Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

8. Successful Surgery

Share Kukufm
8. Successful Surgery in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
16 KListens
मिलिए सिद्धार्थ से, एक अच्छा वकील लेकिन एक बुरा इंसान। मिलिए राहुल से, एक अच्छा इंसान लेकिन एक बुरा डॉक्टर। और मिलिए शुचि से, एक अच्छी इंसान और एक बाकमाल डॉक्टर। शुचि सिद्धार्थ को एक अच्छा इंसान और राहुल को एक अच्छा डॉक्टर बनाना चाहती थी लेकिन मुंबई में हुए बम विस्फोट ने उनकी ज़िन्दगियों को उलट दिया। सुनें इस क्रांतिकारी कहानी को यह जानने के लिए कि कैसे सिद्धार्थ अदालत से एक अनोखी जनहित याचिका पारित करवाता है और कैसे राहुल एक बहुत अनोखी सर्जरी करने में कामयाब होता है उस लड़की को बचाने के लिए जिससे वो प्यार करते हैं। Follow Arpit Agrawal to get updates on his next book. • Facebook – arpit194 • Instagram – arpit1904 Voiceover Artist : Ruby Producer : Kuku FM Author : Arpit Agrawal
Read More
Transcript
View transcript

आठवां चैप्टर सारे स्कैन और एमआरआई करने के बाद नर्सों ने सर्जरी के लिए पाँच को तैयार किया । उन्होंने उसके कपडे बदल दिए और उसे सर्जिकल गांव पहनाया जो कि चौधरी के वक्त बर इसको पहनाया जाता है । उसे अभी तक बेहोशी की दवा नहीं दी गई थी । वो होश में था और ऑपरेशन थिएटर की छत से आती हुई तेज रोशनी को घूम रहा था । शुचिः ने नीले रंग का स्क्रिप्ट टॉप पहनकर ऑपरेशन थिएटर के भीतर प्रवेश क्या शुचि ने बच्चे की चंचल आंखों को नजर अंदाज किया क्योंकि ये उसे कमजोर बना रही थी । उसके दिल की गहराई में उसे डर था कि अगर कुछ भी गलत हुआ तो फिर ये आंखे कभी नहीं खुलेगी क्या? तो सर्जरी के लिए तैयार हूँ बेटा, क्या तुम कुछ पूछना चाहती हूँ? शिवजी ने उसे बेहोशी की दवा देने से पहले पूछा मेरा ट्यूमर कितना खतरनाक है? शु चीज की बात सुनकर ही गई । उसे सवाल की उम्मीद नहीं थी । अंश की माँ के अनुसार उसे अपने ट्यूमर के बारे में नहीं पता था तो मैं इसके बारे में कैसे जानते हो? हाँ और अगर मैं ऑपरेशन में मर जाता हूँ तो मेरी माँ को मत बताना कि मुझे सब पता था । मुझे सब कुछ पता है । मैंने पिछले अस्पताल में डॉक्टर्स को उसके बारे में बात करते हुए सुना था । शुचिः भावुक हो गई जैसे कि अंश उसका अपना बेटा हो । हाँ, परेशान होगी अगर उन्हें पता चला कि मुझे सब पता था वो मुझ से छुपकर बातों में होती है । वो अभी रात में होती है । केवल एक चीज में खुश रखती है । वो सोचते है कि मुझे कुछ नहीं पता । जब मैं खुश होने का दिखावा करता हूँ तो वो खुश होती हैं । कल आप के यहाँ से जाने के बाद माने । मुझे एक पल के लिए भी अपने से अलग नहीं किया । रात भर मुझे अपनी गोद में ही सुनाए रखा । वो बच्चा सूची के सभी मरीजों में यकीनन सबसे बहादुर था । क्या में आज मरने वाला हूँ । हंसते मासूमियत से पूछा किसी भी डॉक्टर के लिए ये सबसे मुश्किल सवाल है । उसके बचकानी आवाज सुनकर शुचि स्तब्ध रह गई । वो डॉक्टर जरूर थी लेकिन पहले इंसान थी । किसी भी डॉक्टर के लिए मौत का सामना करना और फिर मरीज के रिश्तेदारों को इसके बारे में सूचित करना सबसे मुश्किल काम होता है । ये समझाना लगभग नामुमकिन है कि उन्होंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की लेकिन वह किसी भी तरह मरीज को बचाना सके । डॉक्टर लॉबी में खडे लोगों से कैसे कह सकते हैं कि आप जिस का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं वो फिर कभी नहीं उठेगा । वो