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बेटिकट मुजरिम से अरबपति बनने की कहानी - Part 29

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बेटिकट मुजरिम से अरबपति बनने की कहानी writer: राजीव सिंह Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Rajeev Singh
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उनत्तीस गोदना का कमरा द ग्रैंड ड्रैगन नाम के होटल में बुक था । बिना समय बर्बाद किए उसने अपना अभियान शुरू कर दिया लेंगे और उसके आस पास में कुल मिलाकर आठ थे । उनमें से चार हैॅ स्पेस तो और ठीक से पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध थे । हम इस गोम्पा मठ के अलावा बाकी सब से बीस किलोमीटर के भीतर थे, इसलिए उसने पहले ही में जाने का निर्णय लिया । वो उन मठों के कुशक यानी लामाओं के मुखिया से मिला और उन्हें मुकुंद की तस्वीर दिखाई । उन्होंने नहीं देखा था । तस्वीर में मुकुंद के बाल थे, जबकि इच्छुक गंजी होते हैं, इसलिए प्रयास व्यक्त गया । लेह श्रीनगर हैॅ गोपा से वो फूंक ओम पाल गया । लेह से बीस किलोमीटर और लेह श्रीनगर हाईवे से छह किलोमीटर दूर था और ऍम लेह के दक्षिण में थे, इसलिए वह छह गोंपा में अंत में गया । छह से वह सीधे है मिल गया तो वहाँ से पैंतालीस किलोमीटर दूर था । उसके मुश्किल से किलोमीटर का सफर क्या होगा कि उसे चक्कर आने लगे । उसने खुद को इतनी ऊंचाई की जलवायु के अनुकूल बन पाने का समय नहीं दिया था । उसने दो रोटी की और वापस अपने होटल आ गया । शाम को वहाँ मिल गया और वहाँ से भी निराश होकर लौटा । अगली सुबह वो लामायुरु गया तो लेह से दस किलोमीटर दूर कारगिल लेह रोड पर है । दसवीं शताब्दी में स्थापित लामायुरु लेह का सबसे प्राचीन मत है । ये सिंधु नदी के सामने एक बडी सी चट्टान परिस्थित है । वहाँ के पुश अप नहीं मुकुंद के पहचान लिया और एक शिष्य से भी कुछ होगा तो को बुलाने के लिए कहा । जब खुद का बहुत नाम था मुकुंद को देखकर कूदना भावुक हो गया । कौन भावुक नहीं हुआ वो मैं उम्मीद थी । हसमुखभाई के बारे में और उसके आने के उद्देश्य के बारे में जानकर मुकुल दुखी हो जाएगा । लेकिन मुकुंद के चेहरे पर दुख का भाव नहीं था बल्कि वो गोधरा को देश देने लगा । हम नहीं मानते हैं की मृत्यु जीवन का अंत है । जब किसी की मृत्यु होती है उसकी चेतना उसे छोडकर कमर जन्म के छह रास्तों में से एक में प्रवेश करती है । हमारे साथ नहीं होता है तो होना चाहिए । हमें वही मिलता है जो हम अर्जित करते हैं अच्छा या बुरा । हम जो कहते हैं जो करते हैं ये सोचते हैं उसके द्वारा हर पल एक नए कर्म का निर्माण करते हैं । कर्म कारण और प्रभाव का सिद्धांत है । प्रारब्ध और कर्म के सिद्धांत के कारण निरंतर बदलाव होता रहता है । जहाँ तक हम जानते हैं हसमुखभाई ने न कभी कुछ बुरा कहा है, क्या है और मैं सोचा है फिर उन्हें कष्ट दूर रहना पड रहा है । मनुष्य के कष्टों का कारण अज्ञानता और लोग है । हम कर्म से अनुभव है और गलत तरह के सुखों के लोग भी हैं । डेट कष्ट भोग रहे हैं क्योंकि वह अपने कर्मों से अंधेरी है । मैंने कष्ट होगा क्योंकि मैं अपने कर्मों से अनभिज्ञ था । मैंने लोग और अज्ञानता काट कर अपने दुखों का अंत कर लिया है । हम से निर्माण कहते हैं इच्छाओं का हम निर्माण है । मैं सुखी और संतुष्ट हूँ । हम बहुत दर्शन को ज्यादा नहीं समझते