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मेरी अर्धांगनी उसकी प्रेमिका - 77

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सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
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रात लगभग ग्यारह बजे तक मैं इलाहाबाद पहुंच गया । स्टेशन के बाहर एक होटल की गाडी मेरा इंतजार कर रही थी तो मुझे लेकर सीधा होटल पहुंच गई । मैंने कमरे पर पहुंच करना आया और फिर डिनर के लिए लॉबिंग आ गया । उसने मुझे पहली बार एहसास हुआ जीवन के कुछ रातें कितनी हम भी होती हैं । तब बिस्तर पर लेटे हुए सुबह होने का इंतजार कर रहा था । तभी एक मेरे होटल के फोन की घंटी बजती थी । मैंने सामने दीवार पर लगी घडी की और देखा । सुबह के सात बज रहे थे । मैंने फोन उठाकर हेलो कहा । आप राज बोल रहे हैं । उधर से आवाज आई जी बोल रहा हूँ । मैं बोल रहा हूँ समझे का दोस्त मैं कल शाम से आपको फोन लगा रहा हूँ लेकिन अब मोबाइल शायद अच्छा है हूँ । मैंने लगभग कर अपना मोबाइल उठाया । उॅची जताते हुए कहा सौरी मैंने ध्यान नहीं दिया । कोई काम था आपको मुझसे फॅमिली तूने कल शाम मुझे फोन किया था कि आप खुशबू के मम्मी पापा से मिलने वाले हैं । जहाँ दरअसल वो लोग इलाहाबाद में नहीं है क्या बच्चों पडा कहाँ है वो लोग? इस समय के बाबा की छुट्टियाँ चल रही है इसलिए वो गांव गए हुए हैं तो अब मैं क्या करूँ? आप तैयार हो जाइए । मैं आ रहा हूँ आपको होटल से पिक कर लेता हूँ और उसके बाद हम दोनों उनके गांव के लिए निकलेंगे । उनका काम यही कोई दो ढाई घंटे की दूरी पर है । सारी आपने अपना क्या नाम बताया था । मैंने उस वक्त ध्यान नहीं दिया । फॅमिली सारे मुश्किल हाल कर दी और मैं ये खबर सुनकर तो मेरे पैर के नीचे से जमीन ही खिसक गई थी । नहीं राज, आपको थैंक्यू बोलने की जरूरत नहीं है । आप शायद मेरा नाम पहली बार सुन रहे हैं । मगर मैं आपको अच्छे से जानता हूँ । संजय आपकी अक्सर बात किया करता था । अच्छा जी दरअसल वो मेरा पडोसी था और दोस्त नहीं हम दोनों । यही अल्लापुर में पास पासी रहते थे । आप के बारे में जानकर अच्छा लगा । किशन अपने लिए वहाँ से मैं तैयार होता हूँ । मैंने फोन रख दिया । सुबह के लगभग साढे दस बज रहा होगा । हम किसन की मोटर साइकिल से उस गांव तक पहुंच गए । गांव से लगे हुए एक छोटे से बागीचे में खेल रहे बच्चों से मैंने पूछा और गिरीशचन्द्र जी का घर कहाँ है? गिरीशचन्द्र खुशबू के पिता जी का नाम था । हम उनके बताए रास्ते से जल्दी ही उस घर के सामने पहुंच गए । मिट्टी से बने उस घर के सामने काफी जगह थी । दाहिनी और एक नीम का बडा सा पेड था जिसके नीचे तीन चार बच्चे खेल रहे थे । अमरजीत बच्चा चिल्ला उठा अल्लू देश और धर्मा गांव से कौनो मनाई आवा है । मुझे उसके अंदाज पडोसी आ गई । कहते वक्त तो बच्चा जोर सोचना । हालांकि मुझे पता नहीं चल पाया की उन बच्चों में से कल्लू कौन है । फिर भी मैं उसके नाम से पुकारा । मेरे संबोधन पर एक तीन चार साल का नाटा सा बच्चा अपना सिर खुजलाते हुए मेरी और देखने लगा ऍम घर पर मैंने पूछा मेरी और अर्थपूर्ण नजरों से देखने लगा बोला कुछ नहीं बाबू घर में है तो हारे डिसन में हस्कर दोबारा पूछा जीत रहे हैं । अपने घर के दरवाजे की ओर इशारा करते हुए उसने कहा जाके बुला लूँ हाँ बुला लो । वो अंदर की ओर तेजी से भागा । मुश्किल से पंद्रह सेकंड बिना गुजरे होंगे कि वह उसी तीव्र गति से लौट भी बडा क्या हुआ मेरा बुलाया हूँ । मैंने पूछा मगर उसने मेरे बात पर बिना ध्यान दिए ही हसते खिलखिलाते हुए सीधे अपने दोस्तों के बीच फैसला हुआ ताली बजाते हुए कहने लगा ही हम माँ हमरे बाबू को भारत है हमरी अम्मा । हमरे बाबू को भारत है । मुझे उसकी नागवानी पर हंसी आ गई । मैं थोडी देर तक उसके और देख पा