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1. Bachpan Ki Shair

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अपनी महान् उपलब्धि हासिल करने में मात्र दो घंटे ही लगे, लेकिन इसके पीछे वर्षों की मेहनत और कठिन साधना थी। मात्र 27 वर्ष की उम्र में सफलता का कीर्तिमान स्थापित करनेवाला यह महानायक मात्र 33 वर्ष की अल्पायु में संसार से विदा हो गया। अनजाने अंतरिक्ष को जानने की ललक ने यूरी गागरिन को अंतरिक्ष अभियान की ओर प्रवृत्त किया। और वह भी पहली बार अंतरिक्ष में जाने की कल्पना करना ही दिल को दहला देनेवाली थी। वहां पहुंच भी पाएंगे और पहुंच गए तो क्या जीवित धरती पर लौट पाएंगे? इन सभी सवालों से परे यूरी गागरिन ने अंतरिक्ष में पहुंचकर मानव जीवन को एक नई ऊंचाई दी और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों का मार्ग प्रशस्त किया। सुनें अद‍्भुत जिजीविषा और अप्रतिम साहस के धनी यूरी गागरिन की प्रेरणाप्रद जीवनी।
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आप सुन रहे हैं कुछ हुआ था किताब का नाम है प्रथम अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन जिसे लिखा है राकेश शर्मा ने आवाज आशुतोष की है । कुछ हुआ है सुने जो मनचाहे यूरी ऍफ गागरिन को इतिहास में प्रथम अंतरिक्ष यात्री के रूप में जाना चाहता है । सन उन्नीस सौ इकसठ में अचानक सुर्खियों में आने वाले इस व्यक्ति को अपनी महान उपलब्धि हासिल करने में मात्र दो घंटे ही लगे तो इसकी पृष्ठभूमि में वर्षों की बहादुरी और कटिबद्धता मात्र सत्ताईस वर्ष की आयु में सफलता का कीर्तिमान स्थापित करने वाले इस महानायक हूँ तैंतीस वर्ष की अल्पायु में संसार से विदा लेना पडा । इस छोटे से जीवन काल में उन्होंने अपने देश और मित्रों की भलाई की दिशा में कई जोखिमभरे कदम उठाया । यहाँ तक कि उनका बचपन भी रोंगटे खडे कर देने वाले बहादुरी के कारनामों से भरा पडा है । उनका जन्म नौ मार्च को मॉस्को से एक सौ साठ किलोमीटर पश्चिम में स्थित स्मोलेंस्क क्षेत्र के मशीनों नामक गांव में हुआ था । उनके पिता ऍम इवानोविच एवं हाँ ॅ एक स्थानीय संयुक्त कृषि फार्म में मजदूरी करते थे । यूरी का एक ढाई ऍम उनसे दस साल बडा था जबकि दूसरा भाई बोरिचा उनसे दो साल छोटा था । गरीबी के हालात के बावजूद परिवार संतुष्ट एवं खुश था । स्टालिन द्वारा निजी संपत्तियों को राजकीय स्वामित्व में रखे जाने के प्रारंभिक दौर की कठिनाइयों के दौरान इस परिवार को कई बार अपने मित्रों और पडोसियों से दूर भी जाना पडा हूँ । हाँ, अन्ना एक शिक्षित महिला थी । उन्होंने परिवार को काफी अनुशासित एवं धार्मिक वातावरण में ढल लगाना, पिता ॅ एक निष्ठावान पति एवं कठोर किंतु बच्चों के प्रति इसने रखने वाले पिता थे । स्टालिन के निजी उत्पादक साधनों को राजकीय स्वामित्व में परिवर्तित किए जाने वाले कार्यक्रम के मजबूती से जड जमा लेने के पश्चात अलेक्सई को फार्म के भवनों एवं सुविधाओं के रख रखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई । सन उन्नीस सौ की ग्रीष्म में जर्मनी की सेना