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बेटिकट मुजरिम से अरबपति बनने की कहानी - Part 31

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बेटिकट मुजरिम से अरबपति बनने की कहानी writer: राजीव सिंह Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Rajeev Singh
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इकत्तीस विजयदशमी से पांच दिन पहले गोदना नहीं बाबू को फोन किया, लेकिन उसमें कौन नहीं लिया । वो ध्यान उसके सेल फोन पर कॉल करने के चार प्रयास किए, लेकिन सब असफल रहे हैं । ऍम फोन में गोदना का नंबर मौजूद था । उसके कौन ना लेने का मतलब था? उसके इरादे में खोट है । गोधरा ही बात समझ गया वो । मैंने मामले के निपटारे के लिए इक्कीस अक्टूबर यानि विजयदशमी का दिन चुना है । उसने बीस अक्टूबर को नई दिल्ली में संसदीय समिति की एक बैठक में शामिल होने के बाद सीधे गोरखपुर की फ्लाइट लेने का निर्णय लिया । वो सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण की संसदीय समिति के सदस्य के रूप में मनोनीत हुआ । पिछले ठाकुर साहब को फोन किया । उसने उन्हें सूचित किया कि वह किसकी सुबह उन लोगों से मिलने आएगा । मिलने का उद्देश्य बताने की कोई आवश्यकता नहीं थी । ठाकुर साहब बुद्धिमान थे । अंत में पूछना ने उनसे अनुरोध किया कि वह बबुआ को भी ये संदेश दे दें, क्योंकि वह उसके कॉल नहीं ले रहा है । फिर गोदना के गांव के पोस्ट ऑफिस में फोन किया और पोस्टमास्टर सहित मई बाबा तक उसका संदेश पहुंचाने का अनुरोध किया । पोस्टमास्टर ने जब सब से सलेमपुर की जनसभा में मुख्यमंत्री की बगल में बैठे देखा था । तब से उसकी जब करने लग गया था, उसने उसके अनुरोध को आदेश की तरह लिया । अब सिर्फ बबुनी को सूचित करना बाकी था । हालांकि उस पर लगे प्रतिबंधों में समय के साथ ढील दे दी गई थी और वह गोवर्धन की दुकान से उसे फोन कर सकती थी, लेकिन उसे उसका सेलफोन वापस नहीं मिला । दो दिन बाद गोदना के पास उसका फोन आया । इस खुशखबरी ने उससे उत्साहित नहीं किया । उसे खुद भी अपने भाई के इरादों पर संदेह था । जिस समय गोदना ने ठाकुर साहब को फोन किया, तब बबुआ बंदा में था । ठाकुर साहब ने फौरन उसके सेल फोन पर कॉल करके उसे जल्द से जल्द सुहागपुर पहुंचने को कहा । वो बहन का सौदा करने के लिए बहुत कोशिश में लगे और इस मुसीबत से बाहर निकालने की जिम्मेदारी उसी पर डाल दी । बबूआ सुहागपुर नहीं आया । उस की बजाय वो सुहागपुर से किलोमीटर दूर जयनगर गांव में अपने ससुराल चला गया । उसके साॅवरेन सिंह ठाकुर साहब से एक कदम आगे थे । उनमें अपनी जाती और विरासत को लेकर अच्छे गर्व और अहंकार था । नीची जाति के लोगों से बहुत घृणा करते थे । बहुत ने उन्हें विस्तार से पूरी बात बताई । एक दलित आदमी की इतनी हिम्मत हो गई कि वह ठाकुर साहब के पास उनकी बेटी से शादी करने का प्रस्ताव लेकर चला गया । ये सोचकर उनका दिमाक गर्म हो गया । जब उसने यह प्रस्ताव सामने रखा है तो आप लोगों ने उसे हवेली से बाहर कैसे जाने दिया? मैं ये सोचकर शर्म आ रही है कि आप हमारे दावा है । आपको तो उसी समझ को मार डालना चाहिए था और साहब फोन भी पतला हो गया है । बबूआ सिर झुकाकर सुन रहा था और आप विधायक इस बात के लिए हैं । अगर आप एक मजदूर को ठिकाने नहीं लगा सकते हैं और साधारण मजदूर नहीं है, एक करोड पति है और साथ में राज्यसभा का सदस्य नहीं । भगवान अपने ससुर की बात में संशोधन किया क्योंकि वह ये बात नहीं जानते थे और सबको प्रतिक्रिया व्यक्त करने में कुछ देर लगेगी । का मतलब पैसे और ताकत में उसको दुस्साहसी बना दिया । वो चाहे जो भी बन गया होगा, सही हिम्मत नहीं करनी चाहिए थी । आज लोग और बेटियों के लिए शादी के प्रस्ताव ला रहे हैं तो जबरदस्ती हमारे घरों में घुसकर उनका बलात्कार करेंगे तो एक घातक सबक सिखाने की जरूरत है । आपने बताया की आप से मिलने आ रहा है । कितना दिन रुकेगा यहाँ पता नहीं । उसने पापा को बताया कि वह किस काम से मिलने आएगा । ऍम खराब करेगा, उससे बात