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14 हौसला -भूत कहा

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पतझड़ है तो बसंत भी आएगा। गर्मी की तपिश को बरसात की फुहारें दूर करेंगी। यही जज्बा जीने का हौसला देता है। उम्मीद और हौसला जीवन की नींव हैं।
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भूत कहा ये जो हम और तुम नौकरी करते हैं ना वो भी अपने घर से दूर ऍम से दूर उनकी बहुत बडी समस्या होती है । कहाँ रहे आप सोच रहे होंगे कि यह था क्या बकवास कर रहे या नौकरी करेगा वहाँ किराये पर काम कर रहा हूँ इसमें पूछने की क्या बात करे? भाई लोगों हम कोई निपट हमारे हैं नहीं जो जहाँ चाहे पडे रहे हैं भाई साहब विवाहित है । एक विवाहित को किराये के मकान में रहने से पहले कई पहलुओं पर गौर करना पडता है कि मोहल्ला शरीफों का हूँ जहाँ हमारी छप्पन चोरी हॉल बदन को कोई छेडे ना और किराया भी कम हो । अब हम काॅपर तो काम कर नहीं रहे कि मोटी सैलरी है । एक अपार्टमेंट किराए पर ले अब कम सैलरी में सब कुछ देखना होता था कि भविष्य के लिए कुछ बचत भी कर लेंगे । हुआ यूं कि दूसरे शहर नौकरी करने जाना पडा । शहर के बाहरी इलाके में हमारी कंपनी का प्रोजेक्ट था । तब थोडी दूरी पर न्यू टाउन में हमें भी उसमें उच्चतर वजीफा रेट पर एक फ्लैट किराए पर मिल गया । अब जो ये प्राइवेट कंपनी वाले पूरन बात सोचते हैं, बहुत करवाते हैं । देर रात तक ऑफिस में बिठा रखे हैं । ऑफिस से घर जाने के लिए कोई सवारी भी देर रात के बारह बजे कहाँ से मिलेगी इसका समाधान कंपनी कहाँ से करवा दिया कि सबके घर पर कार छोड देंगे और ऍम अपने घर ले जाएगा । आप क्या कर जब प्रोजेक्ट को तयसीमा में सम्पन्न करने के कारण ऑफिस से निकलने में अक्सर देरी होने लगी । ऑफिस से घर के बीच भवन निर्माण थोडी थोडी दूरी पर हो रहे थे । ऍफ ऊटी और गड्ढे से लबालब थी । ऑफिस में देर होने पर ऑफिस के साथ घर तक छोडने लगी लेकिन पत्नी की फिर वो तो रहती है । एक दिन ऑफिस में बहुत देर हो गई । रात के साढे ग्यारह बज रहे हैं । हम चार सहकर्मी कंपनी की कार में बैठकर ऑफिस से निकले । मेरा घर अंत में आता था । रास्ते में तीनों सहकर्मी अपने घर पर उधर हैं । सडक संजान थी । निर्माण कार्य चारों तरफ प्रगति पर था । इस कारण स्ट्रीटलाइट अभी लगी भी नहीं थी । कार की हेडलाइट अंधेरे को चीर रही थी । एफएम रेडियों पर पुरानी फिल्मों के गीत बच रहे थे । अंधेरे में ड्राइवर को सडक के गड्ढे की गहराई का अंदाजा नहीं हुआ । कार गड्ढे में फंस गए और कोशिश के बावजूद गड्ढे से बाहर नहीं निकले है । ड्राइवर ने मोबाइल की रोशनी से देखा और हताश होकर बोला तब जेल कार कर दिए तो टूट गया । कॉलेज निकल गया काफी कडे में और इतनी रात कार्यका मिस्त्री भी नहीं मिलेगा । कुछ सोचने के बाद मैंने ड्राइवर से कहा आपका घर यहाँ से कितना दूर है । आप ऍम उठकर मेरे घर का रास्ता है । पैदल आधा घंटा लगेगा और आपका घर चलाने से बाए मुडकर हैं । यहाँ रखने का कोई फायदा नजर नहीं आ रहा है । कार को यहाँ छोडकर पैदल चलते हैं । ऐसे टूटी फूटी कार कौन ले जाएगा? सुबह ट्रेन से कार पक्ष बाँट ले जाना । मैंने ड्राइवर से कहा साहब आप शहर में नहीं हैं थोडा संभलकर चलना । सुनसान सडक पर रोशनी भी नहीं और कटे हैं । इस समय अंधेरे में चोर लुटेरे मिल सकते हैं । काफी वारदाते होते सुना