Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

मेरी अर्धांगनी उसकी प्रेमिका - 68

Share Kukufm
मेरी अर्धांगनी उसकी प्रेमिका - 68 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
6 KListens
सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
Read More
Transcript
View transcript

रविवार का दिन था । हम दोनों घर पर ही थे । एक दोपहर को पंखडी को दस शुरू हो गया ना उसे लेकर पांच ऍम गया । दवा कराने के बाद फुर्सत नहीं जब डॉक्टर दस होने का कारण बताया है तो मेरे पैरों तले से सभी नहीं सकते हैं । उसने कहा असल अस्वभाविक तनाव के कारण ये दस हुआ है । आपका बच्चा न समय से हो पाता है और नहीं पूरी नींद माता है । बना हूँ मैं चौक पडा । चार साल की बच्ची को क्या हो सकता है । इंसान की यही तो उम्र होती है जिसमें वो पूरा जीवन जी लेते हैं । इस उम्र में ना तो से रोटी की फिक्र होती है जबकि होते पूछा तो साहब अभी तो बच्ची हैं । पीस को कौन सा हो सकता है आपके घर में उसके अलावा और बच्चा है । इस इस का अक्सर झगडा होता रहता हो या आप लोगों से ज्यादा प्यार करते हो जिससे से जलन होती हूँ । छगन इतनी कम उम्र में? यहाँ यही वो स्वभाव है जो व्यक्ति जन्म के समय ही साथ लेकर पैदा होता है । ऍम डॉक्टर सब ये एकलौती है इकलौती ऍफ करने का अच्छा आपने का रिश्ता कैसा है? मतलब आप पति पति के बीच में कभी झगडा होता है क्या? क्या मतलब? मैंने आॅफ देखा आपका मतलब है कि हम दोनों के झगडे से कितना हुआ है? जी उसने अपनी फोटो भेज रहे हैं मगर उसकी आंखों में दिख रहा था कि वो अपने इस बात से पूरी तरह संतुष्ट नहीं था । असमंजस भरे स्वर में बोला हो सकता है तो नहीं हो सकता हूँ । मैं चुप था । देखिए आप ये मैं समझी की छोटी है । हालांकि छोटी बच्ची ही है । इस बार उसकी आंखें आत्मविश्वास से चौंक उठे । वो अपनी बात जारी रखते हुए बोला आपको लगता होगा कि उसे आप लोगों के झगडों से क्या लेना देना वैसा नहीं है । आजकल के बच्चे बहुत सेंसिटिव है । ऍम आप को चाहिए कि अपनी बेटी को इस वक्त खुला और खुशहाल माहौल दें । उसके साथ थोडा वक्त गुजार रहे चीज मैं तो ख्याल रखूंगा क्लिनिक्स लौटकर में जैसे ही सीढियां चढकर बरामदे में घुसा बैडरूम की खिडकी सामने आ गई । आज उस पर पडता नहीं था । मैं वहीं ठहर गया । विश्व बिस्तर में पेट के बल लेटी हुई हाथ झटक झटक कर फोन पर किसी से बात कर रही थी । ना उसकी बात सुनने की कोशिश करता, उससे पहले वहाँ की शांति को भंग करते हुए पंखुडी बोली, पापा, अब यहाँ फॅमिली है । अंदर चली ना । मैं राम था की खुशबू भी चौकन्नी थी । पंखुडी की आवाज सुनते ही वह तेजी से बिस्तर पर पार्टी और इस दौरान फोन उसके हाथ से गिर गया । मैं उसके चेहरे को गौर से देखा । उसके चेहरे की रंगत एक गायब हो गई । चम्मच दिनों तक मूर्ति बनी । फटी फटी आंखों से मेरी और देखती रही । होश आया तो बिजली की गति से उसने फोन उठाया । अच्छा रखती हूँ । कहा और फोन काट दिया । मैंने कुछ नहीं कहा । चलता हूँ । बिस्तर के पास पहुंचा और पंखुडी को उसमें लगा दिया । पंखुडी कैसी हो? मैं कोई सवाल करने की कोशिश करता । उससे पहले उसने पंखुडी को अपना मुद्दा बना लिया । पंखुडी को