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01. Chiku ki Bringing

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01. Chiku ki Bringing in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
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The tale of a troubled kid dealing with his problem of stammering, but possessing abnormally superior brain power. Voiceover Artist : RJ Manish Author : Rohit Verma Author : Rohit Verma Rimpu Producer : Saransh Studios Voiceover Artist : Manish Singhal
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तो आप सुन रहे हैं तो आपको एॅफ का नाम है जी को दाॅये जिसके लेखक है तो रोहित ॅ मनीष की आवाज में कॅश सुनी जो मन चाहे ऍम ऍम ऍम ऍम रोलनंबर फ्री पैसे नाम रोल नंबर फोर ऍम रोल नंबर फाॅक्स ऍम रोल नाॅट कुछ रोल नंबर नाइन रोल नंबर नाइन जी को अभी वो नौ तारीख आया क्या? आज तो फॅस के साथ ही पूरी क्लास में हंसी का फव्वारा छूट गया और मैं भी चार रोज की तरह मन मसोसकर अपनी जगह पर बैठ गया । मैं ऊंची को कॉल किया है । मेरी कहानी मैं जो कि हकलाहट की समस्या से पीडित हूँ । असल में मेरा नाम अनिल हैं परन्तु मेरे घर वाले मुझे प्यार से चीकू कहकर पकाते हैं जी को ये है मेरा नाम मेरे घर वालों को पता नहीं क्या सूझी होगी कि उन्होंने मेरा ये नाम रख दिया ये भी कोई नहीं होता है घर वालों से इस बारे में मैं जब भी पूछता तो यही जवाब आज तक की ये नाम मेरी बुआ जी ने रखा था क्योंकि जब वह मुझे पहली बार देखने आई थी तो अपने साथ जी को लेकर आई थी और आप मेरे मुँह में वहीं पर लगाया था और तैयार से मुझे जी को कहकर पुकारने लगी । ये तो मेरा ऍम बच्ची को खाओ और बच्ची को खिला खिलाकर मेरा नाम करन बतौर चिको कर दिया । तब से लेकर आज तक मैं अपनी बुआ कही नहीं, सबके लिए उनका प्यारा जी को ही हो गया । मेरे परिवार में मेरे अलावा मेरा एक भाई और एक छोटी बहन है । हम एक मध्यम भर के परिवार से संबंध रखते हैं । मेरे पिताजी सरकारी बैंक में नौकरी करते हैं और वहाँ घर का काम काज संभालती है । हमारे घर में हमारे अलावा मेरे चाचा चाची और दादा दादी रहते हैं । चाचा जी के दो बेटे हैं, जो अभी बहुत छोटे हैं । दादा जी सरकारी स्कूल में मास्टर थे, पर दो अब बहन रिटायर हो चुके हैं । बचपन से ही मैं बहुत शरारती था । मेरी शरारतों के किस्से मेरे परिवार वाले आप सुनाते हैं । अपनी शरारतों के कारण मैं अपने परिवार में सबसे चाहता सदस्य था । मेरी उम्र साढे तीन चार साल के आस पास हो गई थी । परंतु मैंने अभी तक बोलना शुरू नहीं किया था जिसमें जैसे मेरे घर वाले बहुत चिंतित रहते थे । मैं मुझे बहुत से डॉक्टरों के पास लेकर गए और उन्हें मेरे ना बोलने के कारण के बारे में पूछा । लगभग सभी डॉक्टरों का एक ही बता की मैं बहुत छोटा हूँ या फिर कई बच्चे तेरे से बोलना शुरू करते हैं । परंतु उसके बावजूद उन्होंने इस बात की पुष्टि भी करती थी कि मेरा दिमाग बाकी बच्चों की तुलना में बहुत तेज है । यह तो सच था कि बोलने में ना सही करता । दिमागी तौर पर मैं बहुत ही तेज था । मैं जिस चीज को एक बार देख लेता हूँ, फॅस कार्य को एक बार सुन लेता हूँ । उसे हजारी से नहीं बोलता था । मेरी माँ के अनुसार मैंने अपने बोलने से पहले ही चलना और दौडना भागना शुरू कर दिया था । तीन साल की उम्र तक पहुंचते पहुंचते मैं बहुत ही शरारती हो गया था । मैं भी शरारत से अपने परिवार को तंग जरूर करता था । प्रैक्टिस के बावजूद मेरी शरारतें उन्हें बहुत अच्छे लगते थे । मेरी उम्र चार साल के आस पास पहुंच गयी थी । इसके बावजूद मैंने अभी तक बोलना शुरू नहीं किया था जिससे मेरे परिवार वाले और भी चिंतित रहने लगे थे । परन्तु मेरी बुआ हमेशा से कहते हैं कि मेरी चिंता ना करें क्योंकि जो बच्चे देर से बोलना शुरू करते हैं मैं अक्सर बहुत ज्यादा बोलते हैं और उन्हें छुप करवाना आसान नहीं होता । आखिरकार बुआ के बाद सच नहीं चार साल की उम्र पार होते ही मैंने बोलना शुरू किया तो मुझे चुप करवाना आसान नहीं था । यानी में सारा दिन बहुत बोलता था । पूरे घर में मेरा शोर सबसे ज्यादा होता था परन्तु मेरे बात करने का अंदाज सबसे अलग था । मैं बोलते समय शब्द को कई बार दोहराने लगता था । मेरे इस प्रकार से बोलने से मेरे परिवार वाले हसने लग जाते थे और बहुत बार बाद मुझे बोलने के लिए उकसाते रहते थे । उनकी इस हरकत को मैं खेल समझने लग गया था और जानबूझ कर बार बार हकलाकर बोलता था । मैं जाने अनजाने उस खेल का हिस्सा बन गया था । मैं सोचता था कि मैं इस प्रकार से बोल कर उन सब को हटा रहा हूँ परन्तु यह मेरी गलत पहनी थी क्योंकि असलियत यह थी बहन को हजार नहीं रहा था । कल की बहन मेरे ऊपर हँस रहे थे । ऍम इसके लिए मैं अपने आप को दोषी नहीं मानता हूँ क्योंकि उस समय मैं नारायन और ना समझ बच्चा था । साढे चार साल की उम्र में मेरे माता पिता ने मुझे स्कूल में दाखिल करवा दिया परन्तु बताओ ये बच्चा था और बच्चों जैसे सारे काम जैसे स्कूल न जाने की स्थित करना और अपनी किताबें भाड देना यह सब करता था मेरी इस प्रकार की शरारतों पर मेरे माता पिता कई बार तो हफ्ते थे परंतु कही बार मुझे उनके गुस्से का शिकार भी होना पडता था । मेरे माता पिता के अनुसार मेरा मन पढाई में कम और खेल कूद शरारतों में साथ लगता था । पर अब तो मैं समझता हूँ कि उस वक्त मेरी उम्र भी पडने की रहे थे । मेरी हकलाहट की समस्या कब शुरू हुई और कैसे शुरू हुई इसके बारे में ठीक से याद नहीं । लेकिन जब मैंने पहली बार इस समस्या को करीब से महसूस किया तब का थोडा बहुत याद है । बहादुर देना क्या है जब मैं पहली कक्षा में पडता था । मैं अपनी कक्षा का सबसे होनहार छात्र था । मैं शारीरिक तौर से पेशक थोडा कमजोर था तो मानसिक तौर से एकदम था । पढने के मामले में हमेशा सबसे आगे रहता था जिस वजह से मैं अपने अध्यापकों का पसंदीदा छात्र बन गया था । जिस वजह से कुछ छात्र बच्चा चलने लगे थे और कुछ मुझ से मित्रता करने लगे हैं । जिंदगी मजे से कट रही थी । एक दिन की बात है मैं अपनी कक्षा में बैठा था । हिंदी विषय की क्लास चल रही थी । हिंदी की अध्यापिका जी नहीं सबसे एक प्रश्न पूछा और बोला ऍम उत्तर मालूम है अपने हाथ ऊपर करूँ क्योंकि मुझको इस प्रश्न का उत्तर मालूम था तो मैंने इसका उत्तर देने के लिए अपना हाथ ऊपर कर दिया । अध्यापिका जी मुझे उत्तर देने का इशारा किया । मैं उत्तर देने के लिए खडा हुआ और जैसे उत्तर देने के लिए बहुत खोला क्या? क्या मेरे मुझे उत्तर देने के लिए आवाज ही नहीं निकल रही थी । मैं असमंजस में पड गया हूँ । चुप चाप खडा था । मैं बोलने की बहुत कोशिश कर रहा था तो कुछ भी बोल नहीं पा रहा था । अध्यापिका ने इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए उधर से बोला मैं कहा था हर उत्तर देने के लिए बोलने की कोशिश कर रहा था तो भूल नहीं पा रहा था । मैं अपने आप को जाना चाहिए और असहाय महसूस कर रहा था । कुछ सहपाठी मेरी इस हालत पर हैरान थे और कुछ साल अतमर मुस्कुरा रहे थे । अध्यापिका ने मुझको डाटा और बैठने के लिए बोला मैं अपनी सीट पर पहुँच गया । मैं बहुत बडी समस्या का शिकार हो चुका था जिसके बारे में मुझे कोई भी जानकारी नहीं थी । हालांकि इससे पहले भी मेरे साथ ऐसा कई बार हुआ था परन्तु इस बार के हाथ से नहीं मुझको काफी अंदर तक हिलाकर रख