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अपनी महान् उपलब्धि हासिल करने में मात्र दो घंटे ही लगे, लेकिन इसके पीछे वर्षों की मेहनत और कठिन साधना थी। मात्र 27 वर्ष की उम्र में सफलता का कीर्तिमान स्थापित करनेवाला यह महानायक मात्र 33 वर्ष की अल्पायु में संसार से विदा हो गया। अनजाने अंतरिक्ष को जानने की ललक ने यूरी गागरिन को अंतरिक्ष अभियान की ओर प्रवृत्त किया। और वह भी पहली बार अंतरिक्ष में जाने की कल्पना करना ही दिल को दहला देनेवाली थी। वहां पहुंच भी पाएंगे और पहुंच गए तो क्या जीवित धरती पर लौट पाएंगे? इन सभी सवालों से परे यूरी गागरिन ने अंतरिक्ष में पहुंचकर मानव जीवन को एक नई ऊंचाई दी और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों का मार्ग प्रशस्त किया। सुनें अद‍्भुत जिजीविषा और अप्रतिम साहस के धनी यूरी गागरिन की प्रेरणाप्रद जीवनी।
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यूरी के अब तक के जीवन में एक शख्स का खास तौर पर असर रहा शुरू शुरू में छिपे तौर पर और बाद में एक समर्थ संरक्षक के रूप में । यद्यपि काफी पहले अपने यौवनकाल में उसने विमान उडाना सीख रखा था किन्तु घोषित तौर पर ऍफ नहीं था । अंतरिक्ष प्रबंधन में सर्वोच्च श्रेणी के लोगों में उसकी गिनती होती थी । सोवियत एयरोस्पेस इंडस्ट्री से जुडे ज्यादातर लोग उसे दखिन या ऍम या प्यार से उसके नाम के दो प्रारंभिक अक्सर एसपी कहकर पुकारते थे क्योंकि उसकी पहचान को आधिकारिक तौर पर गोपनीय रखा गया था । इसलिए उसका पूरा नाम कभी भी नहीं जाना जा सका । वर्षों तक सोवियत रॉकेट उपलब्धियों से जुडे रेडियो प्रसारण प्रेस रिपोर्टों में उसे चीज डिजाइनर के रूप में संदर्भित किया जाता था । इस शख्स का नाम था सर जी पावलो विच कोरोली । मॉस्को में शिक्षा प्राप्त करने के बाद कोरोलेव ने अपने कैरियर की शुरूआत बतौर एयरक्राफ्ट डिजाइनर की । इसके बाद उनका रुझान रॉकेट की तरफ बढता गया । पहले तो उसे अपने एयरक्राफ्ट के लिए रॉकेट टिक उपयोगी ऊर्जा स्रोत लगा लेकिन सन उन्नीस सौ के उत्तरार्ध में उसने रॉकेट को बतौर शक्तिशाली हवाई वाहन के रूप में मान्यता थी । युद्ध के पूर्व के सैन्य विन्यास कों ने रॉकेट के प्रारंभिक प्रणेताओं द्वारा किए गए काम में गहरी रुचि दिखाई । मार्शल मिखाइल तो काचिंस्की ने गैस डाॅक्टरी नाम से सेंट पीटर बॉक्स में पेट्रोपावलोवस्क । क्या फोटो इसकी भारी दीवारों में छिपकर एक नया अनुसंधान केंद्र स्थापित किया, जबकि एक अन्य रिएक्शन फॅमिली ऐसी समस्या पर काम करने के लिए मध्य मॉस्को में प्रारंभ इन समानांतर प्रयासों से कोरोलेव के प्रतिद्वंदी बॅाल उसको रॉकेट रोज चैंबर वो फ्यूल पंथों के सबसे होनहार डिजाइनर के रूप में उभरे । जब की स्वयं कोरोलेव विस्तृत मायनों में फ्यूल टैंक से इंजन जोडने, गाइडेंस इक्यूपमेंट वहाँ पे लोड के विषय में सोचते थे ताकि ऐसे रॉकेट निर्मित किए जाएं जो बमों को डिलीवर करने, ऊपरी वायुमंडल में मौसम माप बनाने और अंतरिक्ष की खोज हो जैसे उपयोगी कार्य किए जा सकें । मार्शल दुखता दिवस की प्रारंभिक रूप में रेड आर्मी के लिए विंग रॉकेट बम