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13. Fis Me Dinner Date

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मिलिए सिद्धार्थ से, एक अच्छा वकील लेकिन एक बुरा इंसान। मिलिए राहुल से, एक अच्छा इंसान लेकिन एक बुरा डॉक्टर। और मिलिए शुचि से, एक अच्छी इंसान और एक बाकमाल डॉक्टर। शुचि सिद्धार्थ को एक अच्छा इंसान और राहुल को एक अच्छा डॉक्टर बनाना चाहती थी लेकिन मुंबई में हुए बम विस्फोट ने उनकी ज़िन्दगियों को उलट दिया। सुनें इस क्रांतिकारी कहानी को यह जानने के लिए कि कैसे सिद्धार्थ अदालत से एक अनोखी जनहित याचिका पारित करवाता है और कैसे राहुल एक बहुत अनोखी सर्जरी करने में कामयाब होता है उस लड़की को बचाने के लिए जिससे वो प्यार करते हैं। Follow Arpit Agrawal to get updates on his next book. • Facebook – arpit194 • Instagram – arpit1904 Voiceover Artist : Ruby Producer : Kuku FM Author : Arpit Agrawal
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तेरह चैप्टर । सिद्धार्थ बडी अच्छी मोड में अपने ऑफिस पहुंचा । उसने अपनी उंगलियां अपनी मेज पर घुमाई और आकाश पर चलाया । मेरी बीस पर गंदगी क्यों है कि आज सफाई कर्मचारी छुट्टी पर है? सर, इस गैस को आज सुबह ही साफ किया गया था । ये अच्छे से साफ नहीं है । इस से पैसे साफ करवा हूँ और अगर वे कर्मचारी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं तो उन्हें बदल दो । आकाश अपना से नीचे किए वहाँ खडा था । वह खुद एक वकील था लेकिन सिद्धार्थ के कार्यालय में सफाई की निगरानी करने में वो खुश था । उस पेंटिंग को देखो क्या सब कुछ मुझे खुद ही संभालना होगा । पेंटिंग तिरछी दिख रही है । आकाश समय तक सफाई कर्मचारियों को बुलाने वहाँ से जा चुका था ताकि ऑफिस पैसे साफ किया जा सके । सर क्या आज कोई बडा क्लाइंट हमारे ऑफिस आ रहा है? आकाश भी वापस आकर पूछा । क्लाइंट नहीं आज मेरी दोस्त आ रही है सर लेकिन आपकी आज शाह साथ के साथ मीटिंग है । आकाश ने सिद्धार्थ को याद दिलाया । आकाश के लिए यकीन करना मुश्किल था । सिद्धार्थ के साथ ढाई साल के अपने करियर में उसने सिद्धार्थ के किसी भी दोस्त को उससे मिलते नहीं देखा । जो हमेशा वहाँ आते हैं वो यहाँ तो बडी राजनेता होते हैं या व्यापारी । आज मेरी सभी मीटिंग को रद्द कर दो और सबसे बढिया नाश्ते का इंतजाम करो और जब वहाँ आएगी तो किसी को मेरे पास मत भेजना । चाहे वो व्यक्ति कितना ही खास क्यों ना हो शुचिः पहुंच गए और अपनी स्कूटी कोई बिल्डिंग के सामने खुली पार्किंग में खडी कर दी । उसने अपने ड्राइविंग जैकेट और हेलमेट उतारा और स्कूटी के सीट के नीचे डिक्की में रख दिया । फिर उसने छोटा बाद खोल और एक कंघी निकाली । उसने रियरव्यू मिरर में देखते हुए बाल ठीक किए । सिद्धार्थ तो ऑफिस की खिडकी से ये सब देखकर के मुस्कुरा रहा था । शिवजी ने सिद्धार्थ को पहले ही फोन पर सूचित