दिया । मैं यह सोचकर हैरान और परेशान है कि जब अध्यापिका ने मच्छर प्रश्न का उत्तर पूछा तो मुझे एक ही है क्या हो गया था? मैं उत्तर को जानते हुए भी कुछ खोल कर नहीं पा रहा था । तभी स्कूल मैं भी छुट्टी की घंटी बजे मैं निकला से बाहर आया और जल्दी से भागकर स्कूल के मैदान में किसी काम जगह पर गया । वहाँ जाकर मुँह से अपने आप से बाते करने लगा । अब की बार में बिना किसी परेशानी के काफी आराम से बोल रहा था और यह बहुत मुझे ध्यान करने के लिए काफी थी । स्कूल से छुट्टी के बाद में अपने घर वापस आया थोडा था जिसमें जैसे बहुत था किसी से कुछ बातचीत की है, अपने कमरे में चला गया । अगले दिन भर जब स्कूल गया तो वहाँ का माहौल काफी बदला बदला सा लग रहा था । मेरे कुछ सहपाठी मेरे साथ हुए कल वाले हादसे की न गलत आ रहे थे और पूरी कक्षा के सामने मेरा मजाक बना रहे थे । मैं क्रोध और उदासी के मिले चले भाव के साथ चुप चाप अपनी जगह में जाकर बैठ गया । अध्यापिका कक्षा में आए और हर रोज की तरह हमारी कक्षा की शुरुआत हाजिरी लगाने से करने लगे । अब जैसा कि हर स्कूल में हाजिरी लगाने के समय होता है, अध्यापिका रोल नम्बर बोलती है और जिस छात्र का रोल नम्बर बोला जाता है, उसे उसके जवाब में प्रेसेंट मैं बोलना होता है । मेरा रोल नंबर नहीं था जब अध्यापिका हाजिरी लगाते हुए मेरे रोल नंबर के नजदीक पहुंचने लगी । अब मुझे कुछ अजीब सा डर लगने लगा । शायद इसका कारण ही हकलाहट की समस्या नहीं है, जिसके बारे में मैं अभी तक जाना था । मैं सच में डर नहीं लगा । डर इस बात का क्या कर अध्यापिका ने रोलनंबर बोला और इसके जवाब में बच्चे प्रसेंट । मैं नहीं बोला गया तो वह छात्र चुकल मंच पर मुस्कुरा रहे थे । थोडी बहुत नकल उतार रहे थे । पहले ही नहीं मैं अभी इसके बारे में सोच रहा था की अध्यापिका ने मेरा रोल नंबर बोल दिया । अब इस बात को सोचकर मैं कर रहा था वही हुआ । मैं अपने रोल नंबर को सुनकर प्रसेंट महम बोलने की कोशिश कर रहा था तो बोल नहीं पा रहा था । मैं लगभग खामोश था । अध्यापिका ने तीन चार बार मेरे रोल नंबर के साथ मेरे नाम को बुखारा परन्तु जब मैं कुछ नहीं बोल सका तो उन्होंने मेरी गैर हाजरी लगा दी । तभी किसी सहपाठी ने मेरी तरफ इशारा करके अध्यापिका को मेरी उपस् थिति के बारे में बताया । अध्यापिका ने मेरी तरफ देखा और मुझे अपनी जगह पर खडा होने का इशारा किया । अध्यापिका ने मुझे हाजिरी ना बोलने का कारण पूछा क्योंकि इसका कारण मुझे खुद को ही नहीं मालूम था तो मैं उन्हें क्या जवाब देता हूँ । अतः मैं कुछ नहीं बोला और चुपचाप खडा रहा । अध्यापिका की बात का कोई भी जवाब ना देने के कारण उस दिन मुझको उनसे खूब डांट पडी । स्कूल में छुट्टी होने के बाद मैं अपने घर वापस आ गया और घर आते ही मैं अपने कमरे में जाकर जोर जोर से होने लगा । मेरी माँ कमरे में आई और मेरे होने का कारण पूछने लगे । पहले तो उन्हें लगा कि शायद मेरा किसी के साथ झगडा हुआ है और मैं उस झगडे में बाहर खा कर आया हूँ । माने बच्चे फिर से प्यार से रोने का कारण पूछा और मैंने रोते रोते खिलाते हुए सारी बात बता दी । माँ को कुछ समझ में नहीं आया कि मुझे क्या हुआ । तो जैसे तैसे उन्होंने मुझे को जब करवाया रोते रोते पता नहीं का बच्चे नहीं था गई और मैं वहीं पर हो गया । जब मैं शाम को सोकर उठा तो देखा घर में कुछ मेहमान आए हुए हैं । माने मेरे हाथ में बुलाया । मेहमानों से मिलने के लिए बोला । महमानों में मेरे पिताजी के दोस्त, उनकी पत्नी और उनके बच्चे थे । पिताजी के दोस्त यानी मेरे अंकल रहे । मुझे अपने पास बुलाया और मेरे सर पर हाथ फेरकर मुझे प्यार करने लगे । बातों बातों में उन्होंने मुझे मेरा नाम पूछा और मुझे अपना नाम बोला नहीं किया । मैं जहाँ पर एक्शन तरकी मिली चली परिस्थिति के बीच फंसा हुआ था । मेरे अंकल है बच्चे दो तीन बार मुझे अपना नाम बताने के लिए बोला तो मैं अपने ही नाम को बोल नहीं पा रहा था । मैं दिल की धडकन तेज हो गए और मुझे पसीना भी आ रहा था । मेरे कान गर्मी के कारण फिलहाल हो गए । मेरे पिताजी ने समझा कि वह मेहमानों के सामने कुछ शर्म आ रहा है जिस वजह से मैं उन्हें अपना नाम नहीं बता रहा हूँ और पिताजी ने मुझे उन सबके सामने डाटने लगे । उनकी डांट से मैं काफी डर गया, होने लगा तभी पानी मुझे अपनी गोद में उठाया और चक्कर आने लगी और साथ ही माने स्कूल में हुई सारी बात मेहमानों के सामने पिताजी को बता दूँ । किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर महासभा क्या है । तभी मेरे अंकल ने बताया मुझको हकलाहट की समस्या है । आज मेरा चरण दे रहे हैं । मैंने आज अपने जीवन के छह साल पूरे कर लिया है । इस दिन को बनाने के लिए मेरे माता पिता ने अपने कई रिश्तेदारों को शाम को बुलाया है । घर की सारी साथ सजावट की हुई है के सजावट के बीच मेरा नाम जी को भी बडे बडे अक्षरों में लिखा हुआ है । घर के पूरे फॅमिली मेरे जन्मदिन के कारण खुशी का माहौल है । वहाँ अपस्थित सब लोगों का ध्यान मेरी ही तरह है । यह सब देखकर मैं अपने आप को बहुत ही खास महसूस कर रहा था । मैं सबसे अपने चिरपरिचित अंदाज से बातें कर रहा था और बहस आप मेरी बातों पर हस रहे थे । हम मैं भी ना समझ उनसे बातें करके उनको बहुत ज्यादा हजार कर उनका मनोरंजन कर रहा था । परंतु इसके बावजूद मैं बहुत ही हसमुख स्वभाव का मालिक था । मेरे जीवन में ऐसा वक्त बहुत ही कम आया होगा जब मैं अपनी हकलाहट की समस्या के कारण कभी निराश हूँ और भगवान की कृपा से मेरा दिमाग भी बहुत तेज था जिस वजह से मैं पढाई में भी बहुत तेज था । अपनी कक्षा में ही नहीं बल्कि पूरे स्कूल में सबसे पहले स्थान पर रहता था । लगभग सात आठ वर्ष तक मेरी आदत बिल्कुल पक गई थी । अपनी इसी आदत की वजह से मैं अपने स्कूल में है, अपने अध्यापकों का खूब मनोरंजन करता था । आलम यह था कि कई अध्यापिकाएं अपने खाली समय में मुझे अपने पास बिठा लेती और मुझे बाते करके अपना मनोरंजन कर दी । कुल मिलाकर उन दिनों में सबके लिए एक मनोरंजन की वस्तु बन गया था । तो ये सब में मैं अपने आप को दोषी नहीं मानता था । समय बीतने के साथ साथ मुझे अपनी गलती का एहसास होने लगा । मैं सब कुछ सोचने और समझने लगा था जिस वजह से मैं ज्यादातर चुप रहने लगा था । परन्तु बहुत देर हो चुकी थी क्योंकि मेरी इस प्रकार से बोलने की आदत अब हकलाहट की समस्या में अपील हो चुकी थी । इस वजह से मेरे स्वभाव में बदलाव आ गया । मैं अकेला खिला रहने लगा । ऍम स्वभाव का हो गया था । पांच बात पर हर किसी से लडाई झगडा करना मेरे स्वभाव में शामिल हो गया था । एक दिन की बात है । मैं सुबह स्कूल के लिए तैयार होने लगा की बारिश शुरू होने लगी । मेरी माने मुझे स्कूल ना जाने की सलाह दी है और कहने लगे तो बेटा बाहर बहुत बारिश हो रही है तो रहे मेरे स्कूल से छुट्टी कर ले धान तो मैं नहीं माना और स्कूल जाने की स्थित करने लगा । मेरी माने घर से मुझे स्कूल ना जाने के लिए कहने लगे । तभी मेरे पिता जी आए और उन्होंने वहाँ से कुछ स्कूल ना भेजने के बारे में पूछने लगे । करी माने पिताजी को कहा कि बाहर बहुत जोर से बारिश हो रही थी और अगर मैं स्कूल गया तो भी जाऊंगा । तभी मेरे पिता जी ने कहा तो जितना बंद करूँ अगर किसी को स्कूल जाना चाहता है तो उसे जाने दे और रही बात बारिश में भेज जाने की तो मैं स्वयं स्कूटर पर बैठाकर स्कूल छोडा जाता हूँ और मेरे पिताजी मुझे स्कूल छोडने