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मेरा उकाब - 11

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यह कहानी एक ऐसे लड़के के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है जो कि हकलाहट की समस्या से परेशान है | और अपनी समस्या की वजह से उसे कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है | उसे गाने का शौक है लेकिन उसके परिवार वाली खास करती है उसकी सौतेली मां उसके इस शौक को अनदेखा कर देती है और हर समय से किसी ना किसी प्रकार से प्रताड़ित करती रहती है | जिस वजह से उसका यह शौक उसका एक सपना बनकर रह जाता है | लेकिन वह हार नहीं मानता और अपने दोस्तों की मदद से वह किस प्रकार अपने मकसद में कामयाब होता है | यह जानना बहुत ही दिलचस्प होगा Voiceover Artist : RJ Hemant Author : Rohit Verma Rimpu
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चैप्टर ऍम हलो राजेश मैं नवीन बोल रहा हूँ । हाँ नवीन बोलो कहाँ रहते हो आजकल बस यही थोडा काम में व्यस्त था और चुनाव आज कैसे याद किया? राजेश यार तुम्हारी कंपनी ने कैसेट निकली है मुझे उडने दो के नाम से क्या तो उसके बारे में कुछ बता सकते हो । बोलो क्या पूछना चाहते हो? इसके गायक के बारे में कुछ जानना चाहता हूँ । हाँ हो क्या जानना चाहते हो? मैं अपने यूट्यूब चैनल के लिए उसका एक का इंटरव्यू लेना चाहता हूँ । नवीन मुझे माफ कर दो, मैं इसमें तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता । राजेश मैं तुम्हारी बात नहीं समझा । तुम कहना क्या चाहते हो? मेरे कहने का मतलब है कि जिसका एक के बारे में तुम बात कर रहे हो उसका उसका इंटरव्यू लेना बहुत मुश्किल है । अगर सीधे लखनऊ में बात करूँ तो वो किसी प्रकार का कोई इंटरव्यू नहीं देना चाहता । लेकिन क्यों इसके बारे में कहना मुश्किल है । दरअसल उसने अपने परिवार से चोरी छिपे ये काम किया जिस वजह से वो तुम्हें इंटरव्यू नहीं देना चाहेगा । तुम्हें देखा होगा कि उस कैसेट में उसका एक का असली नाम भी नहीं और न ही उसकी कोई फोटो वगैरह छापी गई है । तो हमारे कहने का मतलब है कि वो अपनी पहचान छुपाना चाहता हूँ । हाँ, ऐसा ही समझो राजेश फिर तो मुझे उससे मिलना बहुत जरूरी है । मैं ऐसे व्यक्ति से जरूर मिलना चाहूंगा । क्या दो मुझे उस से मिलवा सकते हो? नवीन तो मेरे बहुत पुराने दोस्त हो । तुम कहते हो तो मैं कोशिश जरूर करूंगा । मैं एक बार उससे इस बारे में जरूर बात करूंगा और अगर वो मान गया तो मैं तुम्हारी उससे मुलाकात जरूर करवाऊंगा । राजेश मुझे तुम्हारे फोन का इंतजार रहेगा । नवीन के फोन बंद करते ही राजेश ने तुरंत से पंकज को फोन किया । हेलो पंकज मैं राजेश बात कर रहा हूँ । हाँ सर जी बोलिए कहाँ पर हो जी आपके ठीक सामने । राजेश ने जैसे ही सामने देखा पंकज उसके सामने खडा था आओ पंकज मैं तुम्हें ही याद कर रहा था । राजेश जी यही तो प्यार होता है । आप नहीं याद किया और मैं आ गया । कहिए कैसे याद किया बस तुम्हारी कसद के बारे में तुम से बात करनी चाहिए । बस तुम्हारी कैसेट के बारे में तुम से बात करनी थी । क्या बात करनी थी तुम्हारी कैसेट की बिक्री? जितना मैंने सोचा था तुम्हारी कैसेट की बिक्री जितना की मैंने सोचा था उससे भी कहीं ज्यादा हो रही है । वहाँ के लिए तो बहुत ही अच्छी बात है । लेकिन अब श्रोताओं की दो मुख्य मांगे हैं जिन्हें तुम्हें पूरा करना है । कौन कौन सी मांगे हैं? पहली मांग तो ये कि तुम्हें अपनी अगले कैसेट जल्द ही निकाल नहीं ताकि तुम है सुनने वाले तुम्हें याद रख सकें । कई बार ऐसा होता है कि गायक अपनी सिर्फ एक ही कैसेट निकालता है जो की कुछ सालों तक चलती है । उसके बाद अगर सही समय पर वह अगली कैसेट ना निकले तो उसको चाहने वाले और उसको सुनने वाले बहुत जल्दी उसे भूल जाते हैं । इसलिए समय की मांग है कि तुम जल्द से जल्द और जितनी जल्दी हो सके अपनी दूसरी कैसेट की