एवं अन्य उपयोगी आयोध्या स्तर में रूचि रखते थे । में उन्होंने विविध रॉकेट कार्यक्रमों का एक विशाल एकीकरण प्रारम्भ किया । दुर्भाग्य वर्ष स्टालिन बुद्धिमान सैनिकों से भी था और सन तक उसने सोवियत समाज के सभी स्तरों पर आतंक के सामान्य साम्राज्य स्थापना के हिस्से के रूप में अधिकारीवर्ग को सेवा से हटाना शुरू कर दिया था तो खा दिवस की को ग्यारह जून को गिरफ्तार कर उसी रात गोली मारकर खत्म कर दिया गया । शीघ्र ही सभी रॉकेट जिनरों जिन्हें उसने नियुक्त कर रखा था, उनको स्टैलिन विरोधी भावनाएं रखने के संदेह में गिरफ्तार कर लिया गया । कोरोलेव को सत्ताईस जून को गिरफ्तार कर दस वर्ष की कठोर सजा देकर साइबेरिया भेज दिया गया । जून उन्नीस सौ इकतालीस में नाजी आक्रमणकारियों ने तैयारी रहित रेड आर्मी पर भारी विजय हासिल कर ली । स्टालिन को अपने अधिकारीवर्ग को हटाए जाने के प्रति काफी अफसोस हुआ । उसके बच्चे कुछ कमांडरों के प्रतिभाहीन होने के अलावा उनमें युद्ध, कला या सैन्य विन्यास का अनुभव नहीं था । इसके पश्चात सर जी कोरोलेव व अन्य सिद्धस्त इंजीनियरों को जेल से रिहा कर दिया गया ताकि वे एयरक्राफ्ट वहाँ आयुध फैक्ट्रियों में काम कर सके । युद्ध के अंत तक कोरोलेव को पूरी तरह स्वतंत्र कर दिया गया । उसकी पूर्व प्रतिष्ठा भी कुछ हत्या को से लौटा दी गई । सितंबर में उसे वर्नर वॉन ग्राउंड द्वारा निर्मित बीटू रॉकेट प्रोग्राम के किसी अवशेष की खोज में जर्मन हार्टलैंड जाने की अनुमति दी गई । इसके बाद सन उन्नीस सौ पचास के दशक के दौरान कोरोलेव ने अपने निश्चय के बल पर रॉकेटों और मिसाइलों की नवीनतम श्रेणी विकसित की जब की कल उसको ने कुछ ऐसे प्रोपल्जन इंजन निर्मित किए जिन्हें इस से पहले कभी नहीं देखा गया था । जो इंसान साइबेरिया के लेबर कैंप में जूझ कर अपना अस्तित्व बरकरार रखने में कामयाब रहा हूँ उसे अपने प्रतिद्वंदियों और क्रेमलिन के असहयोगी अधिकारियों से टक्कर लेना कोई बडी बात नहीं रही होगी । खासकर स्टैलिन साम्राज्य के बाद के सन उन्नीस सौ पचास के उत्तरार्ध वो के दशकों के प्रारंभिक वर्षों में निकिता ख्रुश्चेव के काम दमनकारी शासन कोरोलेव ने अपनी प्रतिद्वंदियों के समर्थन से बढकर फॅार में जटिल वह सूक्ष्म प्रभाव के नेटवर्क तैयार की तक वो अपने स्वयं के औद्योगिक साम्राज्य का मालिक बन चुका था जिसका प्रमुख भाग मॉस्को के उत्तर पूर्व में कालिनिनग्रेड में रहस्यमय कारखाना सुविधा था जिसे स्पेशल डिजाइन ब्यूरो वो के भी वन के रूप में जाना जाता था । कोरोलेव यहाँ का पूर्व शासक था । यद्यपि वो कॅालिंग स्तर पर मार्शल यूज दिनों के अधीन सुरक्षा मंत्रालय एवं जनरल मशीन बिल्डिंग मिनिस्ट्री के प्रति उत्तरदायी था । यहाँ जनरल का अर्थ रॉकेट वहाँ उपग्रह का छद्म शब्द था । सन उन्नीस सौ इकसठ में मॉस्को के एक पत्रकार ओल्ड गाने हूँ के भी वन के लोगों पर कोरोलेव के प्रभाव का वर्णन किया है । हालांकि उसने उसकी वो उसकी फैक्ट्री के नाम का उल्लेख न करने की पूरी सावधानी बरती । नियमानुसार उसने हर जगह उसे सिर्फ चीफ डिजाइनर कहकर संबोधित किया है । भारी भरकम शरीर संरचना सामने रंग और स्वभाव