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बदकिस्मत क़ातिल भाग - 13

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बदकिस्मत क़ातिल भाग - 13 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
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एक ही दिन में उसके हाथों दो क़त्ल हुए- एक उसके दुश्मन का दूसरा उसका जिसे वो पागलपन की हद तक प्यार करता था। वह एक बदकिस्मत कातिल था। पर उसकी किस्मत कुछ ऐसी थी कि जावेद-अमर-जॉन उसे अंत तक पकड़ न सके। writer: शुभानंद Voiceover Artist : RJ Manish Author : Shubhanand Producer : Saransh Studios
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भागते रहा । गनेशगंज के एक मकान के सामने पुलिस और खुफिया विभाग की गाडियां मौजूद थी । अमर अभी अभी वहां पहुंचा था । उसने देखा दो हवलदार दरवाजा तोडने में लगे हुए थे और जॉन और चाहे पास में एक इंस्पेक्टर के साथ खडे थे क्या चल रहा हूँ? अमर ने उनके पास पहुंचकर पूछा यहाँ का यहाँ पर लेकर कुछ देर पहले ही खबर मिली है कि जहाँ जिस मकान से पता तो आ रही है और पिछले कुछ दिनों से मकान बंद पडा है जहाँ पे थोडा मुझे तो कोई बात नहीं आ रही है । बच्चों की शिकायत पीछे वाले मकान से आई थी तो हम यहाँ क्या करना हैं? बदबू का उपाय खोजने ॅ जावेद बोला नहीं पता चला है कि यहाँ मनोज नाम का एक आदमी रहता है हूँ । अमर के चेहरे पर हैरानी के भाव है फिर वह जॉन की तरफ पडेगा तो ये बात मुझे फोन पर नहीं होता था । फोन पर बता देता तो तेरी ऍम में कैसे देखता था । पाॅवर पर हाथ रखें तभी दरवाजा थोडा की आवाज के साथ टूट गया । ऍम सावधानी से अंदर कदम रखा । जावेद अमर चौवन भी पीछे अंदर घुसते ही उन्होंने बन्दों का आपका सा महसूस किया मकान में ढूंढते हुए उन्हें पीछे वाले कमरे में लाश के दर्शन हुए हैं । ये तो मनोज लग रहा है । जॉन नाक पर रूमाल रखकर बोला वही है । जावेद ने उसे ध्यान से देखते हुए बोला मैं एक नौजवान युवक की लाश थी जो कि बैठ पर सोई हुई अवस्था में था । लाश पर मक्खियां भिनभिना रही थी और काफी बदबू आ रही थी । पास में ही दवा का डब्बा पडा था । साथ में एक नोटपैड भी पडा था । ऍफ उठाया और कहा तो साइड का कैसा लगता है । वे लोग नोटपैड लेकर बाहर गए क्योंकि बन्दों के कारण उस कमरे में ज्यादा देर अपना नामुमकिन हो रहा था । उन्होंने उस नोटपैड की लिखावट पडनी शुरू की । अपनी मौत के लिए मैं स्वयं जिम्मेदार हो कुछ जीने का कोई हक नहीं है । लेकिन जीने की वजह से मेरा सबकुछ जिसकी मैं पूजा करता था, मेरे हाथों खत्म हो गई । इसलिए अपने राजीन अभी बेकार है । मैं मारकर उसमें मिलना चाहता हूँ । इसका मतलब निहारिका को उसने मार दिया । अमर बोला पूरा पडता लोग जॉब बोला । फिर उन्होंने नोटपैड की पूरी कहानी पडनी शुरू की ।

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एक ही दिन में उसके हाथों दो क़त्ल हुए- एक उसके दुश्मन का दूसरा उसका जिसे वो पागलपन की हद तक प्यार करता था। वह एक बदकिस्मत कातिल था। पर उसकी किस्मत कुछ ऐसी थी कि जावेद-अमर-जॉन उसे अंत तक पकड़ न सके। writer: शुभानंद Voiceover Artist : RJ Manish Author : Shubhanand Producer : Saransh Studios
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