हैं । लेकिन मानवता कहती है कि एक मनुष्य को दूसरे का जीवन बचाने के लिए सब कुछ करना चाहिए । वो कॉमा में भी आपको याद कर रहे थे । हम जानते हैं कि आप हमारे साथ चल कर उन्हें होश में वापस लाएंगे । हम बुराई को जीतने नहीं देंगे गोद मैंने जोर देकर कहा मैं बहुत दुनिया में वापस जाकर उसके झूठे सुखों के लोग में नहीं फंसना चाहता हूँ । अगर तुम्हें लगता है कि तुम बहुत दुनिया के लोग में आ सकते हो तो मैं अवश्य जाना चाहिए । कुछ जिन्होंने मुकुंद का अंतिम वक्त सुन लिया था, बीच में बोले तो मैं जाकर अपनी परीक्षा लेनी चाहिए तो मैं जाकर पता करनी चाहिए क्या तुम्हारे भीतर झूठे बहुत शिक्षकों का लोग अभी भी बचा है । इनके पिता एक हफ्ते से कोमा में है । उन्होंने संकेत दिया है कि वो अपने बेटे को देखना चाहते हैं । हमें लगता है कि अगर वो अपने बेटे को अपने पास देख लेंगे तो शायद बेहतर हो जाएंगे । होगा तो भी जाना चाहिए । कुछ आपने सुझाव दिया नई दिल्ली जाने वाली अगली फ्लाइट शाम को थी । इसलिए मुकुल योजना के साथ उसके होटल आ गया । सब कैसे हुआ? मुकुल सामान्य होने लगा था वो । मैंने पूरी कहानी और अब तक की जांच के बारे में बताया । तृषा द्वारा मकबूल के चुनाव और मकबूल की हीरोइन से नजदीकी तरफ इसलिए रेन की साजिश है । लेकिन वो डेट को नुकसान पहुंचाने के लिए इस अब तक चला जाएगा । मैंने कभी नहीं सोचा था । उसने हसमुखभाई को मारने के लिए साजिश नहीं रची थी । वो हमें भरना चाहता था । फिर कुछ दिनों से बताया कि कैसे सीट बदलने के कारण उसके बदले हसमुखभाई गोलियों का निशाना बन गए । ऋण खिला नहीं है । रुक्मिनी उसका साथ दे रही है । इतना को आभास तो था लेकिन मुकुंद की बात में उसे खरान कर दिया तो आप की पत्नी हैं था । वो मेरी पत्नी थी, लेकिन वो हीरोइन के प्रति वफादार है । एक तरह से उसे मेरी पत्नी के रूप में स्थापित किया गया है । उनका मकसद क्या हो सकता है? आप इतने यकीन से कैसे कर सकते हैं? क्या आपने कभी कुछ देखा है? बहुत मैंने मामले को आगे बढा । वो सच जानने के लिए बेताब था । फिर इन और अपनी के पहले से संबंध थे । उसने रुककर गोदना के चेहरे पर आए शर्म के भाव देखें । हमारी शादी के बहुत पहले से अच्छा तुम्हें ध्यान दिया हूँ । हम शादी के बाद कभी मुंबई साथ में नहीं गए । उस रेजिडेंशल कॉम्प्लेक्स के प्री लॉन्च के अलावा किसी ना किसी बहाने से मेरे साथ मुंबई जाने से बजती थी । एक बार मैं अगले फ्लाइट से उसके पीछे मुंबई गया । मेरा इरादा सिर्फ उसे सरप्राइज देने का था तो अपने घर नहीं गई । उसके मम्मी पापा को उसके आने की जानकारी भी नहीं थी । सुबह की फ्लाइट से लौटने के पहले मैंने एक बार फिर उसके मम्मी पापा से बात की । उन्हें उसकी कोई खबर नहीं थी । शाम की फ्लाइट से वो वापस आ गए हैं । मेरे पूछने पर उसने बताया कि वो अपनी किसी सहेली के घर किसी समारोह में शामिल होने गई थी और वहीं ठहरी थी । इसकी उसके मम्मी पापा को बताने का कोई मतलब नहीं था । अगली बार जब उसने मुंबई जाने का निर्णय लिया तो मेरा दोस्त उसके पीछे गया । उसने भी वही फ्लाइट ली है जिस पते पर हो गई थी । वो हिरोइन का था फिर भी पक्का करना चाहता था । इसलिए अगली बार मैं खुद उसके पीछे मुंबई गया । मैंने उसके बाद वाली फॅस बिल्डिंग के बाहर पार्क में गुजारी जिसमें ऍम था । वो फिर इनके साथ सुबह दस बजे बहार निकलिए । मुकुल सुबह नहीं लगा