कर दिया था कि वो आ रही है । जैसे ही सूची सिद्धार्थ के कैबिन में दाखिल हुई सिद्धार्थ उठ खडा हुआ और सच्ची से हाथ मिलाया बैठो । सिद्धार्थ ने काली और लाल नगर के कवर से ढकी कुर्सी की ओर इशारा करते हुए कहा क्योंकि उसकी टेस्ट के सामने रखी थी । शुचिः उस आरामदायक आलीशान कुर्सी पर बैठे जिसका रंग सहयोग से उस दिन सूची कि पहनी हुई काली ट्रैसी मिल्खा रही थी । जब वो अपना सिर घुमा रही थी तो उसके कानों में गोलाकार की सिल्वर रंग की झुनकी नाच रही थी । उसकी कमर तक की लंबाई वाले बाल खुले थे और कुर्सी के आम रेस्ट पर आराम कर रहे थे । उसने स्किन टाइट लेकिन इसमें लपेटी अपनी टांगों को टेबल के नीचे एडजस्ट किया । बताओ शुचि क्या लोगी चाहे ॅ? अरे नहीं नहीं, मैं ठीक हूँ, अब तकलीफ ना करे । सिद्धार्थ तुम पहली बार मेरे ऑफिस आई हो । कैसे मैं तुम्हारी खाते ना करूँ । सिद्धार्थ ने आकाश को इशारा किया कि वो ऑर्डर किए गए स्टाॅक्स ले आए । जब तुम पहली बार मेरी अस्पताल में आए थे तो मैंने भी तो में कुछ नहीं दिया था । दवाइयों की सेवा दोनों जोर से हंस पडे । अस्पताल इसी के लिए होते हैं । अच्छा बताओ मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ? कॉफी खत्म होने के बाद सिद्धार्थ पूछा, मैं काॅपियों को रजिस्टर करना चाहती हूँ । उम्मीद है तो इसमें मेरी मदद कर होगी । ऍम क्या तुम्हारे पास कोई और काम नहीं है? सिद्धार्थ बोलकर हस पडा । इसी वजह से मैं किसी को नहीं बताती । शुचि ने सोचा जिंदगी में थोडी कुछ पाने का मेरा यही तरीका है । नाराजगी जाहिर न करने की कोशिश करते हुए शिवजी ने कहा, मुझे सिर्फ अदालतों में केस जीत करके खुशी मिलती है । मैंने पहले कभी भलाई करने की कोशिश नहीं की । कबीर की जरूरत ही नहीं पडी । अगर ऐसा है तो तुम जानते ही नहीं की खुशी क्या होती है । इंसान किसी भी जरिए से खुशी पा सकता है । ये इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसे कैसे स्वीकार करते हैं । जब हम अपने दिल की सुनते हैं, जगह संतुष्ट होते हैं तो दिन थोडा ज्यादा खुशनुमा लगता है । हर कम से कम एक पल के लिए हमें थोडी शांति मिलती है । जब लडकियां दुखी होती है तो वे दार्शनिक बातें करती है तो मेरा ऍम का लोग तो हर कोई भलाई का काम करो । देखना तो मैं कितना सुकून मिलेगा । अगर तो कहती हो तो जरूर करूँगा । मैं तो एनजीओ दर्ज करवा दूंगा । पहले मुझे कुछ जानकारी तो जरूर वो खुश हुई । ठीक है मुझे बताओ कि तुमने अपने एनजीओ के लिए क्या नाम सोचा है । सिद्धार्थ ने उसे नोटपैड में नोट करना शुरू किया । नाम मैंने इस बारे में कभी सोचा ही नहीं । कोई बात नहीं । हम अभी नाम रख लेते हैं । मुझे एनजीओ के पीछे का मकसद बताऊँ । मैं सभी को एक दूसरे के करीब लाना चाहती हूँ । मानव को दूसरे मानव की मदद करनी चाहिए । सभी को लाभ मिलना चाहिए । एक डॉक्टर को इलाज करना चाहिए, शिक्षक को पढाना चाहिए और हर किसी को हफ्ते