से कठोर नजर आने वाले स्पेश चिपका चीज डिजाइनर जैसा नजर आता था । वो उस से कहीं बढकर था । जब कभी वह किसी कमरे या कार्यस्थल पर उपस् थित होता तो अपने इर्द गिर्द व्यवस्था दर्शाने वाली हलचल सुनाई देते थे । वो अपनी धीमी आवाज में जो कुछ कहता हूँ उसे समझ पाना बडा कठिन था । उसकी बात में भाई सम्मान वह इन दोनों का मिला जुला रूप था । किसी वक्त शॉप में उसके प्रवेश करते ही वहाँ का माहौल बदल सा जाता था । फॅस के कार्यकलाप कहीं ज्यादा सघन वह सूक्ष्म हो जाया करते थे और ऐसा लगता था मानो मशीनों की हलचल भी ज्यादा लवणयुक्त बहुत तीव्र हो जाती थी । इस आदमी की ऊर्जा से शॅल उनकी गति बढ जाती है । गाइडेंस ट्रेजेक्ट्री पर कार्यरत कोरोलेव के एक विशिष्ट विशेषज्ञ का कहना है कि वो एक महान इन्सान वो एक और सामान्य व्यक्ति था । आप उससे किसी भी सामान्य वह जटिल मुद्दे पर बात कर सकते हैं । आप यही सोचते हैं कि कारावास में रहने के कारण वो टूट गया होगा । उसका जोश मंदा पड गया होगा । लेकिन नहीं । जब वीट ऊपर अन्वेषण के दौरान मेरी जर्मनी में उससे मुलाकात हुई तो वो मुझसे तीव्र इच्छा शक्ति वाला और अपने मकसद में पक्का इंसान नजर आया । वैसे तो बहुत कठोर, आपसे कार्यकुशलता की अपेक्षा रखने वह भडक जाने वाला व्यक्ति था लेकिन वो कभी भी आपका अपमान नहीं करता था । वो हमेशा आपकी बात सुनने को तत्पर रहेगा । सच तो यह था कि सभी उसे पसंद करते हैं । ऍम उसको जैसा उतना ही जोशोखरोश वाला व्यक्ति और लगभग सभी लोग उसके अपने स्पेशलिस्ट डिजाइन ब्यूरो में ही कार्य करते थे । कोरोलेव के रॉकेटों में ग्रुप उसको के इंजनों के लगाए जाने तक दोनों व्यक्ति किसी भी आपसी मतभेद, वो टकराव को टालते रहे । लेकिन सोवियत रॉकेट कार्यक्रम के इन दो महान दिग्गजों की पटरी कभी बैठी नहीं । दोनों के बीच तनाव सन उन्नीस सौ अडतीस कि ग्रीष्म के दौरान तभी शुरू हो गया था जब किसी कारण वर्ष ब्लू उसको को आठ महीने घर में ही नजरबंद रखने वक्त कोरोलेव को एक कारावास कैंप में भेजने की सजा सुनाई गई थी । माना जाता है कि कल उसको ने अपने अधिकतर सहकर्मियों को धोखा दिया जबकि कोरोलेव ने चुप्पी साध रखी थी । उसका एक अन्य प्रतिद्वंदी था मिखाइल यांजी जो मात्र सैन्य प्रयोग के लिए यूक्रेन में टॅाक नामक स्थान में बने अपने ब्यूरो में मिसाइलें तैयार करता था । सोवियत रॉकेट विकास कार्यक्रम की चौथी बडी हस्ती थी । व्लादिमीर खेलो में उसने निकिता ख्रुश्चेव के बेटे सर्जेई को बतौर इंजीनियर सेवा में रखा था । कुरुली की स्वायत्तता को सबसे बडी चुनौती क्रैमलिन व इसके आसपास के उच्चवर्गीय सैन्य अधिकारियों पर रक्षा मंत्रालय से मिली । उनका मानना था की उसकी अंतरिक्ष परियोजनाओं से आवश्यक आयुद्ध सिस्टम के विकास में बाधा पड रही थी । उसने एक दोहरे उद्देश्य को पूरा करने वाला एक मिसाइल स्पेस लांचर तैयार कर उन्हें करारा जवाब दे दिया । तत्पश्चात ये सिद्ध कर दिया कि उसके मेंड्स पे शिपकी डिजाइन को फाॅर्स केरूप में प्रयोग लाया जा सकता है । इस तरह अहम सैन्य लक्ष्यों की पूर्ति कर उसने यान जेल वह खेलों में दोनों की बोलती बंद करती और मृत्यु पर्यंत