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सर्जिकल स्ट्राइक -19

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सुलतान फौजी - एक कश्मीरी आतंकवादी। उसने मुम्बई में एक बड़ी आतंकवादी घटना को अंजाम दिया, जिसमें सैंकड़ों निर्दोष शहरी मारे गये। सुलतान फौजी पकड़ा गया। एक ऐतिहासिक फैसले में उसे 26 जनवरी के दिन फाँसी की सजा दी जानी थी, ताकि पूरी दुनिया देखती कि हम देशद्रोहियों के साथ क्या करते हैं। लेकिन उससे पहले ही सुलतान फौजी जेल तोड़कर पाकिस्तान भाग निकला। तब यह मिशन सौंपा गया कमांडर करण सक्सेना को। कमांडर- जिसने सुलतान फौजी को पाकिस्तान में ही घुसकर मारा। वहीं अपने हाथों से फाँसी की सजा दी उसे।
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तो सोच रहे थे । कमांडर और रजिया एक बार फिर उसी फॅमिली जहाँ वो पहले भी दो बार मिल चुके थे । हमेशा की तरह उस क्लब में सडक छाप एशिया हूँ और उनके ग्राहकों की भीड लगी हुई थी । कुछ उन्हें लेकर उनको ने वाली टेबलों पर चले गए थे जहां काफी कम रोशनी थी और उसी कम रोशनी का फायदा उठाते हुए वह एक दूसरे के ऊपर झुककर जाने क्या क्या कर रहे थे । खासतौर पर मैच के नीचे उनके हाथ जिस तरह एक दूसरे के जिस्म पर रिंग रहे थे उसने तो खुले स्टाॅक्स की लगभग सब सीमाएँ पार कर देगी । ऍम क्लब में आने से पहले आज तो खास काम किए थे । पहला काम उसने अपना होटल पदक दिया था क्योंकि इस्लामाबाद में अब लोगों से पहचानने लगे थे इसलिए एक ही होटल में रहना उचित नहीं था । दूसरा काम उसने फैसला कर लिया था कि अब चाहे कहीं भी जाएगा थोडा लेकर करके जाएगा । इस समय भी उसने अपने चेहरे पर हल्की सी गाडी लगाई हुई थी । कमांडर ने सलमान क्लब में सबसे पहले दस की के चार बडे बडे पैसे दिए जिससे उसका मूड पूरी तरफ हो गया और सारा दिन उसने जो भागा दौडी की थी, उस फॅमिली जाते हैं । अब बताओ ऍम अगर तुम क्या कह रहे हो? इस बार तो भरी कोशिश पूरी तरह नाकाम कैसे नहीं हुई है? मैं बताता हूँ कमांडर डाॅल गाता हुआ बोला । दरअसल मारे सुल्तान फौजी के जिस्म के अन्दर एक मेरा माइक्रोफोन पहुंचा दिया है क्या कह रहे हो नहीं माइक्रोफोन किस्म के अंदर लेकिन तुम से पहुंचाया कैसे? दरअसल वो माइक्रोफोन बटन के आसार का था और उसके दोनों तरफ मैग्नेट की हल्की सी बहुत चली थी और मैड्रिड की वजह से वो फॅमिली के साथ चिपक गया और जब मैंने गोली चलाई तो वह कोहली के साथ साथ सुल्तान फौजी की चंद में जा घुसा । हाँ, लेकिन क्या चंद में पहुंचने के बाद भी वो माइक्रोफोन काम करेगा? बिल्कुल करेगा । दरअसल वो एक बेहद शक्तिशाली माइक्रोफोन है । जान में पहुंचने के बावजूद अपने आस पास बीस मीटर तक का वार्तालाप कैच कर के पास भेजेगा । ये देखो ये वो स्पीकर है जिसपर माइक्रोफोन के आस पास होने वाला वार्तालाप साफ साफ सुनाई देगा । ऍम निकालकर रजिया के सामने रख दिया और उसका क्या खोला तो उस पहनने वाली जगह बिल्कुल साफ साफ एक काला लंबा सा स्पीकर नजर आने लगा । ऍम नजरों से उस स्पीकर को देखते रहते हैं जबकि कमांडर ऍम को चल ही वापस बंद करके अपनी जेब में रख दिया था । उसके अलावा उसके बेहद शक्तिशाली और मैंने माइक्रोफोन की कई खासियतें हैं । कमांडर ने डनहिल का एक