Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

भाग 15

Share Kukufm
भाग 15 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
3 KListens
दिल्ली के एक मामूली ऑटो रिक्शा ड्राइवर की किस्मत ने बड़े ज़बरदस्त अंदाज़ में पलटा खाया और उसके हाथ 24 कैरेट शुद्ध सोने की 6 एंटीक मूर्तियाँ लग गयीं, जिनकी कीमत 10 करोड़ रुपये थी! लेकिन मूर्तियाँ मिलने के बाद उस ऑटो ड्राईवर के जीवन में तबाही, आतंक और बेहद चौंका देने वाली घटनाओं का ऐसा खौफनाक सिलसिला शुरू हुआ कि वह त्राहि-त्राहि कर उठा। जानने के लिए सुने "एक हादसे की रात!" Voiceover Artist : आशीष जैन author : अमित खान
Read More
Transcript
View transcript

ऍम केभीतर दाखिल होने के फिलहाल सभी रास्ते पूरी तरह बन हैं । ना तो कोई अपराधी म्यूजियम के मेन गेट सही भी डर हो सकता है और न किसी अगल बगल वाली इमारत को ही जरिया बनाकर । अगर किसी ने नीचे ही नीचे लंबी सुरंग खोद कर भी म्यूजियम के हॉल नंबर चार तक पहुंचने की कोशिश की तब भी वो सफल नहीं हो पाएगा । क्योंकि म्यूजियम में जगह जगह ऐसे इलेक्ट्रॉनिक संयंत्र लगाए गए हैं कि सुरंग खोदने की पोजीशन में एक विशेष धोनी पैदा करके सिक्योरिटी गार्डों को खतरे का संकेत दे देंगे जिससे पुलिस अपराधियों को फौरन पकडेंगे सब तब बैठे रहे । अब आगे से अगर कोई अपराधी जादू के जोर से क्या किसी कश्मीर की बदौलत फिर भी म्यूजियम के अंदर घुसने में कामयाब हो जाता है तो सबसे पहले म्यूजियम के लॉन में पहुंचेगा । वहाँ भी मौत फाडे उसका इंतजार कर रही हो । ऍम में बल्कि म्यूजियम के प्रत्येक गलियारे के अंदर भी हर वक्त बडी संख्या में सिक्योरिटी गार्ड तैनात रहते हैं । जिनके हर आठ घंटे के बाद ड्यूटी बदल जाती है, वही इसके अलावा और क्या इंतजाम है? और भी कई महत्वपूर्ण बंदोबस्त है । सबसे पहले तो उन्हें सुरक्षा प्रबंधों को भेदकर म्यूजियम के भीतर घुसना नामुमकिन है । लेकिन अगर फिर भी कोई सुरक्षा प्रबंधों को भेदने में सफल हो जाता है तो जैसे ही हॉल नंबर चार की दीवार को छोडेगा तो फौरन उससे कनेक्टेड सिर्फ टी । हालांकि घंटे नजदीक के तीन पुलिस स्टेशनों के साथ साथ पुलिस आॅल्टर में भी सोच से बज उठेगी और घंटे के बच नहीं किया होगा । ऍम लोग जान सकते हो फौरन फौरन पूरे दिल्ली शहर में दौडती पुलिस पेट्रोलिंग बहनों को क्वार्टर से वो खतरे की सूचना सर्कुलेट कर दी जाएगी । पलक झपकते ही पेट्रोलिंग मैंने नेशनल म्यूजियम की तरफ भागने लगेंगे । म्यूजियम के आस पास के साथ रोड ब्लॉक कर दिए जाएंगे । सीमा चौकियां सील कर दी जाएगी और बडी संख्या में पुलिस नेशनल म्यूजियम पर पहुंचकर उसे चारों तरफ से घेर लगी फॅमिली के साथ अंदाजा लगा सकते हैं । इस