है । एक बात और साहब जी भी मिल सकते हैं । चोर लुटेरे के नाम पर मुझे कोई असर नहीं हुआ । महीने के आखिरी दिन चल रहे हैं । जेब में एकलौता सौ रुपए का नोट है, क्या मिलेगा ऍम भूत कर हम सुन करना चाहता हूँ । भूत क्या बात करती हूँ । पास आती है तो इंसान जगह पर ही भूत मिल सकते हैं । रात का समय इसी समय बहुत विचरन के लिए निकलते हैं । ड्राइवर ने खुलासा किया क्या तुमने कभी देखा है भूत ऍम करने को कहा? शहर में तो नहीं देखें पर गांव में बहुत होते हैं । ड्राइवर की बात सुनकर मैंने उससे पूछा भूत शहर में क्यों नहीं होते हैं आपके शहर में हम आदमी को तो रहने की जगह मिलती नहीं । भूत कहा रहेंगे । ड्राइवर की बात में दम दिखाएंगे । आधी रात को समय व्यक्त करने से बेहतर घर चलने में मैंने भलाई समझे । चौराहे ॅ और मैं भाई मुड गया । आसमान काला से आता है । ऊपर देखा कोई तारा नहीं और चंद भी बता रहे हैं । इसका मतलब आज अमावस की रहते हैं । दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा । मुझे ड्राइवर की बात याद आ गई । अमावस की रात खूब विचरन करते हैं । थोडा घबरा तो रहा था लेकिन कोई और चारा भी नहीं था । शुक्र रहा कि उस समय आवारा कुत्ते नहीं थे । क्या भरोसा नहीं काट ले । धीरे धीरे घर के चलने लगा । सुनसान सडक पर चौदह रहने का फायदा नहीं हुआ । पाॅवर कि भूत वाली बात दिमाग में शायद कुछ गई थी । सन्नाटे में हल्की हवा का भी अधिक शोक लगने लगा । ऐसा प्रतीत होने लगा । शायद कोई पीछा कर रहे हैं । हाथ जोडकर देखने की हिम्मत नहीं हुई । कुछ हुआ तो कदम कुछ और हो जाते हैं । दिल की धडकन तेज हो गई । डर के कारण कदमों की भी कभी पड गई । मध्य पर हल्के पसीने की पूंजी डपटने लगी । तब ये ऍम कब तारकिशोर से दिल धडक कर बैठ गया हूँ । डरने तेज पैदल की गति को दौड में परिवर्तित कर दिया । सुनसान सडक डरावनी प्रति होती है । कदम कुछ और हो जाते हैं । मन का डर है जो सुनसान जगह पर कुछ और अधिक हो जाता है । अमावस की अंधेरी रात में दूर से रोशनी नजर आधी देख हिम्मत पडती है । उम्मीद सकती है और गंतव्य पर पहुंचने की हिम्मत बढाती है । पौष्टि अपनी कॉलोनी के मकानों की थी । आखिर में पंद्रह मिनट बाद घर पहुंच गया । पत्नी इंतजार कर रही थी तो कोई नहीं । मैंने प्रश्न किया आपको क्या हुआ हूँ? उसी ने भी आ रहे हैं । तबियत ठीक है ना? पति थोडी चिंतित हो गए तो कार खराब हो गई और पंद्रह मिनट पैदल चलना पडा । इसलिए पसीना आ गया । हो जाती है । मैं तो अभी कुछ दिन और देर से कपडे बदलकर मैं भी स्तर पर ले क्या संबंध नींद नहीं आती है कहकर पत्नी और निकट हो गए ड्राइवर की बात सोचते हुए अपनी छप्पन चोरी पत्नी की ओर देखकर मुस्कुरा है कि शहरों में आदमियों को रहने की जगह नहीं है भूत कहाँ रहेंगे डर मन का पहनती मांगा अकेलापन ही होते हैं अब जब छप्पन चोरी पत्नी आगोश में हो तब डर किसका अच्छा पासको दिल मचल जाता है प्रेम पुजारन हो विधायक पे आ जाता है अब जब प्रेम से देखती हो समय हो जाता है तो दूर होती हो तब्दिल धडक चाहता है अब भूत का सिर्फ प्रेम के बारे मैं

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पतझड़ है तो बसंत भी आएगा। गर्मी की तपिश को बरसात की फुहारें दूर करेंगी। यही जज्बा जीने का हौसला देता है। उम्मीद और हौसला जीवन की नींव हैं।
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