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30. Cockpit Ki Abadan

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अपनी महान् उपलब्धि हासिल करने में मात्र दो घंटे ही लगे, लेकिन इसके पीछे वर्षों की मेहनत और कठिन साधना थी। मात्र 27 वर्ष की उम्र में सफलता का कीर्तिमान स्थापित करनेवाला यह महानायक मात्र 33 वर्ष की अल्पायु में संसार से विदा हो गया। अनजाने अंतरिक्ष को जानने की ललक ने यूरी गागरिन को अंतरिक्ष अभियान की ओर प्रवृत्त किया। और वह भी पहली बार अंतरिक्ष में जाने की कल्पना करना ही दिल को दहला देनेवाली थी। वहां पहुंच भी पाएंगे और पहुंच गए तो क्या जीवित धरती पर लौट पाएंगे? इन सभी सवालों से परे यूरी गागरिन ने अंतरिक्ष में पहुंचकर मानव जीवन को एक नई ऊंचाई दी और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों का मार्ग प्रशस्त किया। सुनें अद‍्भुत जिजीविषा और अप्रतिम साहस के धनी यूरी गागरिन की प्रेरणाप्रद जीवनी।
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ये तथ्य कहीं अधिक महत्वपूर्ण है कि कॉकपिट का वितान मलबे में पाया गया । आधुनिक जेट लडाकू विमान में खतरे में फसा पायलट अपनी सीट का एक साधारण लीवर खींचता है और इंजेक्शन मैकेनिजम प्रणाली कैनोपी को हटाने समेत बाकी सब कुछ स्वयं कर लेती है । यदि बदतर से बदतर स्थिति भी आ जाए और केनोपी सही तरीके से ना हट पाए तो टैक्सी ग्लास में निर्मित विस्फोटक तारों के चाल इसे तोडकर खोल देते हैं जिससे सीट साधारण रूप से बाहर आ जाएगा । पुराने मिग में कैनोपी को अलग करने के लिए पायलट के भाई और एक अलग यांत्रिक लीवर को सबसे पहले खींचा जाना होता था तभी वो इंजेक्ट कर सकता था । स्पष्ट है कि दोनों में से किसी भी पायलट ने कैनोपी हटाने के लीवर को नहीं खींचा था लेकिन मलबे में पडे हुए कैनोपी फ्रेम में बहुत प्लेक्सी ग्लास बाकी नहीं था । ज्यादातर पारदर्शी भाग टूट गया था और मलबा स्थल से बहुत कम अनुपात में ही बरामद हुआ था । संपूर्ण पडताल का एकमात्र यही भौतिक साक्ष्य था जो सीधे तौर पर हवा में ही किसी तरह की टक्कर को प्रकट करता है । यदि मैं किसी और विमान से टकराकर चकनाचूर हो गया होता तो मात्र कैनोपी के टूटने की अपेक्षा उडान के दौरान ही और ज्यादा क्षति हुई होगी । केजीबी ने समानांतर पडताल की न केवल एयरफोर्स और आधिकारिक आयोग के सदस्यों के साथ मिलकर अभी तो उनके विरुद्ध भी उनकी रिपोर्ट भी संभवत सरल से सरल वर्णन पर आधारित थी । ठीक वैसे ही जैसी चकनाचूर कॉकपिट केनोपी पर आधारित आयोग द्वारा अपनी के जी भी पडताल करता हूँ । में से एक निकोलाई रुकिए जो आज राज्य सुरक्षा विशेषज्ञ है, को प्रारंभिक अंतरिक्ष प्रयास के सभी पहलुओं की जानकारी है । वो ऐसे कुछ लोगों में से एक था जो भारी भरकम मूल रिपोर्ट तक अपनी बहुत सुनिश्चित कर सकता था । उसका कहना है, कैनोपी के नजारत प्लेक्सी ग्लास का मतलब है कि क्रैश होने से पहले कॉकपिट से कुछ टकराया होगा । किसी पक्षी की टक्कर पहले तो कैनोपी