मैसेज दत्ता को ये कैसे समझा सकती है कि उस ने उनका भरोसा तोडा है । डॉक्टर्स किसी को बचाने में नाकामयाब होते हैं तो क्या उन्हें रातों को सुकून की नींद आती होगी? ये आसान नहीं है लेकिन डॉक्टर्स अक्सर ऐसा करते हैं । छुट्टी थोडी देर के लिए अंश के सवाल का जवाब नहीं दे सकी । उसने सिर्फ उसे गले लगाया और कहा की चिंता मत करो, मैं तो मैं मरने नहीं होगी । कम से कम आज तो नहीं छूने । वहाँ मौजूद नर्स को अनुज को बेहोशी की दवा देने का इशारा किया । उसने टॅबलेट मांगा और अंश की बेहोश होने के बाद चीरा लगाना शुरू किया । वो टी उमर तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी लेकिन ट्यूमर इतना छोटा और छुपा हुआ था कि आधुनिक उपकरणों का उपयोग करके भी इसी पकडना और बाहर निकालना मुश्किल था । एक कार्डियो मॉनिटर अंश के दिल की धडकन की निगरानी कर रहा था । शिव जी का एक गलत कदम और दिल का धडकना हमेशा के लिए बंद हो सकता था । डॉक्टर मरीज की हालत बिगड रही है । कार्डियो मशीन का निरीक्षण करने वाली नहीं चलाई । अंश की धडकन बहुत धीमी हो गई । सूची घबरा गई । दिल की धडकन धीमी होना यकीनन एक बहुत बुरा संकेत था । मुझे उसके सीने में हल्के बिजली के झटके लगाए । दिल एक जटिल अंग हैं । यदि ये एक बार धडकना बंद हो जाए तो फिर से धडकना नामुमकिन है । छुट्टी को घबराहट होने लगी । उसने झटके का वोल्टेज बढा दिया मगर इसका उस पर कोई असर होता नजर नहीं आया । शुचि बहुत घबरा गई । शुचिः ने हिम्मत ना हारते हुए एक बार फिर से कोशिश की इस बार और भी ज्यादा वोल्टेज के साथ इसे कुदरत का करिश्मा कहिए कि अब की बार ये काम कर गया । आज के दिल की धडकन धीरे धीरे बढने लगी । कार्डियो मॉनिटर ने लव दिखाना शुरू कर दिया जो पहले कोई हरकत नहीं दिखा रहा था । अगले छह घंटे की कोशिश के बाद शुचि ने ट्यूमर ढूंढकर निकाल दिया । उसने आज की त्वचा को सील दिया और सर्जरी पूरी की । अच्छा अभी भी बहुत था और सर्जरी सफल हुई या नहीं यह अंश के होश में आने के बाद ही पता चलना था । छुट्टी ने अपने दस्ताने, मास्क, ऍम को हटा दिया और अंश की माँ के पास चली गयी । वो डॉक्टर सूची के ऑपरेशन खत्म करने और उसे खुशखबरी देने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रही थी । क्या वो ठीक है हम उसे मिल सकती हूँ । छुट्टी को देखते ही मैसेज दत्ता ने छटपटाकर पूछा । छुट्टी के पास में से सत्ता के सवाल का कुछ सीधा जवाब नहीं था । मैंने ट्यूमर निकाल दिया है लेकिन ये शरीर की परिधि के इतना करीब था की मैं ये नहीं कह सकती कि इसका शरीर पर कोई असर पडा या नहीं । सर्जरी सफल रही या नहीं जानने के लिए हमें अंश के होश में आने का इंतजार करना होगा । उसे कम हो जायेगा । डॉक्टर अगर सब कुछ सही रहा तो शायद वो एक घंटे में मैसेज सत्ता ने अंश की जागरी के इंतजार में इसका हाथ पकडे, बिस्तर के बगल में बैठने का फैसला किया । वो लगता कार्डियो मॉनिटर को घूम रही थी । अंशुल जीवित था और बस हो रहा था । छुट्टी ने कहा था कि आज को एक घंटे तक होश आ जाना चाहिए लेकिन तीन घंटे बाद भी वो नहीं था की हालत के बिगडने का इशारा थामस दत्ता लगातार पाँच के लिए दुआ मांग रही थी वो अपने बेटे के पास बैठे उसके कान में कहने लगी, खबरदार जो मुझे इस तरीके से अकेला छोडने की हिम्मत की तो मैं इतनी जल्दी नहीं मार सकते । तो में अभी मेरे बहुत से सपने पूरे करने हैं । बहुत से काम बाकी है । अभी मैं तुम्हारी सबसे अच्छी परवरिश करना चाहती है । मैं भी तुम्हारा ख्याल रखना चाहती हूँ ताकि मेरे बुढापे