रहा हूँ । किसन की और देखते हुए मैंने कहा बच्चे भी कितने मासूम होते है ना दुनिया दारी की अच्छाई बुराई से कोई लेना देना नहीं होता । अब देखो ना अपने पापा की जब को सरेआम उछालते हुए भी उसे एहसास नहीं हो रहा कि वह घर क्या रहा है । नहीं कह रहे हैं आप । किसान ने कहा बॅाल इन्हें अपनी खुशियों से ही फुर्सत नहीं मिलती है । सब सोचने के पास अपने छोटे से संसार में मस्त रहते हैं । कुछ देर तक जब उधर से कोई नहीं निकला तो मैं खुद ही दरवाजे को खटखटाने के लिए आगे बढा । हालांकि आगे बढते हुए मैं सोच रहा था कि शायद मैं हालत दरवाजे को खटखटाने जा रहा हूँ क्योंकि मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि वो मासूम सा लडका कुछ का भाई हो सकता है । मगर मैं विकल्पहीन था । आगे बडा दरवाजे के पास पहुंचा तो और उसकी आवाज आ रही थी । शायद किसी पर चीख रही थी । मैंने दरवाजा खटखटाकर खुलने के इंतजार में खडा हो गया । लगभग दो तीन मिनट बाद एक दुबला पतला सा इंसान इस उम्र पचास से पचपन साल की रही होगी । बाहर निकला मुझ पर नजर पडते ही वह तीव्रता से आपने ऊलजलूल हो चुके शर्ट को ठीक करके अपने बिखरे वालों को चिपकाने की कोशिश करने लगा । उसके चेहरे के जुडे हुए रंग को देखकर मुझे हंसी आ गई जिसे मुश्किल से मैं पाया । मैंने खुद को गंभीर दिखाते हुए कहा काफी देर से मैं आपका इंतजार कर रहा हूँ । कुछ दिनों तक को एक तो मुझे ऐसे देखता रहा जैसे मैंने उसे रंगे हाथों चोरी करते हुए पकडा लिया हूँ । हो समझे तो हंसने की जबरदस्ती कोशिश करते हुए बोला हूँ कहा है कि खाना खाये लागे हवा दोनों काम था हम से ये क्वेश्चन रात ठिकाना में हम हमारे नाम है लेकिन हम आपको पहचान नहीं पावा । कुछ तो जानते हैं उसको कुछ देर तक वो सोचता रहा फिर कुछ याद आया तो खास पडा हो तो आपको शायद खुशबू बिटिया के घर जाए । चाहत हो उनके पापा भी हमारे नाम राशि है । चलिए चलिए मैं आपको वहाँ तक छोड आता हूँ । आजकल तो ये हैं छुट्टी में आया है नया मैं और किसान उसके पीछे पीछे चल पडेंगे साहब, आप बताएंगे अचानक पीछे मुडकर उसने मेरी और देखा था क्या है? खुशबु का तलाक हुई है आप लोगों का कुछ पता है? था नहीं, मैंने तो नहीं सुना । मैंने धीरे से कहा आप बात कर रहे हो । यहाँ तो पुरे गांव में चर्चा है । कहते कहते वो टीका खडा हो गया । सामने घर की ओर इशारा करते हुए बोला हो रहा गिरीश बाबू का घर मैं गौर से देखा था । उस घर के आस पास की खरोंच अगर तुलना की जाए तो वहाँ पर सबसे अच्छा घर वही था । पूरी तरह से बना हुआ और उसके आगे छोटा समाधान जिसके कोने पर चितकबरी गाय बनी हुई थी । मैंने किशन की और देखते हुए खुश कर बोला चलिए ये लडाई भी लड कर देखते हैं । कुल हम अभी घर के चबूतरे की सीढियां ही चल रहे थे कि एक डॅडी बडी मुझे शरीर पर बनियान और कमर पर तौलिया लपेटे हुए हमें देखा तो एक का एक अटक गया । लोग काउंट हैं । उसने पूछा जी जी से मिलना है होली क्या काम है अभी अंग्रेजी जी नहीं हूँ । उसने कहा तो मैं मारा गया । उसके बाद करने के अंदाज से लग रहा था कि वह सुनने में काम और बोलने में ज्यादा यकीन करता है । किसान की ओर इशारा करते हुए बोला, मुझे लग रहा है कि मैंने कहीं आपको देखा है । उसके बाद सुनी तो किसन मेरी और देखने लगा । उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो उस की बात का जवाब क्या गई । जबकि संजय की शादी में वो किसान ही था । इस पर शादी की सारी व्यवस्था की जिम्मेदारी थी । एक किसान है समझेगा तो आपने मुझे उस की शादी में ही देखा होगा । फॅस कोई का एक ऐसे चौक पडे जैसे उनके सामने अचानक किसी ने बम रख दिया हूँ । थोडी देर तक अजीब सी नजरों से हमारी और देखते रहे । फिर एक का एक उनके होठों पर हल्की मुस्कान छोड पडी । हाथ हिलाते हुए बोले, अरे आप लोग वहाँ क्यों खडे