इसके अलावा बजते ही म्यूजियम के आसपास कितना हंगामाखेज माहौल बन जाएगा । ऐसी परिस्थिति में अपराधियों के लिए वहाँ से तो लगता चुराकर भागना तो बहुत दूर की बात है । उनके लिए खुद की जान बचाना भी मुश्किल होगा । ऍम की जो बेल बजेगी, टाॅपर अच्छी तरह गौर करता हुआ बोला । क्या उसकी आवाज म्यूजियम के अंदर या बाहर खडे सिक्योरिटी गार्डों को भी सुनाई देगी । बिल्कुल सुनाई देगी बडी वो कैसे नहीं । दरअसल दिल्ली पुलिस ने सभी गार्डों को एक खास किस्म की रिस्ट वॉच नहीं है । जब बीच पालीवाल ने बताया और ऍम है । इसलिए अलार्म बजने की वह बहुत तीखी धोनी रिस्ट वॉच पर बिल्कुल साफ साफ सुनाई देगा । एक बात बताओ ऍम कुछ होगा अगर कुछ दिन में हॉल नंबर चार के दीवार को छोडेगा तो क्या सब प्लान बजेगा मैं जगदीश पालीवाल गहरी सांस लेकर बोला दिन के वाॅर्ड रहता है । लेकिन अगर तुम लोग दुर्लभ ताज को दिन दहाडे लूटने की योजना बना रहे हो तब भी तुम्हारी योजना सिरे नहीं चलने वाली । इसलिए क्योंकि दिन में प्रत्येक दर्शक को कडी जांच पडताल के बाद ही भीतर म्यूजियम में घुसने दिया जाता है । यहाँ तक कि दर्शकों को मेटल डिटेक्टर से भी गुजरना होता है । ऐसी परिस्थिति में तुम लोग हथियार लेकर म्यूजियम के भीतर नहीं हो सकते और घुसने की कोशिश करोगे । तभी मैं समझता हूँ कि तुम नाकामी ही हाथ लगेगी । क्योंकि स्वचालित हथियारों से लैस कितने सारे सिक्योरिटी गार्डों का सामना तुम लोग किसी हालत में नहीं करता हो गई फॅार गया सनसनीखेज सन्नाटा सेट दीवानचंद सहित सबके चेहरों पर गंभीरता की बहुत फट गई । मंत्रा के दो सिक्योरिटी के विषय में सुनते ही हाथ पांव फूल गए थे । उसे साफ साफ लग रहा था कि वो लोग अपने मकसद में सफल होने वाले नहीं है । मंत्रालय ही मिनट प्रार्थना करने लगे तो लोगों को सबको दी गई । अकेले की दुर्लभ फॅमिली अपने दिनों से बाहर निकाल देते हैं । लेकिन भगवान भी होगी । कहाँ से देता? उनके दिमाग पर तो लालच में पडता डाल दिया था । अदालत उनका सर्वनाश करने पर बोला था । जगदीश पालीवाल काला खूंखार कर बोला दुर्लभ ताज की जो सिक्योरिटी की गई है । सिक्योरिटी के संबंध मैंने तुम लोगों को लगभग पूरी डिटेल सब कुछ बता दी है । अब इस पूरी सिक्योरिटी के बाद इस पूरे ऍम के बाद एक आखिरी स्वीकृति और है जो मतलब ताज के लिए की गई है । फॅमिली के अभी भी कोई सिक्योरिटी बची है? हाँ जगदीश पालीवाल सहसवार में बोला अभी एक आखिरी सिक्योरिटी और बच्ची है और मैं समझता हूँ कि वो सिक्योरिटी ऍम सिक्योरिटी से ज्यादा परफेक्ट है । ज्यादा सकते बंद है । अरे बाॅंटी है वह उसके बारे में भी बताना उसी के बारे में बताने जा रहा हूँ । दरअसल जूरी के मैंबरों ने दुर्लभ ताज की सुरक्षा