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मेरी अर्धांगिनी उसकी प्रेमिका - 02

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सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
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खाना पीना करते करते लगभग ग्यारह बज चुके थे । आपने सोना चाहता हूँ । मैंने इच्छा जताई । चलिए मैं आपका कमरा दिखा देती हूँ । वहाँ आपका बिस्तर लगा हुआ है । खुशबू ने कहा जी बिल्कुल । मुझे मेरे कमरे तक छोडने गई । मुस्कुराकर गुडाई कहा और लौट गई । बिस्तर पर पडे पडे घंटों गुजर गए । कुछ दिन नहीं आई । वैसे भी मुझे अक्सर नींद की गोलियाँ लेने की आदत थी । अगर आप नहीं ले पाया अटैची गाडी में ही रह गई थी । जब मैं परेशान हो गया और नींद फिर भी नहीं आई तो उठकर मैं अपनी पेंट की जेब को इस उम्मीद पर टटोलने लगा कि हो सकता है तो कैसे कभी रह गई हूँ । नसीब अच्छा था । मुझे गोली मिल गई है । मगर पानी मैं सोचने लगा इसको पुकारूं । मैं ऊपर इधर उधर टहलने लगा । शायद को स्विच । कोई ऐसा संकेत तो मेरे संदेश को वहाँ तक पहुंचा सकें । बिस्तर के बगल में मुझे कॅश नजर आई । मैंने दबा दिया । कुछ पल गुजारे । मीना मेरे सामने खडी थी । पानी की जरूरत थी बिना उसके और देखे हुए । मैंने कहा था दरवाजा बंद हुआ तो लौट गई । थोडी देर बाद जब उन्हें दस तक हुई तो खुद ब खुद खुल गया । मैंने उधर देखा । सामने सिल्की गांव नहीं, हाथ में गिलास थामे हुए दरवाजे पर खुशबू खडी थी । मैं कुछ कहता उससे पहले एक टांग की और जहाँ तक कटे हुए गांव में से तंग निकालकर आगे बढाते हुए बोली यहाँ आपको नींद नहीं आ रही है क्या ही मैं उठ कर बैठे हुए बोला हम को भी नहीं आ रही थी । उसके स्वर में शरारत और होठों पर अजीब सी मुस्कान बिखर गए न उसकी बेवजह कि मुस्कराहट पर कोई प्रतिक्रिया देता । उससे पहले वो मेरे बिल्कुल करीब अगर खडी हो गई । दरअसल नींद की गोली खानी थी इसलिए मुझे पानी मंगाना पडा । मैंने गिलास की तरफ हाथ बढाते हुए कहा आपको डिस्टर्ब करने के लिए मुझे सब कुछ खेद है । उसे पानी गिलास मुझे नहीं दिया । अपने हाथ को पीछे खींचते हुए बोली चलिए छोडेने औपचारिक बातों को गोली इधर दवाई मैंने थमा दिया । आज आपको गोली खाने की कोई जरूरत नहीं है । उसने गोली को फर्श पर कहीं दूर झटक दिया और पांच लगे सोफे पर हम से बैठ गई । घृत ये ये क्या? ये आपने मैं चला उठा । आपने मेरे गोली फेंक दी । आप नहीं जानती कि बिना नींद की गोली के मैं रात भर नहीं सुनाऊंगा । मुझे आदत है इसकी तो मैं तो ये उसने अपनी खुली तंग को दूसरी टॉपर रखते हुए बोली क्या हर रात सोना जरूरी है? वैसे घबराइए नहीं, आज हम है बातों ही बातों में ही रात कर जाएगी । आपकी लीजिए पानी पीछे हो । मेरे दिल की धडकन बढना शुरू हो गई । मैंने एक ही रूट में गिलास खाली कर दिया और बिस्तर पर उन्हें ले गया, जहां आप की शादी हो गई । उसने पूछा