में एक दिन दूसरों के लिए अपने कौशल के अनुसार मुफ्त में मदद करनी चाहिए । ऐसा दान करना काफी नहीं है । हमें अपना समय दान करना चाहिए । मेरा मूल रूप से यही विचार है । ये बेहतरीन कॉन्ट्रैक्ट है । सिद्धार्थ ने कुछ देर इस बारे में सोचा । हम एक नाम रखना होगा जो इस विचार को सही ठहराए कुछ सोचते हैं । सिद्धार्थ ने अपना सिर अपनी हथेलियों के बीच रखा और इस एक नाम देने की पूरी कोशिश की । हर कोई पास होना चाहिए । हम हिंदी में क्लोज को क्या कहते हैं पास? शुचि ने कहा नहीं ये कुछ जमा नहीं और क्या कह सकते हैं? समीर हाँ, ये एक उन का नाम है । सूची सिद्धार्थ लगभग चलाया । वो खुशी से भर गया । दरअसल पहली बार वह कोई ऐसा काम कर रहा था क्योंकि तरह मुक्त था और एक अच्छे कारण के लिए था । सभी फाउंडेशन हाँ ये बहुत अच्छा नाम है । सूची खुश हुई । अब मुझे कुछ दस्तावेजों की जरूरत है रे तुम बाद में मुझे मिल कर सकती हूँ । तब ने सभी फाउंडेशन रजिस्टर करवा दूंगा । शुक्रिया सिद्धार्थ ये मेरे लिए बहुत मायने रखता है । सूची की आंखों में खुशी की चमक साफ दिख रही थी, जो सिद्धार्थ ने अपने संपन्न और दिखावटी लोगों के समूह में पहले कभी नहीं देखी थी । शिवजी ने अपना आभार प्रकट करने के लिए अपने हाथ को सिद्धार्थ के हाथ के ऊपर रख दिया । इसने सिद्धार्थ की दिल की धडकन को बढा दिया । कृपया हमारी मदद करे साहब हमारी मदद करें । ऑफिस के बाहर से का आवाज आई । करीब चालीस वर्ष के एक व्यक्ति ने ऑफिस में प्रवेश किया । आकाश दो सिक्योरिटी गार्ड के साथ उस शख्स के पीछे दौडता हुआ आया । तुमने उसे अंदर क्यों नहीं दिया? सिद्धार्थ खडे होकर आकाश पर चलाया । उसकी खुशी गायब हो गई । पुराना सिद्धार्थ वापस आ गया था सर, हमने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन वो यहाँ तक भाग गया । उसे बाहर निकालो । अभी अपनी आवाज की छोटी पर सिद्धार्थ चलाया । उस आदमी की आंखें आंसू से भर गई । लेकिन इससे सिद्धार्थ का दिल नहीं पिघला । आंसू देखकर सिद्धार्थ को दया नहीं आती बल्कि गुस्सा आता है । आंसू कमजोरी की निशानी है और सिद्धार्थ को कमजोरी से नफरत है । आकाशवाणी से बाहों से पकड लिया और उसे कमरे से बाहर भेज दिया । वो आदमी कहता रहा, साहब, रुपये हमारी बात सुनी । हम एक समस्या में है, केवल आपकी मदद कर सकते हैं । हमारे बच्चे मर जाएंगे, हम दिवालिया हो जाएंगे । हमारी मदद का अनुसार निर्दलीय भाव से सिद्धार्थ बस उसके बाहर जाने का इंतजार कर रहा था । कम से कम उसकी बातें तो सुनाओ । शुचि नहीं टोका, उससे पूछ लो कि उसे तुमसे क्या चाहिए? वो सिर्फ एक ग्रामीण है और वहाँ के लोगों को बहुत समस्याएं होती है । और क्या तुम्हें लगता है कि वो मेरी फीस दे सकता है । मैं उन सभी की मदद नहीं कर सकता । ठीक है तो हम सभी की मदद मत करो लेकिन कम से कम जो तुम्हारे पास आया है उसकी तो मदद करो । दुनिया ने बहुत सारे मरीज हैं । हम सभी का