Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

भाग 04

Share Kukufm
 भाग 04 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
45 KListens
‘कहानी एक आई.ए.एस. परीक्षा की’ में पच्चीस साल का विष्णु अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और भ्रम से बाहर निकलने तथा शालिनी को शादी के लिए मनाने के तरीके ढूँढ़ता है। हालात तब और भी दिलचस्प, हास्यास्पद और भावुक हो जाते हैं, जब विष्णु ‘माउंट IAS’ पर विजय पाने निकल पड़ता है। अपनी पढ़ाई और अपने प्यार को जब वह सुरक्षित दिशा में ले जा रहा होता है, तब उसे IAS कोचिंग सेंटरों की दुनिया में छिपने का ठिकाना मिल जाता है। क्या शालिनी अपने सबसे अच्छे दोस्त के प्यार को कबूल करेगी? क्या विष्णु असफलता की अपनी भावना से उबर पाएगा? क्या हमेशा के लिए सबकुछ ठीक हो जाएगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी।
Read More
Transcript
View transcript

बहुत चार में लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल को पूर्व बंगाल और पश्चिम बंगाल में विभक्त कर दिया गया । गीता यादव लेक्चर दे रही थी ये चीजें आप लोगों को इतनी अच्छी तरह याद होनी चाहिए कि आप पूछे जाने पर नींद में भी जवाब दे पाएँ । दे पाएंगे जी । मैं पूरी क्लास ने स्कूल के आज्ञाकारी छोटे बच्चों की तरह से दिला दिया । विष्णु, विनोद और अशोक उस दिन दूसरी पंक्ति में खिडकी के पास बैठे थे । प्लीज क्या तुम इस तरफ आ जाएंगे? विनोद ने विष्णु से सीट बदलते हुए पूछा, हाँ तुम जानते हो ये खिडकी के पास क्यों बैठना चाहता है? अशोक ऐसा नहीं विश्व में जवाब दिया नीना को देखने के लिए जो बदल की बिल्डिंग में सुपर बेस्ट कोचिंग सेंटर की अपनी क्लास में बैठी है । यह हर क्लास में यही करता आ रहा है लगभग एक साल से वो । लेकिन उस दिन तो तुम लोग आखिरी पंक्ति में बैठे थे क्योंकि उस दिन नीना भी आखिरी पंक्ति में बैठी थी । बहुत बढिया उसे अपना काम जारी रखने दो । विष्णु ने कक्षा में वापस ध्यान केंद्रित करते हुए कहा । जल्दी ही श्रीमती गीता ने अपने सामान्य अध्ययन और लोग प्रशासन की ब्लॅक रिक्शाएं समाप्त कर दी । मैं तुम दोनों के साथ आकर पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के तुम्हारे पिछले साल के क्लास नोट ले लेता हूँ । विष्णु विनोद से कहा, वेलकम भाई, अशोक मैम से आपने डाउट पूछ ले तो चलते हैं । विनोद ने कहा, आधे घंटे बाद तीनों विनोद और अशोक के हॉस्टल की ओर चल दी है, जो पास में ही था । रास्ते में वे कृष्णा तीस साल पर जो लोहियानगर के उम्मीदवारों के बीच दस गौर से भाव यानी कि गपशप का अड्डा के नाम से लोकप्रिय था । अदरक वाली चाय पीने के लिए रुके कॅाल सडक के किनारे की थेट चाय की दुकान के सारे मिथक तोडना था । वहाँ तो क्षेत्रीय भाषाओं के समाचार पत्र रखे थे । ना ही चारों और बी ग्रेड अभिनेत्रियों की तस्वीरें लगी थी, बल्कि