ने सोवियत यूनियन की रेड आर्मी के खिलाफ कुछ कर दिया । ये कूच सोवियत यूनियन के तीन हजार किलोमीटर फ्रंट में बडी तेजी से किया गया । परिणामस्वरूप परिस्थितियां तेजी से बदलने लगी । कुछ सप्ताहों तक कायम हैरान कर देने वाली निष्क्रियता के पश्चात स्टालिन ने सोवियत सेना को हर जंग से पीछे हटने का आदेश जारी कर दिया । परिणामस्वरूप जर्मनी की सेना सोवियत में बहुत अंदर तक प्रवेश करती है । नाजियों की छोटी सी कामयाबी के बाद दोनों सेनाओं का संघर्ष जारी रहा और दोनों ओर से सैनिक बडी संख्या में मारे गए । स्मोलेंस्क क्षेत्र सीधे उस दिशा में पडता था जहाँ से होकर नाजी सेना पीछे हट रही थीं । परिणामतः गजासुर एवं कृषि नो समेत इसकी सभी बाहरी गांव भगदड के शिकार हो गए और उन पर कब्जा कर लिया गया था । अक्टूबर के अंत में जर्मन आर्टिलरी यूनिट ने मशीनों पर गोलीबारी शुरू कर दी । इन आक्रमणों से उत्पन्न परिस्थितियों का किशोर वही यूरी के मन पर गहरा प्रभाव पडा । एक हस्ते खेलते बालक की जगह अब वह गंभीर मनोवृति में रूपांतरित हो चुका है । जर्मन सेना से भयाक्रांत आस पास के क्षेत्रों से भागकर वहाँ पहुंचे शर्णार्थियों के लिए वो भोजन की व्यवस्था करके उन तक पहुंचाया करना स्वभाव से खुशमिजाज यूरी के चेहरे पर अब काम मुस्कुराहट देखने को मिलती थी । एक पायलट एवं अंतरिक्ष यात्री के रूप में बाद में विकसित होने वाली उनकी अनेक विशेषताओं के बीच इसी युद्धकाल के दौरान पड गई थी । मशीनों पर जर्मन सेना के कब्जा जमा लेने के साथ ही शुरू हुआ दरिंदगी, कान, नंगा नाच जर्मन सैनिक घरों के किवाड तोडकर लोगों को खींचकर बाहर निकालते और गोली से उडा देते हैं । कई बार कारतूस खर्च न करने के लिए लोगों को बंदूक के संगीनों से छेद कर वो पीटपीटकर मार डालते हैं । ये कत्लेआम का दौर शीत ऋतु की शुरुआत तक बदस्तूर जारी रहा है जिसकी क्रूरता के आगे उन्होंने स्वयं घुटने देखती हूँ । इसी दौरान यूरी और बोरिस भी अल्बर्ट नाम आके जर्मन सैनिक का को भाजन बनते बनते रह गए । अल्बर्ट को जर्मन वाहनों की डिस्चार्ज बैटरियों को संग्रहित करके उन्हें हमलावर शुद्ध पानी के प्रयोग से पुना चार्ज करने का काम सौंपा गया था । इधर यूरी वह बोरिस समेत गांव के बहुत से लडके कांच की बोतलों को तोडकर उन सडकों पर बिखेर देते थे जहाँ से जर्मन के सैन्य आपूर्ति वाहन गुजरते थे । तत्पश्चात सडक के किनारे लगी झाडियों में छिपकर टायरों के फटने से उन वाहनों के मजबूरन रुक जाने का नजारा देखा कर जाए । फॅस को ये विश्वास हो गया था कि बोरिस इन शैतान बच्चों में से एक था । एक दिन उसने बोर इसको यूरी के साथ खेलते हुए देखा । बेंच पर बैठे हुए उसने बोल इसको कुछ चॉकलेट देने का लालच देकर बुलाया । उसने चॉकलेट जमीन पर रख दिया ताकि बोरिस जब उन्हें उठाता तो वो उसके हाथ को पैरों तले कुचल सकता । जो ही बोर इसने चॉकलेट उठाने की कोशिश की । बिलबोर्ड ने जूते के कठोर तलवे से उसकी कोमल हथेली को इतनी पूरी तरह से कुछ लाभ की उसकी उंगलियों की चमडी ही निकल गए । इतना ही नहीं उसने बोर इसको पकडकर उसके स्कार्फ से फंदा बनाकर