इलाज नहीं कर सकती । लेकिन हम जरूर हमारे अस्पताल में आने वाले व्यक्ति का इलाज करते हैं और तुम फेस की इतनी परवाह क्यों करते हो? तो मैं खुद मुझसे वादा किया था कि तुम कुछ भलाई का काम करने की कोशिश करोगे तो यहीं से शुरुआत क्यों नहीं करते । लेकिन जब मुझे मदद की जरूरत थी तो किसी ने मेरी मदद नहीं की । मुझे हमेशा अपने हक के लिए लडना पडा । हाँ, ऐसा इसीलिए है क्योंकि तुमने कभी लोगों को स्वीकार नहीं किया । तुमने कभी किसी को अपने करीब आने की इजाजत नहीं दी । दुनिया एक आईने की तरह है । ये प्रतिबंध करेगा कि आप वास्तव में क्या है । यदि आप भाई चिंता और घृणा का मुखौटा पहने उसके सामने खडे होते हैं तो ये आपको वहीं दिखाएगा । आपको प्यार पाने के लिए प्यार करना होगा । कभी कभी इसमें वक्त लग सकता है, लेकिन ये इसी तरह काम करता है । मुझे वादा करो कि तुम खुद से पहले दूसरों के बारे में सोच होगी । उसे अंदर आने दो । सिद्धार्थ ने आकाश को फोन करके कहा, एक सेकंड के भीतर वह आदमी फिर से कमरे में घुस गया जैसे कि वह बुलाए जाने का ही इंतजार कर रहा हूँ । आपका बहुत शुक्रिया साथ मेरी बात सुनने के लिए शुक्रिया । बताओ क्या बात है सिर मुंबई से दस किलोमीटर दूर गांव है खाबरी । कल मैं उसी गांव का निवासी रामबाबू सिद्धार्थ ने से नहलाया । वो और सुनने की उम्मीद कर रहा था । मेरे साथ दस और लोग है जो बाहर खडे हैं । महोदय, हम किसान हैं, हमारे अपने खेत है । लेकिन पिछले महीने बिल्डर ने हमारी सारी जमीन पर कब्जा कर लिया और कहा है कि वहाँ बडी आवासीय सोसाइटी ओरिक शॉपिंग मॉल बनने जा रहा है । उसने हमारी जमीनों के फर्जी कागजात तैयार किए हैं । वो हम से कह रहा है कि हम अपने खेतों से बेचते वरना वो दूसरे तरीके से छीन लेगा । पुलिस के पास जाकर की शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराते । हम पुलिस के पास गए लेकिन उन्होंने बिल्डर के राजनीतिक संबंध के कारण हमारे मामले को दर्ज नहीं किया । इंस्पेक्टर ने मुझे धमकी देते हुए कहा कि अगर मैं दोबारा वहाँ गया तो वो मुझे किसी भी झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लेगा । ये एक बडी मुसीबत लगती है लेकिन इसमें तुम्हारी मदद कैसे कर सकता हूँ? साहब, हम जानते हैं कि आप कुछ भी कर सकते हैं । अगर आप हमारी मदद करेंगे तो कोई भी बिल्डर हमारा कुछ नहीं बिगाड सकता । आप हमारी आखिरी उम्मीद साथ हमें यकीन है कि अगर आप हमारे मामले को अपने हाथों में लेते हैं तो हम जरूर जीत जाएंगे । सिद्धार्थ दुविधा में था । वो किसी भी बिल्डर से डरता नहीं था लेकिन उसने कभी भी मुफ्त में मुसीबत मोल ले ली थी । साहब, हम खेती के अलावा कुछ नहीं कर सकते । अगर वे हमसे हमारी जमीन छीन लेंगे तो हम मर जाएंगे साहब हम आ जाएंगे । वो आदमी हाथ जोडकर बोला । भावुक शनि सूची की आंखों में आंसू ला दिए । सिद्धार्थ ने सूची के और देखा और दूसरा विचार किए बिना उससे