छोटा सकता लगाते हुए कहा जैसे वो जिसमें पहुंचने के ठीक आधा घंटे बाद काम शुरू कर देता है । दरअसल वो चार्ज ही जिसमें की कर भी होता है, अगर उसे किस्म के अंदर की करनी नहीं मिलेगी तो वह काम कर रहे शुरू नहीं करेगा । उसके अलावा उस माइक्रोफोन दूसरी खासियत शरीर के अंदर पहुंचने ही उसके चुभ की शक्ति खुद ब खुद खत्म हो जाती है और इसीलिए वो जल्दी ही गोली अलग हो जाता है । फिर उस माइक्रोफोन का अगला भाग भी काफी गीला बनाया गया है । यही वजह है कि जब शरीर के स्माइल तंत्र सांस लेते हैं तो वो उनके साथ साथ गोश्त को आहिस्ता आहिस्ता चीरता हुआ अंदर घुसता चला जाता है । लेकिन जब डॉक्टर सुल्तान फौजी के चांसेज खोली निकाल लेगा मैंने पूछा फिर तो वो गोली के साथ साथ उस माइक्रोफोन को भी बाहर निकल डालेगा, कैसा निकालेगा? मैंने बताया ना उस माइक्रोफोन का अगला भाग काफी नुकिला बनाया गया है और स्नायुतंत्र जब सांस लेते हैं तो उन के साथ साथ अंदर घुसता चला जाता है । किसी का जब तक डॉक्टर द्वारा सुल्तान फौजी की जांघ से गोली निकालने की नौबत आएगी तब तक वो ऍम की कोशिश के अंदर तक व्यवस्था हो चुका होगा और गोली निकालते समय डॉक्टर को तथा किसी और को नजर भी नहीं आएगा । ऍम का अगला बहुत नुकीला बनाया ही इसलिए गया है ताकि सर्जरी के दौरान उसे जिस्म से बाहर निकाला जा सके । नहीं माइक्रोफोन की संरचना बहुत अच्छे ढंग से की गई है । रजिया प्रभावित मुद्रा में बोले जाॅन ऐसी किसी विशेष परिस्थितियों के लिए बनाया गया है । अब स्थिति यह है । कमांडर ने डनहिल की रात वहीं रखी ऍम छाडते हुए कहा सुल्तान फौजी मेरे शिकंजी से निकलकर बात जरूर गया है, लेकिन आठ घंटे की समय सीमा पूरी होते हैं । माइक्रोफोन जैसे ही काम शुरू करेगा, मुझे उसके आस पास के वार्तालाप से फिर पता चल जाएगा कि इस वक्त कहाँ है और उसके बाद मुझे कोई मुश्किल देश नहीं आएगी । इसीलिए मैंने तब उनसे कहा था कि इस बार पूरी तरह अपनी कोशिश में नाकाम नहीं हुआ हूँ । इस बार मैं नाकाम होते हुए भी काफी हद तक कामयाब हो । अब तो सिर्फ मुझे बेहद बेसब्री से आठ घंटे की अवधि पूरी होने का इंतजार है । माइक्रोफोन के शुरू होते ही मैं फिर से हरकत में आ जाऊंगा । रजिया कि आखिर फिर चार सौ चालीस वोल्ट के बल की मानिंद जगमगाने लगे । वाकई काॅल कहा था, उस पर पूरी तरह नाकाम नहीं हुआ था । अभी उस खेल का अंत बाकी था । कुछ और हंगामा होना बाकी था । रजिया की सुबह काफी चलती आप खुल गई । हैदर अभी लाहौर से नहीं लौटा था । खोलते ही रजिया की निगाह एक आए । सामने टंकी तारीख वाले बोर्ड पर पडेगी । पच्चीस जनवरी एक तारीख रजिया के दिमाग में मधुर संगीत की तरह पूछने लगे तो उसके लिए कुछ साधारण तारीख नहीं थी । वो उसके भाई अर्जुन ठक्कर के जन्मदिन की तारीख थी । ये वो तारीख थी जिस दिन उसने अपने भाई का जन्मदिन पडे तो उसके साथ बनाया था और उसको एक अंगूठी तोहफे में दी थी । उस तारीख को देखते ही हैं । रचिया पडे उत्साह के साथ बिस्तर से उठी और फिर जल्दी जल्दी घरेलू काम निपटाने में लग गई । वो दिन वो काफी हंसी खुशी गुजारना चाहती थी । रजिया उस दिन काफी जल्दी जल्दी काम कर रही थी । हैदर अली का और अपना पेट्रो उसने खुद अपने हाथों से साफ किया एक एक चीज