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मेरी अर्धांगिनी उसकी प्रेमिका - 20 in Hindi

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Authorराजेश आनंद
सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
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उस दिन मैं बहुत परेशान था । छुट्टी के बाद भी घर जाने का मन नहीं कर रहा था । मैं टहलते हुए पांच ही बनाई । पार्क में घुस गया । दिसंबर की शाम थे । सूरज ढलान पर था । चारों और हल्की हल्की सी धूम छाई हुई थी । पार्क में इक्के दुक्के इंसान ही दर्ज टहल रहे थे । दिमाग नहीं है । प्रिया की चीज हुई तीस आवाज अब भी मेरे कानों में गूंज रही थीं । मैं किसी बदलाव आज की तरह लडखडाते हुए कदमों से चलता हुआ पार के बीचों बीच पहुंच गया । दिसंबर के आखिरी सप्ताह की जोरदार ठंड । शाम में भी मैं अजीब सी गर्मी महसूस कर रहा था । मैंने पाॅकेट उतारा और गुस्से में तेजी से पीछे की और छटक दिया यह क्या बदतमीजी है? किसी ने चिल्लाया साडे मैं तेजी से पीछे की ओर बडा ऍम उसके चेहरे पर जा गिरा था । आपको कपडों से फुटबॉल खेलने का शौक है तो पीछे देखकर खेलना चाहिए । कहती हुई उसमें तेजी से अपने चेहरे पर बडी जैकेट को खींचा । तू तो मेरे होटल बडा उठे । सामने दी तो खडी थी लेकिन मुझे सामने देखते ही अचानक उसका चेहरा पीला पड गया । हडबडाहट में बोली सॉरी मैंने आपको पहचाना नहीं कहती हूँ । वो तेजी से पीछे की ओर मुडी और लगभग दौडते हुए कदमों से वहाँ से निकल गई । नीतू मैंने आवाज भी नहीं मगर वो हवा की रफ्तार से मेरी आंखों के सामने से उधर हो गई । मैं कुछ नहीं कर पाया । लाचार घुटनों के बल वही जमीन पर बैठ गया । मैं कल आप फाडकर चिल्लाना चाहता था, लेकिन गली से कोई आवाज ही नहीं बस मेरी आंखें उबल पडेगी ।

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सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
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