दस होने के बावजूद कौनसी होगी जैसे मटक मटक कर किसी से बातें करेगी । पंखुडी मुस्कराकर उसकी और देखी तो बिना वक्त गवाएं तीव्रता से पंखुडी की और आपकी और उसे अपने गोदी में उठा लिया । हालांकि ये कोई पहला मौका नहीं था । खुशबू हर ऐसे मौके पर पंखडी पर प्यार लुटाना शुरू कर देती थी । शायद वो जानती थी की पंखुडी मेरी सबसे बडी कमजोरी थी । दोपहर ढलान पर थी । घडी का कांटा लगभग चार बजा रहा था । वो बिस्तर से उठी और अचानक आईने के सामने खडी होकर सजने संवरने लगी नहीं जा रही हूँ । मैंने पूछा हाँ थोडा ऑफिस का काम था इसलिए जाना पड रहा है । लेकिन आज हरिद्वार है, जानती हूँ उसे घूरकर मेरी और देखा आज काम नहीं हो सकता क्या इससे पहले तो तुम बुधवार को कभी नहीं गई । ठीक है, पहले नहीं गई तो कहाँ लिखा है कि इतवार को कभी काम नहीं हो सकता । वो लेकर एक्वीफर पडेगा । उधर पटेल सर को इधर तो तुम दोनों ने मेरा जीना हराम कर दिया है । पटेल ने ना तो इस बार देखते हैं ना सोमवार । जब भी इच्छा हुई मुझे ही काम पर लगा देते हैं । और तो तो होगी अपनी टीका । टिप्पणी में कभी बात नहीं आती । मैं चुप हो गया । वो सस्ती समझती रही । मैं पंखुडी का लेकर वहाँ से निकल गया । जब लौटा तो मैं और पंखुडी दोनों भी बाहर जाने के लिए तैयार थे । तुम दोनों भी कहीं जा रहे हो गया । हमें सजधजकर खडे देखा तो चौंक पडेगी । हाँ, आखिर ये कार कब काम आएगी? हमेशा खडी रहती है । आज हम सब लोग साथ चलेंगे तो हमारे ऑफिस छोडेंगे । फिर हम दोनों वहीं से कहीं घूमने निकल जाएंगे तो पागल तो नहीं हो गई हूँ । मुझे एक चीज पडी तुम जानती होगी पंखुडी की तबियत ठीक नहीं है और तुम उसे घुमाने का प्लान बना रहे हो । वो ठीक हो गई है । मैंने उसके बाद बीच में ही कर दी । यकीन हो तो तुम मुझे कुछ मेरी और देखने लगी और मैं खडी क्या? संजय एक है उसका स्वरूप सहज हो गया । मुस्कराकर बोली मानती हूँ सही है की पंखुडी स्वस्थ है मगर सोचो क्या इसे लेकर ऑफिस जाना ठीक होगा क्योंकि इसके वहाँ जाने से क्या बिगड जाएगा? और सो उसने अपना माथा पकड लिया । संजीव तुम भी कभी कभी जाने क्या क्या सोचने लगते हो । मैंने ऐसा कब कहा । फिर कहूंगी भी क्यों? थोडी हमारी बेटी हैं हमारी अपनी बेटी । उसे तो हमारी इज्जत बढती है मगर वो पंखुडी की और तेज नहीं लगेगा । मगर क्या कुछ हो में चलना है तो चलना है । ऍम कहा आज हम सब साथ जाएंगे और वो भी इसी कारण है । थोडी देर तक खामोश नजरों से मुझे देखती रही । शायद कुछ सोच रही थी पंखुडी तुम अपना गुड डाले लोग मैं पंखुडी की उंगली पकडकर पलटते हुए अलमारी की और बडा फॅमिली के सारे खिलोने वहीं रहा करते थे । संजय कुछ वो अचानक चलना पडेगा । जरा समझा करूँ क्योंकि वजह तो मुझे परेशान कर रहे हो । फिर किसी दिन सब लोग साथ चल लेंगे । कुछ वो हमारी से खिलौना उठाकर में उसकी और पालता और हस्कर वाला एक बात बताओ तुम्हें हमारे साथ चलने में प्रॉब्लम क्या है? हम बाहर गाडी पर हीरो के रहेंगे तो ऑफिस चली जाना । फिर जब लौटेंगे तो सब लोग बाजार होते हुए चले आएंगे । इसी बहाने कुछ खरीदारी भी हो जाएगी । मैं ऑफिस नहीं जा रही हूँ । संजय को चलना पडेगा सब । दरअसल मुझे अपनी एक सहेली के यहाँ जाना था । हम