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12-मुट्ठी भर धूप -मीरा

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वीर की नजर जब पहली बार मीरा पर पड़ी, तो जबरदस्त आकर्षण के जादू ने उसे अपने वश में कर लिया। मीरा को भी कुछ-कुछ महसूस हुआ। देखते-ही-देखते यही उनकी जिंदगी बन गई। दोनों को एक-दूसरे की तरफ खींचनेवाली ताकत ही मानो एकमात्र सच्चाई थी, जिसे बयां नहीं किया जा सकता। हालांकि यही प्‍यार उन्‍हें एक-दूसरे से अलग कर देता है। अचानक एक तबाही उन पर हमला करती है और उनके सपनों को झकझोर देती है। कुछ बाकी रह जाती है तो सिर्फ नफरत, जो उनके प्यार के जितनी ही ताकतवर है। बरसों बाद, किस्मत एक और चाल चलती है और दोनों को आमने-सामने ला खड़ा करती है। एक बार फिर। इस बार फैसला उन्हें करना हैः अपनी नफरत के हाथों बरबाद हो जाएं या प्यार को एक और मौका दें। Voiceover Artist: Ashish Jain Script Writer: Vikram Bhatt
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मीरा सोमवार गिरा । मैं कई हफ्तों से इस पल के सपने देख रहा था । मेरा और अभी भी चलती जाने नहीं देना चाहता हूँ । मैं चाहता हूँ कि रात गुजर जाए पर ये पर लागू करेंगे । उसके आवास में गहराई थी और उसके आगे उस प्यार से लाल हो चुकी थी । मेरी आंखों में देखो मेरा इन की गहराइयों में मैं चाहता हूँ कि हमारी आत्मा ऍम करेंगे । मैं समझ गई कि वह क्या कहना चाहता था । उसने खुद को मेरी गहराई में धकेल दिया । फिर पीछे मुडकर नहीं देखा हूँ और मैंने भी नहीं । हम हो चुके थे । गुत्थी हुए मन, शरीर और आत्मा सिंह बी और मेरा । मैंने इस तरह का होने का ऐसा पहले कभी नहीं किया था । अगर ही ईश्वर के सबसे करीब नहीं तो इस धरती पर ये जैसा कुछ नहीं और फिर कुछ होगा । आया नीट के बाद दूसरा जो मेरे पास तो हो रहा था और मेरी इच्छा के पथरीले किनारों से बार बार टकरा रहा था । फिर भी हम एक दूसरे को देखते रहे और हमारे नजरिए हटी नहीं । दस की आंखों में अपनी ॅ नही । मैं कल एक घर ऍम और उससे भी कहीं ज्यादा उसकी आंखों में हमने नाम को देख रही थी । नहीं मीरा को देख रही थी जैसे मैं देख रहा था और मैंने जब उस मीरा को देखा तो पाया कि मैं कितनी विनम्र हो । वो मेरा असली भीड से भी अधिक सब सूरत नहीं । पीर की मीरा वैसी ही मेरा नहीं है जिससे मैं करना चाहती थी । हमेशा सही हो । हम जब थक चुके थे हो गए मैंने जब होली तब देर सुबह क्यों किरणों को देखा जो अस्त व्यस्त ढंग से खींचे गए ब्लाइंट से झांक रही थीं । पीले सोने के छोटे छोटे टुकडों में तो मेरे कमरे में पहली दिख रही थी और वैसा ही टुकडा मेरे चेहरे पर बडा ऍम । इस वजह से ही मेरे नहीं खुली थी । मैंने अपनी पकडते देखा तो फिर मुझे खूब रहा था और मुस्कुरा रहा था । जब आप के आप बोले तो किसी का इस तरह देखना चोरी कही जाती है । समझे मैंने मदहोशी में कहा और सबके बाहों में भर दिया । रात बीच जाने पर और जब उसके सारे प्यार को निगल लिया जाए तो किसी प्रेमी को यही कहते हैं । उसने मजाक किया । उन्होंने कहा और मुस्कराने लगी हूँ । एक मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखने लगा । चेहरे से कहीं अधिक भाव उसकी आंखों में मैं जाएगा तो तुम्हारे चेहरे पर सूरत ही रोशनी के खूबसूरत टुकडे को देखा । उसने प्यार से कहा! और फिर मैं मन ही मन सोचने