वहाँ परीक्षा उन्मुख मौजूदा मामलों की पत्रिका रखी थी और विश्व और भारत के नक्से लगे हुए थे । स्पष्ट रूप से अपने लक्षित ग्राहकों का संकेत देते हुए लोहियानगर में सभी कोचिंग सेंटर परीक्षाओं के प्रश्न पत्र अपने सेंटर पहुंचने से पहले कृष्णा टी स्टाल पहुंचते हैं । अशोक ने बताया, ग्रेट माइंड्स के भी विष्णु ने पूछा और तभी एक उम्मीदवार ने इस्टॉल में प्रवेश किया और कहा तो रचना भैया दो कप चाय और एक गोल का पेपर । उसकी बात सुनकर अशोक के मुझे उसकी जाए निकलते निकलते रह गई । नहीं गीता मैं बहुत सकते हैं । वह सुनिश्चित करती है कि प्रश्नपत्र उनके घर में छपे और खुद ही उन्हें सेंट्रल लेकर आए हैं । जीता मैं एक अच्छी बोर्डिंग स्कूल की वॉर्डन बन सकती थी । विश्व टिप्पणी हाँ, लेकिन वे अपने काम में अच्छी है । विनोद ने बीच में कहा, हाँ, यह तो मैं देख सकता हूँ । अब तो मुझे नींद की कहानी बताओ । विश्व में मांग की । हाँ अरे वाह! कुछ नहीं, बस एक तरफ है । विनोद शर्मा गया । एक तरफ आ गया ॅ मैं उसका वर्णन नहीं कर सकता । विनोद ने कहना शुरू किया कि अशोक ने उसे टोक दिया । लोग यहाँ टूटा । रेडियो फिर शुरू हो गया । उसमें शिकायत की क्योंकि उसे अदरक वाली चाय और विनोद की प्रेम कहानी की आदत पडती जा रही थी । यदि तुम्हें कोई पसंद है तो जाकर उसे कहा क्यों नहीं देते हैं? बात उसे बताने की नहीं है । हमारी परीक्षा की तैयारी का क्या हम अपने जीवन में इतने महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं तो मैं नहीं लगता कि इस समय एक संबंध समय की बर्बादी होगा । हाँ, तैयारी महत्वपूर्ण है, लेकिन वहाँ तुम्हारा जीवन नहीं है तो दो साल से तैयारी कर रहे हो और भगवान जानता है भविष्य में क्या है और तुम क्या बन हो गए? इस बात को ध्यान में रखते हुए तुम जीवन में और चीजों से दूर नहीं रह सकते । जिंदगी किसी का इंतजार नहीं करती, इसलिए बस वही करो जो तुम्हारा दिल चाहता है, जब तक की वह नैतिक रूप से सही हो और किसी को तकलीफ न दें । हाँ, मैं विष्णु से सहमत हूँ । अदरक वाली चाय और प्यार को किसी का इंतजार नहीं करना चाहिए । अशोक ने चुटकीली मुझे लगता था कि क्लास खत्म हो चुकी है । विनोद ने व्यंग्यात्मक स्वर में टिप्पणी की, अच्छा मेरे बात सुनो । बस जाकर नीना को बता दो कि तुम्हारे मन में उसके लिए भावनाएं हैं । विश्व में कहा हाँ जज ट्वीट बस कल डालो । अशोक ने नाइकी के लोगों की और इशारा करते हुए कहा, ठीक है दोस्तों, मैं तुम्हारे बात मान लेता हूँ । मैं जल्दी ही उससे बात करूंगा । विनोद ने अशोक और विष्णु को हाई फाइव देते हुए घोषणा की । कुछ ही देर में उन्होंने विनोद और अशोक के हॉस्टल में प्रवेश किया । वहाँ देखो अशोक में हॉस्टल के ठीक सामने गणेश जी की मूर्ति की और इशारा किया तो गणेश जी मेरे प्रिय भगवान विष्णु ने टिप्पणी की, ये केवल गणेश जी नहीं है । ये यूपीएससी गणेश हैं तो उन्हें रिजल्ट्स