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मेरी अर्धांगनी उसकी प्रेमिका - 37

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मेरी अर्धांगनी उसकी प्रेमिका - 37 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
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सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
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सगाई की रस्म पूरी होते ही सबसे पहले मैंने खबर प्रिया को दी । ये खबर सुनते ही वह चलना उठे । बधाई और संजय । बधाई हो खुशी से वाकई उसका कलर उडाया था । हमारी साॅल्वर खुश होगी । मेरे लिए विश्वास करने लायक बात बिल्कुल नहीं थी । अगर उस वक्त उसे अपनी माँ के द्वारा किसी जरूरी काम से पुकारा ना गया होता । उद्यत तक वो खिलखिला खिलखिलाकर उससे बातें करती रहती है । डायरी देखते हुए अब तो मैं याद करने की कोशिश कर रहा हूँ तो ज्यादा आ रहा है । शायद उसने यही कहा था । बिलकुल ही कहा था संजय मम्मी, मुझे बुक आ रही है । इस वक्त मुझे जाना होगा । मैं अभी तुम से बात नहीं कर सकती । वैसे भी मेरी तबियत भी कुछ ठीक नहीं है । क्या हुआ? मैंने पूछने की कोशिश की तो शायद हो । उसके हाथ से गिर गया था । फोन कटने से पहले जोर की आवाज आई थी । जैसे किसी ने जानबूझकर जोर से फोन पटक दिया हो । वो अगले तीन चार दिनों तक कॉलेज नहीं आ पाई । मैं फोन पर उससे बात करने की कोशिश की, लेकिन वो फोन पर पहले तो नहीं आई । मैंने सब की तो सहना पडा । उसने मुझे कहा बात नहीं किए धूकर बोली संजय मुझे तेज बुखार है । मैं अभी बात करने की स्थिति में नहीं हूँ । वो कट गया । कम्बख्त बुखार भी कितना कमजोर बना दिया है । उसकी आवाज को को भी कोई बदल दी गई थी । हालांकि मैं बाद में सोच रहा हूँ कि क्या उसे सब कुछ बुखार था या फिर मेरी सगाई की खबर में उसे तोड दिया था ।

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सूरज एक ही है जो सफर पर है मगर सूरज को सुबह देंखे तो ऊर्जावान, दोपहर में तपता हुआ और शाम को अस्तित्व खोता हुआ दिखता है, स्त्री भी कुछ ऐसी ही है। हालात मेरे पक्ष में हो तो वफ़ा, ममता और त्याग की मूर्ति, विपक्ष में हो तो कुलटा, वेवफा, कुलनाशिनी... ऐसे ही पता नही कौन कौन से शब्दों में तरासा जाता है उसे? स्त्री के जीवन को पुरुष के इर्द गिर्द इस हद तक समेट दिया गया है कि कभी कभी लगता है उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व ही नही है। ऐसी ही प्रेम, त्याग, कुंठा, विवाह और तलाक के भंवर में खुद को तलाशती तीन स्त्रियों का की कहानी है मेरी अर्द्धांगिनी उसकी प्रेमिका! जो एक पुरुष के साथ अस्तित्व में आई और उसी के साथ कहीं गुम हो गयी। Voiceover Artist : Ashish Jain Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Rajesh Anand
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