के अग्रभाग में हुई होगी, ना की ऊपरी भाग । किसी वायुयान से टकराने पर और अधिक क्षति हुई होती है । तब क्या आयोग का निष्कर्ष वस्तुतः सही हो सकता है? एक ही गैरविवादित तथ्य है वो ये कि कॉकपिट के कैनोपी का कांच विमान की जमीन से टकराने के पहले ही टूट गया होगा । रुक के आगे कहता है, बाकी सब अनुमान ही है । गैगरीन और सरोजी नहीं हकीकत पतला सकते थे कि उस दिन क्या हुआ था । ऍम और सर जी ब्लोच सर को बस की आयोग के कार्य से पूरी तरह असंतुष्ट रहे हैं । उन्हें वेदर बलून छोरी भी निराधार लगती थी । ऍफ का मानना है कि उस दिन जो कुछ भी हुआ उसे सही सही मालूम हैं । बादलों से होकर एक अन्य विमान गैगरीन और सिर जिनके मिग के काफी निकट से गुजरा । लगभग दस, पंद्रह या बीस मीटर की दूरी से दूसरे विमान की भवर यानी वो टेक से पलट गया और अनियंत्रित होकर क्रैश हो गया । यू नो के किसी और विमान से एयरोडायनमिक दखल के सिद्धांत से इस आपदा की विश्वसनीय तस्वीर नजर आती है । लेकिन यदि हमर सत्ताईस मार्च की समस्या होती तो से रोज चीन आसानी से मिग को स्थिर करने में कामयाब हो गया होता । मेजर जनरल यूरी खुली को फ्लाइट सर्विसेज के पूर्व एयरफोर्स चीफ ये संकेत करते हैं कि मिग पंद्रह का भवन यानी वो टेक्स दशाओं में सघन रूप से परीक्षण किया गया था । उपयुक्त ऊंचाई की स्थिति में औसत रूप से अनुभवी कोई भी पायलट विमान को नियंत्रण करने में सफल रहा होता है । जनवरी में खुली कोर्ट द्वारा मॉस्को न्यूज में दिए गए साक्षात्कार में इस विमान दुर्घटना के लिए पायलट की गलती को ही प्रमुख वजह करार दिया गया था । उसने कहा, भले ही गागरिन और सिर्फ जिन भवर प्रवाह में पड गए हूँ, को संभाला जा सकता था । ऐसे बाहर से इंजन प्रभावित नहीं होता । मैं बताना चाहूंगा कि कई जटिल परीक्षणों के बाद इस नतीजे पर पहुंचा गया है । गागरिन ऐसी दशाओं के लिए तैयार नहीं था । आप समझ सकते हैं कि उस समय हमारे देश में गैगरीन का नाम कितनी अहमियत रखता था । ये अंतरिक्ष में समाजवाद की विजय का प्रतीक था । ऐसा लगता है कि पहला अंतरिक्ष यात्री गलती नहीं कर सकता था । लेकिन खुली को को भी अपना उल्लू सीधा करना है क्योंकि वह सन की जांच आयोग के मूल सदस्यों और उन वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति वफादारी रखता है जो तत्कालीन सामान्य जनरल एयर ट्रैफिक कंट्रोल के लिए उत्तरदायी था । उल्लेखनीय है तो ये बताना भूल गया की पॉवर रिकवरी परीक्षणों में प्रयुक्त मिग पंद्रह और बहुत से अन्य विमानों में ड्रॉप टैंक कभी नहीं लगाए गए थे क्योंकि ड्रॉफ्टिंग को ऐसे काला कौशलों में उडाना निषिद्ध था । बिल्कुल साधारण सी बात है कि मिग पंद्रह में टैंकों को लगाकर अत्यधिक दुरु उडान की दशाओं में परीक्षण करने का विचार किसी को नहीं है क्योंकि बडे अनुभवी परीक्षण पायलट के लिए भी ये काफी खतरनाक हो सकता था । ऍम इस बात पर अडियल रुख अपनाते हुए कहते हैं कि ये किसी दूसरे मेघ का सामान्य बैकवार्ड नहीं था । अभी तो बिल्कुल नए उच्च कार्य