कई विदेशी ट्रेड यूनियनों ने भी अपने सब संदेश भी है । इस अवसर पर सुभाष ने अध्यक्ष पद से अत्यंत महत्वपूर्ण भाषण दिया । उन्होंने कहा, मुझे इसमें संदेह है कि गत दस महीनों से ट्रेड यूनियन अंदर उन्होंने शक्ति तथा विस्तार में कुछ नजदीकी है । आपस की फूट से आंदोलनों को भारी धक्का पहुंचा है और सत्याग्रह के कारण सबका ध्यान ट्रेड यूनियन आंदोलन से हट गया । ट्रेड यूनियन कांग्रेस कोई खोखली संस्था बना देना था । उसे सर्वदल सम्मेलन का रूप देना ट्रेड यूनियन आंदोलन के लिए घातक होगा । ट्रेड यूनियन कांग्रेस एक सार्वजनिक संपत्ति है । भले ही कुछ समय के लिए ट्रेड यूनियन आंदोलन पिछड जाए, लेकिन अंत में वह आवश्यक नहीं करेगा । किसी भी सिद्धांत को कार्यरूप में परिणत करते समय आप इतिहास और भूगोल को नहीं भूल सकते । हमें अपने अतीत के घटनाक्रम से प्रेरणा लेकर और भौगोलिक स्थिति परिस्थितियों को ध्यान में रखकर भविष्य की योजनाएं निर्धारित करनी चाहिए । भारत को अपना विशेष समाजवाद बनाना चाहिए । बहुत संभव है कि भारतीय समाजवाद में कुछ मौलिकता हो और उससे संसार कुछ लाभ उठा सकें । इस प्रकार सुभाष की तूफानी कार्यक्रम अनवरत रूप से चलते रहे और सरकार उनके भाषणों कार्यक्रमों से संशकित होती रही, झुलाती रही और उनका दमन करने के लिए उनकी गुप्तचर शक्तियां सुभाष के आस पास मंडराती रही ।

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क्रन्तिकारी सुभाष Author:- शंकर सुल्तानपुरी Author : शंकर सुल्तानपुरी Voiceover Artist : Raj Shrivastava Producer : KUKU FM
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