तैयारी शुरू कर दो । राजेश जी, मैं आपकी बात से बिल्कुल सहमत हो । मैंने अपनी दूसरी कैसेट की तैयारी कब से शुरू कर दी है? मैंने उसके तीन गाने लिख दिए है और बाकी के भी लिखने जारी है । जैसे ही वह पूरे हो जाते हैं मैं आपके पास आ जाऊंगा । बंकट ये तो बहुत अच्छी बात है कि तुमने मेरे कहने से पहले ही दूसरी कैसेट की तैयारी शुरू कर दी है और अब मेरी दूसरी बात को ध्यान से सुनो तो मैं अब कैमरे के सामने आना होगा । कैमरे के सामने आने से आपका क्या मतलब है? मैं बताता हूँ मेरा एक दोस्त है, उसका नाम नवीन है । वो पत्रकार भी है और वह यूट्यूब में अपना एक चैनल बनाकर नए नए और उभरते कलाकारों का इंटरव्यू लेकर उसकी विडियो यूट्यूब में डाल देता है । वो जिससे कि नए नए कलाकारों को अपनी प्रसिद्धि पाने में सहायता मिलती है । लेकिन राजेश जी आप तो मेरी मजबूरी को भलीभांति समझते हैं । देखो पंकज मैं तुम्हारी मानसिकता को समझ सकता हूँ परन्तु ऐसा और कितनी देर चलेगा? परन्तु ऐसा और कितनी देर चलेगा । कितनी देर तक तुम अपनी पहचान सबसे छुपाते रहोगे तो अपनी मंजिल के करीब हूँ और अब तुम मंजिल पर पहुंचने से कतराने लगे हो । आखिर तुम्हें डर किस बात का हूँ? कितनी देर तक तुम अपने परिवार वालों से डर डर कर अपना जीवन बर्बाद करोगे? कामयाबी तुम्हारे सामने चलकर खुदा रही है और तो मना कर रहा हूँ । पंकज राजेश की बात को अनसुना कर देता है और वहाँ से उठकर जाने लगता है । तभी राजेश उसे कहता है ठीक है तो तुम जाना चाहते हो तो जाऊँ परंतु भविष्य में कभी भी इस बात का रोना मत होना कि मैं कामयाब क्यों नहीं हुआ । वो मेरे पास आकर बैठो और ध्यान से मेरी बात सुनो । तुमने जैसा चाहिए वैसा ही हुआ है परन्तु अब दुनिया के सामने आने का वक्त आ गया है । तुम्हारे सामने उस नवीन को इंटरव्यू देने का सुनहरा मौका है तो तुम्हारे सामने उस नवीन को इंटरव्यू देने का सुनहरा मौका है जिसके माध्यम से तुम दुनिया वालों पर अपनी भडास निकाल सकते हो । तो मन से ये सवाल कर सकते हो कि आखिर मेरा दोष किया है तो मैं इस समाज से पूछ सकते हो कि अगर तो महक लाते हो तो क्या ये तुम्हारा दोष है? और ये सब प्रश्न तुम कैमरे के सामने टेलीविजन पर पूछोगे दूर से लगभग सारी दुनिया देखेगी । लेकिन आप तो कहते हो कि वह सिर्फ वीडियो बनाकर यूट्यूब में डालता है । नवीन एक पत्रकार है और वो अपने स्टूडियो में नवीन एक पत्रकार है और वो अपने स्टूडियो में और वो अपने स्टूडियो में नए नए उभरते कलाकारों का इंटरव्यू लेता है और उसी इंटरव्यू के वीडियो को वो अपने यूट्यूब चैनल में भी डाल देता है जिससे देश ही नहीं विदेश में बसे लोग भी उसके वीडियो को देखते हैं । राजेश सी अगर आप मेरी बात का होता ना करें तो मुझे इसके लिए कुछ समय चाहिए । मैं अपने दोस्तों से इस बारे में सलाह मशविरा करके आपको बता देता हूँ । ठीक है जैसा तुम का हूँ लेकिन मुझे जल्द ही बता देना और इस बारे में सकारात्मक तरीके से सोचना जरूर कुछ देर बाद देखो । कुछ देर बातें करने के बाद पंकज वहाँ से उठकर घर की ओर चल पडा और घर आते ही उसने मीना को फोन किया और अपने पास आने को कहा । कुछ समय के बाद मीना उसके घर आ गई हो क्या काम है मुझे बुलाया मैंने तो मैं ऐसे क्यों बात कर रही हूँ । अगर मुझे कुछ काम है तभी तो मैंने तुम को बुलाया है हाँ तो मैंने क्या कहा जो तुम इतना भडक रहा हूँ । फिर छोडो इन बातों को मुझे किसी काम से जल्दी जाना है । जो भी बात करनी है जल्दी से करो । मैं राजेश जी के दफ्तर से हो कर आ रहा हूँ और उन्होंने कहा कि मेरी वो कैसेट बहुत ही ज्यादा प्रचलित हो रही है । वहाँ तो बहुत अच्छी बात है । अब तो तुम मशहूर हो गए लेकिन अब एक समस्या आ गई है । कैसी समस्या? राजेश जी कहते हैं कि मुझे अब लोगों के सामने आना होगा और अपने बारे में सभी को बताना होगा । वो कैसे मैं कुछ समझी नहीं । दरअसल उनका एक दोस्त है जिसका नाम नवीन हैं और