व्यवस्था के लिए जो चक्रव्यू रचा है । वो सिक्योरिटी उस चक्रव्यूहों का सबसे आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है । वो तो म्यूजियम में जितने भी सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं वो सब अपने आप में एक काम कम्पलीट है और उन्हें भेद पाना और संभव है ऍम बडे । लेकिन क्या सुरक्षा रूपी चक्रव्यूह के उस आखिरी हिस्से को भेजने की बाबत सोचना मैं समझता हूँ कि पागलपन होगा क्योंकि वहाँ जूरी के मेंबरों ने इतना जबरदस्त माया जाल बिछाया है कि अगर उस माया जाल को भेजने के लिए आज के युग में अर्जुन, अभिमन्यु, भीम, नकुल, सहदेव फॅार जैसे महान श्रद्धा भी आ जाएगा तो उन्हें भी और सफलता का मूड देखना पडेगा । सुरक्षा रूपी चक्रव्यूह का वह आखिरी चरण हॉल नंबर चार है । उस हॉल की सिक्योरिटी ये सोच कर की गई है कि अगर कोई अपराधी किसी तरह तमाम सिक्योरिटी को भेजता हुआ हॉल नंबर चार तक पहुंचने में सफल होता है तो फिर उसके हाथों से दुर्लभ ताज को किस तरह बचाया जाये? किस तरह बचाया जाएगा? नहीं पडी मान ले जो अपराधी तमाम सिक्यूरिटी सिस्टम को भेदकर हॉल नंबर चार तक पहुंचने में सफल होता है, वो अपराधी तुम हो । अब तक मुझे ये बताओ कि वहाँ पहुंचने के बाद तुम क्या करोगी? अरे बडी ओर क्या करता है अंदर घुसने की कोशिश करुंगा नहीं ऍम तो मंदरि घुसने की कोशिश करोगे लेकिन सवाल यह है कि तुम अंदर खुश हो के कैसे क्योंकि हॉल नंबर चार के दरवाजे पर तो बडे भारी भरकम डाले और छोड ताले लगे हुए हैं जिनकी मास्टर की की सहायता से भी नहीं खोला जा सकता । बडे परिवारशाही थोडी अगर ताडा खुल नहीं सकता तो हो सकता है नहीं ऍम दरवाजा टूटी सकता है । नहीं आॅडियो मैं तुमसे बिल्कुल सहमत हूँ बल्कि मैं खुद यही कहना चाहता हूँ कि प्रत्येक अपराधी का उस अवस्था में यही माइंड होगा क्योंकि जितने ऍम को भेदकर हॉल नंबर चार तक पहुंचेगा उसे वहां पहुंचकर खाली हाथ लौटना तो किसी भी हालत में कंवारा ना होगा । चाहे कुछ भी क्यों न करना पडेगा, कैसा भी चाय जाना था । इस तरीका इस्तेमाल क्यों ना करना पडे अपराधी किसी ॅ को ध्यान में रखते है । जूरी के मेंबरों ने हॉल नंबर चार की सुरक्षा व्यवस्था की है हूँ से कोई फिलहाल हाँ बच्चा हो गया है तो उसने वहाँ जाकर देखा ही होगा तो उस हॉल की छत और दीवार फॉल सीलिंग तथा प्लास्टर पेरिस की बनी हुई हैं । जिसकी मोटाई लगभग एक फुट के करीब है । दीवार और छत उतनी मोटाई में डेकोरेट करने के पीछे एक खास कारण है । बडे बडे, वो भी बता दो दीवार और अच्छा दोनों जगह स्वचालित कहने छुपी हुई हैं । कोई भी अपराधी जैसे ही किसी गलत तरीके से हॉल में घुसेगा, तभी दीवार और छत में छुपी हुई स्वचालित गाने हरकत में आ जाएंगे