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फेसबुक -05 in Hindi

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Authorहरप्रीत सेखा, सुभाष नीरव
‘बर्फखोर हवायें’ कहानियों का संग्रह है जिसमें 12 चुनिंदा कहानियां शामिल है। कहानियों की सबसे बड़ी खूबी है कि वे लिसनर्स को निराश नहीं करेंगे। इन कहानियों में समाज, रिश्‍तें, परिवार, सामाजिक संस्‍कर, रूढि़यों, सीख शामिल हैं, जो लिसनर्स को उनसे जोड़ता है। Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Harpreet Sekha Script Writer : Subhash Neerav
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फेसबुक बलराम कैलिफोरनिया का चक्कर लगाकर सप्ताह भर बाद लौटा था । दरवाजे का खडता सुनकर रूप कंप्यूटर के सामने से उठी । आगे बढकर उसने बलराम के हाथों से आइस बॉक्स पकडने के लिए हाथ बढाएगा । ऍम बोला कि मैं रख देता हूँ तो कार में से कपडो लाभदायक और बाकी डिब्बे उठाला । मुझे हिम्मत नहीं दोबारा कार्तक जाने की ग्रुप दरवाजे में से बाहर निकलकर कार की और चली गई । बलराम ने अपनी बडे हुए पेट के सहारे उठाये आइस बॉक्स को रसोई के आइलैंड पर रखा और करीब ही कंप्यूटर डेस के सभी पडी कुर्सी पर बैठ गया । वो कुछ पल यु ही दम लेने के लिए बैठा रहा । उसकी निगाहें कम्प्यूटर के मॉनिटर पर पडी तो बंद था पर कंप्यूटर चल रहा था । कंप्यूटर के सामने बैठे दिनभर पता नहीं क्या करती रहती है । उसमें फिल्में आया । उसने मॉनिटर का बटन दबाकर किया । उसी पर कार में से छोटा मोटा सामान उठाकर रूप अंदर आ गई । बलराम को मानते चलाते देखो हडबडाकर बलराम की और बडी को लगा कि कहीं जल्दबाजी में वो फेसबुक बंद करना तो नहीं भूल गई थी । मॉनिटर पर डाॅन देखकर उसकी सांस में सांस आई । उसने बलराम के कंधे पर हाथ रखकर पूछा ऍम होगी या नहीं । अगर रोटी हो गई रोटी होंगा ये मुझे राय की बोतल में से आधा स्टील का गिलास भरकर पकडा को डालना मैं खुद डालूंगा । उसके बाद मैं होंगा मेरे पर अखबार नहीं कहकर रूप से एक बार क्या करूँ? कहकर बलराम ने रूपये की तरफ देखा । वो अंदर तक पानी पानी हो गई । बलराम के अगले शब्द सुनकर वो समरी उसने कहा तो को ज्यादा डालकर क्लास भर देती है । स्टील का गिलास जल्दी से खत्म कर बलराम ने कंप्यूटर की और देखा । उसका दिल में आया कि फेसबुक खोलकर देखे की नमी नहीं क्या लिखा था । अगले ही पल उसने अपना इरादा त्याग दिया । रूप के काम पर चले जाने के बाद सवेरे उठ कर आराम से पडेंगे । सोच कर वो उठ खडा हुआ । उसके आगे आगे जाकर रूप में, गुसलखाने में बलराम के धुले हुए कपडे और तो लिया टाइम दिया और बोली तब मैं घुसने से पहले कपडे उतारकर मुझे पकडा । दो । मुझे मशीन में डालने हैं । बलराम के उतारे कपडे और हफ्ते भर के बैग वाले कपडे मशीन के हवाले कर के रूप दाल सब्जियों वाले डिब्बों के