वह पत्रकार है । वो अपने टीवी प्रोग्राम में मेरा एक इंटरव्यू लेना चाहता है जिसके बाद वो इसे यूट्यूब में डालने का हाँ तो ठीक है । जैसा राजेश जी कह रहे हैं वैसा कर लोग इसमें बुराई क्या है और इसमें समस्या किस बात की है? क्या तुम कैमरे का सामना नहीं कर सकते हैं? अब तो तुम्हारी हकलाहट की समस्या बिल्कुल ठीक हो चुकी है । मेरे हिसाब से अब तो तुम कैमरे का सामना कर ही सकते हो । तुम समझ नहीं रही हो । बात कैमरे का सामना करने की नहीं है । बात ये है कि इंटरव्यू देने के बाद मैं अपने परिवार वालों का सामना कैसे करूंगा । पंकज हूँ अगर तो सारी उम्र ऐसे ही सोचते रहे तो फिर तो तुम कभी भी अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाओगे । अगर तुम अपने परिवार वालों से ऐसे ही करते रहे अगर तुम अपने परिवार वालों से ऐसे ही करते रहे तो फिर छोडो इन सब बातों को तो मैं काम करूँ । अगर तो मैं ज्यादा ही डर लगता है । अगर तो मैं ज्यादा ही डर लगता है तो ये सब छोड दूँ और कुछ और काम धंधा कर लोग क्योंकि ऐसा करना तुम्हारे बस की बात नहीं है तो डरपोक हो । मीना दुनिया कैसी बातें कर रही हूँ । मैं तो तो मैं अपना दोस्त मानता हूँ और अपना दोस्त मानकर तुमसे हर प्रकार की बात कर लेता हूँ और तो मुझे डर वो कह रही हूँ । अगर मैं डरपोक होता तो राजेश जी की कहने पर अपनी कैसे इतना निकालता? मेरे कहने का ये मतलब नहीं है । अच्छा खैर छोडो तो नहीं । एक दिन मुझे बोला था कि एक दिन चेतन ने तुम्हारी कैसेट को घर में लगा दिया था और तुम्हारे पिताजी उसकी बहुत तारीफ कर रहे थे । उसकी तारीफ करने के साथ । साथ में तो मैं भी अपमानित कर रहे थे कि तुम नहीं कहा था कि वो कैसेट के गाय की तारीफ करते करते मुझे कह रहे थे कि गाना ऐसे गाना चाहिए जो तुम गाते हो, वो गाना नहीं है । अगर कुछ सीखना है तो इस गायक से सीखो । हाँ लेकिन लेकिन क्या मेरी बात ध्यान से सुनो हूँ । परमात्मा हर किसी को कामयाब होने और अपने आप को साबित करने का एक मौका जरूर देता है तो तुम्हारे पास तो मौका खुद चलकर आया है ताकि तुम अपने आपको साबित कर सको और तुम ये दुनिया को बता सको की मैं भी किसी से कम नहीं हूँ । तुमने अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से बचपन से जो अपमान सहा है तो मैं उसका जवाब देना होगा । लेकिन क्या मेरी बात ध्यान से सुनो । परमात्मा हर किसी को कामयाब होने और अपने आप को साबित करने का एक मौका जरूर देता है । तो हमारे पास को मौका कुछ चल कराया है ताकि तुम अपने आपको साबित कर सको और तुम्हें दुनिया को बता सकते हो कि मैं किसी से कम नहीं होगा । तुमने अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से बचपन से जो अपमान सहा है तो मैं उसका जवाब देना होगा और बाकी रही तुम्हारे परिवार वालों की बात । मुझे जरूर विश्वास है कि उससे इंटर्व्यू को देखकर तुम्हारे परिवार वालों का रवैया और उनकी सोच तो तुम्हारे प्रति बदल जाएगी । मुझे लगता है कि वह तुम पर गुस्सा नहीं करेंगे । बस इस बात का जरूर ध्यान रखना कि तुम उससे इंटर्व्यू में अपने दिल की हर एक बात दिल से करना ठीक है जैसा तुम का हूँ । मैं इंटरव्यू देने के लिए तैयार हूँ । अब जो होगा देखा जाएगा वहाँ मेरे का ये हुई ना बाद धीरे अब मैं इसका मतलब क्या समझूं । मैंने जो तुमसे इजहार किया था क्या तो उसके लिए राजी हो? पंकज ने मीना को मजाकिया लहजे से कहा, तो भी ज्यादा मतलब समझने की कोई जरूरत नहीं है । कल को तुमने इंटरव्यू देना है और उस की तैयारी करो । ये कहकर मीना मुस्कुराती हुई वहाँ से चली गई । पंकज के इंटरव्यू देने के लिए मान जाने कि बात जैसे ही राजेश और नवीन को लगती है वो इसकी तैयारी शुरू कर देते हैं । राजेश अपने टेलीविजन चैनल और अपने यूट्यूब चैनल पर पंकज का इंटरव्यू का विज्ञापन देना शुरू कर देता है । राजेश के इस विज्ञापन से लोगों में पंकज के बारे में जानने और उस को देखने