Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

मेरी अर्धांगनी उसकी प्रेमिका - 74

Share Kukufm
मेरी अर्धांगनी उसकी प्रेमिका - 74 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
6 KListens
सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
Read More
Transcript
View transcript

अखबार को सोफे के सामने लगी मेज पर फेंक कर मैं बातों में घुस गया । जब राहत होकर बाहर निकला सोफे के सामने रखी मेज पर चाहे मेरा इंतजार कर रही थी, क्या बात है राज्य बिना किसी फोन या सूचना की एक का एक यहाँ आना पडा सब कुछ ठीक ठाक है ना? भावी कमरे में दाखिल होते हुए बोली अभी कुछ जरूरी काम था इसलिए चलाया भी हो रहा है क्या? दरअसल बॉबी मेरा दो साल का भतीजा था । नटखट मैं जब जब भी वहाँ जाया करता, उसके साथ रूम क्रिकेट खेलना नहीं बोलता हूँ । बोलता भी कैसे अपनी दूसरी शताब्दियों से जैसे ही फिर सपने होता, किसी कोने में पडे अपने बल्ले को लेकर आ जाता और गेंद थमाते हुए अपनी तो आपकी आवाज से संकेत करदाम तो मैं उसके लिए गेंद हैं को सीवी कैसी है? भाभी ने पूछा ठीक है मैं चाहकर अपने चेहरे का रूखापन नहीं छुडावाया भरे मुख्यमंत्री बोल रहे हूँ अभी हंस पडी सब ठीक ठाक तो है ना या फिर कोई तकरार हो गयी क्या भागेंगे आप भी हकीकत को छुपाने की कोशिश में मुझे जबर्दस्ती हटना पडा । अच्छा तुम चाहती हूँ तब तक मैं बना लेती हूँ । आॅल्टर किचन की ओर चली गई थी । अचानक मेरी निगाह अखबार पर बडी तो मैंने उसे उठा लिया । पहले ही पृष्ठ की पंक्ति पर नजर पडी तुम्हारी सौ से जहां की तहां थम गयी । संजय की जमानत खारिज हो चुकी थी और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था । नीचे ठूठी धुंधली सी संजय की तस्वीर भी छपी हुई थी । हो सकता है मैं परेशान हो गया हूँ । मैं तेजी से उठकर अपने मोबाइल की और बडा तभी अचानक दूर ही चलना बडी राज थोडा देखोगे क्या कौन है दरवाजे पर? किचन से तेज स्वर में भावी ने कहा जी भावी मैं सीढियों उतरता हूँ दरवाजे की और बडा दरवाजा खोला तो सामने नहीं तू खडी थी । अरे आप मैंने चौंकते हुए कहा अभी मैं आपको फोन करने वाला था । संजय की जमानत खारिज हो गई हैं । उसकी आंखों में कोई तूफान था जिससे वो सामने की कोशिश करते हुए बोली मैंने अभी भी अखबार में बडा जांच संजय ठीक नहीं है । उसे बचा लीजिए उसकी आंखें एका एक झड जाना पडेगा । मुझे लगता है कि आपको अपने भैया से मदद मांगी चाहिए । पुलिस उनकी बात सुनी जी महीने तो वहीं इस मुद्दे पर हमारी कोई मदद नहीं कर सकते क्यूँ क्योंकि केस अदालत के पास है और हमें फिलहाल किसी अच्छे वकील की जरूरत है । एक बाल अंसारी के कहने पर खुशबू ने पुलिस को पैसे दे दिए हैं ताकि वो लोग संजय के साथ बुरा सलूक करें । पुलिस को हार आज पुलिस संजय को बडी बर्बरता से बीट रही है । मुझे डर है कि उनकी मार्को संजीव बहुत देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाएगा । वो मैं पल भर के लिए जैसे सोचना ही भूल गया हूँ । मेरे नजरिए नीतु के चेहरे पर अटक कर रह गई तो कुछ देर तक कहीं जा रही थी लेकिन मैं कुछ सुन नहीं