के दिन यहाँ कर देखना चाहिए । यह पूरी जगह ठसाठस भरी होगी । गणेश जी को विशेष प्रश्नपत्र मालाएं मिलेंगी । मैं अगर वहाँ मजेदार दृश्य देखना चाहूंगा, चला अंदर चले विनोद ने पुकारा । उनका कमरा प्रथम तल पर था । विष्णु को अंदर जाने के लिए झुकना पडा जैसे कि वहाँ किसी इग्लू में प्रवेश कर रहा हूँ । विष्णु को लगता था कि उसने शालिनी के क्यूबिकल से छोटी कोई रहने की जगह नहीं देखी थी । लेकिन जब उसने अपने दोस्तों के कमरे में प्रवेश किया तो उसे एहसास हुआ कि वह गलत था । वह अभी भी दुविधा में था कि वहां उनके रहने की जगह थी या उनके स्टोररूम, क्योंकि उन्हें उपलब्ध वहाँ छोटी से जगह भी किताबों से अटी पडी थी । यह तुम्हारा स्टोर रूम में विष्णु ने पूछा नहीं विष्णु हमारे लिए यही कमरा उपलब्ध है । यहाँ कमरा हम दोनों के रहने के लिए है । लेकिन हम इसे अपने किताबें रखने के लिए और कपडे बदलने के लिए इस्तेमाल करते हैं । हम ज्यादातर समय टेरिस पर बताते हैं । अशोक ने कहा असल में हॉस्टल के वार्डन नहीं, यह कमरा हम तीन लोगों को दिया था मुझे, अशोक को और बाबू को । लेकिन अब यहाँ हम दोनों ही रहते हैं । विनोद ने बताया क्यों? उस तीसरे लडके बाबू को क्या हुआ? विश्व ने पूछा वहाँ यहाँ नहीं है बाबू बहुत बुद्धिमान लडका था । वहाँ हॉस्टल के सबसे प्रतिभाशाली उम्मीदवारों में से एक था । उसका कौशल । पूरे लोहिया नगर के सिविल सेवा तैयारी करने वालों के सर्किल में जाना जाता था । वह हमारे कोचिंग सेंटर में पडता था और गीता में हमको पूरा विश्वास था कि वह सफल होगा । विनोद ने धीमी आवाज में कहा, फिर क्या हुआ? वह किस सर्विस में हैं? विष्णु पूछा, किसी में नहीं । वहाँ परीक्षा में सफल नहीं हुआ । एक बार, दो बार और तीन बार वहाँ अंतिम बार था । जब हमने उसे देखा था, उसके तीसरे प्रयास के परिणामों के बाद वहाँ कहीं दिखाई नहीं दिया । विनोद ने धीमे स्वर में कहा था, मुझे याद है मैंने उसे परिणाम वाले दिन कोचिंग सेंटर में देखा था । मैंने ग्रेट माइंड्स में दाखिला लिया ही था । जब परिणाम घोषित हुए तब बाबू गीता मेम के कमरे में था । उसी समय उसे फोन आया कि उसके माता पिता और छोटा भाई जो झारखंड में रहते थे, एक कार एक्सीडेंट में मारे गए थे । पहले परिणाम आए फिर या फोन कॉल । यह सब सुनकर बाबू बिल्कुल पत्थर हो गया । उसकी आंखों से एक भी आंसू नहीं निकला, लेकिन वहाँ लगभग एक घंटे तक पूरी तरह अस्त व्यस्त दिख रहा था । उसके आस पास के लोग उसे सांत्वना दे रहे थे । लेकिन उस समय यह भी पता लगाना मुश्किल था कि वह जिंदा था या मर गया था । अशोक ने परेशान सफर में कहा, हाँ, उस दिन मैं भी था वह मुझे भी वे आखिर याद है । भूतियां शब्द उन का वर्णन करने के लिए बहुत हल्का है । गीता मैं मुझे सामान्य करने की पूरी कोशिश कर रही थी । उसे यह कहते हुए सांत्वना दे रही थी कि वे सभी उसके लिए परिवार जैसे थे और उसके पास अभी एक और मौका था, लेकिन