गिर्द हो गयी । आइस बॉक्स में से छोटे डब्बे निकालकर उसने सिंक में रखे और आइस बॉक्स का ढक्कन खोल कर उसको संडे पर रख दिया । कुछ देर दरवाजा खुला ही रहने दिया । एक खिडकी भी खोल दी । फिर एयर फ्रेशनर छिडककर खाना गर्म करने लगी । बलराम ने नहाकर करीब आधा गिलास फिर शराब से भर लिया और रोटी खाने के लिए मेज पर आ गया । रूप में भाग छोडना, बटर चिकन, सलाह और रायता अभी सब बलराम के सामने ला रखें । फिर तवे पर से गर्म गर्म नान उठाकर बलराम की प्लेट में रखती ही बोली शेयर भी कर लेते हैं । देखो कितनी बडी हुई है । जिस कहती रूप में रहस्यमय भरे ढंग से बलराम की और देखा । लेकिन बलराम का ध्यान उधर नहीं गया । उसने नाम की गर्माहट को पढते हुए कहा, धक्का बडा हूँ, मन नहीं किया । रोटियों से गुजारा हो गया था । दाल तो खराब नहीं । इस बार रूप में चूल्हे के पास खडी होकर पूछा नहीं ठीक रहेगी । डाल मैंने पहले दिनों में ही निपटा दी थी । फिर डूडल्स खत्म किए । करेले आखिरी दिन निपटाए । पिछली बार मुझे लगता है ना फ्रिज में रखना भूल गया था । इसीलिए खराब हुई होगी । ये भी भला को जीना है । सारा हफ्ता बासी रोटियां खाए जाओ । रूप के बाद बलराम ने जानबूझकर बीच में ही काटते हुए कहा लडकों का आया फोन ठीक चल रही है । पढाई बडा कहता है की डेट लोकल ट्रक चलाया करें । मैं खुद भी कोई पार्ट टाइम जॉब ढूंढ लेता हूँ । नाना उसको कहना कि पढाई की तरफ ध्यान देंगे । चल मैं खुद ही कर लूंगा । बाद अगर जॉब करना चाहता है तो कर लेने दो । खाली घर काटने को दौडता है तो आपने फिर सेना चला देना । मुझे आराम से रोटी खा लेने देंगे । अच्छा कहकर रूप चुप हो गई । उसकी ये अच्छा मार फिर जैसी थी । पर बलराम का इसकी और ध्यान नहीं गया । उस को पता था कि यदि उसने रूप को चुप ना करवाया तो वो कहेगी । यदि लोकल ट्रक चलाने से कमाई पूरी नहीं हुई तो किराये वाले घरों में से एक को बेच देंगे । बलराम ऐसे वार्तालाप में नहीं पडना चाहता था । उसको लोकल ट्रैन चलाना सुनार की थाप तक जैसा लगता है । लोहारकी की चोट वाली आदत उसकी पक चुकी थी । जब बच्चे छोटे थे तब भी रूप उसको लंबे रूट पर ट्रक चलाने को रोकती थी । उन दिनों बलराम कहता था मेरे मित्र के कलेश से तो बच्चा रहता हूँ । जब भी कुछ कहती हूँ तो मैं मेरा कलेश ही लगता है अपनी माँ को नहीं कहते । कुछ जब सारा सारा दिन को फोन पर लोगों से चुगलियां करती हैं । अब तो माँ भी नहीं रही थी और घर में कोई कलेश भी नहीं था । पर बलराम ट्रक लेकर गया । हफ्ता हफ्ता लौटना ही ना । एक दिन घर में रहकर फिर अगले चक्कर पर चल पडता है । वापस लौटने पर हूँ । अपनी रील चलाने लगती तो वह से चुप करा देता । रूप अब भी चुप्पी साधे बलराम की और देख रही थी । वो अपना सलाह लाकर बलराम के सामने बैठी थी । बलराम को नाम की आखिरी बुर्की के साथ बटर चिकन वाली कटोरी साफ कर देख रूप बोले चिकन और लूँ ना, पहले ही स्वास्थ्य बाद में ज्यादा खाया गया । खुश होती रूप बोले तुम सोफे पर बैठे जाकर मैं दो मिनट में बर्तन संभाल करती हूँ । फिर कोई मूवी देखते हैं । ऍम बैठकर कमर दुखी हो जाती है । मैं तो लेट होगा तो आ जाना चल रही है । कहकर बलराम उठ खडा हुआ और अपने कमरे में जाकर लेट गया । रूप ने बडता इकट्ठे करके सिंह में रखती है । उसने सोचा बाद में साफ कर लेगी और कमरे में चली गई । जल्दी जल्दी दांतों पर ब्रश किया और बिस्तर में घुस गयी । रूप में अपना सिर बलराम की छाती से लगा लिया । उसका मन किया कि बलराम उसके बालों में अपनी उंगलियां, फेरे और कुछ प्यारी सी बात करेंगे । बलराम ने बिना कुछ बोले रूप को कस्टर अपने साथ लगा लिया । फिर उठा डॉॅ और दोबारा बिस्तर में लेट गया । रूप में बलराम के साथ लग कर अपनी तंग उसके गेट लपेट लें । धूप की भारी सबसे जब बलराम के कानों में सानी साइन करने लगी तो रूप की टांग को एक तरफ करते हुए बोला तो हम घुटता है, इधर हो कर पाएंगे । रूप कुछ देर और पडी रही । उसको नहीं नहीं आ रही थी उसके अंदर फिर वही खालीपन पसर रहे लगा । बलराम के खराटे शुरू हो गए । रूप में दोबारा नाइटी पहनी और फॅमिली रूम में जा बैठे । टीवी चला दिया और उसका ध्यान टीवी पर चल रहे नाटक पर नहीं गया । उसके निगाहें कॉफीटेबल पट्टिकायें अपने पैरों पर पडे तो कुछ देर आपने आज ही हमारे नाखूनों की तरफ देखती रही । उसको लगा जैसे बोस्को मुझे ला रहे हो । उसमें पैरों को नाइंटी में छुपा लिया । एक वहाँ उसके मुंह से निकली । उसके मन में आया कि वह घर से भाग जायेगा, छोड दे बलराम को उसकी आंखों से अविरल आंसू बहने लगे । ये खयाल उसको कुछ हफ्तों से आ रहा था । कभी वो सोचती कि बलराम से कहता हूँ, यदि तुम्हें मेरी कोई परवाह नहीं है तो मैं कहीं और चली जाती हूँ । ऐसा वो नहीं कह सकती थी और कुछ देर बाद अपने आप पर ही लालच देने लगती है । यू बसे बसाए घर को तोडने वाले खयालों से क्यू आते हैं क्या कहूँ लोगों को क्या बच्चों को क्यों वो एक तरफ होना चाहती है । कभी कभी उसके दोनों बेटों पर भी उसको गुस्सा आने लगता है जो घर से दूर टोरंटो यूनिवर्सिटी में पढने लगे थे । जब वो वहाँ की किसी यूनिवर्सिटी में होते तो उनकी देख रेख में ही व्यस्त रही थी । फिर वो सोचती उन्होंने तो एक दिन घर से जाना ही है तो बलराम है जिसकी परवाह नहीं करता है । सिख कैसे गुजरेगी? सारी उम्र उससे बचने क्यों लगा है वो कहीं किसी दूसरी और उससे तो उसका संबंध ये सब सोचकर रूप किसी सबूत की तलाश में बलराम की जेबे टटोलने लगे । बार बार उसको फोन करती बलराम की जुडता वो कहता सारा दिन वो घर में कैसे बैठा रहा करें रूप के फोन खाने बंद कर देता हूँ । कभी कहता हूँ खाली ना रहा कर अपने आपको किसी काम में लगा रूप में अपने आप को व्यस्त रखने के लिए कविताएं