अपनी जगह सलीके से रखे हैं । रजिया जब दीवार पर लगी पेंटिंग साफ कर रही थी तभी एक का एक उसकी निकाला एक अलमारी पर जाकर अटक गई । वो हमारी काफी बडी थी और उस पर ताला पडा था । रजिया को आज फॅमिली के साथ रहते हुए कई महीने गुजर चुके थे । लेकिन ये बडा मजेदार एक्टर था की वजह से आज तक अलमारी की चाबी हमेशा हैदर अली के पास देखी थी । रजिया ने जब दो बार हैदर से उस अलमारी को देखने की इच्छा प्रकट की थी तो वो टाल गया था । खुद रजिया ने भी अलमारी को देखने के लिए उस पर कभी ज्यादा जोर नहीं डाला था । लेकिन न जाने क्यों अलमारी को देखकर रजिया नाॅट गई थी बल्कि एक का एक उसके अंदर ये इच्छा भी काफी बलवती हो उठी थी । टीचर देखना चाहिए कि उस बीमारी के अंदर क्या है तो फौरन दौड कर चौकियों का कुछ अच्छा उठा लाये जिसमें तरह तरह की चाबियां नहीं । रजिया ने आनन फानन में एक एक चाबी उस अलमारी के ताले में लगा कर देखने शुरू की । उसके सारी चाबियां लगा डाली है लेकिन उसमें से कोई भी चालू बताने के अंदर फिट नहीं बैठे । देखिये और ज्यादा ब्रिटेन होती । हमारी के अंदर क्या है ये देखने की बच्चे की उसके अंदर हर पल बढती जा रही थी । उसने दूसरा चाबियों का गुच्छा तलाशा मगर जब वो उसे ना मिला तो वो एक छोटा सा नुकीला पेट का सुधर रही हैं । फिर वो नुकीले पेचकस उस वाले को खोलने की जी तोड कोशिश करने लगे । काफी देर तक कोशिश करती रही । उसके माथे पर पसीने चुप चौहाने लगे । दो बार फॅमिली में लगते लगते भी बच्चा । लेकिन फिर भी रजिया जुटी रही कोई अंधी की शक्ति मानव आज उसे वो वाला खोलने के लिए सब मस्ती प्रेरित कर रही थी । लगभग आधा घंटे की मेहनत मशक्कत के बाद आखिर का रचिया कामयाब हुई और उसने उत्तराला खोल दिया । ताला खुल रही रजिया ने राहत की सांस ली । उसके बाद फॅमिली भी खोल दी और अगले ऍम थे । उस पूरे पेट्रोल में भयानक तूफान आ गया । ऍम घर की तरफ से मानो सब पूरी अच्छी खडे चलाने लगे । ॅ पडे थे उसी ही नहीं हो रहा था कि वो देख रही है वो सब सच है । उस ऍम मुझे तो काफी सारा सामान था लेकिन पीछे ऍम पर उसके भाई की कुछ चीजें रखी थी उसके जो ठक्कर की कुछ चीजें, उसका ऍम ये पूछ चीजे थी जिन्हें रजिया लाखों में पहचान सकती थी क्योंकि उन सब पर कहीं ना कहीं मौजूद था । आज रचिया के दिमाग में साफ करेंगे । लगा उस काम को पाते खातों से अपने भाई के रिवॉल्वर कुछ हुआ, उसके संभाल हुआ । उसके उन तमाम चीजों को इस तरह हुआ जैसे उन्हें छूकर वो भाई का स्पष्ट महसूस कर रही होगी । और उन चीजों को छोटे छोटे ऍम स्पोर्ट हो गया था । एक सवाल के अंदर ही अंदर रिंग उठा पहुॅचाया हैदर के पास कैसे आपके सर आपने लगी रह जाते हैं और खून उतारा है जिसमें के पत्ते की तरह कांपते लगा फॅमिली चुका था । अब आगे नजर आ रही थी । साॅस दस बज रहे थे जब हैदर में कोठी के अंदर कदम रखा है । वो काफी खुश था और लाहौर हो जिस काम से गया था वो काम पूरा हो गया था क्या कोठी में कदम रखते ही फॅसा और से आवास देता हुआ आगे बढा दिया लेकिन रख दिया कि कहीं से भी आवाज नहीं आई क्या थोडा और जोर से चिल्ला ऍम लेकिन रजिया के फिर भी कहीं से कोई आवाज ना आए उसी ऍम का दरवाजा खोलकर अंदर घुसा था और अंदर ही वो ठंड का सामने कुर्सी पर पत्थर की