की दिलचस्पी बढने लगती है । यूट्यूब पर इस बात की चर्चा शुरू हो जाती है कि आखिरकार उस कैसेट को गाने वाला गायक या नहीं होगा । आप कौन हैं? कुल मिलाकर लोगों में उकाब के बारे में जानने की जिज्ञासा बढने लगती है । पंकज के परिवार में भी इस इंटरव्यू को देखने की जिज्ञासा थी क्योंकि पंकज का भाई और उसके पिता को उकाब के गाने बहुत पसंद है । आखिरकार इंटरव्यू का दिन आ ही गया । पंकज इंटरव्यू देने के लिए नवीन के दफ्तर में जाता है । उसके साथ राजेश और मीना भी होते हैं । समाचार चैनल वाले इस इंटरव्यू का सीधा प्रसारण करने की तैयारी करते हैं । पंकज को जहाँ इंटरव्यू देना होता है वो स्टेज तैयार हो जाता है और कुछ ही देर में इंटरव्यू शुरू हो जाता है । पंकज का इंटरव्यू करने वाला शख्स यानी नवीन सबसे पहले अपनी और पंकज के बारे में बात करने लगता है । वह कहता है नमस्कार मेरा नाम नवीन है और आज हम उस शख्स के बारे में बात करेंगे जिसकी कामयाबी की चर्चा तो हर ओर है परंतु से जानता कोई नहीं । उन्होंने बहुत ही कम समय में बहुत बडा मुकाम हासिल कर लिया है । उनकी एक ही कैसेट ने पूरी दुनिया में धूम मचा दी है । अगर हम आंकडों की बात करें तो ये अब तक की सबसे ज्यादा बिकने वाली कैसे थे । कैसेट में गायक ने हर प्रकार के गाने गाए हैं । उनके कुछ गाने उदासी भरे हैं तो कुछ गाने विवाह शादियों में नाच गाने के लिए प्रयोग किए जा रही है । उनका गाना में उडना चाहता हूँ लोगों को काफी प्रोत्साहित कर रहा है । लेकिन हैरानी की बात ये है की इतने प्रसिद्ध होने के बावजूद उनके बारे में कोई नहीं जानता । तो आइए ज्यादा समय बर्बाद न करते हुए सीधा उनसे ही बात करते हैं और इतना कहते ही वह कैमरा पंकज की ओर घूम आते हैं । नमस्कार जी, आपका स्वागत है हमारे शो में सबसे पहले आप हमारे दर्शकों को अपने बारे में बताइए । धन्यवाद मैं बीजी, मेरा नाम पंकज । अपने बारे में कुछ बताने से पहले मैं ये बता दूँ की मुझे बोलने में कुछ समस्या होती है जिसे हकलाना कहते हैं । तो अगर मैं बोलते समय रुक गया या अपनाने लग गया तो कृपया मेरे ऊपर हंसी नहीं क्योंकि इसमें मेरी कोई मर्जी नहीं चलती । ऐसी समस्या कुदरती होती है और रही बात मेरे बारे में जानने की तो आप सवाल कीजिए यानी कि आप मेरे बारे में क्या जानना चाहते हैं? पंकज जी, आपने अपनी हकलाहट की समस्या के बारे में बताकर हमें और भी असमंजस में डाल दिया है । सबसे पहले तो आप हमें अपनी हकलाहट की समस्या के बारे में खुलकर दर्शकों को बताएंगे । यानी ये क्या है? क्यों पैदा होती है और आपने अपनी समस्या पर कैसे काबू पाया? जी नवीन जी, हकलाहट की समस्या क्यों पैदा होती है इसके बारे में तो मैं नहीं जानता परन्तु मेरी हकलाहट की समस्या कैसे बढ गई है ये मैं बता सकता हूँ । जी पंकज जी कृपया बताएं क्योंकि हमारे दर्शक जानना चाहेंगे कि आपकी ये हकलाने की समस्या कैसे बढेगा । जी बात कुछ ऐसी है जब मैंने लगभग तीन चार वर्ष की आयु में कुछ कुछ बोलना शुरू किया तो मैं आम बच्चों के जैसे तुतलाकर बोलता था तो मेरे माता पिता और बाकी के पारिवारिक सदस्य मेरे ऐसे बोलने पर मेरे ऊपर हस्ते थे परन्तु मेरा बालमन उनकी इस गतिविधि को खेल समझता था । धीरे धीरे जैसे ही मेरी उम्र बढी मेरा बोलना जैसा का तैसा ही रहा है । जब मैं लगभग आठ नौ वर्ष की आयु में पहुंचा, मेरी बोलने की समस्या कुछ बढने लगे । मेरी माँ शायद ये सोचती थी कि मैं ऐसा जानबूझ कर कर रहा हूँ । तो जब भी मैं बोलते समय हकलाने लगता है तो वो मुझे डांटने लगती हैं । माँ की डांट से मैं डर जाता था और पहले से ज्यादा हकलाने लग जाता था । वो बार बार मेरे ऊपर सही ढंग से बोलने का दबाव बनाती है । शायद यही दबाव मेरी हकलाहट की समस्या को बढाने के कारण में से एक करन था थोडा बडा हुआ तो ठीक से होश संभालने लगा । अपना भला बुरा समझने लगा । बोलते समय हकलाता था परन्तु पढाई में पहले स्थान पर रहता