और वह हॉल के हर हिस्से पर हर एंगल पर गोलियों की बौछार करना शुरू कर देंगे । यानी अपराधी हॉल में चाहे किसी भी जगह क्यों ना खडा हो, कोरियाओं से वहीं आकर लगेगी और पलक झपकते ही तलाश में पता चल जाएगा । सिर्फ दीवानचंद सहित सबके चेहरों पर कालिख पता नहीं और अगर अपराधी किसी तरह गोलियों से बच भी गया क्योंकि बिलकुल नामुमकिन है, तब भी वह दुर्लभ ताज को नहीं चुना पाएगा । क्यों दशक पटल का दिमाग पर बिजली से गिरी पाकिस्तान को चुराने में क्या मुश्किल है? बहुत बडी मुश्किल है क्योंकि अपराधियों ताज को निकालने के लिए जैसी उसके शीशे के बॉक्स को छोडेगा, तभी उस बॉक्स के अंदर बंद दुर्लभ ताज बीस फुट नीचे मुझे जैसी कह रही मैं चला जाएगा । अपराधी पाँच से हाथ उठाएगा तो फिर ऊपर आ जाएगा । हाथ लगाएगा तो फिर नीचे चला जाएगा । बस यही नाटकी और बेहद दल । इसमें प्रक्रिया चलती रहेगी । लेकिन दुर्लभ पांच अपराधी के हाथ नहीं लगेगा । बडे साई इसका मतलब तिलिस्मी सिस्टम तो शीशे के बॉक्स में ही फिर हुआ क्योंकि उसे तो हाथ लगाते ही दुर्लभ ताज ऊपर नीचे होता है । बिल्कुल थी । और अगर हम शीर्ष एक बॉक्स को ही तोड डाले तो क्या होगा? कुछ नहीं होगा उस पोजीशन में । उधर लगता बीस फुट नीचे चला जाएगा और फिर ऊपर नहीं आएगा । फिर वही इंजीनियर उस दुर्लभ ताज को बीस फुट नीचे से निकाल सकता है । जिन्होंने उस साॅफ्ट किए हैं । वहाँ उन्हें शमशान घाट जैसा सन्नाटा छा गया । सब स्तब्ध थे । बिल्कुल बॉल फॅस और ये तो वाकई बडा जबरदस्त इंतजाम है । पहले क्या था था? न्यूज दुर्लभ ताज को चुराना आसान नहीं है । उसका ॅ यहाँ मजबूत है । शायद भारत में पहली बार किसी ऍम के लिए इतनी जबरदस्त सिक्योरिटी की गई है । बडे बडी इसमें कोई शक नहीं की सिक्योरिटी वाकई बहुत पावर फुल है । लेकिन एक बात मैं फिर भी कहूंगा क्या देखो ॅ कितनी भी जबरदस्त हो लेकिन उसे तोडा जा सकता है । शाही दिमाग ब्रेड से हर डाॅॅ की कार्ड पैदा की जा सकती है । यानी तो मैं कहना चाहते हो की तो मैं सिक्योरिटी को भेजने की कोई योजना बना लोगे । मैं अभी कोई दावा नहीं कर सकता चाहिए । मेरा ये मानना है कि दुनिया का कोई काम मुश्किल नहीं, असंभव नहीं । जरूरत है तो इंसान के अंदर बच लगन पहुँच ले कि बडे तंदुरुस्त दिमाग की हाँ मुझे तो नहीं लगता कि कोई अपराधी करिश्मा कर पाएगा । थोडी तुम हमें चैलेंज दे रहे हो? नहीं पालीवाल सकपकाया साई अगर तुम हमें चैलेंज दे रहे हो तो हमें तुम्हारा ये ऍम स्कूल है । ठीक है आपसे मेरा चैलेंज समझे क्योंकि मुझे पूरा यकीन है कि इस पर फॅमिली को दुनिया का कोई व्यक्ति भेद नहीं सकता । बढिया बात है बहुत बढिया बडी हम तुम्हें ये करिश्मा लडके दिखाएंगे । उधर वो मीटिंग वहीं