वहाँ छुप था और बहुत चक्कर ऐसा लग रहा था । विनोद ने डरे हुए स्वर में कहा, जैसे वहाँ किसी डरावने उपन्यास का अंतिम अध्याय सुना रहा हूँ, वहाँ कुछ बोला नहीं । कम से कम जीता मेंसे विष्णु ने पूछा, कुछ भी नहीं, बस एक घंटे बाद खडा हुआ और चला गया । अशोक ने कहा, उसके बाद वहाँ कमरे में भी नहीं आया और कहीं भी दिखाई नहीं दिया । किसी को उसके गृहनगर का पता नहीं मालूम था और कुछ दोस्त जिन्होंने उसे संपर्क करने की कोशिश की, सफल नहीं हुए । विनोद ने कहा, तो कितना दुर्भाग्यपूर्ण है । बहुत दुःख हुआ । सुन कर उम्मीद है उसने कोई बेवकूफी नहीं की होगी । विष्णु ने दुःख के साथ बाबू विनोद और अशोक की एक तस्वीर को देखते हुए कहा, जिसमें तीनों ने चेन्नई सुपर किंग्स की टी शर्ट पहनी हुई थी, यहाँ आईपीएल के उद्घाटन से पहले की है । हमने एक रेडियो स्टेशन की स्लोगन प्रतियोगिता में मैच के टिकटों के साथ तीन सीएसके टीशर्ट जीती थी । हमने एक दूसरे की शर्ट पर ऑटोग्राफ दिए और मैच देखने चले गए । कितने मजेदार दिन थे हुए विनोद फॅमिली में चला गया हूँ के दोस्तों अब उसके बारे में बात करने का कोई फायदा नहीं है । चलो ऊपर आपने स्टडी हॉल में चलते हैं । अशोक ने सुझाव दिया उनका स्टडी हॉल हॉस्टल के ऊपर एक बडी सी छत था । जगह साफ और बहुत हरी भरी थी और लगाऊ बेलों अन्य घरेलू पौधों से भरी थी । एक कोने में छोटा सा टाइम था जो केवल ऊपर से ढका हुआ था । जमीन पर दो गद्दे बिछा हुए थे और उनके बीच में एक टेबल फैन था । वृद्धों के पीछे छोटा सा बुक रहे दो फोल्डिंग कुर्सियां और पानी से भरा एक मटका था । इस जगह में बहुत ताजगी है । विष्णु ने कहा, खाना बहुत शानदार नहीं है लेकिन शांति से बैठ कर पढने के लिए छोटी सी साफ सुथरी जगह है । जैसे ही सूरज डूबता है लोग यहाँ से निकलना शुरू कर देते हैं क्योंकि हमारे छोटे से टैंड के अलावा यहाँ कहीं रोशनी नहीं है । यहाँ विचार अशोक को ही आया और उसी ने यहाँ टैलेंट बनाया है । इसलिए हम इसे अशोक पैराडाइस कहते हैं । विनोद ने मुस्कुराकर कहा जबकि अशोक विष्णु के मांगे हुए क्लास नोट्स ढूंढ रहा था । कल्पना करो कि मुकेश पर यार का बेटा ऐसी मामूली सी जगह में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहा है । विनोद बोला कौन अशोक उद्योगपति मुकेश परिहार का बेटा है था पर वो कोई दिखावा नहीं करता । वहाँ बहुत सीधा साधा और विनम्र लडका है । इतने संपन्न परिवार से आकर ऐसा साधारण जीवन जीना बहुत बडी बात है । विनोद ने कहा, मैं यहाँ वास्तव में ऐसी कोई अभिव्यक्ति नहीं दर्शाता जो इसकी उम्र के टेंट अमीर लडकों में होती है । विश्व में कहा इसे इसके पापा के संदेहास्पद व्यापारिक सौदे पसंद नहीं थे । इसलिए उसने एमबीए करने के बाद उन सब चीजों से बाहर रहने का फैसला किया और सिविल सर्विसेज की तैयारी कर नहीं यहाँ आ गया । इसके डाॅट और इसका भाई व्यवसाय संभालते हैं और अशोक महीने में