करके उसका कार्यक्रम पूछे और से अनुरोध कीजिए । इस बारे में किसी से बातचीत ना करें क्योंकि आपके परिवार की इज्जत का सवाल है । उम्मीद है आपको हमारी बात समझ रहे हैं । हुआ है कि जाए । लेकिन अपने ससुर के जोर देने पर उसने गोदना से बात करके उसका कार्यक्रम पूछ लिया । बबुआ ने बहाना बनाया कि वह उसका फोन इसलिए नहीं ले रहा था क्योंकि वह राज्य के विधानसभा सत्र को लेकर बहुत ज्यादा व्यस्त था तो ऐसा कुछ नहीं था । इतना बेवकूफ था कि उसने ये भी नहीं सोचा कि गोधरा इस बात की पुष्टि करवा सकता है वो यहाँ बीस की शाम को आएगा और अपने माँ बाप के साथ रहेगा । अगली सुबह वो हमसे मिलने हवेली आएगा, वापस काम जाएगा, नहीं पूछा । लेकिन उसने वादा किया है कि वह अकेला आएगा और किसी को अपने आने का कारण नहीं बताएगा । इसका मतलब हमारे पास अपना काम करने के लिए सिर्फ बीस की रात है । इस बार रावण दहन एक दिन पहले होगा क्या बहू ने पूछा ठाकुर दुर्योधन सिंह बहुत पास आए और उसकी आंखों में देखते हुए बोले हम उसका छोड पडा, जला देंगे, हमारे आदमी छोडे को घेर लेंगे और अगर वो भागने की कोशिश करेगा तो उसको मुझे डालेंगे । कब हुआ विचार से डर गया । वो अपने ससुर के पास कोई उपाय पूछने आया था लेकिन वो तो एक अतिवादी कदम उठाने की सलाह दे रहे थे । चुपचाप खडा रहा, क्या हुआ बस यही एक तरीका है वरना आप अपनी बहन उसे दे दीजिए । लेकिन फिर हम लोग आपके परिवार से संबंध तोड देंगे । उस मार कर हम अपने धर्म का पालन कर रहे हैं । ऍम भागवद्गीता में कहते हैं, दुष्ट और विश्वासघाती लोगों को सजा देना । भले ही उसका मतलब उनकी जान लेना हो, आप नहीं है बल्कि ये तो हमारा धर्म है । उतना अपने धर्म और अपने कर्म के रास्ते से भटक गया है । उसका साडियों पुराना कर्म है । हमारी सीमा करना और औरतों की और नजर उठाकर उसने घंटे कार्य किया है । इस तरह से सजा देना हमारा नाम है । दो महीने पहले उसकी गाडी पर हमला हुआ था । उसके सेठ को गोली लगी थी । दस दिन के भीतर पुलिस ने सभी अपराधियों को पकडकर सलाखों के पीछे डाल दिया । मामले की सुनवाई चल रही है । जी और राज्यसभा का सदस्य हैं । राज्य सरकार उसके साथ है । पूरे राज्य के पुलिस सक्रिय हो जाएगी और दो दिन के भीतर हम सब जेल में होंगे । खुद की तरह बात मत कीजिए आपको सांसद रामासरे प्रसाद याद हैं कि सीवान कोर्ट के बाहर धमाके में मारा गया था । घटना के तीन साल बाद भी पुलिस किसी को पकड नहीं पाई है । विधायक मणीलाल गौतम पिछले साल अपनी गाडी पर हुई गोलीबारी में मारा गया था । अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है । जानते हैं क्यों वो एक दलित थे । इन की कोई परवाह नहीं करता हूँ । हम इस काम के लिए बिहार चाहती बुलाएंगे । उनका उत्तर प्रदेश में कोई रिकॉर्ड नहीं होगा । घटना के दिन आप सुहागपुर से बाहर रहेंगे । लखनऊ में या फिर बंदा ने किसी सरकारी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रूम लीजिए । कुछ दशहरे के पहले वाली रात को हमारे दस बीस आदमी नदी के रास्ते सुहागपुर में घुसेंगे तो गोरखपुर में आपका कोई विश्वास पात्र हैं । उसे उन आदमियों को गोधरा के झोपडे का रास्ता दिखाना होगा । ठीक है हलुवा हमें बुलवा की जरूरत गोधरा के आने की खबर देने के लिए भी पडेगी क्योंकि हमारा असली निशाना वही है । अगर उसके आये बिना हम झोपडे में आग लगा देंगे तो हमारा उद्देश्य पूरा नहीं होगा और वही काम कर देगा । एक बात हूँ सुहागपुर में रुक रुककर बरसात हो रही है । अगर उस रात भी बरसात हो रही होगी तो वो लोग आप कैसे लगाएंगे? मैं आपकी बुद्धि पर गर्व है । उस स्थिति में हमारे आदमी उसके छोडे को बम से उडा देंगे । अगर वो धमाके में बच जाएगा और भागने की कोशिश करेगा तो वो लोग उस पर दूसरा बम फेक देंगे । हम वापस से शोध के बारे में बात कर लें । उनकी योजना से ड्रॉप खाए बबुआ ने पूछा नहीं होना तो हमारी योजना को स्वीकृति देंगे और नहीं हमें इस पर अमल करने देंगे । निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक गोधना रात को नौ बजे सुहागपुर पहुंच गया । मई बाबा को पहले ही सूचना मिल चुकी जी इसीलिए दोनों उसका इंतजार कर रहे थे । मई घर पर और बाबा तो लेके मोड पर भूतना उन्होंने देख लिया और गाडी में बैठा लिया । जब घर पहुंचा तो पानी नहीं बन रहा था । महीने अपने बेटे के लिए रोहू मछली बताई थी । योजना को दूर से ही खुशबू आ गए । हालांकि टोले में सब लोग सोने की तैयारी कर रहे थे । फिर भी गाडी की आवाज सुनकर कुछ लडके वहाँ इकट्ठा हो गए । लेकिन फिर जल्द ही चले गए कार या मोटर । अब उनके लिए उतने कौन तो ही की वस्तु नहीं रह गई थी जितनी चार पांच साल पहले थी । खाना खाने के बाद ड्राइवर गाडी लेकर स्कूल चला गया । जब भी गोदना आपने मई बाबा से मिलने आता है और रात को उनके पास रहता तो ड्राइवर स्कूल में रुकता था । खाने के बाद मई बाबा और बेटा कुछ देर शेड के नीचे खाट पर बैठ कर बात करते रहे । कुछ ही देर में बरसात शुरू हो गयी । गोदना के घर में दरवाजे के सामने छाया के साथ एक चबूतरा था जिसकी वजह से फोटो ले के अन्य घरों से अलग लगता था । वो ना चाहता तो गांव में अपने परिवार के लिए एक हवेली बंद हो सकता था । वो उसके समानता के लिए न्याय के सिद्धांत के खिलाफ होता । हवेली के भीतर भुलवा की पत्नी तुलसी भबुआ की पत्नी मधुवंती की मालिश करने आई थी । दूसरे बच्चे के जन्म के बाद सहित को सोने से पहले अपने पेट और जांघों की नियमित रूप से मालिश करवाने लगी थी । पहले सुख उसकी मालिश करती थी लेकिन अब उम्र हो जाने की वजह से उसमें मालिश करने की ताकत नहीं रहे हैं । हालांकि भुलवा का परिवार पिछडी जाति का था लेकिन वो छूट नहीं समझे जाते थे और हवेली में प्रवेश कर सकते थे । जब मधुवंती मालिश करवा रही थी तो चिंता से भरी बबुनी वहाँ मौजूद थे । बबुनी को अगले दिन की चिंता सता रही थी । कुछ जानना चाहती थी कि अगले दिन बबुआ खोलना से मिलेगा या नहीं । हाँ जी उधर अपने मई बाबा से मिलने आया है क्या? बहुत की और देखते हुए तुलसी ने मधुवंती से पूछा उसे बबुनी और गोधरा के संबंध का आभास था । जवाब में मधुवंती भी बबुनी की और देखने लगी जिसे इस बात की जानकारी थी । लेकिन उसने चुप और अनजान बने रहना ठीक समझा । तुम को पूछ रही हो । मधुवंती ने पूछा । छोटे मालिक ने उनको मतलब बुलवा को मोबाइल पर दो तीन बार फोन करके योजना के बारे में पूछा था । हर बार वह बाहर जाकर देखते हैं और आकर छोटे मालिक को बताते हैं कि बोलना अभी नहीं आया । गांव वाले बबुआ को छोटे मालिक कहते थे । हमें नहीं पता । मधुवंती ने जवाब दिया । लेकिन गोधरा छोटे मालिक के जी का जंजाल बन गया था । जब वह सवेरे लखनऊ गए तो बहुत परेशान थे । ये हमारी शादी के बाद का पहला दशहरा होगा । जब हम लोग साथ नहीं होंगे । भैया का यहाँ नहीं रहेंगे बनाने हरा नहीं पूछा नहीं उनको कल लखनऊ में किसी सरकारी समारोह में शामिल होना है । खत्म होते होते देर हो जाएगी । हम जानते हैं आप क्यों पूछ रही हैं । फॅमिली में सब लोग जानते हैं कि दशहरे की सुबह गोदना हवेली में आने वाला था । उन्हें कारण भी मालूम था । कल रात को वो भी बहुत परेशान थे, जब उनको नींद नहीं आई । पहले चले गए, लेकिन कल रात को तो पानी बरस रहा था । तब उन्होंने हैरानी से कहा, हम जानते हैं फिर भी हो गए । छाता लेकर इस सब के लिए कौन जिम्मेदार है, ये सब जानते हैं । मधुवंती ने बबुनी को ताना मारा और पेट के बल लेट गए । उन्होंने अपने कमरे में जाने के लिए खडी हो गई । उसे अपनी भावी कटाना अच्छा नहीं लगा । पीछे से उसने तुलसी को कहते सुना, बहुत जी, हम आज जल्दी घर जाएंगे । उन को बाहर जाना है । छोटे मालिक ने उनको कोई काम दिया है । इसलिए वह हमको जल्दी आने को बोले हैं । अपने कमरे में बबुनी गोधरा के बारे में सोच रही थी । उस सोच रही थी कि पता नहीं वो आया या नहीं । पता करने का कोई तरीका नहीं था । उसमें ये भी लग रहा था की पता नहीं अगले दिन की मुलाकात का कोई नतीजा निकलेगा या नहीं । बस वो हवेली में नहीं होगा और ठाकुर साहब को इस मामले में कोई फैसला करने का