लिखनी शुरू कर देंगे । फेसबुक पर अपनी ताजा ताजा डाली कविता को याद कर के रूप में अपनी आंखें पहुंची और कंप्यूटर के सामने जा बैठे । फेसबुक खोल लिया । उसको तीस नोटिफिकेशन आए पडे थे । कुछ घंटे पहले ही उसने क्षेत्र फेसबुक पर डाला था । ये शेयर उसको बलराम की प्रतीक्षा करते हुए सूझा था । रूप में बेसब्री के साथ लोगों द्वारा दी गई दाद को बडा एक में उसकी अमृता प्रीतम के साथ तुलना की थी । ये सभी उसके रूस के प्रशंसक थे । लगभग सभी पूरे प्री प्रशंसा पढकर रूप को अपने अंदर का खालीपन भरता हुआ लगा । वो प्राइवेट संदेश करने लगी । नया संदेश कोई नहीं था और फिर भी उसमें सुनिश्चित हो जाने के लिए मैसेज बॉक्स खोल लिया । रूप खास प्रशंसक था जो दूसरों की तरह शेर के नीचे प्रशंसा भरी टिप्पणी न लिखता बल्कि मैसेज बॉक्स में संदेश भेजकर प्रशंसा के पुल बांध देता हूँ । वो रूप की आंखों की तारीफ करता हूँ । ऍम आपकी आंखों में डूबने के संदेश भेजने लगा । रूप को उसके संदेश अच्छे लगते भूमि चाव से पडती पर जवाब न दे दी । कभी कभी लिख देती । मैं विवाहित हूँ और अब उसके संदेश आने बंद हो गए थे । रूप इंतजार करती वो संदेश रूप के अंदर हलचल मचा देते और जब कुछ संदेश ना होता तो मायूस हो जाती है । उसको लगता कि यदि वह उसके संदेशों के उत्तर देती तो वह घूमना होता । फिर वो सोचती अच्छा ही हुआ । यूपी इस उम्र में बदनामी क्यों लेनी है? एक दिन इसी में ही उसे ख्याल आया । उसने फेसबुक पर एक फर्जी नाम से तलाकशुदा बनकर अपना खाता खोल लिया । अपनी असली पहचान छिपा ली । एक अखबार में से काटकर कोई धुंधला साॅस अपनी फोटो की जगह पर चस्पा कर दिया । अपना शहर भी वैंकोवर की जगह सेनफ्रांसिस्को लिखा । कुछ ही दिनों में उसके कई फ्रेंड बन गए । पहले खाते जैसा प्रेमी उसको यहाँ भी मिल गया । रूप के रूप की प्रशंसा करता वो अपने आप को भाग्यशाली समझता, जिसकी रूप जैसी रूपवती फेसबुक फ्रेंड बनी थी, रूप को उसके संदेश पढकर नशा होने लगा । एक दिन उसने रूप के साथ चैट करते हुए लिखा तेरी फोटो बहुत धुंधली सी है । जब तेरे बारे में सोचता हूँ तो फिर शक्ल मेरी आंखों के आगे नहीं बनती कोई दूसरी फोटो देखा उस शाम थे । बलराम की बेरुखी के कारण रूप दुखी थी । संदेशा पढकर रूप में सोचा कि यदि मेरे सूरत आंखों के आगे नहीं बनती तो योगी प्रशंसा करता रहे । इतने दिन अपनी खीच उस फ्रैंड पर झाडते हुए उसमें लिखा तो मेरे बारे में सोच कर क्या कर रहा है? अपनी घरवाली के बारे में सोचा कर फ्रेंड उसकी बात करके बूढाखेडा । आपका रोग घरवाली का नाम शंकर मूड खराब हो जाता है और लोगों की औरतों को खुश करने के लिए जान हथेली पर रखते हो । तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूँ कि मैं शादीशुदा हूँ और मेरे बच्चे भी हैं । ऍम सलाह तो यू दे रही हो जैसे कुछ सती सावित्री हूँ । यदि इतनी