के लिए तैयार हो गए । स्कूल पहुंचकर मैंने देखा कि मेरी कक्षा में बहुत से सहपाठी अनुपस्तिथि यानी बारिश की वजह से बहुत से सहपाठी छुट्टी पर है । स्कूल लगने के बाद मेरी अध्यापिका जी कक्षा में आए और विद्यार्थी कम होने की वजह से हम से बातें करने लगे हैं । चलो बच्चों आज हम पढा ही नहीं करेंगे आज हम बातें करेंगे । चलो एक एक करके आप सब यहाँ बताओ कि भविष्य में आप सब जीवन यापन के लिए क्या करना चाहते हो? मेरी अध्यापिका जिन्हें हम सबसे कहा कोई सी ये बनना चाहता था तो कोई डॉक्टर तो कोई इंजीनियर बनना चाहता था परन्तु जब मुझसे पूछा गया तो मैंने हकलाते हुए जवाब दिया की मैं वकील बनना चाहता हूँ जिसके लिए मैं एलएलपी करना चाहता हूँ । पर जो मेरी बात सुनकर अध्यापक समेत सब विद्यार्थी हस पडे । मेरी वकील बनने की बात ही नहीं बल्कि इस बात को मैं तो आते हुए कह रहा था । इस बात पर सब हसने लग पडे थे । अध्यापिका के चले जाने के बाद कुछ विद्यार्थी मेरी बात का मजाक बना लेते हैं । पटना कल उधार कर मेरी हकलाहट का मजाक बनाने लगते हैं । मेरे कुछ पार्टी अपने अभिनय के द्वारा यहाँ बताने लगते हैं कि भविष्य में जब मैं एलएलबी करके वकील बन जाऊंगा तो मैं रहते हुए अपना केस कैसे लडूंगा जिससे मेरी पूरी कक्षा के सामने बहुत बेज्जती होती है । उस दिन से मेरे सहपाठी उसे चढाने के लिए मुझे एलएलबी के नाम से पुकारने लगते हैं और कुछ ही दिनों में मेरा या कम कितना पड जाता है कि पूरे स्कूल में कोई भी मेरे असली नाम सनी जी को के नाम से नहीं जानता था । सब मुझे एलएलबी के नाम से जाने लग गए थे । मुझे हकला है की समस्या थी जिस वजह से मेरे व्यवहार में तब्दील यानी शुरू हो गयी बोलती समय मैं हकलाना जाऊँ और जिस वजह से लोग मेरा मजाक बनाए । इस तरह से मैं ज्यादातर चुप रहने लगा और साथ में अकेला अकेला रहने लगा । लेकिन इस सबके बावजूद मुझे एक बात समझ में नहीं आती थी कि जब मैं अकेला होता क्या अपने किसी परिचित लोगों से बात करता हूँ, तब कोई समस्या नहीं होती है । ऐसा क्यों होता है? यह सोचकर में अकेले में काफी जोर जोर से बोलने लगता, देखता था, चिल्लाता था और कभी कभी भर होने लगता था । मेरे सहपाठियों ने मुझे छेडने के लिए विभिन्न विभिन्न प्रकार के नामों से पूछे तो करना शुरू कर दिया जैसे हकला और शाहरुख खान इत्यादि उसमें बोलते समय रुक जाता था । यानी कि मैं हकलाकर बोलता था तो इसमें मेरा क्या कसूर था? मैं जब मेरे साथ ऐसा व्यवहार क्यों करते हैं? इस बात को लेकर मैं अक्सर दुखी और परेशान रहता था । मेरे सहपाठी और अध्यापक मेरी हकलाहट की समस्या के साथ साथ पतले शरीर का भी मजाक बनाना शुरू हो गए थे । वो बार बार मुझे चलाते रहते थे । एक बार की बात है मेरे एक अध्यापक ने मेरा मजाक बनाने के लिए बच्चे का अगर तुम शारीरिक तौर पर मोटा होना चाहते हो यानी अगर तुम अपनी सेहत बनाना चाहते हो तो मैं काले चने का घटना खाना चाहिए । पहले तो मैंने अपने अध्यापक की बातों को नजर अंदाज कर दिया । तुरंत उनके बार बार कहने के बाद मैंने उनसे काले चने के घटते के बारे में पूछ लिया । मेरे इस के बारे में पूछे जाने पर पहले तो मेरे अध्यापक और मेरे कुछ सहपाठी कुछ मुस्कुराने लगते हैं । उसके बाद मुझे एक काले चने के घटने को बनाने और उसको खाने के बारे में बताने लगते हैं क्योंकि कुछ इस प्रकार था । मेरे अध्यापक ने कहा कि पहले तो थोडे से काले चने लेकर उसे एक राहत पहले पानी में बे बोले । फिर अगले दिन सुबह चार से पांच बजे के आस पास उसे पानी से निकालकर महीन पीसकर उसका पेस्ट बना लें । उसके बाद उस पेस्ट को देसी घी के साथ गर्म करके खाले । लगातार एक महीने बाद मुझे अपनी सेहत में सुधार नजर आना शुरू हो जाएगा । गिरे सहपाठी उस अध्यापक की बातों का समर्थन करने लगते हैं । धीरे धीरे मैं उन सब की बातों पर विश्वास करने लगा और उनके कहे अनुसार वैसा ही करने लगा हूँ । ऍफ सुबह चार बजे उठता है और रात को भी कोई हुए काले चने लेकर उसे बीस कर पेस्ट बना लेता हूँ और स्पेस को तवे पर गर्म करके खा जाता हूँ तो मुझे उस का साथ कुछ अच्छा नहीं लगता था । मुझे इस बात की जरा भी भनक तक नहीं थी । मेरे साथ मजाक किया जा रहा है । पर तो मेरे साथ किए गए मजाक की पोल मेरे ही एक सहपाठी मित्र में खोलती हूँ । उसने मुझे उस अध्यापक और मेरे सहपाठी मित्रों के द्वारा मेरा मजाक बनाए जाने के बारे में सब कुछ बता दिया और यह भी बता दिया कि यह काले चने का घटना एक काल्पनिक कहानी है जो की सिर्फ मेरा मजाक बनाने के लिए इस्तेमाल की गई थी । मुझे जब इस बारे में पता चला तो बहुत दुखी होता हूँ तो मैंने भी कह सकता था क्योंकि इस मजाक में मेरे अध्यापक भी शामिल थे । मैं अपने आप को फाॅर्स कर रहा था । ऍप्स प्रभाव से फॅस का नतीजा क्या हुआ कि मैं अकेला राॅकी चीज से भरोसा उठ गया । क्या ऐसा था मुझे तो उसकी जरूरत थी तो वो मुझे समझ सकता हूँ मेरे को पढ सकता हूँ मैं तो जो बच्चों को सहारा देता हूँ मुझे अकेला ना होने देता हूँ था क्योंकि ऍफ नहीं था । ॅ खुद जिंदगी रॅायल नहीं था पर बताया खुद फॅमिली ही नहीं हूँ घर आया खुद जिंदगी है ना अध्यापक से मिली शिक्षा होने ॅ हो अब मंदिरों में सचिव घरवालों ने फॅमिली किताब होने है ये सबका सिंदगी का बच्चे सिखाया हो । इतना सब होने के बाद मुझको एक बात समझ में आ चुकी थी कि अगर जिंदगी में कुछ करना है और कुछ मकाम हासिल करना है तो सबसे पहले मुझे अपनी हकलाहट की समस्या को करना ही होगा । जब मैं कुछ पढा हुआ तो मेरे साथ साथ मेरी समस्या भी बडी होने लगे । इस समस्या के समाधान के लिए मेरे माता पिता ने कई डॉक्टरों से संपर्क किया और उनसे उसका इलाज करवाया । ऍम कुछ समय पैसे की बर्बादी साबित हुआ । जब मैं लगभग दस वर्ष का हुआ तब हमें अपने किसी रिश्तेदार के माध्यम से एक डॉक्टर के बारे में पता लगा है जो कि मेरे इस बीमारी का इलाज कर सकता था । हम हकलाहट की समस्या को एक भयंकर बीमारी समझते थे और इलाज के लिए डॉक्टरों से संपर्क करते है । मेरे माता पिता उस डॉक्टर के पास गए । डॉक्टर ने मुझे अच्छा किया और कुछ दवाइयाँ लिख देती हूँ । उनमें से ज्यादातर दवाइयाँ पीने वाली थी । ऍम तो महीनों तक उससे अपना इलाज करवाया परन्तु कोई भी वर्क नजर रही हूँ । ऍसे में डॉक्टर के पास करेंगे और उससे कहा देखिए ऍम अगर आपसे मेरे बेटे की बीमारी का इलाज नहीं हो पाता तो सीधा सीधा बोल दूँ ताकि हम इस बारे में किसी और दूसरे डॉक्टर से संपर्क कर सकें । नहीं ऐसी कोई बात नहीं है । आपके बेटे के इलाज की हर संभव कोशिश कर रहा हूँ । लेकिन फिर भी अगर आप किसी दूसरे डॉक्टर के पास जाना चाहते हैं तो जा सकते हैं । डॉक्टर ने जवाब दिया है, लेकिन आप इतने बडे डॉक्टर है । आपको अभी तक मेरे बेटे की बीमारी समझ में क्यों नहीं आ रही? बिठा जी ने कहा हूँ, जहाँ तक आपके बेटे की बीमारी को समझने की बात है, हिसाब से पहले शारीरिक रूप से काफी कमजोर है । इस वजह से उसने रुक रुककर बोलने की बीमारी हो सकती है । डॉक्टर ने कहा हूँ, आपके कहने का मतलब है कि हमें पहले उसके शारीरिक रूप से कमजोर होने का इलाज करना होगा । यानी अब हमें उसे मोटा करना होगा । प्रधान ही समझाते हैं, हमें पहले उसे मोटा होने की दवाइयाँ देनी होगी और जब हम मोटा यानी शारीरिक रूप से स्वस्थ हो जाएगा तो उसके रुक रुककर बोलने की बीमारी अपने आप ठीक हो जाएगी । डॉक्टर ने कहा, डॉक्टर की बात सुनकर पिता वहाँ से