में तो मेरा ख्याल रखो । मैं चाहती हूँ कि तुम स्कूल में सर्वोच्च अंक प्राप्त करूँ और मुझे तुम पर गर्व हो । मैं चाहती हूँ कि तुम मैदान में जाकर फुटबॉल खेलो और सभी कपडे काम भी करके घर आओ । मैं तुम्हारे गंदे कपडे अपने हाथों से धोते हुए उस कराना चाहती में । हाई स्कूल में तो तुम्हारा पहला ड्यूरिंग गिफ्ट करना चाहती हूँ और हेयर स्टाइल बदलने के लिए डाटना चाहती हूँ । जब तो अपने कॉलेज के दिनों में पार्टी में देर रात घर आओ तो मैं तुम पर चलाना चाहती हूँ । मैं तुम्हारे लिए नई बाइक लेने के लिए पहली इंकार कर और फिर तो मुझे बनाओ और मैं मान जाना चाहती हूँ । मैं चाहती हूँ कि तुम नौकरी करो और अपनी कमाई से मुझे वहाँ पे तो मैं चाहती हूँ कि तुम मेरे खूबसूरत सी बहुल आओ मैं उससे लड्डू खूब काम कर रहा हूँ और उससे बहुत प्यार करूँ । तुम्हारे दो बच्चे हो और मैं उन में अपना बचपन फिर से जीना चाहती हूँ । मैं एक दिन तुम्हारी कंधे पर शांति से मारना चाहती हूँ लेकिन बैठे हुए हैं मेरे साथ ऐसे करने की इजाजत नहीं होगी । माँ अनशन धीरे से आंखे खोलते हुए कहा हर अपनी माँ के हाथ को कसकर पकड लिया । मैसेज सत्ता ने जैसे ही उसे जाते देखा वह होने लगी । उसे अपने बेटे को बिस्तर में गले लगा लिया और उसका माथा चूमा । सूची आसपास ही थी । तुरंत वहां पहुंचकर सच्ची ने अंश की पूरी जांच की । उससे उससे पूछा कि क्या वो से ठीक से देख सकता है । उससे उससे बात की और उसकी आवाज की जांच की । उसने आज की याददाश्त की जांच करने के लिए पूछा कि उसने सुबह नाश्ते में क्या खाया था और ये भी कि उसने पिछली कक्षा में कितने अंक हासिल किए थे । पाँच के सभी शारीरिक परीक्षण सफल रहे । शूज ने पुष्टि की कि सर्जरी सफल रही । धन्यवाद आप किस्मत से भी लड सकती है । मैसेज दत्ता ने कहा उसके आगे अभी भी आंसुओं से भरी थी मैंने कुछ नहीं किया । मिसेज सकता ये अंश है जो आपकी किस्मत से लड गया आपके साथ देने के लिए उसने मौत को हरा दिया । छुट्टी बहुत खुश थी । उसने प्यारे से बच्चे को बचाया और ये उसके मेडिकल कैरियर के लिए बहुत अच्छा था । उसने आखिर ऐसी जटिल सर्जरी चुकी थी । आपने सर्जरी करके मुझे कर्जदार बना लिया है । जब भी मुझे मौका मिलेगा मैं का कर्ज जरूर चुकाऊंगी । मैंने सिर्फ अपना काम किया है और कुछ नहीं । एक तरह से शिवजी ने सिर्फ अपना काम किया लेकिन अगर हम इसके बारे में गहराई से सोचे तो उससे अपने काम से कहीं बढकर क्या है? अगर कोई और डॉक्टर होता तो वह सर्जरी फील होने के डर से इंकार कर देता । चुकी सर्जरी में विफलता सर्जन की प्रतिष्ठा को प्रभावित करती है । लेकिन सूची ने अपनी प्रतिष्ठा को दांव पर रखकर सर्जरी की ।

Details
मिलिए सिद्धार्थ से, एक अच्छा वकील लेकिन एक बुरा इंसान। मिलिए राहुल से, एक अच्छा इंसान लेकिन एक बुरा डॉक्टर। और मिलिए शुचि से, एक अच्छी इंसान और एक बाकमाल डॉक्टर। शुचि सिद्धार्थ को एक अच्छा इंसान और राहुल को एक अच्छा डॉक्टर बनाना चाहती थी लेकिन मुंबई में हुए बम विस्फोट ने उनकी ज़िन्दगियों को उलट दिया। सुनें इस क्रांतिकारी कहानी को यह जानने के लिए कि कैसे सिद्धार्थ अदालत से एक अनोखी जनहित याचिका पारित करवाता है और कैसे राहुल एक बहुत अनोखी सर्जरी करने में कामयाब होता है उस लड़की को बचाने के लिए जिससे वो प्यार करते हैं। Follow Arpit Agrawal to get updates on his next book. • Facebook – arpit194 • Instagram – arpit1904 Voiceover Artist : Ruby Producer : Kuku FM Author : Arpit Agrawal
share-icon

00:00
00:00