संपादन वाले लडाकू विमान की शक्तिशाली सुपरसोनिक आघातकारी तरंग थी जो यूरी और सिर जिनके विमान से इस तरह टकराई जैसे कोई ठोस ईद की दीवार से टकराया हूँ । लियोनोरा को इस बात के प्रति हमेशा दृढ विश्वास था कि कर जेंट्स में अपने हेलीकॉप्टर उतारने के बाद जो दो धमाके सुनाई पडे थे उससे दो बिलकुल भिन्न तस्वीरें निर्मित होती हैं । पंद्रह यूटीआई तेज गति वाला विमान तो है लेकिन सुपरसॉनिक की गति के आगे वो कहीं नहीं ठहरता । जहाँ उस समय वो खडा था वहाँ से धमाकों की आवाज धीमी सुनाई पडी होगी । लेकिन उसे यकीन था कि वे विस्फोट को अतिरिक्त सुपरसोनिक धमाके के कारण हुए होंगे । इसीलिए एक अन्य अपेक्षाकृत काफी तेज एअरक्राफ्ट गलत क्षण में उसी स्पेस में प्रवेश कर गया होगा । लेकिन जब यू नो अपने अपने पडताल करता साथियों को ये बात समझाने की कोशिश की तो इस पर उसका कहना है किसी अदृश्य प्रभाव से मेरे सभी प्रयास रोक दिए गए । मैं समझता हूँ कि दुर्घटना आयोग में एक डिप्टी चीफ कमांडर को नियुक्त किया गया था । वो उस क्षेत्र के यातायात नियंत्रण का भी प्रभावित था । वहीं सत्ताईस मार्च की घटनाओं का जिम्मेदार हो सकता था । लेकिन उस ने अपनी रिपोर्ट में इन बातों पर ध्यान नहीं दिया । ये समस्या हो सकती थी । यू नो ऐसे अवरोध से नाखुश था । उसे पूरा यकीन था कि सुपरसोनिक धमाके वाली बात उसकी कल्पना का हिस्सा नहीं थी । दुर्घटनास्थल के नजदीक की जमीन पर मौजूद चश्मदीद गवाहों ने एक मजबूत साक्ष्य इस बात के समर्थन में प्रस्तुत किया लेकिन उसे भी रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया । इस तथ्य के अलावा की आवाजें मैंने स्वयं सुनी । तीन स्थानीय निवासियों से भी अलग अलग पूछताछ की गई । उन सभी ने कहा कि उन्होंने एक हवाई जहाज के अंतिम छोर से धुआं और आग निकलती देखी थी । फिर ये ऊपर बादलों में चला गया तो ये एक उल्टी प्रक्रिया थी । गैगरीन जमीन पर नीचे गिरा । लेकिन ये दूसरा विमान बडी तेजी से ऊपर चला गया । इन गवाहों की पहचान चार्ट को दिखलाया गया और उन सभी ने तुरंत नए सुखोई एसयू ग्यारह सुपरसोनिक जेट की रूपरेखा को ही चुना क्योंकि पुराने मिग पंद्रह जैसा कतई नजर नहीं आता था । यू नो कहता है हम जानते थे कि एस यू ग्यारह उस क्षेत्र में हो सकता था लेकिन वो तो दस हजार मीटर से अधिक ऊंचाई पर उडने के लिए जाने जाते हैं । उस रहस्यमय विमान की पिछले छोड से उठने वाले धुएं और अगर ऑफ्टर बर्नर की ओर इशारा करते हैं एस यू ग्यारह में आफ्टर बनना शामिल था जो की सापेक्षिक रूप से तकनीकी का नया भाग था । एक सुपर चार्जर जहाँ जेट का एक्जॉस्ट अतिरिक्त जोर पुरनदाहा हित होता है । विषेशकर तब जब विमान सुपरसोनिक गति या उसके परे के लिए बढ रहा हूँ । पूरे जोर पर एस यू ग्यारह ध्वनि की लगभग दोगुना गति हासिल कर सकता है । पुराना सबसोनिक पंद्रह में आपका बोहनर नहीं लगा था और इसके एक्जॉस्ट वास्को चलते हुए नहीं देखा जा सकता है । इस रहस्य में दूसरे वायुयान का साक्ष्य उस दिन ड्यूटी पर रहे । एक