पर खास हो गए । जगदीश पालीवाल को जिस तरह आंखों पर पट्टी बांधकर वहाँ लाया गया था उसी तरह वहाँ से विदा कर दिया गया । लेकिन जाने से पहले वो अपने बेटे गुड्डू से मिला और बडे ही जज्बाती होकर मिला । मैं मैं तुमसे गिनती करना चाहता हूँ मैडम फिर उसने जाने से पहले मंत्रा से कहा था कही मंत्र का स्वाॅट उठा तो मैं एक और अब उसमें जानता हूँ । तुम चाहे कितना ही इन अपराधियों से मिली हुई हो, लेकिन फिर भी तुम उतनी कठोर नहीं हो सकती जितना ये सब है । जिससे मैं हाथ जोडकर तुमसे विनती करने की हिम्मत कर पा रहा हूँ । देखो गुड्डू मेरा एकलौता बेटा है । इस की अच्छी तरह देखभाल करना । मंत्री भी जज्बाती होता है । वो एकदम गुड्डू की तरह झपटी और उसे अपनी छाती से निपटा लिया । देख के साथ इसे कुछ नहीं होगा । जब तक मैं सुनता हूँ, कोई आज नहीं आएगी । नहीं मुझे तो पर भरोसा है । हम तो तुमने मुझे धोखा दिया । फिर भी न जाने क्यों मुझे कुछ तुम्हारे ऊपर एक बार करने का दिल चाहता है । तडक उठी मंत्रा, जबकि पालीवाल फिर वहाँ से चला गया । कुलभूषण की जिंदगी और एक बिल्कुल नया मोड दे चुकी थी । कल का ऑटो रिक्शा ड्राइवर हालत की चमकी में दस का पूरी तरह एक अपराधी बन चुका था, से दीवानचंद में उसे अपने संगठन का मेंबर बना लिया था । इतना ही नहीं, उस अड्डे से बाहर आने जाने की इजाजत थी, शीर्ष नहीं दे दी थी । तब भूषण को पहली बार ये मालूम हुआ कि वह अड्डा सेट दीवानचंद की विशाल जुलरी शॉप के नीचे तो खाना बना हुआ था । लेकिन उस अड्डे में जाने का रास्ता तीन मंजिले मकान के भीतर से वो मकान जूलरी शॉप के बिल्कुल पीछे वाली गली में था तो पुराना सा मकान भी सेट की मिल्कियत था । ढाई सौ वर्गगज में फैला और उस मकान के तहखाने से होकर छोटी सी सोनम पार करते हुए अड्डे तक पहुंचा जाता था । वो सुरंग सीधे कॉन्फ्रेंस हॉल में होती थी । दरअसल कॉन्फ्रेंस हॉल में एक अर्द्धनग्न लडकी की विशाल पेंटिंग लगी थी और पेंटिंग के बराबर में एक मन मोहन लाल पता था । जब बटन दबाया जाता तो पेंटिंग किसी स्लाइडिंग दूर की तरह की तरफ से पेंटिंग के पीछे स्टेरिंग व्हील जैसा लोहे का चक्कर नजर आता । इस चक्कर को घुमाने पर ही दीवार का एक बडा संभाल नहीं कर सकता हूँ और तब कहीं सुरंग का बहाना दिखाई देता है । वो थोडा उस विशाल का जुलरी शॉप के नीचे जरूर बना हुआ था । लेकिन घंटे में आने जाने का रास्ता पिछली गली में बना वही पुराना मकान था । कुलभूषण ने जब पहली बार दशक बॉटल के साथ उप रास्ते के दर्शन किए तो पूरे सिस्टम से बडा प्रभावित हो हद से ज्यादा प्रभावित हुआ । ऐसे करिश्मे तो उसने सिर्फ कभी कबार फिल्मों में ही देखे थे । आम जिंदगी में भी इस तरह का कुछ होता है तो उसने सोचा भी