शायद उसने अभी तक निर्वाण प्राप्त नहीं किया था और अब तक अपने दुखों से बाहर नहीं निकला था । तो आपको उनकी सच्चाई सामने लानी चाहिए थी । उन्हें तो कडी सजा मिलनी चाहिए । उसकी कहानी सुनकर गोदना कुछ उत्तेजित हो गया । मैंने रुक्मिनी इस इस बारे में बात ऍम कोई पछतावा नहीं था बल्कि उसने मुझे धमकी दी कि अगर मैंने वो खोला तो वो मुझे बदनाम कर देगी । उसे समाज में अफवाह फैला देने की धमकी दी, मैं नहीं बोल सकते हैं । ऐसा सच में है । नहीं, मैंने पाँच तक नहीं सोचो । ऐसी अफवाह फैलने से मेरे माता पिता की कितनी बदनामी होती है? कितना कमजोर था? मुकुल जो उसने इतनी आसानी से उन के आगे घुटने टेक दिए । वो सोच रहा था उसे दिशा के साथ देता है । समय याद आया । उसे याद आया कि त्रिशा उससे शादी करने के लिए कितनी बेताब थी । मेरे ने वही चांद उसके साथ भी चलने की कोशिश की थी । तृशा रुक्मणी जितनी दूरी औरत नहीं थी । क्या अपने इस बारे में हैं, जिनसे बात की नहीं? क्यों नहीं हमारे मतलब आप अपने माता पिता को उन बदमाशों के साथ कैसे छोड सकते थे? मुकुल कुछ पल से देखता रहा था, बोला है तो उनके साथ तुम थे । डेट को तुम्हारे ऊपर भरोसा है और मुझे इस जवाब के बाद बोलना के पास कहने के लिए कुछ नहीं बचा । जैसे ही गोदना ने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर अपना सेलफोन चालू किया, उसके पास दयाशंकर का कौन किसने बताया कि उसकी अनुपस्थिति में ही लेने अफ्वाहों को शांत कर रहे और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए कंपनी के चेयरमैन की हैसियत से प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी । उसपे स्टॅाफ उसने बकवास बयान दिए । अप्रत्यक्ष रूप से उसने हसमुखभाई पर गोली चलाने के लिए गोधना पर उंगली उठाई । जानकारी से कूदना बिल्कुल परेशान नहीं हुआ । उसने राज्य के पुलिस प्रमुख को उनके सेल फोन पर कॉल किया और उन्होंने बताया कि पुलिस टीम मकबूल को गिरफ्तार करने के लिए मुंबई रवाना हो चुकी है । जब वो सर गंगाराम अस्पताल पहुंचे तो रात के आठ बज चुके थे और मिलने का समय खत्म हो चुका था । गोदना ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर से अनुरोध किया कि वो बेटी को पिता से मिलने दें । हम खुद नहीं अपने पिता का असर सहलाया तो उनके होटलों में हलचल हुई । डॉक्टर तुरंत मॉंडल के पास पहुंचा । फिर उसने उनकी न चाची डॉक्टर की प्रतिक्रिया उत्साहजनक थी । उसने सीधे डॉक्टर को बुलाया और सबसे आईसीसीयू के बाहर इंतजार करने को कहा । अगले शाम हो भाई, कौन से बाहर आ गए गोदनामे डॉक्टरों से और कादंबरी बेन सेवंती की कि वो कमरे के बाहर छह बात किसी को न बताए । वो नहीं चाहता था कि है । फॅमिली को ये बात पता चले तो चाहता था कि मकबूल की गिरफ्तारी तक वो दोनों उत्साहित बने रहे । तीन दिन तक मुंबई में मकबूल का पता न चल पाने शहीद पुलिस और खोजना दोनों में राष् हो गए । मुंबई पुलिस में कोई भेज दिया था, जिसने उस से सतर्क कर दिया था । उसके आसपास शिकंजा कसने के लिए पुरुष उसके डांस बार पर छापा मारा । उस सीन कर दिया और उसके पार्टनर जगन से पूछताछ की । इसमें मकबूल की कोई जानकारी होने से इंकार कर दिया । मुंबई से बाहर जाने वाले सभी रास्तों पर नाकाबंदी कर दी गई । जगह और मेरे चौबीस घंटे की पुलिस की निगरानी थे । उसके प्रयास हूँ । चौथे दिन रंग लाएगी पुलिस नहीं । मुंबई कोंकण हाॅट पोस्ट पर मकबूल को धरदबोचा । वो कार की डिक्की में मुंबई से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था । पुलिस मकबूल का निर्माण प्राप्त करके उसे लखनऊ ले आई । शुरू होशियारी दिखाई और निर्दोष होने का दावा किया । जब पहुँच रहे के लिए उन दोनों आदमियों के सामने लाई मैंने । उसने पैसे दिए थे तो उसने उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया । लेकिन उन आदमियों ने उसे पहचान लिया । अंत में पुलिस को उस पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करना पडा । आखिर टूट गया हूँ, गिरे नहीं । उसे इस काम के बदले पचास लाख पेश की थी । मकबूल ने दस लाख खुद रखकर बाकी उन भाडे के हत्यारों को दे दिए थे । मकबूल की गिरफ्तारी के अगले दिन अशोक भाई को एयर एम्बुलेंस में अहमदाबाद ले जाया गया । ग्रुप में नहीं उनका स्वागत किया । वह खुद को देख कर बहुत हैरान हुई चीजे उसके हिसाब से नहीं हो रही थी । हालांकि दो दिन बाद मुकुल के चले जाने से उसने राहत की सांस नहीं बोलना नहीं मुकुंद के फोन नंबर के साथ उससे दोबारा आने का वायदा भी लिया । वो से अनुरोध किया कि वो अपराधी को बाहर निकालने में उसकी मदद चाहता था । अगले दिन हसमुखभाई की बेटी भी अमेरिका वापस चली गई । पुलिस ने मकबूल को गिरफ्तार किया तो हारे नहीं, संकट भाग लिया । वो देश के बाहर भागने की तैयारी करने लगा क्योंकि वो पुलिस की निगरानी में था । इसलिए जैसे ही मकबूल ने उसका नाम लिया मुंबई पुलिस ने फौरन एयरपोर्ट पहुंचकर उसे ब्रिटिश एयरवेज के काउंटर से गिरफ्तार कर लिया । जहां से वो अपना बोर्डिंग पांच ले रहा था । वो लंदन भाग रहा था । पुलिस ने जगह लग वाले को भी गिरफ्तार कर लिया चुकें वो एक हाईप्रोफाइल केस था जिसमें बडा व्यवसायी और राज्यसभा का सदस्य हैं शामिल थे । राज्य सरकार ने उसे सलीमपुर से जहाँ अपराध हुआ था लखनऊ स्थानांतरित कर दिया । पुलिस ने हिरण पर हत्या के प्रयास के लिए धारा तीन सौ साल और आपराधिक षडयंत्र के लिए धारा एक सौ बीस बी लगाई । जगन की किस्मत अच्छी रही जिस पर अपराधी को बचाने के लिए गलत जानकारी देने के आरोप में सिर्फ धारा दो सौ एक लगी । उसे बेल भी मिल गई । फिर उनको बेल नहीं मिली हूँ । अपराध में शामिल सभी कडियां पुलिस के हरा सब नहीं शूटर आयोजन ऍर सरगना मामले को सुलझाने की प्रक्रिया में पुलिस ने राज्य में एक आपराधिक गिरोह का पर्दाफाश कर दिया था । दस सितंबर को पुलिस ने लखनऊ की निचली जिला अदालत में चार्जशीट करदी हूँ । संसद के मॉनसून सत्र का अंतिम दिन होने के कारण गोधरा नई दिल्ली में था । इसकी सुनवाई एक सप्ताह बाद जिला जज मनोहर श्रीवास्तव की अदालत में हुई । सुनवाई के वक्त गोधना भी मौजूद था । घटना के चश्मदीद गवाह के रूप में जब गोदना ने अपनी पहचान बताई तो जिला जज ने उसकी और ऐसे देखा जैसे वो उसे पहचानते हैं । जब बोर्ड की कार्रवाई समाप्त हो गई और जब साहब सुनवाई की अगली तारीख देने के बाद बोर्ड से बाहर चले गए तो एक्टर होना के पास आया । उसने गोद से उसके साथ माननीय जज साहब के चैंबर में चलने का अनुरोध किया ।

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बेटिकट मुजरिम से अरबपति बनने की कहानी writer: राजीव सिंह Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Rajeev Singh
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