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11 रसरंग -रेखा ओर रेखा

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"गुलों में कई रंग हैं बहार में कई रस हैं जीवन अपने आप में रंगरस है"
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रेखा और रेखा गर्भधारण की डॉक्टर के द्वारा आधिकारिक पुष्टि मिलते ही घर में हर्षोल्लास छा गया । अब परिवार में चौथी पीढी का पदार्पण होगा । दादा दादी, माता पिता, पुत्र, पुत्रवधू के पश्चात अब एक नन्ना प्राणी परिवार का हिस्सा करने के लिए आने वाला है । घर में गर्भवती पुत्रवधू रेखा की हर सुख सुविधा के लिए दो निजी सहायिकाओं की नियुक्ति हो गई । रेखा को अब आराम से नौ महीने विधान पांच सौ बज के भव्य कोठी में अमीर परिवार की बहू रेखा को कोई जानता नहीं हैं तो काम बचाने के लिए तो निजी सहायिकाओं के अतिरिक्त अन्य घरेलू आकर भी है । समय समय पर डॉक्टरी जांच, हर किस्म के टेस्ट दवाइयाँ और भरपूर खुराक रेखा निश्चिंत होकर गर्व के नौ महीने आराम से काटने लगी । पांच सौ गज की कोठियों की कॉलोनी के अंत में एक पेड के नीचे तो भी रखते राम और उसकी पत्नी रेखा की कपडे स्त्री करने की मेज लगी थी । रतीराम कई कोठियों में कपडे धोने का काम करता था और रेखा के साथ कपडों की इस तरी करने का काम भी करता था । धोबन रेखा भी गर्भवती हो गई । नन्ने प्राणी के इंतजार में रतीराम और रेखा दोनों प्रसन्नता धोवन रेखा के भाग्य में डॉक्टरी जांच, टेस्ट, दवाइयाँ और अच्छे खुराक वो तो थे नहीं रोका । सूखा खाकर पति पत्नी प्रसन्न थे । आमिर रेखा वातानुकूलित कोठी में आराम कर रही थी और धोबन रेखा तपती धूम पर ज्यादा और सर्दी में पेड के नीचे तरपाल डाल कर में इस बार कपडों के इस तरी करते हैं । सुबह रतीराम कोठियों में कपडे होता और दोपहर बाद कपडों पर स्त्री करता है रेखा । कपडों का गट्ठर सिर पर बैठकर कोठियों तक पहुंचाती समय बीतता गया आमिर रेखा को डॉक्टर ने बिस्तर पर आराम करने की सलाह दे दी । थोडे दिन बाद डॉक्टरी जांच चाहते फॅमिली धोबन रेखा ने एक दिन भी डॉक्टर का क्लिनिक नहीं देखा । नहीं सरकारी अस्पताल गई, न कोई डॉक्टरी जांच, ना कोई टेस्ट, ना कोई दवा कोठी वाले । पिछले दिन का बच्चा खाना होने दे देते और देखा उसी मैं खुश हो जाती हैं । प्रसव का देना गया आमिर देखा एक पंचतारा अस्पताल के प्राइवेट स्वीट में भरती थी और धोबन रेखा कपडों का गट्ठर से पदक है । एक कोठी से दूसरी कोठी जा रही थी । अस्पताल में पूरा परिवार एकत्रित था । डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी की तैयारी कर रहे थे । रतिराम कपडे स्त्री कर रहा था और लेखक कपडे देने के बाद स्त्री करने वाली में इसका सहारा लेकर खडी हुई और धीरे से जमीन पर पसर गए । क्या हुआ रेखा प्रति राम ने पूछा लगता है टाइम हो गया देखा ना जमीन पर लेते हुए तो मैं तो लेकर आता हूँ । अस्पताल चलते हैं तो लगता है कहीं यहाँ हो जाये प्रति राम ने पडोस की कोठी में काम करने वाली को आवाज देकर रेखा के पास रुकने को कहा और ऑटो लेने सडक के मोड थक गया हूँ । देखा की हालत देखकर आसपास की कोठियों में काम करने वाली सहायिकाएं एकत्रित हो गयी । जतिराम ऑटो लेकर आया लेकिन तब तक सही गांव चादर का पर्दा कर दिया और एक अनुभवी बडी सहायता की देख रेख में रेखा ने एक बच्चे को जन्म दिया । बच्चे के जन्म के पश्चात समीप के नर्सिंग होम में रेखा और बच्चे को दिखाने ले गए और जहाँ दो घंटे बाद ऍम उसे छुट्टी मिल गई । नर्सिंग होम का खर्चा सहन करने का सामर्थ्य प्रति राम और रेखा में नहीं था । उधर पंचतारा अस्पताल में रेखा ने एक बच्चे को जन्म दिया । जन्म के पश्चात डॉक्टरों ने बच्चे को कमजोर बताया और कुछ निकलता हूँ का हवाला देकर नर्सरी में पंद्रह दिन रखा देखा । घर आ गई लेकिन बच्चा अस्पताल में था । घर में दादाजी ने नाराजगी जाहिर की । अस्पताल वालों का व्यापार है । बिल बनाने के चक्कर में अस्पताल जानबूझकर बच्चे को रोक लेते हैं । हमारे समय में ऐसा नहीं होता था । बाबा सबसे बढिया इलाज चल रहा है । हमें कोई जोखिम नहीं लेना । थोडे रुपयों के खाते हम बच्चे की सेहत से खिलवाड नहीं कर सकते हैं । दादाजी को ये समझा कर शांत कर दिया । अपनी अपनी सोच होती है । सामर्थ के मुताबिक सब काम होते हैं । सामर्थ के हिसाब से सोचता होती है । पंद्रह दिन बाद रेखा का बच्चा ऑडी कार में घर आया । चारों और खुशियों का माहौल था । बच्चे के घर आने की खुशी में पंचतारा होटल में पार्टी का आयोजन किया गया । धोबन रेखा चार दिन बाद खुद में बच्चा लिए कपडों की इस तरी करने लगी । पेड के नीचे पुरानी चादर का झूला बना लिया जा । रेखा का बच्चा सोता रहता हूँ या खेलता रहता है और उसे देख रेखा कपडों पर इस्त्री करती रहती है । देखा के बच्चे के लिए तो निजी सहायता इन नियुक्त हो गई और रेखा एक पुरानी चादर में अपने बच्चे को कमर में बांधकर अपने सीने से चिपकाकर देर पर कपडों की गठरी रखकर इस तरीके कपडे लेती और वापस पहुंचा दी है ।

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"गुलों में कई रंग हैं बहार में कई रस हैं जीवन अपने आप में रंगरस है"
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