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25-मुट्ठी भर धूप -मीरा

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वीर की नजर जब पहली बार मीरा पर पड़ी, तो जबरदस्त आकर्षण के जादू ने उसे अपने वश में कर लिया। मीरा को भी कुछ-कुछ महसूस हुआ। देखते-ही-देखते यही उनकी जिंदगी बन गई। दोनों को एक-दूसरे की तरफ खींचनेवाली ताकत ही मानो एकमात्र सच्चाई थी, जिसे बयां नहीं किया जा सकता। हालांकि यही प्‍यार उन्‍हें एक-दूसरे से अलग कर देता है। अचानक एक तबाही उन पर हमला करती है और उनके सपनों को झकझोर देती है। कुछ बाकी रह जाती है तो सिर्फ नफरत, जो उनके प्यार के जितनी ही ताकतवर है। बरसों बाद, किस्मत एक और चाल चलती है और दोनों को आमने-सामने ला खड़ा करती है। एक बार फिर। इस बार फैसला उन्हें करना हैः अपनी नफरत के हाथों बरबाद हो जाएं या प्यार को एक और मौका दें। Voiceover Artist: Ashish Jain Script Writer: Vikram Bhatt
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मीरा शनिवार की शाम शुक्रवार को मैं में थी और ऍम फोन बंद कर रखा था । हमारे काबिल मैनेजर मिस्टर वेस्टर्न ने मेरे सेलफोन और घर के नंबर पर एक मैसेज डाल दिया था । उसमें यहाँ शहर में विज्ञापन की शूटिंग का प्लान डिटेल में लिखा था कि अगर मैं खुद जाना चाहूँ और शूटिंग देखना चाहूँ इसका इंतजाम हो जाएगा । मैं जब घर पहुंची अखिल ने घर के फोन नंबर पर बैठक पहले ही पढ लिया था । फॅार में शूट की जा रही विज्ञापन थक देखने की प्लानिंग है । कुछ अखिल ने डिनर पर वैसे ही कुछ किया है । जी सुनते ही मेरे शरीर में तनाव बढ गया । मेरा कोई इरादा नहीं था कि मैं चाहूँ और बीस से मिलेगा । मुझे जितना दूर रहो उतना ही हम दोनों के लिए अच्छा होगा । नशे में प्यार के उसके करारनामे के बाद जानती थी । मेरे पति के आस पास होना उसके लिए बहुत मुश्किल होगा । ऍम किसे बना रही हैं उसके आशा सोना मेरे लिए भी आसान नहीं होगा । और पिछले कुछ दिनों में बीवी को लेकर मेरा गुस्सा अब कुछ काम हो चुका था । मैंने ये भी गौर किया कि मेरा ध्यान इन सारी बातों की और जा रहा था जो उसने कही थी, जी है वो भी मुझसे प्यार करता है । उसमें क्या कहती है? उसके शक मुझे भी कर बच्चा चोर गए और उसके साथ ही इतनी पर होता । मैं जो कुछ महसूस किया था और चिंता दूर कर रखा था वह सब तेजी से लौट रहे थे । छह मिनट से दूर जाना ही अच्छा था, शायद नहीं । मैंने अखिल के सवाल के जवाब में कहा मुझे लगता है तुम्हें जाना चाहिए । चाहे शहर के भाग दौड से दूर जाने का एक अच्छा मानता है । और मैं जुनून है कि तुम खुद देखना चाहोगे कि तुम्हारा ऍम हो रहे हैं । कुछ नहीं कह रहा था, आम दिनों में चली जाती है । लेकिन आप कुछ सोचना पड रहा था अगर अकेले जानने की कोशिश कर रहा हूँ कि क्या है । वीर अब भी कुछ मायने रखता है और क्या उसके चलते ही नवाज नहीं जाना चाहती थी । इस तरह की खैर मुझे परेशान कर रहे थे । मैं चलूंगी अगर तुम भी मेरे साथ चलो । मैंने कहा और जब मैं भूल रही थी तो अखिल की आपको में आखिरी डालते हुए कहा है वहाँ जाकर क्या करूँ? वहीँ तो मैं करूँगा । शूटिंग को समझने का नाटक और ऍम लगा मैं देखी जा रही थी और मेरी आखिर लगता बार उस पर पडी हुई थी । कॅश सच में उसके भी पर पूछा मैंने हाँ ऑस्टर नाटक करते हैं । अपने हाथ ऊपर कर दिए तो इसका जिक्र करना मुझ पर ही फाॅर्स लगता था । बढ गए तो मैं अब अपनी फॅमिली के साथ डिनर के लिए चार अलग अलग तरह के लोग शामिल थे । कविता एक अच्छे सब सेंटर लंडन की लडकी लग रही थी । स्पेशल दूसरी पीढी की भर्ती है तो उसके अंदर भारत से ज्यादा इंग्लैंड के लक्षण मुझे लग रहा था कि वह भी हो सकती हूँ मैंने ॅ घुटने से ठीक ऍम ही शाम के लिए मेरी पोषण मैंने कार्य छुट्टियाँ पहले और ऍम अखिल नहीं ली । डाॅक्टर में एक फॅमिली बाजी से हमें ही फॅमिली देखने के लिए चीज सब फॅमिली तो हमारे पहुंचेगी खुशी देर बाद कविता और दियालो देख नहीं भीड भी उनके साथ काफी समझदार हो गया था तो उसने ऍसे हमारे थे एक कंपनी से नजर आएगा । उसी चक्कर नहीं । पहले मैं देख रही थी कि उसने गहरे मरून स्वेटर के अंदर चेक शर्ट पहनी थी और नीचे फॅमिली, गाॅव और ये भी दिख रहा था । इस लडकी को फॅमिली खबर है । फॅमिली हेलो बोलने की काफी देर तकदीर पूछे देखता रहा । अखिल बहुत जल्दी बहुत ज्यादा था और मैं नहीं चाहती थी कि वो इस पर गौर करें कि वीर मेरे बारे में कैसा महसूस करता है । भले इसमें बरस पी चुके थे । कविता और मैंने हाउस वाइफ चुनाव अखिल और आपकी पसंद देखिए । नहीं ऍम पिता से पूछा वीर उसके मुलाकात कैसे हुई थी? कविता ने उसे बैटिंग पार्टी के बारे में बताया । इससे बचकर दोनों ही भगाना चाहते थे और फिर का एक घंटों तक फॅमिली मुलाकात के बाद दोनों ही मैं कल का कर रही थी की कविता वेस्टमेंट के बाहर उस बुक कर रही हो गई । ॅ और बातचीत की शुरुआत की हूँ । जवाब देना कितना बेरहम होता है किसी नतीजे पर मैं पहुंची आपको वैसे ही बातें याद दिलाएगा जिनसे आप बचना चाहते हैं । अच्छा तो विज्ञापन की दुनिया के साथ भी ने अब तेज जमा तक कितना नाजायज फायदा उठा लिया । अखिल ने मुझे ऍम बता तो जो उसने उस वक्त कही थी, उसने कहा कविता ने भी सुनने में दे रही कि हाँ तो वो मेरे पास आया और मुझसे कहा हो तो तुम यहाँ हूँ तो मैं उन की तरफ देखने लगी और सोच रही थी कि कौन है ये जितनी जान पहचान दिखा रहा है फिर वह गंभीर हो जाता है और उससे कहता है तो बिस्तर पार्टी छोडकर नहीं आना चाहिए था । इतनी गैर जिम्मेदारी ठीक नहीं हो तक सच में काम हो चुकी नहीं । ये आदमी क्या क्या राय है मुझे कुछ समझ नहीं है । मतलब क्या है? फॅमिली पूरी पार्टी ऍसे लगाकर अच्छा लगा और वीर के चेहरे पर शर्मिंदगी भरी मुस्कान । लेकिन मैं अचानक किसी ऐसी चीज के पश्चिमी आगे जिसका एहसास मैंने पहले कभी नहीं किया था । अब फॅमिली अधिक फॅमिली तरफ आया और जिसकी मृत्यु को बिना किसी चेतावनी के चीज दिया है । बहुत तेज दर्द हुआ क्योंकि मुझे याद है कि मैं अपने सामने के फॉर्म से अपनी नजरें नहीं हटा सकती थी । उसका मुझ पर असर नहीं हो सकता था की अति था । इच्छा चुका था । मेरे खुद को संभालने के लिए गहरी सांस नहीं और मीरा ने मुझे बताया कि तुम दोनों ने मुंबई में थोडा बहुत क्या वो कैसा था । अखिल ने साधारण से मुस्कान के साथ भी सब पूछा हूँ । टेबल पर अब सन्नाटा पसर गया । मुझे उम्मीद नहीं थी कि अखिल इसपर बात करेगा । कविता दिलीप को देख रही थी कॅश समझ गई थी । इस बेचारी लडकी को भी की जिंदगी का ही नहीं था तो दूसरी तरफ वीर दस मुस्कुरा रहा था । पैसे थोडे थोडे समय चला हूँ हम युवा और पर बहुत हैं । उसने कहा अखिल को सच में मजा आता दिख रहा था । वो ये सब इसी बदमाशी के चलते नहीं कर रहा था । ये समझना ज्यादा मुश्किल नहीं था । हाँ मुझे बताओ तो सही वो किस तरह की थी । फॅसे अपनी पत्नी के बारे में थोडा बहुत जानने की बहुत ज्यादा उत्सुकता है । अखिल ऍम तो हमें शर्मिंदा कर रहे हो । मेरे विरोध किया बातचीत