Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM
13-मुट्ठी भर धूप -वीर in  |  Audio book and podcasts

13-मुट्ठी भर धूप -वीर

256Listens
Buy Now
वीर की नजर जब पहली बार मीरा पर पड़ी, तो जबरदस्त आकर्षण के जादू ने उसे अपने वश में कर लिया। मीरा को भी कुछ-कुछ महसूस हुआ। देखते-ही-देखते यही उनकी जिंदगी बन गई। दोनों को एक-दूसरे की तरफ खींचनेवाली ताकत ही मानो एकमात्र सच्चाई थी, जिसे बयां नहीं किया जा सकता। हालांकि यही प्‍यार उन्‍हें एक-दूसरे से अलग कर देता है। अचानक एक तबाही उन पर हमला करती है और उनके सपनों को झकझोर देती है। कुछ बाकी रह जाती है तो सिर्फ नफरत, जो उनके प्यार के जितनी ही ताकतवर है। बरसों बाद, किस्मत एक और चाल चलती है और दोनों को आमने-सामने ला खड़ा करती है। एक बार फिर। इस बार फैसला उन्हें करना हैः अपनी नफरत के हाथों बरबाद हो जाएं या प्यार को एक और मौका दें। Voiceover Artist: Ashish Jain Script Writer: Vikram Bhatt
Read More
Transcript
View transcript