बस इतना कहा ठीक है मैं तुम्हारे साथ हूँ । सिद्धार्थ ने आकाश को बुलाया और उसे आदेश दिया इनके गांव और उस बिल्डर से जुडी हर जानकारी हासिल करूँ । शाम तक इसके बारे में सब कुछ जानना चाहता हूँ । वो बिल्डर के खाता है । कब होता है, किसके साथ होता है । मैं उसे उसके बाप से ज्यादा जानना चाहता हूँ । रामबाबू उठ खडा हुआ अपनी नींद से वंचित आंखों में पानी पोछा और मुस्कुराने की कोशिश की लेकिन मुस्कुराना उसके लिए इतना आसान नहीं था । ईश्वर आप दोनों की जोडी सलामत रखे । उसने आशीर्वाद दिया और वहां से चल दिया । उसका आशीर्वाद सिद्धार्थ के लिए किसी फीस से कहीं बडा था । ये पहली बार था जब उसने केस लडने के लिए कोई पैसा नहीं लिया था । फिर भी वह पहले से बेहतर महसूस कर रहा था । शुचिः ने कहा मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ । प्लीज बुरा मत मानना ठीक है कहूँ । सिद्धार्थ को घबराहट हुई । उस मामले को स्वीकार करने के लिए शुक्रिया तो वो नहीं हो तो तुम अपने बारे में सोचते हो तो दिल के बहुत अच्छे इंसान हो । शुक्रिया हाँ, मुझे पता है कि मैं बदल रहा हूँ । इस की वजह तुम हो । सिद्धार्थ दिल में प्यार का मीठा कर महसूस कर रहा था । अच्छा मेरी एनजीओ रजिस्टर करने की फीस कितनी हुई? शुचि ने सहजता से पूछा बिल्कुल नहीं । खतम से पैसे नहीं लूंगा । मुझे हिंदी की नहीं, नहीं तो मैं पैसे लेने होंगे । उसके इसको स्वीकार करके तुम आज की भलाई कर चुके हो । अब तो बहुत से फीस ले सकते हो । सूची हस्ती मुझे पैसे के अलावा कुछ और थे तो अगर तुम सच में चाहती हूँ, ठीक है क्या? मेरे साथ डिनर के चलो शुचि शर्मा गई । कुछ भी नहीं बोली । इसे मेरे फीस समझो । प्लीज बना मत करना । सिद्धार्थ ने उसकी झिझक का अंदाजा लगाते हुए कहा, ठीक है । फिर हम इस वीकेंड जा सकते हैं । शिव जी ने पक्का क्या मुझे भी जाना चाहिए । मैं तो मैं शाम तक बाकी दस्तावेज ईमेल कर दूंगी । शुचि ने कहा और वहाँ से चली गई

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मिलिए सिद्धार्थ से, एक अच्छा वकील लेकिन एक बुरा इंसान। मिलिए राहुल से, एक अच्छा इंसान लेकिन एक बुरा डॉक्टर। और मिलिए शुचि से, एक अच्छी इंसान और एक बाकमाल डॉक्टर। शुचि सिद्धार्थ को एक अच्छा इंसान और राहुल को एक अच्छा डॉक्टर बनाना चाहती थी लेकिन मुंबई में हुए बम विस्फोट ने उनकी ज़िन्दगियों को उलट दिया। सुनें इस क्रांतिकारी कहानी को यह जानने के लिए कि कैसे सिद्धार्थ अदालत से एक अनोखी जनहित याचिका पारित करवाता है और कैसे राहुल एक बहुत अनोखी सर्जरी करने में कामयाब होता है उस लड़की को बचाने के लिए जिससे वो प्यार करते हैं। Follow Arpit Agrawal to get updates on his next book. • Facebook – arpit194 • Instagram – arpit1904 Voiceover Artist : Ruby Producer : Kuku FM Author : Arpit Agrawal
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