तो आ गए, लेकिन डॉक्टर द्वारा दी गई यह दलील उनके गले नहीं उतर रही थी तो बच पूरे तो उन्हें उसकी बात माननी पडी । इस बार डॉक्टर ने मुझे शाहिद को मोटा करने की दवाई जाती है और अगले एक महीने में हकलाहट की इस बीमारी को जड से खत्म करने का आश्वासन दिया हूँ । मेरे एक नहीं बल्कि दो महीनों तक उसकी दवाई खाई परन्तु मेरे हाथ में हर बार की तरह निराशा ही हाथ नहीं । हम सब उस डॉक्टर के पास दोबारा गए, मेरी बहन है, उससे शिकायती लहजे से बात की और कहा हूँ अभी आपके पास इलाज करवाते लगभग छह से सात महीने हो गए हैं और अभी तक कोई भी सुधार नहीं हुआ । यह गलत बात है । अगर आप कुछ नहीं कर सकते तो हमें मजबूरन किसी डॉक्टर की सलाह लेनी होगी । इसका सीधा मतलब था कि हम आप उसे इलाज कर पाना बंद कर रहे थे । डॉक्टर हमारी बात को समझ गया और मैं हमें किसी डॉक्टर के पास जाने नहीं देना चाहता था हूँ पता है उसने एक नई दलील दी । उसने कहा आपके बच्चे को किसी भी तरह की कोई भी बीमारी नहीं है क्योंकि यह अकेले में और आपके सामने ठीक तरह से बोल लेता है और किसी और के सामने और ज्यादातर स्कूल में ही बोलते समय लोग ज्यादा है तो यह संभव है कि आपका बच्चा छोड बोलता हूँ और आप सबके सामने ड्रामेबाजी करता हूँ हूँ । डॉक्टर की बातें सुनकर मैं काफी हैरान परेशान हो गया था । ऍम जिसके पास हम पूर्ण विश्वास करके आते हैं कि वह हमारी शारीरिक परेशानियों को दूर करेगा तो अपनी फीस बनाने के चक्कर में खाने पे मतलब की दबाव में उलझाता रहा हूँ और जो इतना पढा लिखा होने के बावजूद भी मेरी समस्या को समझ नहीं पा रहा हूँ । अपनी आगामी का सारा ठीकरा मेरे सर तोड रहा है । दूसरी तरफ मुझे डर इस बात का लग रहा था कि कहीं मेरे घर वाले उस डॉक्टर की बचकानी बातों को सच मानकर कहना समझ रही हूँ कि कहीं मैं सच में ड्रामेबाजी तो नहीं कर रहा हूँ । यहाँ कुछ बडी बडी बातें थी जो मेरे उस दस साल की आयु वाले छोटे से दिमाग में घर कर गई थी हूँ । अरे भाडा बढाने मेरे हकलाहट की समस्या से निजात पाने के हर संभव प्रयास की है परंतु सब व्यर्थ साबित हुए हैं । वो बहाने किसी पंडित के पास मेरी जन्मपत्रिका को दिखाया हूँ । पंडित ने अपने सुभाव अनुसार उनको फालतू के बहन में डालना शुरू कर दिया । पंडित ने मेरी समस्या को अपनी आजीविका का साधन बना लिया और वहाँ से बेफिजूल पैसे एंठने शुरू कर दी है । कभी वाॅच को कोई धागा गले में डालने के लिए दे देता तो कभी कोई अंगूठी उंगली में डालने के लिए दे देता है तो समस्या चुकी थी हो रही थी मतलब के हकलाहट की समस्या में कोई सुधार नजर नहीं आता । माँ डॉक्टर से तो शिकायत कर सकती थी परंतु अंधविश्वास और श्रद्धा के कारण उस पंडित से कैसे शिकायत करें । लिहाजा इस बारे में उन्होंने पंडित से बात करना अच्छा नहीं समझा । उधर मेरी समस्या क्योंकि देखो फिर बनी हुई थी । हमारी डॉक्टर इलाज तो प्यार साबित हुई थी और पंडित के बताएगा उसके भी कुछ खास चमत्कार नहीं कर सकें । एक दिन साहस बटोरकर माने पंडित से इस बारे में बात की तो उस पंडित ने उन्हें पिछले जन्म और ग्रह चक्रों की ऐसी दलीलें दी कि ऐसा लग रहा था कि बहनों जैसे मैंने इस दुनिया में पैदा होकर बहुत बडी गलती कर दी है । पंडित ने माँ को धार्मिक बातों का हवाला देकर तो चीन पद्धति से मेरा इलाज करवाने का दावा करते हुए उनसे इक्कीस सौ रुपए लिया और बदले में मंदिर से शंख देते हुए कहा कि जाओ और इस पवित्र शंक में रात के समय पानी डाल कर रखना और सुबह यहाँ पानी अपने बच्चे को पिला देना । कुछ सालों में यह बिल्कुल ठीक हो जाएगा, मारता ज्यादा करता है । इसलिए हम पंडित से बिना किसी बात पर बहस किए वहाँ से घर की ओर चल दिया और हमने पंडित के बताया तो उसके को अपनी दिनचर्या में शामिल कर दिया हूँ । मैं स्कूल की छुट्टियों में अक्सर अपनी मौसी के घर जाता था । मेरी बहुत सी का घर रम भी गांव में था, जो की हमारे शहर से काफी दूर था । इस ग्राम का नाम वहाँ रहते एक बंदा के नाम पर पढा था क्योंकि लगभग पंद्रह सौ साल पहले उस जगह पर आए और उन्होंने ही गाया है का बताया था । गांव में लोगों की मान्यता थी कि जब वह बाबा बोलते थे या प्रवचन करते थे तो उनके मुझसे फूल जाते थे । शायद इसीलिए उस जगह का नाम पंजाबी भाषा में धुलने वाला बाबा भी कहते थे । काम के लोगों के बीच उस बाधा की बहुत श्रद्धा थी । जिस स्थान पर मैं बाबा रह रहे थे, आज उस जगह पर गांव के लोगों ने विशाल मंदिर कमा स्थल का निर्माण करवाया है और आज उस बाबा के खेले उसके माता की पूजा करते हैं । गांव वालों की तरह मेरी मौसी का परिवार और मेरी मौसी के सर के मेरी माँ भी उस बाबा के मंदिर में जाया करती थी और सब गांव वालों की तर्ज पर उस बंदा की पूजा क्या करती थी । पर अब तो मेरा मन उस बाबा की पूजा करने को नहीं मानता था । ऐसा शायद इसलिए क्योंकि मेरी कुछ आदतें मेरे पिताजी पर गई थी । मेरे पिता जी अमर शहीद सरदार भगत सिंह और बाबा नानक के विचारों को बहुत मानते थे जिस वजह से मैं ऐसे पाखंडों को नहीं मानते थे । मेरे पिताजी का कहना था की अगर आप लोग भगवान को मानते हो तो एक इंसान जिसको की बनाने वाला भगवान है, किसी दूसरे इंसान की पूजा क्यों करें और बहन मेरी बात को अक्सर उस बाबा के अंदर जाने से रोका करते थे । जिस समय मैं अपनी मौसी के घर में गया था तो उस समय मेरी हकलाहट की समस्या अपने चरम सीमा पर थी और जब अपनी मौसी के घर में मैंने बातचीत करना शुरू किया तो मेरी मौसी के परिवार वालों से मेरी हकलाहट की समस्या छिपना सकी । यानी मेरी मौसी के घर के सभी सदस्यों को तेरी हकलाहट की समस्या के बारे में पता चल गया था । जिस वजह से मेरी मौसी की लडकी रिकी ने मेरी अगला हट की समस्या का मजाक बनाना शुरू कर दिया था । रिकी जो कि मुझे उम्र में बहुत बडी थी, मैं अपने काम के प्राइमरी स्कूल में छोटे बच्चों को पढाती थी । मेरी मौसी अक्सर रिक्की को मेरी हकलाहट का मजाक बनाने से रोक दी थी । एक दिन मेरी मौसी ने माँ को फोन किया कर कहा नमस्कार दीदी और चुनाव के हाल है तो दीदी आपसे बाहर पूछनी थी । ये चीज आपको क्या बीमारी हुई है? क्यूँ? क्यूँ मेरी बातें क्या बोलता कैसे? इसके मुझे तो आभासी नहीं निकलती । मौसी नहीं हूँ । अब हम क्या करें? क्या बचपन से ही ऐसे ही है? अब तो बहुत परेशान रहते हैं । इसके लिए कब हो गए? बडे डॉक्टरों को भी दिखा चुके हैं मानेका तो आप चिंता ना करें । मैं समझ गई हूँ । यह डॉक्टरों के बस की बात नहीं है । बाबा रंभ ईशा के मंदिर में से लेकर जाऊंगी । वहाँ उनके खेलों से चीज को की इस समस्या के समाधान के बारे में पता करेंगे । मौसी ने कहा, ये ठीक रहेगा । इसके बारे में जी को के पिता से बात मत करना क्योंकि वो इन चीजों पर बिल्कुल विश्वास नहीं करते हैं । मानेका दी रिया बेफिक्र रहे हैं । चीकू जैसे आपका बेटा है, वैसे ही मेरा बेटा है । मौसी ने कहा उसके बाद मेरी मौसी मेरी अगला हट की समस्या के समाधान के लिए मुझे उसी बाबा रब भी शाह के मंदिर ले जाती है । मंदिर बहुत बडा है और बहुत ही ज्यादा क्षेत्र में फैला हुआ था । पहली नजर में मुझे उस मंदिर का माहौल कुछ अजीब सा लगता है । उस मंदिर के एक तरफ उस तरफ भी शाह बाबा की बहुत सारी काल्पनिक तस्वीरें थी । मैं इन तस्वीरों को काल्पनिक इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि यह तस्वीरें गांव वालों के मुताबिक लगभग पंद्रह सौ साल पुरानी थी । इन तस्वीरों