ही शरीफ है तो यहाँ क्या करती है अपने घर वालों की बहुत मजा । उसका ये जवाब पढकर धूप को झटका लगा । उसमें कंप्यूटर बंद कर दिया और अपने आपको बलराम की गुनेहगार मानने लगी । उसी पर उसने कंप्यूटर दोबारा चलाकर वह खाता ही बंद कर दिया । पर अगले दिन उसके अंदर उस खाते को लेकर बेचैनी होने लगी तो मैं सोचा वो कौन सा मुझे जानता था । यही खाता बंद कर दिया ऍफ किये जाती है उसका मन किया कि खाता दोबारा खोल नहीं । दूसरा मान कहे की हुई है मिलने के ऊपर ना इसी कशमकश में ही उसने अगले दिन दूसरे नाम का नया खाता खोल लिया । मगर इस वक्त वो अपनी असली पहचान वाले खाते पर शेयर की प्रशंसा से संतुष्ट थे । उसका मन हुआ कि नया शेयर लेंगे और तुरतफुरत दिमाग में कुछ नहीं सूझा तो दूसरों की पोस्ट देखने लगी । अपनी एक सहेली की फोटो पर उसकी निगाहें अटक गई । उसने फोटो पर क्लिक कर दिया । ये ऍम उसकी तस्वीरें थी । रूप की सहेली और उसका पति बाहों में बाहें डाले खडे एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे । धूप कुछ देर फोटो को देखती रही । उसके अंदर एक बेचैनी सी उठी । उसके फोटो को बंद कर दिया । ग्रुप का दिल में आया कि वह फ्रेंड के साथ चैट करें, जिसमें उसकी तुलना अमृता प्रीतम से की थी । ग्रुप में उसको फ्रेंड लिस्ट हो जा पर वो ऑनलाइन नहीं था । शरू अच्छा हुआ । सोच कर रूप में अपने इस खाते को साइन आउट किया और दूसरे खाते को साइन किया । वहाँ कोई भी नया संदेश नहीं था । वो पुराने संदेशों को पडती रही और फिर एक नया संदेश लिखकर वो दोबारा अपनी असली पहचान वाले खाते पर चली गई और जब जमीन से आके भोजन होने लगी । रूप फेसबुक की दुनिया में से निकली और खराटे मार रहे बलराम के साथ जा लेडी । फिर सवेरे बलराम को सुबह छोड कर ही काम पर चली गई । दिन काफी निकल आया था जब बलराम की आंखें, होली, चाय का कप लेकर वो कंप्यूटर के सामने बैठ गया । फेसबुक खोली । निमी के चार संदेश थे । दो सप्ताह पहले बलराम को फेसबुक निठल्लों का काम रखता था । उसने रूप से यही कहा था जब रूप में उसको भी फेसबुक पर खाता खोलने की सलाह दी थी । बलराम ने पलट का रूप से कहा था तो हर समय खोले रखती है क्या? मिलता है तो बोली और मैं घर में अकेली बैठी क्या करूँ पुरानी कई सहेलियाँ मिल गई उनके साथ बातें कर लेती हूँ । कोई कविता लिख कर डाल देती हूँ मुझे और ज्यादा डिप्रेस नहीं होना अपने आपको किसी तरह लगाया है रुक कर फिर बोली ये देखो तुम्हारे भतीजे ने गांव की तस्वीरें डाली हैं । देखो आकर फोटो में गांव के लोगों को पहचानते हुए बलराम को रूप में अपना खाता खोलने के लिए मना लिया । पिछले हफ्ते ट्रक से लौटे बलराम को रोकने बताया । उसके इंडिया वाले भतीजे ने अपने विवाह की तस्वीरें फेसबुक पर डाली हुई हैं । अगले दिन बलराम ने उन्हें देखने के लिए फेसबुक खोल लिया । उस को किसी निर्मल