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मेरी अर्धांगिनी उसकी प्रेमिका - 06

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सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
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अगला दिन कक्षा में कदम रखते ही वो आप एक बार फिर मेरे गले पड गई । यहाँ वही लडकी जो कल मेरे बगल बैठी थी । मुझे देखते ही खिलखिला पडी । तुम पागल हो गया । गुस्से से सुनते हुए मैंने उसकी और देखा हूँ । पूरी बेहाई के साथ उसने कहा और आकर मेरे सामने खडी हो गई । बडबडाती नजरों से थोडी देर तक मुझे देखती रही और फिर मेरी और हाथ बढाते हुए बोली खाई आए । मुझे भी कहना पडा तो मैंने उसका हाथ नहीं दावा पलट कर जैसी पीछे खाली पडी सीटों की ओर बढने की कोशिश की । उसका रास्ता रोक लिया । बोली हाथों में लालू क्योंकि यहाँ मैं तुम से दोस्ती करना चाहती हूँ । सोचती मुझसे क्यों तो दोस्त बनने के लायक नहीं हूँ हूँ । मगर मेरे अलावा भी यहाँ और तमाम लडके हैं । नहीं क्यों? मैं ठहरकर पूछा बच्चा नहीं । हालांकि मैं स्कूल के जमाने से ही ऐसी दिलफेंक लडकियों का दीवाना था । अगर आज आज क्या कर रहा था? मैं मुझे खुद नहीं पता । एक दिन पहले सीनियर लडकी द्वारा दिलाए गए वो गुरु बच्चन रह रहकर मेरे मस्तिष्क पर कौन रहे थे? वो लडकी मेरी और उस वक्त जिस तरह से देख कर मुस्कुरा रही थी कुछ लगने लगा कि मैं ज्यादा देर तक नहीं रह सकता । मैं इन विचारों, विचारों में अभी भटक ही रहा था कि अचानक किसी बात को कहने के लिए वो मेरी मेज पत्ते एक लेते हुए छुट पर खडी हो गई । उसकी दोनों हथेलियों ने उसके गालों को ध्यान रखा था और दुपट्टा सडक कर दले में फस गया कराइए उस वक्त अपनी नजरों को संभाल पता तुम्हारे नाम क्या है? उसका मुस्कुराकर पूछा तब से मतलब एक बार मैंने फिर अपनी बेरुखी बरकरार रखने की कोशिश की । ये क्यूँ लडकियों की तरह भाव खा रहे हैं? पूरी चीज कर बोली मुझे अच्छा नहीं लगता तुम मेरे पीछे पडी हो । पता नहीं उसने शरारत से अपनी नाजुक उंगलियाँ मेरे गालों पर छुआ दी । पता नहीं कब क्या मतलब होता है । मैंने झल्लाकर उसकी और देखा बताया नहीं वो जोर से हंस पडी । ये तो कोई बात नहीं हुई तो मुझे अच्छे लगते हो । कहते हैं वो पलट पडेगा । अब कोई है उसके शरारत पर मैं बस खाली खाली ने गांव से देखता रहा । मेरे पास कोई जवाब नहीं था । हाँ तो तुम ने अपना नाम नहीं बताया तो चलते चलते अचानक ठहर गई । संजय पाठक मुझे बताना पडा गज तो मेरी और बढते हुए बोली अच्छा नाम है । संजय पाठक अच्छा तुम बताओ । उसने पूछा नहीं नाम क्या है? ऍम तो पूछो ना मटक कर उसने का पूछो तो दो बता दो तो फिर उनकी क्या अच्छा तरीका है नाम पूछने का और खुशमिजाज वो तो कमाल की है । आपकी बेरुखी तो कहीं आप पर नजर ही नहीं आती । मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं । अच्छे पाठक ॅ के बाद बताओगे क्या तुम मुझे बी रुकी से क्यों पेश आ रहे हो? लडकियाँ तो पसंद नहीं है क्या? या फिर लडकों में दिलचस्पी है । पागल होता हूँ मेरा नाम नीतू है । नीतू जैसवार पागल नहीं समझे में से पाठक अगर दोस्ती पसंद है तो बोलो वही ना मैं चली । इतना कहकर वह सचमुच पलट पडेगी । अरे एरोप् मैंने आवाज भी नहीं रुकी तो मैंने पुकारा नीतू तुमने मेरा नाम हो वो लगभग भागती हुई लॉटरी मेरी और एक बार फिर से पुकारों मुझे तुम्हारी दोस्ती मंजूर है क्या? तो मंजूर है, मुँह है, मंत्री है । वो ऐसे उछल पडी जैसे एक उसकी सबसे प्रिय वस्तु को किसी ने उसके सामने रख दिया होगा । तीव्र गति से मैं इसका चक्कर काटते हुई मेरे बगल में आकर धर्म से बैठ गई । उसके फोन से मैं सिहर उठा

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सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
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