में बाबा के कई अलग अलग रूप दिखाए गए थे । उदाहरण के तौर पर उस बाधा का सिर्फ उसके घर से अलग हो जाना और उस अलग हुए सरकार किसी और अच्छे दूध पीना या फिर उस बंदा का शेयरों को पाल कर रखना और उन्हें शाकाहार भोजन जैसे घास फूस खिलाना आदि था और उस पादा के मुख्य तस्वीर एक अलग ही कहानी बयान करती थी । उस तस्वीर में वह बाबा एक विशाल खूंखार शेयर के ऊपर सवार होता है और जहरीले सातों को चाबुक के रूप में इस्तेमाल करके वहाँ के जानवारों को खदेड रहा होता है । गांव वालों के अनुसार जब वह बाबा इस जगह में दाखिल हुआ था तब यहाँ पर विशाल जंगल था और उस जंगल में कई प्रकार के खूंखार जानवर और आश्वस्त रहते थे । क्योंकि अक्सर इंसानों का शिकार करते थे । कहते हैं उन दिनों कई लोगों ने भगवान से कडी प्रार्थनाएं की जिसके फलस्वरूप स्वयं भगवान ने इस बाबा को यहाँ भेजा । यह बाबा एक शेर के ऊपर जवाहर होकर आए और अपने साथ लाए सांपों को चाबुक के रूप में इस्तेमाल करके सारे खूंखार जानवरों और राक्षसों को वहाँ से भगा दिया हूँ । इस बाबा के दूसरे नाम यानी भूला वाला के पीछे भी एक अलग ही कहानी थी । कहते हैं कि जब यहाँ बाबा प्रवचन करते होते थे तो उनके मुझसे खुल जाते थे । हाँ, मंदिर के आसपास फूल ही फूल बिखर जाते थे और लोग इन फूलों को प्रसाद के तौर पर अपने घर ले आती है । खैर मैं अपनी मौसी के साथ उस बाबा के मंदिर था । मेरी मौसी ने वहाँ बैठे एक दूसरे बाबा को मेरी हकलाहट की समस्या के बारे में बताया और उनसे मेरी समस्या के हल के बारे में पूछने लगे । वहाँ बैठे उस बाबा ने मेरी ओर देखा और मध्य कहा, इस बच्चे के माता पिता ने अपने पूर्वजों को नाराज किया है । उनकी नाराजगी के कारण ही इस बच्चे की यह हालत हुई है । मेरे कहने का मतलब है कि इस बच्चे के घर पे उसके पूर्वज जिनको हम आम बोल चाल की भाषा में जठेरे भी कहते हैं । उनका किसी ना किसी प्रकार से जाने अनजाने निरादर हुआ है । फॅमिली और देखते लगता है और मुझे कुछ सम्भाल पूछने लगता है तो उसने पूछा बेटा क्या तो रात को सपने में पानी दिखता है मैं उसकी इस बात का उत्तर देने में असमर्थता क्योंकि पहली बात तो सपने किसी को याद नहीं रहते हैं । और दूसरी बात अगर पानी दिखता भी है क्या? एक बात है इसलिए पहले तो मैंने कुछ भी नहीं कहा तो उस बाबा के तुम्हारा पहुंचने पर मेरे मजबूरन हमें अपना सारा हिला दिया । मेरे खास करते ही वह बाबा मेरी मौसी को कहने लगा । इस बच्चे को इसके पूर्वजों के दोष होने के साथ साथ जलपीर की समस्या भी है । मैं रानी से उस बाबा की ओर देखने लगा । मेरी मौसी ने उससे पूछा कि बाबा कहते जलपीर की समस्या क्या होती है तो मैं बाला कहने लगा जिस किसी शख्स को रात को सपने में पानी देखें, क्या कोई शख्स खुले पानी जैसे तालाब वगैरह में निर्वस्त्र होकर स्नान करें । उससे जलपीर हरी जल का देवता नाराज हो जाता है और उसे किसी ना किसी प्रकार का दंड जरूर देता है । इस लडके ने जाने अनजाने जरूर जलपीर को नाराज किया है जिसके अगला हट के रूप पर उसे इस जल पीसने सजा दी है । मेरी मासी हैरानी से मेरे और उस बाबा की तरफ देखने लग जाती है और मैं उस बाला से कहती है बाबा जी हम बनाते हैं हर या तो फिर भी बच्चा है । अब आपकी इस मुसीबत का कोई हल बताएँ, चिंता मत करूँ । आपकी हर प्रकार की मुसीबत के हाल के लिए काम है और फिर जो भी श्रद्धालु श्रद्धा के साथ हमारे यहाँ आता है और बाबा खुला वाला के मंदिर में ऐसा हो चुका है उसका कल्याण जरूर होता है । आने वाले अमावस्या में जब यहाँ बाबा जी का मेला लगता है तब आप इस बच्चे को इस मेले में लेकर हैं और बाबा जी का प्रसाद ग्रहण करवाएँ तो इस बच्चे की आवाज साधारण बच्चों के जैसे सफाई हो जाएगी । बाबा ने मेरी मौसी को कहा । दादा की बात सुनकर हम सब घर आ गए । घर आकर मेरी मौसी ने सारी बात मेरी माँ को फोन पर बताइए । जैसा कि अक्सर देखा गया है कि और देख फितरत से जरूरत से ज्यादा ही कुछ धार्मिक और अंधविश्वासी होती है । मेरी माँ मौसी की बात सुनकर कुछ कपडा जाती है और उसे कहने लगती है देखो बहन जी ये सब बातें ठीक ओके पिता को मत बताता हूँ क्योंकि वह बाबाजी के किसी भी बात पर विश्वास नहीं करेंगे । हर चीज को को तुम जानती ही हो । पहले अपने पिता की तरह बाबा के पास जाने से परहेज करेगा । इसलिए तो किसी ना किसी बहाने जी को को अमावस्या के दिन लगने वाले पहले में ले जाना और बाबा के कहे अनुसार उसका इलाज करना था । आप ठीक हो की फिकर बिल्कुल डर करूँ । मैं समय से बाबा के मंदिर में लगने वाले मेले में लेकर जाऊंगी और उसका इलाज करवा होंगे । आखिरकार थी को मेरा भी तो कुछ लगता है । मेरी मौसी ने मान को कहा कुछ दिनों के बाद अब से आते हैं और मुझे पता था कि मेरी मौसी मुझे उस बाबा के मंदिर में ले जाने वाली है । मेरा मन तो जाने के लिए रजामंद नहीं था परंतु मैं क्या जानना चाहता था कि आखिरकार वहाँ उस मंदिर के पहले में होता गया है क्योंकि मैंने बचपन से ही मंदिर के बारे में और वहाँ लगने वाले मेले के बारे में कई कहानियां सुनी थी । एक दिन मैं रिंकी मेरी मौसी की लडकी के कमरे में बैठा था । हम बाते कर रहे थे कि मैंने बातों बातों में उसे मंदिर और बाहर लगने वाले मेले के बारे में पूछा तो मेरी बात के जवाब में मैं कहने लगे जी को यह बहुत ही पुराना मंदिर है और दूर दूर तक इसकी मान्यता है और यहाँ लगने वाले मिला तो बहुत मशहूर है । दूर दूर से लोग इस मेले को देखने आते हैं । मिला दो तीन दिन तक चलता है । मेले में मनोरंजन के लिए झूले वगैरह भी लगते हैं कि हाँ लोग बकरे की बलि देते हैं और उस पकडे को वहाँ मौजूद खानसामा पकाते हैं और फिर शाम को प्रसाद के रूप में उस पके हुए पकडे को सब में बांटते हैं । कुछ लोग शराब वगैरह भी चलाते हैं जिसे बाद में लोगों में प्रसाद के तौर पर इसका सेवन करते हैं । पिंकी की बातें सुनकर मेरे मन में उस मेले में जाने की इच्छा होने लगी । कुछ दिनों के बाद मुझे पहले में जाने का अवसर मिला । मैं मेले में गया । मेले में पहुंचकर वहाँ के दृश्य देखकर मैं हैरान रह गया हूँ । वह मंदिर जहाँ पर मेला लगा हुआ था, बहुत ही बडे क्षेत्र में फैला हुआ था । मंदिर के एक तरफ बहुत बडा मैदान था जहाँ बच्चों और बडों के लिए झूले वगैरह लगे हुए थे । हम सब बहुत खुला लेने लग गए थे तो मेरा मन वह नहीं लग रहा था । मैं उस मंदिर को पूरी तरह से देखना चाहता था इसलिए मैं झूले वगैरह छोडकर मंदिर को देखने के लिए निकल पडा । मंदिर के स्थान पर कुछ करे रखे हुए थे । मैं वहाँ उनके पास जाकर खडा हो गया । तभी एक आदमी वहां आया और बकरों पैसे एक को खोलकर पास खडे दूसरे आदमी को दे दिया । दूसरे हाथ में उसे उस बकरे के पैसे देती है । मैं वहाँ खडा बहन मंजर देख रहा था । कुछ समय के बाद वह दूसरा आदमी अपने खरीदे हुए बकरे को वहाँ से कुछ दूर अपने परिवार के पास ले गया । वहाँ एक और आदमी जिसने कुछ धार्मिक कपडे पहने हुए थे उस पकडे की पूजा वगैरह करने लगा । मुझे समझने में देर नहीं लगी कि अब वह लोग उसकी बलि देने जा रहे हैं । वहीं सोच रहा था कि तभी मैं दो तीन आदमियों ने उस बकरे को कसकर पकड लिया । अभी भी आदमी जिसने धार्मिकता का चोला पहना हुआ था उस वक्त की ओर बढा और उसकी गर्दन पर एक धारदार चाकू, दमा चीज चलाने लगा जिससे बहुत बक रहा । काफी ठीक चला, हट मचाने लगा । पास खडा एक और आदमी कुछ बोल रहा था और धार्मिक होने वाला आदमी लगातार उसकी गर्दन पर