यानी सन तक सभी महत्वपूर्ण सोवियत अंतरिक्ष कार्यक्रमों में अपना दबदबा कायम रखा हूँ । उसके तीक्ष्ण बुद्धि कौशल जिसके आगे नासा के इंजीनियर भी नहीं ठहरते थे, उसका प्रयोग उसके बहुत से प्रमुख अंतरिक्ष यान के घटकों के प्रमाणीकरण हेतु होना था ताकि उसी हार्डवेयर से मैन्ड और ऍम वाहनों की श्रृंखला तैयार हो सके । अमेरिकी अंतरिक्ष विश्लेषक ऍफ का पुत्र कोरोलेव की चालाकी के विषय में कहता है, सैन्य मिसाइल कार्यक्रमों को चला रहे लोग युद्ध के समय से ही उसके साथ एक बडी हद तक में अपने कैरियर के लिए उसकी ऋणी थे इसलिए वो सीधे तौर पर उसे टकराना नहीं चाहते हैं । फिर सेना को उसकी तकनीक की समझ भी नहीं थी और वे दवे तौर पर उसका यकीन करते थे । यही वजह थी कि जब कोरोलेव ने कहा की जासूसी उपग्रह अभी कारगर नहीं होंगे । हमें पहले मानव चलित कैप्सूल तैयार करना है तो उसकी बात मानने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं था । कूटनीतिक तंत्र से निपटना अच्छी तरह जानता था । चीफ डिजाइनर के सर्वाधिक दबंग सहयोगियों में से एक था माॅस् जो उसके नए अंतरिक्ष मिशनों एवं कक्ष में वैज्ञानिक प्रयोगों का बराबर समर्थन करता । ना वो मिसाइल के गणित ऍफ का विशेषज्ञ था । उसने मॉस्को में अपने विशाल कस्टम द्वारा निर्मित कंप्यूटिंग फेसिलिटी में पावर बेस तैयार कर रखा था । कोरोलेव की तरह वो भी कुशल व कूटनीतिक कौशल रहता था जहाँ कोरोलेव रॉकेट निर्मित करने का काम करता था वही ऍम उनके उडान के रास्ते तय करने में जुटा रहता था । कुरुर को सबसे ज्यादा कुंठा इस बात से होती थी कि उसे रेड आर्मी के और विवेकपूर्ण सहयोग पर भरोसा करना पडता था । उसकी वजह ये थी कि रॉकेट और मिसाइलों पर उसके काम सैन्य क्षेत्र से काफी जुडे हुए थे । फिर भी और चाहता था कि उससे वैमनस्य रखने वाले सेना के जनरल अपने वजूद में कायम रहे हैं । तो यदि उनमें से एक भी उसके रास्ते पर अडंगा डालता तो वो उस आदमी को उसकी औकात का आभास कराने में जरा भी नहीं सकता था । कोरोलेव के ब्यूरो के एक वरिष्ठ इंजीनियर ओलेक इवानोव उसकी उन्होंने अपने संस्मरण में कहा है, एक बार एक पति, उच्च रैंक धारी कमांडर ने एक अंतरिक्ष उडान के दौरान किसी अहम रेडियो संचार बहन का लिंक जोडने से मना कर दिया । तब कोरोलेव भडककर ओपन फोन लाइन में सिका तो मैं तो अपना काम करना भी नहीं आता । मुझे तो नहीं तो मैं तो मैं कमांडर से सर्जन बनवा कर ही दम लूंगा आपने उच्चधिकारी के प्रति उसकी दृष्टता देखकर हम दंग रह गए थे । उसकी प्रथम सचिव निकिता ख्रुश्चेव और पोलित ब्यूरो में उसके सहकर्मियों का कोरोलेव के प्रति काफी सहयोगात्मक रवैया रहता था । हालांकि उन्हें स्पेस हार्डवेयर की सूक्ष्मताओं का ज्ञान नहीं था । वे रॉकेट तकनीक में इसकी चकाचौंध वह इससे जुडी राजनीतिक प्रभाव की ओर अपना रुझान रखते हैं । उन्हें इसके जटिल इंजीनियरिंग पत्तियों से ज्यादा कुछ लेना देना नहीं था । सन उन्नीस सौ बचपन में जब कोरोलेव की प्रारंभिक मिसाइल और रॉकेट विकास का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ तो उसने पोलित ब्यूरो के अपने वरिष्ठ सदस्यों से उसके काम