वायु यात्रा यातायात नियंत्रक द्वारा दिए गए बयान से स्पष्ट है । व्याचेस्लाव बाइक ओवर्स की ने आयोग को बतलाया कि उसने दो अन्य टारगेट को अपने नगर में देखा था । उनमें से एक पूर्व से आ रही थी । स्पष्ट रूप से ये संकेत लगातार दो मिनट तक उसकी स्क्रीन पर आता रहा । वस्तुतः दुर्घटना का समय बतलाना कठिन है । मॉस्को से सिस्मोमीटर में सवेरे दस बजकर मिनट पर एक संकेत दर्ज हुआ जो किसी एयरक्राफ्ट की टक्कर से मेल खाता है । लेकिन बाई कोस्की का कहना है, आज भी मुझे यकीन नहीं है कि गागरिन उस समय गिरा क्योंकि रडार पर हमारा उससे संपर्क लगभग इकतालीस मिनट पहले ही टूट गया था ना कि इकत्तीस मिनट पहले । फिर वो अपनी ही बात ये कहते हुए काटता है कि मिग का क्रोनो मीटर उस मलबे में पाया गया तो दस बजकर तीस मिनट पर ढेर हुआ । दुर्घटना के शीघ्र बाद बाई कोर्स की वह उस स्टेशन के अन्य नियंत्रकों को सुरक्षा के तहत रखा गया और उनके साक्ष्यों की बडी सावधानी से छानबीन की गई । आज वह कहता है, उस क्षेत्र में दो अन्य विमान थे । हमें उनके बारे में जानकारी थी । जनरलों ने हम सबको साथ इकट्ठा कर पूछताछ की और हम ने जो कुछ भी देखा उसकी जानकारी उन्हें दी । उसके बाद हम अलग कर दिए गए और एक सप्ताह से ज्यादा कार्य नहीं किया । लोगों से दूसरे विमान के बारे में पूछा गया और उन्होंने बताया कि उन्होंने उसे देखा था जैसा कि बाई कोस्की बतलाता है । रडार संकेत कि साक्ष्य जटिल और अस्पष्ट है । वो मानता है कि पता लगाने वाला उपकरण ऊंचाई, वार नजदीक वाले वायुयान की स्थिति का पता लगाने में सक्षम नहीं था । स्क्रीन पर रोशनी की चमक उभरती है या नहीं थी यदि विमान ऊंचाइयों में परिवर्तित करता है । ये रोशनी दस सेकंड के लिए गायब हो जाती है । अतः रडार स्क्रीन पर उभरने वाले संकेत सदा स्थिर नहीं रहते हैं । एयरबेस से चालीस किलोमीटर की दूरी पर संकेत पूरी तरह विलुप्त हो जाते हैं । यू नो कहता है बाई कोस्की की रिपोर्ट के रडार स्क्रीन पर कम से कम एक और संभव दो अतिरिक्त लक्ष्य आयोग द्वारा जांच में सम्मिलित नहीं किए गए । इस बात को उसके अनुभव का अभाव करती दिया गया । उसे कहीं दूर ले जाया गया और मुझे ठीक ठीक मालूम भी नहीं कि आगे उसका क्या हुआ । किसी भी स्थिति में इनमें से कोई भी बात बाद के प्रलेख एक रन में शामिल नहीं की गई । मेरे द्वारा इस जानकारी को मुहैया कराने दो धमाकों के विषय में और दूसरे विमान को देखने की बात बताने वाले लोगों से मेरी बातचीत जांच आयोग को पर्याप्त महसूस नहीं । इसीलिए पायलट और उसके अंतकरण के अलावा दूसरे विमान के विषय में और किसी को जानकारी नहीं है । वस्तुतः दूसरे में का पायलट फॅालो शो अप्रैल में सामने आया हूँ । उसने ये बात भी स्वीकारी की उस वक्त वास्तव में वो उस क्षेत्र में उडान भर रहा था । आर्ग्युमेंट टी आई फैक्टी नामक जर्नल को दिए गए साक्षात्कार में उसने बताया गैगरीन की मृत्यु का कारण ये था कि उसने लापरवाहीपूर्वक अनुचित जोखिम उठाया । वो और सिर्फ चीन उनकी सही फ्लाइट