जब कुछ चला रहा है, कुछ दस पकडे पर बहुत आ रही है क्योंकि बहुत धीरे धीरे मौत की ओर पड रहा था । मुझसे क्या द्रश्य देखा गया और मैं वहाँ से तुरंत घट गया । मैं अभी कुछ दूर की गया था कि वहाँ एक और बकरे को रस्सियों से बताओ पाया । मैं अपने सामने पडी हुई उस को कह रहा था देखते देखते हैं कुछ लोग उसके आस पास की घटना होना शुरू हो गए । कुछ ही समय में उसके आसपास भीड पडनी शुरू हो गए । तभी भीड में से काफी निकल कर उस बकरे के पास आया । उसके हाथ में बडी सी तलवार थी फॅार पर हाथ फेरा पर एकदम से उसकी गर्दन पर तलवार से पार कर दिया । एक ही झटके से उसमें करे की गर्दन उसके धड से अलग हो गए । मैं कुछ ही समय में तो पकडो की बहुत देख चुका था । बेशक दूसरे बकने की अपेक्षा पहले पकडे की बहुत ज्यादा तकलीफ देती है पर तो बहुत बहुत होती है चाहे वो धीरे धीरे हो या एक झटके में । मैं क्या सब और नहीं देख सकता था और वहाँ से आगे बढ गया । मैंने पूरा पंद्रह हो पूरा मंदिर खोलने के बाद मेरा तो दिमाग घूम रहा था क्योंकि वहाँ धार्मिकता नाम की कोई चीज नजर नहीं आ रही थी क्योंकि कोने में जहाँ बकरों की बलि देकर उन्हें पकाया जा रहा था तो वहीं दूसरे कोने में शराब को प्रसाद के रूप में खुले आम परोसा जा रहा था । बाबा के मंदिर के पास की जगह का मंजर तो बहुत ही बढिया था क्योंकि बलि चढाने के बाद लोग बकरों को उठाकर उस बाबा के पास ला रहे थे । वहाँ बहुत भीड होने के कारण लोग पकडो के खून से लगभग थे । उसकी बंदर के होने में बकरों के कटे हुए सर रखे हुए थे । कुछ समय के बाद मेरी बहुत ही नहीं मुझे आवाज दी । मैं मुझे लेकर एक बाबा के पास ले जाती हैं और उसे मेरी हकलाहट की समस्या के बारे में बताने लगती है । मैं आपको दोनों खातों से मेरे सर को पकडकर पहुँच जाता है और में कुछ मतलब अपना पडने लगता है । कुछ देर के बाद मैं अपने पास में रखें । एक दो बार चीज को मुझे देते हैं । हरी सब्जियों में डालकर जोर से सांस लेने के लिए कहते हैं । पहले तो मैं बना कर देता हूँ पर हम तो बहुत सी मुझे थप्पड दिखाकर जबर्दस्ती ऐसा करने के लिए कहती है । मौसी का तब पर देख कर डर जाता हूँ और उसको के को मुंबई डाल कर सांस खींचने लगता हूँ । अभी मैं दो तीन बार ही ऐसा करता हूँ की मेरा सर घूमने लगता है और मुझे चक्कर आने लगते हैं । बाबा जबरदस्ती मुझे दो बार ऐसा करने को कहता है । कुछ समय के बाद अचानक मैं बेहोश होने लगता हूँ ना वहाँ से भागने लगता हूँ । अभी एक अन्य बाबा मुझे पकडने की कोशिश करता है । मैं उस पर किसी चीज से जोरदार प्रहार करते वहाँ से भाग जाता हूँ । कुछ दूर जाने के बाद मैं जमीन पर गिर जाता हूँ । मेरे बेहोश होने के बाद लोग मेरे प्रतिकृत इकट्ठा हो जाते हैं । कुछ लोग मेरे ऊपर पानी डालते हैं जिससे मैं धीरे धीरे कोष में आने लगता हूँ । मुझे है सब कुछ अच्छा नहीं लगा और मैं मौसी को बोल कर घर वापस आ जाता हूँ । घर में मेरे मौसा जी अकेले बैठे हो गए थे । समझा के ले आते देखकर कहते हैं क्यों मीटर जी आ गई मेरा देख कर तो वहाँ चल दिया गया । क्या फिर तुम मेले में गई ही नहीं? नहीं मौसा ऐसी कोई बात नहीं । मैं पहले मैं गया था परंतु वहाँ का खिलाना मंजर देखकर मेरा दिल नहीं लगा । मैंने उनकी बात का जवाब दिया कितना बजट कैसा कितना बन जाए, क्यों भाई? ऐसा क्यों नहीं किया तुमने? मेरे मौसा जी ने पूछा । पहले तो मैंने मौसा जी की किसी बात का उत्तर नहीं दिया क्योंकि मेरे दिमाग में अभी भी उस बकरे की चीख पुकार गूंज रही थी । अभी भी मेरे जहन में बकरे के कटे हुए सिर और खुले आम परोसी जा रही शराब अभी भी ताजा थी जिस वजह से मैं वो था । मेरे मौसा जी बार बार मत पूछ रहे थे । वहाँ के माहौल के बारे में अपने माताजी को सब कुछ बता दिया । पिता जो तुम कह रहे हो बहस जबकि परन्तु यह सब धर्म कर्म का मामला है इसमें किन्तु परन्तु नहीं करते हैं । मौसा जी ने कहा ऐसा धर्म कर मौसा जी एक तरफ शराब पीने को पूरी चीज मना चाहता है और वहीं दूसरी ओर उसे बुरी चीज को धर्म कर्म के नाम पर सरेआम भरोसा जाता हैं । एक तरफ मंदिरों जैसी पवित्र जगह पर मास्टर टहलने जाना तो दूर, बहामास खाकर भी जाने की मनाही और वहीं पर पकडे जैसे बेजुबान जानवर की बलि देकर खुले आम उसके पास को वहीं मंदिर में पकाया जाता है । मेरे हिसाब से क्या जब धार्मिक लोगों के नुमाइंदे दिन को बाबा जी वगैरह कहते हो । आपके इस कार्यक्रम को अपनी जरूरत के हिसाब से तोडते मरोडते रहते हैं । पहले कुछ आवेश में आकर के कहा मेरी बातों का जवाब मौसा जी के पास नहीं था । शायद इसीलिए मैं चुप कर जाते हैं और तेरी सवालों का जवाब दिया, भगा रही वहाँ से चले जाते हैं । कुछ देर के बाद मौसी जी भी आ जाते हैं । उनके हाथ में बकरे का पका हुआ होता है जिसे मैं प्रसाद के तौर पर खाते हुए अपने आप को धन्य मान रहे होते हैं । कुछ देर के बाद मैं बीमार हो जाता हूँ और उल्टियाँ वगैरह करने लगता हूँ । मेरे मौसा जी तो हम अपने पडोसी डॉक्टर को बुलाकर लाते हैं । डॉक्टर आती है, मेरी जांच करना शुरू कर देता है । ये आपका रिश्ते में क्या लगता है? डॉक्टर मेरी मौसी से पूछता है जी मेरी बहन का बेटा क्यों? क्या बात हो गई भाई साहब मेरी मौसी ने जवाब दिया कुछ नहीं बहन जी, क्या ये नशा वगैरह भी करता है? डॉक्टर ने पूछा हमारे साथ ऐसी कोई बात नहीं है । मेरी मौसी ने जवाब दिया आपके इस लडके की प्राथमिक जांच से यह नतीजे सामने आ रहे हैं कि हो ना हो यह जरूर कोई ना कोई नशे वगैरह का सेवन करता होगा, जिसकी वजह से उसकी हालत खराब हो गई है । डॉक्टर ने कहा नहीं नहीं भाई, ऐसी कोई बात नहीं है । मैं तो उसने बाबा खुला वाला का प्रसाद खाया था । शहर दिया इसको पचा नहीं पाया । मौसी ने जवाब दिया कैसा प्रसाद? डॉक्टर ने हैरानी से पूछा वही आपके वाला प्रसाद मौसी ने कहा खुद के वाला प्रसाद हाँ फिर कर अब कहना चाहते हो । डॉक्टर ने पूछा वही असल में से हकलाहट की समस्या है और बस के इलाज के लिए इसे खुला वाला बाबा के मंदिर ले गई थी । बाहर बा बाजी ने इसे हुक्का पिला दिया जिस वजह से इस की ये हालत हो गई है । मौसी भी जवाब दिया क्या बात कर रहे हो । आपको पता भी है क्या क्या है अपने छोटे से मासूम बच्चे को चरस का नशा करवाया है । एक छोटे से बच्चे के शरीर पर चरस का नशा क्या असर करता है? क्या कुछ का जरा सा भी फिल्म है और फिर आपको किसने कहा कि खिलाडी की समस्या के इलाज के लिए इसे फूटता पिलाया जाए कि आपने किसी डॉक्टर की सलाह ही आप जैसे लोग पाता हूँ के चक्कर में पडकर अपना और अपने परिजनों का जीवन खतरे में डाल लेते हैं । आप पढे लिखे हो कर ऐसा करोगे तो बाकी लोगों से क्या उम्मीद की जा सकती है? डॉक्टर ने मेरी मौसी को डांटने के पैसे से कहा पर मैं तो उसके पहले के लिए ही इसे बाबा के पास लेकर गई थी । फिर मुझे क्या पता था कि वहाँ से चरस पिला दी जाएगी । मेरी मौसी ने कहा पहन जी आपके इस दुनिया में रह रही है, क्या आपको नहीं पता यह बाबाओं के डेरे वगैरह । यह सब अब नशा करने और नशा करवाने के अड्डे बन गए । इनमें आप पहले जैसी बात नहीं रही है । अब तो यह भक्ति की आड में आज के नौजवान पीढी को नशे की गर्त में धकेल रहे हैं और फिर जिस बाबा के मंदिर क्या बात कर रही है उस मंदिर में नशे का सेवन खुले आम होता है । खैर छोडिए इस बात को क्योंकि ये एक ऐसा विषय है जिस पर बात करना पाॅड क्योंकि कोई मेरी कही हुई बात को माने का नहीं और फिर या