पा रहा था । जांच अब सुन रहे है ना उसने मुझे झकझोरा । मुझे होश आया तो मैं बगैर कुछ बोले तीव्रतर से सीढियों की और भागा भागी । किसी से फोन पर बातें कर रही थी तो मुझ पर निगाह पडी तो बोली आज शिव जी का फोन है, तुम से बात करना चाहती है । मैं बाद में बात करूंगा । भागेंगे अभी मुझे किसी जरूरी काम से बाहर जाना है । कहाँ घबराकर उन्होंने मेरी और देखा मुझे पता नहीं है लेकिन जाना पडेगा फोन पर मैं अपनी खबर देता रहूंगा । शर्ट पहनते हुए मैंने कहा राज्य कहाँ जा रही हूँ । एक और भैया बात हमसे निकल पडे बाल भर के लिए मैं सहन गया । फिर खुद को संभालते हुए कहा भैया, दोस्त क्या जा रहा हूँ? बाहर आया तो नहीं तो अपनी कार की ड्राइविंग सीट पर बैठी मेरा इंतजार कर रही थी । बगल की सीट पर बैठ गया । कार सडक पर दौड बढेंगे । कई मोड और सडकों को पार करते हुए अच्छा ना मुझे जोर का झटका लगा । कार खडी हो गई । नहीं तूने मेरी और देखा हूँ । पुलिस स्टेशन उसके होट लहराएंगे, यहाँ यहाँ क्या करेंगे? हम ऍफ सवाल किया । संजय यहीं है । बाहर से उतरते हुए वो बोली वो मैंने नहीं होगी और देखा और फिर पुलिस स्टेशन की सीढियाँ चढते हुए उस लॉकप रूम के सामने खडे हो गए । इसकी मोटी दीवारों से घिरी चित्तौडी फर्श पर बेसुध और लहूलुहान संजय पडा था । एकबारगी उसपर निभा पढते ही मेरा मन था । एक इंसान के साथ किसी जानवर से बदतर सलूक किया गया था । मैंने छिपे निगाहों से नीतू की और देखा उस संजय को उस हालत को देख नहीं पाई और खून कर खडी हो गई । उसके वोटों से तभी हुई उसकी निकल पडी । इसमें मेरी पीडा को और भी बढा दिया । मैं खुशबू के बारे में सोच रहा था कि इस तरह बेरहमी से संजय को मरवाने के लिए पैसे देने वाली क्या खुद इस हालत में संजय को देख पाएगी? क्या फिर उसका पत्थरदिल तब भी नहीं निकलेगा? संजय मैंने आवाज भी मगर उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी । संजय मैंने पूछा आवाज भी तब भी उसमें कोई दिक्कत नहीं थी । संजय एक का एक में चिल्हाड पडा । इस बार संजय की शरीर में कुछ हरकत हुई । उसके आपने फर्स्ट से जब के चेहरे को उठाकर हमारी और देखा उस की सूजी हुई आंखें ठीक से खुल भी नहीं पा रही थी । नीतू की निगाहें जैसे ही उसके घायल चेहरे पर पडी तीव्रता से पलटते हुए दीवाल से छुट गई । अपने होठों पर उसमें रोमांस ढूंढ लिया था की उस की सुर्खियां मु के भीतर ही दफन हो जाए । संजय मैं तो उस क्या हो गया? संजय क्यूँ चले आए थे तो दिल्ली से मैं सलाखों की छडों को हिलाने की कोशिश करते हुए बोला काश काश मैं तो वही रोक लेता हूँ । आपको मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए किसी ने पूछा पीछे पलट कर देखा मेरे पीछे बडी बडी मूंछों वाला एक वर्दीधारी इंसान फटी फटी ने गांवों से मुझे देख रहा था मेरा नाम राज है । मैंने पूरा दब के साथ जवाब दिया और मैं दिल्ली से आया हूँ । ये ऍम इंसान तुम्हारा कौन लगता है तो उसका मिला । मैंने बिना डरे हुए से जवाब दिया तुम पर लानत है इतना गिरा हुआ इंसान तो भारत दोस्त है तो ऍम तो मैं इसका गुना भी नहीं मालूम । वो जोर से हंस पडा । जानते हो । अचानक गंभीर होते हुए बोला इसमें अपनी चार साल की मासूम लडकी को अपने ही हाथों से गला दबाकर मार दिया । वो भी सिर्फ इसलिए तलाक के बाद । अदालत ने उसे उसकी माँ को सौंप दिया था । वो लोग यकीन करोगे तुम बढिया को कैसे पता? इसका खून इसी ने किया है । इसने खुद कबूल किया है । उसकी रिकॉर्डिंग है । हमारे पास कबूलनामे की रिकॉर्डिंग पीठ कर भी तो करवाई जा सकती है । मैंने उसकी आंखों में आंखें डालते हुए कहा जैसे आपको पता है कि कोर्ट में आपके इस तथाकथित कबूलनामे को सबूत के तौर पर नहीं पेश किया जा सकता है । आप गलत आरोप लगा रहे हैं । पुलिस बार पुलिस किसी को ऐसे ही क्यों पडेगी । हो सकता है उसके लिए किसी ने पैसे लिए हूँ की क्या क्या सकते हैं । आप आप देना वजह मुझ पर इल्जाम लगा रहे हैं । समझे मैंने संजय की और एक बार फिर देखा ये मानने के लिए की पंखुडी का कभी संजय नहीं किया है । आप के पास कोई ठोस वजह है? आपको पता है ना कि आप एक पुलिस ऑफिसर से बे वजह बहस कर रहे हैं । जानता हूँ मेरी पीडा कुंठा का रूप ले चुकी थी । लेकिन आपने बताया नहीं । इसके लिए आपको कितने रुपए दिए गए थे? दस तीस हजार पचास लाख लाख वो इस तक मेरी और देखने लगा । मैं जानता था के अंदर ही अंदर उबल रहा होगा । मैंने उसकी कोई परवाह नहीं करूंगा । साहब एक एक मेरा स्वर भारी हो गया । रियात पैसे लेकर किसी को सजा देते हैं । मैं काम करिए जिसमें आपको संजय को टॉर्चर करने के लिए पैसे दिए थे । उसे टॉर्चर करने के लिए मैं आपको उसका पांच गुना पैसे दूंगा । बोलिए, आप संजय की जगह से टॉर्चर कर सकते हैं । आप आप आप मुझे खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, वो वो हटना पडा । देखा हुआ इंसान और कितना दिखेगा? आप बस इतना बताइए कि सौदा मंजूर है । आपको उम्मीद और एक तक देखने लगा । मैंने जेब से अपना विजिटिंग कार्ड निकाला और उसे हम आते हुए बोला मैं फोन का इंतजार करूंगा । पुलिस स्टेशन से लौटते वक्त नीतू बिल्कुल खामोश कार के हैंडल घुमाती हुई भरी भरी आंखों से बस सडको देखती रही । मैं उसके दिमाग में चल रहे दोनों से अच्छी तरह वाकिफ था । वासु को रोकने की कोशिश में बार बार अपने होठों को दांतो तले दबा लेती । भैया के घर के सामने कार रोकी तो मेरी और देखने लगी । क्या आज आपको क्या लगता है? उसमें पूछा आपके पास दरोगा का फोन आएगा? पता नहीं । मैंने वोट भेजते हुए कहा अगर आपको लगता है कि संजय के लिए मेरी कहीं जरूरत पड सकती हैं तो जरूर बताइएगा । उसके लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ । जी ठीक है कहते हुए नकार से उतर गया । घर पहुंचा तो शिविर फोन मेरा इंतजार कर रहा था । मेरी राज कुमार गए भी नहीं रहा । लोग शिव जी से बात करूँ कह रही है । उसने तो मैं कई बार फोन लगाया तो मैं उठाया ही नहीं । अभी कुछ बात ही ऐसी थी । वक्त नहीं मिला । मैंने फोन थाम लिया । टीवी मेरी आवाज सुनते ही एक एक रो पडी । शिविर मैंने पुकारा । फिर वो कुछ देर तक कुछ कहती रही और मैं सुनता रहा

Details
सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
share-icon

00:00
00:00