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मेरी अर्धांगनी उसकी प्रेमिका - 46

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सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
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शादी के बाल कितनी खुबसूरत होते हैं । एक दिन के लिए ही सही मगर आप भाषा होते हैं आपके आसपास मंडराती लगभग हर नजरों के आप केंद्र बिंदु बन जाते हैं तो उन्हें राजा, धूले, राजा और शख्स की जुबान पर्व सही की शब्द होता है । जीजा जी जीजा जी कहते हुए किस तरह खूबसूरत लडकियां दूल्हेराजा के आसपास मंडराया करती हैं । कोई उसे छूने के अवसर रखती हैं तो कोई उसकी निगाहों में आने की । यदि सबकी निगाहों से जुलाकर मौका मिला तो वह नटखट लडकियाँ चिकोटी काटने से भी नहीं चूकती । मेरे का दौर चल रहा था वातावरण में मंत्रोच्चारण कि धोनी गूंज रही थी मगर उन लडकियों की बातें अब भी मेरे दिमाग में घूम रही थी । आगवानी के समय लडकियों ने मुझे खेल रखा था । उस समय मैंने शायद ही इस बात का डर रहा हो कि किसी पराई लडकी के साथ नहीं । नजदीकी पर कोई उन पर उंगली उठा सकता है । हमारी सहेली के सामने किसी बोलने लग रहे हैं । बेचारे जीजाजी देख नहीं रही हूँ । जी जैरी के सामने हमारी खुशबू ऐसे लग रही है जैसे कोई की चोच में मूर्ति का दाना तब पागल रही कि ऐसे बोलती है देख नहीं रही कैसे शर्मा गए हैं । बेचारी जीजा जी हमारी और एक बार भी निगाहें नहीं उठा पा रहे हैं । उस दौरान न जाने से और कितने स्वर्ग मुझे होंगे । उस वक्त जब मैं अपनी डायरी लिख रहा हूँ, उनमें से ज्यादातर बातें भूल चुका हूँ । इस दौरान अकस्मात मेरी निगाहें चेहरे को छुपाएंगे तो बस वहीं की वहीं ठहर गई । दरअसल वो नीतू थी मुझे थोडी ही दूर पर खडी एक तक मुझे देखे जा रही थी । उस वक्त उसकी नजरों में बेतहाशा शिकायत थी । मैं उससे नजर बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया । मेरी नजरें झुक गई और फिर किसी कायर की भर्ती । मैं खुद को फेरे की रस्में व्यस्त रखने का अगले करता रहा । मान पेइचिंग था टेंशन ओ बात साहस जुटा पाया तो मैंने एक बार पूछना नजरे उठाई, लेकिन वो अब वहाँ नहीं थी । मेरी निगाहें सरपट आंगन । केस कोने से लेकर उस कोने तक तेर तक उसे खोजती रही । लेकिन वो नहीं देखिए कुछ ढूंढ रहे हो तो नहीं मारते हुए खुशबू ने कहा पंडित की कुछ कह रहे हैं तुम से? हाँ हाँ क्या हडबडाहट मैंने अपनी नजरे समिति और पंडित जी की तरफ देखने लगा । शादी की सारी रस्में तो पूरी हो गए । अगर दिल और दिमाग दोनों में से कोई भी शांत नहीं था । वो यहाँ आई थी उसने बुलाया था । खुशबू नहीं, कौन लगती होगी वो खुशबू की क्या सहेली ऐसे ही अनेक सवाल मेरे मस्तिष्क पर उमडते घुमडते रहे जिनका दूर दूर तक कोई हल नजर नहीं आ रहा था । समझे जहाँ पर आवाज दी मैं मंडप छूटकर उनकी और बडा तो वो भी अपनी कुर्सी से उठकर चलती है । हम थोडी दूर तक साथ ही गए । फिर वो इधर उधर देखकर खडे हो गए तो मेरी आंखों में झांकते हुए बोले तो लडकी कौन थी? ऍम मैं चौक पडा । मुझे यकीन नहीं हो पा रहा था कि पापा मुझे अचानक ऐसा सवाल कैसे कर सकते हैं । खुद को संभालते बोला मैं नहीं जानता उस लडकी को वो उनसे प्यार करती है । शायद मैंने उसकी आंखों में देखा था । पापा ने मेरे काम में हाथ रखते हुए कहा कोई बात नहीं हो सकता है । मुझे गलत सही नहीं है । पापा ने एक बार फिर इधर उधर देखा और आगे बिना कोई सवाल किए हुए लौट पडे । मैं वहीं खडा उन्हें महसूस करता रहा

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सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
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