तो साडियाँ चला आ रहा है कि धर्म की आड में किया गया हर काम बिलकुल जायज होता है और कोई भी इसके ऊपर उंगली नहीं उठा कर चाहे वो कोई नशे का सेवन करना हो, मासूम मुकाबला आप कार करना हो या किसी जानवर क्या इंसान की बलि दे रहा हूँ उनके नाम पर सब जाए । सतीप्रथा, बाल विवाह, जोगनी जैसी सबको प्रभावित इसी की ही देन है । डॉक्टर ने कहा डॉक्टर ये ऐसा बोल कर चला गया और मौसी अपने काम में व्यस्त हो गए तो डॉक्टर की कही हुई बातों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया । उस की बांटने में रची बंद बदल कर रख दिया मैं किसी को मनगढंत यहाँ से भी सुनाई बातों पर विश्वास नहीं करते हुए हैं । उसको वैज्ञानिक नजरियों से सोचने लगा । कुल मिलाकर अगर संक्षेप में कहें तो मेरा अवैज्ञानिक बहनों से विश्वास उठ गया और हर में धक्के आधार में कहानी को तक की तरह के ऊपर बोल कर देखता हूँ कि क्या ऐसा हो सकता है? बेशक मेरी सी आदत की वजह से मुझे घर वालों से उनकी डाट का सामना करना पडता है परन्तु इस सब के बावजूद मेरी हकलाहट की समस्या स्तर थे । मैं और मेरे माता पिता मेरी इस समस्या को लेकर बहुत चिंतित फिर इसके इलाज के लिए हमने कई पापड बेले पर अब तो कोई फायदा नहीं हुआ । एक तरफ मेरी माँ आपकी धार्मिक प्रवृत्ति के चलते मेरी हकलाहट की समस्या के समाधान के लिए कई मंदिरों में जाकर मंगाते मामले लगी और दूसरी तरफ मेरे पिताजी और दादाजी डॉक्टरों के चक्कर लगाने लगे थे । मुझे किसी के पास मेरी समस्या का समाधान नहीं मिला, उदास और अकेला रहने लगा । मैं मायूस था और मेरी क्या हालत मेरे परिवार वालों से देखी नहीं जा रही थी । एक दिन मेरे दादा जी मेरे पास है और उन्होंने मुझसे कहा बेटा मैं तुम्हारी मानसिक दशा को समझ सकता हूँ परन्तु मैं मजबूर हूं कि मैं तेरी कुछ मदद नहीं कर पा रहा । ऍम तो आपने आता हूँ अपनी सोच सर, ऊंची रखो तो अपनी फॅमिली समस्या को अपनी कमजोरी मानते हो । ना तो मेरी बात याद है लेकिन तुम्हारी यही कमजोरी तुम्हारे सबसे बडी ताकत बनेगी । ऍम कहा मैं बिल्कुल सही था परन्तु मैं सब मेरी समझ के बाहर हूँ । उन्होंने कहा है और दादा जी लोग जब मेरी समस्या का मजाक बनाते है तो मुझे बहुत गुस्सा आता है । मिला दिल करता है कि मैं उन्हें जान से बाहर हूँ हूँ । जब तुम्हारी हकलाहट की समस्या का कोई मजाक बनाता है तो उस पर वो चाहता है तो उससे को पालना सीखो हूँ । ये बहुत ही काम की चीज हो तो बाहर आई है । पाला हुआ गुस्सा भविष्य में तुम्हारे मकसद को कामयाब करने में सहायक होगा हूँ तो मैं भी एक सामान्य कोयले के समान हूँ ही ना । पालने के लिए तो समाज के उपहास का दबाव सहन करना ही होगा । दादा जी की कही हुई बातें उस समय तो मेरी समझ के बाहर भी तो उनकी कहीं बातों के मतलब को समझने के लिए मुझे बहुत अच्छा लगा परंतु मैंने दादा जी की उन बातों की सुनहरी यादों में सब जो कर रखा है । मैं पढाई में काफी होशियार था परन्तु बोलने में कुछ समस्या होने के कारण भी कुछ काम जैसे किताब को पढना, अध्यापक द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देना, अपने खादरी को बोलना आदि यह सब नहीं कर सकता था और इस बात से मेरे सब अध्यापक भलीभांति परिचित थे इसलिए वह सब मेरी पढाई में मेरा साथ दे देते हैं जिस कारण मैं अपनी कक्षा में सदैव पहले स्थान पर रहता हूँ । मैं सबका चहेता विद्यार्थी बन गया था अपना पढाई में सब विषय में सबसे आगे था । पर अब तो सबसे ज्यादा आगे मैं हिसाब के विषय में था । इसका कारण शायद क्या पता की हिसाब के विषय में मुझे कम बोलना पडता था । स्कूल के इम्तिहानों के समय की बात है । एक दिन हिसाब का रिहान था । इस आपके प्रश्न पत्र में कुल तेईस सवाल लिखे हुए थे जिनमें से उसे कोई बीस सवालों को हल करना था । परंतु मैंने पूरे के तेईस सवाल हल कर दिए और अंत में लिख दिया की कोई बीस सवाल चेक कर लो और अपनी उत्तरपुस्तिका अध्यापिका को दे दी । अध्यापिका मेरी इस हरकत से काफी प्रभावित हुई और उन्होंने यह बाद मुख्य अध्यापिका को बताई । मुख्य अध्यापिका ने मुझे अपने पास बुलाया हूँ और मजाकिया लहजे में मुझको उन्हें आपका विषय पढाने की पेशकश की और अगले दिन पूरे स्कूल के सामने मेरी तारीफ की । मेरी स्कूल की जिंदगी काफी मजे से कटनी लगी । नहीं मुझे अपनी हकलाहट की समस्या के अलावा किसी बात की फिक्र नहीं थी । अब मेरी आठवीं कक्षा की परीक्षा शुरू होने वाली थी जिस कारण मैं आपकी परीक्षा की तैयारियों में जी जान से जुट गया हूँ । मैं पडने में पहले से ही होशियार था । अजय में आठवीं की परीक्षा को अपनी कक्षा में पहले स्थान से पास कर लेता हूँ । मेरा स्कूल आठवीं कक्षा नहीं हूँ । आगे की पढाई के लिए मुझे किसी दूसरे स्कूल में जाना था और दूसरे स्कूल में मुझे कैसा माहौल मिलेगा? शहद मुझे इस बात का अंदाजा नहीं । दूसरा स्कूल मेरे लिए नया था । वहाँ के अध्यापक नहीं थे । वहाँ के समय पार्टी मेरे लिए नाइट है वैसा मेरी हकलाहट की समस्या से अंजाम थे नहीं । स्कूल की नई कक्षा में मैं कुछ अच्छा महसूस नहीं करता हूँ । मैं इस डर से भलीभांति परिचित था कि जब मेरे सहभागियों को पता चलेगा कि मैं हकलाकर बात करता हूँ तो बहस अब मेरा क्या हाल करेंगे और मुझे चढाने के लिए किस नाम से पुकारेंगे । यह सब बातें सोच कर मैं काफी डर जाता हूँ और आखिरकार होता वही है जिस बात से मुझे डर लग रहा था । नई कक्षा में मेरी पढाई शुरू हो जाती है और मैं पहले दिन अपने नए स्कूल में जाता हूँ । मैं अपनी कक्षा में जाता हूँ । मेरी अध्यापिका कक्षा में आती है और सब नहीं बच्चों से उनका परिचय लेती है । सब बडे आराम से अपने बारे में बता रहे होते हैं । मैं यह सब देखकर काफी डर जाता हूँ । मैं इस बात का की जब परिचय देने की मेरी बारी आएगी तो अपना परीक्षा कैसे दूंगा । मुझे पूरा यकीन था कि मैं उन सबके सामने बोलते हुए हकला जाऊंगा और हर बार की तरह इस बार भी मेरा खूब मजाक बनाया जाएगा । मैं सब सोच रहा था कि तभी अध्यापिका ने मेरी और इशारा किया और मुझे अपना परिचय देने के लिए कहा । मैं परिचय लेने के लिए खडा होता हूँ पर कुछ बोल नहीं पाता हूँ । अध्यापिका मुझे बार बार अपना परीजा बनाने के लिए बोलती है । काफी जद्दोजहद के बाद मैं कुछ चलाते हुए अपना नाम बोल पाता हूँ । मेरा इस तरह का परिचय सुनकर सारी कक्षा मुझ पर हसते लग जाती है । यही नहीं अध्यापिका भी अपनी हंसी नहीं रोक सके और वह भी बाकी सब पार्टियों के साथ कुछ पर हसते लगी । फॅमिली दिनों तक चलता रहा क्योंकि मेरे नई स्कूल में अलग अलग विषय के लिए अलग अलग अध्यापक थे जिस कारण मुझे हर अध्यापक के सामने अपना परिचय देना पडता है और हर बार मुझे पूरी कक्षा के सामने वही साडी का सामना करना पडता है जिस वजह से मुझे अपने हकलाहट की दम घुटने वाली जिंदगी जेल में बंद कैदी के समान महसूस होने लगी थी । दसवीं कक्षा के बाद आगे की पढाई के लिए मुझे कॉलेज में जा रहा था और कॉलेज के माहौल के बारे में सोच सोच करें । मैं डर जाता था मुझे डर लगता था कि मेरी हकलाहट की समस्या और मेरे पतले शरीर का वहाँ कॉलेज में ऍम पार्टी कैसा कैसा मजाक बनाएंगे । फिर शरीर के पतलेपन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब मैं दसवीं कक्षा में पढ रहा था तब मेरे शरीर का वजन मात्र तीस किलो के आस पास का मैं इस बात से भलीभांति परिचित हो गया था कि मैं अपनी खिलाड की समस्या को तो हाल नहीं कर सकता लेकिन