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बदकिस्मत क़ातिल भाग - 08

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बदकिस्मत क़ातिल भाग - 08 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
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एक ही दिन में उसके हाथों दो क़त्ल हुए- एक उसके दुश्मन का दूसरा उसका जिसे वो पागलपन की हद तक प्यार करता था। वह एक बदकिस्मत कातिल था। पर उसकी किस्मत कुछ ऐसी थी कि जावेद-अमर-जॉन उसे अंत तक पकड़ न सके। writer: शुभानंद Voiceover Artist : RJ Manish Author : Shubhanand Producer : Saransh Studios
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भागा था । केरल रेस्टोरेंट से करीब अस्सी किलोमीटर दूर एक होटल के कमरे में दो लोग मौजूद थे । दोनों ही बचाने के साथ शराब के खिलाफ खाली कर रहे थे । तभी दरवाजे पर दस्तक हुई । लगता है कुछ आ गया । एक बोला उसने उठकर सावधानी से दरवाजा खोला । सामने खडे व्यक्ति के हाथ में सूटकेस था, जिसे देखकर बहुत खुशी से उछल पडा तो हमारा काम हो गया तो चिल्ला मत कुछ अंदर आ रही थी । इतनी कहकर कुड्डू नामक बाॅक्स अंदर आ गया । पूरा पैसा इधर दूसरे ने पूछा कितने का टाइम किसके पास था, पसंद नहीं कर पा रही थी । पूरा ही होगा चावल से जब की बेटी का रिस्क थोडी लेगा बढिया चलो अब माल के तीन ऐसे करके यहाँ से रफूचक्कर हो गया । देख मैं पहले ही बोला था रुस्तम गुड्डू के चेहरे पर नाराज क्या गई की अगर मेरे को पैसा ले ले जाने का इसकी काम करने का है तो मेरा हिस्सा सारा होगा । यानी बीस लाख मेरा तो काय को गुस्सा करता है । रुस्तम बोला अपुन तीन हिस्से करने को बोला तीन बराबर हिस्सों थोडी बोला पर्दे भाई धनिया ने का । उस वक्त हमने पचास लाख के हिसाब से इससे किए थे । तरफ से तीस लाख और देवर है से पर बेचने में लफडा होता है । पूरा काम भी नहीं मिलता तो सब मुझे नहीं मालूम मुझे ऍम से अगर तुम लोग को सेट मेरा चेहरा देखा । सबसे ज्यादा खतरा मुझे दोनों तरफ भेज के जाए । फिर उन्होंने सहमती में सिर हिलाया । फिर सूटकेस खोला गया और पहले पैसे के लिए गए थे । पूरे तीस लाख रुपए । जीवन उन्हें अंदाजन पंद्रह लाख के लगे । कुड्डू को बीस लाख देते हुए धनिया और रुस्तम के जैसे प्राण निकाले जा रहे थे । फिर उन दोनों ने अपने बीच सेवन के तो इससे कर ली है । तभी दरवाजे पर दस्तक हुई । तीनों सहम उठे । कौन सा कीमत करते हुए तो हम ने आवाज लगाई साहब ॅ क्या आपने सोडा बनाया था ना? तो अब तो बोली हूँ । पढाते हुए रुस्तम दरवाजे की तरह पडा । दरवाजा खोला तो उसके होश उड गए । बेटर तो कहीं पीछे खडा था । दरवाजे पर हथियारों के साथ सादे कपडों में उसे चार लोग सामने दिखाई दिए । उनमें चौंतीस और अमर भी देख अपने हाथ ऊपर कर जान बोला । कॅश अंदर से गुड्डू की आवाजाही बहुत वो पुलिस तो उस टाइम चलाया जॉन का भरपूर होता प्रसन्न के चेहरे पर पडा और बहन एक तरफ जा गिरा । उसे पका लिया गया । अमर बाकी तीनों साथियों के साथ अंदर पहुंचा । गुड और दुनिया को पकडने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी ।

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एक ही दिन में उसके हाथों दो क़त्ल हुए- एक उसके दुश्मन का दूसरा उसका जिसे वो पागलपन की हद तक प्यार करता था। वह एक बदकिस्मत कातिल था। पर उसकी किस्मत कुछ ऐसी थी कि जावेद-अमर-जॉन उसे अंत तक पकड़ न सके। writer: शुभानंद Voiceover Artist : RJ Manish Author : Shubhanand Producer : Saransh Studios
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