का निरीक्षण करने को कहा था । इस संबंध में खुश्चेव का संस्मरण इस तरह गुरुदेव ने अपने काम की रिपोर्ट पेश करने के लिए पोलित ब्यूरो की एक मीटिंग में पहुंचा । ज्यादा अतिश्योक्ति का प्रयोग न करते हुए मैं कहूंगा कि उसने हमें इतना नौसीखिया समझकर अपनी बातें पेश की मानो हम भीड के कैसे झुंड थे । जो पहली बार कोई नया द्वार देख रहे थे वो हमें लॉन्चिंग पैड पर ले गया और रॉकेट की कार्यप्रणाली समझाने की कोशिश करने का प्रयास किया । ये उड सकता था इस बात का हमें यकीन ही नहीं हुआ । हम बाजार में घूमते साधारण भोलेभाले किसानों की तरह रॉकेट के चारों ओर से छूटे हुए तब तक पाते हुए चल फिर रहे थे । कोरोलेव का एक सहकर्मी सर्जेई जो कॉसमॉस के शैक्षणिक अध्यनों के लिए उत्तरदायी था, उसने पोलित ब्यूरो के दृष्टिकोण को इस तरह प्रस्तुत किया कोरोलेव के प्रति शीर्षस्थ लोगों का रवैया बिल्कुल ग्राहकों की तरह था । जब तक उसकी सेवा परिहारी थी, जब तक देश के लिए मिसाइलें तैयार करने है तो उन्हें उस की जरूरत थी । तब तक जो भी जरूरी होता है उसे करने की अनुमति थी की तो मानव चलित अंतरिक्ष अनुसंधान को सैन्य कार्य का अनुसरण करना पडता था । मुद्दे की बात ये है कि कोरोलेव आपने कॅश को उन्हें मिसाइलों पर ही लॉन्च करता था । दोहरे उद्देश्य वाला आर सेवन मिसाइल स्पेस लांचर जिसे इसके निर्माण करता और उडान भरने वाले लगा । वर्ष लिटिल सेवन भी कहते थे दुनिया का प्रथम कार्यशील अंतरराष्ट्रीय बैलिस्टिक मिसाइल आईसीबीएम इस यान के प्रत्येक चरण या ब्लॉक में उसको द्वारा निर्मित फोर चैंबर इंजन लगा हुआ था । यहाँ तक बताना प्रासंगिक है कि ग्रुप उसको द्वारा निर्मित मिसाइल लॉन्चर बेहतरीन थे । वस्तुतः आज भी उन्हें सुधरे आॅटों पर प्रयोग किया जाता है, जो आधुनिक सोयूज कैप्सूल को पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाते हुए मीर स्पेस स्टेशन ले जाता है । उसको के नवप्रवर्तन से एक ही समय चार दाहक चैंबरों की सर्विस करने के लिए मजबूत ईंधन पंपों और पाइप वर्ग को डिजाइन किया जाना था । आर सेवन में बीस अलग अलग इंजनों की ऊपरी प्रेरक ऊर्जा वस्तुत पांच से दी जाती थी ।

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अपनी महान् उपलब्धि हासिल करने में मात्र दो घंटे ही लगे, लेकिन इसके पीछे वर्षों की मेहनत और कठिन साधना थी। मात्र 27 वर्ष की उम्र में सफलता का कीर्तिमान स्थापित करनेवाला यह महानायक मात्र 33 वर्ष की अल्पायु में संसार से विदा हो गया। अनजाने अंतरिक्ष को जानने की ललक ने यूरी गागरिन को अंतरिक्ष अभियान की ओर प्रवृत्त किया। और वह भी पहली बार अंतरिक्ष में जाने की कल्पना करना ही दिल को दहला देनेवाली थी। वहां पहुंच भी पाएंगे और पहुंच गए तो क्या जीवित धरती पर लौट पाएंगे? इन सभी सवालों से परे यूरी गागरिन ने अंतरिक्ष में पहुंचकर मानव जीवन को एक नई ऊंचाई दी और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों का मार्ग प्रशस्त किया। सुनें अद‍्भुत जिजीविषा और अप्रतिम साहस के धनी यूरी गागरिन की प्रेरणाप्रद जीवनी।
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