लगा चंद्र की नहीं मुझे बस यही चाहिए धूप के साथ इस सुंदर सा मुखडा मुख्य रिसर्च हाथों में ले सकू और अपना कह सकता हूँ । मीरा तुम मेरे मुट्ठी भर हो पर मुझे बस तुम चाहिए । पता नहीं उसने ये सब कहा तो मेरी आंखों में आंसू कैसे आ गए और जल्दी ही मैं सुबह उठने लगे । उसने मुझे बाहों में जगह लिया और फिर हसते हुए कहा अरे तुम तो मेरी धूप को बिगाड रही हो । अगले तीन दिनों तक हम सिर्फ इस अपराध भूत को कम करने के लिए निकले की हम छूट जरलैंड में है । टाइम टेबल पूरी तरह पक्का हो गया था । डाॅन इसके बीच में जुनून के साथ क्या जाने वाला प्यार और बीच बीच में पर्यटन स्थलों तक घूमना शामिल हो जाता था । दिन तेजी से कितने लगेगा तो भारत वापस लौटने के दिन करीब आ गए । मैंने तय किया कि सिर्फ एक रास्ता था जिसे लौटने का सफर बर्दाश्त करने लायक बन सकता था । ये सब मुझे बहुत तेज हो रहा था लेकिन ये डिजिटल युग था और यहाँ केवल दो ही कर दिया है । तेज और हूँ हुई है । हम जब भारत लौटेंगे तब मेरे माता पिता से नहीं होगी । हम उनसे इंटरलेकन तक की मेरी में साथ साथ मैंने देखा ऊपर चिडियों की और नीचे पानी को चीज से फेरी दो । आवाज ही सुनाई दे रही थी । हमारे थे माता पिता से मुलाकात भी मेरे चेहरे पर बिना किसी भाव के साथ पूछा । कुछ भी ऐसा करता हूँ तो मुझे बुरा लगता हूँ क्योंकि मैं समझ नहीं पाती थी कि वो क्या सोच रहा है । हाँ, मैंने गलत कर रहा हूँ तो उसका नहीं लगा हूँ तो कभी कभी भूल जाती हूँ कि तुम्हारी जिंदगी नहीं । मेरी छुट्टी जरूरत है उससे कहीं ज्यादा जरूरत इस बात की है । तो मैं मेरी जिंदगी ले रहा हूँ लेकिन लाने नहीं तो बहुत पुरानी बात ऍम खुश हो गया और मेरी आंखों पर आ रहे बालों को अपने खातों से हटा दिया । मुझे हमारे माता पिता से मिलकर खुशी होगी नहीं रखते । उसने तो ममता से बनाते हैं । तभी उनको जैसे संगीन मिला और ऍम भीड में उनका नाम देखा उठाके लगाकर हम बडा हीरा खबर कितनी तेजी से फैलती है ना मैंने हस्तक्षेप फोन उठाया । जवाब दिया पहले तो मुझे पापा की आवाज सुनाई नहीं पडेगी फिर पीछे से अच्छे ढंग की आवाज सुनाई पडेगी । ये किसके होने की आवाज सुनाई पडेगी । कोई रो रहा था लोग मैं बोली और की एक अच्छी सी भावना मुझे अपनी चपेट में लेने लगे । फिर मैंने पापा की आवाज सुनी हो रही थी । भगवान क्या हो रहा था? मीरा हूँ नहीं चाहिए । अच्छे अच्छा गए रहा ।

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वीर की नजर जब पहली बार मीरा पर पड़ी, तो जबरदस्त आकर्षण के जादू ने उसे अपने वश में कर लिया। मीरा को भी कुछ-कुछ महसूस हुआ। देखते-ही-देखते यही उनकी जिंदगी बन गई। दोनों को एक-दूसरे की तरफ खींचनेवाली ताकत ही मानो एकमात्र सच्चाई थी, जिसे बयां नहीं किया जा सकता। हालांकि यही प्‍यार उन्‍हें एक-दूसरे से अलग कर देता है। अचानक एक तबाही उन पर हमला करती है और उनके सपनों को झकझोर देती है। कुछ बाकी रह जाती है तो सिर्फ नफरत, जो उनके प्यार के जितनी ही ताकतवर है। बरसों बाद, किस्मत एक और चाल चलती है और दोनों को आमने-सामने ला खड़ा करती है। एक बार फिर। इस बार फैसला उन्हें करना हैः अपनी नफरत के हाथों बरबाद हो जाएं या प्यार को एक और मौका दें। Voiceover Artist: Ashish Jain Script Writer: Vikram Bhatt
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