नहीं था । बहरहाल, फिर दुर्लभ ताज चुराने के लिए योजना पर काम शुरू हुआ । ऍन दशक, पाटिल और ऍम तीनों पांच को चुराने का दृढसंकल्प ले चुके थे । हालांकि सिक्योरिटी वाकई बहुत होती है, लेकिन वो निराश बिल्कुल नहीं थे । उन्हें लग रहा था कि वह वाकई कोई करिश्मा का डालेंगे । उस सिक्योरिटी को भेजने के लिए उन्होंने खुद दिमाग लडा । अच्छा शाम उन तीनों के बीच वो सब जगह पर एक मीटिंग हुई हैं । काफी देर तक उन्होंने विचार विमर्श किया । नतीजा कुछ नहीं । सारा दिन सारी रात तो सिक्युरिटी को भेजने की कोशिश करते रहे । हर एक दो दो घंटे के बाद उनके बीच मीटिंग होती हैं । इन दो घंटे में जिसमें जो कुछ सोचा होता वो अपना आइडिया एक दूसरे के सामने रखता है । कुल मिलाकर उनके बीच सात मीटिंग हुई । कितना बीज जीरो उनके द्वारा खूब दिमाग बढाकर सोचा गया । आइडिया पूरे काट ढेर साबित हुआ । शनिवार सुबह दस बजे तीनों कॉन्फ्रेंस हॉल में पुनः सिर से सिर्फ जोडे बैठे थे । लेकिन इस वक्त उनके चेहरे पर ऐसी फटकार बरस रही थी जिसे हरीराम किसी ने उनकी जमकर ढाई की कल का उत्साह अब निराशा में तब्दील हो चुका था । कुलभूषण दिन के बीच बिलकुल खामोश काटका उल्लू बना बैठा था । बहुत अब दुर्लभ ताज को वापस कजाकिस्तान लौटने में तीन दिन रह गए हैं । सिर्फ तीन और अभी तक हमारे पास दुर्लभ ताज को चुराने की कोई सॉलिड योजना तक नहीं है । एक बात करुँगी कुलभूषण बोला रेवाडी तू बोल हुई क्यों खामोश रहता है? नहीं उस दुर्लभ ताज की सिक्योरिटी वाकई बहुत मजबूत है । बॉस कुलभूषण बोला हमें उसे चुराने का ख्याल भी अपने दिमाग से निकाल देना चाहिए । रेवाडी तू पागल है क्या? तू क्या समझना चाहिए? अगर अभी तक योजना नहीं बनी तो आगे भी नहीं पडेगी । ऐसा भी कहीं होता है सही मैं निराश से बडी बातें अपने दिमाग में नहीं लानी । इंसान वो होता है जो हारने के बावजूद दिल से अपनी हार कबूल नहीं करता बल्कि वह और संघर्ष करता है और लडाई करता है । बडी ऐसे ही लोगों की जिंदगी में करिश्में होते हैं । ऐसे ही लोगों को फतेह मिलती है । लेकिन दुश्मन पांडे ने कुछ कहना चाहते हैं खडे खडे कुछ नहीं कुछ नहीं सुनना मुझे बडी हमने वो ताज चुराना है । हर हालत में चुराना है फॅस सुख हो गए तभी एक बेहद सनसनीखेज घटना घटी । ऐसी घटना जिसमें से कुछ कर रख दिया लम्बे फल वाला चाकू बडे अपस्मार ठंड से सनसनाता हुआ फॅसा और फिर वो कहता की तेज आवाज करता हॅू बीच जाता था पूछना पडेगा ऍम सब सब बिजली जैसी राॅय बाहर निकलेंगे । इतना गलियारा सुनसान पडा था कहीं कोई नहीं उन चंद पूरा अड्डा छाना लेकिन उस व्यक्ति की कहीं दर्शन नहीं हुए । चाहूँ फेंक कर मारा था घर का थक हारकर ऍम हूँ । बुरी तरह डरे हुए थे वापस कॅश