केवल एक बार अपनी माँ से मिलने घर जाता है । यहाँ यह बिना भेदभाव के सब के साथ मिलता जुलता है । मुझे देखो, मेरे पिताजी पूरे गांव में सबसे गरीब किसानों में से एक है और बहुत मुश्किल से घर चलाते हैं । लेकिन अशोक ने इन सब बातों की चिंता किए बिना हमेशा मुझे अपना सबसे अच्छा दोस्त माना है । विनोद ने भावुक स्वर में कहा, ये रहे पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के नोट्स । अशोक ने जल्दी से नोट्स विष्णु को सौंप दिए । विश्व में मुस्कुराकर नोट्स लिए थोडी देर जब हमारी और फिर अपने घर चला गया । विष्णु के जाने के एक घंटे बाद विनोद और अशोक दोनों को आपने फोन पर विष्णु के टेक्स्ट संदेश मिले । वहाँ एक आगे बढाया हुआ उद्वरण लग रहा था जिसमें लिखा था एक विजेता वह नहीं है जो कभी नहीं आता बल्कि वहाँ है जो कभी हार नहीं मानता । आपने फोन नीचे रखकर विनोद और अशोक फिर से पढाई में लग गए । होरे सिडनी खुशी से चिल्लाते हुए अपने टीम लीडर बद्री को हाई फाइट दिया । उन्होंने अभी अभी अपना प्रोजेक्ट पूरा करके ग्राहकों को सौंपा था । शुक्र है तुम लोगों के पास मेरे जैसा टीम लीडर हैं कुशल, जिम्मेदार और बुद्धिमान जिसकी वजह से तुम लोग प्रोजेक्ट समय से पूरा कर पाए । बद्री ने गला साफ करते हुए घोषणा की लोग यह शुरू हो गया । अभी से कोई नहीं रोक सकता । धारा ने कहा और अपने एयर फोन लगा लिया । बद्री शालिनी की टीम का लीडर था । वहाँ उन विशिष्ट पहली रैंक वाली पंक्ति वाले छात्रों में से था जो हर स्कूल और कॉलेज में होते थे और जिनसे कक्षा का हर दूसरा छात्र नफरत करता था । वहाँ ऐसा व्यक्ति था जो सोचता था कि दुनिया केवल उसके चारों ओर घूमती है । बद्री गोपीनाथ के प्रिया सहायको में से एक था और पूरे ऑफिस में महाकंजूस के रूप में प्रसिद्ध था । बद्री को अपने फोन से कॉल करने वाले दोस्तों से एक रुपये का भुगतान करने के लिए कहते देखना हमेशा पूरा ऑफिस में जोरदार ढाई होगा । कारण बनता था बाय दोस्तो! सोमवार को मिलते हैं सिखने कहा और ऑफिस से निकलने के लिए खडा हो गया, मैं भी साथ चलता हूँ । सेंड बद्री ने कहा वहाँ बद्री हमेशा की तरह टोलगेट तकलिफ देना बद्री अक्सर आपने कहाँ ऑफिस से एक किलोमीटर दूर एक टोल गेट के पास खडी करता था ताकि उसे टोलगेट बार करने के लिए प्रतिदिन तीस रुपए का भुगतान न करना पडे । नहीं सेट आज मैं अपनी कार नहीं लाया हूँ । मुझे मॉल से मुफ्त कार सर्विस कूपन मिला था । मैंने सोचा आज उसका इस्तेमाल कर लूँ क्योंकि मैं जानता था प्रोजेक्ट डिलेवरी के बाद हम सब लगभग एक ही समय ऑफिस से निकलेंगे और मुझे तुम्हारी कार में लिफ्ट मिल जाएगी । अच्छा विचार था ना? हाँ बिल्कुल सिडनी निराशा से आहरी इसका बस चले तो यह रोज ऐसा करें । आराध्या ने धारा के कान में कहा । उसमें दोनों भी निकलने के लिए तैयार हो गई । मैं तुम्हें भी छोड दो साल ही नहीं सिडनी पूछा वहाँ जरूर कुछ देर में सेट बद्री