जिस तरह आगे बढ रही थी वो मुझे अच्छा नहीं लगा तो छोडो भी कितना प्यारा है इसमें शर्मिंदा होने की क्या बात है? अखिल ने कहा सच में जी प्यार है । मुझे डेटिंग के बारे में पता ही नहीं था । फॅस बातचीत से काफी कुछ पता चल रहा है । कविता ने कमाल कर दिया था और अब उठ खडी हुई थी हूँ उसे मीरा के बारे में जहाँ तक याद है पूछना है कि उसमें ही मजा किया तो कभी कभी कुछ सैलरी । लेकिन अगर एक बात मैं उसकी बताऊँ जो इतने साल तक नहीं बोला तो वह सब हीरा मसवासी लडकी है उसी बल के दौरान वीर की और मेरी फॅमिली और हम मुंबई के उस कॉफी शॉप के बारे में सोचने लगे जहाँ हम अक्षय की मौत के ठीक बाद मिले थे । मैं संबंध से बाहर निकलना चाहते हैं और फिर उससे पडे रहने की नहीं कर रहा था । मैं सोच रही थी कॅश इस बात को मैं भी मानता हूँ । मीरा एक बहादुर लडकी है मेरे बारे में भी की राय से खेल काफी प्यार । किसान सहमत हूँ और मेरा कुछ वीर के बारे में बताऊँ । कविता थी बीच में बहुत बढेगी । अरे बहुत पहले की बात है उससे ज्यादा कुछ याद नहीं । मैं बचकर निकलना चाहती थी लेकिन कमजोर कोशिश नाकाम होना तय था तो खरीद चलो प्रतावित हूँ, अखिल भी शामिल हो गया । बीस मेरी तरफ टकटकी लगाए देख रहा था । मैं देख सकती हूँ कि वह जानने को उत्सुक था की मैं उसे किस तरह याद करती हूँ । शायद उसको से कहीं ज्यादा वीर ऐसा लडका था जो एक दम विजय उसी जगह पर भी अपने मन की बात कह देता था । और जब पास्ता में जरूरत होती तो अचानक चुप हो जाता था । कुछ याद है धीरे प्यारा आश्वस्त और भारत लडका था और तो मुझे उसकी खूबी बतानी होगी की वो क्या करता हूँ ऍम देकर पूछा हूँ मैं फिर से केवल पर पडे और की और देखने लगे और लगभग जैसे इस सब फॅमिली टेबल पर मौजूद दूसरे लोग शायद मुझे सोचने का वक्त दे रहे थे । ॅ खाए जा रही थी कॅश आखिरकार मैंने कर लिया । अगर मैं वीर की एक खूबी बताऊँ तो वो थी उसकी पूरी तरह प्यार करने की । बेन साल छमता अखिल मुस्कराये ही कुछ नहीं बोला । कविता ने अपने हाथ फैलाए और अपनी को फिर वह ऊपर लिमिट लिया । अच्छा मैं भी मानती हूँ वो भी बहुत अच्छा होता है । मैं दावे के साथ कर सकते हैं तो कुल मिलाकर वीर और मेरा आज तक वैसे ही रहेगा । ठीक जानकर अच्छा लगा । अखिल ने कहा बीस और मैं एक दूसरे को ऐसे देखने लगे । पूरे फॅमिली और कोई था ही नहीं । नहीं फॅमिली तुम जो में कोई नहीं था अगर वो वही था और मैं वही थी तो फिर बदला क्या? अचानक मीटर गई तो इसका जवाब हो सकता था ही नहीं । अगर कुछ बदला नहीं था तो क्या

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वीर की नजर जब पहली बार मीरा पर पड़ी, तो जबरदस्त आकर्षण के जादू ने उसे अपने वश में कर लिया। मीरा को भी कुछ-कुछ महसूस हुआ। देखते-ही-देखते यही उनकी जिंदगी बन गई। दोनों को एक-दूसरे की तरफ खींचनेवाली ताकत ही मानो एकमात्र सच्चाई थी, जिसे बयां नहीं किया जा सकता। हालांकि यही प्‍यार उन्‍हें एक-दूसरे से अलग कर देता है। अचानक एक तबाही उन पर हमला करती है और उनके सपनों को झकझोर देती है। कुछ बाकी रह जाती है तो सिर्फ नफरत, जो उनके प्यार के जितनी ही ताकतवर है। बरसों बाद, किस्मत एक और चाल चलती है और दोनों को आमने-सामने ला खड़ा करती है। एक बार फिर। इस बार फैसला उन्हें करना हैः अपनी नफरत के हाथों बरबाद हो जाएं या प्यार को एक और मौका दें। Voiceover Artist: Ashish Jain Script Writer: Vikram Bhatt
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