का एक सन्देश आया हुआ था । बल्ली बला भू जो तो मैं कौन हूँ बस हम सोचते पढ रहे हैं निर्मल कौन है उसने निर्मल की वॉल देखिए वोटो धुंधली सी थी । बलराम पहचान नहीं सका तो सोचने लगा कि कोई गांव से हो सकती है जिसने बल्ली लिखा है । दिमाग पर जोर देने पर उसको ख्याल आया कि गांव में उनके पडोसियों की लडकी नहीं हो सकती है । बलराम में जवाब लिखा मैं किसी निर्मल को नहीं जानता हूँ । मैं तो निधि को जानता हूँ और बलराम के बैठे बैठे ही जवाब आ गया था तेरी नहीं हूँ बढकर बलराम खुश हो गया । रूप यद्यपि काम पर गई हुई थी फिर भी बलराम नहीं इधर उधर देखा कि कहीं कोई दूसरा तो नहीं पड रहा था । तभी एक और संदेश आ गया । निर्मोही तो भूल ही गया । बडी मुश्किल से खोजा है तुझे । अब मुझे जाना है फिर बातें करेंगे । जीभरकर बलराम ने लिख भेजा तो ये किसने कहा की मैं भूल गया । सच बात हुई थी कि बलराम को विभाग के बाद निमी का कभी खयाल आया ही नहीं था सिवाय कुछ महीने पहले । जब उसने शराब दिए हुए अपने बेटों को छेडते हुए कहा था तो मैं कोई गर्लफ्रेंड बनाई है की नहीं । फिर खुद ही बोला था मेरी तरह सूखे ही नहीं रहे जाना आपकी कोई नहीं थी । डायट छोटे ने पूछा था फॅस कहाँ? हमने तो पडोसियों के निमी की और देख कर ही गुजारा कर लिया । मेरी तो बीत गया धूम अपना, समझ गए ना बात डेट कोई चुनाव आपने सुना की बात छोटे ने कहा बहुत सुनने से क्या होगा जब मैं कॉलेज जाता था उनके घर के सामने से निकलता था बट ठंड का वो कभी कभी मेरी तरफ देख लेती । बस इतने से ही हमारे कई दिन निकल जाते हैं और सिखाओ उल्टे काम नहीं । अरे पढ लिखकर कुछ बनने ना देना । इन को बीच में ही बोली हद हो गई या तो गले पडने को हमेशा तैयार रहती है । मैं तो उन्हें बता रहा हूँ कि योगी जी सकते ना रहना मेरी तरह और जिनके साथ निकलता बनाने में बलराम संकोच करता रहा था अब उसी दिन मैंने तीरी निम्मी लिखा था । पर नाम नहीं तेरी मम्मी और निर्मोही वही मुश्किल से खोजा है तो वाले संदेश अक्षर अक्षर पार बार पडे बढकर उसको सुरूर आने लगा । नए संदेश की प्रतीक्षा में कुछ और बैठा रहा पर कोई जवाब नहीं आया । बलराम ने ट्रक को लोड लेकर जाना था । वो और न बैठ सकता लेकिन दिल्ली के संदेश उसके अंग संग होली ट्रक चलाते हुए उसकी उंगलियां स्टेरिंग व्हील पर थिरकती रही थी । आपने पडोस के कोठे पर कपास के सूखे फूलों से कपास चुकती दिन मैं उसकी यादों में आ जाती है जिसको देखने के लिए वो यू कोठे पर चढ जाता था । कभी कभी नहीं । उसको अंगूठा हिला हिलाकर डोडो करती ये सब याद करके उसके होठों पर पता नहीं कहाँ से पुराना गीत आ गया था । मैं तो रख ले क्लीन रहे या आ रहा तेरे लमिया रोटा थे और आप लंबे रूप से वापस आकर उसने फेसबुक फिर से खोली जहाँ दिल्ली के चार अनपढे संदेश पडे थे एक संदेश था कहाँ गुम हो गया बडी मुश्किल से तो