और शालिनी घर के रास्ते पर थे । काफी व्यस्त हफ्ता था । सोच कर अच्छा लग रहा है कि सप्ताहंत हमारे सामने हैं । क्या योजनाएं दोस्त हूँ? सिर्फ ने कहा मैं आज रात कुछ मूवीज डाउनलोड करूंगा और खुशी खुशी देखूंगा । मेरे पडोसी के पास खुला वाईफाई है और उसे पता नहीं है कि मैं उसका इस्तेमाल करता हूँ । बद्री ने एक उपलब्धि की भावना के साथ कहा, तो तुम क्या करोगे? उसमें सिर्फ से पूछा मैं क्लबिंग करने जाऊंगा । सिड ने एक और बडी उपलब्धि की भावना के साथ कहाँ बद्री को सीट के लिए सुना? एक विशिष्ट नाइटआउट ब्यौरा याद आया । जैसा की सीट के दोस्तों ने बताया था, क्लबिंग ऐसा काम था जो सिर्फ हर सप्ताह करता था, केवल दुनिया को यह दिखाने के लिए कि वहाँ यह करने में सक्षम था । हर सप्ताह तो अपनी क्लब की वेशभूषा में तैयार हो जाता है और अपने बालों में जान लगा लेता । वहाँ इस्काॅन से अपनी बाहों में टैटू जैसे आकृतियाँ बना लेता और अपनी सबसे कैसी शर्ट जो उसके पास बारवीं कक्षा से थी, पहन लेता था । इन सबके साथ उसके पास कुछ चारकोल बर्ड जीन्स थी । उसके क्लब के जूते भी थे । वहाँ आम तौर पर अपने कॉलेज के कुछ दोस्तों के साथ जाता था । कहने की आवश्यकता नहीं है कि पब में प्रवेश करते ही सीट सबसे पहले अपना इंस्टाग्राम अपडेट करने, चेकिंग करने और फेसबुक पर फोटो डालने का सोशल मीडिया रूटीन पूरा करता था । फिर सीट एक ड्रेस लेता डॅाल पड जाता । अजीबो गरीब तरीके से डांस करता हूँ । अपने आस पास के लोगों को परेशान करता, फिर पूरी तरह नशे में धुत होकर होश को देता है । उसके दोस्त आम तौर पर अगली सुबह उसे बार बार हो रही उल्टियों के बीच घर छोडा थे । इससे अच्छा घर में बैठो । आधी रात का मसाला देखों और शराब भी हो । तुम्हारे दोस्त उस मुसीबत से बच जाएंगे जिसमें तो उन्होंने डालते हो और बहुत सारे पैसे भी बचेंगे । बद्रीना अपने विषय सलाह दी । शालिनी उनकी बातचीत पर ध्यान नहीं दे रही थी । वह अपने फोन गैलरी में विष्णु के साथ अपनी तस्वीरें देख रही थी । कितने अच्छे पल थे । क्या वे कभी वापस आएंगे या वह केवल यादे बन कर रहे जाएंगे? उसने मन में सोचा । पहली बार शालिनी के मन में विष्णु के लिए एक चाहत की भावना उत्पन्न हुई । उनके दूर रहने का महीना अगले दिन पूरा हो रहा था और वह उम्मीद कर रही थी कि उन की बात होगी । सीखने शालिनी और बद्री को उनके घरों तक छोडा और अपने सप्ताह का आनंद लेने घर चला गया । शालिनी गर्म कॉफी लेकर टीवी देखने बैठ गई । विष्णु के विचार बार बार उसके मन में आ रहे थे । वहाँ जाना उठी और पागलों की तरह अपने पुराने बैग में कुछ खोजने लगी । उसने बैग में से एक पुरानी तस्वीर निकली । वह एक अंतरविद्यालय इन सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान स्टेज पर गाना गाते हुए उसकी तस्वीर थी । वहाँ उस समय बारवीं कक्षा में थी । विष्णु और साली ने उस कार्यक्रम में साथ गए थे । विष्णु ने