अधिकार नहीं था । वो उसके पक्ष में फैसला लेना चाहते हैं तो भी नहीं । एक बात उस को परेशान कर रही थी कि जब बबुआ गोधरा से मिलने ही नहीं वाला था तो वो उसके आने की जानकारी क्यों चाहता था । अगर उस से मिलना नहीं चाहता था तो उसे उसके लौटने के बारे में पूछना चाहिए था, आने के बारे में नहीं । उसे तुलसी की कही बात याद आई की उसे जल्दी घर जाना था क्योंकि भुलवा को छोटे मालिक के बताए किसी काम के लिए बाहर जाना था । क्या इन बातों में कुछ संबंध था? वो जितना सोच रही थी उतनी ही उसे हर बात रहस्यमय लग रही थी । क्या गोधरा के खिलाफ कोई षड्यंत्र चल रहा था? वो अपने बिस्तर पर उठकर बैठ गई । क्या बबुआ गोदमा के खिलाफ कोई षड्यंत्र रहा था? बबुआ के जाने के बाद सहित हवेली में छाई असामान्य शांति तूफान के पहले की शांति प्रतीत हो रही थी । इस विचार नौ से भी चेंज कर दिया । उसने दरवाजा हल्का सा खोलकर बाहर जाता । मधुवंती का कमरा आंगन के पार तिरछी और बना हुआ था तो उसे घर जाने की तैयारी कर रही थी । बबुनी ने उसके पीछे उसके घर तक जाकर भुलवा पर नजर रखने का फैसला किया । वो मेन गेट के बाहर नहीं जा सकती थी क्योंकि ठाकुर साहब बाहर बैठक में होते थे । बरेली से निकलने का और कोई रास्ता नहीं था । फिर उसे हवेली के पीछे बने पुराने शौचालय का खयाल आया जो इस्तेमाल नहीं होता था । सात साल पहले हवेली में आधुनिक शौचालय बनने के पहले हवेली के पिछवाडे ऊंची दीवारों से घिरा एक पुराने ढंग का शौचालय उपयोग में आता था । पुराना शौचालय पिछवाडे के पूर्वी हिस्से में था जबकि नया शौचालय पश्चिमी होने में था । हवेली के मर्दों को पुराना शौचालय करवाने का वक्त नहीं मिला इसलिए उसे अपने आप नष्ट होने के लिए छोड दिया गया । पुराने शौचालय में नीचे एक बडा सा कम्पार्टमेंट था जहाँ बेहतर हात से सफाई करके मानव मल को सिर पर ढोकर मैदान में फेंकने जाते थे । समय के साथ नमी और पुरानेपन के कारण शौचालय की सीट टूट गई और उस जगह बडा सा कांदा बन गया । इसमें से एक आदमी आराम से गुजर सकता था । जब मधुवंती शौचालय से निकलकर अपने कमरे में चली गई तो बहुत ही पिछवाडे चली आई । उसने पुराने शौचालय का दरवाजा खोला तो उसे जोरों की उबकाई दुर्गम से नहीं । क्योंकि दुर्गंध तो पिछले सात सालों में खत्म हो गई थी बल्कि उस रास्ते से निकलने की ख्याल से इसी तरह से नीचे उतर गई । जब वो कम्पार्टमेंट से बाहर निकली तो पानी पर्स रखा था । वो बुलवा का घर जानती थी । बुलवा के घर से कुछ दूरी पर कोई पेड के पीछे छूट गई । घर का दरवाजा बंद था । क्या बनवा चला गया? उसने सोचा जब आधे घंटे तक कोई हलचल नहीं हुई तो उसने गोधरा के घर जाने का फैसला किया । जैसी वह पीछे मुडी, दरवाजा खुला और बलवा बाहर निकला । उसका चेहरा ढका हुआ था और उसके हाथ में एक छाता था । वो बोले की ओर जाने लगा चाहिए । गोदना को कोई नुकसान पहुंचाने जा रहा है । उसने सोचा उसके ऊपर से पानी में भी पसीना आने लगा । लेकिन जब बुलवा गोधरा के घर की और बढने की बजाय सीधे नदी की ओर जाने लगा तो उसने राहत की सांस ली । उसके पीछे तटबंध थक गई और अंधेरे में छूट गई । भगवान दूसरी और उतर गया । ये वही जगह थी जब सालों पहले वो और गोदना मिले थे । उसने खुलवा को एक सफेद कपडा लहराते देखा । उसने नदी के पार देखा । उसे नदी पार करती है । दोनों नावी दिखाई दी । नाव में सवार एक आदमी ने जवाब में सफेद कपडा लहराया । भगवान बुदबुदाई टोली की और वापस भागी । पहले कभी इतनी तेज नहीं दौडी थी । आज अपने प्रियतम की जान बचाने के लिए दौड रही थी । वो जानती थी उन लोगों को नदी पार करना मुश्किल से पंद्रह मिनट लगेंगे हूँ । उसने गोदना को बुखार है, जो शेड के नीचे सो रहा था । कविता इस समय आप यहाँ से अच्छा ठीक है ना घूमना आंखें मलते हुए उठ गया । मुश्किल से एक घंटा हुआ था । अभी दरवाजा खोला और मई बाबा बाहर आ गए । हम सब समझा देंगे । लेकिन अभी यहाँ से भागों तुम्हारी जान खतरे में है । लेकिन हुआ क्या? उतना पहले यहाँ से भागों वो लोग किसी भी समय यहाँ सकते हैं । बहुत ना समझ गया तो हो सकता था हम तो मिस्टर का काफी घर चलते हैं । उस ने प्रस्ताव रखा नहीं वो लोग उनको वहाँ भी ढूंढ लेंगे । वहाँ पे रहने में खतरा है । आप जाओ । बबुनी को उनकी योजना के बारे में नहीं पता था लेकिन पूछ रही थी ठीक है हमारी गाडी स्कूल में है । हम ड्राइवर को यहाँ बुला लेते हैं या फिर हमें जल्दी से स्कूल पहुंचना होगा । हम पुलिस को भी फोन कर देते हैं । उन्होंने अपना फोन उठाया लेकिन नेटवर्क कहा था । तेज बारिश के कारण मोबाइल नेटवर्क बाधित हो गया था । ऍम यहाँ भरना है । उसने अपने दोनों हाथों से मई और मम्मी के हाथ पकड ली और भागने लगा । इससे पहले वो अपना बंद हुआ और पहचान पत्र लेना नहीं भुला । मई टिन का बक्सा भी लेना चाहती थी । लेकिन वक्त नहीं था । रास्ते में बबुनी हवेली के पिछवाडे की ओर मुड गई और उनसे अलग हो गई । दौडते, दौडते जैसी तीनों जामुन के पेड के पास पहुंचे । पहला धमाका हुआ तो उन्होंने उनके चाहे बचा ली । व्यग्र गोदना ने ड्राइवर को जगह है । जैसे ही ड्राइवर ने गाडी का इंडियन चालू किया, दूसरा धमाका होने लगी । हमारी जीवन भर जहाँ मर्जी चली गई उसका सारा दिन के बक्से और पक्के मकान किया था । गोदना उसकी भावनाएं समझ रहा था । इसलिए उसने खुद को ये कहने से रोक लिया कि जो कुछ भी मायने अभी करवाया है वो उसकी प्रति घंटे की कमाई से भी कम था । गोधरा सलेमपुर पुलिसथाने पर होगा और उसने ड्यूटी पर मौजूद हवलदार से थाना प्रभारी को फोन लगाने के लिए कहा था । उसने अपना परिचय दिया तो थाना प्रभारी से पहचान लिया । वो दस मिनट के अन्दर थाने आ गया । आते ही उसने एक पुलिस दल सोहागपुर रवाना कर दिया । फिर गोदना ने थाने के फोन से ही जिला कलेक्टर को फोन किया और से सारी घटना की जानकारी दी । उसने कलेक्टर से ये भी कहा कि वो अपने परिवार के साथ उस रात देवरिया के सर्किट हाउस में रखना चाहता है । अगली सुबह जब मोबाइल नेट पर बहाल हुआ तो भगवान ने सुहागपुर लौट रहे बहुआ को सूचना दी की उनका काम नहीं हो पाया । जब दो धमाकों के बाद भी उन्हें खून, चीखपुकार या हलचल नहीं सुनाई दी तो समझ गए कि घर पहले ही खाली हो चुका था । बिहार चाहे आदमी घर कर भाग गए, बहुत ही सच्चाई जानती थी । ऍम चुप रहने का निर्णय लिया तो सवाल उसके भाई का था । वो खुश थी कि गोधरा उसके भाई बाबा बच गए । सुबह सके खबर पूरे राज्य में फैल गई । उॅची साहब पर पहुंच गए । तब तक बबुआ भी सुहागपुर पहुंच गया था । गांव के मुखिया के रूप में ठाकुर साहब और विधायक के रूप में बबुआ उनके साथ मकान के मलबे को देखने आए और उनसे टीम अपने काम में लग गई । बरेली की बैठक में लौट का ठाकुर सामने बबुआ से पूछा वो उनको अंदाजा है कि इसके बीच कौन हो सकता है । उनके स्पोर्ट से लग रहा था जैसे वो जानना चाहती हूँ कि कहीं इसमें बबुआ का हाथ तो नहीं था । हम नहीं जानते पिताजी इस घटना के पीछे किसका हाथ है, ये पता करना पुलिस का काम है । क्योंकि हमारी चिंता कुछ और है । हमने बाबू जी को यहाँ बुलाया है । वो आते ही होंगे नहीं कोई उपाय निकालना है । बाबू जी यानी ठाकुर दुर्योधन से तीन बजे आए । उन्होंने पहले भोजन किया, फिर सब लोग बैठक में आ गए । मधुमती की पिता ने समाधान बताया, एक साधारण सी समस्या का विचित्र समाधान थापर साहब हमा करियेगा । लेकिन आपसे उम्र में छोटा होते हुए भी दुनियादारी के मामलों की समझ हमें आपसे अधिक है । ये समस्या पैदा ही नहीं होती है । आपने किस साल पहले परंपरा का पालन किया होता । ऍफ रहे लोगों ने पूछा कि हम मतलब बाबू जी मान लीजिए उसकी बबुनी अपने पति की मौत के बाद भी अपने ससुराल में ही होते हैं और गोधरा से उसका संबंध होता तो ज्यादा चिंता की बात किसके लिए होती आपके लिए शाही परिवार के लिए शाही परिवार के लिए, इससे उन्हीं की बदनामी गलती ठाकुर साहब के कुछ कहने से पहले भगोने जवाब दे दिया आपने तो सुना ही होगा एक बार जब बेटी की डोली पिता के खर्च सुविधा हो जाती है तो ससुराल से उसकी अर्थी निकलती है चाहे उसका पति जीवित हो या नहीं । बलवंत