उसके नजदीक ही सेब के एक पेड पर फांसी के फंदे पर लटकाने की तरह चला दिया । उसी समय वो रिस्की माँ है ना वहाँ दौडती हुई आई और उस जर्मन सैनिक एलवर्ट से झगडने लगी । एल्बर्ट ने गुस्से में है ना पर गोली दागने के लिए राइफल उठाइए । तभी उसके किसी अधिकारी ने उसे आवाज देकर बुला लिया और खतरा टल गया । सौभाग्य वर्ष उस उन्नीस कार्ड से बने फंदे से बोर इसकी गर्दन पूरी तरह नहीं कर पाई । एलवर्ट के चले जाने के बाद फॅमिली ने बोर इसको पेड से नीचे होता है क्योंकि जर्मन सैनिकों ने गागरिन परिवार को उनके घर से खदेडकर पहले ही बेघर कर रखा था । इसलिए वे जमीन में गड्ढा खोदकर काम चलाऊ आश्रय तैयार कर रहे हैं । ऍम किसी आश्रय में आपने मरनासन्न बेटे बोर इसको लेकर आए और अथक प्रयासों से उसके जीवन की रक्षा की । इस घटना के बाद पुलिस इतना भयभीत हो गया था कि कई दिनों तक वो बाहर ही नहीं इस घटना के बाद जूरी एलवर्ट पर लगातार नजर रखने लगा । जब कभी भी एल्बर्ट कहीं जाता तो वो उसके द्वारा इकट्ठा की हुई टैंक की बैटरियों के ढेर पर चढकर उन्हें नष्ट करने के लिए उनमें मुट्ठी भर भर कर मिट्टी डाल देता हूँ या उनके रसायनों को एक दूसरे से मिला देता हूँ । एल्बर्ट जब वापस लौट कर आता है तो उसे बैटरियों में कहीं कोई खराबी नजर नहीं आती । सुबह गश्ती वाले टाइम ड्राइवर आकर उन बैटरियों को ले जाने के लिए आते और अल्बर्ट से नाजी शैली में अभिवादन करके उन बेटियों को ले जाते हैं । लेकिन शाम होते होते वो एल्बर्ट पर आज बबूला होकर वापस लौटते हैं क्योंकि वे बैटरियां बेकार होती नहीं । अधिकतर टैंक कमांडर ऐसे अवसर हुआ करते हैं इसलिए उनकी नाराजगी हर किसी पर भी । चाहे वो रूसी हो या जर्मन, बहुत भारी पडती थी । उन्हें शांत करना बहुत मुश्किल होता था । नतीजतन एलवर्ट को हमेशा उनके गुस्से का शिकार होना पडता था । ऐसे सब सरों की खिंचाई से तंग आकर एल्बर्ट गांव में यूरी की तलाश में बुरी तरह जुड गया । इस तलाश कार्य में उसे पैदल ही घूमना पडता था क्योंकि यूरी ने उसकी मिलिट्री कारके एक्जॉस्ट पाइप में आलू ठोस ठूँसकर भर दिए थे । एलबर्ट ने जमीन में खुदे हुए सभी आश्रयों में तमिल उसने ये ऐलान कर रखा था कि वो उसे देखते ही गोली मार देगा । लेकिन गिलबर्ट की ये इच्छा पूरी न हो सके क्योंकि एलवर्ट कि निष्क्रिय बैटरियों से तंग आकर उच्चाधिकारियों द्वारा उसे हटा दिया गया था । सन उन्नीस सौ की वसंत ऋतु के दौरान यूरी के बडे भाई वैलेंटीन और बहन जोया का एस एस गार्डों द्वारा अपहरण कर जर्मनी ले जाने के लिए उन्हें बच्चों की एक ट्रेन में डाल दिया गया । सबसे पहले उन्हें पोलैंड के डांस के शहर ले जाया गया जहां उन्हें लेबर कैंप में काम पर लगा दिया गया । जोया बताती है कि उसे सप्ताह में सैंकडों जर्मनवासियों के कपडे धोने पडते थे । उन्हें गुलामों की तरह रहना पडता था । डर की वजह से उन की स्थिति मृत्युदंड की सजा पाए कैदियों की भर्ती हो गई थी । उन्हें खंडर से मकानों में रखा गया था जो या अपने इस कटु अनुभव को सुनाते हुए कांपने लगती है । एक दिन वैलेंटीन और जोया लेबर कैंप से भाग निकले । रूसी सेना के आने के इंतजार में उन्होंने जंगल में रहकर दो सप्ताह बिताया । आखिरकार उनकी उम्मीद के मुताबिक रूसी सेना वहाँ पहुंच भी गई लेकिन अभी भी उनकी घर पहुंचने की इच्छा पूरी नहीं हो सकी । उन्हें बतौर स्वयंसेवी सेना के साथ रहना पडा । जोया को सेना के घोडों की देखभाल में लगा दिया गया । वेलेंटीन को सहायक सैनिक के रूप में इस्तेमाल किया गया जहाँ वो जल्द ही एंटी टैंक ग्रेनेड लॉन्चर एवं अन्य भारी हथियार चलाने में दक्ष हो गया । इस दौरान अन्ना ॅ को ये यकीन हो गया था कि वैलेंटीन और जोया अब इस दुनिया में नहीं रहे । ऍम जो पहले ही अस्वस्थ था जर्मन सैनिकों द्वारा बुरी तरह पिटाई किए जाने के कारण लंबे समय तक अस्पताल में दाखिल रहा हूँ और स्वास्थ्य लाभ होते ही उसी अस्पताल में अर्दली के रूप में कार्यरत हो गया । इस तरह उसमें शेष युद्धकाल किसी अस्पताल में रहते हुए गुजारा वहीं है ना के बाएं पैर में गहरा जख्म था हूँ क्योंकि ब्रूनो नामक एक जर्मन सार्जेंट द्वारा हंसी से वार करने के कारण हुआ था । जूरी ने अपनी माँ को बचाने के लिए उस सार्जेंट की आंखों में धूल झोंक दी थी । अंत तक नौ मार्च उन्नीस सौ चौवालीस को रूसी सेना द्वारा जर्मन सैनिकों को कृषि नौ से खदेड दिया गया अलेक्सई ने जर्मन सैनिकों द्वारा बिछाई गई लैंड माइन्स की जानकारी देकर इस कार्य में रूसी सेना की अहम मदद की । सन के अंत तक वेलेंटीन और जोया घर लौट सकें और अपने बिछडे माता पिता और भाइयों से मिल सकें । युद्ध के पश्चात गागरिन परिवार गजान नामक स्थान पर एक मकान बना कर रहने लगा । ली संदेह युद्ध के बाद का जीवन काफी कठिनाई भरा था । ब्रेस्ट से लेकर मॉस्को तक सब कुछ निश्चित नाबूत हो चुका था । मकान खंडहर में तब्दील हो गए थे । सारे के सारे मवेशी कहीं और चले गए थे या मारे जा चुके थे । गांव में ले देकर दो मकान ही क्षतिग्रस्त होने से बच गए । गजान के निवासियों ने वहाँ एक विद्यालय प्रारंभ कर दिया, जहां से लेना एलेक्जेंड्रो ना नामक एक युवती ने स्वेच्छा से अध्यापन कार्य की जिम्मेदारी संभाल यूरी वगोर्ं । इसने दूसरी सेना के एक पुराने मैनुअल से पढना सीखा । सन उन्नीस सौ छियालीस में लेट मिकाइलो बिच बेस्ट सब लोग नामक व्यक्ति नहीं । गणित और भौतिकी विषयों के अध्यापक के रूप में इस विद्यालय में अपनी सेवा देने शुरू । इस अध्यापक का यूरी के जीवन वक्त करियर में काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा । सन में यूरी ने मिखाइल ओ विच बिस पाव लोग की चर्चा एक ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार से करते हुए उनके सहयोग एवं मार्गदर्शन की सराहना की थी । बिस पाव लोग पानी में पिनों को तैराकर उनमें अपने बालों को जोडकर बिजली पैदा करता था । यूरी खासतौर से इस अध्यापक द्वारा प्रायः पहनी जाने वाली धुंधले रंग की वायु चालक यूनिक से प्रभावित होता हूँ । एक दो बार सोवियत याद लडाकू विमान और दो जर्मन लडाकू विमानों की जंगी मुठभेड में क्षतिग्रस्त होकर एक रूसी याद लडाकू विमान गांव के बाहर लगभग आधा किलोमीटर दूर पर एक दलदली जमीन पर गिरा । इसका एक लैंड इंग्लैंड जमीन पर टकराने से उठ गया था और प्रॉपेलर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया । पायलट की जान तो बच गई थी लेकिन उसका एक पैर बुरी तरह से चोटग्रस्त हो गया । देखते ही देखते ग्रामीणों की भीड वहाँ इकट्ठी हो गई । उन्होंने उसके घायल पैर में मरहमपट्टी की और उसके लिए दूध वह भोजन की व्यवस्था कुछ ही देर बाद एक दूसरा विमान बोली कारपोर्ट पीओ टू जमीन पर सुरक्षित उतरा । इसका वायु चालक इस विमान के हल्के प्लाइवुड निर्माण के कारण किसी कौन प्लांटर नाम से संबोधित करता था जिसकी वजह से ये उबड खाबड मैदानों वह खेतों में भी उतर सकता था । आज ये अपने दोहरे बचाव कार्य के मिशन पर था । पहला हो इसके वायु चालक को क्षतिग्रस्त याद विमान के पायलट के स्वास्थ्य की जानकारी लेनी थी । दूसरा ये सुनिश्चित करना कि ये लडाकू विमान कहीं जर्मन सैनिकों के हाथ न लग जाएगा जिसके लिए यह भी आवश्यक हो तो इसे नष्ट भी किया जा सकता था । उप घटनाओं को देख जूरी मंत्रमुग्ध रह गया । गांव के कुछ लडकों को उस स्थान पर भेजा गया जहाँ पीओ टू उतरा था । वे अपने साथ जितनी व्यवस्था हो सके उतना पेट्रोल भी लेकर आएंगे ताकि उस विमान को ईंधन दिया जा सके । पायलट के पास कुछ चॉकलेट बार थे जो उसने यूरिको देती है । यूरी ने उन्हें अन्य लडकों में बात किया । वो हवाईजहाजों के विषय में सोचते हुए कितना हो गया था कि उसने स्वयं के लिए एक टुकडा भी नहीं रखा । इन वायुयानों के गांव के निकट उतरने की घटना का जूरी के दिलो दिमाग पर बहुत गहरा असर पडा । रात में दोनों पायलट पीओ टू विमान के पास ही रहे हैं ताकि उस पर नजर रखी जा सके । अत्यधिक थकावट के कारण उन्हें नींद आ गई हैं । जब उनकी आंखें खुली तो उन्होंने यूरिको वहीँ खडे होकर अपनी ओर एकटक निहारते हुए ताया दिन के प्रकाश में क्योंकि क्षतिग्रस्त याद लडाकू विमान की निगरानी संभव नहीं थी इसलिए उन पायलटों ने उसे चला गया । तत्पश्चात दोनों पायलट पीओ टू में सवार होकर आसमान में ओझल हो गए जबकि यूरी वहीँ खडे रहकर कुछ जलते विमान से उठते कालेधन की ओर एकटक निहार रहा था ।

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अपनी महान् उपलब्धि हासिल करने में मात्र दो घंटे ही लगे, लेकिन इसके पीछे वर्षों की मेहनत और कठिन साधना थी। मात्र 27 वर्ष की उम्र में सफलता का कीर्तिमान स्थापित करनेवाला यह महानायक मात्र 33 वर्ष की अल्पायु में संसार से विदा हो गया। अनजाने अंतरिक्ष को जानने की ललक ने यूरी गागरिन को अंतरिक्ष अभियान की ओर प्रवृत्त किया। और वह भी पहली बार अंतरिक्ष में जाने की कल्पना करना ही दिल को दहला देनेवाली थी। वहां पहुंच भी पाएंगे और पहुंच गए तो क्या जीवित धरती पर लौट पाएंगे? इन सभी सवालों से परे यूरी गागरिन ने अंतरिक्ष में पहुंचकर मानव जीवन को एक नई ऊंचाई दी और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों का मार्ग प्रशस्त किया। सुनें अद‍्भुत जिजीविषा और अप्रतिम साहस के धनी यूरी गागरिन की प्रेरणाप्रद जीवनी।
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