नहीं एक और मौका तेज धमाका उनकी नजर भेज इधर से ऊपर पडी उन्होंने देखा किस चाकू की नोक में कार्रवाई घुसा हुआ है । जरूर किसी ने मुकाबले उन तक पहुंचाने के लिए ही चाकू वहाँ फेंक कर मारा था । डाॅन की तरफ झपटा जल्दी उसने चाहूँ कि नौ पैसा कागज निकाला और फिर उसे खोलकर छुट्टी छुट्टी पडने लगा । जैसे जैसे ऍम उसकी आपके हर से पडती चलेंगे, ऍम तक पहुंचते पहुंचते उसकी आंखें अचंभे की । माँ ने अपनी कटोरियों से बाहर निकलने को तैयार नहीं थी तो पास जो कागज पढते ही दुश्मन पडने खुशी चिल्ला था पास हमें योजना मिल गई तो मैं दुर्लभता चुराने की फॅमिली गई ऍम रहा है ये ये ऍम ऍम सबके सामने लग रहा है उसको खुशी से बुरा हाल ॅ होता लगती है । बडे बडे लेकिन ये योजना आई कहाँ अच्छा ही बडी कितना भेजी फॅस पर लेकिन आपने दो शब्द पडेगी तथा उसके चेहरे पर गंभीरता शामिल क्या हुआ हो गया इस पर ॅ सबके नेत्र घर से फैल गए ऍम पांडे के हाथ से अब ऊॅट लिया फिर एक किस्सा उसमें पूरी योजना पडता चला गया क्यों जो उसने योजना पडी है ठीक उसी अनुपात में उसकी आंखों की चमक पडती चलेंगे पूरी योजना पडते हैं उसकी आंखे भी कई कई हजार वॉट के बल्ब की मानिंद जगमगाने लगी थी । जब सही ऍम ये तो बहुत बडी हूँ योजना है हम उस हाँ इसी दशक बॉटल योजना को पड रहा था अगर अगर हम इस योजना पर काम कडे चाहिए तो तो हमें ताज पुराने से कोई नहीं रोक सकता । बडी फिर तो हमने ऍम ही है अपने को ठीक ऍम में बोला मुझे तो अभी सोच छूटकर हैरानी हो रही है कि इतनी साधारण योजना हमारे दिमाग भी क्यों नहीं आई? सुपर्ब उसके दमाद नहीं क्यों आई ऍम मैं तो पहले ही बोलता था । पहले बोलता था कि इस दुनिया में हर चीज की काट मौजूद है । कोई देखा तो उन्हें देखा जोडी ऍम रहे थे । सिक्के पर समझ रहे थे । सुपर पहुंॅची को भेजने की योजना भी पुरा डाली । अरे बडी जब जूरी के मेरे को ये पता चलेगा कि दुर्लभ ताज इतनी जबरदस्त सिक्योरिटी के बावजूद जो आसानी से चोरी हो गया वो अपना माथा पीट लेंगे । बडे गलत कर रहे जाएंगे । वो शब्द कहते हुए जोर जोर से खिलखिलाकर हंसने लगा । दीवानचंद जोर जोर से ऐसा लग रहा था जिससे उसके ऊपर खुशी का दोनों पड गया होगा ।

Details
दिल्ली के एक मामूली ऑटो रिक्शा ड्राइवर की किस्मत ने बड़े ज़बरदस्त अंदाज़ में पलटा खाया और उसके हाथ 24 कैरेट शुद्ध सोने की 6 एंटीक मूर्तियाँ लग गयीं, जिनकी कीमत 10 करोड़ रुपये थी! लेकिन मूर्तियाँ मिलने के बाद उस ऑटो ड्राईवर के जीवन में तबाही, आतंक और बेहद चौंका देने वाली घटनाओं का ऐसा खौफनाक सिलसिला शुरू हुआ कि वह त्राहि-त्राहि कर उठा। जानने के लिए सुने "एक हादसे की रात!" Voiceover Artist : आशीष जैन author : अमित खान
share-icon

00:00
00:00