पैटर्न से अलग हो गए थे । खोलो शो में सुझाया की अपेक्षा कृत साफ मौसम की तलाश में दोनों पायलट अपने निर्धारित क्षेत्र से बाहर निकलने को सहमत हो गए ताकि वे कुछ आधारभूत कलाबाजियों के लिए प्रयास कर सकते हैं । उसने अपनी बात के कुछ पुख्ता प्रमाण नहीं दिए । शायद वो अपराधबोध से ग्रसित था । ट्रैफिक कंट्रोल का असली वो स्टेट जिसे संबंधित अधिकारियों से लंबी लडाई के बाद यू नो और लेक्चर को उसकी ने सन उन्नीस सौ छियासी में हासिल किया । दर्शाता है कि लापरवाही से विमान उडाना तो बहुत बडी बात है । सेरो जीने खराब मौसम के कारण बीस मिनट की प्रशिक्षण अवधि को पांच मिनट में ही खत्म कर दिया था । बाइको उसकी को याद है कि उस दिन से रोज इनकी रेडियो वाइस पर अंतिम बात ये थी उनका काम हो चुका है । उसने हमें वो सब कुछ बताया जो वो कर रहा था । उसने प्रशिक्षण का काम संपन्न कर लिया था । उसने करंट फ्लाइट जोन से बाहर आने की अनुमति मांगी, तभी रेडियो लिंक हो गई । कुल शोर द्वारा सिरोज इन पर लापरवाही का आरोप गलत प्रतीत होता है । लेकिन आज यू नो मिग पायलट के अनुदार साक्षी से कोई सरोकार नहीं रखता, क्योंकि उसे यकीन है कि ये पायलट और उसका सबसोनिक मिक पंद्रह पूरी तरह अन सबद्ध है और गागरिन की मौत से उसका कोई संबंध नहीं है । कोई भी मैं पंद्रह ऐसा सुपरसोनिक धमाका नहीं कर सकता था, जैसा उस दिन सुबह मैंने सुना यू नो और ब्लेड सर को बस की आज भी सुखोई एसयू ग्यारह जिसे अस्पष्ट रडार डेटा से कभी नहीं पहचाना जा सका, को ही असली दोषी मानते हैं । जो भी एस यू ग्यारह का पायलट था, यू नो का दृष्टिकोण उसके प्रति उदार हैं । यदि उस समय उस की पहचान हो गई होती तो गुस्से से आगबबूला भीडने चीर फाड कर उसके चिथडे उडा नहीं होता । एक और जानकारी को जारी कर देते हैं । दूसरी ओर यदि हम इसपर बुद्धिमानी से सोचे तो शायद नहीं । इससे कुछ हासिल नहीं होता है । गैगरीन की मौत का जिम्मेदार एक अकेला पायलट नहीं बल्कि तत्कालीन संपूर्ण तंत्र ही इसके लिए दोषी था । सारे तंत्र को तो अदालत में नहीं घसीटा जा सकता है । आप नैतिक रूप से इसका निर्णय तो कर सकती है लेकिन इसे यानी तंत्र को दंडित नहीं कर सकते । कोई भी तंत्र ये नहीं चाहता की उस पर निर्णय लिया जाए या उसे दंडित किया जाए । कुल मिलाकर जांच आयोग की रिपोर्ट से तकनीकी आंकडों के मोटे ग्रंट तैयार हुए हैं । लेकिन तथ्यों का संकलन कारणों के सही विश्लेषण पर आधारित नहीं था । सानू में आई जांच आयोग की रिपोर्ट का केंद्रीय निर्णय जानबूझकर एकांगी और अस्पष्ट रखा गया था । ये कारणों का कुल जोड था । इसका प्रमुख शोधलेख मौसमी गुब्बारे का प्रभाव सभी के लिए उपयुक्त था क्योंकि इसमें किसी का गुनाह नजर नहीं आता था । किसी को दोष नहीं दिया जा सकता था । कम से कम जमीन पर तो किसी को नहीं । जांच आयोग का एक मेहनत कर सदस्य गोथॅर्ड फॅस की की सोच से सहमत था की कोई सुपर सैनिक एयरक्राफ्ट गैगरीन और सिर जिनके मिक के करीब आकर टकरा गया था । आयोग की टालमटोल की प्रवृत्ति