था । गाने का शौक था और गाता भी बढिया था और भी कई खूबियां चाहिए परन्तु इस समाज ने मेरी उन सब खूबियों को नजरंदाज करके मेरी हकलाहट की समस्या से मेरा मजाक बनाते रहे । समाज मेरे इस प्रकार बोलने की वजह से मेरा मजाक ना बना दे इसलिए मैं बोलने से कतरा नहीं लगा । मैं डरने लगा और यही डर मेरी हकलाहट की समस्या को और भी बढाने लगा । अगर आप बुरा ना माने तो मैं आपसे एक बात पूछना चाहता हूँ । जी पूछिए इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है? पंकज जी, आपको अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से क्या कभी किसी परेशानियों का सामना करना पडा है? नवीन जी बिल्कुल मुझे अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से हर समय किसी ना किसी प्रकार की परेशानियों का सामना करना ही पडता है । मेरी समस्या ने मुझे कई बार समस्या में डाला है । क्या मैं जान सकता हूँ की वह कौन कौन सी समस्याएं नवीन जी अगर एक समस्या हो तो मैं उसके बारे में बात करूँ । यहाँ तो कुछ समस्याएं ऐसी थी जिनके बारे में अगर बात करुँ तो आप यकीन नहीं मानेंगे । कुछ ऐसी समस्या भी थी जिन्हें आम लोग ये जो कहलो की जो हकलाहट की समस्या से पीडित नहीं थे तो उसको समस्या नहीं मानेंगे । पंकज जी, मैं आपकी बात को कुछ समझा नहीं । नवीन जी, मैं आपको एक उदाहरण के द्वारा अपनी बात को समझाता हूँ । मान लोग मैं और आप दोनों एक ढाबे पर गए । हम दोनों एक दूसरे को बिल्कुल नहीं जानते हैं । हम दोनों वहाँ पर कुर्सी मेज पर बैठे हैं । हम दोनों के पास बारी बारी से बेटर आया और हम से खाने का ऑर्डर लेने लग गया । हम दोनों ने ही दाल रोटी का ऑर्डर दे दिया । वो हमारे लिए दाल रोटी ले आया और हम ने खाना शुरू कर दिया । कुछ समय के बाद हमारे खाने में दाल खत्म हो जाती हैं और आप उस वेटर को बुलाकर उसे कहते हैं कि मेरे लिए डालने का वो आप के लिए वो आपके लिए दाल लेकर आता है और आप फिर से खाना शुरू कर देते हैं या नहीं । आपको किसी प्रकार की कोई समस्या का सामना नहीं करना पडा हूँ और आपने अपना खाना फिर से शुरू कर दिया । अब वैसे ही परिस्थिति मेरे साथ होती है । मैं भी खाना खा रहा हूँ और मेरी भी प्लेट में डाल खत्म हो चुकी है हूँ । लेकिन मैं क्योंकि हकलाहट की समस्या से परेशान हूँ इसलिए मुझ से डाल शब्द बोला नहीं जा रहा । मैंने वेटर को इशारा करके अपने पास बुलाया और वो मेरे पास आया । उसने मुझसे पूछा कि आपको क्या चाहिए और मैंने दाल शब्द को अटक अटक कर बोलना शुरू कर दिया क्योंकि मैंने दाल शब्द को हकलाते हुए कहा है । जिससे वहाँ पर बैठे सभी लोग मेरी बात सुनकर हसने लग जाते हैं । तभी उस वेटर के मन में कुछ शरारत सोचती है । उसे पता होता है कि मैं डाल के लिए उसे बोल रहा हूँ । लेकिन वह जानबूझ कर अनजान बनने की कोशिश करते हुए मुझे बार बार डाल शब्द को बुलवा रहा है । अगर सीधे शब्दों में कहें तो वह मेरे मजे ले रहा है । नवीन जी, आप इस परिस्थिति के बारे में क्या कहना चाहेंगे? अगर आप मेरी जगह पर होते तो आप क्या करती हूँ? पंकज जी, आप की बात में मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया है । आप बिलकुल ठीक कहते हूँ । जिन परिस्थितियों का सामना करना हम जैसे लोगों के लिए बहुत ही आसान होता है । वो उन परिस्थितियों का सामना करना आप जैसे लोगों के लिए कितना मुश्किल होता होगा इस बारे में हमने कभी सोचा ही नहीं है । नवीन जी आप बिल्कुल सही कह रहे हैं । अक्सर होता ये है कि हमारी हकलाहट की समस्या की वजह से हमारी काबिलियत या हमारी बुद्धिमता पर कभी भी हो और नहीं किया जाता है । अब उपरोक्त उदाहरण में ही आप देख लो वहाँ बैठे लोग जो मुझ पर हस रहे थे या वो बेटर जो बार बार मेरे मजे ले रहा था । उनमें से किसी ने भी मेरे बारे में जाने बगैर और सिर्फ मेरी हकलाहट की समस्या की वजह से उपहास करना शुरू कर दिया । मेरे ऊपर हंसने वाले लोगों ने कभी