हो जाता है । दूसरा संदेश सच सच बता कभी याद किया तीसरा संदेश तेरी बार बार मेरी तरफ देखना याद करके मुझे कई बार हसी आ जाती है । चौथा संदेश बहुत अकेली हूँ बलि लगता है कोई मुझे प्यार नहीं करता । घरवाला मेरी कोई परवाह नहीं करता । उसके अंदर वाला मेरा प्रेमी पता नहीं किधर गया । मुझे मेरा रहनी चाहिए जो मेरी परवाह करें । नहीं पहुंच रहे बताओ मेरा प्रेमी बनेगा ना हो बलराम ये संदेश पढ ही रहा था कि नहीं करना या संदेशा गया बल्ली मुझे गलत मत समझना । बलराम नहीं गलत नहीं समझता तो बता अपने घर वाले के बारे में मैं छोड उसकी क्या बात करने अगर उस को मेरी परवाह होती तो मुझे यू भटकने देता । बडा बडा निर्दयी है तेरा घर वाला जितनी सुंदर पत्नी की परवाह नहीं करता तो मारता पिटता है नहीं नहीं नहीं उसे अपने काम की फिक्र रहती है ना यार दोस्तों की छोड दे उसकी बात देख ले । आज मैंने पकडे लिया है तो ऑनलाइन बता दूँ । मैं ट्रक का चक्कर लगाकर लौटा हूँ । एक हफ्ते बाद और फिर मुझे फेसबुक इतनी आदत नहीं पडी तो फिर बनाकर अब नहीं भटकने दूंगा तुझे इतने में इतने दिन में इंतजार नहीं कर सकती । तरह संदेशों कि आईफोन ले ले । आई फोन पर भी फेसबुक पर बातें हो जाती हैं । बलराम और रूप को कुछ महीने पहले ही बच्चों ने उनके विभाग की पच्चीस वर्षगांठ पर दो आईफोन ला कर दिए थे । ग्रुप तो इस्तेमाल करने लगी थी पर बलराम ने वापस कर दिया था । बोला था मैंने से इस्तेमाल नहीं करना तो डाटा प्लान के फालतू के पैसे डलवाने है । पर अब निमी को उसने लिख दिया लगता है अब तो आई फोन लेना ही पडेगा । लगते हद बलराम ने एक और संदेश भेज दिया ट्रक चलाते हुए तेरे संदेश ही मेरे दिमाग में घूमते रहे और तेरह मुझे अंगूठा दिखाना भी याद आ रहा था । तुरंत जवाब आया बलिक मैं तो ये इतनी अच्छी लगती थी कि तुम मेरी तरफ हर समय देखता रहा था । बलराम था बहुत नहीं नहीं तुझे एक रहस्य की बात बताऊँ । बलराम हूँ जल्दी बता हूँ मैं तो कॉलेज जाता था तो मैं छिपकर तो ये देखा करती थी तो बहुत सुंदर लगा करता था । बलराम अगर तो मुझे ये सब उस वक्त बताती तो अपनी बात आगे बढती है । नहीं नहीं तो उससे फिर भी कुछ नहीं होना था । ॅ बलराम ही क्या होता है लाभ आउट लाउड यानी मुझे जोर की हंसी आ गई । बलराम फॅमिली सच कभी कभी मन करता है वो दिन वापस आ जाएंगे सब देने जितना प्यार करने वाला कोई नहीं मिला । जिंदगी में नहीं जाने को दिल तो नहीं करता पर मेरे काम पर जाने का वक्त हो गया । नहीं नहीं मैं जल्दी में हूँ । आईफोन ले ले । जल्दी भाई सीओ जाने को मन नहीं करता । सच्ची बाई बलराम ये संदेश बार बार पडता रहा । कुछ देर बैठा रहा पर नया संदेश नहीं आया । बट सामने खडी की और देखा साढे बारह बज रहे थे । उसने सोचा कि रूप के लंच का समय भी बीत गया । उसने फोन ही नहीं किया कि खाने के लिए क्या बना कर रख रही