के बावजूद रुपए स्टोर ने साहस बटोरकर लुब्यांका में केजीवी हैड क्वाटर्स जाकर इस मामले पर पहले की । वो केजीबी के कर्नल ब्रुकलीन से मिला जिसने उस से जानना चाहा कि वह विमान की टक्कर की बात पर यकीन क्यों कर रहा था । रूबल्स टोकने रूसी शैली में झांसा देते हुए कहा, मैंने ऐसा इसलिए कहा कि यदि आयोग इसकी जांच नहीं कर पाया तो लोग सोच सकते हैं कि कुछ छिपाया जा रहा है । बेहतर है कि इस पहलू की जांच कर यह प्रदर्शित किया जाए कि इसका उन घटनाओं से कोई सरोकार नहीं था । कर्नल रुक इन उससे प्रभावित नहीं हुआ । उसकी मेज पर एक पतली सी फाइल रखी हुई थी जिसे उसने खोल दिया । ये राॅकी व्यक्तिगत फाइल कि कर्नल ने कहा तुम अनुशासन का बहुत सम्मान नहीं करते हैं । रोबोट तो जान गया कि वह युद्ध के समय की एक घटना का हवाला दे रहा था, जब स्टालिन गार्ड की एक उड्डयन इकाई जर्मन आक्रमण की वजह से बिल्कुल उचित आधार पर ज्यादा सुरक्षित पोजीशन लेने के लिए पीछे हट गई थी । बीस साल से अधिक अवधि तक इस घटना से कोई खास बात नहीं उठाई गई थी । लोग इन का मतलब ये था कि वो इस पुरानी बात को रुपए स्टोर के खिलाफ कार्यरता के सबूत के तौर पर पेश कर सकता था । मात्र इस आधार पर की वो उस पीछे हटने वाली यूनिट का सदस्य था । प्रवीन ने इस बात को बताने के लिए बहुत ज्यादा शब्दों का प्रयोग न करते हुए उसके सामने ये फाइल खोल कर रहे हैं ताकि वो इस की विषय वस्तु को बढकर स्वयं विमान टकराने वाली घटना को आगे ना बढाए । तो बस तो अनुमान से स्वीकार करते हुए कहता है बाद में इस बात को कुछ नहीं किया गया था । यू नो वो उसके निकटतम सहकर्मी इस विमान दुर्घटना से जुडा सत्य जानना चाहते थे । इसमें उन्हें पूरे दो दशक का समय लग गया । लेकिन सन उन्नीस सौ छियासी में बोहोत सर को उसकी ने एक नए जांच आयोग के लिए सफल लामबंदी की । उसने गोपनीय जांच पर लिखो ये वह मूल सहायक सामग्रियों तक अपनी पहुंच बनाए । किसी बीच यू नो आपको ये जानकर हैरानी हुई कि इन पहले खो को स्वयं उसके द्वारा सर उन्नीस सौ छियासी में लिखा गया था क्योंकि मौलिक जांच आयोग के इससे किसी और की लिखावट में थे । उन्हें दोबारा लिखा गया था और उसकी बातें गलत कर दी गई थी । यू नो के दोषारोपण से सुरक्षा विशेषज्ञ निकोलाई रुक इनको ज्यादा आश्चर्य नहीं होता है । मैं उस संभावना से इनकार नहीं कर सकता है । हमारे देश में नकली हस्ताक्षर बनाने में माहिर लोगों की कभी कमी नहीं नहीं इस कला में पहले से ही बहुत से लोग सिद्धहस्त ग्रोथ सर को । उसकी ने पाया कि सभी रडार ऑपरेटर इस विमान दुर्घटना के समय के प्रति उलझन में थे । सबसे पहले मैंने पाया कि फ्लाइट कंट्रोलर और गैगरीन के विमान के बीच वार्तालाप के टेपों में एक उत्सुक क्षण है । बात ये है कि गैगरीन का विमान क्रैश होने के बाद भी कंट्रोलर उसका काल चिन्ह छह दो पांच पर कॉल कर रहा था । कंट्रोलर की आवाज पूरी तरह शांत है । वो परेशान नहीं था लेकिन टेप के बयालीस मिनट से वो कुछ परेशान सा लगा । ये क्रैश होने के बारह