शाही की मौत के बाद दोगुनी को रुद्रपुर से यहाँ लाने के लिए राजी हो कर आपने बहुत बडी गलती वो एक पल बाप बेटे की प्रतिक्रिया देखने के लिए रुक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई ठाकुर दुर्योधन सिंह आगे बोले मामला अभी भी सुधारा जा सकता है बबुनी अभी भी शाही परिवार की जिम्मेदारी है, आपकी नहीं है अगर वो उनके घर से गोदना के साथ भागती है । उनकी बदनामी होगी आपकी नहीं तो हम ये कहना चाहते हैं कि हमें उन की जिम्मेदारी उन्हें लौटाकर इस मामले से व्यक्त हो जाना चाहिए । दूसरी और देवरिया के सर्किट हाउस में अकोला गोधरा के जीवन पर हुए इस हमले का काम जानने की कोशिश कर रहा था । वो इस हमले के तार गोदना पर सलेमपुर रेलवे क्रॉसिंग पर हुए असफल हमले से जोड रहा था । हालांकि सिर्फ बोलना जानता था । दोनों हमलों के पीछे के कारण बिल्कुल अलग थे । उस कमाई से कहा कि वह बाबा को सब कुछ समझा गई । जब ही नहीं बाबा को बताया कि गोधरा और बबुनी एक दूसरे से प्यार करते हैं तो उससे आपको बोला नहीं हुआ बल्कि शांति से सुनता रहा । अंत में वो बोला, हम लोग हवेली चलते हैं, मालिक से बात करेंगे । अगर बबुनी भी हमारे बेटे से प्यार करती है तो इसमें उससे प्यार करके कुछ आप नहीं किया । दोनों को साथ रहने का हक है । लोग बहुत त्याग कर चुके हैं । चलो फॅमिली चलते है । आओ ना, मैं भी उन के साथ जाना चाहती थी । वो पिछली रात की घटना के बहुत डर गई की मई भी हीरो । हम उनको कुछ नहीं होगा । लोग अपने साथ पुलिस ले जाओ, नहीं भाई, हम पुलिस नहीं ले जा सकते । हम हंगामा नहीं खडा करना चाहते हैं । इससे बदलने के परिवार की बदनामी होगी हूँ । हमें कुछ नहीं होगा । उधर गोला साहपुर रवाना हो गए । देवरिया से सुहागपुर का रास्ता ऍम इसमें लगता था । उधर हवेली में बबलू अपने ससुर का सुझाव पसंद आया । भोजनालय के दोनों शर्तें पूरी कर दी वो था की अब उसके विरोध करने पर उसकी बहन गोदना के साथ भाग कर शादी कर सकती हैं । भगनी पर पूरे साल हर पल नजर रखना संभव नहीं है । अगर वो भाग जाएगी तो परिवार की बहुत बदनामी होगी । उसी ये डर भी था कि गोधरा उसकी बहन से शादी करने के लिए कानून की मदद ले सकता है । ऊपर से गोदना को रास्ते से हटाने का पहला उपाय असफल हो चुका था । ठाकुर साहब अपने समधी के सुझाए समाधान के बारे में बिल्कुल नहीं सोच रहे थे । उन्हें बहुत चिंता थी । वह तक समझ चुके थे कि भगोडा के घर में हुए धमाके के पीछे भूखा हाथ था । क्योंकि बब्बू अंधा समझ था, लेकिन वो नहीं । वो जानते थे कि मामले की पूरी जांच होगी । समय के साथ बबुनी उनकी प्राथमिकता नहीं रही । उन पर बोझ बन गई, लेकिन हुआ अभी भी उनकी प्राथमिकता था । बहुत तीनों मर्दों द्वारा संयुक्त रूप से लिए निर्णय की घोषणा करने हवेली के भीतर चला गया ठकुराइन और बहुत ही नहीं रोना शुरू कर दिया । बबूआ ने बबुनी से सामान बांधकर आधे घंटे में तैयार रहने के लिए कहा । जवाब में बबुनी ने कह दिया कि वह मर जाएगी, लेकिन हवेली छोडकर नहीं जाएगी । वो को इस बात का था बंदूक निकाला और अपने खुद के बच्चों की और तानकर धमकी देने लगा कि बबुनी के इनकार करने पर वो अपने सहित सब को गोली से उडा देगा । किसने कहा की बदनामी सहने की बजाय वो परिवार सहित मारना पसंद करेगा या फिर वो गोदना को मारकर खुद को पुलिस के हवाले कर देगा । उसने पब्लिक के रुद्रपुर जाने से मना करने की सूरत में दोनों विकल्पों से देकर दुविधा में डाल दिया । बबुनी इनमें से कोई भी विकल्प कैसे चुन सकती थी? रोते रोते अपने कमरे में गए और सामान बनने लगी । जब अकोला और गोधरा हवेली पहुंचे तो तीनों ठाकुर बैठक में थे और बबुनी के बाहर निकलने का इंतजार कर रहे थे । मैं बोला सीधे बैठक में चला गया । वो उतना बैठक के बाहर खडा रहा किसी कि नहीं । इंसान पहले होली से एक दिन पहले खडा था जब दोनों ठाकुर साहब से उसके आईएस के इंटरव्यू के लिए आशीर्वाद लेने गए थे । बोला ने बैठक में प्रवेश किया । चप्पल की तीनों जोडियों को छुआ फिर वर्ष पर बैठ गया और हाथ जोडकर