भी ये नहीं सोचा कि उनके इस तरह से हंसने से मेरे दिल पर क्या बीत रही होगी । अगर आसान शब्दों में कहें तो उन्होंने मेरी काबिलियत और मेरी पहचान को दरकिनार करके सिर्फ में हकलाहट की समस्या की वजह से मुझे अपने मजाक का पात्र बना दिया । पंकज जी, आपने आपने हकलाहट की समस्या से मेरी व्यक्तिगत जान पहचान करवाई है और यकीन मानो हूँ मेरी सोच समस्या को लेकर काफी बदल गई है । सच कहूँ सच कहूँ तो इस समस्या को पहले मैंने इतने करीब से कभी नहीं जाना था और अब अपने इंटरव्यू को आगे बढाते हुए मैं अपने सवाल को बदलना चाहूंगा । जी बिलकुल आप पूछे और क्या पूछना चाहते हैं? पंकज जी आपने अपने शरीर पर टैटू बनवाया हुआ है क्या? इसके पीछे क्या इसके पीछे भी कोई कहानी देखने में तो ये काफी बडा ऍम और मुझे यकीन है कि इसके पीछे भी कोई ना कोई कहानी जरूर होगी । जी नवीन जी आपने बिल्कुल सही पहचाना तो इसके पीछे भी एक कहानी । ये कहानी मेरी हकलाहट की समस्या पर ही आधारित है । अगर आपकी इजाजत हो तो क्या उसे सुना सकता हूँ? बिल्कुल इसमें इजाजत लेने वाली क्या बात है? मुझे और मेरे दर्शकों को आपकी इस कहानी को जानने में काफी उत्सुकता है । तो नवीन जी बात उन दिनों की है जब मैंने नया नया जिम में जाना शुरू किया था । वहाँ एक लडके ने अपने शरीर पर छोटा सा टैटू बनवाया हुआ था । उस समय मुझे टैटू के बारे में जानकारी नहीं थी । मैंने सिर्फ इसके बारे में सुना ही था । देखा पहली बार था इसलिए मैंने उसके टैटू को करीब से देखने के लिए इसलिए मैं उसके टाइटल को करीब से देखने के लिए उसके पास गया और उस लडके से इस बारे में पूछने लगा हूँ । लेकिन उसने मेरी बेइज्जती करने के लहजे से मुझसे कहा कि ये कोई बच्चों का खेल नहीं है । इसे बनवाने में बहुत दर्द का सामना करना पडता है । इसलिए ये तुम जैसे बच्चों के बस की बात नहीं है । मैं घर वापस आ गया हूँ और मैंने सोचा कि बचपन से मैं अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से इतना दर्द सहन करता हूँ । उस दर्द के सामने इस टैटू वाले दर्द की क्या औकात है वह किसी बात को समझने के लिए मैंने अपने शरीर पर बडा सा टैटू बनवा लिया । वहाँ यानी टैटू बनवाते समय आपको कोई दर्द वगैरह नहीं हुआ । दर्द हुआ हूँ लेकिन उस दर्द की औकात पता चल रही हैं । वो दर्द मेरी हकलाहट की समस्या की वजह से । बचपन से सहन किए हुए दर्द के सामने कुछ भी नहीं था । आपने अपनी बाजू पर भी एक टैटू बनवाया हुआ है । इसमें कुछ लिखा है क्या लिखा है जरा पढकर बताना । नवीन जी आप खुद ही देख लो । पंकज ने अपनी बात को आगे करते हुए कहा । इसमें लिखा है फॅमिली अगर आप मुझे मृत पाओ तो तुरंत से मेरा शरीर दान कर दो, इसका क्या मतलब हुआ? नवीन जी, मेरे हिसाब से आपको इतनी इंग्लिश तो आती है कि आप इसका मतलब समझ सकता हूँ । वो तो मैं समझ गया हूँ कि आपने अपनी बाजू में दे । टू के द्वारा कुछ कुछ हुआ है लेकिन मैं ये जानना चाहूँगा कि आपने ऐसा क्यों हुआ है । क्या इसके पीछे भी कोई कहानी नहीं? इसके पीछे कोई कहानी नहीं है । इसके पीछे मेरी एक अपनी सोच है । कैसी सोच नवीन जी एक ना एक दिन तो सभी को मारना है जो कि सत्य है । मैं चाहता हूँ कि मैं अपनी मृत्यु के बाद अपने शरीर में से कीमती जो कि किसी के काम आ सकते हैं उसको उनको दान में देना चाहता हूँ । पंकज जी, आपकी सोच तो बहुत सही है लेकिन इसकी भी प्रक्रिया होती है । मेरे कहने का मतलब है कि अगर आप अपना शरीर दान या अंगदान करना चाहते हैं तो आपको किसी अस्पताल से संपर्क करना होता है और कुछ कागजी कार्रवाई और आपके परिवार के सदस्यों की सहमती के बाद आपका नाम, अंगदान करने वालों लोग, आपका नाम अंगदान करने वाले लोगों की सूची में लिख दिया जाता है । नवीन जी इसके बारे में मुझे सब कुछ पता है और इस की तैयारी मैंने पहले से ही कर ली है । और रही बात मेरे टैटू की जिसमें मैंने अपना शरीर दान करने के बारे में लिखा है । ये समाज को अंगदान और शरीर दान करने के प्रति जागरूक करने का मेरा अपना एक अंदाज है । वहाँ बहुत बढिया पंकज जी सच कहूँ तो आपका यह अंदाज आज मुझे बहुत पसंद आया । जहाँ तक मैं जानता हूँ अंगदान या शरीरदान के प्रति इस प्रकार से किसी ने भी जागरूक नहीं किया होगा । पंकज जी, हमारे दर्शकों के साथ मैं ये जानना चाहता हूँ कि आपने अपना नाम उकाब ही क्यों रखा हूँ? इस नाम का क्या मतलब है और ये नाम आपको क्यों पसंद है? नवीन जी जुकाम नाम मुझे मेरे मोहित भैया ने दिया है । मुझे अक्सर उकाब कहकर पुकारते हैं । जब भी मैं कभी मायूस होता हूँ तो वो मुझे हौसला देने के लिए मुझे कहते हैं कि तुम मेरे उकाब हूँ तो बाहर नहीं मान सकते । दरअसल उकाब एक पक्षी का नाम है जिसका जन्म पहाडों की ऊंची चोटी पर एक छोटे से घोंसले में होता है । लेकिन जब वह बडा होता है तो उसके उडने के लिए ये सारा आसमान भी छोटा पड जाता है । वो आसमान में बहुत ऊंचा होता है जिस वजह से उसे नीचे की दुनिया बहुत ही छोटी छोटी नजर आती है । जिस प्रकार से अपनी उडान के दौरान पर छोटे छोटे परिंदों की परवाह नहीं करता ठीक वैसे ही जब हम अपनी मंजिल की तरफ कदम बढा रहे होते हैं तो हमें भी छोटी छोटी मुश्किलों की परवाह नहीं करनी चाहिए । वहाँ पंकज जी आपने बताया कि आपको बचपन से ही गाने का शौक था परंतु आपने अपने सुन्दर को सबसे छिपाकर क्यों रखा? ऍम मेरा व्यक्तित्व बहुत ही शर्मीले किस्म का है । मैं बहुत ही कम बोलता हूँ । इसके कारण शायद मेरी हकलाहट की समस्या ही थी । इसका कारण शायद मेरी हकलाहट की ही समस्या थी । इस वजह से ही मैंने अपने हुनर को सबसे छिपाकर रखा था । पंकज जी आपकी कैसेट जो बाजार में चल रही है उसके सभी गीत एक से एक बढकर हैं । उसके सभी गीत एक से बढकर एक आप अपनी इस कामयाबी का श्रेय किसी देना चाहेंगे । नवीन दी मैं अपनी कामयाबी का श्रेय इस समाज को विशेष कर अपने परिवार वालों अपनी दोस्त मीना और भैया मोहित को देना चाहूँगा क्योंकि इस समाज में मेरी हकलाहट की समस्या का मजाक बनाया, जिस वजह से मैं अकेला रहना पसंद करने लगा । इस अकेलेपन में रहकर मैं अपने गाने के शौक को पूरा करने लगा । कभी कभी मुझे अपना मजाक बनाने वालों पर होता भी आता था परंतु मैंने अपने खुद से को पाला और सही जगह सही समय पर इस्तेमाल किया । इस बीच जब भी मैं अपनी जिंदगी से निराश हो जाता तो मेरी दोस्त मीना और मोहित भैया मेरा हौसला बढाने के लिए आगे आ जाती हूँ । आज में अगर आपके सामने एक गायक के तौर पर बैठा हूँ तो ये उन्हीं की हौसला अफजाई का नतीजा है । यानी कुल मिलाकर आपने काफी दबाव में जिंदगी व्यतीत कर के यहाँ इस मुकाम तक पहुंचे हो जी नवीन जी, मेरे भैया जी कहते हैं कि जिस कोयले पर दबाव पडता है, वही हीरा बनता है और अमर हो जाता है और जो दबाव को सहन नहीं कर पाते तो कोयले तो जलकर राख हो जाते हैं । वहाँ पंकज जी क्या बात है? पंकज जी एक और बार आप मेरे से बहुत देर से बातें कर रहे हैं परंतु आपको हकलाहट की समस्या न के बराबर हो रही है कि आप हमारे दर्शकों को इस बारे में कुछ बताएंगे । मेरे कहने का मतलब है कि आपने अपनी हकलाहट की समस्या को खत्म कैसे? क्या नवीन जी सबसे पहले मैं आपको ये बता दूँ कि मैंने अपनी हकलाहट की समस्या को खत्म नहीं किया बल्कि मैंने अपनी हकलाहट की समस्या को काबू में क्या है? क्योंकि हकलाहट की समस्या कभी खत्म नहीं होती है । इसको सिर्फ काबू में किया जा सकता है । और रही बात इसे काबू करने की तो मैंने अपने जीने के दौर तरीके में कुछ बदलाव करके अपने इस समस्या पर काबू पाया है । शुक्रिया पंकज जी क्या बता सकते हैं कि आपने अपने जीवन में कौन कौन से बदलाव करके अपनी हकलाहट की समस्या पर काबू पाया? नवीन जी, मैंने अपनी हकलाहट की समस्या पर काबू पाने के लिए जीने के जिन तौर तरीकों को अपनाया उनमें जो मुख्य तरीके हैं उनका वर्णन में जरूर करना चाहूंगा । पहला काम मैंने ये