जी हाँ, भुवनेश्वर में रूखापन था । एक बात कहूं, आपसे कहीं आपकी पत्नी बहुत नसीब वाली है, जिसे आप जैसा पति मिला है । वरना जिसने रस्सी में संजय जैसा इंसान मिल जाएगी, उसकी जिंदगी बंजर बन जाती है । बात को अपने उद्देश्य की और मुडते देखा तो मुझे अपना रुख बदलना पडा । मैंने हस्कर पूछा क्या आप शादी नहीं करेंगे? शादी का नाम सुनते ही एकाएक उसकी आंखों में चमक आ गई । तीखे स्वर में बोली क्यों नहीं करूंगी? मैं शादी करूंगी और जरूर करूंगी । संजय को ये दिखा कर रहे होंगे कि मैं उसके बगैर भी उसी हालत में रह सकती हूँ, जिस हालत में कभी उसके साथ रहा करती थी । अगर आपका तो उस राप्ती भी आपको ऐसी पाबंदियों में रखे तब पल भर वो मेरी और देखती रही । पर हस कर बोली मिस्टर राज, आप मजाक कर रहे हैं ना? नहीं । मैं पूछ रहा हूँ वो ऐसा नहीं करेगा । अचानक उसके स्वर में कुछ उत्तेजना से आ गई । बेशक नहीं करेगा । मैं मैं मान लेता हूँ । मगर क्या? तो तो उसे भी छोड दूंगी । उसके स्वर्ग की उत्तेजना सातवे आसमान पर पहुंच गई । मैं आपकी आजादी से कभी समझौता नहीं करूंगी । हालांकि उस समय में चाहता तो उसे सवालों ही सवालों में और भी भयानक बना सकता था । परंतु ले जाने क्यों मुझे उस पर तरह से आ गया । क्या मैं आपके होने वाले पति का नाम जान सकता हूँ? शायद ये मेरा आखिरी सवाल था । देशक मुस्कुरा पडी थी । बैरिस्टर इकबाल अंसारी पांच अंसारी इधर हम सुना तो जैसे किसी ने मेरे सर पर हथौडा मार दिया हूँ । मैं कुछ सालों तक बाद आवाज उसकी और फटी फटी नजरों से देखता रहा । वो संभाला तो बोला यहाँ उसी अंसारी की बात कर रही हैं जिससे आज आप मिलने गई थी । हाँ, बहुत अच्छा इंसान है वो आॅफ उसने अपने अंग्रेजी शब्दों पर सारी उत्तेजना उडेलती । मैं उसके चेहरे पर रह रहे हजारों सपनों को महसूस करने लगा । यहाँ उसने पुकारा आपकी तो थी । उस से मिलने आपको कैसा लगा? अच्छा लगता है वो आपको पसंद नहीं आया । शायद उसने मेरे शब्दों में छपी नीरज था को भांप लिया था । मैंने उसे कोई जवाब नहीं दिया जबकि वह देर तक मेरी और देखती रही । एक बात पूछूं से थोडी देर बाद मैंने कहा पूछे आप धर्म परिवर्तन से परेज नहीं करती । धर्म परिवर्तन मेरी बात सुनी तो एक का एक जोर से हंस पडी । लगता है राज इस मामले में आप भी पुराने खयाल ही रहते हैं । कह सकती हैं आप? मैंने कहा मगर मुझे लगता है कि धर्म हमारे पूर्वजों की जागीर है जिसके लिए उन्होंने न जाने कितना बलिदान दिया होगा । तब जाकर इसे अपने मूल स्वरूप में इसे सहेजकर रख पाए हैं और जो अब हमारी जिम्मेदारी है । मेरे इस बात पर एकाएक उसकी खामोशी बता रही थी कि वो मेरी बात से सहमत नहीं थी । मुझे उसका ये व्यवहार अच्छा नहीं लगा । मैंने बिस्तर पर लेटकर करवा ली । चंद छडों तक वो कुछ सोचती रही । तेरे का एक अपने गांव को संभालते हुए उठी और तीव्रता से आकर मेरे बिस्तर में बैठ गई । मुझे उसकी हरकत अच्छी नहीं