Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

मेरी अर्धांगनी उसकी प्रेमिका - 38

Share Kukufm
मेरी अर्धांगनी उसकी प्रेमिका - 38 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
7 KListens
सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
Read More
Transcript
View transcript

क्या यार संजीव सगाई कर ली और हमें बुलाया भी नहीं । एक फोन पर राज कर ढाका गूंज उठा । राष्ट्र हूँ आश्चर्य मेरा मुंह खुला रह गया । पूरे साल बर्बाद ज्यादा ही मेरी रहा हूँ । आज कल मैं कुर्सी से उठकर खडा हो गया था । दिल्ली से बोल रहा हूँ दिल्ली उन दिल्ली में उस वक्त हाँ उसके हंसने का स्वर सुनाई दिया । राज्य बात पूछूं मुझे से कौन सा गुना हो गया था । अचानक मेरे मन में शिकायत का भाव आ गया । तुम चुपके से ले निकल गए और जाने से पहले एक बार मिलने की कोशिश भी नहीं कि कम से कम उन पर ही बता दिया था । ॅ पल भर के लिए उसके स्वर में गंभीरता गई । रसल सबकुछ अचानक ही हो गया था । शाम को मेरे चचेरे भाई का फोन आया और उन्होंने कहा कि मैं अगली सुबह ही दिल्ली के लिए निकल पडो और जब वहां पहुंचा तो पता लगा भैया मुझे वहाँ हमेशा रहने के लिए बुला रहे थे और हमने उनकी बात मान भी ली और एक कम से कम अपनी पढाई पूरी कर लेते । फिर दिल्ली चले जाते हैं । दिल्ली थोडी ना कहीं जाने वाली थी, नहीं यार, सच कहूँ तो मेरा मन पढाई में नहीं लग रहा था । जाने कैसी घुटन सी महसूस होने लगी थी मुझे और ये बात नहीं अभी जान चुके थे कि मैं पढने का इरादा छोड चुका हूँ तो हमने बुला लिया हूँ । क्या कर रहे हो तो वहाँ ही है की एक्सपोर्ट कंपनी है बस उसी की जिम्मेदारी संभाल रहा हूँ । एक्सपोर्ट कंपनी तुम्हारी अपनी आश्चर्य व्यक्त करते हुए मैंने कहा हूँ कह सकते हो । बेहद सधे हुए अंदाज में उसने जवाब दिया तो तुम बडे आदमी बन चुके हो गया था तो जोर से ठहाका मारकर हंस पडा । ऐसी बातें करते हुए हैं । मैं भी वही राज हूँ । उसके साथ मैं भी हंसने लगा । फिर अचानक कुछ याद आया तो मैं पूछ पडा ब्रजराज मेरा फोन नंबर कम से मिला । जवानी से मांग लिया था । उसने सीधे कह दिया तो सफाई के बारे में भी उसने बताया होगा । हाँ, मेरे यू पूछने के आशय को समझा तो वह फंस पडा । दो दोस्तों की अकस्मात मुलाकात इतनी छोटी कैसे हो सकते हैं? हम लोग फोन पर लगभग पैंतालीस मिनट तक बात करते रहे । उस दौरान मैंने उसे बताया था कि मेरी सगाई इतनी जल्दबाजी में हो गई थी जिस पर किसी को गुलाब आना मेरे लिए संभव नहीं हो पाया । फोन कॉल के आखिरी मिनटों में फोन करने की मुख्य वजह बताते हुए उसने कहा, संजू मैं शिवानी से शादी कर रहा हूँ । अट्ठाईस जून को हम दोनों की सगाई है और उसमें तुम्हें जरूर आना है । शादी शिवाली से मैं चौक पडा हुआ नहीं अच्छी लडकी है यार, उसने मेरे हराने को पकड लिया । बोला तो मैं चौंक रहे हो । अरे नहीं मुझे गलत मौसम जो मेरा वो आशा नहीं था । मैं मजाक कर रहा था । मेरी सकपका हट पर बहुत बडा बच्चा, सगाई की तारीख मत बोलना और आ जाना ठीक है । मैंने स्वीकार करते हुए कहा उस तारीख पर अगर हम जहाँ ना पडा तो जरूर आऊंगा । वो ध्यान हुआ तो अपने दोस्त की शादी भी छोड दोगे क्या अब हमारे पास तुम्हारे जैसी एक्सपोर्ट कंपनी थोडे हैं, शादी कर रहा हूँ । नौकरी नहीं मिली तो परिवार कैसे पलेगा? अच्छा चिंता मत करो । इम्तिहान के वक्त शादी की तारीख नहीं रखने वाले रही बात परिवार की तो चिंता मत करो । हमारे भाई की कंपनी है । उसमें दोनों लोगों के परिवार पाल जाएंगे ।

Details
सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
share-icon

00:00
00:00