शिला मैं बताती हूँ क्या बढेगी आप? फॅमिली चाहता हुआ ही आगे बडा बोल क्यों नहीं रही हैं कि हमारे श्रद्धान बेटे ने कुछ गडबड कर दी । ऍम ही उसकी नजर उस टाइम टेबल पर पडी जो रजिया के सामने बची हुई थी और जिस पर अर्जुन ठक्कर का सामान पहला था हूँ । उस सामान को देखते ही हैदरअली पूरी तरह चौका किस समय बाहर कैसे आ गया? फिर बडी फॅमिली झटके से उसकी गर्दन अलमारी की तरफ को में जो खुली पडी थी तो तो ये बात है फॅमिली बडे विनोदपूर्ण ढंग से ऐसा हमारे पीछे हमारी चीजों की तलाशी लेती हो जाने में उनकी खूब जांच पडताल करती हूँ । लेकिन आज समझ नहीं आती तो नहीं इन सब चीजों को अलमारी से बाहर निकाला है क्योंकि इन सब चीजों से मेरा बेहद खास रिश्ता है ना फॅमिली जैसे वो मशीन खडा कर आई हो उसकी आंखें अभी भी अंगारे की तरह रख रही थी । मेरे एक सवाल का जवाब तो तुम्हारे पास से तमाम चीजे कहाँ से आएगी और ऍम उसके पीछे बहुत बडा दिलचस्प हिस्सा है । फॅमिली की तरह ही चक्कर बडा एक हिंदुस्तानी जासूस यहाँ पाकिस्तान में जासूसी करने आया था । मुझे भी कहने में कोई हिचक नहीं की वो एक बडा दिलेराम देना । जाबाज हिंदुस्तान सरकार ने उसे यहाँ इसलिए भेजा था ताकि वो ये सबूत इकट्ठे कर सकें कि पाकिस्तान ही आतंकवादियों को प्रशिक्षण देता है । हम बात वो पाकिस्तान के खिलाफ सारे सबूत भी घटते करने में कामयाब हो गया था लेकिन एक का एक मुझे उसकी फलक मिल गए । मुझे पता चल गया कि वो हिंदुस्तानी जासूस है फॅर होती है क्या हुआ हूँ । हमारे बीच जबरदस्त मुठभेड हुई । वो शब्द कहते हुए हैदर की आवाज भी खुसी तो मुझे भी वो खतरनाक मुठभेड पूरी तरह याद है । ऐसे कई मौके आए थे जब मेरे ऊपर काफी भारी पडा और मुझे मारने के बहुत नजदीक पहुंच गया । ऍम शायद बार बार अपनी किस्मत की बदौलत पछता रहा और आखिर में मैंने उसके सीने में चार गोलियां उतार दी थी और उसी ऍर गया सचिन । क्या अब फॅमिली हुई नजर आने लगे? उस चीज को धीरे धीरे ऐसे झटके लगने लगे । भरोसे कुछ से कप्तान पढ रहा हूँ और और तुम उसका सारा सामान को संभाल कर रखा हुआ है । इसके पीछे भी एक अलग ही कहानी है । हैदर ने कहा ऍम उसका नाम अर्जुन ठक्कर । लेकिन जब उसकी मौत के बाद उसकी चीजों की तलाशी ली तो शीटें बच्चों का किस की हर चीज पर अंग्रेजी का पहला अक्षर आर मौजूद था । जब किसके नाम अर्जुन के हिसाब से तो होना चाहिए था । ये रात मैं तब सुलझा नहीं सकता था । इसलिए मैंने उसके तमाम चीजों को ये सोचते हुए अपने पास संभालकर रख दिया कि शायद मैं कभी इस को सुलझा सको । लेकिन एक बात मेरे अभी भी समझ में नहीं आएगा । लेंगे तो फॅमिली हो । मेरा तीन चीजों से वही संबंध है डर जो किसी बहन का अपने भाई की रखी से होता है । तो मैं आपको हैरानी होगी तुमने जिस हिंदुस्तानी जासूस हमारा हूँ, मेरा भाई था, प्लीज अपना भाई है क्या क्या कह रही है तो ऍम बाहर से टूट कर दे रहा हूँ वो तुम्हारा भाई क्या हो सकता है? नहीं था हिंदू था वो रजिया बेहद जरूर अंदाज नहीं कोर्ट रहती चली गई लेकिन फिर भी वो गिरफ्तारी था । ऐसा भाई जिस पर कोई भी पहन खुशी खुशी अपनी जान दे सकती है । मैं अपनी उसी बहुत भाई की मौत का बदला लेने हिन्दुस्तान से जहाँ आॅडर ऍम भारतीय चलेंगे लेकिन मैं नहीं जानती