बीस गुरुवार की शाम वो ऐसे बंद पडी जैसे कोई बेहद उलझाऊ मशीन जो बाहर से तो पूरी दिख रही थी लेकिन भीतर शायद कभी ठीक होने वाला नुकसान हो चुका था । मेरा नहीं । जब आखिरी शब्द मच्छर रहे थे तब हम फेरी पढते हैं और उसने अपने बाबा से बातचीत के बाद फोन कर दिया था । पक्ष की मौत हो गई । कुछ वापस जाना होगा तो कुछ नहीं । वो मेरे जीवन की सबसे अच्छी भी हुई, कुछ चाहती थी । उसने सन्नाटे को चीज दिया और किसी की तरह मुझे टकराई । हम जब तक होटल पहुंचे तब तक मैं ट्रेवल एजेंट से फोन पर बात कर चुका था और जिन से पेरिस और फिर वहाँ से मुंबई तक की हम दूसरों की फॅार वाली थी । जल्द से जल्द मौत का ये एक रूम था । मीरा ने छुप के साथ थी । वो बस शून्य को देखे जा रही थी । फिर हम होटल के कमरे में दाखिल हुए तो वह बाथरूम के फर्श पर लेट गए । कुछ पूरी तरह से फर्श पर गिरने लगे तो मैंने उसे पकडा । उस नहीं आ रही थी और हो रही थी । मैं समझ नहीं पा रहा था की इस दुखभरे माहौल सिक ऍम मैंने कुछ कर सकता हूँ? नहीं ऐसा कुछ कह सकता था जिससे उसे थोडा सुकून मिलेगा । मिस्टर मैं सिर्फ उसके साथ रह सकता था और चल से जब उसे लेकर भारत आ सकता था । वो आंटी से कंधे में होटल के कमरे के संगमर्मर वाले फर्श को ऐसे देख रही थी मानो उसे पता ही ना हो की अभी अभी उसने क्या किया है जबकि वो अभी सुबह छोड से सौ से ले रही थी । हो नहीं रहा हूँ । मुझे साफ करना तो फॅमिली समझ गया हूँ तो मेरी बातों को रॉबर्ट की तरह मान रही थी । मैं उसे कमरे में लेकर आया और सोफे पर बैठा दिया । ऍम पहुंचा और फिर खराब हो गया । समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या काम मैं समझ गया हूँ । ये बेकार की बात नहीं है । मैं कुछ नहीं समझा था तो उसके जितना ही अंजान था । तेजी से मेरे मन में कई तरह की बातें आने रहे पर साफ कर दो समझ रहे हो मीरा को डॉक्टर को दिखा दूँ । शायद वो सब कोई दबाते थे । उसे इस झुलसा देने वाले सबसे बचाना था । लेकिन मैं उसे एयरपोर्ट तक कैसे ले जाऊंगा । मैं उस हिरण की तरह था जो कार की हेडलाइट की तीस पहुंचती से गिर गया था । भाजपा मैंने कमरे के आईने में अपनी और मेरा दसवीं देंगे । हम साथ थे फिर भी अलग कर दिए गए थे और फिर अगले ही पल अच्छे अनुभव हुआ हूँ । मैं आईने में प्रेमी जोडे को देखा और फिर उनके बारे में सोच कर चुकी हो गया । ऍम सपने में आ गया था और फिर उसे पूरी सपने भी बदल दिया था । मीरा ने एक पल के लिए भी अपनी आंखें बंद नहीं की । उपस् घूमती रहे । पहले उस टैक्सी की खिडकी से बाहर जो हमें जिनेवा लेकर पहुंचे । फिर बिजनेस कॅण्टकी खिडकी से बाहर और आखिर में विमान खिडकी से बाहर । ऐसा लग रहा था किस किस से बात कर रही थी जैसे मैं नहीं देख पा रहा था । जिस समय मीरा ने अक्षय की खबर सुनी उसके बाद से ही उसका मुझे बातचीत करना हूँ, बंद कर दिया था । मैंने ये भी महसूस किया किस तरह सबको मुझ से दूर कर लिया था । हूँ हूँ फ्लाइट नहीं । मुझे समझाया कि उसे खुद को मुझसे पूछ करने की जरूरत पडी तो पछतावे से ज्यादा अपराध रूप से भर गई थी । खुद को इस बात के लिए कभी माफ नहीं कर सकेगी । जब अक्षय की मौत हुई तब तब वो उस से दूर थी । कितना भी कोई समझाने क्या तार कर ले, उससे संपर्क नहीं कर सकता हूँ । ये ऍम कर पक्षी जैसा था । पूरी सिंधु की उसके सिर पर नाश्ता रहेगा । किसी किसी की मौत के साथ अच्छी भी पूछता है हूँ हूँ, पछताता रहता है । आखिर ऍम जब अक्षय की मौत हो गई, अगर वो स्विट्जरलैंड में नहीं होती तो शायद इसे टाल सकती थी । क्या मुझसे प्यार करती हैं? उसके साथ होने की जरूरत नहीं, उसके भाई को मार डाला । ऐसे समाज पाउंड उसे पीडा देते रहेंगे कहाँ समय के साथ उन का शिकंजा ढीला पड जाता है । लेकिन कभी पीछा नहीं छोडेंगे और दुर्भाग्य से महीने फिफ्टी रहूंगा । जो उन सवालों या कराऊंगा नहीं । उसके अपराध ऍम मैं भी सोच रहा था । तभी एक अच्छे एक्टर नहीं, मुझे पिक्चर ही नहीं दिया है । मैंने भी रखो दिया था क्या वो फिर कभी उससे मिलना नहीं चाहिए । ये खयाल इतना होना था कि मैं किसी पेड खोलने और विमान के गलियारे में खडा होकर चूर जोर से सांस लेने पर मजबूर हो गया । मैं किसी तरह अपने आप शांत करना चाहता हूँ । मेरा ध्यान भी नहीं दिया की मैं अच्छा हो गया था । बहुत ही खिडकी से बाहर रात के काले आसमा को देख रही थी । क्यों बडा खतरनाक होता है । ये हमेशा दोष लगाने के लिए किसी को ढूंढता है और इस मामले में मैं उम्मीद कर रहा था कि वो मैं नहीं हूँ । आप जैसे चाहते हैं उस से दूर रहना फिर भी सहा जा सकता था । लेकिन इतने करीब होकर भी इतना दूर हो ना जिससे किसी गहरी खाई में गिरने जैसा था । बॅाक्स पर हम अपने ऍम कर रहे थे । मुंबई में एकदम सुबह का वक्त था । हम सोलह घंटे से भी कम वक्त में वापस लौट आए गए । फिर हो हमारे जीवन के सबसे लंबे सोलह घंटे थे । मैंने मेरा के तहत को पहचान लिया और से पैसे उठाकर ट्रॉली पर डाल दिया । उसने मुझे भावशून्य तरीके से देखा जिसकी एकदम नई खोलती है । यहाँ से मैं अकेली जा रही हूँ । परिवार से कोई नौकरी मुझे जरूर लेने आया होगा । मैं नहीं चाहती कि वह जाने की मैं स्विट्जरलैंड में किसी के साथ नहीं । उम्मीद है तो मुझे समझाओगे मॅन के लिए ये वक्त ठीक नहीं है । मैंने इशारा किया की ऍम कुछ भी कुछ भी नहीं बस पीछे बडी फॅमिली को बाहर निकालने के रास्ते की तरफ धकेल दिया । मैं तो अच्छा ही देख रहा था । तब उसके शब्द स्विट्जरलैंड में मैं किसी के साथ है । दिमाग में पूछ रहे थे । किसी इसका क्या मतलब था?

Details
वीर की नजर जब पहली बार मीरा पर पड़ी, तो जबरदस्त आकर्षण के जादू ने उसे अपने वश में कर लिया। मीरा को भी कुछ-कुछ महसूस हुआ। देखते-ही-देखते यही उनकी जिंदगी बन गई। दोनों को एक-दूसरे की तरफ खींचनेवाली ताकत ही मानो एकमात्र सच्चाई थी, जिसे बयां नहीं किया जा सकता। हालांकि यही प्‍यार उन्‍हें एक-दूसरे से अलग कर देता है। अचानक एक तबाही उन पर हमला करती है और उनके सपनों को झकझोर देती है। कुछ बाकी रह जाती है तो सिर्फ नफरत, जो उनके प्यार के जितनी ही ताकतवर है। बरसों बाद, किस्मत एक और चाल चलती है और दोनों को आमने-सामने ला खड़ा करती है। एक बार फिर। इस बार फैसला उन्हें करना हैः अपनी नफरत के हाथों बरबाद हो जाएं या प्यार को एक और मौका दें। Voiceover Artist: Ashish Jain Script Writer: Vikram Bhatt
share-icon

00:00
00:00