किया कि मैंने अपने गुस्से पर काबू करना सीखा और गुस्से को पालकर सही जगह पर इस्तेमाल किया । मैंने ज्यादातर जिम में कसरत करते समय इसी पाले हुए गुस्से का इस्तेमाल किया । इसका फायदा मुझे दो प्रकार से हुआ । पहला तो ये कि गुस्सा काम करने से मेरी हकलाहट की समस्या में कमी आने लगी क्योंकि मैंने एक बार देखी कि जब मैं किसी बात पर गुस्सा करता था तो मेरी हकलाहट की समस्या पहले के मुकाबले काफी बढ जाती थी । दूसरा ये कि अपने पाले हुए गुस्से कि जिम में कसद के समय इस्तेमाल करने से मेरे कसरत करने की ताकत बहुत बढ जाती है और मैं अपने साथ कसरत कर रहे बाकी लोगों के मुकाबले अधिक कसरत कर लेता । दूसरा काम मैंने ये किया की मैंने धीरे धीरे और आराम से बोलने की आदत को अपनाया । इसके लिए मैंने किताबों का सहारा लिया । यानी मैंने किताबों को धीरे धीरे परन्तु ऊंची आवाज में पढना शुरू किया क्योंकि पहले जब भी मैं जल्दबाजी में कोई बात कहता तो मैं हकलाने लगता हूँ । तीसरा काम मैंने ये किया और अब भी करता हूँ । वो ये कि जब भी मुझे किसी के सामने बोलना पडे तो मैं उससे अपनी हकलाहट की समस्या के बारे में पहले से ही बता देता हूँ । इससे मेरा मन शांत हो जाता है और मेरा दर कुछ कम होने लगता है । आपको याद होगा कि इस कार्यक्रम की शुरुआत में भी मैंने अपनी हकलाहट की समस्या की बात की थी । उसके बाद कई छोटे छोटे काम जैसे अकेले समय में कोई ना कोई गीत गुनगुनाना हर समय प्रसन्नचित रहने की कोशिश करना, किसी की कहीं बात या अपना मजाक बनाने वाले को नजर अंदाज करना । अंत में सब छोटी छोटी बातों को नजरंदाज करके अपना ध्यान अपने लक्ष्य की ओर रखना । पंकज जी, आपने हकलाहट के विषय पर बहुत मूल्यवान जानकारी दी । उम्मीद है आपकी दी हुई जानकारी किसी के काम आएगी और कार्यक्रम के अंत में मैं आपसे एक आखिरी गुजारिश करूंगा तो वो ये कि आप समाज को क्या संदेश देना चाहेंगे? नवीन जी समाज को मैं यही बात कहना चाहूंगा के हकलाहट से परेशान व्यक्ति पहले से ही बहुत परेशान होते हैं । कृपया उनका मजाक बनाकर उन्हें और परेशान न करें हूँ । और हकलाहट से परेशान अपने भाईयों से ये कहना चाहूंगा कि आप किसी से कम नहीं हूँ । क्योंकि विज्ञान में ये बात साबित हो चुकी है कि हकलाहट की समस्या का मुख्य कारण दिमाग का तेज होना है । यानी हकलाहट से परेशान व्यक्ति का दिमाग बाकी लोगों के मुकाबले तेज होता है । तो आप अपने आप को किसी से कम मत समझे, अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करें और उस लक्ष्य को पाने के लिए जी जान से जुट जाएं । बहुत हो पंकज जी और ये थे आपके चाहे थे गाय को कब यानी पंकज जी वो जिन्होंने अपनी पहचान को छुपाने के कारण के बारे में बताया और साथ में हमें और आपको हकलाहट की समस्या के बारे में काफी मूल्यवान भी । और साथ में हमें और आपको हकलाहट की समस्या के बारे में भी काफी मूल्यवान चीजें बताई तो दोस्त हो जाने का वक्त हो गया है । अगले कार्यक्रम में मिलेंगे किसी नए फनकार से तब तक के लिए हमें इजाजत दीजिए, धन्यवाद ।

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यह कहानी एक ऐसे लड़के के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है जो कि हकलाहट की समस्या से परेशान है | और अपनी समस्या की वजह से उसे कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है | उसे गाने का शौक है लेकिन उसके परिवार वाली खास करती है उसकी सौतेली मां उसके इस शौक को अनदेखा कर देती है और हर समय से किसी ना किसी प्रकार से प्रताड़ित करती रहती है | जिस वजह से उसका यह शौक उसका एक सपना बनकर रह जाता है | लेकिन वह हार नहीं मानता और अपने दोस्तों की मदद से वह किस प्रकार अपने मकसद में कामयाब होता है | यह जानना बहुत ही दिलचस्प होगा Voiceover Artist : RJ Hemant Author : Rohit Verma Rimpu
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