प्रश्नोत्तरी और वाद विवाद में भाग लिया था और शालिनी ने गायन में शालिनी को याद आ रहा था । उस दिन उसे तेज बुखार था और वहाँ विष्णु ही था जिसने उसका पूरा ध्यान रखा था और उसकी तमाम आशंकाओं और आत्म संदेह के बावजूद उसे सफलतापूर्वक प्रथम पुरस्कार की प्रतिष्ठित ट्रॉफी जीतने के लिए प्रेरित किया था । तुम जीत होगी, तुम जीत होगी । वहाँ उसे हर राउंड के बाद कहता जा रहा था जबकि वहाँ ठक्कर चूर हो रही थी । यह पहली बडी सामाजिक पहचान थी जो उस से मिली थी । उस अंदर विद्यालय इन सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद उसने कितनी ही सुगम संगीत प्रतियोगिता जीती, लेकिन वहाँ पहली जीत हमेशा विशेष और उसके दिल के करीब थी और उसी दिन से विष्णु के साथ उसका रिश्ता भी । लेकिन विष्णु और उसके साथ की सुखद प्यारी यादें चाहे कितनी ही गहराई से उसके दिल में बसी थी । किसी लडके के प्यार में न पडने के विचार चालनी के मन में बार बार आते रहते थे । यह ऐसी बात थी जिसमें वह दृढता से विश्वास करती थी । बचपन से अपने आस पास प्रेम के कडवे अनुभवों को देखने के बाद वहाँ प्रेमविवाह कभी सफल नहीं होते कि मजबूत मंत्र का आंख बंद करके अनुसरण करती आई थी । हाँ विष्णु कैसे हो? उसमें बारह बज के एक पर अपना फोन निकालकर उसे कॉल किया और प्यार भरे स्वर में पूछा हाय! मैं ही हूँ तुमसे फिर बात करके अच्छा लगा । विष्णु ने औपचारिकता से जवाब दिया तो तैयारी कैसी चल रही है । जहाँ तक मैं तो मैं जानती हूँ, तुम तो अब तक जोरों से तैयारी में लग गए होंगे । उसने परिचित स्वर में कहा हाँ, अच्छी चल रही है । देखते हैं उम्मीद है तुम्हारा ऑफिस भी अच्छा चल रहा होगा । विष्णु बहुत विनम्र, औपचारिक और व्यवसायिक अंदाज में बात कर रहा था । उसका लहजा ग्राहक से बात कर रहे किसी टेलीकॉम कंपनी के ग्राहक सेवा अधिकारी की तरह लग रहा था । एक दो और ग्राहक सेवा उत्तर प्राप्त करने के बाद शालिनी ने फोन रख दिया । देखो ऐसा भाव इसी बात से मुझे नफरत है और इसलिए यह रिश्ता काम नहीं करेगा । वहाँ गुस्से से खुद पर चिल्लाई और कॉफी का कब होने के बाद बिस्तर पर चली गई ।

Details
‘कहानी एक आई.ए.एस. परीक्षा की’ में पच्चीस साल का विष्णु अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और भ्रम से बाहर निकलने तथा शालिनी को शादी के लिए मनाने के तरीके ढूँढ़ता है। हालात तब और भी दिलचस्प, हास्यास्पद और भावुक हो जाते हैं, जब विष्णु ‘माउंट IAS’ पर विजय पाने निकल पड़ता है। अपनी पढ़ाई और अपने प्यार को जब वह सुरक्षित दिशा में ले जा रहा होता है, तब उसे IAS कोचिंग सेंटरों की दुनिया में छिपने का ठिकाना मिल जाता है। क्या शालिनी अपने सबसे अच्छे दोस्त के प्यार को कबूल करेगी? क्या विष्णु असफलता की अपनी भावना से उबर पाएगा? क्या हमेशा के लिए सबकुछ ठीक हो जाएगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी।
share-icon

00:00
00:00