थी जिसके हाथ से मैं सुहाग थोडा पहन रही हूँ, वही मेरे भाई का खुद ही है देख नहीं पाते । एक तो खपोली तो अभी भी अर्जुन ठक्कर के हाथों से बच्चे रही हो । वो इस समय भी बहुत बनकर तुम्हारे आस पास ही मंडरा रहा है । क्या कह रहे हो तुम? क्या उसी पल रजिया ने एक टेबल पर रहा और जो टक्कर का साॅल्वर उठा लिया ये हो फॅमिली के सीने की तरफ ध्यान दिया पर जो टक्कर का ही रिवॉल्वर है और इसके अंदर कोरिया भी हैं । आपके ही रिवॉल्वर तुम्हारी मौत की वजह बनेगा तो तो पागल हो गई क्या ऍम तुम्हारा शौहर हूँ? हाँ फॅस की बात है । फॅमिली के खून से अपने हाथ रंगे वही मेरा शौहर है । जानते हूँ आज पच्चीस जनवरी है और आज ही मेरे भाई का जन्मदिन है और इस खुशी के मौके पर मुझे अपने भाई को कोई ना कोई तोहफा तो देना ही था । इससे बढिया तोहफा मेरे भाई के लिए और क्या होगा कि मैं उसके कदमों में उसके हत्यारे की भेंट चढा होगा । उसी पर राॅय तुम सब पागल हो गई हो । फॅमिली अगला उठा उसका पूरा चश्म पसीने से लगभग हो तो चला गया और बोलो तो मेरे बच्चे की बनने वाली हूँ मेरे लिए भाई के मायने बहुत बुलंद है । डाॅॅ हर चीज की कुर्बानी दे सकते हो लेकिन अपने भाई के हत्यारे को कभी नहीं कर सकती है और आखिरी वक्त आ गया है सर मैं समझती हूँ मुझे ज्यादा देर नहीं करनी चाहिए लेकिन देर हो चुकी थी । रजत जज्बातों के प्रभाव में फूल गई किसके सामने पठान खडा है खतर पठान गोली चलाती उससे पहले ही हैदर अपनी जान पर खेलकर उसके ऊपर छोटा बडा ही रह गया । वो कुर्सी सहित पीछे जागृति ऍफ थी उससे पहले हैदर में बेहद आनन फानन अपने हॉस्टल से रिवॉल्वर निकालकर गोरी चला नहीं ऍफ में जाकर लगी थी और ऍम फॅमिली को खून में रंगाला सबका गया हैं हूँ बहुत अच्छा हुआ है फॅमिली दी जब तुम्हें अपने हाथों से ही अपने नहीं आने को मिटा डाला और मेरे अंदर की और तो भरे कर्ज से आसान हो गई हैं आपने ज्यादा आसानी से आपने बहुत भाई के कदमों में तो पूरी और चढा सकती हैं तो मुझे बाहर नहीं सकती ऍम उसी ऍफ का सामान रखा था । रिवॉल्वर उसके हाथ से छूटकर ऍम खून में पूरी तरह लाॅस सामने आकर खडी हो गई थी । उसके उसके एक एक फॅमिली पहुंच बोल दिया । उसे लगी हुई थी खडे खडे जोर से हंसी रह गया । ऍसे की सहन गया है ना तो क्या कहा था । रचिया बोली तुम अर्जुन ठक्कर के हाथ नहीं बच्चों के है । डर नहीं बच्चों के उसके ऍम चली गई । फिर वह खडे खडे पीछे जाकर गिरी ऍम उसके चेहरे पर स्कूल था । आखिर उसमें आपने बहुत और भाई की मौत का बदला ही लिया था ।

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सुलतान फौजी - एक कश्मीरी आतंकवादी। उसने मुम्बई में एक बड़ी आतंकवादी घटना को अंजाम दिया, जिसमें सैंकड़ों निर्दोष शहरी मारे गये। सुलतान फौजी पकड़ा गया। एक ऐतिहासिक फैसले में उसे 26 जनवरी के दिन फाँसी की सजा दी जानी थी, ताकि पूरी दुनिया देखती कि हम देशद्रोहियों के साथ क्या करते हैं। लेकिन उससे पहले ही सुलतान फौजी जेल तोड़कर पाकिस्तान भाग निकला। तब यह मिशन सौंपा गया कमांडर करण सक्सेना को। कमांडर- जिसने सुलतान फौजी को पाकिस्तान में ही घुसकर मारा। वहीं अपने हाथों से फाँसी की सजा दी उसे।
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