अपने शरीर के वजन का तो बढा सकता हूँ । कॉलेज में कम बोल कर जैसे तैसे अपनी हकलाहट की समस्या को छुपा हूँ परन्तु मैं अपने इस पतले शरीर को छुपा नहीं पाऊंगा क्योंकि आपके पतले शरीर से कॉलेज में पढने वाला विद्यार्थी नहीं बल्कि चौथी पांचवीं कक्षा में पढने वाला कोई छोटा सा बच्चा लगता था । अब वक्त था जब मुझे अपने शरीर के वजन के प्रति कुछ सोचना हूँ क्योंकि मेरी परीक्षा का परिणाम आने में अभी दो महीनों का समय बाकी था । यानी मेरे पास दो महीनों का समय खाली था और इस दौरान मैंने अपने शरीर को मोटा करने के लिए कई डॉक्टरों से संपर्क किया और उनसे कई तरह की दवाइयां भी खाई परन्तु सब बेकार साबित हुई है । उन सब दवाइयों से मेरे शरीर में तो पडता था तो तब तक जब तक कि मैं उन दवाइयों का सेवन कर रहा हूँ । मेरी जब मैं उन दवाइयों का सेवन करना बंद कर देता था, तब मेरा शरीर घर से अपनी पहली स्थिति में आ जाता था । इस सबसे थक हारकर मैंने दवाइयों का सहारा नहीं लेने का निश्चय किया और अपनी खुराक और व्यायाम पर ध्यान देने का निश्चय किया । इसके लिए मैंने एक व्यायामशाला में दाखिला लिया । उस व्यायामशाला का माहौल मेरे लिया गया था क्योंकि मैं पहली बार बाहर गया था । वहाँ के लोग मेरे पतले शरीर का मजाक बनाने लगे थे तो उनमें से एक तो नहीं तो अभी कर दी थी । मुझ को उठाकर व्यायाम करने लग पडे थे । मैं वहां से भागकर घर वापस आ गया और यह निश्चय किया कि मैं तो बारह कभी भी वहाँ नहीं जाऊंगा परन्तु के सब के बावजूद में अब व्यायाम करना छोडना नहीं चाहता था । पर तो मैं कहीं बाहर जाना नहीं चाहता था और इसका एक ही विकल्प था कि मैं घर में ही है इसका इंतजाम करूँ । ऍम करने का जो सामान था काफी महंगा था उसे खरीद पाना मेरे बस में नहीं था । कहते हैं जहाँ चाहा होती है वहाँ कोई ना कोई रहा अवश्य होती है । मुझे इसका भी आज ढूंढ लिया था । हमारे घर की छत पर एक कमरा था हूँ जहाँ कोई आता जाता नहीं हूँ । मैं कमरा ऍम के लिए चुन लिया । मैं वहाँ ईटों और घर में रखी बेकार लोहे की पाइप की सहायता से व्यायाम करना शुरू कर देता था । परंतु बिना किसी गुरु की देख रेख से मैं अक्सर गलत बयान करता था जिससे मैं अक्सर गलत व्यायाम करता था । खैर समय बीतता गया और दो महीने कब बीते पता ही नहीं चला हूँ । अगले दिन मुझे आगे की पढाई के लिए कॉलेज में जाना था । कॉलेज की पढाई मैं कॉमर्स विषय के साथ करने लगता हूँ । इसका एक कारण यह था कि मुझे भविष्य में वकील का पेशाब करना था और दूसरा कारण यह था कि मैं करीब के विषय में काफी अच्छा था जिस कारण मुझे यह की ताकि मैं कॉमर्स के विषय में आसानी से पास हो जाऊंगा । मैं पहले दिन कॉलेज में जाता हूँ तो कॉलेज का माहौल मेरी उम्मीद से कहीं ज्यादा खराब था । स्कूल में तो सुबह एक ही बार में हाजिरी लगती थी, जिसे मैं जैसे तैसे बोलने का था । तो इसके उलट कॉलेज में हर विषय की अलग अलग प्रोफेसर था और हर प्रोफेसर का अपना अलग से हाजिरी रजिस्टर होता था और हर प्रोफेसर अपनी अलग से हाजिरी थी । लगता था मतलब ये है की मेरी कक्षा में हाजिरी अब हर चालीस मिनट के अंतराल के बाद लगनी शुरू हो गई थी और हर बार में अपनी हकलाहट की समस्या के कारण हाजिरी बोल नहीं पाता था, जिससे हर बार मेरी इस परिस्थिति का मजाक उडाया जाने लगा था । मेरी कक्षा में कुछ सहपाठी मुझे बहुत ज्यादा तंग करने लग गए थे । नतीजा यह हुआ कि मैं कक्षा में जाने से कतराने लगा था और ज्यादातर समय कॉलेज के मैदान में बताने लगा जिसका नतीजा यह हुआ कि मैं पढाई में पीछे पडने लगा । उधर कॉलेज की छमाही परीक्षा शुरू होने वाली थी । मैं कर रहा था की मैं छमाही परीक्षा की तैयारी कैसे करूँगा क्योंकि कक्षा में कम हाजिरी होने की वजह से मैं पढाई में काफी पिछड गया था परंतु समय को कोई भी बांध नहीं सकता हूँ । मेरी छमाही परीक्षा शुरू हो गई थी और उस परीक्षा में मैं फेल हो जाता हूँ । पहले निश्चय किया कि मैं इस परीक्षा के परिणाम के बारे में घर पर बताऊंगा ही नहीं और अगर कोई बच्चे इस बारे में कुछ पूछेगा तो मैं छोड बोल दूंगा कि मैं परीक्षा में पास हो के हूँ परन्तु में कॉलेज की कार्यकारिणी के बारे में नहीं जानता था जिसके अनुसार हर परीक्षा का परिणाम डाक के जरिए घर पहुंचाया जाता है । पिताजी ने उस डाक के जरिए मिले परिणाम को पढकर का यह क्या काम तो कहते थे कि तुम परीक्षा में पास हो गए हो । हाँ पिताजी में पास हो गया हूँ । मैंने नहीं चलाते हुए कहा है लेकिन क्या है क्या है इसमें तो लिखा है कि तुम फेल हो गए हो । पिताजी ने डाक द्वारा प्राप्त होगा परिणाम की तरफ इशारा करते हुए कहा, पिताजी है किसी और का परिणाम हो सकता है । मैं करते हुए कहा किसी और के परिणाम से तुम्हारा क्या मतलब है? गैस पर तुम्हारा नाम और हमारे घर का पता नहीं लिखा है तथा जीत जाते हुए कहा था मेरा मतलब नाम और पता मेरा ही है । मैंने कहा तो फिर उन ॅ बताओ क्या है तो भरा ही परिणाम हो । पिताजी ने कहा पिताजी यह मेरा ही परिणाम बने । बात को ज्यादा ना बढाते हुए छत से सब सच कह दिया । इसके बाद मुझे बहुत देर तक तथा जी की डांट का सामना करना पडा । मेरे घर वाले सोचते थे कि मैं पढाई न करने के कारण फेल हो गया हूँ परन्तु यह कभी भी नहीं सोच सकते हैं कि इसके पीछे असल कारण क्या था । ऍम तो तक जैसे तैसे पास कर लेता हूँ और हम तो अकाउंट के उस विषय में फेल हो जाता हूँ । मेरे घर वाले आगे की मेरी पढाई कॉलेज पैदा कराते हुए किसी स्कूल में कराने का फैसला लेते हैं और इसके लिए मैं शहर के किसी नीजी स्कूल में दाखिल हो जाता हूँ । स्कूल में कॉमर्स के विषय रखकर दाखिला ले लेता हूँ । कॉमर्स के विषय में मेरी कक्षा में केवल दस विद्यार्थी थी । मैं पहले दिन स्कूल में जाता हूँ तो अध्यापक सब विद्यार्थियों से उनका नाम और भविष्य की उनकी योजनाओं के बारे में पूछने लगे क्योंकि बारहवीं कक्षा के बाद तो भविष्य के बारे में सोचने का समय होता है । अध्यापक के पूछने पर सभी ने कुछ न कुछ बोला, कोई सीए बनना चाहता था तो कोई ऍम । जब मुझसे पूछा गया तो मैंने हटवाते हुए जवाब दिया की मैं वकील बनना चाहता हूँ जिसके लिए मैं एलएलपी करना चाहता हूँ । मेरी बात सुनकर अध्यापक सफेद सबसे द्यार्थी खस पडते हैं । तेरे वकील बनने की बात ही नहीं बल्कि इस बात को मैं चलाते हुए कहता हूँ इस बात पर समझने लग पडते हैं । अध्यापक के चले जाने के बाद कुछ विद्यार्थी पीढी बात का मजाक बना लेते हैं और नकल कारकर मेरी हकलाहट का मजाक बनाने लग जाते हैं । कुछ पार्टी अपने अभिनय के द्वारा यहाँ बताते हैं कि भविष्य में जब मैं एलएलबी करके वकील बन जाऊंगा तो मैं चलाते हुए अपना केस कैसे लडूंगा । जिससे मुझे पूरी कक्षा के सामने बहुत बेइज्जती का सामना करना पडता है । उस दिन से मेरे सहपाठी मुझे चढाने के लिए मुझे एलएलपी के नाम से पुकारने लगते हैं और कुछ ही दिनों में यह नाम इतना पक जाता है कि पूरे स्कूल में कोई भी मेरे असली नाम अनिल के नाम से नहीं जानता था । सब मुझे एलएलबी के नाम से जाने लगे थे ।

Details
The tale of a troubled kid dealing with his problem of stammering, but possessing abnormally superior brain power. Voiceover Artist : RJ Manish Author : Rohit Verma Author : Rohit Verma Rimpu Producer : Saransh Studios Voiceover Artist : Manish Singhal
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