हैं? आइए बैठे उन्होंने दरवाजे के पास रखी चारपाई की और इशारा किया । हम लोग बैठे थोडी देर तक हम सब एक दूसरे की और देखते रहे । शायद समझ नहीं पा रहे थे की बात कैसे शुरू की जाए । चाहे लेंगे आप लोग? अचानक उन्होंने पूछा अच्छी नहीं शुक्रिया । मैंने मुस्कराकर कहा हमें कुछ आपसे बात करनी थी इसीलिए यहाँ तक आए हैं आपका परिचय मेरा नाम राज है । मैं भी समझता दोस्त हो तो आप संजीव की तरफ से बात करने वाले हैं या मेरी बेटी खुशबू की तरफ से । हालांकि हम उनके सवाल को जीत कह सकते हैं मगर वो गलत नहीं था । मैंने मुद्दे को बदलते हुए कहा, दरअसल हम चाहते हैं कि वो दोनों तो दोनों नहीं उन्होंने मेरी बात बीच में ही कर दी । आप उस लडकी के आप से बात कर रहे हैं जिसने अपनी बेटी हुई है और दुर्भाग्य सही । खत्म का आरोप उसके पति पर है । इसलिए फैसला करिए की आप एक कत्ल के आरोपी के लिए मेरी सहानुभूति लेने आए हैं । जहाँ पंखुडी की माँ के लिए इंसान अब मैंने कहा तो थोडी देर तक गौर से मेरी और देखता रहा । शायद उसे अपने कानों पर यकीन नहीं हो पा रहा था । तब तक क्या क्या वह अपने अपने कानों पर हाथ लगाते हुए मेरी और झुका ये मैंने कहा इंसाफ मगर सिर्फ माँ के लिए नहीं, पिता के लिए भी भी आखिल का एक नाम हो गई । बेटी तो उसमें भी हुई है । ये कैसे कह सकते हैं? इस सवाल का जवाब अपने आप से पूछे । मैंने सुना है कि आप भी अपनी पत्नी से अलग रहते हैं । जबकि आपकी बेटी अपनी माँ के साथ आप मुझसे क्या चाहते हैं? एक का एक उनके स्वर बदल गए । बचाता हूँ कि आप कुछ मुझे से कहे कि वह नामजद रिपोर्ट वापस लेकर सिर्फ बेटी के कपडे की रिपोर्ट करवाए ताकि पुलिस इसकी नए सिरे से जांच करें और पंखुडी के वास्तविक कातिल तक पहुंचा जा सके । और सच कहूँ तो यही वो रास्ता भी है जिससे सही मायने में पंखुडी को न्याय मिल सकेगा । तो मेरी और देखने लगा नजर नहीं गई । वैसे आप को क्या लगता है? मैंने उनकी ओर झुकते हुए पूछा । हालांकि उनकी आंखों में सवालों का संबंध था मगर मैं भी समंदर को सुखाने के इरादे से धनुष लेकर उनके सामने खडा हो गया । अब या तो मुझे मार्ग पे या फिर से तू बनाने का रास्ता बताए, मेरी बात नहीं सुनेंगे । थोडी देर बाद उन्होंने कहा क्या कहा आपने? मैंने उनकी बात सुनी तो पडा चलो छोडो तक मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ । मैंने जोर देते हुए कहा मैंने ठीक से सुना नहीं यहाँ राज्य । आपने अभी जो भी कहा, ऐसा नहीं है कि मैं वो सब जानता नहीं । उन्होंने अपने सर झुका लिया । मैंने उनकी आंखों को गौर से देखा । उनमें एकाएक नमी आ गई थी । अपनी बात जारी रखते हुए बोले मुझे पता है संजय ने अपनी शादी निभाने की भरपूर कोशिश की है । मगर कोई था जो खुशबू के दिमाग पर इतना हावी हो गया कि वह सही और गलत के बीच फर्क करना भूल गई और पंखुडी के कत्ल के मामले में भी उसने यही किया । जबकि व्यक्ति का तौर पर मुझे लगता है कि संजय निर्दोष है । फिर आपको क्या लगता है कि खत्म कृष्ण क्या ये मतलब किसी और ने नहीं बल्कि इकबाल नहीं किया है और यकीन माननीय की या बाद मैंने खुशबू को कई बार समझाने की कोशिश की है । पर क्या आप जानते हैं कि लडकियों की सबसे बडी त्रासदी क्या है? क्या वो हमेशा अपने माँ की तरह बन जाती है और खुशबू भी उसी में शामिल हो गई है? मेरी बात सुनने की बजाय अपनी माँ की सुन रही है । उनकी बात सुनी तुम उठकर खडा हो गया । उनके पैरों तक छुपकर उनको चरणस्पर्श किया और अपना हेलमेट उठाते हुए कहा अच्छा मुझे चलने की इजाजत दीजिए । उन्होंने कुछ नहीं कहा । उनकी भरी हुई आंखें सब कुछ बयां कर गई ।

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सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
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