है उसने दोबारा । एक ने कहा कंप्यूटर स्क्रीन पर मारी मैं संदेश नहीं आया था । उठकर नहाने चला गया । तब गरम पानी से भर लिया । तब मैं बैठा उस संदेश और मम्मी को याद करते हुए शुरूर में आने लगा । ऐसा जरूर उसको बहुत दिनों बाद आया था । अगली बार पता करुंगा की कहाँ है? फिर हो कराऊंगा उसके पास की सोचते हैं उसे ऐसे लगा जैसे नहीं कह रही हूँ । आज मुझे प्यार कर बलराम को अपना आप किसी विजयी की तरह महसूस हुआ । उसने शेव की और तैयार होकर कंप्यूटर के सामने बैठ संदेशे पडने लगा । बलराम की नजर एक संदेश पर्यटक गई उसके उसे दोबारा पडा । दिल्ली ने लिखा था छोड उसकी क्या बात करनी है । वो मेरी परवाह करता तो मुझे भटक नहीं देता । बलराम के दिल में आया कि कहीं ग्रुप तो नहीं । दिल्ली की राह पर चल रही पर अगले ही पल उसने शक को छोड दिया । उस ने सोचा कि ग्रुप ऐसी नहीं है । यदि ऐसी होती तो बार बार लोकल ट्रेन चलाने को क्यों कहती? और बलराम फिर से तीन दिन में और तो मुझे प्यार करेगा ना जैसे संदेश पढकर शुरू में आ गया । उसके वहाँ बैठे बैठे ही रूप काम पर से लौट आई । शुरूर में आए बलराम ने तक रूप को ऊपर से नीचे तक देखा । बगैर बाहों वाले टोमॅटो बलराम को अगर सी लगी बोला बडी जवानी चढी है रूप को लगा जैसे कुछ सपना देख रही हूँ । एक पल तो उसको यकीन नहीं आया कि ये बलराम था तो बोली तुम देखो भी असली जवानी तो अच्छा ही है । फॅमिली तो बच्चों की देखभाल में ही बीत गया । कहती कहती रूप चुप हो गई थी । पहली जवानी वाले दिन होते हैं तो वह रूकती नहीं कह देती या फिर तुम्हारी माँ की नोकझोंक में और महाभारत शुरू हो जाता है । पर अब ग्रुप में मुस्कराकर कहा सालों बाद आज कैसे रोमांटिक हो गए । फॅालो तो बाहर खाना खा कर आते हैं । तू तो जानती है आज की शाम तो दोस्तों के साथ होती है । ग्रुप की मुस्कुराहट गायब हो गई । उसके दिल में आया कि कहीं निंदी का घर वाला तो बडा नहीं लगता है जिसको तो नहीं समझता है तो मैंने ही नहीं बन कर खाता खोला है । पर उसने अपने आप को ऐसा कहने से रोक लिया । धूप ने सोचा कि ये विचार करने के लिए उपयोग समय नहीं बोली । मैं तो किसके साथ जाऊँ । बलराम चुप हो गया । कितनी देर चुप रहा । उसकी निगाहें कम्प्यूटर के मॉनिटर पर जा टिकी । फिर ग्रुप की और देखने लगा और देखता ही रहा हूँ ।

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‘बर्फखोर हवायें’ कहानियों का संग्रह है जिसमें 12 चुनिंदा कहानियां शामिल है। कहानियों की सबसे बड़ी खूबी है कि वे लिसनर्स को निराश नहीं करेंगे। इन कहानियों में समाज, रिश्‍तें, परिवार, सामाजिक संस्‍कर, रूढि़यों, सीख शामिल हैं, जो लिसनर्स को उनसे जोड़ता है। Voiceover Artist : Ashish Jain Author : Harpreet Sekha Script Writer : Subhash Neerav
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