विनती करने लगा । मालिक हमारा परिवार परसों से आपकी सेवा कर रहा है । हमारे पुरखे आपके पुरखों की सेवा करते थे । आपने जो कुछ भी हम लोगों के लिए क्या है उसके लिए हम आपका उपकार मानते हैं । हम लोगों का जीवन आपका कर्जदार है । बीस साल पहले आपने गोधरा को कलेक्टर बनने की जांच अब नहीं थी । कलेक्टर बनना उसका पहला प्यार था । वो अपने सपने के इतना पास आ गया था लेकिन केवल हमारी बात रखने के लिए और आपकी बात रखने के लिए उसने अपने पहले प्यार का त्याग कर दिया । हम लोगों ने कभी शिकायत नहीं लेकिन अब उसको उसके दूसरे प्यार से हम किसी को अलग नहीं करने देंगे । वो आपके परिवार को बदनाम नहीं करना चाहता इसलिए वो पुलिस या मंत्री लोग को लेकर नहीं आया । हम चाहे कितने भी मूरख और अनपढ हो लेकिन इतना समझाते हैं कि हमारा बेटा हमें बढा दी है । हम को उस पर नाज है क्योंकि उसने ये सब बहुत सी बाधाओं से लडकर पाया है और हम जानते हैं कि वह बाधाएं क्या चीज । वो इतना सरल है कि अभी भी टोले में हमारे साथ कमरे में रहता है जबकि वो चाहे तो महल बना सकता है । इस हवेली से कई गुना बडा वो इतना अमीर है । ये खून पसीना बहाए बिना उस गांव सारी जमीन खरीद सकता है । लेकिन इसमें ऐसा नहीं किया क्योंकि वो किसी को नीचे नहीं गिराना चाहता हूँ । बल्कि जो इतने बरसों से नीचे हैं उन्हें और उठाना चाहता है । योजना बबुनी एक दूसरे से प्यार करते हैं । दोनों व्यस्त है । सरकार और कानून के साथ है । वो चाहते तो भाग कर शादी कर सकते थे । लेकिन दोनों अपने प्यार की और आपके परिवार की मर्यादा बनाए रखना चाहते हैं । इसीलिए वहाँ के आशीर्वाद का इंतजार करते रहे । आपने उसका पहला प्यार छीन लिया लेकिन रुपया करके उसका दूसरा बिहार चीनी ये हमारी हाथ जोडकर विनम्र प्रार्थना है । बैठक में सन्नाटा छा गया । बाहर खडा गोदना रोने लगा । उसने अभी अभी अपने पिता के प्यार की गहराई देखी थी । उस हमेशा आपने बाबा को गलत समझा था । फिर उसने लकडी के दरवाजे के खुलने की आवाज सुनी । उसने बहुत उनको देखा, उसके ऍम सूट की इसलिए पूछी थी । कुछ पलों के बाद भगवान एक सफेद झूठ बोला, बोला हम तुम्हारी भावनाएं समझते हैं । लेकिन अब बात हमारे हाथ से निकल चुकी है । चाही साहब को उनकी गलती का अहसास हो गया है । उन्होंने बबुनी को वापस बुलाया है । बबुनी रुद्रपुर जा रही है । योजना का बिल डूब गया । वो जानता था कि एक बार बबुनी रुद्रपुर में शाही क्योँकि हवेली में चली जाएगी तो पूरी तरह से नया खेल शुरू हो जाएगा । उसके सामने उन्नीस साल पहले जैसी स्थिति थी उसे जल्दी कुछ करना पडेगा । समय भी जा जा रहा था । उसके पास मुख्यमंत्री या समाज कल्याण मंत्री को फोन करने का वक्त नहीं था और वो उन को फोन करके कहता भी किया बबुआ कानून के बाहर जाकर कुछ नहीं कर सकता था । गोदना खडे होकर अपने दूसरे सपने होते हैं तो वो नहीं देख सकता था । उपाशा के उस पल में उसे मदद के लिए सिर्फ मौसम को ख्याल आया । उसी तरह स्कूल की और भागा । बीस साल पहले बंदा था । उसे गाडी लेने का ध्यान नहीं आया । कोई भी भूल गया कि स्कूल नहीं । दशहरे की छुट्टियाँ चल रही थी । स्कूल से वो मौसम के घर की और भागा । हफ्ते हुए । खोजना ने अट्ठावन वर्षीय मास आपको पूरी कहानी सुनाई जो उसे देख अभिवादन की मुद्रा में हाँ छोडकर खडे हो गए थे । वहाँ सब सुनते रहे पर एक शब्द नहीं बोले बल्कि उनकी आंखों से अश्रुधारा बहने लगी । वो गोदना के बिहार के बारे में जानते थे तो ये भी जानते थे के बीच में पडने के लिए वह बहुत छोटे आदमी थे । वो ना पुलिस से मदद मिलने की अपेक्षा में धोनी में अपने घर की ओर भागा । मलबे के पास दो हवलदारों को छोडकर पुलिस अधिकारी वापस चले गए थे क्योंकि उनसे वैसे भी कोई मदद नहीं मिल सकती थी । इसलिए खोलना वापस हवेली की और भाडा आधे घंटे बाद जब वो हवेली पहुंचा तो बबुनी हुआ भगवान और ठाकुर दुर्योधन सिंह के साथ रुद्रपुर रवाना हो चुकी थी । वो दिन आपने मावा के साथ गाडी में बैठा और ड्राइवर से बबुआ जीत का पीछा करने के लिए कहा । ऍफ जी बहुत आगे निकल चुकी थी और दृष्टि से ओझल हो चुकी थी । माहौला रुद्रपुर का रास्ता जानता था । इक्कीस साल पहले उसे एक साल की अवधि में वो दो चार बार रुद्रपुर जा चुका था । ग्राॅस चलाओ हमें उनके हवेली पहुंचने से पहले उन्हें रोकना है । उतना ने हताशा में ड्राइवर को आदेश दिया जबकि वो जानता था कि हम पहुंचने के पहले रोक लेने पर भी वो कुछ नहीं कर पाएगा । रुदरफोर्ड सरयू नदी के किनारे बसा था । आपको एक छोटा सा पुल पार करना पडता है जो वाहनों के लिए उपयुक्त है और फिर दाएं मुडना पडता है । पचास मीटर के बाद बाएं मुड में पर गांव शुरू हो जाता है । वो लाने के कुछ पहले ड्राइवर ने विपरीत दिशा से बबुआ की जी पाते देखी । वो लोग बबुनी को शाही साहब के हवेली में छोड कर लौट रहे थे । सर ऍम मैं जीत को ब्लॉक कर लूँ नहीं होने जाने दो । गाडी तो हमें देखना है कि कविता जीत में है या नहीं । बाबा आप इस चीज के अंदर झांकिए उसके पीछे बैठी होगी । अगर वो जीत में होगी तो हमें उनका पीछा करना होगा । बोलना और भगोटला गाडी से उतरकर सडक के किनारे बेचैनी से इंतजार करने लगे । जी उनके बगल से गुजर गई । वो अपनी जीत नहीं थी । खुदरा का दिल टूट गया । वो जानता था कि अगर बनी हवेली के अंदर चली गई होगी तो बात खत्म थी । कुछ देर बाद वो भारी मन से गाडी में बैठ गए । ड्राइवर नहीं जिससे मामला समझ में आने लगा था । होना से पूछा ऍम योजना के पास कोई जवाब नहीं था । उसने अपने बाबा की और देखा उसके पास भी कोई जवाब नहीं था । अच्छा ड्राइवर ने अपने आप से कहा तो उसे पुल के दूसरे छोर पर एक औरत दिखाई दे रही थी । शाम का समय था इसलिए पहचान पाना मुश्किल था । उसने गाडी थोडी आगे बढाई होना बुदबुदाया कविता ऍम बबुनी यहाँ क्या कर रही है? नदी में कूद तो नहीं जा रही? ऍम योजना को लगा कि वो नदी में पूछ नहीं जा रही थी । वो ना गाडी से बाहर पूरा और फुल्के दूसरी छोड की और दौडने लगा । चिल्ला रहा था अभी कहा तो कविता हम उन्होंने उसको देखा तो वो भी दौडने लगी । दोनों अपनी आजादी की और दौड रहे थे । वो पुल के बीच में मिले और एक दूसरे से निपट गए तो खुशी के भारत होने लगे । तब तक गाडी भी वहाँ गई । मैं बोला गाडी से उतरा बबुनी उसके पहुंच हुई । जब गाडी सर्किट हाउस की ओर जाने लगी तो मैं बोली फॅमिली के बडे फाटक पर रखा है तो जाने तो हम आपको नहीं कपडे खरीदेंगे । वो बोला लेकिन उसमें हमने कंगन और अंगूठी है । उस सूटकेस में और गहने भी हैं । अगर गाडी को शाही हवेली की ओर ले चलो भूलना नहीं । ड्राइवर से कहा हवेली पहुंचकर बबुनी ने उनसे गाडी में ही बैठे रहने को कहा । जैसे ही वो गाडी से उतर ही चाहिए परिवार के लोग फाटक बंद करने लगे । बबुनी फाटक तक गई । अपना सूटकेस उठाया और गाडी में वापस आ गए । वो नहीं जानने के लिए उत्सुक था की हवेली में आखिर हुआ क्या था । भगनी ने बताया जब वो लोग शादियों की हवेली पहुंचे तो बडे शाही साहब से आपने आने का उद्देश्य बताया तो उन्होंने बबुनी को स्वीकार करने से बना कर दिया । बहु आने से जबरदस्ती जीत से उतार दिया । भगवान ने उसकी अटैक्टिव फाटक पर रखती है । बहुत ही को जबरदस्ती शाही साहब के गले बढकर वो लोग जीत को भगा ले गए । बबुनी हवेली की ओर बढने लगी तो वह सब शाही साहब और उनके भाई जल्दी से अंदर चले गए और मेन गेट बंद कर लिया । बहुत ही जी को देखने के लिए पीछे भागी दौडते दौडते मुकुल पर पहुंच गई जहां से घोषणा मिल गया । रात के आठ बजे वो लोग सर्किट हाउस पहुंच गए । चिंता से भरी मई गाडी की आवाज सुनकर दौडते हुए बाहर आई । बबरी ने उसके पहुंच हुए फॅमिली लगा लिया । जैसे ही वो अपने कमरों की और जाने लगे पटाखों की आवाज आने लगी । गोधरा आसमान में पटाखों की रोशनी देखने लगा । रावण दहन शुरू हो चुका था

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बेटिकट मुजरिम से अरबपति बनने की कहानी writer: राजीव सिंह Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Rajeev Singh
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