लगी । आउट कर बैठ गया । क्या महाराज उसके आहोम शरारत उतर आई थी । होली लगता है आपको और इतनी पसंद नहीं है या फिर उनसे डरते हैं? जी हाँ मैं डरता हूँ । बहुत करता हूँ मैं इतना बडा आप ऍम उसे ठीक है । ठीक है । बहुत तो बोली मैं जा रही हूँ अब घबराइए नहीं मैं ऐसा करने का कोई इरादा नहीं है । मैं तो वो बिस्तर से उतरकर फर्श पर खडी हो गई । फिर देर तक अजीब सी निगाहों से मेरी और देखती रही । उसके होठों पर मुस्कान अब भी बरकरार थी । यहाँ ऍफ बोल पडी वाकई आप अभी तक आपको किसी चीज का कोई असर नहीं हो । क्या मतलब? मेरा बदन झनझना उठा । बहस कर बोली । डॉक्टर ने तो कहा था पंद्रह मिनट में असर दिखना शुरू कर देती हैं । अरे वो तो मैंने संशय भरी निगाहों से उसकी ओर देखा । वो अचानक से कुछ याद आया । वो तीव्रता से बिस्तर पर चढी और अपने गांव के जल्दी जल्दी ऊपरी तीन चार बटन खोल दिए । बटन खुलते ही चौदह कपडों में सिमटी चांदनी मचल की तूफान भर्ती हुई । हवा मारे लहरा उठी । मैं उठ कर वहाँ से हट पाता । उससे पहले वह तेज ना मैं झुकाई थी । मेरी छाती तक रात कब और किस तरह गुजर गई थी । नशे में पता ही नहीं चला । जब तीन खुली तो सुबह का नौ बज रहा था । मैं बिस्तर से जल्दी जल्दी उठना चाहा तो एक बार भी लगा कि लडखडाकर फिर चाहूंगा । कृषि तरह संभलकर उठा और बिस्तर पर नजर गई तो मुझे अपना सर पीटना बडा । रात में बिस्तर को पूरी तरह रौंदा गया था । इसके निशान अब भी चीज जीतकर उसकी गवाहियाँ दे रहे थे । मैं तीर तक खाली खाली नजरों से बिस्तर की और देखता रहा । उस वक्त बिस्तर की हर भाषा मुझे समझ जा रही थी । तब ही अचानक टाॅपर मुझे किसी के कदमों की आहट महसूस हो । मैंने पलट कर देखा । मेरे सामने खुशबू हाथ में चाय का कप थामे हुए किसी अदाकारा की तरह मुस्कुराती हुई खडी थी मुझे अपनी और निहारता हुआ देखी तो उसके होटों परछाई मुस्कान का खर्चा हो पडता चला गया । हस कर बोली ऍम, आप ड्राइवर गेस्ट में आपका इंतजार कर रहा है । मैं उसकी आधी अधूरी बात सुनी भी नहीं, यकीन से नहीं कह सकता हूँ । मगर अंधेरी अंदर मैं कितना तडपा उसका मुझे जरूर अनुमान था । वो लहराती हुई जैसे ही मेरे इतने करीब भाई की मैं उसे छुपाता, मेरा हाथ हवा में लहराया । तरह तरह उसके गाल पर मेरे हाथों की तस्वीर छप गई । चाय का कप उसके हाथ से गिरा, टूटा फर्श पर बिखर गया । शिष्य कही की जांच भेजते हुए मैं चिंघाड पडा । सच कहूँ तो उस वक्त मेरी आंखों में खून कराया था उससे बेहतर तो बाजारू पडते हैं । कम से कम तुम्हारे जैसे शराफत का चोला ओढकर नारी समाज को इस तरह बदनाम तो नहीं करती । अच्छा युवा मेरा दोस्त आजाद हो गया तो हर साल से मैं तेजी से हंगर की और लगता था शर्ट निकली और से पहनता ऍम लगा ।

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सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
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