लोग ऑफिस में साथ ही काम करते हैं । अभी तो तुम ने कहा था कि और ऍम कहाँ कहाँ था मगर मुझे ऑफिस नहीं जाना था । बोला क्यों मतलब? हमने हम से छूट बोला । नहीं संजय ऐसी बात नहीं है जिसके होठों से फिर से मुस्कान बिखर गई । बोले ऍम में बताना नहीं चाहती थी । क्यों फॅमिली के यहाँ जाने में आपत्ति करोगे? मैं क्या आपत्ति करूंगा? मेरी आपसे फैल गया । मैंने कभी भी तो मैं कहीं जाने से रोका है जो आज रोकता । हाँ, वो तो है । वैसे कहा जिससे आभार जता रही हो । फिर मुस्कुराकर बोली अच्छा मैं हूँ जाओ बॅाय वो खिलखिला पडी । उसने अपना मैंने बैग उठाया, कंधे पर डाला और एक बार फिर मेरी और मुस्कुराकर देखा बदले में मैंने भी उसका दिया । चलो कोई नहीं हम भी चलते हैं । मैंने गोदी में उठा लिया तुम कहाँ जा रहे हो? कोई ठहर गई तो मैं छोडने संजय वो हस पडे तुम्हें बहुत जिद्दी हो पहले कभी तो मेरी मान लिया करो तो एक एक में गंभीर हो गया पंखुडी को वहीं फर्श पर तार कट उसके सामने खडा हो गया । उसकी आंखों में झांकते बोला कुछ वो सच बताऊँ तुम हकीकत बताने में कतरा क्यों रही हो? अगर तुम अपने दोस्त के यहाँ जा रही हो तो तो मेरे साथ चलने में क्या दिक्कत है? मेरी वाक्य उसके कानों को छोडे तो जैसे एक उसके अंदर तूफान आ गया । उसने अपने पास को जमीन पर फेंका और चिंघाडते आवाज में बोली संजय मुझे दिक्कत है । हाँ है मुझे दिक्कत तुम्हारे साथ चलने में ये जिंदगी मेरी है और इसे अपने तरीके से जीने का मुझे हक है तो उसमें कोई दखलंदाजी नहीं कर सकते । समझे तो मैं अकेली जाना चाहती हूँ तो बस चाहती हूँ तो मुझे रोकने वाले हो । थोडा थोडा हम पत्नियों मेरी और इस रिश्ते से मुझे तुम्हारी जिंदगी में दखलंदाजी करने का हक है । हाँ जानती हूँ कि मैं तुम्हारी पत्नी हूँ, वो चल रहा है इसलिए तो मैं बता रही हूँ । मैं पत्नी गुलाम नहीं की जो तुम का होगी । मैं वहीं करूंगी । यदि तुम्हें मेरा यू घूमना फिरना, स्वतंत्र जिंदगी जीना अच्छा नहीं लगता तो मुझे छोड नहीं देते । कुछ वो एक एक मेरे पैरों के नीचे से समिति सकते भाई आवाज में बोला क्या तुमने मुझे इसलिए शादी की थी? हाँ चल पडी संजय अब और तो की तरह आंसू मत बहो । मैं सचमुच तंग आ गई हूँ तो उनसे और तुम्हारी ऍसे को झपट कर वर्ष पर पडे अपने पर्स उठाया और खोलने लगेंगे । बोली जितना तो बर्दाश्त कर्नाटक कर दिया अब और नहीं कर सकती । मैंने फैसला कर लिया है कि मुझे तुम्हारे साथ नहीं रहा । उससे पहुँच से कागज के उस पन्ने निकले और मेरी और रहते हुए बोली इसमें हस्ताक्षर करूँ ज्ञान मैंने उसके लाल हो चुके चेहरे की ओर देखा । झुककर कागजों को उठाते हुए पूछा ये ये क्या तलाक के पेपर्स, तलाक के पेपर पद आवास में थोडी देर तक उसे एक तक देखता रहा? संजय साइन करो, इनमें मुझे खामोश थे । उसमें लगभग डपटते हुए से कहा लेकिन ऍम बडी मुश्किल से मेरे फॅमिली तो उसकी फिक्र मत करो । को तेजी से पंखुडी की और बडी उसका फैसला अदालत करेगी । मैं हैरान था उसके पास में तलाक के पेपर । इसका मतलब था ऐसा मतलब ये नहीं किए । ये वो फैसला बहुत पहले ही कर चुकी थी ।

Details
सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
share-icon

00:00
00:00