मिनट बाद की बात है । वो तो सर को उसकी को कंट्रोलर की प्रतिक्रियाओं में लंबे विलंब को लेकर संदेह था । रडार उपकरण के मंदिर प्रत्युत्तर के बावजूद जब गागरीन का वायुयान जमीन पर गिरा, तब अंततः मिग पंद्रह की बत्ती बंद हो जानी चाहिए । लेकिन कंट्रोलरों को ये महसूस करने में पूरे बारह मिनट का समय लगा कि कहीं कुछ गडबड हुई थी । प्लोट सर को उसकी को ग्राउंड कंट्रोल प्रक्रिया और मौलिक आयोग की निराधार रिपोर्ट में कई दूसरी खामियाँ भी मिली । सन के दौरान ट्रैफिक कंट्रोल के रिकॉर्डों को निश्चित अंतराल में फोटोग्राफिक रूप में रखे जाने की व्यवस्था थी । इसके लिए कैमरों कि ऑटोमेटिक प्रणाली का प्रयोग किया जाता था । लेकिन सत्ताईस मार्च को चका लो बस की कैमरे काम नहीं कर रहे थे । इसलिए कंट्रोलर को क्रूड बैकप रिकॉर्डिंग सिस्टम का सहारा लेना पडा । वे रडार पर ट्रेसिंग पेपर रखकर उस पर चलती विविध स्थितियों को उतार लेते थे । वो तो सर को उसकी को पुराने और धुंधले कागज की सीट एक फोल्डर पर सावधानीपूर्वक रखी हुई मिली है जिसपर अंकित था गौर सामग्री यानी ऍम । इसे देखकर ऐसा लगता था मानो उसकी प्रासंगिकता को छिपाया जा रहा हूँ । मौलिक आयोग पर कार्य करते हुए ऐसी बहुत सी बातें हैं जिन्हें हमने विचार नहीं लिया । हम इस बात से सहमत हो गए कि साक्ष्य की दो खास पंक्तियां वाॅशिंग पेपर शीट से ये प्रकट होता है कि ट्रैफिक कंट्रोलर किसी और विमान से बात कर रहा था जिसे उसने ऍम दिया था । इस बात की अत्यधिक संभावना है कि गैगरीन का विमान दूसरे विमान के इतने नजदीक आ गया हूँ कि एक क्षण के लिए रडार स्क्रीन पर दोनों एक ही टारगेट नजर आया हूँ । जब गैदरिंग का विमान गोल्डन करने लगा तब भी दूसरा विमान स्क्रीन पर था । खराब मौसम दशाओं और ग्राउंड कंट्रोलरों के सूचना के अभाव के कारण दूसरे जेटके पायलटों को नियर मिस की जानकारी नहीं रही हूँ । लेकिन आज एस यू ग्यारह का एक सेवानिवृत्त अनुभवी पायलट इस बात पर शर्मिंदा हो जाता है । यूरी गागरिन की मौत शर्मनाक थी बल्कि इसलिए नहीं कि एक राष्ट्रीय हीरो की क्षति गडबड परिस्थितियों में हुई बल्कि उन खतरनाक खामियों के कारण जो तत्कालीन सोवियत मिलिट्री टेक्नोलॉजी में उभर कर सामने आएंगे, जाहिर है कि उनकी रडार प्रणाली एक ही समय पर वायुयान की ऊंचाई स्थिति को मापने में सक्षम नहीं था । नहीं, ये एक टारगेट से दूसरे टारगेट कि सकारात्मक रूप से पहचान कर पाती थी । ये बडी चौंकाने वाली बात थी । सैद्धांतिक रूप से कोई विदेशी जेट जो सोवियत एयरक्राफ्ट की सामान्य चिडियाओं और उडान पर्यटन की नकल करते हुए एक सोवियत एयरबेस या किसी अन्य सैनिक लक्ष्य से गुजरता तो उसे खतरनाक दुश्मन के रूप में नहीं पहचाना जा सकता था । जब किसानों सौ साठ में गैरी पावर्स के यु दो जासूसी यान को मात्र इसलिए मार गिराया गया था क्योंकि इसकी पहचान दुश्मन के यान के रूप में इसकी सोवियत उडान मार्ग में आ जाने के कारण कर ली गई थी ।

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